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उट्रेच। नीदरलैंड के उट्रेच शहर में गोलीबारी की खबर है। बताया जा रहा है कि इस गोलीबारी में कई लोग घायल हैं। पुलिस के अनुसार कई लोगों को चोटें आयी हैं। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, घटनास्थल पर आतंकवाद निरोधी पुलिस पहुंच गई है।गोलीबारी की घटना स्थानीय समयानुसार 10:45 बजे पर बताई गई है। हालांकि अब गोलीबारी नहीं हो रही है। पुलिस ने अपना ऑपरेशन जारी कर दिया है। आपातकाल की स्थिति में घटनास्थल पर एंबुलेंस तैनात की गई हैं।यूट्रेक्ट पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि उट्रेच में 24 ओकट्राप्लिन पर गोलीबारी एक घटना हुई है। आसपास के इलाके को घेर लिया गया है और हम इस मामले की जांच कर रहे हैं।घायलों की मदद के लिए हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं। स्थानीय मीडिया ने ट्राम के आसपास नकाबपोश, सशस्त्र पुलिस और आपातकालीन वाहनों की तस्वीरें दिखाईं हैं जो एक पुल के पास दिख रही हैं। क्षेत्र में ट्राम यातायात को पूरी तरह रोक दिया गया है।बता दें कि हाल ही में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में एक सिरफिरे ने मस्जिद में घुसकर ताबड़तोड़ गोलीबारी की थी। इस गोलीबारी में 49 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। पुलिस ने गोलीबारी करने वाले ऑस्ट्रेलियाई नागरिक को गिरफ्तार कर लिया था। न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों पर आतंकी हमला करने वाले हमलावर ऑस्ट्रेलियाई बंदूकधारी ने कहा कि अब वह अपना केस खुद लड़ेगा। ब्रेंटन टैरंट हत्या के आरोप में क्राइस्टचर्च जिला अदालत में पेश हुआ। वकील रिचर्ड पीटर्स ने बताया कि वह वकील नहीं चाहता है। आरोपित खुद ही अपना केस लड़ना चाहता है।
क्‍या है क्राइस्‍टचर्च हमला:-न्‍यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में एक हमलावार ने अचानक से गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमलावर की उम्र 28 वर्ष बताई गई है। इस घटना के बाद न्यूजीलैंड पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें से एक को छोड़ दिया गया है और दो लोग हिरासत में हैं। बता दें कि न्यूजीलैंड की गिनती दुनिया के सबसे शांत देशों में होती है। मौजूद लोगों के मुताबिक हमलावर ने पांच मिनट तक गोलीबारी की। हमलावर गोलीबारी के दौरान Facebook पर लाइव था। इस दौरान उसने कहा कि वह 28 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई है। उसने अपना नाम ब्रेंटन टैरंट बताया। वह इस हमले की पिछले दो वर्षों से योजना बना रहा था।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को दुबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इसके चलते उनका नर्वस सिस्टम कमजोर हो गया है। मुशर्रफ की पार्टी ने बताया कि उनका इलाज पहले से ही चल रहा था, लेकिन उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद शनिवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।75 साल के मुशर्रफ मार्च 2016 से ही दुबई में रह रहे हैं। उनके उपर 2007 में संविधान को भंग करने का आरोप लगा था, जिसमें उन्हें साल 2014 में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद से वह सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए दुबई में ही रह रहे हैं। ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एपीएमएल) के महासचिव मेहरिन अदम मलिक ने रविवार को कहा कि अचानक तबियत बिगड़ने के बाद शनिवार रात मुशर्रफ को अस्पताल ले जाया गया। पार्टी के ओवरसीज़ प्रेसिडेंट अफजल सिद्दीकी ने बताया कि मुशर्रफ को एमाइलॉइडोसिस (amyloidosis) से पीड़ित हैं। वह लंबे समय से इस बीमारी का इलाज करा रहे हैं।पार्टी के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति को डॉक्टरों ने पूर्ण रूप से ठीक होने तक आराम करने की सलाह दी है। बता दें कि सिद्दीकी ने पिछले साल अक्टूबर में मुशर्रफ की बीमारी के बारे में जानकारी दी थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति की बीमारी ने उनका नर्वस सिस्टम कमजोर हो गया है। उस समय लंदन में उनका इलाज चल रहा था। एमाइलॉइडोसिस के चलते प्रोटीन शरीर के विभिन्न अंगों में जमा होने लगता है। सिद्दीकी ने कहा कि इसके चलते परवेज मुशर्रफ को खड़े होने और चलने में कठिनाई होती है। सिद्दीकी ने कहा कि मुशर्रफ का इलाज पांच या छह महीने तक जारी रह सकता है। पूरी तरह ठीक होने पर ही मुशर्रफ पाकिस्तान लौटेंगे ।
अमाइलॉइडोसिस (amyloidosis) क्या है;-अमाइलॉइडोसिस (amyloidosis) एक दुर्लभ बीमारी है जो तब होती है जब एमाइलॉयड नामक पदार्थ आपके अंगों में बनने लगता है। अमाइलॉइड एक असामान्य प्रोटीन है जो बोन मैरो में उत्पन्न होता है और यह किसी भी अंग में जमा हो सकता है। अमाइलॉइड एक असामान्य प्रोटीन है जो बोन मैरो में उत्पन्न होता है और यह किसी भी अंग में जमा हो सकता है। इससे ज्यादातर हृदय, गुर्दा, नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र प्रभावित होता है।

क्राइस्टचर्च। न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों पर आतंकी हमला करने वाला हमलावर आस्ट्रेलियाई बंदूकधारी अब अपना केस खुद लड़ना चाहता है। बता दें कि न्यूजीलैंड के दो मस्जिदों में सामूहिक रूप से गोलीबारी कर 50 लोगों हत्‍या करने का इस शख्‍स पर जुर्म है। शनिवार को ब्रेंटन टैरंट हत्या के आरोप में क्राइस्टचर्च जिला अदालत में पेश हुआ। वकील रिचर्ड पीटर्स ने बताया कि वह वकील नहीं चाहता है। आरोपित खुद ही अपना केस लड़ना चाहता है।
क्‍या है क्राइस्‍टचर्च हमला:-न्‍यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की मस्जिदों में हुई एक हमलावार ने अचानक से गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमलावर की उम्र 28 वर्षीय बताई जा रही है। इस घटना के बाद न्यूजीलैंड पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें से एक को छोड़ दिया गया है और दो लोग हिरासत में हैं। बता दें कि इस घटना में 50 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 48 लोग घायल बताए जा रहे हैं। बता दें कि न्यूजीलैंड की गिनती दुनिया के सबसे शांत देशों में होती है। मौजूद लोगों के मुताबिक हमलावर ने पांच मिनट तक गोलीबारी की। हमलावर गोलीबारी के दौरान Facebook पर लाइव था। इस दौरान उसने कहा कि वह 28 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई है। उसने अपना नाम ब्रेंटन टैरंट बताया। वह इस हमले की पिछले दो वर्षों से योजना बना रहा था।मस्जिदों में हुए आतंकी हमले में 50 लोगों को मौत में से सात भारतीय परिवार भी शामिल हैं। इसकी जानकारी भारतीय उच्चायोग से मिली थी। उच्चायोग ने ट्वीट में कहा था कि 'हम बहुत भारी दिल ये यह खबर साझा कर रहे हैं कि क्राइस्टचर्च में आतंकी हमले में हमने अपने सात नागरिकों की जिंदगियां भी गंवाई हैं। मृतकों के नाम हैं-हफीज मूसा पटेल, रमीज वोरा, आसिफ वोरा, एंसी अलीबावा, मोहम्मद इमरान खान, फरहज अहसान और जुनेद कारा।' इस घटना के बाद से दुनिया भर में इसकी निंदा की जा रही है।

 

 

जकार्ता। इंडोनेशिया के पूर्वी प्रांत पापुआ में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ से कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है। कई लोग लापता बताए जा रहे हैैं। इलाके मेें अफरातफरी मची हुई है।स्थानीय अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।अधिकारी ने बताया कि शनिवार को जयपुरा जिले के कई गांवों में करीब शाम 6 बजे मूसलाधार बारिश से बाढ़ आ गई। इस हादसे में कम से कम 59 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।आपदा प्रबंधन एजेंसी की आपातकालीन इकाई के प्रमुख कोरी सिमबोलोन ने बताया कि बाढ़ दर्जनों घर, भवन, पुल को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे लगभग 3,000 लोग बेघर हो गए हैं। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ राहत शिविरों में रखा जा है। इस आपदा में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। सिमबोलोन ने बताया कि भूस्खलन की वजह से नदी के पानी का प्रवाह बाधित हुआ। इससे मिट्टी का कटान हुआ और अचानक बाढ़ आने की वजह बना।राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो नुगरोहो ने कहा, फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है। मृतकों और घायलों की संख्या में इजाफा हो सकता है। बचाव दल अभी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बचाव दल पेड़ गिरने, चट्टानों और कीचड़ के चलते सभी प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।बता दें कि इंडोनेशिया में इस तरह के प्राकृतिक आपदा से हर साल बड़ा नुकसान होता है। इस साल जनवरी में आई बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। इसी महीने जावा में आए भूकंप में लोगों को दूसरे स्थानों पर भेजा गया। इंडोनेशिया में बरसात का मौसम अक्टूबर से अप्रैल तक रहता है और इस दौरान भारी बारिश होती है।

नई दिल्‍ली। दक्षिण अफ्रीका में भले ब्‍लैक और व्‍हाइट लोगों को एक समान अधिकार मिल गए हों, लेकिन इस बात को किसी भी सूरत से नहीं भुलाया जा सकता है कि यहां के लोगों ने वर्षों तक रंगभेद की घटिया मानसिकता को झेला है। आपको बता दें कि दक्षिण अफ्रीका में 1948 से रंगभेद की नीति चली आ रही थी, इसकी वजह से दुनिया भर ने उस पर पाबंदी लगा रखी थी। आज इसका जिक्र करना इसलिए जरूरी हो जाता है क्‍योंकि आज ही के दिन 1992 में दक्षिण अफ्रीका में इसको लेकर जनमत संग्रह करवाया गया था।इससे करीब दो वर्ष पहले ही अश्वेतों के महान नेता नेल्सन मंडेला को जेल से रिहाई मिली थी। इस रिहाई के बाद तत्‍कालीन राष्ट्रपति एफडब्ल्यू डी क्लार्क ने देश में बड़ा बदलाव लाने के लिए वर्षों से चली आ रही रंगभेद की नीति को उखाड़ फेंकने कदम आगे बढ़ाया था। वह चाहते थे कि इस मुद्दे पर लोगों से राय ली जाए कि क्या वे रंगभेद की नीति को जारी रखना चाहते हैं या नहीं। हालांकि संसद में कुछ पार्टियां इस प्रस्ताव के खिलाफ थीं।राष्ट्रपति को डर था कि अगर रंगभेद जारी रहा तो देश में गृह युद्ध और भड़क सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दक्षिण अफ्रीका की स्थिति और खराब हो सकती है। राष्‍ट्रपति के फैसले के बाद 17 मार्च, 1992 को दक्षिण अफ्रीका में जनमत संग्रह हुआ, जिसके बाद रंगभेद के आधार पर इंसानों में भेद करने के नियम को खत्म कर दिया गया। दक्षिण अफ्रीका के लिए इतिहास की बड़ी घटनाओं में से एक थी। इस जनमत संग्रह में देश के करीब 33 लाख श्वेत नागरिकों ने हिस्‍सा लिया। करीब 28 लाख लोगों ने वोटिंग में हिस्सा लिया और 68.73 फीसदी लोगों ने माना कि नस्‍लभेद की इइस नीति को तुरंत खत्‍म कर देना चाहिए। हालांकि 31.2 फीसद लोगों ने इस नीति को जारी रखने के लिए वोट दिया था। इस बड़े बदलाव क श्रेय पूरी तरह से वहां के राष्‍ट्रपति को दिया जाता है। इस घटिया नीति को खत्‍म करने के मकसद से सरकार ने टेलीविजन, रेडियो और समाचारपत्रों में लोगों को जागरुक करने और वोटिंग में हां कहने के लिए खूब प्रचार-प्रसार किया था।जनमत संग्रह के इस फैसले से नेल्सन मंडेला के 27 साल तक जेल में रहने की तपस्या पूरी हुई। नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले राष्ट्रपति डी क्लार्क ने अगले दिन एलान किया, हमने रंगभेद वाली किताब बंद कर दी है। इतना ही नहीं क्‍लार्क ने देश में लगा आपातकाल समाप्‍त कर दिया और मौत की सजा को खत्‍म कर दिया गया। मंडेला ने मुस्कुरा कर फैसले का स्वागत किया और केपटाइम्स अखबार ने पूरे पन्ने पर आलीशान अक्षरों में छापा, 'Yes its Yes!'।

नई दिल्‍ली। पुलवामा हमले को एक माह से अधिक का वक्‍त हो चुका है। तब से लेकर आज तक पाकिस्‍तान भारत को लेकर कई तरह की बयानबाजी भी कर चुका है। खुद पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इसको लेकर कई बड़ी-बात भारत के खिलाफ कर चुके हैं। यहां तक की वह इसे चुनाव जीतने का जरिया कहने तक से भी नहीं चूके। इस हमले के एक माह बाद भी उनका रवैया जस का तस है। शुक्रवार को एक बार फिर उन्‍होंने भारत, भाजपा और पीएम मोदी को लेकर बड़ी बात कही।
फाटा की रैली में भारत पर निशाना;-खैबर पख्‍तून्‍ख्‍वां में फाटा (Federally Administered Tribal Areas) के बाजौर क्षेत्र में एक रैली को संबोधित करते हुए इमरान खान ये कहने से बाज नहीं आए कि भारत की सरकार चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकती है। उन्‍होंने इस रैली में कहा कि भारत में आम चुनाव होने वाले हैं। उन्‍होंने भाजपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि भारत की एक जमात नफरत फैलाकर चुनाव जीतना चाहती है। उन्‍होंने ये भी कहा कि अगले 30 दिनों तक पाकिस्‍तान को बेहद चौकन्‍ना रहना होगा क्‍योंकि भारत में चुनाव हैं और वहां की सरकार इसे जीतने के लिए कुछ भी कर सकती है। उन्‍होंने फाटा के लोगों से ये भी कहा कि वह भी इस दौरान बेहद चौकन्‍ना रहें और अपनी हिफाज‍त के लिए भी पूरी तरह से तैयार रहें। उन्‍होंने इस रैली में भारत और पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्‍तान अमन चाहता है और हम जंग नहीं चाहते। लेकिन इसको हमारी कमजोरी भी न समझा जाए। इस रैली में इमरान दोनों देशों के बीच कश्‍मीर को सबसे बड़ा मुद्दा करार देते हुए कहा कि वह इस मसले को बातचीत के जरिए सुलझाने के पक्षधर हैं। इसके लिए उन्‍होंने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी से बातचीत की भी पेशकश की, जिसे उन्‍होंने नहीं माना।
इस्‍लामोफोबिया:-आपको यहां पर ये भी बता दें कि जिस वक्‍त इमरान खान इस रैली को संबोधित कर रहे थे उसी वक्‍त न्‍यूजीलैंड में मस्जिद पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 49 लोग मारे गए जिसमें चार पाकिस्‍तानी नागरिक भी शामिल थे। इसके अलावा सात भारतीयों के लापता होने की भी खबर है। वहीं दो भारतीय मूल के नागरिक भी लापता हैं।इस हमले के बाद सभी देशों की तरफ से इसकी निंदा की गई। वहीं पाकिस्‍तान की तरफ से इस हमले की वजह इस्‍लामोफोबिया करार दिया गया। पाकिस्‍तान की मीडिया से लेकर खुद पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने माना कि यह घटना इसी इस्‍लामोफोबिया का नतीजा है जिसको पश्चिमी देशों ने बढ़ा चढ़ाकर पूरी दुनिया में फैलाया है। उन्‍होंने खुद ट्वीट कर इसका जिक्र भी किया।
इमरान का ट्वीट:-इमरान खान ने अपने ट्वीट में लिखा है कि अमेरिका में हुए 9/11 हमले के बाद इस तरह के हमले बढ़े हैं। इसकी वजह है कि इस्‍लाम को गलत तरीके से पूरी दुनिया के सामने रखा गया है। उनके खिलाफ नफरत की तरह से देखा गया है। इस तरह की सोच सिर्फ इमरान खान के बयानों में ही नहीं बल्कि पाकिस्‍तान मीडिया में हुई डिबेट में भी साफतौर पर जाहिर की गई। जियो टीवी पर शाम को प्रसारित एक डिबेट में भी यही बात उजागर हुई। इसमें मौजूद सभी लोगों ने इस हमले को इस्‍लामोफोबिया से पीडि़त करार दिया और साथ ही साथ अमेरिका को आड़े हाथों भी लिया। इसमें ट्रंप समेत पीएम मोदी को भी निशाना बनाया गया। इस डिबेट में शामिल कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि ये दोनों नेता इस्‍लाम के प्रति नफरत और दुष्‍प्रचार कर रहे हैं।

नई दिल्ली। न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों में गोलीबारी कर 49 लोगों को मौत के घाट उतारने की घटना के बाद से ‘व्हाइट सुपरमेसिस्ट’ (White Supremacist) शब्द काफी चर्चा में है। माना जा रहा है कि इस घटना और इतिहास में हुई इस तरह की अन्य घटना के पीछे भी इसी विचारधारा का हाथ है। ये एक ऐसी विचारधारा है जो दुनिया भर में अश्वेतों से नफरत करने वालों…
लंदन। भारत के चुनाव का असर हजारों मील दूर ब्रिटेन में भी दिखाई देने लगा है। अनिवासी भारतीय मतदाताओं और समर्थकों को प्रभावित करने के लिए भाजपा और कांग्रेस की ओवरसीज यूनिटों ने शनिवार को कार रैली का आयोजन किया। रैली के माध्यम से दोनों पार्टी के समर्थकों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए। द ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी की कार रैली में यूरोपियन रेसिंग चैंपियन अद्वैत देवधर ने भी…
तेहरान। अमेरिकी नौसेना के एक दिग्गज को ईरान में 10 साल जेल की सजा सुनाई गई। उन्हें पिछले साल जुलाई में मशहद शहर स्थित एक महिला के घर से तब गिरफ्तार किया गया था, जब वह उससे मिलने गए थे। वकील मार्क जैद के मुताबिक माइकल व्हाइट (46) को छह और नौ मार्च की अलग-अलग सुनवाई में दोषी ठहराया गया है।उन पर देश के शीर्ष नेता को अपमानित करने और…
जिनेवा। यूरोप के कुछ हिस्सों में रहने वाले पाकिस्तानी ईसाइयों ने इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ एक विरोध रैली की। जिनेवा में निकाली गई इस रैली में इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज उठाई गई। इस्लामी कट्टरपंथियों पर आरोप है कि वे ईश निंदा के नाम पर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर रहे हैं।इस रैली के दौरान महिलाएं और बच्चें भी शामिल रहे। यह रैली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 40वें सत्र के…
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