दुनिया

दुनिया (5106)

नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) अब नए विवाद में हैं। इस बार विवाद की वजह अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर उनकी दीवार खड़ी करने की जिद बनी है। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि देश के अंदर भी ट्रंप को काफी विरोध का सामना करना पड़ रहा है, बावजूद राष्ट्रपति अपने फैसले से टस से मस होने को तैयार नहीं हैं। जानें क्या है अमेरिकन-मेक्सिन वॉल का पूरा विवाद और क्यों जिद पर अड़े हैं अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप?
चुनावी वादा था दीवार;-यूएस-मेक्सिको वॉल को लेकर डोनाल्ड ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह इस मुद्दे पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे। दरअसल अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर दीवार खड़ी करने का उनका ये फैसला, 2016 के उनके चुनावी वादे में शामिल था। ट्रंप ने मंगलवार को इस संबंध में एक ट्वीट भी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि डेमोक्रेट्स (विपक्षी दल) कंक्रीट वॉल बनाने को तैयार नहीं है। वह इसकी जगह फेंसिंग के लिए कह रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि दीवार में हम एक खास तरीके से डिजाइन किये गये स्टील स्लेट का इस्तेमाल करेंगे, जिससे दीवार के आरपार देखा जा सकेगा। ये दीवार खूबसूरत होने के साथ-साथ अमेरिका की सीमाओं को सुरक्षित भी करेगी।
ट्रंप के फैसले पर सहमत नहीं डेमोक्रेट्स:-US-मेक्सिको सीमा पर दीवार खड़ी करने संबंधी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से विपक्षी दल डेमोक्रेट्स सहमत नहीं है। ट्रंप की रिपब्लिकंस ने गुरुवार को फंडिंग बिल पास कर दिया था। इसके बाद शुक्रवार (28-दिसंबर-2018) को सीनेट में इसके लिए वोटिंग हुई, जिसमें डेमोक्रेट्स ने सरकार का साथ नहीं दिया। डेमोक्रेट्स ये फंड जारी करने को तैयार नहीं है। दरअसल डेमोक्रेट्स मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने की जगह फेंसिंग बनाने को कह रहे हैं। ट्रंप को मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के लिए 5.7 अरब डॉलर (लगभग 40,000 करोड़ रुपये) के फंड की जरूरत है। ट्रंप ने जनवरी-2017 में यूएस-मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया था।
इसलिए अमेरिका में हुआ शटडाउन:-डेमोक्रेट्स के रुख पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर दीवार के लिए फंड जारी नहीं किया गया तो वह भी बजट पर साइन नहीं करेंगे। शुक्रवार (28-दिसंबर-2018) को ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि फंड जारी न होने पर उनकी सरकार शटडाउन करेगी। इसके बाद शुक्रवार मध्य रात्रि से शटडाउन हो गया था। इससे कई महत्वपूर्ण एजेंसियों का काम प्रभावित हुआ था। इसके पहले भी ट्रंप कह चुके हैं कि वह बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए अपनी सरकार के शटडाउन के लिए भी तैयार हैं।
अमेरिका ने शरणार्थियों पर दागे आंसू गैस:-राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस रुख के बाद नववर्ष पर एक जनवरी की रात अमेरिका ने मेक्सिको के तिजुआना सीमा पर आंसू गैस के गोले दागे। अमेरिकी सीमा सुरक्षा बलों ने ऐसा घुसपैठ की कोशिश कर रहे शरणार्थियों को रोकने के लिए किया था। बताया जा रहा है कि नववर्ष की रात तकरीबन 150 शरणार्थी मेक्सिको सीमा पर फेंसिंग पार कर अमेरिका में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे। आंसू गैस के गोले दागने पर जवाब में घुसपैठियों की तरफ से पथराव भी किया गया। इस दौरान घुसपैठ कर रहे 25 शरणार्थियों को हिरासत में भी लिया गया, जबकि अन्य मेक्सिको में वापस लौट गए।
मेक्सिको संग कारोबार रोकने की भी चेतावनी;-मालूम हो कि मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में बड़े पैमाने पर घुसपैठ हो रही है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि हजारों शरणार्थी मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए चेतावनी दी थी कि अगर शरणार्थियों के चलते अशांति होती है तो वह मेक्सिको के साथ कारोबार पर रोक लगा देंगे। साथ ही अमेरिका-मेक्सिको सीमा को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। शरणार्थियों को रोकने के लिए ट्रंप ने सैनिकों को जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करने का भी आदेश दिया है। इतना ही नहीं अमेरिका मेक्सिको सीमा के एक व्यस्त क्रॉसिंग को बैरियर लगाकर बंद भी कर चुका है।
क्या कहते हैं शरणार्थी:-ट्रंप के प्रतिबंध के बावजूद लैटिन अमेरिकी देशों अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला और होंडूरास से हजारों शरणार्थी लगभग चार हजार किलोमीटर की यात्रा कर अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर पहुंच चुके हैं। इनका कहना है कि वह अपने देश में शोषण, गरीबी और हिंसा के चलते पलायन करने को मजबूर हैं। उधर ट्रंप ने इन्हें रोकने के लिए सीमा पर 5800 सैनिकों को तैनात कर दिया है

 

नई दिल्‍ली। नए साल की शुरुआत के साथ ही वैश्विक मंच पर एक बड़ी घटना का पटाक्षेप हो गया। ऐसा इसलिए क्‍योंकि एक जनवरी 2019 से अमेरिका और इजरायल संयुक्त राष्ट्र के शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति संगठन, यूनेस्को से बाहर निकल गए हैं। हालांकि इससे बाहर निकलने का ऐलान 2017 में किया जा चुका था, लेकिन 31 दिसंबर को उनका नोटिस पीरियड भी खत्‍म गया। अमेरिका ने इससे बाहर होने से पहले यूनेस्‍को पर इजरायल से भेदभाव करने का आरोप लगाया था। अमेरिका का कहना था कि यूनेस्को सोची समझी रणनीति के तहत इजरायल के खिलाफ भेदभाव वाला रवैया अपनाए हुए है। अमेरिका का आरोप ये भी था कि यूनेस्‍को का फायदा कुछ लोग और देश अपने पक्ष में करने की सुनियोजित साजिश कर रहे हैं।
1949 में यूनेस्को में शामिल हुआ था इजरायल:-आपको बता दें कि यूनेस्‍को की स्‍थापना के करीब एक वर्ष बार 1949 में इजरायल यूनेस्को में शामिल हुआ था। हालांकि इजरायल के इस वैश्विक संस्‍था को छोड़ने का असर पहले से घोषित विश्व धरोहरों पर नहीं पड़ेगा। इनका संरक्षण स्थानीय प्रशासन करता है। दुनिया भर में यूनेस्को को विश्व ऐतिहासिक धरोहर कार्यक्रम के लिए जाना जाता है। इसका अहम मकसद सांस्कृतिक इलाकों और वहां की संस्कृति को सुरक्षित रखना है। इसके अलावा प्रेस की आजादी व महिलाओं को शिक्षित करने को बढ़ावा देने का काम यूनेस्‍को के तहत किया जाता है। आपको यहां पर बता दें कि वर्तमान में इजरायल में करीब नौ वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं। इनमें हैफा का बहाई गार्डन, मृत सागर के पास मसादा का बाइबलकालीन इलाका और तेल अवीव की व्हाइट सिटी का नाम शामिल है। वहीं पूर्वी येरुशलम की ओल्ड सिटी इसमें शामिल नहीं है।
पहले भी यूनेस्‍को से बाहर गया है अमेरिका:-यूनेस्को ने फलस्तीनी इलाके में तीन जगहों को विश्व धरोहरों में शामिल किया है। हालांकि यह पहला मौका नहीं था कि जब अमेरिका इस संस्‍था से बाहर निकला हो। इससे पहले 1984 में वह इससे बाहर आया था। तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति रोनाल्‍ड रेगन ने इससे बाहर होने का फैसला लिया था। इस फैसले के 19 साल बाद 2003 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश के नेतृत्व में अमेरिका फिर यूनेस्को को सदस्य बना।
यूनेस्‍को को राशि देना किया था बंद:-2011 में यूनेस्को ने फलस्तीन को पूर्ण सदस्य के तौर पर मान्यता दी थी जिससे नाराज होकर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यूनेस्को को दी जाने वार्षिक राशि बंद कर दी थी। आपको बता दें कि यूनेस्को के कुल बजट में अमेरिका की हिस्सेदारी 22 फीसदी थी। इसके बाद इजरायल ने भी यूनेस्को को पैसा देना बंद कर दिया था।
ऐसे खराब हुए यूनेस्‍को से रिश्‍ते:-2016 में यूनेस्को के साथ इन दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो गए। उस वक्त यूनेस्को ने एक प्रस्ताव पास किया था। इसमें कहा गया था कि वह येरुशलम को यहूदी धर्म से जुड़ा नहीं मानता है। यूनेस्‍को ने इस जगह को हरम अल-शरीफ (अरबी नाम) के नाम से स्वीकार किया था। इतना ही नहीं प्रस्‍ताव में यहा तक कहा गया कि इजरायल ने इस इलाके पर जबरन कब्‍जा किया हुआ है। प्रस्‍ताव में इजरायल द्वारा इस इलाके में की गई कार्रवाईयों पर सवाल उठाया था। उस वक्त प्रस्ताव की आलोचना करते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्‍जामिन नेतन्याहू ने कहा था कि ऐसा करके यूनेस्‍को ने अपनी साख गंवा दी है।
यूनेस्‍को ने बढ़ाई नाराजगी;-यूनेस्‍को से नाराजगी की वजह यहीं पर खत्‍म नहीं हुई। वर्ष 2017 में एक बार फिर यूनेस्‍को ने इजरायल को नाराज किया और पश्चिमी तट के एक मकबरे को फलस्तीनी विश्व धरोहर करार दिया। यहूदी धर्म में उस मकबरे को माचपेला कहा जाता है। माना जाता है कि इस पवित्र गुफा में यहूदी धर्म के पितामह अब्राहम को दफनाया गया था। मुसलमान इस जगह को इब्राहिमी मस्जिद कहते हैं। इस जगह पर जाने के लिए दो अलग अलग गेट हैं, एक तरफ से मस्जिद का गेट है और दूसरी तरफ से यहूदी उपासना केंद्र सिनेगॉग का है। सितंबर 2018 में इजरायल ने यूनेस्को की कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने से इन्‍कार कर दिया था।

लॉस एंजेलिस। पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या मामले पर नेटफ्लिक्स पर दिखाई गई वेब सीरिज से हटाए गए एपिसोड पर अमेरिका के मशहूर हास्य अभिनेता हसन मिन्हाज की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि इस कदम से दर्शकों में खशोगी को लेकर रुचि और बढ़ी है। इस सीरिज का नाम ‘पैट्रिऑट एक्ट विद हसन मिन्हाज’ का है, जिसमें मिन्हाज हैं।बता दें कि नेटफ्लिक्स पर अक्टूबर 2018 में प्रसारित होने वाले शो के एपिसोड में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की हत्या में कथित संलिप्तता की आलोचना करते हुए एक सेगमेंट दिखाया गया था। इस एपिसोड में पत्रकार खशोगी की हत्या को लेकर सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की आलोचना की गई।अमेरिकी मूल के मुस्लिम मिन्हाज ने न सिर्फ प्रिंस सलमान पर सवाल उठाए बल्कि यमन में सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य अभियान को भी निशाना बनाया। मिन्हाज ने नेटफ्लिक्स के इस फैसले के बाद ट्विटर पर लिखा, 'स्पष्ट रूप से लोगों को किसी चीज को देखने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उसे प्रतिबंधित कर दिया जाए। फिर से ऑनलाइन ट्रेंड करा दिया जाए या फिर यूट्यूब पर छोड़ दिया जाए।'33 वर्षीय मिन्हाज ने अपने फोलोअर्स से यमन को दान देने का भी आग्रह किया, जहां सऊदी गठबंधन पिछले चार साल से हुति विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। मिन्हाज ने लिखा, 'हम यह न भूलें कि दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट अभी यमन में हो रहा है। कृपया दान दें।'गौरतलब है कि सऊदी अरब की शिकायत के बाद नेटफ्लिक्स ने उस एपिसोड से हटा दिया, जिसमें पत्रकार खशोगी की हत्या को लेकर प्रिंस सलमान की आलोचना की गई थी। नेटफ्लिक्स के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'हम विश्वस्तर पर कलाकार की स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं और सऊदी अरब से वैध कानूनी अनुरोध मिलने के बाद इस एपिसोड को हटाया गया है।' उन्होंने बताया कि हालांकि यह एपिसोड दुनिया के अन्य देशों में देखा जा सकता है। वहीं, इस शो को यूट्यूब के माध्यम से सऊदी अरब में भी देखा जा सकता है

बीजिंग। चीन में आज सीरियल किलर गाओ चेंगयोंग को मृत्युदंड दे दिया गया। सीरियल किलर 54 साल के गाओ चेंगयोंग ने 11 महिलाओं की हत्या और दुष्कर्म किया था। गाओ चेंगयोंग को चीन का 'जैक द रिपर' भी कहा जाता है। गाओ चेंगयोंग ज़्यादातार अकेली युवतिओं को अपना शिकार बनाता था। गाओ चेयोंग को पिछले साल मार्च में चीन के गांसु प्रांत की एक अदालत ने मौत की सजा सुनाई थे। उसक पर हत्या, दुष्कर्म, लूटपाट के कई मामले दर्ज थे।
कैसे चुनता था अपना शिकार:-गाओ चेंगयोंग 1988 से 2004 के बीच 11 हत्या की थी। वो लाल कपड़े पहने महिलाओं और युवतियों का अपना शिकार बनाता था। वो महिलाओं का पीछा करता हुआ उनके घर तक पहुंच जाता और अकेले में उनके साथ दुष्कर्म करने के बाद उनकी बड़े ही नृशंस तरीके से उनकी हत्या कर देता था। हत्या के बाद वो मृतक के शरीर को बुरी तरह से शत -विक्षत कर देता था। उसकी शिकार ज़्यादातर युवतियां थी,जिनकी उम्र 20 साल के आस -पास थी। गाओ चेंगयोंग द्वारा शिकार सबसे काम उम्र की लड़की की उम्र केवल 8 साल थी। पुलिस ने गाओ चेंगयोंग को उसके पहले अपराध के 28 साल बाद 2016 में गिरफ्तार किया था। गाओ ने पुलिस के सामने अपने सभी जुर्म कबूल किए थे। इसके बाद कोर्ट ने उसको मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी। चीन के सुप्रीम कोर्ट ने भी उसको मृत्यदंड की सज़ा सुनाई।
कैसे आया पुलिस से हाथ:-2004 में चीन के पुलिस ने सीरियल किलर का सुराग देने वाले के लिए भारी -भरकम चीन इनाम की घोषणा की गई। पुलिस ने गांसु प्रांत में हो रही महिलाओं की के हत्यारे का सुराग देने वाले का सुराग देने वाले को 2 लाख युआन देने का एलान किया। पुलिस ने इस सीरियल किलर को गिरफ्तार करने के लिए बहुत बड़ा अभियान चलाया। इस दौरान करीब फिंगरप्रिंट और डीएनए की जांच की गई। गाओ-चेंगयोंग की गिरफ्तारी के पीछे बड़ी रोचक घटना है , पुलिस ने उसके रिश्तेदार को एक छोटे अपराध में गिरफ्तार किया। डीएनए की जांच के दौरान उसका डीएनए गांसु में हुयी हत्यास्थल से मिले डीएनए से मैच कर गया। उसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। इस सुराग के बदौलत पुलिस ने गाओ चेंगयोंग को गिरफ्तार किया।
जैक द रिपेर से तुलना:-गाओ चेंगयोंग को जैक द रिपर का नाम क्यों दिया गया। जैक द रिपर ब्रिटेन के इतिहास का कुख्यात हत्यारा था। 1888 में उसने ब्रिटेन में बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी। गाओ-चेंगयोंग भी जैक द रिपेयर के तरह युवतियों की हत्या करता था और हत्या करने के बाद उनके शवों को बुरी तरह से शत-विक्षत कर देता था। इसी आधार पर गाओ चेंगयोंग को चीन के जैक द रिपर का नाम दिया गया।

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार सुर्खियों में हैं। इस दफा उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। ट्रंप ने अफगानिस्तान में भारत की मदद को लेकर बयान दिया है। उनका कहना है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर मुझे बताते हैं कि उन्होंने अफगानिस्तान में लाइब्रेरी बनाई है, लेकिन मैं कहता हूं कि इसका इस्तेमाल कौन कर रहा है। ट्रंप ने यह बात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। यही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मैं अगर भारत के संदर्भ में बात करूं तो उनकी उपस्थिति अफगानिस्तान में है'। पीएम मोदी ने मुझे बताया कि उन्होंने अफगानिस्तान में लाइब्रेरी बनाई, पांच घंटे उन्होंने इसी पर चर्चा की'।अफगानिस्तान नीति पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'उन्होंने मुझे बताया। वो बहुत स्मार्ट हैं, अब हम क्या कह सकते हैं. ओह... लाइब्रेरी के लिए शुक्रिया। पता नहीं अफगानिस्तान में उस लाइब्रेरी का इस्तेमाल कौन कर रहा है।लेकिन ये सिर्फ एक-दो चीजों में से है, 'मैं पूरा क्रेडिट नहीं लेना चाहता'।इस पूरे मामले में अभी तक यह साफ नहीं है कि ट्रंप किस प्रोजेक्ट का हवाला दे रहे थे। मगर भारत ने वर्ष 2001 से अभी तक अफगानिस्तन को तीन अरब डॉलर से अधिक की मदद मुहैया कराई है। क्योंकि 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद अमेरिकी नेतृत्व वाले सुरक्षाबलों ने तालिबान के चरमपंथी सत्ता को उखाड़ फेंका था। इन प्रोजेक्ट्स के तहत काबुल में एक हाईस्कूल का निर्माण करवाया जाएगा और हर साल एक हज़ार अफगानी बच्चों को भारत में स्कॉलरशिप दी जाएगी।पीएम मोदी ने साल 2015 में अफगानिस्तानी संसद का उद्घाटन करते हुए वहां के युवाओं को आधुनिक शिक्षा देने और प्रोफेशनल स्किल्स को बढ़ाने का वादा किया था। बता दें कि अफगानिस्तान में अमेरिकी अभियान के बाद भारत मदद करनेवाले देशों में सबसे आगे रहा है।

 

इस्लामाबाद। भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सजा काट रहे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। उन्हें अब जेल में अपनी कोठरी की भी खुद सफाई करनी होगी। उन्होंने अपनी जेल कोठरी की साफ-सफाई के लिए एक सहायक की मांग की थी, लेकिन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने उन्हें यह सुविधा देने से मना कर दिया है और कहा कि यह काम उन्हें खुद करना होगा।69 वर्षीय शरीफ अल-अजीजिया स्टील मिल्स मामले में मिली सात साल कैद की सजा लाहौर की कोट लखपत जेल में काट रहे हैं। पंजाब प्रांत के जेल महानिरीक्षक शाहिद सलीम बेग ने बुधवार को कहा, प्रांतीय सरकार ने निर्णय लिया है कि शरीफ को सहायक के तौर पर कोई कैदी मुहैया नहीं कराया जा सकता। उन्हें अपना कमरा खुद व्यवस्थित करना होगा। शरीफ का मामला बेहद संवेदनशील है। उन्हें जेल में अपनी बैरक से बाहर निकलने की भी इजाजत नहीं है। जेल नियमावली के अनुसार ही उन्हें अपनी कोठरी की साफ-सफाई खुद करने के लिए कहा गया है।
पूर्व पीएम बेहतर सुविधाएं पाने के हकदार:-पूर्व प्रधानमंत्री होने के नाते शरीफ जेल में एक सहायक पाने समेत कई बेहतर सुविधाएं पाने के हकदार हैं। ऐसे लोगों को जेल के दूसरे कैदियों में से ही एक सहायक मुहैया कराया जाता है। शरीफ तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

वाशिंगटन। नए साल के मौके पर इतिहास रचने वाले न्यू होराइजंस यान ने अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि के प्रमाण भेजने शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया कि न्यू होराइजंस ने कुइपर बेल्ट स्थित खगोलीय पिंड अल्टिमा थुले की तस्वीरें भेजी हैं। अल्टिमा थुले धरती से सर्वाधिक दूरी पर स्थित खगोलीय पिंड है, जहां तक कोई यान पहुंचा है। 2006 में लांच किया गया न्यू होराइजंस यान मंगलवार…
नई दिल्‍ली - नव वर्ष का आना हर किसी के लिए ही खुश होने का अवसर है। लेकिन यह खबर इससे कहीं आगे की है जिसको पढ़कर निश्चिततौर पर आपको भी खुशी होगी। दरअसल, यह कहानी रूस के एक दस माह के दुधमुहे बच्‍चे की है जिसको 35 घंटों की मशक्‍कत के बाद मलबे से जीवित निकाल लिया गया। बच्‍चे को जीवित देख और उसकी किलकारी सुनकर सही मायने में…
बीजिंग - चीन अंतरिक्ष की दुनिया में बड़ी पहल करने जा रहा है। उसका यान चांद के अनदेखे हिस्‍सा में उतरेगा और वहां के रहस्‍य की पड़ताल करेगा। चीन के नेशनल स्‍पेस एडमिनिस्‍ट्रेशन ने कहा है कि उनका यान चांद के अनदेखे हिस्‍से पर गुरुवार को लगभग 1:00 बजे एएम पर उतरेगा।उनका यान 'चांग इ-4' का लक्ष्य दक्षिणी ध्रुव-ऐटकन घाटी स्थित एक गड्ढा है, जिसका प्रभाव सौर मंडल में सबसे…
ह्यूस्टन - भारतवंशी केपी जॉर्ज ने अमेरिका के टेक्सास राज्य की फोर्ट बेंड काउंटी के जज के रूप में शपथ ली है। केरल से ताल्लुक रखने वाले 53 वर्षीय जॉर्ज अमेरिका की सबसे विविध आबादी वाली काउंटी में जज का पद संभालने वाले पहले भारतवंशी हैं।फोर्ट बेंड काउंटी में भारतीय-अमेरिकियों की बड़ी आबादी रहती है। इसके अलावा यहां की 35 फीसद आबादी एंग्लो, 24 फीसद हिस्पैनिक्स (स्पेन से संबधित), 21…
Page 5 of 365

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें