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वाशिंगटन -अमेरिका ने पिछले साल 50 हजार से ज्यादा भारतीयों को अपनी नागरिकता प्रदान की। अमेरिकी नागरिकता पाने के मामले में मेक्सिको के बाद भारतीय नागरिक दूसरे स्थान पर हैं।
अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की नई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 में 50,802 भारतीयों को अमेरिकी नागरिकता दी गई। यह संख्या 2016 की तुलना में चार हजार ज्यादा है। साल 2016 में 46,188 भारतीयों को अमेरिकी नागरिकता मिली थी जबकि साल 2015 में 42,213 भारतीयों ने अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी।
डीएचएस के मुताबिक, 2017 में कुल 7,07,265 विदेशियों को अमेरिकी नागरिकता दी गई। नागरिकता पाने वाले विदेशी नागरिकों की सूची में मेक्सिको शीर्ष पर है। मेक्सिको के 1,18,559 नागरिकों को अमेरिकी नागरिकता मिली। अमेरिकी नागरिकता पाने वाले देशों की सूची में भारत दूसरे स्थान पर है। इसके बाद चीन (37,674), फिलीपींस (36,828), डोमिनिकन गणराज्य (29,734) और क्यूबा (25,961) का स्थान है।
पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को मिली नागरिकता
डीएचएस के आंकड़ों से यह भी जाहिर होता है कि पुरुषों (3,10,987) की अपेक्षा महिलाओं (3,96,234) को ज्यादा अमेरिकी नागरिकता मिली।
कैलिफोर्निया, न्यूजर्सी में बसे भारतीय
डीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका की नई नागरिकता पाने वाले 12 हजार से ज्यादा भारतीय कैलिफोर्निया में बसे। इसके बाद भारतीयों ने न्यूजर्सी (5,900) और टेक्सास (3,700) को रहने के लिए चुना है।


नई दिल्‍ली - श्रीलंका ने चीन को बड़ा झटका देते हुए उसके साथ हुए हुए 30 करोड़ डॉलर के निर्माण सौदे को रद कर दिया है। इतना ही नहीं चीन को दूसरा बड़ा झटका देते हुए श्रीलंका ने इस काम को भारत के सहयोग से पूरा करने का मन बना लिया है। चीन के लिए यह दोनों ही फैसले पूरी तरह से अप्रत्‍याशित रहा है। दरअसल, बीते कुछ वर्षों में चीन ने भारत के पड़ोसी देशों को जिस जाल में फंसाया है उससे भारत अच्‍छी तरह से वाकिफ है। भारत को साधने और हिंद महासागर में भारतीय नौसेना पर नजर रखने के इरादे से चीन ने लंबी योजना तैयार कर रखी है। इसके तहत वह ऋण के जरिए भारत के तमाम पड़ोसी देशों को फांसने में लगा है।
भारत यात्रा पर श्रीलंका के पीएम
श्रीलंका का यह ताजा फैसला उस वक्‍त सामने आया है जब वहां के प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे भारत की यात्रा पर दिल्‍ली आए हुए हैं। शनिवार को वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी करने वाले हैं। यहां पर यह भी ध्‍यान रखने वाली बात है कि भारत और श्रीलंका के सदियों पुराने सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंध हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच चीन के आ जाने से दोनों तरफ कुछ तनाव जरूर पैदा हुआ है। हालांकि यहां पर दोनों ही देशों ने काफी सूझबूझ का परिचय देते हुए कदम आगे बढ़ाया है।
इस वजह से हुआ चीन से सौदा रद
आपको यहां पर ये भी बता दें कि बीते अप्रैल में चीन की सरकारी रेलवे बीजिंग इंजीनियरिंग ग्रुप कंपनी को श्रीलंका के जाफना इलाके में 40 हजार घरों के निर्माण का ठेका मिला था। यह ठेका 30 करोड़ डॉलर (2,205 करोड़ भारतीय रुपये) का था। इस परियोजना के लिए चीन के एक्जिम बैंक ने धन मुहैया कराया था, लेकिन परियोजना पर कार्य शुरू होते ही जाफना की तमिल आबादी ने उसका विरोध शुरू कर दिया। लोग ईंटों से परंपरागत रूप से बने हुए मकान चाहते थे, जबकि चीन की कंपनी कंक्रीट के मकान बना रही थी। जन विरोध के चलते कंपनी को कार्य रोकना पड़ा।
भारत की दो कंपनियां करेंगी सहयोग
श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता रजीता सेनारत्ने ने बताया कि जाफना में मकान बनाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने नए प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया है। इस प्रस्ताव के तहत 28 हजार मकान बनाए जाएंगे। यह परियोजना 21 करोड़ डॉलर की होगी। परियोजना को भारतीय फर्म एनडी इंटरप्राइजेज और श्रीलंका की दो कंपनियां मिलकर पूरा करेंगी। बनने वाले भवन देश के उत्तरी भाग के लिए प्रस्तावित कुल 66 हजार मकानों की निर्माण परियोजना का हिस्सा होंगे। भारत इससे पहले श्रीलंका के उत्तरी इलाके में 44 हजार घर बनाकर दे चुका है। यह इलाका श्रीलंका में 26 साल तक चले गृहयुद्ध के कारण बुरी तरह से बर्बाद हो चुका है। इलाके में रहने वाले हजारों तमिल लोग बेघर और बेरोजगार हैं।
क्‍या कहता है चीन और आलोचक
श्रीलंका सरकार की घोषणा के बाद बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ल्यू कांग ने कहा, चीन और श्रीलंका का सहयोग आपसी हितों पर आधारित है। उम्मीद है कि यह सहयोग उद्देश्यपूर्ण तरीके से आगे भी जारी रहेगा। चीन के साथ श्रीलंका के रिश्तों के आलोचकों का कहना है कि इसके चलते यह छोटा देश बुरी तरह से चीनी कर्ज में डूब गया है और उसे अपना स्वाभिमान बचाना मुश्किल हो रहा है।
संबंध खराब करने की कोशिश
प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के भारत पहुंचने से एक दिन पहले ही दोनों देशों के रिश्तों में ऐसी असहजता आ गई थी। इस स्थिति को संभालने में दोनो तरफ के राजनयिकों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। यह असहजता राष्ट्रपति मैथ्रिपाला सिरीसेना के हवाले से मीडिया में छपी इस खबर से आई कि भारत की खुफिया एजेंसी रॉ उनकी हत्या करने की साजिश रच रही है। इस सनसनीखेज समाचार से द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव को संभालने के लिए देर शाम श्रीलंका के रक्षा सचिव जी. राजपक्षे को पीएम नरेंद्र मोदी को फोन करना पड़ा और यह बताना पड़ा कि इस तरह के समाचार पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
बढ़ी कूटनीतिक गतिविधियां
मीडिया में इस संबंध में खबर छपने के साथ ही बुधवार को दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ गई। खबर यह छपी थी कि राष्ट्रपति ने अपने कैबिनेट के सहयोगियों को बताया है कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ उनकी और श्रीलंका के रक्षा सचिव जी. राजपक्षे की हत्या कराने की साजिश रच रही है। सबसे पहले कोलंबो स्थित भारत के उच्चायुक्त ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से मुलाकात की और उनसे मीडिया में छपी सूचनाओं पर भारत की चिंताओं को बताया। इसके थोड़ी ही देर बाद श्रीलंका के विदेश मंत्रलय ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी करके यह जानकारी दी कि मंगलवार कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रपति ने इस तरह की कोई बात नहीं की थी। इसमें यह भी बताया गया है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भारतीय खुफिया एजेंसी का कोई जिक्र नहीं किया था।
श्रीलंका का तर्क
श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने बगैर किसी का नाम लिए यह कहा कि कोई तीसरा पक्ष भारत और श्रीलंका के सौहार्दपूर्ण रिश्तों में व्यवधान डालने की कोशिश कर रहा है। मंत्रालय के मुताबिक गलत सूचनाओं को कुछ लोग भारत और श्रीलंका के बेहतर हो रहे रिश्तों को खराब करने के लिए फैला रहे हैं। वह भारत को एक सच्चा मित्र मानते हैं और और इस रिश्ते को प्रगाढ़ करने के लिए वह पीएम मोदी के साथ आगे भी काम करना चाहते हैं।’

 


लास एंजिलिस - अनंत तारों और ग्रहों को खुद में समेटे हमारा ब्रह्मांड अनगिनत रहस्यों से भरा पड़ा है। दुनिया भर के खगोलविदों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला यह ब्रह्मांड विज्ञान के विकास के साथ एकएक करके अपने रहस्य खोल रहा है। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने एक बड़ी खोज की है। दरअसल, खगोलविदों को शुरुआती ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं का अब तक का सबसे बड़ा समूह मिला है। इसकी उत्पत्ति का समय बिग बैंग के मात्र दो अरब वर्षों बाद का बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में जानने में मदद मिल सकेगी।
अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, डेविस के शोधकर्ताओं का कहना है कि आकाशगंगाओं के इस समूह को हाइपीरियन नाम दिया गया है। चिली में स्थापित यूरोपियन साउथर्न ऑब्जरवेटरी के बेहद विशाल टेलीस्कोप पर लगे वीआइएमओएस उपकरण का इस्तेमाल कर इसकी पहचान की गई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, हाइपीरियन का द्रव्यमान सूरज से 10 लाख अरब गुना अधिक है, जो इसे ब्रह्मांड के निर्माण के बाद से अब तक खोजी गई संरचनाओं में सबसे विशाल संरचना बनाता है।
इटली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ
एस्ट्रोफिजिक्स के ओल्गा कुकासीटी कहते हैं, यह पहला मौका है, जब हमें ब्रह्मांड में कोई इतनी विशाल संरचना मिली है और वो भी बिग बिंग के दो अरब साल बनी हुई। सामान्य तौर पर इस तरह की संरचनाओं को न्यून रेडशिफ्ट्स कहते हैं, जिनका मतलब है कि उस समय की संरचनाएं जब ब्रह्मांड के पास इतनी बड़ी चीजों को विकसित करने और निर्माण करने के लिए अधिक समय था। आकाशगंगाओं का यह समूह बेहद आश्चर्यजनक है क्योंकि इसका निर्माण तब हुआ जब ब्रह्मांड आज की तुलना में बेहद युवा था।
माना जाता है कि बिग बैंग की घटना करीब 13.7 अरब वर्ष पहले हुई थी, जबकि यह संरचना बिग बैंग के मात्र दो अरब साल बाद की बताई जा रही है। इस तरह से ब्रह्मांड के विस्तार के शुरुआती दौर में ही आकाशगंगाओं का इतना विशाल समूह बन गया था, जिसकी पहचान अब जाकर की जा सकी है।
इस तरह की गई तलाश
सेक्सटंस यानी षडंश तारामंडल में स्थित हाइपीरियन की खोज एक नवीन तकनीक के जरिये की गई है। इसमें वीआइएमओएस के अल्ट्रा-डीप सर्वेक्षण से प्राप्त डाटा का विश्लेषण किया गया, जिसके बाद इसका पता चला। वीआइएमओएस ऐसा उपकरण है, जो ब्रह्मांड में मौजूद सैकड़ों आकाशगंगाओं की दूसरी एक ही बार में पता लगा सकता है। इससे प्राप्त डाटा के जरिये आकाशगंगाओं के इस विशाल समूह का पता चल सका।


नई दिल्ली - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि उन्हें लगता है सऊदी अरब के लापता पत्रकार जमाल खशोगी मर चुके हैं। साथ ही उन्होंने इसमें सऊदी अरब का हाथ होने पर बेहद गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। ट्रंप का यह बयान सऊदी अरब और तुर्की के दौरे से लौटे विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ द्वारा जांच की जानकारी देने के बाद आया है।
इस महीने की शुरुआत में तुर्की की राजधानी इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के दूतावास में प्रवेश करने के बाद से लापता हुए खशोगी के संबंध में आशंका है कि दूतावास के भीतर ही उनकी हत्या कर दी गई है। इस घटना के बाद से विश्व भर में और उससे भी ज्यादा अमेरिका में रोष है। खशोगी अमेरिका के स्थायी निवासी थे और वॉशिंगटन पोस्ट अखबार के लिए काम कर रहे थे।
एक अभियान रैली के लिए मोंटाना रवाना होने के दौरान उन्होंने ज्वाइंट फोर्स बेस एंड्र्यूज में संवाददाताओं से कहा, मुझे निश्चित तौर पर ऐसा ही लगता है। यह बेहद दुखद है। यह पहली बार है जब अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर खशोगी की मौत के संबंध में कुछ स्वीकार किया है। ट्रंप ने कहा, हम कुछ जांचों और परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। हमारे पास बहुत जल्द परिणाम होंगे और मुझे लगता है कि मैं बयान देने वाला हूं और बहुत सख्त बयान देने वाला हूं। लेकिन हम तीन अलग-अलग जांचों का इंतजार कर रहे हैं और हम बहुत जल्द इसकी तह तक पहुंचने में कामयाब हो जाएंगे।
ट्रंप ने अब तक सऊदी अरब के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई करने के बारे में कुछ नहीं कहा था। ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान पोम्पिओ ने सलाह दी थी कि सऊदी अरब को जांच पूरी करने के लिए कुछ और समय दिया जाना चाहिए।


ह्यूस्टन - अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने भारतीय मूल की अमेरिकी महिला को ह्यूस्टन में मानव तस्करी से लड़ने में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक ह्यूस्टन के मेयर सिलवेस्टर टर्नर की मानव तस्करी पर विशेष सलाहकर मीनल पटेल डेविस को गत सप्ताह व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम में मानव तस्करी से लड़ने के लिए राष्ट्रपति पदक प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद रहे।
'हिंदू' जैसा नहीं था सरनेम, अमेरिका ने भारतीय वैज्ञानिक को गरबा वेन्यू से बाहर निकाला, ट्वीट कर सुनाई आप बीती
पुरस्कार पाने के बाद डेविस ने कहा, ''यह अविश्वसनीय है। यह इस क्षेत्र में देश का सर्वोच्च सम्मान है। उन्होंने कहा, ''मेरे माता-पिता भारत से यहां आए थे। मैं अमेरिका में जन्म लेने वाली अपने परिवार की पहली सदस्य थी तो कई साल पहले मेयर कार्यालय से अब व्हाइट हाउस तक आना अविश्वसनीय है। जुलाई 2015 में नियुक्त डेविस ने अमेरिका के चौथे सबसे बड़े शहर में नीतिगत स्तर पर और व्यवस्था में बदलाव लाकर मानव तस्करी से निपटने पर स्थानीय स्तर पर बड़ा योगदान दिया। डेविस ने कनेक्टिकट विश्वविद्यालय से एमबीए और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की है।


हांगकांग - हांगकांग, मकाउ और चीनी शहर झुहैइ को जोड़ने वाले दुनिया के सबसे बड़े समुद्री पुल के उद्घाटन समारोह का एलान चीन ने कर दिया है। इस एलान के साथ ही परियोजना के आलोचकों ने इसमें बरती गई अपारदर्शिता के लिए बीजिंग को घेरना शुरू कर दिया है। पुल के समर्थक इसे इंजीनियरिंग की एक बेहतरीन मिसाल बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ आलोचक इसे एक खर्चीली और हांगकांग पर अपना प्रभाव बढ़ाने की बीजिंग की एक साजिश बता रहे हैं। पुल के उद्घाटन समारोह में चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग के शामिल होने की भी सूचना थी। स्थानीय मीडिया को मंगलवार को पुल के उद्घाटन समारोह के लिए निमंत्रण भेजा गया था लेकिन इसके बाद उनको कोई अधिकृत जानकारी नहीं दी गई और यह भी बताया नहीं गया कि पुल पर परिचालन शुरू हो गया या नहीं।
दुनिया को चौंकाया
चीन ने 55 किमी लंबा समुद्री पुल बनाकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। यह दुनिया का सबसे लंबा समुद्री पुल है।पुल हांगकांग को चीन के दक्षिणी शहर झूहाई और मकाउ के गैमलिंग एनक्लेव से जोड़ेगा। नौ साल से बन रही इस पुल को बनाने में एफिल टावर के मुकाबले 60 गुना ज्यादा स्टील खर्च हुआ है। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार इसकी तैयारी में छह साल लग गये और 31 दिसबंर 2017 को इसका काम पूरा हुआ। दुनिया के इस सबसे लंबे पुल पर पैदल सवार नहीं चल सकेंगे। वहीं चीन से जाने वाली कार को हांग कांग में घुसने से पहले रोड में अपनी साइड बदलनी होगी। क्योंकि हांग कांग में भारत की तरह ट्रैफिक बायीं तरफ चलता है।
द्वीप के साथ अंडरवाटर टनल भी बनी
द्वीप पुल निर्माण का सबसे कठिन हिस्सा 22.9 किमी लंबा और 6.7 किमी गुफा में सड़क का निर्माण था। इसमें एक अंडरवाटर टनल भी तैयार की गई है जिसे इस निर्माण कार्य का सबसे जटिल हिस्सा बताया गया है। वहीं एक कृत्रिम द्वीप भी बनाया गया, जो बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। इस Y शेप पुल के निर्माण से हांगकांग और चीन के दक्षिणी शहर झूहाई की दूरी तीन घंटे चालीस मिनट से घटकर 30 मिनट हो गयी है। बता दें कि हांगकांग की गिनती विश्व का सबसे बड़े व्यवसायिक शहरों में होती है।
120 वर्षों तक की उम्र
अधिकारियों के मुताबिक यह पुल अगले 120 सालों तक इस्तेमाल किया जा सकेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह पुल कारोबार में इजाफा करेगा और इससे यात्रा में लगने वाला समय 60 फीसदी तक घटेगा। इस पुल को बनाने पर चीन सरकार ने कितना खर्च किया है इसका आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। लेकिन माना जा रहा है इसे बनाने मे तकरीब 15.1 अरब डॉलर खर्च हुए हैं। हालांकि आलोचक इसे सफेद हाथी बताकर इसकी आलोचना में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
पुल की खासियत
-55 किलोमीटर लंबे इस पुल का निर्माण वर्ष 2009 में शुरू हुआ था।
-पर्ल रिवर ईस्टूरी के ऊपर बने सांप नुमा पुल में पानी के अंदर सुरंग भी बनाई गई है।
-पुल हांगकांग के लंताऊ द्वीप और चीन के दक्षिणी शहर झुहैइ और गैंबलिंग को मकाउ से जोड़ता है।

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नई दिल्ली - लोकसभा चुनाव से पहले भारत और इसकी सरकार को लक्ष्य कर चीन और पाकिस्तान से चलाए जा रहे दुष्प्रचार का जबाब देने के लिए केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश से लेकर राजस्थान की सीमा तक डेढ़ दर्जन एफएम चैनल शुरू किए हैं। हाल में दोनों पड़ोसी देशों से भारत विरोधी दुष्प्रचार बढ़ने के बाद यह कदम उठाया गया है। पाक सीमा के करीब जम्मू-कश्मीर में उच्च शक्ति वाला…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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