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अंकारा - तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एदोर्गन ने असफल सैन्य तख्तापलट की पहली बरसी पर इस्तांबुल में आयोजित एक रैली के दौरान लाखों लोगों को संबोधित किया। एदोर्गन ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, 'उस रात लोगों के हाथों में बंदूकें नहीं थीं, उनके हाथों में झंडे थे और सबसे अहम उनके साथ उनका विश्वास था।'
एदोर्गन ने कहा, 'मैं अपने देश के उन सभी लोगों का कृतज्ञ हूं जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए देश की रक्षा की। उन्होंने कहा कि 250 लोगों ने अपनी जान देकर देश का भविष्य सुरक्षित रखा। राष्ट्रपति एदोर्गन ने इसके बाद इस्तांबुल ब्रिज पर शहीद मेमोरियल का भी उद्घाटन किया। इस पुल का नाम बदलकर 'मार्टियर्स ऑफ जुलाई 15' कर दिया गया है।
तुर्की की सरकार ने नाकाम तख्तापलट के बाद लगभग डेढ़ लाख लोगों को बर्खास्त किया था। सरकार के अनुसार वह तख्तापलट का समर्थन करने वालों को दंडित कर रही है। तुर्की ने इस तख्तापलट के असफल प्रयास के लिए मुस्लिम धर्मगुरु फतेउल्लाह गुलेन को जिम्मेदार ठहराया था। जिसमें राष्ट्रपति तैय्यप एदोर्गन को सत्ता से हटाने का प्रयास किया गया था।
गौरतलब है कि सेना के एक धड़े ने गत वर्ष 15 जुलाई को तख्तापलट करने की कोशिश की थी। तख्तापलट की इस नाकाम कोशिश की लड़ाई में 250 से अधिक लोग मारे गए थे और 2,196 लोग घायल हुए थे।


बीजिंग - सिक्किम सेक्टर के डोका ला क्षेत्र में भारत की कठोर रुख से चीन की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शनिवार को एक कमेंट्री में लद्दाख को पाकिस्तान का हिस्सा बताया। इसमें धमकी भी दी गई कि अगर भारत ने डोका ला से सेना नहीं हटाई तो उसे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है और स्थिति और बिगड़ सकती है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि सिक्किम गतिरोध पर वार्ता की कोई गुंजाइश नहीं है। गतिरोध का एकमात्र हल है कि भारत डोका ला क्षेत्र से अपनी सेना वापस बुलाए। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत इसे लद्दाख के निकट 2013 और 2014 में सामने आए पुराने विवादों जैसा मामला न समझे। कूटनीतिक प्रयासों से पुराने विवादों को सुलझा लिया गया था, लेकिन ताजा मामला इससे एकदम अलग है। एनएसए अजीत डोभाल इस माह के अंत में चीन में ब्रिक्स देशों की बैठक में हिस्सा लेने जाने वाले हैं। यह पहली बार है कि चीन ने अधिकृत तौर पर भारतीय सैनिकों की वापसी की बात के साथ स्पष्ट किया है कि डोका ला पर बातचीत नहीं होगी। इससे पहले चीनी विदेश मंत्रालय भारतीय सैनिकों की वापसी के साथ इस मुद्दे पर वार्ता का संकेत देता रहा है।
शिन्हुआ चीन सरकार की शाखा है और यह साम्यवादी देश की कैबिनेट स्टेट काउंसिल से संबद्ध है। शिन्हुआ के साथ कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना के मुखपत्र पीपुल्स डेली को चीन सरकार और सत्तारूढ़ साम्यवादी पार्टी का अधिकृत रुख माना जाता है।
कमेंट्री में कहा गया कि भारत सैनिकों को वापस बुलाने की मांग को अनसुना करता आ रहा है, लेकिन इससे हालात बिगड़ सकते हैं। इसमें यह भी कहा गया कि भारत झूठ बोल रहा है कि भूटान की मदद को उसने सैनिक भेजे हैं। जबकि भूटान ने ऐसा कोई अनुरोध भारत से नहीं किया है। हालांकि उसने विदेश सचिव एस जयशंकर के सिंगापुर में दिए बयान को सकारात्मक बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देश मतभेदों को विवादों में नहीं बदलने देंगे। कमेंट्री के अनुसार, चीन भी सीमावर्ती क्षेत्र में शांति चाहता है, लेकिन भारत को बिना शर्त सैनिक वापस बुलाने होंगे।
लद्दाख को विवादित क्षेत्र और पाक से जोड़ने की कोशिश
उसने लद्दाख क्षेत्र को भी विवादित बताने के साथ पाकिस्तान से जोड़ने का प्रयास करते हुए सीमा विवाद को नई दिशा देने की कोशिश की है। इसमें लद्दाख के साथ कश्मीर को भी जोड़ा गया।

 

नई दिल्ली - खगोलशा्त्रिरयों ने ब्रह्मांड का सबसे छोटा तारा खोज निकला है। यह नया तारा आकार में शनि ग्रह से थोड़ा बड़ा है। माना जा रहा है कि इसकी कक्षा में पृथ्वी के आकार के ग्रह मौजूद हैं। ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने लगभग 600 प्रकाश वर्ष दूर स्थित इस तारे को ढूंढ निकाला है। इसे EBLM J0555-57Ab नाम दिया गया है।
शोधकर्ता के मुताबिक इससे छोटे तारे का होना संभव नहीं है क्योंकि हाइड्रोजन के नूक्ली को हीलियम में विलय के लिए जितना वजन होना चाहिए, इसका वजन उतना ही है। अगर इससे कम वजन होगा तो तारे के भीतर का दबाव इस प्रक्रिया को संपूर्ण ही नहीं होने देगा।
शनि ग्रह से थोड़े से बड़े इस तारे के सतह का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव हमारी पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से 300 गुना अधिक है। शोधकर्ता के मुताबिक यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके कक्ष में पृथ्वी जैसे ग्रह मौजूद है, जिनकी सतहों पर पानी के मौजूद होने की संभावना है।
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के स्नातकोत्तर के छात्र एलेक्सेंडर बॉयटिशर ने बताया, हमारे अनुसंधान से पता चला कि कोई तारा कितना छोटा हो सकता है। अगर इस तारे का वजन इससे थोड़ा भी कम होता तो तारा बनने की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पाती।

 

वाशिंगटन - अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने पाकिस्तान को रक्षा वित्त उपलब्ध कराए जाने की शर्तों को और कड़ा बनाने के लिए तीन विधायी संशोधनों पर वोट किया है। इसमें यह शर्त रखी गई है कि वित्तीय मदद दिए जाने से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संतोषजनक प्रगति दिखानी होगी। ये शर्तें आतंकवाद को पाकिस्तान के समर्थन से संबंधित है जिसे लेकर पहले भी कई शीर्ष अमेरिकी अधिकारी और सांसद लगातार चिंता जताते रहे हैं।
651 अरब डॉलर वाले नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट (एनडीएए) 2018 में सभी तीन विधायी संशोधनों को कांग्रेस के निचली सदन ने कल ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन ने 81 के मुकाबले 344 मतों से इसे पारित कर दिया। सदन में पारित इस विधेयक से रक्षा मंत्री को पाकिस्तान को वित्त पोषण दिए जाने से पहले यह प्रमाणित करना होगा कि पाकिस्तान ग्राउंड्स लाइंस ऑफ कम्यूनिकेशन (जीएलओसी) पर सुरक्षा बनाए रख रहा है। जीएलओसी सैन्य इकाइयों को आपूर्ति मार्ग से जोड़ना वाला और सैन्य साजो-सामान के परिवहन का रास्ता है।
रक्षा मंत्री को यह भी प्रमाणित करना होगा कि पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क को उत्तर वजीरिस्तान को पनाहगाह बनाने से रोकने की प्रतिबद्धता दिखा रहा है और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हक्कानी नेटवर्क समेत आतंकवादियों की गतिविधियों पर लगाम लगाने में अफगानिस्तान सरकार के साथ सक्रिय तौर पर सहयोग कर रहा है। तीन में से दो संशोधन कांग्रेस सदस्य डाना रोहराबेकर और एक संशोधन टेड पोए ने पेश किया।
सदन द्वारा पारित पो के एक संशोधन में इस बात का प्रस्ताव रखा गया है कि जब तक रक्षा मंत्री यह पुष्टि ना कर सकें कि पाकिस्तान अमेरिका द्वारा घोषित किसी भी आतंकवादी को सैन्य, वित्तीय मदद या साजोसामान उपलब्ध नहीं करा रहा तब तक पाकिस्तान को दिए जाने वाली वित्तीय मदद रोक कर रखी जाए।
रोहराबेकर के एक संशोधन में कहा गया है कि शकील अफ्रीदी एक अंतरराष्ट्रीय हीरो है और पाकिस्तान सरकार को इसे तुरंत जेल से रिहा कर देना चाहिए। अफ्रीदी ने एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी का पता लगाने में अमेरिका की मदद की थी।

 

वाशिंगटन - अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 621.5 अरब डॉलर की रक्षा नीति पारित की है जिसमें भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। अमेरिका में भारत के राजदूत नवतेज सरना ने बताया कि पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के बाद दोनों देश ने मिलकर ये फैसला लिया। जिसके बाद यूस कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा में पेश किये गए इस बिल को पारित कर दिया गया।
भारतीय अमेरिकी सांसद अमी बेरा द्वारा इस संबंध में पेश किए गए संशोधन को सदन ने राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण कानून (एनडीएए) 2018 के भाग के रूप में ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह कानून इस साल एक अक्तूबर से लागू होगा। एनडीएए-2018 को सदन ने 81 के मुकाबले 344 मतों से पारित किया था।
सदन द्वारा पारित भारत संबंधी संशोधन में कहा गया है कि विदेश मंत्री के साथ सलाह मशविरा करके रक्षा मंत्री अमेरिका एवं भारत के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने की रणनीति बनाएंगे।
रक्षा सहयोग के लिए विधेयक पारित
बेरा ने कहा, 'अमेरिका दुनिया की सबसे पुरानी और भारत सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए रणनीति विकसित की जाए।' उन्होंने कहा, मैं आभारी हूं कि इस संशोधन को पारित किया गया। मैं साझा सुरक्षा चुनौतियों, सहयोगियों की भूमिका और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग जैसे अहम मामलों संबंधी रक्षा मंत्रालय की रणनीति का इंतजार कर रहा हूं।'
बढ़ेगी क्षमता
बेरा ने कहा, 'अमेरिका एवं भारत के बीच सहयोग से हमारी अपनी सुरक्षा एवं 21वीं सदी में सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की हमारी क्षमता भी बढ़ेगी।'
रणनीति के लिए 180 दिन का समय
एनडीएए में संशोधन के बाद रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री के पास अमेरिका और भारत के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए एक रणनीति बनाने के वास्ते 180 दिन का समय होगा। एनडीएए को सीनेट में पारित किए जाने की जरूरत होगी जिसके बाद ही इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए इसे व्हाइट हाउस भेजा जा सकता है।
बनानी होगी साझा रणनीति
एनडीएए-2018 पारित किए जाने के बाद विदेश मंत्रालय और पेंटागन को एक ऐसी रणनीति तैयार करनी होगी जो साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो, जिसमें भारत-अमेरिका रक्षा संबंध में अमेरिकी साझेदारों और सहयोगियों की भूमिका और रक्षा तकनीक एवं औद्योगिक पहल की भूमिका का भी जिक्र हो।

 

संयुक्त राष्ट्र - संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट की मानें तो करीब 48 लाख भारतीय विदेश में बसने की तैयारी में हैं। इनमें से 35 लाख लोग ऐसे हैं, जो अपनी योजना बना चुके हैं जबकि 13 लाख भारतीय विदेश जाने का सपना आंखों में लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी अंतरराष्ट्रीय प्रवास संगठन (आईओएम) की रिपोर्ट भारत के लिए खतरे की घंटी है।
इस रिपोर्ट के अनुसार भारत उन देशों में दूसरे नंबर पर है, जहां वयस्क किसी दूसरे देश में बसने की योजना बना रहे हैं। 51 लाख लोगों के साथ नाइजीरिया इस मामले में पहले नंबर पर है। आईओएम की रिपोर्ट के मुताबिक 1.3 फीसदी या 6.60 करोड़ लोग अगले 12 महीने में स्थायी तौर पर दूसरे देश में बसने की योजना बना रहे थे। यह रिपोर्ट 2010-2015 के बीच दुनियाभर के लोगों की योजना के आधार पर तैयार की गई है। यह अध्ययन ‘गैलप वर्ल्ड पोल’ द्वारा जुटाए गए अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों पर आधारित है। अध्ययनकर्ताओं का यह भी मानना है कि वास्तविक आंकड़े इससे अलग हो सकते हैं।
अमेरिका-ब्रिटेन सबसे लोकप्रिय
सिर्फ भारतीयों के लिए ही नहीं बल्कि अन्य देशों के वयस्कों के लिए भी पहली पसंद अमेरिका और ब्रिटेन है। इन देशों के बाद लोग सऊदी अरब, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका में बसना पसंद करते हैं।
आधी आबादी सिर्फ 20 देशों से
किसी दूसरे देश में बसने की योजना बनाने वालों में से आधे लोग सिर्फ 20 देशों में रहते हैं। इसमें पहले नबंर पर नाइजीरिया और दूसरे नंबर पर भारत है। इसके बाद कांगो, सूडान, बांग्लादेश और चीन का नंबर आता है। पश्चिम अफ्रीका, दक्षिण एशिया और उत्तर अफ्रीका ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सबसे अधिक लोगों के प्रवास करने की संभावना है।
योजना बनाने वालों में पुरुष ज्यादा
दूसरे देशों में बसने की योजना बनाने वाले ज्यादातर लोगों में पुरुष, युवा, अविवाहित, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले और कम से कम माध्यमिक शिक्षा हासिल करने वाले वयस्क हैं।
हर तीसरा व्यक्ति बना रहा योजना
रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों में हर तीसरा व्यक्ति विदेश में बसने की चाहत रखता है। आंकड़ों की मानें तो करीब 2.3 करोड़ लोग गंभीरता से इस तैयारी में लगे हुए हैं।

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नई दिल्ली - हमारे देश में नागों की पूजा की जाती है। भविष्य पुराण की मानें तो सावन महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की पंचमी नाग देवता को समर्पित है। शुक्ल पक्ष की नागपंचमी 27 जुलाई को है, इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। लेकिन आपको बता दें कि इटली में भी सांपों को लेकर स्नैक फेस्टिवल मई में मनाया जाता है।यहां हर साल मई में…
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