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फास्टैग एनुअल पास का बढ़ा इस्तेमाल, अब 19% टोल ट्रैफिक इसी से गुजर रहा

फास्टैग एनुअल पास का बढ़ा इस्तेमाल, अब 19% टोल ट्रैफिक इसी से गुजर रहा
  • PublishedJuly 1, 2026

देशभर में हाईवे पर फास्टैग एनुअल पास का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। Reserve Bank of India (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, अब कुल टोल पास ट्रैफिक में 19 प्रतिशत हिस्सेदारी फास्टैग एनुअल पास की हो गई है। यह पिछले छह महीनों में करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, क्योंकि दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा लगभग 13 प्रतिशत था।

आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में देशभर के टोल प्लाजा से कुल 44.4 करोड़ वाहन यात्राएं दर्ज की गईं। इनमें से 8.4 करोड़ यात्राएं एनुअल पास के जरिए हुईं।

बाकी 36 करोड़ यात्राओं से टोल कलेक्शन के जरिए कुल 7,214 करोड़ रुपये की वसूली हुई। तुलना करें तो जून 2025 में फास्टैग के जरिए 38.6 करोड़ ट्रिप्स दर्ज हुई थीं, जिससे 6,973 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था।

इस तरह एक साल में ट्रिप्स की संख्या में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन राजस्व वृद्धि केवल 3.5 प्रतिशत रही। इसकी मुख्य वजह एनुअल पास के बढ़ते इस्तेमाल को माना जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एनुअल पास की वजह से टोल कलेक्शन पर कुल मिलाकर लगभग 10 प्रतिशत का असर पड़ा है। हालांकि एनुअल पास से मिलने वाले राजस्व से इसकी कुछ भरपाई हो रही है, जिससे वास्तविक नुकसान करीब 7 से 8 प्रतिशत के बीच रह गया है।

यह फास्टैग एनुअल पास 15 अगस्त को लॉन्च किया गया था, जिसकी कीमत 3,075 रुपये रखी गई। इसके तहत वाहन चालक एक साल में 200 हाईवे ट्रिप्स कर सकते हैं।

यानि प्रति यात्रा खर्च लगभग 15.40 रुपये पड़ता है, जो सामान्य टोल शुल्क की तुलना में काफी कम है।

यह सुविधा फिलहाल सिर्फ निजी यात्री वाहनों के लिए उपलब्ध है, जो देश के कुल टोल ट्रैफिक का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हैं। वहीं टोल से होने वाले कुल राजस्व में इनकी हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है।

दूसरी तरफ ट्रक, बस और वैन जैसे व्यावसायिक वाहनों को सामान्य दरों पर अधिक टोल शुल्क देना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से हाईवे या एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए फास्टैग एनुअल पास काफी सुविधाजनक और किफायती विकल्प बनकर उभर रहा है।

देशभर के ज्यादातर टोल प्लाजा पर फास्टैग अनिवार्य होने के बाद यह सुविधा ज्यादा यात्रा करने वाले वाहन चालकों को समय बचाने और खर्च कम करने में मदद दे रही है।