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इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने अब रद हुई अफगान शांति वार्ता को पटरी पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तान ने ये फैसला इस डर के कारण लिया है कि कहीं 18 साल के लंबे संघर्ष के बाद समझौता वार्ता के अभाव में गृह युद्ध का एक नया दौर शुरू ना हो जाए।इस हफ्ते की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने अफगान समकक्ष अशरफ गनी और तालिबान नेताओं के साथ होने वाली गुप्त बैठक को रद्द कर दिया था। दरअसल, आतंकवादी समूह ने पिछले सप्ताह काबुल में एक आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली थी जिसमें एक अमेरिकी सैनिक सहित 11 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद ही अमेरिका ने तालिबान के साथ वार्ता रद्द करने का फैसला लिया था।
ट्रंप ने अफगानिस्तान के साथ रद की शांति वार्ता:-साथ ही ट्रंप ने अफगानिस्तान के साथ होने वाली शांति वार्ता को भी रद कर दिया है। इससे पहले तक अमेरिका और तालिबान ने कहा था कि सौदे का मार्ग प्रशस्त होगा। दोनों पक्षों के बीच पहले ही एक मसौदा हो चुका था।लेकिन, कैंप डेविड में अचानक वार्ता रद्द होने से अब पूरी प्रक्रिया ध्वस्त हो गई थी। पाकिस्तान, जिसने अमेरिका और अफगान तालिबान के बीच नौ दौर की वार्ता की सुविधा दी थी वह गतिरोध को लेकर चिंतित था और अब फिर पाकिस्तान ने चुपचाप बचाव के प्रयास शुरू कर दिए है।
पाकिस्तान खोज रहा रास्ता:-दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान मौजूदा गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता खोजने के लिए सभी हितधारकों के साथ संपर्क में है। शांति वार्ता को फिस से शुरू करवाने के लिए अधिकारियों ने कहा कि संबंधित अधिकारी वर्तमान में अमेरिका के साथ-साथ कतर के साथ जुड़े है, जिसने तालिबान के राजनीतिक कार्यालय की मेजबानी की थी।अधिकारियों ने कहा कि माना जाता था कि अफगानिस्तान में हिंसा को कम करने के लिए तालिबान को समझाने के लिए पाकिस्तान अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर रहा है। गुरुवार को साप्ताहिक समाचार ब्रीफिंग में, पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मौहम्मद फैसल ने कहा कि इस्लामाबाद चाहता है कि सभी पक्ष हिंसा से दूर रहें। हमने नेक नीयत के साथ साझा जिम्मेदारी के रूप में अफगान शांति प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि अफगान संघर्ष का एकमात्र समाधान राजनीतिक रूप से बातचीत के तहत निपटारे किया जा सकता है।

 

बीजिंग। चीन ने उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता के संकेत की संभवाना जताई है। चीन की तरफ से उत्तर कोरिया की तरफ से परमाणु वार्ता के संकेतों का स्वागत किया है। यही नहीं चीन ने आशा जताई है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया की तरफ से परमाणु वार्ता करने के लिए अंतिम बातचीत हो सकती है। इस बात की जानकारी खुद वरिष्ठ चीनी राजनयिक यांग वी ने एक सम्मलेन में मलेशिया के विदेश मंत्री के साथ दी।
उत्तर कोरिया ने परमाणु वार्ता का दिया संकेत:-उत्तरी कोरिया ने सोमवार को कहा था कि वह अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता करना चाहता है, लेकिन उसके लिए सबसे पहले यूएस के तरफ से नए सिरे से बातचीत शुरू की जाएगी। तभी परमाणु वार्ता संभव हैं।
हो चुके हैं कई मिसाइल परीक्षण:-उत्तर कोरिया की तरफ से लगातार अमेरिका के खिलाफ परमाणु हाथियार बनाने का काम हो रहा है। कोरिया अमेरिका के खिलाफ कई मिसाइल परीक्षण भी कर चुका है। अमेरिका ने भी इसके जवाब में उत्तर कोरिया के खिलाफ मिसाइल परीक्षण किया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनातनी बनी हुई है।
परमाणु वार्ता पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं हुई सफल:-दोनों देशों के बीच तनातनी को रोकने के लिए कई बैठक भी हो चुकी हैं। इन बैठकों के बाद परमाणु वार्ता पर सहमति बनते-बनते रह गई। ऐसे में एक बार फिर से उत्तर कोरिया की तरफ से परमाणु वार्ता को लेकर सेकेंत मिल रहे हैं तो ये संकेत दोनों देशों की शांति के लिए अच्छा कदम साबित हो सकता है।

बीजिंग। चीन की राजधानी बीजिंग इस साल दुनिया के 200 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों की लिस्‍ट से बाहर निकलने की कतार में है। गुरुवार को आइक्‍यूएयर एयर विजुअल (IQAir AirVisual) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, अगस्‍त माह में नुकसानदायक धुंध में रिकॉर्ड स्‍तर की कमी आंकी गई।फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाला छोटा सा तत्‍व PM2.5 के स्‍तर में कमी लाने की कोशिश में बीजिंग जुटा हुआ है और पिछले साल की तुलना में इस साल करीब 20 फीसद और 2017 की तुलना में एक तिहाई की कमी कर चुका है। यह आंकड़ा स्‍वीटजरलैंड की एयर क्‍वालिटी टेक्‍नोलॉजी कंपनी ने दिया है।2014 में शुरू हुए प्रदूषण की लड़ाई में मोर्चे पर बीजिंग रहा है और इसके लिए उसने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की पहचान कर इसे बंद करने का काम किया। ईंधन और इसके उत्‍सर्जन मानकों में संशोधन किया साथ ही शहर और आसपास के क्षेत्रों में कोयले की खपत पर भी ध्‍यान दिया।हालांकि 2019 में भी विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) द्वारा तय मानकों के अनुसार शहर की एयर क्‍वालिटी में खास सुधार नहीं है। WHO के अनुसार हवा में PM2.5 का स्तर 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए जो अभी भी इससे चार गुना अधिक है। बीजिंग की हवा में इसकी मात्रा 35 माइक्रोग्राम है जो चीन के अपने अंतरिम राष्ट्रीय मानक से अधिक है।साल के शुरुआती 8 महीनों में बीजिंग की हवा में प्रति घंटे औसतन PM2.5 concentration रही जो 42.6 माइक्रोग्राम थी पिछले साल के मुकाबले 19.3 फीसद कम। यह आंकड़ा 2009 के इसी अवधि की तुलना में आधे से भी कम था। यह बात IQAir AirVisual ने बीजिंग में अमेरिकी दूतावास व 34 आधिकारिक मॉनिटरिंग स्‍टेशनों से मिले डेटा के अध्‍ययन में कही।चीन ने कहा है कि 2019 में प्रदूषणके खिलाफ अपने कैंपेन के दौरान यह अधिक लक्षित और प्रभावी कार्यप्रणाली अपनाएगा। लेकिन अपने प्रयासों को कमजोर नहीं करेगा और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करेगा।बीजिंग ने यह पहले ही कहा है कि इस माह यह फायरवर्क्‍स पर पाबंदी लगाएगा और वायु प्रदूषण में कमी लाएगा। बीजिंग ने इस कदम को उठाते हुए कहा कि वह सुनिश्‍चित करना चाहता है कि 1 अक्टूबर को पीपुल्स रिपब्लिक की स्थापना की 70वीं सालगिरह पर वायु प्रदूषण का स्तर नियंत्रण में रहे।

 

बीजिंग। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के थमने के संकेत मिल रहे हैं। हालिया पहलकदमी चीन की ओर से की गई है। चीन ने घोषणा की है कि वह 16 तरह के अमेरिकी सामानों पर लगने वाले टैरिफ में अब छूट देगा। गौर करने वाली बात यह है कि चीन की ओर से यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब उसकी अगले महीने से अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के मसले पर फ‍िर से वार्ता शुरू होनी है।चीन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अमेरिकी सामानों पर दी गई यह टैरिफ छूट 17 सितंबर से प्रभावी होगी। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, स्‍टेट काउंसिल के सीमा शुल्क आयोग की ओर से टैरिफ पर छूट से संबंधित दो लिस्‍ट जारी की गई हैं। जिन उत्‍पादों पर छूट दिए जाने की बात कही गई है उनमें सी फूड प्रोडक्‍ट्स और कैंसर रोधी दवाएं शामिल हैं।उल्‍लेखनीय है कि महीनों से जारी ट्रेड वॉर के चलते दोनों देशों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अमेरिका में मैन्‍युफैक्‍चरिंग में 2-3 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है और यह 51.2 फीसद से गिरकर 49.1 फीसद पर आ गई है। वहीं चीन की आर्थिक वृद्धि दर भी पिछले 27 वर्षों में सबसे कम दर्ज की गई है। ट्रेड वार के बीच चीन की मुद्रा युआन भी लगातार नीचे आ रही है। आलम ये है कि बीते 11 सालों में युआन सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।अमेरिका-चीन व्‍यापार युद्ध में नया मोड़ आने से न सिर्फ निवेशकों का भरोसा कम हुआ है वरन वैश्विक आर्थिक परिदृश्‍य भी धुंधला पड़ा है। निवेशक मुद्राओं की जगह सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश को ज्‍यादा तरजीह दे रहे हैं। हालांकि, चीन की इस पहल से दोनों देशों के बीच ट्रेड वार थमने के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो इससे अमेरिकी परिवारों को सालाना 10 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की चपत लगेगी। वहीं चीन के बाजार को भी तगड़ा झटका लगेगा।

नई दिल्ली। नदी, समुद्र और पहाड़ों व घाटियों पर सबसे बड़ा पुल अक्सर लोगों में कौतूहल पैदा करता है। ये आम जनजीवन को तो आसान बनाता ही है, साथ ही पर्यटन स्थल के तौर पर भी मशहूर हो जाता है। सीमावर्ती इलाकों में इनका सामरिक महत्व भी होता है। यही वजह है कि एशिया में इन दिनों सबसे लंबा पुल बनाने की होड़ मची हुई है। खास तौर पर भारत और चीन के बीच। पिछले साल ही भारत ने एशिया का सबसे बड़ा पुल शुरू किया है। अब चीन जल्द ही दुनिया का सबसे लंबा पुल शुरू करने जा रहा है।चीन द्वारा बनाए जा रहे पुल की खासियत ये है कि इसमें नदी के किनारों पर केवल दो पिलर होंगे। नदी के ऊपर पूरा पुल केबल पर टिका होगा। इस पुल को हवा में तैरने वाले पुल (Floating System) की तकनीक पर बनाया जा रहा है। मतलब ये पुल हवा में झूलता रहेगा। हांलाकि, पुल से आने-जाने वालों को इसका आभास नहीं होगा। फ्लोटिंग सिस्टम की वजह से ये पुल भूकंप और आंधी-तूफान जैसी स्थिति में भी पूरी मजबूती से टिका रहेगा।
तीसरी सबसे लंबी नदी पर बन रहा पुल:-सिन्हुआ न्यूज के अनुसार, चीन में बन रहा दुनिया का सबसे लंबा केबल ब्रिज किंगशान यांग्त्जी नदी पर बनाया जा रहा है। इसका निर्माण चीन की रेलवे मेजर ब्रिज इंजीनियरिंग ग्रुप कंपनी द्वारा किया जा रहा है। मालूम हो कि चीन की किंगशान यांग्त्जी नदी, दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी भी है। इस पर बन रहे दुनिया के सबसे लंबे केबल ब्रिज का काउंट डाउन शुरू कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि 2020 की शुरुआत में इस पुल पर ट्रैफिक शुरू कर दिया जाएगा। पुल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और फिलहाल इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सबसे लंबा ही नहीं, सबसे चौड़ा भी है:-चीन में बन रहे दुनिया के इस सबसे लंबे केबल पुल की कुल लंबाई 7,548 मीटर है और इसकी कुल चौड़ाई 48 मीटर है। दावा किया जा रहा है कि ये पुल न केवल दुनिया का सबसे लंबा केबल पुल है, बल्कि दुनिया का सबसे चौड़ा केबल पुल भी है। ये पुल किंगशान यांग्त्जी नदी पर सेंट्रल चाइना के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान में बनाया जा रहा है। सोमवार को इस पुल पर डामर डालकर सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। चीन के रेलवे मेजर ब्रिज इंजीनियरिंग ग्रुप कंपनी के अनुसार, निर्माण कार्य खत्म होने के बाद ये दुनिया का सबसे लंबा केबल पुल बन जाएगा।
इस तरह से हो रहा तैयार:-सिन्हुआ न्यूज के मुताबिक, ये पुल दोनों तरफ से कुल 10 लेन का है। पुल बनाने के लिए नदी के दोनों किनारों पर दो ऊंचे टावर बनाए गए हैं। उन्हीं टावर के सहारे पूरे पुल को केबल के जरिए तैयार किया गया है। खास बात ये है कि नदी के ऊपर पुल के झूलते हुए हिस्से में कोई लोअर बीम भी नहीं है। लोअर बीम की जगह पुल की सड़क को आधार प्रदान करने के लिए स्टील स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया है। इस वजह से ये पुल तेज हवाओं और भूकंप के प्रभावों को दूर करने के लिए नदी के किनारे बने दोनों टावरों के बीच झूल सकता है। इससे पुल को काफी मजबूती मिलेगी।
62 साल पहले बना था दूसरा पुल:-चीन ने करीब 62 वर्ष पहले किंगशान यांग्त्जी नदी पर ही एक और पुल बनाया था। ये पुल भी चीन के सबसे बड़े और व्यस्त रिवर पुल में शामिल है। चीन के अनुसार, पुराने वाले पुल से इस पुल की दूरी मात्र 20 किलोमीटर है। अगले साल तक नया पुल शुरू होने के बाद पुराने पुल से यातायात का दबाव कम होगा। इससे इस इलाके की यातायात व्यवस्था में भी काफी सुधार होगा।
विश्व के अन्य सबसे लंबे
लिंगदिंग्यांग पुल:-चीन के शहर जुहाई को हांगकांग और मकाऊ से जोड़ने वाला विश्व का दूसरा सबसे लंबा समुद्री पुल है। 55 किलोमीटर लंबा यह पुल पर्ल रिवर एस्चुरी के लिंगदिंग्यांग जल क्षेत्र में स्थित है। 20 अरब डॉलर (लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये) की इस परियोजना पर 2009 में काम शुरू हुआ था। चीन ने 55 किमी लंबा समुद्री पुल बनाकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। यह दुनिया का सबसे लंबा समुद्री पुल है। इस पुल का थोड़ा-सा हिस्सा समुद्र के नीचे से होकर गुजरता है। इसके लिए समुद्र के अंदर एक टनल बनाई गई है। पुल हांगकांग को चीन के दक्षिणी शहर झूहाई और मकाउ के गैमलिंग एन्क्लेव से जोड़ता है।
डोंगहाई पुल:-चीन में स्थित यह पुल शंघाई और यांगशान में स्थित बंदरगाह को जोड़ता है। इसकी लंबाई 32.5 किमी है। यह 2005 में बनकर तैयार हुआ था।
हांग्जो खाड़ी पुल:-यह पुल 2007 में बनकर तैयार हुआ था। यह 35.7 किमी लंबा है और यह हांग्जो खाड़ी पार करके चीन में निंग्बो और शंघाई शहर को जोड़ता है। यह केबल से बना पुल है।
किंग फहद:-यह पुलों और पक्की सड़कों की एक श्रृंखला है, जो सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ती है। जिसकी कुल लंबाई 25 किमी है और इसका निर्माण 1986 में समाप्त हुआ था।
बांद्रा-वर्ली समुद्र लिंक (आधिकारिक नाम राजीव गांधी समुद्र लिंक);-यह आठ लेन पुल है, जो मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में बांद्रा को दक्षिण मुंबई में वर्ली के साथ माहिम की खाड़ी को जोड़ता है। इसकी कुल लंबाई 5.6 किमी है। 2010 में यह बनकर तैयार हुआ था।

नई दिल्‍ली। चंद्रयान 2 के लैंडर से संपर्क टूटने के करीब 60 घंटे बाद चीन ने अपने सबसे बड़े टेलिस्‍कोप को अंतरिक्ष से मिल रहे रहस्‍यमय सिग्‍नल की जानकारी देकर सभी को हैरान कर दिया है। हालांकि, अभी तक इस बात का पता नहीं चल सका है कि यह रहस्‍यमय सिग्‍नल के पीछे क्‍या है। यह सिग्‍नल जिस टेलिस्‍कोप को मिल रहे हैं वह भी अपने आप में बेहद खास है। चीन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित गुइझोऊ प्रांत में यह टेलिस्‍कोप लगा है। इसका नाम है फास्‍ट (FAST)। फास्‍ट मतलब है फाइव हंड्रेड मीटर एपरेचर स्‍फेरिकल रेडियो टेलिस्‍कोप (Five-hundred-meter Aperture Spherical Radio Telescope)। इसकी खासियत का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि यह अब तक करीब 44 नए पल्‍सर की खोज कर चुका है। पल्‍सर तेजी से घूमने वाला न्यूट्रॉन या तारा होता है जो रेडियो तरंग और इलेक्‍ट्रोमेग्‍नेटिक रेडिएशन उत्सर्जित करता है।
टेलिस्‍कोप की खासियत:-इस टेलिस्‍कोप की खासियत यहीं तक सीमित नहीं है। फिलहाल इस टेलिस्‍कोप को जो सिग्‍नल मिल रहे हैं उसको वैज्ञानिक भाषा में फास्‍ट रेडियो बर्स्‍ट (FRB) कहते हैं। इसका अर्थ वो रहस्‍यमय सिग्‍नल हैं जो सुदूर ब्रह्मांड से आते हैं। जिन स्ग्निल के मिलने की बात अभी सामने आई है उनकी दूरी पृथ्‍वी से करीब तीन बिलियन प्रकाश वर्ष है। हालांकि, इन संकेतों का लैंडर से कोई लेना देना नहीं है क्‍योंकि यह चांद से भी कई गुणा दूर है। आपको बता दें कि चांद की पृथ्‍वी से दूरी करीब 384,400 किमी है। बहरहाल, चीन के वैज्ञानिक फिलहाल इनका विश्‍लेषण कर रहे हैं और ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह कहां से आए हैं। नेशनल एस्‍ट्रोनॉमिकल ऑब्‍जरवेटरी ऑफ चाइनीज अकादमी ऑफ साइंस के मुताबिक यह संकेत कुछ सैकेंड के लिए ही मिले थे। वैज्ञानिकों की मानें तो इस तरह के सिग्‍नल यदि आगे भी मिले तो मुमकिन है कि इनके उदगम स्‍थल का भी पता चल सके।
प्राकृतिक सिंकहोल का इस्‍तेमाल:-आपको बता दें कि इस टेलिस्‍कोप को एक प्राकृतिक रूप से बने सिंकहोल की जगह बनाया गया है। 2016 से इस टेलिस्‍कोप ने काम करना शुरू किया था और यह दुनिया का सबसे बड़ा फाइल्‍ड रेडियो टेलिस्‍कोप (filled radio telescope) है। इसके अलावा यह दुनिया का दूसरे नंबर का सिंगल एपरेचर टेलिस्‍कोप भी है। इसके आगे रूस का रतन-600 है। इस टेलिस्‍कोप में 4450 ट्राइउंगलर पैनल लगे हैं जिनका दायरा करीब 500 मीटर या 1600 फीट है। चीन के इस टेलिस्‍कोप का आकार 30 फुटबॉल ग्राउंड के बराबर है। इसे साल 2011 में बनाना शुरू किया गया और दुनिया के सामने ये साल 2016 में आया।
एक नजर इधर भी:-अगर इसके पैनल्स की बात की जाए तो प्रत्येक की भुजा 11 मीटर की है। 1.6 किलोमीटर परिमााप वाले इस टेलीस्कोप का चक्कर लगाने में 40 मिनट का समय लगता है।इस टेलिस्‍कोप को यहां की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां पर लगाया गया है। इसके करीब पांच किमी के दायरे में कोई शहर नहीं बसा है। इतने बड़े आकार का यह टेलिस्‍कोप सैकड़ों स्टील के पिलर्स और केबल्स पर टिका हुआ है। इसको लगाने का मकसद सुदूर अंतरिक्ष में जीवन की खोज के अलावा एलियंस का पता लगाना भी है। इसकी खासियत ये भी है कि ये कम क्षमता वाले सिग्‍नल को भी पकड़ सकता है। इस टेलिस्‍कोप को बनाने में चीन ने 12 अरब रुपए या 185 मिलियन डॉलर का खर्च किया है।चीन के इस टेलिस्‍कोप ने उत्‍तरी अमेरिका के पोर्टो रीको की एरेसिबो ऑब्जर्वेट्री को भी पीछे छोड़ ि‍दिया है, जिसका डायामीटर 300 मीटर है।चीन में लगा यह टेलिस्कोप 4,500 पैनल की मदद से अंतरिक्ष में करीब 1,000 प्रकाश वर्ष दूर के तारों के बारे में जानकारी जुटा सकता है।

 

 

 

 

 

नई दिल्ली। एक समय था जब भारत को दूसरे देशों से ऋण लेना पड़ता था मगर अब समय में बदलाव आया है। अब देश सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ आगे बढ़ रहा है। देश के खजाने में बढ़ोतरी हो रही है जिससे अब भारत दूसरे देशों को भी अनुदान और ऋण देने की स्थिति में आ चुका है। भारत ने बीते गुरुवार को ही रूस के संसाधन…
इस्लामाबाद। भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से Article 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया है। वह हर कदम पर भारत को गीदड़ भभकी दे रहा है। साथ ही पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिक को वापस भेज दिया और द्विपक्षीय व्यापार भी खत्म कर दिया। Article 370 का हटना पाकिस्तान में पनाह लिए हुए आतंकवाद के लिए बड़ी चुनौती पैदा हुई, जहां बस पाकिस्तान ये चाहता है कि…
पेरिस। अमेरिकी रक्षा सचिव मार्क एस्पर ने शनिवार को अमेरिकी तालिबान के बीच होने वाले शांति समझौते पर कहा कि वाशिंगटन किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा। पेरिस में अपने फ्रांसीसी समकक्ष के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एस्पर ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका का दृष्टिकोण है कि सबसे अच्छा तरीका एक राजनीतिक समझौता है और हम उसी पर पूरी लगन के साथ काम कर रहे हैं,…
कराची।पूरी दुनिया जहां भारत के महत्वाकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के लिए इसरो और भारतीय वैज्ञानिकों की लोहा मान रही है, वहीं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान यहां भी अपनी ओछी हरकत दिखाने से बाज नहीं आया। दरअसल लैंडिंग से ठीक पहले लैंडर विक्रम (Vikram) से संपर्क टूटने के बाद पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीकी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने बेहूदा टिप्पणी की।अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार, लेखक और जाने-माने बलोच नेता तारेक…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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