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इस्लामाबाद - भारत की तमाम आपत्तियों की अनदेखी करते हुए पाकिस्तान और चीन ने गुलाम कश्मीर के रास्ते बस सेवा की शुरुआत कर दी। यह बस पाकिस्तान के लाहौर से चीन के शिनजियांग प्रांत के काशगर के बीच चलेगी। सोमवार की रात लाहौर के गुलबर्ग से यह बस अपनी पहली यात्रा पर रवाना हुई।
60 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के तहत सड़क संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से यह बस सेवा शुरू की गई है। भारत ने गुलाम कश्मीर के रास्ते बस सेवा शुरू करने पर चीन और पाकिस्तान से कड़ी आपत्ति जताई थी। चीन के विदेश मंत्रालय ने बस सेवा का बचाव करते हुए कहा था कि इस्लामाबाद के साथ उसके सहयोग का क्षेत्रीय विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।
चीन ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस बस सेवा के शुरू होने से कश्मीर पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। जबकि, पाकिस्तान ने भारत की आपत्ति को खारिज कर दिया था। दोनों देशों के बीच 2015 में सीपीईसी योजना शुरू हुई थी। इसके तहत दोनों देशों के बीच सड़क और रेल संपर्क स्थापित करना भी शामिल है।
बस के लाहौर से काशगर पहुंचने में 36 घंटे लगेंगे। लाहौर से यह बस शनिवार, रविवार, सोमवार और मंगलवार को चलेगी। जबकि काशगर से यह बस मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को रवाना होगी। एक तरफ से भाड़ा 13000 रुपये है, जबकि एक साथ आने-जाने का टिकट लेने पर 23000 रुपये लगेंगे।


लॉस एंजिलिस - अमेरिका के एरिजोना प्रांत के लिशफील्ड पार्क शहर में अपना कमरा साफ करने के लिए कहने पर 11 साल के एक बच्चे ने गोली मारकर दादी की जान ले ली। बाद में उसने खुद को भी गोली मार ली।
घटना बीते शनिवार की है। बच्चा अपने दादा-दादी के संरक्षण में उनके साथ ही रहता था। बच्चे के दादा ने पुलिस को बताया कि उसे कई बार अपना कमरा साफ करने के लिए कहा गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। बार-बार सफाई के लिए कहे जाने से नाराज होकर उसने उस वक्त दादी के सिर में गोली मार दी जब वह अपने पति के साथ टीवी देख रही थीं।
पुलिस के अनुसार, गोली चलने के बाद दादा पहले पोते को पकड़ने के लिए दौड़े फिर मुड़कर पत्नी की मदद करने आ गए। इस बीच, बच्चे ने खुद को गोली मारकर जान दे दी। पुलिस ने बताया कि पिस्तौल बच्चे के दादा की थी।

 


संयुक्त राष्ट्र - संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को तीन माह के दौरान यौन उत्पीड़न की 64 नई शिकायतें मिली हैं। ये शिकायतें दुनियाभर में यूएन के विभिन्न कार्यालयों, एजेंसियों और सहयोगी संगठनों से जुड़ी हैं। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजेरिक ने सोमवार को यहां बताया कि ये शिकायतें इस साल एक जुलाई से 30 सितंबर के बीच मिलीं।
इनमें छह शांतिरक्षक सैनिकों के अलावा यूएन एजेंसियों व संस्थाओं के 33 कर्मचारियों और गैर यूएन संगठनों से जुड़े 25 लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। सभी आरोप अभी पूरी तरह सत्यापित नहीं हुए हैं। कुछ मामलों में प्रारंभिक जांच चल रही है। इन आरोपों में से 30 इसी साल के हैं।
15 मामले 2015 के दौरान घटित हुए, जबकि 19 आरोपों में तारीख अज्ञात है। दुजेरिक ने कहा कि ये शिकायतें यूएन महानिदेशक एंटोनियो गुतेरस की पहल का नतीजा हैं। उन्होंने इस तरह के मामलों में पारदर्शिता की शुरुआत की है। तीन माह के दौरान मिली यौन उत्पीड़न की शिकायतों में 77 लोग पीड़ित बताए गए हैं। इनमें 42 महिलाएं, 24 लड़कियां, दो पुरुष और एक बालक है। कुछ पीड़ितों की उम्र और लिंग जाहिर नहीं किया गया है।


वाशिंगटन - तमाम मुद्दों के बीच इस बार अमेरिका के मिड-टर्म चुनाव कुछ अलग वजह से भी चर्चा में हैं। यह वजह है भारतीय समुदाय की बढ़ती दावेदारी। मिड-टर्म चुनावों के लिए मंगलवार को मतदान होना है, जिसमें प्रतिनिधि सभा और सीनेट से प्रांतीय विधायिकाओं तक कई सीटों पर भारतवंशियों की दावेदारी मजबूत लग रही है। जहां अमेरिका में प्रवासियों को लेकर तनातनी चरम पर है, वहीं इन चुनावों में भारतीय मूल के करीब 100 अमेरिकी दांव लगा रहे हैं।
अमेरिका की आबादी में बमुश्किल एक फीसद हिस्सेदारी वाले भारतीय समुदाय की इतनी बड़ी दावेदारी को इस वर्ग की बढ़ती महत्वाकांक्षा का प्रतीक माना जा रहा है। भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा, ‘अमेरिका की राजनीति में भारतीय-अमेरिकियों की संख्या बढ़ते देखना अद्भुत है।’ राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होने के कारण इन चुनावों को मिड-टर्म कहा जाता है। इनके नतीजों से राष्ट्रपति की सत्ता पर सीधा असर नहीं पड़ता लेकिन प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स) और सीनेट में पार्टी की सीटें बहुमत से कम हो जाने की स्थिति में राष्ट्रपति को फैसले लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
‘समोसा कॉकस’ पर रहेगी निगाह
अमेरिकी संसद में इस समय पांच भारतवंशी हैं। इनमें एमी बेरा, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति और प्रमिला जयपाल प्रतिनिधि सभा तथा कमला हैरिस सीनेट सदस्य हैं। इस समूह को ‘समोसा कॉकस’ कहा जाता है। सालभर पहले राजा कृष्णमूर्ति ने एक कार्यक्रम में इस समूह के लिए ‘समोसा कॉकस’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस कॉकस में से एमी बेरा तीन बार चुनाव जीतकर चौथी बार मैदान में हैं। वहीं रो खन्ना, कृष्णमूर्ति और प्रमिला जयपाल दूसरी बार ताल ठोक रहे हैं। जानकारों का कहना है कि चारों भारतीय इस बार भी आसानी से चुनाव जीत जाएंगे।
कुछ और बड़े दावेदार
इन चारों के अलावा सात और भारतवंशी हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में चुनकर आने के लिए मैदान में हैं। इनमें हिरल टिपिरनेनी, प्रिस्टन कुलकर्णी और आफताब पुरेवल का दावा मजबूत माना जा रहा है। इनके अलावा सफल उद्यमी शिव अय्यदुरई सीनेट के लिए लड़ रहे हैं। निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रहे अय्यदुरई का मुकाबला डेमोक्रेट एलिजाबेथ वॉरेन से है। इन सबके अतिरिक्त अनाधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, प्रांतीय व स्थानीय स्तर पर चुनाव मैदान में करीब 100 भारतीय-अमेरिकी किस्मत आजमा रहे हैं।
कई नए चेहरों की उम्मीद
एरिजोना से लेकर टेक्सास, ओहायो, मिशिगन और अन्य क्षेत्रों में भारतवंशियों के लिए प्रचार कर चुके रिचर्ड वर्मा का कहना है कि इस बार प्रतिनिधि सभा और प्रांतीय विधायिकाओं में कई नए भारतीय चेहरे दिख सकते हैं।
दो करोड़ लोग कर चुके हैं मतदान
चुनाव की तारीख से पहले ही दो करोड़ से ज्यादा लोग अपने मत का प्रयोग कर चुके हैं। समाचार चैनल सीएनएन ने चुनाव से पहले मतों की गिनती की जिम्मेदारी संभालने वाली डाटा फर्म कैटलिस्ट के हवाले से यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक एरिजोना, फ्लोरिडा, नेवादा, जॉर्जिया, टेक्सास, टेनेसी और मोंटाना में सबसे ज्यादा मतदान हुआ है।
अमेरिका में ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अर्ली वोटिंग यानी मतदान की तारीख से पहले ही मत डालने की सुविधा दी गई है। अलग-अलग राज्यों में इसकी अलग-अलग व्यवस्था है। कुछ राज्यों में वजह बताते हुए पहले मतदान किया जा सकता है, वहीं कुछ राज्य बिना वजह पूछे ही पहले मतदान की सुविधा दे देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जॉर्जिया में करीब 13 लाख लोग वोट डाल चुके हैं, जबकि टेक्सास में 20 लाख लोगों ने अब तक वोट डाला है। मोंटाना में 2,20,000 लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके हैं। पहले पड़ने वाले मतों के आधार पर आगे चल रहे उम्मीदवारों का भी अनुमान लगता है। हालांकि कई बार अंतिम नतीजा इससे इतर निकलता है।


नई दिल्ली - खाड़ी देशों में पिछले छह वर्षों में हर रोज लगभग 10 भारतीयों की मौत हुई है। यह बात सूचना के अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी के आधार पर एक स्वयंसेवी समूह ने कही। वर्ष 2012-2017 के बीच देश को विश्वभर से जो धनराशि प्राप्ति हुई उसमें खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों का योगदान आधे से अधिक है। विदेश मंत्रालय ने 26 अगस्त 2018 को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि वर्ष 2017 में छह खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 22.53 लाख थी।
कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के वेंकटेश नायक ने विदेश मंत्रालय से बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में एक जनवरी 2012 से मध्य 2018 तक हुई भारतीय मजदूरों की मौत का ब्योरा मांगा था। उन्होंने बताया कि बहरीन, ओमान, कतर और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावासों ने ब्योरा उपलब्ध करा दिया, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात स्थित दूतावास ने सूचना देने से इनकार कर दिया। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध ब्योरे का संदर्भ दिया, लेकिन यह 2014 से था।
नायक ने कहा, भारत को विश्वभर से 410.33 अरब डॉलर की राशि मिली। इसमें खाड़ी देशों से मिलने वाली राशि 209.07 अरब डॉलर थी। उन्होंने कहा कि मौतों से संबंधित ब्योरे में अंतर को पाटने के लिए उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में सवालों के जवाब में दिए गए ब्योरे का इस्तेमाल किया। नायक ने कहा, उपलब्ध ब्योरा संकेत देता है कि 2012 से मध्य 2018 तक छह खाड़ी देशों में कम से कम 24,570 भारतीयों की मौत हुई। यदि कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात के समूचे आंकड़े उपलब्ध होते तो मौतों की संख्या ज्यादा होती। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में हर रोज 10 से ज्यादा भारतीय मजदूरों की मौत हुई।


सैन फ्रांसिस्को - फेसबुक ने सोमवार को कहा कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर करीब 30 अकाउंट और तस्वीरें साझा करने वाली साइट इंस्टाग्राम पर 85 खातों को अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में हस्तक्षेप की आशंका और उनके तार विदेशी संस्थाओं से जुड़े होने की चिंताओं के बीच ब्लॉक कर दिया है।
फेसबुक ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा, ''रविवार शाम को अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसी ने हमसे उस ऑनलाइन गतिविधि के बारे में संपर्क किया जिसके बारे में हाल ही में पता चला था और जो उन्हें लगता है कि विदेशी संस्थाओं से जुड़ी हो सकती है।
उसने कहा, ''हमने अपनी बहुत ही शुरूआती जांच में अब तक करीब 30 फेसबुक अकाउंट और 85 इंस्टाग्राम अकाउंट ऐसे पाये हैं जो समन्वित अप्रामाणिक रवैये में लिप्त हो सकते हैं। फेसबुक के मुताबिक, ''हमने तत्काल इन खातों को ब्लॉक कर दिया और विस्तार से इनकी जांच कर रहे हैं।

 

वाशिंगटन - अमेरिका में भारतीय दूतावास में पहली बार दिवाली का पर्व बनाया गया। भारत के राजदूत नवतेज सरना और उप विदेश मंत्री जॉन सुलिवान दिवाली समारोह के मुख्य अतिथि थे। भारत और अमेरिका के शीर्ष राजनयिकों ने मिलकर सोमवार को यहां रोशनी के पर्व दिवाली का जश्न मनाया। इस दौरान विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच साझेदारी की मजबूती की झलक देखने को मिली। सुलिवान ने कहा…
जकार्ता - लॉयन एयर के हादसाग्रस्त विमान के ब्लैक बॉक्स में दर्ज आंकड़ों के अनुसार पिछली चार उड़ान में भी वायु गति सूचक में गड़बड़ी थी। जांचकर्ताओं ने सोमवार को यह खुलासा किया।राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष सोर्जेंटो त्जाहजोनो ने कहा कि 29 अक्तूबर को हादसाग्रस्त हुए विमान समेत पिछली चार उड़ानों में इस तरह की गड़बड़ी थी। जकार्ता हवाई अड़्डे से उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद विमान…
लंदन - ब्रिटिश सरकार ने अपने सशस्त्र बलों में सैन्यकर्मियों की कमी को दूर करने के लिए सोमवार को भारत समेत राष्ट्रमंडल देशों के आवेदकों के लिए मापदंडों में छूट देने की घोषणा की। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने संसद के समक्ष मंत्रालय के लिखित बयान में प्रस्ताव रखा जिसमें देश की थलसेना, वायुसेना और नौसेना में आवेदन के लिए जरूरी ब्रिटेन में कम से कम पांच साल के प्रवास…
न्यूयॉर्क - अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग को सम्मान में दिया गया प्रतीक चिह्न यहां एक नीलामी में साढ़े चार लाख डॉलर (करीब 3.5 करोड़ रुपये) में बिका। नील चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री थे।नील आर्मस्ट्रांग 20 जुलाई, 1969 को अपोलो मिशन 11 से चंद्रमा पर पहुंचे थे। उनके साथ इस मिशन पर दो अन्य अंतरिक्ष यात्री एडविन एल्डि्रन और माइकल कोलिंस भी गए थे। अपोलो मिशन…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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