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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नामांकन में 27 फीसदी की वृद्धि, 8 वर्षों में 23.22 करोड़ से अधिक दावे मंजूर

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नामांकन में 27 फीसदी की वृद्धि, 8 वर्षों में 23.22 करोड़ से अधिक दावे मंजूर
  • PublishedMarch 6, 2024

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के अनुसार पिछले 8 वर्षों में किसानों ने प्रीमियम के अपने हिस्से के रूप में लगभग 31,139 करोड़ रुपये चुकता किये हैं, जिसके आधार पर उन्हें 1,55,977 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान दावे के रूप में किया गया है। इस प्रकार, किसानों द्वारा भुगतान किए गए प्रत्येक 100 रुपये के प्रीमियम के लिए उन्हें लगभग 500 रुपये दावे के रूप में दिये गये हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के कार्यान्वयन के पिछले 8 वर्षों में 56.80 करोड़ किसानों के आवेदन पंजीकृत किए गए हैं और 23.22 करोड़ से अधिक किसान आवेदकों के दावे मंजूर किये गए हैं। वर्ष 2023-24 के दौरान, अब तक योजना के तहत नामांकित किसानों की संख्या में 27% की वृद्धि हुई है। साथ ही वित्त वर्ष 2023-24 में योजना के तहत बीमित कुल किसानों में से 42% गैर-ऋणी किसान हैं।

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के अनुसार पिछले 8 वर्षों में किसानों ने प्रीमियम के अपने हिस्से के रूप में लगभग 31,139 करोड़ रुपये चुकता किये हैं, जिसके आधार पर उन्हें 1,55,977 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान दावे के रूप में किया गया है। इस प्रकार, किसानों द्वारा भुगतान किए गए प्रत्येक 100 रुपये के प्रीमियम के लिए उन्हें लगभग 500 रुपये दावे के रूप में दिये गये हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) एक मांग आधारित योजना है और राज्यों के साथ-साथ किसानों के लिए भी स्वैच्छिक है। वर्ष 2021-22 के दौरान किसान आवेदनों की संख्या में क्रमशः 33.4 प्रतिशत और 2022-23 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रीमियम के मामले में वैश्विक स्तर पर तीसरी सबसे बड़ी बीमा योजना है, जो 2016 में शुरू की गई थी। इस योजना के अंतर्गत किसानों को अप्रत्याशित घटनाओं से होने वाली फसल हानि या क्षति से सुरक्षा मिलती है। PMFBY एक केंद्रीय योजना है, इसलिए इसके तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को न कोई आवंटन किया जाता है और न कोई धनराशि जारी की जाती है।

योजना के परिचालन व कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए हितधारकों के परामर्श से योजना की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है। कृषि और परिवार कल्याण विभाग नियमित रूप से PMFBY के कार्यान्वयन की निगरानी करता है, जिसमें हितधारकों के साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंस, बीमा कंपनियों/राज्यों के साथ पारस्परिक बैठक आदि के माध्यम से दावों का समय पर निस्तारण आदि शामिल है।