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वाशिंगटन। भारतवंशी सीनेटर कमला हैरिस ने वर्ष 2020 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अपनी दावेदारी घोषित करने के 24 घंटे के भीतर ही 15 लाख डॉलर (करीब 10 करोड़ रुपये) का चंदा जुटा लिया। डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेटर हैरिस ने बीते सोमवार को राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का एलान किया था। लोगों से मिल रहे समर्थन पर खुशी जताते हुए हैरिस ने कहा, 'आप सभी का धन्यवाद। आपके सहयोग से हम 24 घंटे में ही 15 लाख डॉलर से भी अधिक फंड जुटाने में कामयाब हुए।'तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाली भारतीय मां और अफ्रीकी पिता की संतान हैरिस के चुनाव अभियान के लिए पहले दिन 38 हजार लोगों ने चंदा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुखर आलोचक हैरिस डेमोक्रेटिक पार्टी में राष्ट्रपति उम्मीदवारी पेश करने वाली चौथी नेता हैं।भारतीय मूल के अमेरिकियों के बीच लोकप्रिय होने के कारण उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। अमेरिका की पहली हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड ने भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी में अपनी दावेदारी पेश की है।

वाशिंगटन। आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की विकट समस्या का सामना कर रही है। भूकंप, बाढ़, तूफान और चक्रवात के रूप में इसके दुष्परिणाम भी धीरे-धीरे हमारे सामने आ रहे हैं। वैज्ञानिक और पर्यावरणविद इस बात की आशंका भी जता चुके हैं कि यदि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो कुछ दशकों में दुनिया के मानचित्र से कई देश गायब हो जाएंगे। यह आशंका कोई कोरी कल्पना नहीं बल्कि कड़वा सच है, जिसे हम नजरअंदाज किए जा रहे हैं। हाल के एक शोध में सामने आया है कि ग्रीनलैंड में ग्लेशियर की बर्फ पिछले 350 वर्षो की अधिकतम गति से पिघल रही है। यह क्रम बना रहा तो आने वाले दो दशक में समुद्रतल के बढ़ने का सबसे बड़ा कारक यही होगा।प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज में छपे अध्ययन के मुताबिक, अब तक जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम आंका जा रहा था। वैज्ञानिक सारा दास का कहना है कि हम या तो उस चरण में पहुंच गए हैं या पहुंचने वाले हैं, जहां से वापसी नामुमकिन होगी। पृथ्वी के बढ़ते तापमान के लिए जिम्मेदार गैसों व कार्बन के उत्सर्जन को नहीं रोका गया तो हमें बहुत बुरे परिणामों का सामना करना होगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर पृथ्वी का तापमान दो डिग्री सेल्सियस बढ़ता है तो उससे सागरों का जलस्तर दो फीट तक बढ़ेगा। जलस्तर में इस वृद्धि से तटीय इलाकों में रहने वाले तीन से आठ करोड़ लोग प्रभावित होंगे। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि पिछली सदी के मुकाबले इस सदी में एक डिग्री तापमान बढ़ने का प्रभाव बहुत अधिक होगा।पृथ्वी के अन्य हिस्सों के मुकाबले आर्कटिक दो गुना तेजी से गर्म हो रहा है। ग्रीनलैंड का ज्यादातर हिस्सा आर्कटिक में ही पड़ता है। इसी कारण वहां की बर्फ तेजी से पिघल रही है। 2012 में ग्रीनलैंड के ग्लेशियर की करीब 400 अरब टन बर्फ पिघली थी, जो 2003 के मुकाबले चार गुना ज्यादा है। 2013-14 के दौरान बर्फ पिघलना करीब रुक गया था। उसके बाद फिर बर्फ पिघलने की दर में तेजी आ गई।
क्यों रुका था बर्फ का पिघलना?;-विशेष पारिस्थितिक चक्र के कारण ग्रीनलैंड में गर्म हवाएं चलने का क्रम बदलता रहता है। जिस चक्र में गर्म हवाएं चलती हैं उस दौरान बर्फ बहुत तेजी से पिघलती है जबकि गर्म हवाएं ना हो तो बर्फ का पिघलना रुक जाता है। इसी कारण 2013-14 में बर्फ का पिघलना रुक गया था।

 

नई दिल्ली। बांग्लादेश का एक शख्स जिसके हाथ-पैर में पेड़ जैसे उगते हैं। सुनने में भले ये अटपटा लगे, लेकिन सच है। पिछले करीब दो साल में इस शख्स की 25 बार सर्जरी हो चुकी है। बावजूद उसे इस बीमारी से छुटकारा नहीं मिला है। अब उसे फिर से सर्जरी की आवश्यकता है। जानें- कौन है ये ट्री मैन और कब से वह दुनिया की इस सबसे अजीब बीमारी से जूझ रहा है।बांग्लादेश में ट्री मैन के नाम से मशहूर इस शख्स का नाम है अबुल बाजंदर। दक्षिणी जिले खुलना के रहने वाले अबुल की आयु है 28 साल। उसके हाथ-पैर पर पेड़ जैसी संरचना बनती है, जो उसे बहुत परेशानी में डाल देती है। अबुल को एपिडर्मोडिस्प्लैजिया वेरुसिफॉर्मिस (epidermodysplasia verruciformis) नाम की बीमारी है, जो दुनिया की सबसे अजीब बीमारी है। ये एक तरह का रेयर जेनेटिक स्किन डिसऑर्डर है। उसकी बीमारी ने दुनिया भर के डॉक्टरों को हैरत में डाल रखा है। इन दिनों अबुल की हालत काफी खराब है। उसके हाथ-पैर में उगने वाली पेड़ जैसी आकृति इतनी बड़ी हो चुकी है कि उनके लिए दैनिक कार्य करना भी असंभव हो चुकी है। लिहाजा वह इन अनचाहे पेड़ों से छुटकारा पाने के लिए अस्पताल में भर्ती हुए हैं।
पहले भी 25 बार हुई है सर्चरी:-इससे पहले भी वर्ष 2016 में अबुल की 25 बार सर्जरी हो चुकी है। उस वक्त डॉक्टरों ने उम्मीद जताई थी कि शायद अबुल को इस बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब डॉक्टरों का कहना है कि उसकी दोबारा सर्जरी कर हाथ-पैर पर बनी पेड़ों जैसी संरचना को फिर से काटना पड़ेगा।

लाहौर। पाकिस्तान में पिछले शनिवार को एनकाउंटर के नाम पर एक निर्दोष परिवार की हत्या से जुड़े मामले में पांच पुलिस कर्मियों पर हत्या का केस चलेगा। प्रशासन ने पंजाब प्रांत की आतंकरोधी पुलिस (सीटीडी) के कमांडर को भी उनके पद से हटा दिया है।पुलिसकर्मियों ने पंजाब प्रांत के साहीवाल के करीब हाईवे पर एक कार पर गोलियां बरसाई थीं। इससे कार में सवार मुहम्मद खलील, उनकी पत्नी और 12 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई थी। गाड़ी चला रहे खलील के दोस्त जीशान जावेद की भी इस गोलीबारी में मौत हो गई थी। पुलिस का कहना था कि जावेद आतंकी था और पहले कार से ही गोलियां बरसाई गई थीं, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस के इस बयान को गलत ठहराया था। देशभर में इस घटना के विरोध के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी इसकी निंदा की थी।पंजाब के कानून मंत्री राजा बशारत ने बुधवार को कहा, 'ज्वाइंट इंवेस्टीगेशन टीम (जेआइटी) की आरंभिक जांच के अनुसार सीटीडी के पुलिस अधिकारी खलील और उनके निर्दोष परिवार की हत्या के दोषी हैं। इसके लिए सीटीडी के कमांडर और तीन अन्य अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। गोली चलाने वाले पांच पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा चलेगा।'

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए क्या-क्या नहीं करते हैं। कई बार उनका ये प्रयास जानवेला भी साबित होता है। सेल्फी के इसी शौक ने ताइवान की एक महिला पर्वतारोही की जान ले ली, जिसे बिकनी क्लाइंबर (Bikini Climber) के नाम से जाना जाता था। वह बिकनी पहनकर ऊंचे पहाड़ों की चोटियों से सेल्फी ले सोशल मीडिया पर पोस्ट करती थीं। दुनिया भर में उनके काफी फॉलोअर्स हैं। इसलिए उन्हें सेल्फी क्वीन भी कहा जाता है।मीडिया की खबरों के मुताबिक ताइवान की 36 वर्षीय इस महिला का नाम गिगि वू है। ये पर्वतारोही केवल बिकनी पहनकर ही पहाड़ों पर ट्रैकिंग करती थी। बर्ष से ठकी चोटियों पर बिकनी पहने हुए इसकी बहुत सी फोटो सोशल मीडिया पर छायी हुई हैं। अब ठंड की वजह से ही इनकी मौत भी हो गई है।बताया जा रहा है कि गिगि वू, सेंट्रल ताइवान के युशान माउंटेन पर चढ़ने वक्त 65 फीट गहरी खाईं में गिर गई थीं, जिसके बाद वह घायल हो गई थीं। उनके पैरों में चोट लगने की वजह से वह हिल भी नहीं पा रहीं थीं। 19 जनवरी को उन्होंने सैटेलाइट फोन के माध्यम से अपने एक दोस्त को हादसे की जानकारी दी थी। उन्होंने दोस्त को बताया था कि वह युशान नेशनल पार्क के पास पहाड़ से गिर गई हैं और उन्हें काफी चोट लगी है। इसके बाद उनकी तलाश में दो दिन तक हेलिकॉप्टर ने उस एरिया में चक्कर काटा, लेकिन मौसम बहुत ज्यादा खराब होने की वजह से हेलिकॉप्टर नीचे ही नहीं उतरा सका।दूसरे दिन, 21 जनवरी को बचाव दल उन तक पहुंच सका। तब तक गिगि वू को खाई में गिरे 30 घंटे से ज्यादा हो चुका था। बचाव दल जब गिगि वू के पास पहुंचा तो वह बर्फ में जमी हुई थीं और उनकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी मौत बेहद ठंड में हाइपोथर्मिया होने की वजह से हुई है। बताया जा रहा है कि गिगि वू ने ने 11 जनवरी को अपनी ये यात्रा शुरू की थी, जो उनके लिए अंतिम यात्रा बन गई। वह इस यात्रा पर अकेली थीं।
2018 में 127 दिन की ट्रैकिंग:-बिकनी क्लाइंबर गिगि वू को पर्वतारोहण का इतना शौक था कि उन्होंने वर्ष 2018 में तकरीबन 127 दिन पहाड़ों पर ट्रैकिंग की है। उन्होंने शायद ही कभी सोचा होगा कि उनका यही शौक उनके लिए जानलेवा बन जाएगा। उनकी मौत से उनके प्रसंशकों, परिजन और दोस्तों में शोक का माहौल है। उनकी मौत के बाद प्रशंसक उनके फेसबुक और इंस्टाग्राम पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
क्रिसमिस पर हुई थीं घायल:-गिगि वू, पहले भी पर्वतारोहण के दौरान कई बार हादसों का शिकार हो चुकी हैं। वर्ष 2018 में क्रिसमिस के दौरान भी ऐसे ही एक मिशन के दौरान घायल हो गईं थीं। उस वक्त भी उन्हें पहाड़ी से गिरने की वजह से चोट लगी थी। उन्होंने घायल हालत में अपनी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी। हालांकि उस वक्त उन्हें समय से मदद मिल गई थी, जिससे उनकी जान बच गई थी।
100 से ज्यादा बार की ट्रैकिंग:-बिकली क्लाइंबर गिगि वू ने पिछले वर्ष एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वह 100 से ज्यादा बार बिकनी पहनकर ट्रैकिंग कर चुकी हैं। वह चार वर्ष से बिकनी क्लाइंबिंग कर रही थीं। इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उनके पास कुल 97 बिकनी है, लिहाजा कुछ मिशन में उन्हें बिकनी रिपीट भी करनी पड़ी है। उन्होंने बताया था कि उन्हें इस तरह से पर्वतारोहण करना अच्छा लगता है और यह काफी खूबसूरत भी दिखता है।

 

 

नई दिल्‍ली। दो साल हो गए, कोई नहीं जानता मजाद जिंदा भी हैं या नहीं। किसी को उनकी कोई खबर नहीं है। आखिरी बार करीब दो साल पहले फरवरी 2017 में परिजनों ने उनकी आवाज सुनी थी, तब से लेकर आज तक परिवारवाले उनकी आवाज सुनने को तरस रहे हैं। घर में जब उनके पोते ने जन्‍म लिया तो मजाद को याद कर परिजनों की आंखें छलक आईं। मजाद कमलमाज दरअसल, अमेरिकी थेरेपिस्‍ट हैं। फरवरी 2017 में उन्‍होंने आखिरी बार अपने परिजनों से बात कर बताया था कि वह लेबनान से सीरिया की राजधानी दमिश्‍क जा रहे हैं। वहां पर उनके कुछ पारिवारिक सदस्‍य रहते हैं। मजाद ने बताया था कि वह जल्‍द लौट आएंगे इसलिए बस बैग में कुछ कपड़े ही साथ रखे हैं।
आखिरी बार सुनी थी आवाज:-इसके बाद जब उनकी खबर नहीं मिली तो जिस कार में वह सवार थे उसके ड्राइवर से पूछताछ की गई तो पता चला कि वह दमिश्‍क में सरकारी चेकप्‍वाइंट पर रुके थे। यहां पर वह आखिरी बार देखे गए थे, इसके बाद से वह कहां गए और उनका क्‍या हुआ किसी को कुछ नहीं पता है। पहले परिवार को लगा था कि शायद उन्‍हें सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध के चलते किसी ने बंधक बना लिया है। इसलिए परिजनों ने उन्‍हें छोड़ने के लिए एक सार्वजनिक अपील भी की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
एफबीआई के हाथ खाली;-इतना ही नहीं मजाद के बारे में आज तक एफबीआई और अमेरिकी विदेश मंत्रालय के हाथ भी खाली हैं। मजाद के परिवारवालों ने कई बार इसके लिए एफबीआई का दरवाजा खटखटाकर उनकी तलाश तेज करने की गुहार लगाई, लेकिन इससे भी कोई फायदा नहीं हुआ। अब परिवारवाले अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से मिलकर मजाद को तलाश करने की गुहार लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि ट्रंप ने पूरी दुनिया में अपने नागरिकों को सकुशल वापस लाने को अपनी प्राथमिकता बताया है। फिर चाहे वह कहीं बंधक ही क्‍यों न बनाए गए हों। मिस्र मूल के अमेरिकी नागरिक अया हिजरी, वेनेनुएला की जेल में बंद अमेरिकी नागरिक जोशुआ होल्‍ट, तुर्की में बंद एंड्रयू ब्रूनसन का नाम भी इसमें शामिल है।
परिजनों को ट्रंप पर है विश्‍वास:-मजाद की पत्‍नी मरयम कमलमाज को ट्रंप पर पूरा विश्‍वास है कि वह कुछ जरूर करेंगे। उनका कहना है कि हम अमेरिकन हैं और ट्रंप इस बात को जानते हैं। हालांकि मरयम इस बात से भी बखूबी वाकिफ हैं कि मजाद को वापस लाना काफी चुनौतीपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि उनका कोई अता-पता नहीं है।
अमेरिका खत्‍म कर चुका है संबंध:-वहीं गृहयुद्ध के चलते सीरिया से अमेरिका अपने संबंध पूरी तरह से खत्‍म कर चुका है। आपको बता दें कि अमेरिका सीरिया की सरकार के खिलाफ वहां पर मोर्चा खोले हुए है। इस युद्ध में लाखों लोग मारे जा चुके हैं और हजारों की संख्‍या में लोग दूसरे देश में शरण लिए हुए हैं। वहीं अमेरिका के पास अपने नागरिक को वहां पर तलाशने को लेकर चेक रिपब्लिक से सहयोग लेने का रास्‍ता बच जाता है। चेक रिपब्लिक का दमिश्‍क में दूतावास है। मजाद के लापता होने की जानकारी को सबसे पहले वाल स्‍ट्रीट जरनल ने उठाया था। दमिश्‍क से लापता हुए केवल मजाद ही नहीं है बल्कि वर्ष 2012 में फ्रीलांस अमेरिकी पत्रकार ऑस्टिन टाइस को भी चेकप्‍वाइंट से हिरासत में ले लिया गया था। उसके परिजनों ने भी ट्रंप से ऑस्टिन को छुड़वाने की गुहार लगाई है।
सीरिया में ही हुआ जन्‍म;-न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स के मुताबिक मजाद का जन्‍म सीरिया में ही हुआ है। जब वह महज छह साल के थे तब उनके पिता की जॉब अमेरिका में लगी थी जिसके बाद वह भी वहीं के नागरिक बन गए थे। मजाद के परिजन इस बात से पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं कि आखिर यदि मजाद को हिरासत में भी लिया गया होगा तो आखिर इसके पीछे क्‍या वजह होगी। आपको बता दें कि मजाद काफी समय से क्‍लीनिकल साइक्‍लोजी पर काम कर रहे थे। इसके चलते वह दुनिया के कई देशों में भी गए। उन्‍होंने 2004 के दौरान इंडोनेशिया में आई सूनामी के दौरान लोगों को निशुल्‍क ट्रॉमा थेरेपी भी दी थी।

काठमांडू। नेपाल के केंद्रीय बैंक ने देश में 2000, 500 और 200 रुपये के भारतीय नोटों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है। इसका यहां घूमने आने वाले भारतीय पर्यटकों पर असर पड़ सकता है क्योंकि इस हिमालयी देश में भारतीय मुद्रा का व्यापक चलन है।काठमांडू पोस्ट अखबार के अनुसार, नेपाल राष्ट्र बैंक ने रविवार को एक सर्कुलर जारी कर नेपाली ट्रेवलर्स, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के 100 रुपये से…
नई दिल्ली। इन दिनों अफगानिस्‍तान में राष्‍ट्रपति चुनाव सुर्खियों में है। इस चुनाव के साथ ही एक बार फ‍िर यहां की लोकतांत्रिक सरकार और राष्ट्रपति अशरफ ग़नी के भविष्‍य पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, यहां तालिबान का प्रभुत्‍व खत्‍म करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन आज भी वे वहां की लोकतांत्रिक सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। अफगानिस्‍तान में लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था कायम होने…
वाशिंगटन। अमेरिका के हवाई तट से कुछ दूरी पर गोताखोरों को एक विशालकाय व्हाइट शार्क नजर आई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी शार्क माना जा रहा है। यह मादा शार्क 20 फुट लंबी, 2.5 टन वजनी है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसकी उम्र करीब 50 साल है। इसके विशाल आकार की वजह से इसका नाम ‘डीप ब्लू’ रखा गया है।अद्भुत घटना:-इस दिलचस्प घटना के बारे में एक गोताखोर…
जेरूसलम| इजरायल की सेना ने सोमवार को कहा कि उसने सीरिया में ईरानी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) का कहना है कि इसका ऑपरेशन ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्डस की एक इकाई कुद्स फोर्स के खिलाफ है। इसने कोई विवरण नहीं दिया लेकिन सोमवार तड़के सीरियाई राजधानी दमिश्क के आस-पास हमले की खबरें हैं।सीरियाई मीडिया का कहना है कि हवाई…
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