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नई दिल्‍ली। चीन के सान्‍या शहर में 8 दिसंबर की रात मेक्सिको वेनेसा पोंसे डि लियोन मिस वर्ल्‍ड का ताज पहनाया गया। यह पल जाहिरतौर पर न सिर्फ वेनेसा के लिए बल्कि पूरे मेक्सिको के लिए बेहद खास था। खास इसलिए क्‍योंकि वेनेसा ये खिताब जीतने वाली मेक्सिको की पहली महिला हैं। मिस वर्ल्ड 2018 के टॉप फाइव में मिस मेक्सिको वेनेसा पोंसे डि लियोन के अलावा मिस थाईलैंड निकोलीन पिचापा लिमनकन, मिस यूगांडा क्विन अब्नेक्यो, मिस जमैका कदिजा रोबिनसन और मिस बेलारूस मारिया वसिलविच शामिल थीं।26 वर्षीय वेनेसा को मिस वर्ल्‍ड का ताज भारत की मानुषी छिल्‍लर ने पहनाया जिन्‍होंने यह खिताब पिछले वर्ष जीता था। मानुषी छिल्लर ने 17 साल के अंतराल के बाद भारत को 2017 का मिस वर्ल्ड खिताब दिलवाया था। जहां तक भारत की बात है तो इस बार इस खिताब के लिए सान्‍या में मिस इंडिया 2018 अनुक्रीति वास ने हिस्‍सा लिया था। लेकिन टॉप 30 तक पहुंचने के बाद उनका सफर थम गया। लेकिन इस बात को हर कोई जानता है। जो नहीं जानता वो ये कि आखिर किस जवाब की वजह से वेनेसा को यह खिताब मिला।आप इतना जरूर जानते होंगे कि मिस वर्ल्‍ड में शामिल सभी प्रतियोगियों को कई चरणों से गुजरना होता है। मिस वर्ल्‍ड के लिए जो अंतिम प्रतियोगी मंच पर पहुंचते हैं उन्‍हें वहां मौजूद चयनकर्ताओं के सामने कुछ सवालों का जवाब देना होता है। यह इस प्रतियोगिता का अंतिम चरण होने के साथ बेहद खास भी होता है। चयनकर्ताओं में अलग-अलग क्षेत्रों के दिग्‍गज लोग शामिल होते हैं। ऐसे में प्रतियोगियों का जवाब ही उन्‍हें ताज दिलाने की काबलियत रखता है। सान्‍या में शनिवार 8 दिसंबर 2018 की रात जो समारोह आयोजित किया गया वहां पर भी इस चरण में वेनेसा के अलावा कई प्रतियोगी शामिल हुईं। यह सभी के लिए बेहद उत्‍सुक करने वाली बात है कि आखिर वेनेसा से क्‍या पूछा गया और उन्‍होंने उसका क्‍या जवाब दिया कि वह मिस वर्ल्‍ड का ताज जीत गईं।दरअसल, फाइनल राउंड में वेनेसा का नंबर आने पर उनसे पूछा गया कि मिस वर्ल्ड बनने पर वे किस तरह दूसरों की मदद करेंगी? इसके जवाब में वेनेसा ने कहा कि वह अपने पद का उसी तरह इस्तेमाल करेंगी जैसा पिछले तीन साल से करती आ रही हैं। उनका कहना था कि हमें सभी का ध्यान रखना चाहिए, प्यार करना चाहिए। किसी की मदद करना बहुत मुश्किल काम नहीं है। आप जब भी कभी बाहर जाएं तो कोई ना कोई ज़रूर होगा जिसे मदद की दरकार रहती है, तो आप हमेशा उसकी मदद के लिए तैयार रहें। यही वो जवाब था जिसने वेनेसा को मिस वर्ल्‍ड का ताज दिलवाया। उनका यह जवाब वहां मौजूद सभी चयरकर्ताओं को पूरी तरह से सटीक लगा।वेनेसा का जन्म मेक्सिको के मुआनजुआटो शहर में हुआ है। वह करीब 174 सेंटिमीटर लंबी हैं। इसका जिक्र यहां पर इसलिए भी करनान जरूरी है क्‍योंकि इस प्रतियोगिता में शामिल महिलाओं का कद काफी मायने रखता है। उन्होंने इसी साल मई में मिस मेक्सिको का ख़िताब जीता था। उनको इंग्लिश के अलावा स्पैनिश भाषा भी आती है। इसके अलावा अपना खाली समय वह अपना पसंदीदा आउटडोर गेम खेलकर बिताती हैं। इसके अलावा वेनेसा को वॉलीबॉल खेलना भी पसंद है। इन सभी के अलावा वह काफी समय से लड़कियों के पुनर्वास के लिए भी काम कर रही हैं। वह इस तरह का काम करने वाली एक संस्‍था की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर भी हैं।यहां पर ये भी ध्‍यान देने वाली बात है कि वेनेसा पोंसे डि लियोन ने इंटरनेश्नल बिजनेस में ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने ह्यूमन राइट्स में भी डिप्लोमा हासिल किया है। उनकी खास बात ये भी है कि वह आदिवासी इलाकों के बच्चों को अलग-अलग संस्कृतियों की शिक्षा देने वाले नेनेमी नामक स्कूल में पढ़ाती भी हैं। ही उन्होंने स्कूबा डाइविंग में भी सर्टिफिकेट प्राप्त किया है।

वाशिंगटन। आर्मी जनरल मार्क मिली को ज्वाइंट चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का अगला चेयरमैन मनोनीत किया गया है। यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को की। हालांकि मिली के शीर्ष सैन्य पद पर नियुक्ति के लिए सीनेट को मंजूरी देना बाकी है। नियमों के मुताबिक डनफोर्ड का ज्वाइंट चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का कार्यकाल एक अक्टूबर 2019 तक है।ट्वीट कर फैसले की जानकारी देते हुए ट्रंप ने कहा कि मिली निर्धारित तिथि से वर्तमान चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और मैरीन जनरल जोसेफ डनफोर्ड की जगह लेंगे। ट्रंप ने कहा, 'मैं देश की सेवा करने वाले इन दोनों सैन्य अधिकारियों का आभारी हूं।'ज्वाइंट चीफ आर्मी स्टाफ के प्रवक्ता ने कहा कि संकेतों से ऐसा लगता है कि डनफोर्ड अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, लेकिन इस मामले पर व्हाइट हाउस ज्यादा बता सकता है। कर्नल पैट्रिक रायडर ने बताया, 'नए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के चेयरमैन के रूप में जनरल मिली के मनोनयन पर जनरल डनफोर्ड ने उन्हें बधाई दी है। उन्होंने उनके साथ शांति और युद्ध दोनों ही समय में काम किया है।

नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान और अमेरिका के बीच रिश्‍तों की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। ऐसे में पाक पीएम इमरान खान का बयान इस खाई को और बड़ा कर सकता है। पाकिस्‍तान को लेकर पहले से ही अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के मन में काफी नाराजगी भरी हुई है। ऐसे में इमरान के भाड़े के ट्टटू वाला बयान भविष्‍य में और गुल खिलाएगा। यह बात जगजाहिर है कि इस तरह तिलमिलाने की वजह पाकिस्‍तान को मिलने वाली आर्थिक मदद का रद होना है। इस आर्थिक मदद का इतिहास भी काफी लंबा है। पाकिस्‍तान को आर्थिक मदद देना कभी अमेरिका के लिए मजबूरी रहा तो कभी उसकी जरूरत बन गया। अफगानिस्‍तान ने भी इसमें काफी बड़ी भूमिका निभाई है।
दशकों से रहे उतार-चढ़ाव के रिश्‍ते:-पाकिस्‍तान के साथ रिश्‍तों की बात चली है तो आपको बता दें कि दोनों के बीच रिश्‍ते अब से नहीं बल्कि दशकों से खराब रहे हैं। यही वजह है कि पाकिस्‍तान को अमेरिका से समय-समय पर मिलने वाली वित्‍तीय सहायता को कम या पूरी तरह से रोका तक गया है। ऐसा बिल क्लिंटन और बराक ओबामा के समय में भी हमें देखने को मिला है। पाकिस्‍तान की तरफ से हर बार इसको लेकर नाराजगी जाहिर जरूर की गई है लेकिन जिस तरह से इमरान खान का बयान सामने आया है, उस तरह से पहले किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं बोला है। इसमें कोई शक नहीं है कि वर्षों से पाकिस्‍तान अमेरिका से मिलने वाले पैसे से अपनी सही और गलत जरूरतों को पूरा करता आया है। अमेरिका द्वारा सहायता रोके जाने के बाद उसका तिलमिलाना भी इसी वजह से है।
पाक की खराब वित्‍तीय हालत:-पाकिस्‍तान की खराब वित्‍तीय हालत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अंतरराष्‍ट्रीय जगत में उसकी साख लगातार कमजोर हो रही है। विभिन्‍न अंतरराष्‍ट्रीय वित्‍तीय संस्‍थाएं उससे हाथ खींच रही हैं। वहीं दूसरी तरफ चीन का बढ़ता कर्ज उसको लगातार अंदर तक खोखला कर रहा है। चीन एक कर्ज को चुकाने के लिए दूसरा कर्ज उसपर लाद रहा है। ऐसे में देश की अर्थव्‍यवस्‍था लगातार चरमरा रही है। बहरहाल, अमेरिका से उसको मिलने वाली वित्‍तीय मदद को देखने के लिए जरूरी है कि कुछ अतीत के पन्‍नों को पलट लिया जाए।
अमेरिका के लिए खास था पाकिस्‍तान;-अमेरिका में सितंबर 2001 में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्‍तान अमेरिका का एक बड़ा सहयोगी बनकर उभरा था। आतंकियों के खात्‍मे के साथ अलकायदा के ओसामा बिन लादेन के खात्‍मे को लेकर अमेरिका काफी संजीदा था। इसके अलावा हक्‍कानी नेटवर्क जो बार-बार अमेरिका के लिए खतरा बन रहा था उसको भी वह खत्‍म करना चाहता था। ऐसे में स्‍वाभाविक तौर पर पाकिस्‍तान से बेहतर सहयोगी उसको मिलना काफी मुश्किल भी था। इसके पीछे एक दूसरी वजह अफगानिस्‍तान भी था। अपने मकसद को पूरा करने के लिए वर्ष 2001 से वर्ष 2017 तक अमेरिका ने पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर की सैन्य और आर्थिक मदद दी। वर्ष 2009 और वर्ष 2014 के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को सशर्त 8 अरब डॉलर की मदद दी। शर्त थी कि यदि पाकिस्‍तान ने आतंकियों पर कार्रवाई नहीं की तो आर्थिक मदद रोक दी जाएगी। 2008 में इस तरह की खबर आम थी कि अमेरिका द्वारा पाकिस्‍तान को दिए गए 5 अरब डॉलर से अधिक की सैन्‍य मदद का उसने गलत इस्‍तेमाल किया है।
आर्थिक मदद पर सवाल;-आपको बता दें कि अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पद संभालते ही उन्‍होंने पाकिस्‍तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद पर सवाल खड़ा किया था। उनका साफतौर पर कहना था कि इसका अमेरिका को कोई फायदा नहीं हुआ है। हाल ही में उन्‍होंने एक इंटरव्यू में यहां तक कहा कि पाकिस्तान में हर किसी को पता था कि ओसामा बिन लादेन सैन्य अकादमी के करीब रहता था, लेकिन पाकिस्‍तान से इसकी जानकारी अमेरिका को नहीं दी। इससे पूर्व जनवरी 2018 में भी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने 15 वर्षों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर बतौर आर्थिक मदद दे कर बेवकूफ़ी की थी। इसके बदले में पाकिस्‍तान ने अमेरिका को सिर्फ धोखा और झूठ ही दिया।
आर्थिक मदद का लंबा इतिहास:-पाकिस्‍तान को मिलने वाली आर्थिक मदद की शुरुआत केवल ओबामा या ट्रंप प्रशासन से ही शुरू नहीं हुई थी, बल्कि इसकी शुरुआत पाकिस्‍तान के बनने से ही हो गई थी। शीत युद्ध के दौरान 2.5 अरब डॉलर की आर्थिक मदद और 70 करोड़ डॉलर सैन्य मदद दी गई थी। लेकिन इसका उपयोग भारत के खिलाफ करने का उसको खामियाजा यह उठाना पड़ा कि 1965 और 1971 के बीच सैन्य मदद के तौर पर उसको 2 करोड़ 60 लाख डॉलर दिए गए। 1970 के दशक के अंत तक यह मदद 29 लाख डॉलर रह गई थी। 1965 से 1979 के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को 2 अरब 55 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद दी थी। लेकिन इस दौर में पाकिस्‍तान ने गुपचुप तरीके से अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू किया था। इसकी भनक लगते ही अमेरिकी राष्‍ट्रपति जिमी कार्टर ने पाक को दी जाने वाली मदद को रोक दिया था।
अफगानिस्‍तान की भूमिका:-यह दौर कुछ समय तक रहा लेकिन अफगानिस्‍तान में रूस के कब्‍जे के बाद हालात पूरी तरह से बदल गए और एक बार फिर से पाकिस्‍तान अमे‍रिका के करीब पहुंच गया था। यही वजह थी कि 1980 और 1990 के बीच अमेरिका ने पाकिस्‍तान को 5 अरब डॉलर की आर्थिक मदद दी थी। इसके अलावा अफगानिस्‍तान में रूस के खिलाफ लड़ने के लिए पाकिस्‍तान को एफ 16 लड़ाकू विमान और दूसरी तकनीक भी उसको दी गई थी। इसके बाद 1990 में एक बार फिर अमेरिका ने इसमें कटौती की। 1990 और 2000 के बीच में अमरीका ने पाकिस्तान को सैन्य मदद के तौर पर सिर्फ 52 लाख डॉलर और आर्थिक मदद के तौर पर करीब 40 करोड़ डॉलर दिए।

बीजिंग। चीन में दो महीने पहले सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल रहे 10 पूर्व सैनिकों को गिरफ्तार किया गया है। यह प्रदर्शन पूर्व सैनिकों ने पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े अन्य लाभ नहीं मिलने से उपजे असंतोष के चलते किया था।सरकारी चैनल के मुताबिक, शैंडोंग प्रांत में चार से सात अक्टूबर तक प्रदर्शन हुआ था। इसमें चीन के अलग-अलग हिस्सों से करीब 300 लोग शामिल हुए थे। सरकार ने इस प्रदर्शन को गैरकानूनी करार दिया था। जन सुरक्षा मंत्रालय के हवाले से खबर में बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प हुई थी। कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए थे।चीन में पेंशन व अन्य भत्तों को लेकर पूर्व सैनिकों में लंबे समय से असंतोष व्याप्त है। पिछले साल सैकड़ों पूर्व सैन्यकर्मियों ने बीजिंग में दो दिन तक प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनों और पूर्व सैनिकों की मांग को देखते हुए चीन की सरकार ने उचित कदम उठाने का वादा किया है।इस साल चीन में इन मामलों पर विचार के लिए मंत्रालय भी गठित किया गया है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2015 में कहा था 2017 के आखिर तक सेना में 3,00,000 सैनिकों की कटौती की जाएगी। सरकार का कहना है कि कटौती का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया है।

पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस में ईंधन कर में बढ़ोतरी के खिलाफ लोगों का 'येलो वेस्ट' आंदोलन हिंसक हो चुका है। ये विरोध प्रदर्शन अब बेल्जियम और नीदरलैंड तक पहुंच गया है। पुलिस और 'येलो वेस्ट' प्रदर्शनकारियों के बीच शनिवार को हुई भिड़ंत से तनाव और ज्यादा बढ़ गया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस का प्रयोग किया। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद, प्रधानमंत्री एडवर्ड फिलिप ने कहा कि अब तक 481 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 200 लोग सिर्फ शनिवार को गिरफ्तार किए गए थे। सरकार को आशंका है कि आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और उग्र हो सकता है।सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए शनिवार को लगभग 5,000 प्रदर्शनकारी पेरिस शहर के बीचो-बीच जमा हो गए। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पेरिस में लगभग 8,000 अधिकारियों और 12 सशस्त्र वाहनों को तैनात किया गया है। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर पूरे देश में लगभग 90,000 सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आंदोलन रोकने के लिए अब तक कोई ठोस फैसला नहीं किया है। प्रदर्शनकारी सरकार के विरोध में 'मैक्रों इस्तीफा दो' के नारे के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। पेरिस में व्यापक प्रदर्शन के कारण हाई अलर्ट जारी किया गया है।
क्या है येलो वेस्ट आंदोलन?:-बता दें कि फ्रांस में ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर आम लोगों में बहुत गुस्सा है। इसके लिए ये लोग सीधेतौर पर राष्ट्रपति मैंक्रो को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसी के विरोध में अक्टूबर में सोशल मीडिया पर 'येलो वेस्ट' आंदोलन की शुरुआत हुई। चूंकि ये प्रदर्शनकारी पीली जैकेट पहनकर आंदोलन कर रहे हैं, इसलिए इन्हें 'येलो वेस्ट' नाम दिया गया है।

नई दिल्‍ली। कैंसर का जिक्र आते ही हम लोग काफी गंभीर हो जाते हैं। ऐसे यदि किसी अपने पर इस तरह की परेशानी की आशंका होती है तो मन का व्‍याकुल होना जरूरी है। वह भी तब जब शरीर में कैंसर होने को प्रमाणित करने वाले टेस्‍ट की लंबी लिस्‍ट है। कई बार तो रोगी इसी चिंता में दूसरी बिमारियों से ग्रसित हो जाता है कि वह कैंसर से ग्रसित है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि अब महज दस मिनट के टेस्‍ट में यह पता लगाया जा सकता है कि वह व्‍यक्ति कैंसर से ग्रसित है या नहीं। इसको लेकर हुए शोध में शोधकर्ताओं को जबरदस्‍त सफलता मिली है। यह शोध जर्नल नेचर कम्‍यूनिकेशन में प्रकाशित हुआ है।यह शोध आस्‍ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने किया है। इस टेस्‍ट के जरिए शरीर में कहीं भी कैंसर सेल का आसानी से पता लगाया जा सकता है। इस घातक बीमारी के लिए यह टेस्‍ट किसी वरदान से कम नहीं है। यूनिवर्सिटी ऑफ क्‍वींसलैंड के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि पानी में कैंसर एक यूनीक डीएनए स्‍ट्रक्‍चर बनाता है। इस टेस्‍ट की सबसे अच्‍छी बात ये है कि यह कैंसर की शुरुआत होने पर ही इसकी जानकारी दे देगा। शोध में यह बात सामने आई है कि जिस व्‍यक्ति के शरीर में कैंसर सैल्‍स जन्‍म लेती हैंउस डीएनए मोलिक्‍यूल पूरी तरह से अलग थ्रीडी नेनोस्‍ट्रक्‍चर बनाते हैं जो डीएनए की नॉर्मल श्रंख्‍ला से अलग होती हैं। इस टेस्‍ट के तहत होने वाले स्‍क्रीनींग टेस्‍ट में सरवाइकल, ब्रेस्‍ट और प्रोस्‍टेट कैंसर का भी पता आसानी से चल सकता है। यहां पर ये भी बताना बेहद जरूरी होगा कि दुनिया भर में कैंसर से बचने वालों की संख्‍या अमेरिका में जहां 40 फीसद है वहीं कम आय वाले देशों में यह काफी कम है।

नई दिल्‍ली। एक तरफ जहां डोनाल्‍ड ट्रंप और किम जोंग उनके बीच दूसरी मुलाकात करने की संभावना जताई जा रही है वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सैटेलाइट से मिली जानकारी लगातार उत्तर कोरिया की पोल खोल रही हैं। ताजा मामले में एक बार फिर अमेरिकी सैटेलाइट द्वारा खींची गई तस्‍वीरों के माध्‍यम से ऐसी जगह सामने आई है जिसको लॉन्‍ग रेंज मिसाइल बेस बताया जा रहा है। यह अब तक दुनिया…
वाशिंगटन। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि चीन के हिरासत शिविरों में अल्पसंख्यक समुदायों के आठ लाख से लेकर 20 लाख तक लोगों को बंदी बनाकर रखा गया है। देश में मानवाधिकारों का बड़े पैमाने पर हो रहा उल्लंघन गंभीर चिंता की बात है।अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट की विदेश मामलों की समिति के समक्ष पेश हुए ह्यूमन राइट डेमोक्रेसी एंड लेबर ब्यूरो के डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी स्कॉट बुस्बी…
संयुक्त राष्ट्र। भारत की पूर्व राजनयिक प्रीति सरन को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार समिति (सीईएससीआर) की एशिया-प्रशांत सीट के लिए निर्विरोध चुन लिया गया है। विदेश मंत्रालय में सचिव पद से सेवानिवृत्त सरन को भारत ने नवंबर में इस सीट के लिए नामित किया था।सीईएससीआर 18 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति है। यह समिति आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों के क्रियान्वयन की निगरानी…
वाशिंगटन। अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स का ड्रैगन अंतरिक्ष यान छह हजार पाउंड (करीब 2700 किलोग्राम) सामान लेकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस) के लिए रवाना हो गया। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लिए स्पेसएक्स के यान का यह 16वां अभियान है।ड्रैगन ने बुधवार को फ्लोरिडा के केप केनवेरेल एयर फोर्स स्टेशन के स्पेस लांच कांप्लेक्स से स्थानीय समयानुसार दोपहर 1.16 बजे उड़ान भरी। नासा के अनुसार, ड्रैगन अपने साथ…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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