देश में कोयले का रिकॉर्ड भंडार, उत्पादन और आपूर्ति खपत से ज्यादा

देश में इस वर्ष कोयले का उत्पादन और आपूर्ति खपत से अधिक बनी हुई है, जिसके चलते तापीय ऊर्जा संयंत्रों और कोयला खदानों में कोयले का भंडार रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, गैर-विनियमित क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत अधिक रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की खदानों में कोयले का भंडार 1 अप्रैल 2025 को 106.78 मीट्रिक टन था, जो 9 मार्च 2026 तक बढ़कर 121.39 मीट्रिक टन हो गया है। इसके अलावा सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) की खदानों में लगभग 6.07 मीट्रिक टन कोयला मौजूद है, जबकि कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों में 15.12 मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध है। वहीं करीब 14 मीट्रिक टन कोयला परिवहन के लिए तैयार है।
इस तरह देश में कोयले का कुल भंडार अब तक के उच्चतम स्तर 156.58 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यह भंडार बिजली संयंत्रों में पहले से उपलब्ध कोयले के अतिरिक्त है। 9 मार्च 2026 तक बिजली संयंत्रों में लगभग 54.05 मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध है, जो वर्तमान खपत दर के अनुसार लगभग 24 दिनों के लिए पर्याप्त है।
कुल मिलाकर देश में उपलब्ध कोयले का भंडार करीब 210 मीट्रिक टन है, जो लगभग 88 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, देश में कोयले का उत्पादन लगातार समान गति से जारी है, जिससे खदानों में भंडार बढ़ रहा है। रेलवे के सहयोग से उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुसार आपूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था की जा रही है।
मंत्रालय ने कहा कि नीतिगत सुविधाओं, प्रदर्शन की निगरानी और हितधारकों के साथ समन्वय के जरिए स्थिर और प्रदर्शन-आधारित वातावरण बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि देश में कोयले की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।
