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दुनिया (432)

नई दिल्‍ली। यूरोपियन यूनियन इस बात पर राजी हो गया है कि ब्रिटेन को ब्रेक्जिट के लिए और समय दिया जाना चाहिए। ब्रिटेन ने इसके लिए ईयू से 30 जून तक का समय मांगा था। इससे पहले ब्रिटेन को ईयू से बाहर होने के लिए 29 मार्च तक का समय था। ब्रिटेन की पीएम थेरेसा मे के आग्रह पर ईयू ने ब्रिटेन को आखिरी लाइफ लाइन दी है। इसका मकसद ईयू से अलग होने की शर्तें तैयार करना है। हालांकि थेरेसा ब्रिटेन की संसद में दो बार शर्तों का प्रस्‍ताव लेकर आई थीं, लेकिन सदन में इनपर सहमति नहीं बन पाई। इसकी वजह से ब्रिटेन के ईयू से बिना शर्त निकलने का संकट खड़ा हो गया था। बहरहाल, ब्रिटेन में इसको लेकर सदन के बाहर और अंदर काफी असमंजस की स्थिति है। लेकिन इन सभी के बीच यह बात आशंका भी घर करने लगी है कि ब्रेक्जिट के बाद न सिर्फ ब्रिटेन बल्कि यूरोपियन यूनियन को आर्थिक तौर पर काफी नुकसान होने वाला है। यह नुकसान अरबों डालर का भी हो सकता है।
शोध में सामने आई बात:-जर्मनी के बैर्टेल्समन फाउंडेशन की स्टडी के मुताबिक यदि ब्रिटेन बिना किसी समझौते के यूरोपियन यूनियन से बाहर होता है तो इसका असर भी व्‍यापक होगा। इस वजह से इसको हाई ब्रेक्जिट का नाम दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ यदि सहमति के बाद वह ईयू से बाहर होता है तो यह सॉफ्ट ब्रेक्जिट होगा। हाई ब्रेक्जिट की सूरत में ब्रिटेन की सालाना आय में करीब 40 अरब यूरो का नुकसान हो सकता है। वहीं ब्रिटेन में रहने वालों की आय में सालाना करीब 57 अरब यूरो या प्रति व्यक्ति 873 यूरो की कमी आ सकती है।
ये है वजह:-स्‍टडी में जिस तर्ज पर नुकसान का जायजा लिया गया है उसकी बड़ी वजह ब्रेक्जिट के कारण चीजों और सेवाओं पर टैरिफ बताया गया है। आपको बता दें कि यूरोपियन यूनियन के सिंगल मार्केट सिस्टम में कोई टैरिफ नहीं लगता है। वहीं ब्रिटेन के ईयू में रहने से वह गुड्स एंड सर्विसेज के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा से बचा रहता है। ब्रेक्जिट के बाद चीजों के दाम ऊपर जा सकते हैं और लोगों की आय में भी कमी आ सकती है।
किसे नुकसान, किसे फायदा:-स्‍टडी के मुताबिक साफ्ट ब्रेक्जिट के कारण सभी पक्षों को कम नुकसान झेलना पड़ेगा। इससे यूरोपीय संघ के बाकी देशों को होने वाला अनुमानित घाटा करीब आधा हो जाएगा। स्‍टडी की मानें तो इससे जर्मनों की आय में आने वाली सामान्य कमी भी घट कर पांच अरब यूरो और ब्रिटेन के नागरिकों की आय में कमी करीब 32 अरब यूरो के आसपास हो जाएगी। इस शोध में एक अहम बात निकलकर सामने आई है। इसके मुताबिक हाई ब्रेक्जिट होने पर अमेरिका, रूस और चीन की आय बढ़ सकती है। हाई ब्रेक्जिट की सूरत में जहां अमेरिका के लोगों की सालाना आय में करीब 13 अरब यूरो और चीन में करीब पांच अरब यूरो की सालाना आय बढ़ सकती है। वहीं रूस की सालाना आय में 26 करोड़ यूरो की बढ़त हो सकती है।
हाई ब्रेक्जिट से झटका:-हार्ड ब्रेक्जिट से सबसे बड़ा झटका जर्मनी और फ्रांस को लग सकता है। शोध के मुताबिक यहां के लोगों को हर साल इससे करीब 10 अरब यूरो का घाटा झेलना पड़ सकता है। इतना ही नहीं जर्मनी के दक्षिणी राज्यों जैसे बवेरिया, बाडेन वुर्टेमबैर्ग और पश्चिमी राज्य नार्थ राइन वेस्टफेलिया के औद्योगिक और निर्यात केंद्र बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल, इन देशों को होने वाले घाटे की सबसे बड़ी वजह इनका निर्यात पर अधिक निर्भरता है। आपको बता दें कि वर्ष 2017 में जर्मनी को जिन देशों ने सबसे अधिक निर्यात किया था उसके टॉप फाइव देशों में ब्रिटेन शामिल था।

 

मोसुल। मोसुल के पूर्व जिहादी गढ़ में कुर्दिश नए साल का जश्न मना रहे परिवारों के साथ भरी हुई नाव सूलन नदी में गुरुवार को डूब गई। इराक में हुए सबसे भीषण नाव हादसे में 100 लोगों की मौत हो गई, जबकि कुछ लोगों को बचा लिया गया। इस हादसे में ज्यादातर महिलाओं और बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी।इस दुर्घटना ने उन निवासियों में शोक की लहर दौड़ी, जिन्होंने हाल ही में उत्तरी शहर के इस्लामिक स्टेट समूह से हटने के बाद टाइग्रिस के तट पर उत्सव शुरू किया था।पोत एक लोकप्रिय पिकनिक क्षेत्र में जाने के लिए टाइग्रिस को पार करने वाले पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के साथ पैक किया गया था। 'यह एक आपदा है, किसी को उम्मीद नहीं थी', एक युवा ने कहा जो तट पर पहुंचने में कामयाब रहा था। नाव पर बहुत सारे लोग थे, विशेषकर महिलाएं और बच्चे', उन्होंने एजेंसी को बताया।आंतरिक मंत्रालय ने एक ताजा टोल जारी करते हुए कहा कि 94 लोगों की मौत हो गई और 55 लोगों को बचा लिया गया। इसके प्रवक्ता साद मान ने बताया कि इस दुर्घटना में 19 बच्चों और 61 महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। मोसुल में स्थित एक अन्य सुरक्षा अधिकारी ने एएफपी को बताया कि नाव इसलिए डूब गई, क्योंकि उसमें सौ से अधिक यात्री सवार थे।अधिकारियों ने कई दिनों तक भारी बारिश के बाद मोसुल बांध से पानी छोड़े जाने के कारण लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी थी, जिससे नदी का स्तर बढ़ गया था। वसंत के पहले दिनों के लिए वन क्षेत्र में आने वाले सैकड़ों लोग नदी के तट पर इकट्ठा हो गए क्योंकि आपदा सामने आई थी।एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों ने मृतकों और घायलों को शहर के अस्पतालों में पहुंचाया। इराक की आखिरी बड़ी नाव दुर्घटना मार्च 2013 में हुई थी, जिसमें पांच लोग मारे गए थे।प्रधानमंत्री एडेल अब्देल महदी ने स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट पर रखा और गुरुवार की दुर्घटना के बाद बचे लोगों को खोजने के लिए सभी उपलब्ध टीमों को जुटाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिम्मेदारियों को निर्धारित करने के लिए जांच के आदेश दिए हैं।

 

यानचेंग। चीन (China) के शहर यानचेंग (Yancheng) में केमिकल प्लांट में ब्लास्ट में मरने वालों का आंकड़ा 47 पहुंच गया है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट की वजह से 90 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। पांच दिवसिय यूरोप दौरे पर गए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत बचाव के लिए हर संभव मदद देने के लिए कहा है। आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय (Ministry of Emergency Management) के मुताबिक घटना स्थल से 88 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है।दरअसल ये ब्लास्ट गुरूवार को जियांगसू के यानचेंग शहर के औद्योगिक पार्क में हुआ। चश्मदीदों ने बताया की प्लांट में हुए धमाके की वजह से कई इमारतें भी गिर गई, जिसमें कई मजदूर दब गए। इसके अलांवा धमाका इतना जोरदार था कि आस पास की इमारतों की खिड़कियां भी चकनाचूर हो गईं। राहत बचाव कार्य के लिए 928 कर्मियों और 176 फायर ट्रकों को लगाया गया है।बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी केे प्रोफेसर ने एक इंटरव्यू में कहा है कि धमाके के बाद प्लांट से जहरीले रसायनों के रिसाव की वजह से आस पास के पर्यावरण और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम होना चाहिए।शहर के पर्यावरण संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार, विस्फोट से 500 मीटर के दायरे में रासायनिक पार्क और इसके आसपास के क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। लेकिन तेज हवाओं से भारी धुआं उठने की आशंका है। अधिकारियों ने कहा कि कोई भी व्यक्ति रासायनिक पार्क में नहीं रहता है, जबकि आसपास के सभी लोगों को निकाल लिया गया है। यानचेंग के शिक्षा विभाग ने बताया की धामके वाली जगह के आस पास करीब 10 स्कूल थे। विस्फोट में घायल हुए लोगों में कुछ स्कूल के छात्र भी हैबताया जा रहा है कि जियांगसू तियानजैई केमिकल कंपनी ने इस संयंत्र को 2007 में स्थापित किया गया था। इसमे हाइड्रोक्सीबेनज़ोइक एसिड जैसे रासायनिक उत्पादों का निर्माण होता था।

अल्बानिया। प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक, स्टर्लिंग बायोटेक केस में वांछित हितेश पटेल को अल्बानिया में हिरासत में लिया गया है। उसके खिलाफ 11 मार्च को रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। उसको 20 मार्च को अल्बानिया में राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो-तिराना द्वारा हिरासत में लिया गया है।ईडी के सूत्र के हवाले से हितेश पटेल के जल्द ही भारत प्रत्यर्पित किए जाने की उम्मीद है। वह 5000 करोड़ रुपये के धन शोधन मामले में आरोपी है।बता दें कि इसी साल जनवरी के महीने में दिल्‍ली की कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को स्‍टर्लिंग बायोटेक के चार प्रमोटरों के खिलाफ प्रत्‍यपर्ण प्रकिया चलाने की अनुमति दी थी। कोर्ट से इजाजत मिलने के बाद स्‍टर्लिंग बायोटेक के प्रमोटरों को भारत लाने की प्रकिया तेज कर दी गई थी।इन प्रमोटरों पर बैंक से 8100 करोड़ रुपये फ्रॉड करने का आरोप है। एडिशनल जज सतीश कुमार अरोरा ने प्रवर्तन निदेशालय को यह आदेश दिया था। कोर्ट के इस आदेश के बाद नितिन जयंतीलाल संदेसरा, हितेष नरेंद्र भाई पटेल, चेतन जयंतीलाल संदेसरा, दीप्ति चेतन संदेसरा पर प्रवर्तन निदेशालय कार्रवाई तेज हो गई, जिसमें शुक्रवार 22 मार्च को तब बड़ी सफलता हाथ लगी जब हितेश पटेल हिरासत में लिया गया।इससे पहले ईडी ने कोर्ट में यह बताया कि इन चारों पर बैंक से धोखाधड़ी के आरोप दर्ज हो चुके हैं। बताया जाता है कि लोग इटली और नाइजीरिया में रह रहे थे। इससे पहले कोर्ट ने इन चारों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट कर कोर्ट में उन्‍हें पेश होने के लिए कहा था।बता दें कि सीबीआइ जांच के बाद ईडी ने अलग से केस दर्ज किया था। गुजरात की दवा कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक पर करीब आठ हजार एक सौ करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। आरोप है कि कंपनी ने आंध्रा बैंक के जरिये रुपये लोन लिए, जो कि बाद में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) घोषित किया गया।

नई दिल्ली। पाकिस्तान से आतंकी गतिविधयां संचालित करने वाले जैश-ए-मुहम्मद (Jaish-E-Mohammed) सरगना मसूद अजहर पर लगातार शिकंजा कस रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) पहले ही उसे वैश्विक आतंकी घोषित करने के पक्ष में है। अब यूरोपीयन यूनियन (EU) में भी मसूद को आतंकी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यूरोपीय संघ में जर्मनी ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया है।मालूम हो कि 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले (CRPF Convoy) पर हुए आत्मघाती आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) में 40 जवान शहीद हो गए थे। हमले की जिम्मेदारी पाक से संचालित होने वाले आतंकी संगठन जैशे-ए-मुहम्मद (JeM) ने ली थी, जिसका मुखिया मसूद अजहर है। इसके बाद भारत ने कूटनीतिक तरीके से पाकिस्तान को घेरने और मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहल की।यूरोपीय यूनियन पाकिस्तान को आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले देशों की सूची में पहले ही शामिल कर चुका है। यूरोपीय यूनियन ने ये फैसला, पुलवामा आतंकी हमले के ठीक एक दिन पहले लिया था। यूरोपीय यूनियन के हाई रिस्क वाले देशों की सूची में शामिल होने से पाकिस्तान के वित्तीय लेनदेन पर, सदस्य राष्ट्र और संघ के अंतर्गत आने वाले बैंक व वित्तीय संस्थान कड़ी नजर रखेंगे। इसका मकसद टैरर फंडिग और मनी लॉड्रिंग को रोकना है।
चीन ने चौथी बार UNSC में मसूद को बचाया:-भारत की कूटनीति काम आयी और UNSC में फ्रांस, अमेरिका व ब्रिटेन ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया। हालांकि, जैसी आशंका थी चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर मसूद के खिलाफ UNSC में आए इस प्रस्ताव को टेक्निकल होल्ड पर कर दिया है। ये चौथी बार है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव लाया गया था। इस बार पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए मसूद अजहर को बचाने के कारण चीन भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है। दरअसल, अमेरिका समेत अन्य देशों ने भी चीन से अनुरोध किया था कि वह मसूद अजहर के खिलाफ UNSC में आए प्रस्ताव का समर्थन कर उसे मंजूरी प्रदान करे, बावजूद ड्रैगन अपनी आदतों से बाज नहीं आया। चीन के इस रुख से भारत समेत दुनिया के कई देश असंतुष्ट हैं।
सर्वसम्मति से होगा फैसला;-अब यूरोपीय संघ (EU) में मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए जर्मनी, सदस्य देशों के संपर्क में है। जर्मनी अगर यूरोपीय संघ में मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने में सफल होता है तो EU के सदस्य 28 देशों में मसूद अजहर पर प्रतिबंध लग जाएगा। हालांकि, ये तभी संभव होगा जब यूरोपीय संघ के सभी 28 देश जर्मनी के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दें। यूरोपीय यूनियन में इस तरह के मामलों पर सर्वसम्मति से फैसला लिया जाता है।
EU में आतंकी घोषित होने पर ये होगा असर;-इसके बाद मसूद अजहर इन 28 देशों में कोई यात्रा नहीं कर सकता है और उन देशों में अगर उसकी या उसके संगठन की कोई संपत्ति होगी, तो संबंधित देश की सरकार द्वारा उसे भी जब्त कर लिया जाएगा। जर्मनी के अनुसार उसका प्रयास है कि सभी 28 देश अपनी तरफ से पूरी कोशिश करें कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। अगर ऐसा होता है तो ये भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत साबित होगी।
कई देशों में प्रतिबंधित हो चुका है मसूद:-फ्रांस भी 15 मार्च 2019 को जैश-ए-मुहम्मद को प्रतिबंधित कर मसूद को आतंकी घोषित कर चुका है। इसके बाद फ्रांस में मसूद अजहर पर आर्थिक प्रतिबंध लग चुका है। फ्रांस ने भी अन्य देशों से जैश-ए-मुहम्मद को प्रतिबंधित करने की अपील की है। फ्रांस EU में मसूद के खिलाफ जर्मनी द्वारा लाए गए प्रस्ताव के समर्थन में है। इससे पाकिस्तान और मसूद अजहर पर शिकंजा और कस चुका है। मालूम हो कि अमेरिका समेत कुछ और देश पहले ही जैश-ए-मुहम्मद को प्रतिबंधित कर मसूद अजहर को आतंकी घोषित कर चुके हैं।
आतंकवाद को लेकर भारत सख्त;-पुलवामा हमले के बाद से आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पाकिस्तान के बार-बार बात करने के प्रयासों पर भारत कई बार स्पष्ट कर चुका है कि आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने ये बात दोहराई है। सीआरपीएफ के 80वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में उन्होंने कहा ‘पुलवामा में हुए आतंकी हमले को भारत न तो भूला है और न ही कभी भूलेगा। मैं आपको आश्वासन देता हूं कि देश का नेतृत्व इस तरह के आतंकी हमलों से और आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों से कारगर तरीके से निपटने में पूरी तरह से सक्षम है।’
अब पाक के बचाव में उतरा ड्रैगन:-पाकिस्तान और चीन की फितरत लगभग एक जैसी है। आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पूरी दुनिया में घिरा हुआ और अलग-थलग पड़ा है, बावजूद चीन उसके साथ याराना निभाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में मसूद को बचा चुका चीन, अब पाकिस्तान के बचाव में खुलकर उतर आया है। चीन ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षाबलों के काफिले पर हुए आतंकी हमले को लेकर कोई भी देश पाकिस्तान पर निशाना ना साधे।इतना ही नहीं चीन ने ये भी कहा है कि वह संकट के समय पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा और पूरी मजबूत से उसका समर्थन करेगा। मंगलवार को ही चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बीजिंग में मुलाकात की थी। इस दौरान पुलवामा हमला और मसूद अजहर के मुद्दे पर भी दोनों देशों ने चर्चा की। बताया जा रहा है कि इस दौरान महमूद कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान पहले भी और अब भी भारत से संबंध अच्छे करना चाहता है और संवाद के लिए तैयार है।

नई दिल्‍ली। चीन का आतंकवाद के प्रति दोगला रवैया भारत समेत पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा और समस्‍या बना हुआ है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि चीन जहां पाकिस्‍तान में बैठे मसूद अजहर को आतंकी नहीं मानता है वहीं अपने यहां के उइगर मुस्लिम उसको आतंकी दिखाई देते हैं। यह बताना इसलिए बेहद जरूरी हो जाता है क्‍योंकि हाल ही में चीन ने दावा किया है कि उसने हिंसाग्रस्‍त शिनजियांग प्रांत में 2014 से जारी कार्रवाई के तहत अब तक करीब 13 हजार आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान सूबे में सक्रिय सैकड़ों आतंकी संगठनों का सफाया भी किया गया। चीन ने यह दावा ऐसे समय किया, जब इस प्रांत में उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार को लेकर उसकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय में खूब आलोचना हो रही है।
शिनजियांग में बहुसंख्‍यक हैं उइगर:-जिस शिनजियांग प्रांत की बात चीन कर रहा है दरअसल वहां उइगर मुस्लिम बहुसंख्यक हैं और चीन ने इस प्रांत को स्वायत्त घोषित कर रखा है। इस प्रांत की सीमा मंगोलिया और रूस सहित आठ देशों के साथ मिलती है। तुर्क मूल के उइगर मुसलमानों की इस क्षेत्र में आबादी एक करोड़ से ऊपर है। इस क्षेत्र में उनकी आबादी बहुसंख्यक है। यहां के इस बहुसंख्‍यक समुदाय को कम करने के लिन चीन की सरकार ने यहां पर हॉन समुदाय के लोगों को बसाना शुरू किया था। चीन की सरकार ने यहां के ऊंचे पदों पर भी हॉन समुदाय के लगों को बिठा रखा है। इसका नतीजा अब सामने आने लगा है। यह चीन की उस नीति को बताता है जिसके जरिए वह अपने यहां पर इस्लामी कट्टरता को रोक रहा है। इसके तहत उइगर मुस्लिमों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। दस लाख से ज्यादा उइगरों को हिरासत केंद्रों में रखा गया है। चीन इन हिरासत केंद्रों को व्यावसायिक शिक्षा केंद्र कहता है।
तोड़ी गई मस्जिद:-इस क्षेत्र में चीन ने उइगर मुस्लिमों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगा रखा है। 2018 में चीन की सरकार ने वहां की एक मस्जिद को ध्‍वस्‍त कर दिया था। 2014 में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। इसके तर्क में कहा गया था कि कानून से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। इससे पहले 2014 में शिनजियांग की सरकार ने रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों के रोजा रखने और मुस्लिम नागरिकों के दाढ़ी बढ़ाने पर पाबंदी लगा दी थी। चीन का यहां तक कहना है कि धार्मिक गतिविधियां देश के कानून के तहत होनी चाहिए। 2018 में ही चीन के स्वायत्त क्षेत्र निंगसिआ हुई के वुजहांग शहर में स्थित वेईझोऊ जामा मस्जिद को गिराने के लिए भी अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। लेकिन भारी प्रदर्शन के चलते इसको फिलहाल टाल दिया गया।
चीन का श्‍वेत पत्र:-इसको वैश्विक समुदाय के साथ एक भद्दा मजाक ही कहा जाएगा कि चीन ने सोमवार को एक श्‍वेत पत्र के जरिए उइगर मुस्लिमों के प्रति अपनाई जा रही नीति को सही करार दिया है। इसमें चीन ने साफ कर दिया है कि उइगर मुस्लिम बहुल शिनजियांग में आंतकी खतरों से निपटने के लिए और भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है। श्वेत पत्र के अनुसार, साल 2014 से शिनजियांग में जारी दहशतगर्दी विरोधी कार्रवाई के दौरान 1,588 आतंकी गिरोहों को खत्म किया गया।
करीब 30 हजार लोगों को दंडित किया;-चीन के मुताबिक 12,995 आतंकी गिरफ्तार किए गए और 2,052 बम बरामद हुए। इसके अलावा अवैध धार्मिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए 30,645 लोगों को दंडित किया गया। श्वेत पत्र में यह भी बताया गया है कि साल 1990 से 30 हमलों को रोका गया और अंतिम हमला दिसंबर 2016 में हुआ था। प्रांत में हुए हमलों और ¨हसक घटनाओं में 458 लोग मारे गए और 2,540 घायल हुए थे।
यूएन की रिपोर्ट भी चिंताजनक:-यहां पर सिर्फ यही बात चिंताजनक नहीं है बल्कि पिछले वर्ष अगस्‍त में जो संयुक्‍त राष्‍ट्र ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट जारी की थी उसमें कई चौंकाने वाले तथ्‍य सामने आए थे। इस रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि चीन की तरफ से इन पर निगरानी रखने के नाम पर लाखों उइगर मुस्लिमों को शिविरों में कैद कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन 20 लाख उइगर मुसलमानों की विचारधारा बदलने में लगा हुआ है। यूएन की रिपोर्ट ने इस पर गहरी चिंता व्‍यक्‍त की थी। आपको बता दें कि चीन में करीब दो करोड़ मुस्लिम आबादी है, जिसमें उइगर और हुई समुदाय भी शामिल है। उइगरों की तुलना में हुई मुस्लिमों को शांतिपूर्ण माना जाता है।
शिनजियांग कभी पूर्वी तुर्किस्‍तान था:-आज का शिनजियांग पूर्व का पूर्वी तुकिस्‍तान है। 1949 में इसको एक अलग राष्‍ट्र के तौर पर मान्‍यता दी गई थी। लेकिन इसी वर्ष यह चीन का हिस्सा बन गया। 1990 में जब सोवियत संघ का पतन हुआ तब इस क्षेत्र के लोगों ने भी खुद को आजाद कराने के लिए काफी प्रयास किया। उस वक्‍त इस आंदोलन को मध्य एशिया में कई मुस्लिम देशों ने भी समर्थन दिया था। चीन द्वारा हमेशा से ये कहा जाता रहा है कि इस प्रांत में रहने वाले उइगर मुस्लिम चीन से अलग होने की मांग के तहत 'ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट' चला रहे हैं। अमेरिका ने 'ईस्ट तुर्किस्‍ताना इस्लामिक मूवमेंट' को उइगरों का एक अलगाववादी समूह कहा है। लेकिन वह ये भी मानता है कि यह संगठन आतंकी घटनाओं को अंजाम नहीं दे सकता है।
उइगर मुस्लिमों के सबसे बड़े नेता:-उइगर मुस्लिमों के बड़े नेता डोल्‍कन इसा हैं जो जर्मनी में रहते हैं। वह म्यूनिख स्थित वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (डब्लूयूसी) की एग्जीक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन भी हैं। वह 2014 से चीन की मोस्‍ट वांटेड लिस्‍ट में शामिल हैं। इसके अलावा उनके खिलाफ इंटरपोल ने रेडकॉर्नर नोटिस भी जारी कर रखा है। उनके ऊपर शिनजियांग प्रांत में हिंसा फैलाने का आरोप है।
शिनजियांग में हिंसा का इतिहास
-2008 में शिनजियांग की राजधानी उरुमची में हुई हिंसा में 200 लोग मारे गए जिनमें अधिकांश हान चीनी थे।
-2009 में उरुमची में ही हुए दंगों में 156 उइगर मुस्लिम मारे गए थे। तुर्की ने इसको एक बड़ा नरसंहार करार दिया था।
-2010 में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ हुई हिंसा।
-2012 में विमान हाइजैक करने के आरोप में छह उइगर गिरफ्तार किए गए। यह विमान हाटन से उरुमची जा रहा था।
-2013 में प्रदर्शन कर रहे उइगर मुस्लिमों पर पुलिस ने फायरिंग की जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई।
-2016 में बीजिंग में एक कार बम धमाके में पांच लोग मारे गए जिसका आरोप उइगर मुस्लिमों पर लगा था।

बीजिंग। आतंकवाद को लेकर भारत और चीन के बीच चल रही तनातनी खत्‍म नहीं हो रही है। ताजा मामले में पुलवामा हमले के मास्‍टर माइंड मसूद अजहर को वैश्‍विक आतंकवादी घोषित करने के मुद्दे पर चीन के साथ नहीं देने के बाद से ही यह चल रहा है।इसी कड़ी में बुधवार को भारत ने चीन के दूसरे क्षेत्र एवं सड़क फोरम (Belt and Road Forum) के बहिष्‍कार करने का संकेत…
ओटावा। भारतीय मूल के सिख नेता जगमीत सिंह ने कनाडा में राजनीतिक इतिहास कायम किया है। देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के पहले अश्वेत नेता ने 'हाउस ऑफ कॉमन्स' (कनाडा के संसद) में बहस में हिस्सा लिया। सोमवार को पगड़ी में जगमीत सिंह सदन में दाखिल हुए। सदस्यों ने उनका स्वागत किया। इसी दिन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के मंत्रिमंडल में एक वरिष्ठ महिला सदस्य को शामिल किया गया। न्यू…
नई दिल्‍ली। न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों पर हमले के बाद हिरासत में लिए गए संदिग्ध हमलावर ब्रेंटन टैरंट के बारे में कुछ और बातें सामने आई हैं। बीबीसी ने इस शख्‍स की तफ्तीश की है। इसमें पता चला है कि ब्रेंटन 2018 के अक्‍टूबर-नवंबर में गुलाम कश्‍मीर घूमने गया था। बीबीसी ने अपनी पड़ताल के बाद इस शख्‍स के बारे में कुछ रोचक तथ्‍य भी उजागर किए हैं…
बीजिंग। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दुनिया की आंखों में धूल झोंकने वाला पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे पर भी दूसरे देशों को गुमराह कर रहा है। सिंध से लेकर बलूचिस्तान तक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने आम लोगों पर कहर बरपा रखा है, सरकार के खिलाफ किसी को आवाज उठाने की इजाजत तक नहीं है। गुलाम कश्मीर में लोगों की जिंदगी नरक बनी हुई है और पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में हालात खराब…
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