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यरूशलम - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के राष्ट्रपति रुवेन रिवलिन से मुलाकात की। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, इजराइल के राष्ट्रपति ने मेरा पूरी गर्मजोशी से स्वागत किया, उन्होंने प्रोटोकॉल तोड़ दिया। यह भारत के लोगों के प्रति सम्मान का संकेत है। तीन दिवसीय यात्रा पर तेल-अवीव पहुंचे मोदी ने यहां रिवलिन से उनके आवास पर भेंट की और गर्मजोशी से स्वागत के लिए उनको धन्यवाद दिया। पीएम मोदी सफेद सूट पहने हुए हैं और नीली रुमाल लिए हैं। दरअसल, इजरायल के झंडे का रंग सफेल और नीला है।
पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के नाम की शुरुआत आई से होती है। आई फॉर इंडिया और आई फॉर इजरायल यानी इंडिया इजरायल के लिए है और इजरायल इंडिया के लिए है। राष्ट्रपति आवास की अतिथि पुस्तिका में मोदी ने लिखा, राष्ट्रपति रिवलिन से आज फिर भेंट करना बहुत अच्छा रहा। मैं पिछले नवंबर में हुई उनकी भारत यात्रा को याद कर रहा हूं, जब उन्होंने अपने सौम्य व्यवहार और भारत के साथ कुछ अच्छा करने की इच्छा से हमारा मन मोह लिया था।
इजराइल यात्रा पर गए पहले भारतीय प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, राष्ट्रपति रिवलिन अपने सतत विश्वास और मानवता की बेहतरी के लिए किए जाने वाले प्रयासों के लिए भारत में जाने जाते हैं। मैं उन्हें उनकी मित्रता और आतिथ्य के लिए धन्यवाद देता हूं।

 

 

बीजिंग - चीन की आधिकारिक मीडिया ने अपने संपादकीय में सिक्किम के डोका ला सेक्टर से भारतीय सैनिकों को सम्मान के साथ बाहर चले जाने को कहा है। चीन के अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि भारत को कड़ा सबक सिखाना चाहिए। एक अन्य सरकारी अखबार 'चाइना डेली' ने लिखा है कि भारत को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
'ग्लोबल टाइम्स' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि भारत अगर चीन के साथ अपने सीमा विवादों को और हवा देता है तो उसे 1962 से भी गंभीर नुकसान झेलना पड़ेगा। अखबार ने लिखा कि डोका ला इलाके में तीसरे सप्ताह भी गतिरोध जारी है और भारत को कड़ा सबक सिखाना चाहिए।
अखबार ने अपने संपादकीय में लिखा, 'हमारा मानना है कि चीनी सरजमीन से भारतीय सैनिकों को निकाल बाहर करने के लिए चीन की 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' पर्याप्त रूप से सक्षम है। भारतीय सेना पूरे सम्मान के साथ अपने क्षेत्र में लौटने का चयन कर सकती है या फिर चीनी सैनिक उन्हें उस इलाके से निकाल बाहर करेंगे।' संपादकीय में लिखा है, इस मुद्दे से निपटने के लिए राजनयिक और सैन्य अधिकारियों को हमें पूरा अधिकार देने की आवश्यकता है। हमलोग चीनी समाज से इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय एकता बनाए रखने का आह्वान करते हैं। अगर पेशेवरों को भारत के खिलाफ लड़ना हो और हमारे हितों की रक्षा करनी पड़ी तो चीनी लोग जितने एकजुट रहेंगे, भारत के खिलाफ लड़ाई में उन्हें उतने बेहतर हालात मिलेंगे। इस वक्त निश्चित रूप से हमें भारत को कड़ा सबक सिखाना चाहिए।
संपादकीय में कहा गया है कि अगर भारत यह मानता है कि उसकी सेना डोंगलांग इलाके में फायदा उठा सकती है और वह युद्ध के लिये तैयार हैं तो हमें भारत को यह कहना पड़ेगा कि चीन उनकी सैन्य ताकत को तुच्छ समझता है। अखबार ने भारतीय सेना के प्रमुख बिपिन रावत की उस टिप्पणी का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत 'ढाई मोर्चे' पर युद्ध के लिये तैयार है।
चीनी की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों द्वारा भारतीय सेना के बंकर ध्वस्त करने के बाद वहां छह जून से गतिरोध जारी है। चीन का दावा है कि यह क्षेत्र चीन से संबद्ध है। चीनी मीडिया ने सीमा पर बढ़ते तनाव के खिलाफ भारत को कई बार चेतावनी जारी की है। 'चाइना डेली' ने लिखा है, 'भारत को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। वह गैरकानूनी सीमा उल्लंन के साक्ष्य को झूठलाने के काबिल नहीं है और इस आरोप को मढ़ने के लिए वह अपने छोटे पड़ोसी भूटान पर दबाव बनाता है।'

 

 

वाशिंगटन - उत्तर कोरिया की ओर से पहली बार अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने की पुष्टि करने के बाद अमेरिका ने दुनिया में बढ़ते खतरे को लेकर आगाह किया है। इतना ही नहीं प्योंगयांग के कारण 'बढ़ते खतरे' के बाद अमेरिका ने इस परीक्षण के जवाब में दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर एक संयुक्त मिसाइल अभ्यास को अंजाम दिया।
पेंटागन की प्रमुख प्रवक्ता डाना व्हाइट ने कहा कि उत्तर कोरिया के आईसीबीएम परीक्षण के बाद शक्ति परीक्षण के दौरान अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सैनिकों ने दक्षिण कोरियाई जलक्षेत्र में मिसाइलें दागकर अपनी 'सटीकता के साथ निशाना साधने' की क्षमता का प्रदर्शन किया।
दक्षिण कोरिया में अमेरिकी बलों की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस अभ्यास में 'आर्मी टेक्टिकल मिसाइल सिस्टम और दक्षिण कोरिया की ह्यूनमू मिसाइल 2 का इस्तेमाल किया गया। पूर्वी तट पर दक्षिण कोरिया के जलक्षेत्र में मिसाइलें दागीं गईं।' पेंटागन ने कहा कि खतरों के बीच इस क्षेत्र में अपने सहयोगियों-दक्षिण कोरिया और जापान की रक्षा के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता अक्षुण्ण है।
एक बयान में प्रक्षेपण की पुष्टि करने वाले अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि अमेरिका कभी भी परमाणु हथियारों से संपन्न उत्तर कोरिया को बदार्श्त नहीं करेगा।

 

नई दिल्ली - सिक्किम सेक्टर में भारतीय और चीनी सेना के बीच महीने भर से जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच चीन ने भारत को कड़ा सबक सिखाने की चेतावनी दी है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि अगर भारत नहीं मानता है तो चीन के पास सेना के इस्तेमाल के अलावा कोई पर्याय नहीं बचता। चीनी अखबार ने भारत का 1962 से भी ज्यादा बुरा हाल करने की भी चेतावनी दी है। इसके अलावा गेंद भारत के पाले में डालते हुए चीन ने कहा है कि यह भारत को यह तय करना है कि किन विकल्पों को अपनाकर इस गतिरोध को खत्म किया जा सकता है।
जेटली के बयान पर पलटवार
चीनी अखबार की टिप्पणी भारतीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली के बयान के बाद आई है। आपको बता दें कि रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा था कि 1962 के हालत और आज के हालत में काफी अंतर है। चीन ने भारत को उस समय का देश समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।
रक्षा मंत्री से पहले आर्मी चीफ बिपिन रावत ने भी चीन और पाकिस्तान को धमकी दी थी। रावत ने कहा था कि हमारे जवान चीन और पाकिस्तान के साथ एक ही समय पर युद्ध लड़ने में सक्षम है। शायद इसी से बीजिंग बौखलाया हुआ है। ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में लिखा है कि जेटली ठीक कह रहे हैं कि 1962 और 2017 के भारत में काफी अंतर है, लेकिन अगर जंग हुई, तो भारत को ज्यादा नुकसान उठाना होगा।
भारत को हटना होगा पीछे- चीन
संपादकीय में यह भी लिखा है की अगर भारत को सिक्किम क्षेत्र में बढ़ रहे तनाव को खत्म करना है तो उन्हें अपने जवानों को पीछे हटाना होगा. चीन उलटे ही भारतीय सेना पर घुसपैठ का आरोप लगा रहा है। इस बीच ग्लोबल टाइम्स ने भारत में परिचालन कर रही चीन की कंपनियों को वहां चीन के खिलाफ बढ़ती भावना को लेकर भी सतर्क किया है। ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच चीन की कंपनियों को वहां चीन विरोधी भावना से निपटने को कदम उठाने चाहिए।
अखबार में 2104 में वियतनाम में चीन विरोधी भावना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत में भी चीन के हितों पर हमला हो सकता है।
इससे पहले चीन के सरकारी मीडिया और थिंक टैंक ने कहा था कि इस विवाद से अगर उचित तरीके से नहीं निपटा गया तो इससे 'युद्ध' छिड़ सकता है। राजनयिक ने कहा कि चीन सरकार इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट है कि वह स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान चाहती है और इसके लिए इलाके से भारतीय सैनिकों की वापसी 'पूर्व शर्त' है।
चीन के राजनयिक ने क्या कहा
झाओहुई ने कहा, 'भारतीय सैनिकों की बिना शर्त अपनी सीमा में वापसी पहली प्राथमिकता है। चीन और भारत के बीच किसी भी सार्थक संवाद के लिए यह पूर्व शर्त है।' चीनी सेना के एक निर्माण दल के सड़क बनाने के लिए आने के बाद पिछले 19 दिन से भूटान तिराहे के पास डोक ला इलाके में चीन और भारत के बीच गतिरोध चल रहा है।
ये है विवाद की वजह
डोक ला इस क्षेत्र का भारतीय नाम है, जिसे भूटान डोकलाम के रूप में मान्यता देता है, जबकि चीन इसे अपने डोंगलांग इलाके का हिस्सा बताता है। भारत में चीन के राजदूत झाओहुई ने कहा, 'स्थिति गंभीर है, जिसने मुझे गंभीर चिंता में डाल दिया है। यह पहला मौका है जब भारतीय सैनिकों ने पारस्परिक सहमति वाली सीमा रेखा पारकर चीन की सीमा में प्रवेश किया है। इससे चीन और भारत के सीमा पर तैनात सैनिकों के बीच गहरा गतिरोध पैदा हो गया है। अब 19 दिन बीत चुके हैं लेकिन स्थिति अब भी सहज नहीं हो सकी है।'
उन्होंने कहा कि भारत को चीन-भूटान सीमा वार्ता में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है और ना ही वह भूटान की तरफ से क्षेत्र को लेकर दावा करने के लिए अधिकृत है।
कहां है डोकलाम
संधि स्थल को भारत डोक ला कहता है। भूटान इसे डोकलाम कहता है। चीन इसी हिस्से में डोंगलोंग पर अपना दावा करता है। चीन और भूटान के बीच क्षेत्र पर दावे को लेकर वार्ता होती रही है। भूटान का चीन के साथ कोई कूटनीतिक रिश्ता नहीं है। भारत ही उसे सैन्य और कूटनीतिक समर्थन देता है। चीन का कहना है कि भारत के पास न तो चीन-भूटान सीमा विवाद में हस्तक्षेप का और न ही भूटान की तरफ से क्षेत्र पर दावे का अधिकार है।

 

नई दिल्ली - उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने कहा कि अंतरमहाद्वीपीय मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण 'अमेरिकन बास्टर्डस' को उनके स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिया गया एक 'तोहफा' है।
प्योंगयांग की आधिकारिक समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी की खबर के अनुसार, नेता किम जोंग-उन ने प्रक्षेपण का निरीक्षण करने के बाद कहा कि अमेरिकन बास्टर्डस चार जुलाई को उनके स्वतंत्रता दिवस पर भेजे गए इस तोहफे से ज्यादा खुश नहीं होंगे। जोर जोर से हंसते हुए उन्होंने कहा, हमें उनकी उदासी दूर करने के लिए बीच-बीच में तोहफे भेजते रहना चाहिए।
अमेरिका ने की पुष्टि
उत्तर कोरिया के परीक्षण के बाद अमेरिका ने कहा कि उत्तर कोरिया ने जापान सागर में जो मिसाइल टेस्ट किया है वो एक इंटरकॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल थी। अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलर्सन ने इसे अमरीका और दुनिया के लिए एक नया ख़तरा बताया। अमेरिका ने चेताते हुए कहा कि अमरीका कभी भी एक परमाणु-लैस उत्तर कोरिया को स्वीकार नहीं करेगा।
उत्तर कोरिया ने इससे पहले इससे पहले मंगलवार को कहा था कि उसने पहली बार एक इंटरकॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। अमरीकी अधिकारियों का मानना है कि उत्तर कोरिया अब अलास्का तक मिसाइल से हमला कर सकता है। हलांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका निशाना सटीक नहीं हो सकता। उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट की खबर आने के कुछ ही घंटे बाद अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की।
आज होगी बैठक
बुधवार 5 जुलाई को बंद कमरे में 15 सदस्यों वाली परिषद की एक बैठक करवाई जाएगी। अमरीकी विदेश मंत्री ने इस बारे में एक बयान जारी किया है जिसमें लिखा है कि अमरीका उत्तर कोरिया के इंटरकॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट करने की कड़ी निन्दा करता है। इस मिसाइल का परीक्षण करने से अमरीका और हमारे सहयोगियों के लिए इस क्षेत्र और सारी दुनिया के लिए खतरा और बढ़ गया है। उन्होंने जोर दिया कि इस वैश्विक ख़तरे को रोकने के लिए वैश्विक कार्रवाई किया जाना जरूरी है।
उत्तर कोरिया की पुष्टि
ये पहला मौका है जब उत्तर कोरिया ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) की सफलतापूर्वक परीक्षण करने का दावा किया है। उत्तर कोरिया का दावा है कि इस मिसाइल के जरिए वो अब अमरीका के जमीनी इलाके तक मार करने में सक्षम हो गया है। उत्तर कोरिया के सरकारी टेलीविजन के मुताबिक उत्तर कोरियाई राष्ट्रपति किम जोंग उन की मौजूदगी में हाउसोंग-14 मिसाइल का परीक्षण किया गया। इसमें ये भी बताया गया कि मिसाइल 2,802 किलोमीटर की दूरी तय करने में कामयाब रहा और समुद्र में टारगेट को निशाना बनाने से पहले उनसे 933 किलोमीटर की दूरी भी तय की।
क्या है इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) ?
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल लंबी दूरी तय करने वाला मिसाइल होता है, जो खास तौर पर परमाणु हथियार के लिए डिजाइन किया जाता है। इस मिसाइल से कम से कम 5,500 किलोमीटर तक निशाना लगा सकता है और निशाना लगाने से पहले ये 10 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। उत्तर कोरिया ने दो तरह के इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का डिसप्ले किया है- पहला केएन-08 है, जिसकी रेंज 11,500 किलोमीटर की है और दूसरी मिसाइल का रेंज 10,000 किलोमीटर है।

‘मां हमें बचा लो, मेरा बेटा मेरे सामने दम तोड़ रहा है।’ आईएस के कब्जे वाले रक्का में फंसी महा (बदला हुआ नाम) सिग्नल मिलते ही एम्सटरडम में बैठी अपनी मां को यह संदेश भेजती है। उसकी मां वफा भी उसे ढांढस बंधाने के अलावा कुछ नहीं कर पाती। वह सिर्फ मैसेज के नीचे नीले टिक का निशान लगने का इंतजार करती है, ताकि यह तसल्ली हो जाए कि महा ने मैसेज पढ़ लिया है और वह जिंदा है।23 वर्षीय महा अपने दो साल के बेटे ओदे के साथ सीरिया के रक्का में मौत के साये में जी रही है। आईएस लड़ाकों की नजरों से छिपकर जब भी उसे इंटरनेट सिग्नल नसीब होता है, वह वफा को व्हॉट्सएप मैसेज भेज खुद को रक्का से बाहर निकालने की गुहार लगाती है। वफा ने महा और अपने बीच हुआ संवाद अमेरिकी वेबसाइट ‘सीएनएन’ से साझा किया है। वफा 2014 में रक्का से भागकर नीदरलैंड आ गई थी।उसने महा से भी साथ चलने की मिन्नतें की थीं, पर वह अपने शौहर और बेटे के साथ बाद में आने पर अड़ी थी। हालांकि उसका रक्का से निकलना मुमकिन ही नहीं हो पाया। सीरियाई सैनिकों से मदद मांगने वाला मैसेज पढ़ने के बाद आईएस ने महा के शौहर का सिर कलम कर दिया। अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं के आईएस पर हमला करने के बाद महा के बाहर निकलने की राह और भी मुश्किल हो गई है।
मां-बेटी के बीच संदेशों का आदान-प्रदान
4 जनवरी 2017
महा
-मां, गंदा पानी पीने से ओदे को गंभीर संक्रमण हो गया है। हम किसी तरह उसे अस्पताल ले आए हैं। डॉक्टरों ने साफ पानी पिलाने को कहा है, जो यहां मयस्सर नहीं है। मेरी समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं।
5 जनवरी 2017
वफा
-बेटा, किसी तरह साफ पानी खोजो और ओदे को पिलाओ। ऊपरवाले पर भरोसा रखो। वह सब ठीक कर देगा।
10 जनवरी 2017
महा
-मां, मैं थक चुकी हूं। यहां हालात बदतर होते जा रहे हैं। मैं अब और नहीं झेल सकती। मेरा बेटा बीमार है। उसके लिए न तो खाना है, न साफ पानी और न ही दवाएं। अब तो दूध का इंतजाम करना भी मुश्किल हो रहा है।
वफा
-बेटा, मैं कसम खाकर कहती हूं कि शायद ही कोई ऐसा बचा हो, जिससे मैंने तुम्हें वापस लाने के बारे में बात नहीं की है। मैं मीडिया से संपर्क कर रही हूं। डॉक्टरों से बात कर रही हूं। आव्रजन अधिकारियों से मिल रही हूं।
2 फरवरी 2017
महा
-मां, यहां ऑनलाइन होना बहुत मुश्किल है। मैं एक साइबर कैफे से मैसेज कर रही हूं, जो हमारे घर से बहुत दूर है। मुझे नहीं पता कि आपसे संपर्क करने के लिए मैं यहां दोबारा आ भी पाऊंगी या नहीं।
वफा
-बेटा, वहां से निकलने की कोशिश करो। किसी और जगह भाग जाओ। मैं तुम्हें तुर्की पहुंचवाने की कोशिशों में जुटी हूं।
10 मार्च 2017
महा
-मां, आपने मुझे इस जहन्नुम से निकालने का वादा किया था। मेरे मन में बुरे ख्यालात आते हैं। मुझे हर पल लगता है कि कोई मुझे मारने आ रहा है। मुझे हर तरफ आईएस के लड़ाके दिखते हैं। मैं हमारी बातचीत तुरंत डिलीट कर देती हूं। मुझे डर है कि कोई आईएस लड़ाका इन्हें देख मुझे मौत के घाट न उतार दे।
वफा
-बेटा, मैं कसम खाती हूं कि डॉक्टर, वकील, पत्रकार से लेकर शायद ही कोई बचा होगा, जिससे मैंने तुम्हारे और ओदे के बारे में बात न की हो। मैं तुम लोगों को रक्का से बाहर निकालने के लिए किसी भी हद तक जाऊंगी।
31 मार्च 2017
महा
-मां, यहां कुछ भी नहीं बचा है। न खाना, न पानी, न बिजली, न दवाएं, कुछ भी नहीं। वहीं, आईएस लड़ाके ऐशोआराम की जिंदगी जी रहे हैं।
वफा
-मैं जानती हूं कि आईएस लड़ाके कितने घटिया हैं। मैं आईएस से नफरत करती हूं और उन लोगों से भी, जिन्होंने उसे खड़ा किया है।
31 मई 2017
महा
-आज हमने कुछ आईएस लड़ाकों को खून से लथपथ अपने साथी को आत्मघाती बेल्ट बांधते देखा। बाद में वे उसे साथ ले गए। हमें लगा कि आज हमारी जिंदगी का आखिरी दिन है।
1 जून 2017
महा
-मैं जिंदगी से पूरी तरह से हार चुकी हूं। पल-पल खुदकुशी का ख्याल आता है। मेरा बेटा बीमार है, मैं बीमार हूं। अब मेरे अंदर वापस आने की कोई उम्मीद नहीं बची है।
वफा
-हिम्मत मत हारो बेटा। मुझे पता है कि तुम वहां पल-पल मर रही हो। मैंने खुद को इतना बेबस कभी महसूस नहीं किया। पर मैं क्या करूं। मेरे हाथ में कुछ भी नहीं है। मैं खुद यहां पल-पल मर रही हूं।
16 जून 2017
महा
-मां, हमें बचा लो। हम जहन्नुम में रह रहे हैं। मेरा बेटा मेरी आंखों के सामने दम तोड़ रहा है। हमें इस हालत में मत छोड़ो। हमें बचा लो, हमें बचा लो...।
वफा
-मैं उन्हें बद्दुआ देती हूं। वे खुद तो ऐश की जिंदगी जी रहे हैं और मासूमों को बेमौत मार रहे हैं। मैं तुम्हें निकालने की कोशिश कर रही हूं बेटा।

चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को रक्षा मंत्री अरुण जेटली की उन टिप्पणियों को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि 2017 का भारत 1962 के भारत से अलग है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि आज का चीन भी 1962 के चीन से अलग है तथा देश अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए 'सभी आवश्यक कदम' उठाएगा।जेटली ने चीन को तब जवाब दिया था जब चीन ने…
अमेरिका की ओर से आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किये जाने के बाद अब खुद इस संघटन ने स्वीकारा है कि वो आतंकी हमलों में शामिल रहा है। संगठन का सरगना सैयद सलाहुद्दीन ने ये कबूला है कि भारत में होने वाले आतंकी हमलों के पीछे उसका हाथ है। पाकिस्तान में छुपे सलाहुद्दीन ने एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में ये…
सिक्किम सेक्टर में सीमा विवाद के बीच चीनी विशेषज्ञों ने सोमवार को आगाह किया कि सीमा विवाद हल न हुआ तो युद्ध भी हो सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि चीन पूरी प्रतिबद्धता से अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा, फिर चाहे युद्ध की नौबत क्यों न आ पड़े।चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने चीनी विशेषज्ञों के हवाले से यह बात कही। डोकलाम क्षेत्र में तीन हफ्तों से दोनों देशों…
बीजिंग.भारी उपग्रहों को प्रक्षेपित करने वाले चीन के दूसरे सबसे भारी रॉकेट की लॉन्चिंग नाकाम हो गई है। चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि फ्लाइट के दौरान कुछ गड़बड़ियों की वजह से रॉकेट का प्रक्षेपण नाकाम हो गया है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि विशेषज्ञ रविवार को हुई रॉकेट लॉन्चिंग की असफलता की वजहों की जांच करेंगे।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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