जन-जन के पीएम : आर्थिक महाशक्ति की उड़ान, नए भारत का स्वर्णिम निर्माण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी एवं निर्णायक शासन में भारत केवल उनके नेतृत्व का उत्सव नहीं मना रहा, बल्कि एक ऐसी आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है, जो वैश्विक मंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ रहा है। एक दशक पहले, भारत की अर्थव्यवस्था चुनौतियों से जूझ रही थी, लेकिन आज यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ तीसरे स्थान पर पहुंचने की राह पर है। आत्मनिर्भर भारत का सपना अब हकीकत बन रहा है। 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य अब दूर नहीं। यह कहानी केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि उस आत्मविश्वास की है, जो हर भारतीय के दिल में जागा है। यह कहानी है उस भारत की, जहां हर गली, हर गांव और हर शहर में आत्मनिर्भरता की लहर दौड़ रही है। यह कहानी है पीएम मोदी की दूरदर्शिता, सुधारवादी नीतियों और वैश्विक कूटनीति की, जिसने भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
आर्थिक रफ्तार: विश्व में अग्रणी
2024-25 में भारत ने 6.5% की वास्तविक जीडीपी वृद्धि हासिल की, जो इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाती है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में 7.8% की वृद्धि होने की उम्मीद है , जो एक वर्ष पहले 6.5% थी। यह सेवा क्षेत्र की मजबूती, बढ़ते घरेलू उपभोग और बेहतर उपभोक्ता भावना का परिणाम है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेज वृद्धि ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत किया है। पिछले दशक में भारत का नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद ₹106.57 लाख करोड़ से तीन गुना बढ़कर ₹331.03 लाख करोड़ हो गया।
आत्मनिर्भर भारत: वैश्विक व्यापार का नया सितारा
पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण ने वैश्विक व्यापार में भारत को नई पहचान दी। 2013-14 में 468 बिलियन डॉलर का निर्यात 2024-25 में 76% बढ़कर 825 बिलियन डॉलर हो गया। इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स ने इस वृद्धि को गति दी। सेवा निर्यात 158 बिलियन से बढ़कर 387 बिलियन डॉलर हो गया। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) 1.05 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा, जिसमें 2024-25 में 27% की वृद्धि दर्ज की गई। डिजिटल क्रांति ने भी भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। यूपीआई ने 2024 में कुल 172 बिलियन लेनदेन किए एवं जुलाई 2025 में, यूपीआई ने पहली बार एक महीने में 19 बिलियन से अधिक लेनदेन दर्ज करते हुए एक और उपलब्धि हासिल की, जिसने भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था का पावरहाउस बनाया। 2024-25 में जीएसटी संग्रह ₹22.08 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो आर्थिक स्थिरता का प्रतीक है। 2024-25 में, पूंजीगत व्यय ₹10.52 ट्रिलियन था, जो संशोधित अनुमानों से अधिक था। अकेले वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में 81 अरब डॉलर का ऐतिहासिक विदेशी निवेश हुआ।
रोजगार और समावेश: हर भारतीय का सशक्तिकरण
मोदी सरकार ने रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी। पिछले दशक में 17 करोड़ नौकरियां सृजित हुईं, और बेरोजगारी दर 6% से घटकर 3.2% हो गई। श्रम बल भागीदारी दर 49.8% से बढ़कर 60.1% हो गई। खेती और सेवा क्षेत्र में क्रमशः 19% और 36% रोजगार वृद्धि दर्ज की गई। मेक इन इंडिया ने भारत को मोबाइल विनिर्माण का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बनाया, जिसमें 300 से अधिक कारखाने स्थापित हुए। स्किल इंडिया मिशन ने 6 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित किया, जिससे भारत का कार्यबल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले, और एक नया मध्यम वर्ग उभरा, जो भारत की आर्थिक गतिशीलता का प्रतीक है।
योजनाएं जो बदल रही हैं भारत की तस्वीर
मोदी सरकार की योजनाएं भारत के आर्थिक उत्थान का आधार बनी हैं। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ने 14 क्षेत्रों में ₹1.76 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित किया, जिससे निर्यात और रोजगार बढ़े। डिजिटल इंडिया ने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को 25 करोड़ से 97 करोड़ तक पहुंचाया, जिससे भारत दुनिया की तीसरी सबसे डिजिटल अर्थव्यवस्था बना। प्रधानमंत्री जन धन योजना ने 56 करोड़ बैंक खाते खोले, जिनमें 55% महिलाओं के हैं, जिससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला। मेक इन इंडिया ने रेलवे, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत को वैश्विक हब बनाया। पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति ने बुनियादी ढांचे को मजबूत किया, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग 91,287 किमी से बढ़कर 1,46,204 किमी हो गए। पीएम विकसित भारत रोजगार योजना 2025-27 तक 3.5 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार सृजित करेगी। विदेश व्यापार नीति 2023-28 और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने व्यापार और पारदर्शिता को बढ़ाया।
जीएसटी सुधार 2025: कम टैक्स, बड़ा रिलीफ
हाल ही में जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक ने अगली पीढ़ी के सुधारों को मंजूरी दी, जिसमें दो-स्लैब (5% और 18%) के साथ दर युक्तिकरण, आम आदमी, किसानों, स्वास्थ्य और श्रम-केंद्रित उद्योगों के लिए दरों में कटौती शामिल है। 22 सितंबर 2025 से प्रभावी, ये सुधार सरल, निष्पक्ष और विकास-उन्मुख जीएसटी संरचना सुनिश्चित करेंगे, जिससे जीवन और व्यवसाय दोनों में आसानी होगी।
वैश्विक मंच पर भारत की साख
मज़बूत व्यापक आर्थिक बुनियाद के सहारे, भारत की विकास यात्रा वैश्विक सुर्खियों में बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और संयुक्त राष्ट्र ने 2025-26 के लिए 6.3% से 6.8% की वृद्धि का अनुमान लगाया है। एसएंडपी ग्लोबल ने 18 साल बाद भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को ‘बीबीबी-‘ तक अपग्रेड किया, जो भारत की वित्तीय स्थिरता का प्रमाण है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने 2025 में 6.3% और 2026 में 6.4% की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी इसका अनुसरण किया और 2025 और 2026 दोनों के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अपने पूर्वानुमान को संशोधित कर 6.4% कर दिया।
