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पेरिस। येलो वेस्ट आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के विरोध में फ्रांस की राजधानी पेरिस में फिर से हजारों लोग सड़क पर उतर गए और विरोध प्रदर्शन किया।पिछले साल 17 नवंबर से यह आंदोलन फ्रांस में ईंधन सहित अन्य वस्तुओं पर टैक्स वृद्धि के खिलाफ शुरू हुआ था। 12वें शनिवार को पेरिस के अलावा ल्योन, मोंटपेलियर, रूएन, नानतेज, बोरडॉक्स, टौलोज और मार्सेली में भी व्यापक प्रदर्शन हुए।ये प्रदर्शन फ्रांस की शीर्ष अदालत से जारी निर्देश के एक दिन बाद हुए। शीर्ष अदालत ने विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस को रबर की गोलियां इस्तेमाल करने की छूट दे दी है। बता दें कि नवंबर से चल रहे इस आंदोलन ने कई बार ¨हसक रूप ले लिया है।

 

इस्लामाबाद/श्रीनगर। भारत की कड़ी चेतावनी के बावजूद पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में दखलअंदाजी करने से बाज नहीं आ रहा है। एक बार फिर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अलगाववादी नेता से फोन पर बात की है। हाल ही में विदेश मंत्रालय ने अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक से फोन पर बात करने के मामले में पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी थी, इसके बावजूद पड़ोसी मुल्क अपनी हरकतों पर लगाम नहीं लगा रहा है। इस बार कुरैशी ने हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी से फोन पर बात की है।
मीरवाइज के बाद गिलानी से की फोन पर बात:-कहा जा रहा है कि पीएम मोदी के जम्मू दौरे से पहले कुरैशी ने गिलानी से शनिवार को बात की और उनके बीच कश्मीर मुद्दे पर बातचीत हुई। फिलहाल भारत की ओर से अभी तक कुरैशी की इस हरकत पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, इससे पहले कुरैशी के मीरवाइज को फोन करने पर भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसको लेकर विदेश सचिव विजय गोखले ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त सोहेल महमूद को भी तलब किया था।
मीरवाइज से बात करने पर दी थी कड़ी चेतावनी:-पाकिस्तान को चेतावनी जारी करते हुए विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री का यह कदम भारत की एकता को नुकसान पहुंचाने वाला है और यह भारत की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने का शर्मनाक प्रयास है। इसके साथ ही भारत ने ऐसा करने के परिणाम भुगनते की भी चेतावनी दी थी।
कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा...:-कुरैशी के मीरवाइज को फोन करने पर विदेश सचिव ने यह भी कहा था कि पड़ोसी मुल्क ने भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप किया है। भारत सरकार को उम्मीद है कि भविष्य में पाकिस्तान इस तरह की कार्रवाई से दूर रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित किसी भी मामले में पाकिस्तान को दखल देने का अधिकार नहीं है

 

नई दिल्‍ली। दक्षिण-पूर्व ब्राजील में खदान पर बना बांध ढहने से मरने वालों की संख्या लगभग 100 पहुंच चुकी है और 300 से ज्‍यादा लोग लापता हैं। बांध ढहने के बाद ब्राजील की दिग्गज खनन कंपनी वेल पर पौने पांच अरब रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस हादसे ने सितंबर 2010 में टिहरी बांध के बैराज खोलने से हुए नुकसान की यादें ताजा हो गईं। कल्‍पना कीजिए कि अगर ब्राजील के बांध की तरह, टिहरी बांध टूट जाए, तो क्‍या होगा? जानकार बताते हैं कि ऐसे में जो भयंकर जल प्रलय आएगा, उसमें उत्‍तर भारत जलमग्‍न हो जाएगा। टिहरी बांध का पानी पश्चिम बंगाल तक पहुंच जाएगा।बता दें कि ब्राजील में बांध ढहने के बाद लापता हुए 300 से अधिक लोगों में से 150 लोग बांध के नजदीक स्थित कंपनी के प्रशासनिक कार्यालय में काम करते थे। इसलिए ये संभावना जताई जा रही है कि इन लोगों के बचने की उम्‍मीद काफी कम थी। यह खदान ब्राजील की खनन कंपनी वेल की है। इसी राज्य में कंपनी की 2015 में एक खदान ढह गई थी जिसमें 19 लोगों की मौत हुई थी। बता दें कि कुछ महीने पहले ही एक जर्मन कंपनी ने इस बांध का निरीक्षण किया था, लेकिन उसने इसमें किसी तरह की खामी नहीं पाई थी। दुनियाभर में इस संबंध में विशेषज्ञता रखने वाली म्यूनिख आधारित कंपनी तुवे सुद ने खदान का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी के अनुरोध पर सितंबर 2018 में निरीक्षण किया था। तब उसे बांध की सरंचना में किसी प्रकार की खामी नहीं मिली थी।ग्रीनपीस के ब्राजील स्थित कार्यालय ने इस आपदा के बारे में कहा कि बांध टूटना बताता है कि इस संबंध में पूर्व के अनुभवों से सरकार और खनन कंपनी ने कुछ नहीं सीखा है। बताया गया कि बांध का टूटना एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय अपराध है जिसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।
20 लाख घन मीटर थी बांध की क्षमता:-ब्राजील में ढहे बांध का इस्तेमाल खदान से निकले लौह अयस्क की सफाई की प्रक्रिया में बने मलबे को जमा करने के लिए किया जाता था। ये खदान ब्राजील की सबसे बड़ी खनन कंपनी वेले की है। कंपनी के अनुसार, इस इलाके में कई बांध बनाए गए थे जिनमें से एक ब्रूमाडिन्हो बांध है। 1976 में बनाए गए इस बांध में 20 लाख घन मीटर तक मलबा रखने की क्षमता थी।
टिहरी बांध टूटा तो आएगा जल प्रलय;-यह टिहरी बांध के बाद देश का दूसरा सबसे ऊंचा और दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा बांध है। सितंबर 2010 में टिहरी बांध के बैराज खोलने से हुए नुकसान की यादें आज भी ताजा हैं। यदि भविष्य में कभी टिहरी बांध का बैराज टूटा तो उत्‍तर भारत में जल प्रलय आ सकती है। ऐसे में ऋषिकेश, हरिद्वार सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा होगा। एक वैज्ञानिक ने लिखा है भूकम्प की स्थिति में यदि यह बांध टूटा तो जो तबाही मचेगी, उसकी कल्पना करना भी कठिन है। पश्चिम बंगाल तक इसका व्यापक दुष्प्रभाव होगा। मेरठ, हापुड़, बुलन्दशहर में साढ़े आठ मीटर से लेकर 10 मीटर तक पानी ही पानी हो जाएगा। हरिद्वार, ऋषिकेश का तो नामोनिशान तक नहीं रहेगा।
प्राकृतिक आपदाओं के मामले में संवेदनशील जोन में आता है भारत;-वैश्विक एजेंसियों का आकलन है कि हमारा देश प्राकृतिक आपदाओं के मामले में संवेदनशील जोन में आता है। इंटरनेशनल फंडरेशन ऑफ रेडक्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज द्वारा 2010 में प्रकाशित विश्व आपदा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 से 2009 के बीच आपदाओं से प्रभावित होने वाले लोगों में 85 फीसदी एशिया प्रशांत क्षेत्र के थे। अगर रियेक्टर पैमाने पर 8 की तीव्रता से भूकंप आया तो टिहरी बांध के टूटने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो उत्तरांचल सहित अनेक मैदानी इलाके डूब जाएंगे। हालांकि पिछले 12 वर्षों में टिहरी बांध परियोजना से निर्धारित करीब 39 हजार लक्ष्य के सापेक्ष 43 हजार मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ है। बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में अग्रणी टिहरी बांध परियोजना देश के विकास में अहम योगदान दे रही है।

वाशिंगटन। दुनियाभर में इन दिनों ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा है। जलवायु परिवर्तन के कारण धरती जिस तरह गर्म हो रही है उससे वैज्ञानिक चिंतित हैं। हालांकि इन सबके बीच आम लोगों के बीच एक और भी सवाल उठ रहा है। सवाल यह है कि अगर धरती इतनी गर्म होती जा रही है तो मौसम इतना सर्द क्यों है? दुनिया के बड़े हिस्से में इस समय ठंड का प्रकोप है। अमेरिका के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां तापमान शून्य से भी 50 डिग्री नीचे चला गया है। बर्फबारी का दौर भी जारी है। भारत के भी पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हो रही है। कई स्थानों पर तापमान शून्य के नीचे पहुंच रहा है। इस सर्द मौसम में मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ग्लोबल वार्मिंग का असर कहां है? अगर ग्लोबल वार्मिंग वाकई समस्या है तो फिर इस भीषण सर्दी का कारण क्या है? ग्लोबल वार्मिंग इस सर्दी को कुछ गर्म क्यों नहीं कर पा रही है? आम लोग ही नहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मन में भी यह सवाल उठा है। उन्होंने ट्वीट करके सवाल उठाया कि आखिर ग्लोबल वार्मिंग कहां गई?
जलवायु और मौसम को समझना जरूरी:-इस बात को समझने के लिए हमें जलवायु और मौसम का अंतर जानना होगा। लंबी अवधि में वातावरण की स्थिति को जलवायु कहा जाता है। वहीं किसी छोटी अवधि में वातावरण में जो हो रहा है उसे मौसम कहा जाता है। मौसम निश्चित अंतराल पर बदलता रहता है। कुछ ही महीने के अंतराल पर आने वाले सर्दी और गर्मी के मौसम में बहुत बड़ा फर्क होता है। वहीं जलवायु वातावरण का एक समग्र रूप है।
बटुए और संपत्ति जैसा है फर्क;-इस बात को आसान भाषा में ऐसे भी समझा जा सकता है कि मौसम आपके बटुए में रखे पैसे जैसा है। वहीं जलवायु आपकी संपत्ति है। बटुआ खो जाए तो कोई गरीब नहीं हो जाता, लेकिन संपत्ति नष्ट हो जाए तो व्यक्ति बर्बाद हो सकता है। जलवायु और मौसम का भी ऐसा ही संबंध है। जिस दिन आपके आसपास का तापमान औसत से कम होता है, ठीक उसी समय पूरी धरती का औसत तापमान सामान्य से अधिक भी हो सकता है। इस अंतर को समझना होगा। ग्लोबल वार्मिंग एक बड़ी चुनौती है और इससे निपटने के ठोस और गंभीर प्रयास निरंतर होते रहने चाहिए।
आंकड़ों में दिखता है अंतर:-एक उदाहरण से स्थिति को समझा जा सकता है। दिसंबर, 2017 में जिस वक्त अमेरिका का कुछ हिस्सा औसत से 15 से 30 डिग्री फारेनहाइट तक ज्यादा सर्द था, उसी समय दुनिया 1979 से 2000 के औसत से 0.9 डिग्री फारेनहाइट ज्यादा गर्म थी। जब मौसम वैज्ञानिक कहते हैं कि इस सदी के अंत तक दुनिया का औसत तापमान दो से सात डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ जाएगा, इसका यह अर्थ नहीं होता कि सर्दियां कम सर्द हो जाएंगी। इसका अर्थ है कि मौसम पहले की तरह ही सर्द होता रहेगा, लेकिन सर्दी का दायरा कम होने लगेगा। एक अध्ययन के मुताबिक, पिछली सदी के पांचवें दशक में अमेरिका में सबसे गर्म और सबसे सर्द दिनों की संख्या लगभग बराबर थी। वहीं पिछली सदी के आखिरी दशक में सबसे गर्म दिनों की संख्या सर्द दिनों से दोगुनी हो गई। इसका मतलब है कि सर्दी के मौसम में भीषण सर्दी तो पड़ रही है, लेकिन सर्द दिनों की संख्या कम होती जा रही है।

काराकस।वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति एवं विपक्ष के नेता जुआन गुएदो की इस पहल से यहां की सियासत में एक नया मोड़ आ गया है। गुऐदा ने चीन और रूस को इस बात के लिए आश्‍वस्‍त किया है कि वेनेजुएला में उनके हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। उनकी यह पहल ऐसे वक्‍त हुई है जब चीन और रूस ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपना समर्थन दे रखा है। गुऐदा के इस कदम से राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अपने समर्थकों से अलग-थलग पड़ सकते हैं। गुऐदा को अमेरिका समर्थित माना जाता है।विपक्ष के नेता गुऐदा ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के समर्थक देशों रूस और चीन के साथ संवाद स्‍थापित किया है। गुएदो ने रायटर को बताया कि उसने दोनों शक्तियों को यह संदेश भेजा है। रूस और चीन, वेनेजुएला के शीर्ष विदेशी निवेशक हैं और यूएन सुरक्षा परिषद में मादुरो का समर्थन करते हैं। लेकिन दोनों देश इसके बावजूद वेनेजुएला की आर्थिक हालात को लेकर चिंतित हैं।उन्‍होंने कहा कि वेनेजुएला की स्थिरता में रूस और चीन बड़े कारक बन सकते हैं। एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। गुएेदा ने कहा कि मादुरो के नेतृत्‍व में वेनेजुएला की आर्थिक और सामरिक रक्षा नहीं हो सकती है। वह निवेश करने वाले देशों के हितों की रक्षा करने में असमर्थ है। 35 वर्षीय गुऐदा ने तर्क दिया कि वेनेजुएला, ओपेक के एक सदस्य के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। लेकिन जबर्दस्‍त वित्‍तीय दबाव के कारण वह इन राष्‍ट्रों के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहा है।इस बीच चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा है कि वह गुऐदा के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि वे वेनेजुएला की स्थिति के बारे में विभिन्न माध्यमों से सभी पक्षों के साथ करीबी संवाद बनाए हुए हैं। चीनी प्रवक्‍ता ने कहा कि वेनेजुएला के साथ चीन का सहयोग समानता, पारस्परिक लाभ और संयुक्त विकास के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्‍होंने कहा कि हम मानते हैं कि किसी भी हालात में चीन और वेनेजुएला के बीच सहयोग को नुकसान नहीं होगा। शुआंग ने कहा कि चीन लगातार वेनेजुएला के हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया में इस समय जबरदस्त गर्मी पड़ रही है। जनवरी के महीने में गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। मौसम विभाग की तरफ से शुक्रवार को जारी किए आंकड़े के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में भीषण गर्मी पड़ रही है। जिन इलाकों में हमेशा ठंड पड़ती थी वहां पर तापमान पहली बार 30 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। पिछले तीन वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में जनवरी का महीना सबसे अधिक गर्म रहा। इससे पहले केवल 2005 और 2013 में 2018 की अपेक्षा गर्मी अधिक पड़ी थी।ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में पिछले महीने गर्म हवाएं काफी तेज चलीं। इसकी वजह से हजारों पेड़ गिर गए। न्यू साउड वेल्थ के अधिकारियों ने कहा कि भयंकर गर्मी की वजह से यहां पर सूखा पड़ गया है, जिसकी वजह से नदियों का पानी सूख गया है। पानी नहीं होने से हजारों मछलियां मर गई। गर्मी की वजह से दो लोगों की भी मौत हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि सूखाग्रस्त इलाकों में बारिश की सख्त जरुरत है। जिसके बाद ही हालात सुधर सकते हैं।

 

वॉशिंगटन।राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और उत्‍तर कोरिया के सर्वोच्‍च नेता किम जोंग-उन की दूसरी शिखर वार्ता को लेकर अमेरिकी विशेष दूत ने गुरुवार को कहा, यदि प्योंगयांग अपने हथियार कार्यक्रम का पूरा खुलासा करे और परमाणु हथियारों को छोड़ने के लिए तैयार हो तो संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका उसे काफी रियायतें दे सकता है।कैलिफोर्निया के पालो अल्टो में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अमेरिका के विशेष दूत स्टीफन बेगुन ने अपने भाषण में यह…
वाशिंगटन अमेरिका में नागरिका हासिल करने के लिए चल रहे रैकेट का संघीय जांच एजेंसियों ने पर्दाफाश किया है। अमेरिकी जांच एजेंसी ने चीनी गर्भवती महिलाओं को अमेरिका में लेकर आने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में 41 साल का डोंगयुआन ली है, जो चीनी गर्भवती महिलाओं को अमेरिका में लेकर आता था और उन्हें यह जानकारी देता था कि कैसे यहां की नागरिकता…
वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ही लियू के नेतृत्व वाले चीनी प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के बाद व्हाइट हाउस ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार वार्ता में 'जबरदस्त प्रगति' की है, लेकिन अभी बहुत काम किए जाने की जरूरत है।व्हाइट हाउस ने दो दिन के इस वार्ता के समापन के बाद कहा कि इसे लेकर काफी प्रगति हुई है और बहुत काम किया जाना…
काराकस। निकोलस मादुरो ने अपने नेतृत्व के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति चुनाव की मांग को खारिज कर दिया है। विपक्ष के राष्‍ट्रपति चुनाव के आह्वान को ख‍ारिज करते हुए राष्‍ट्रपति मादुरो ने कहा कि वह किसी भी हाल में ब्‍लैकमेल नहीं हो सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके पास वेनेजुएला की सेना का समर्थन हासिल है। उन्‍होंने कुछ लोगों पर तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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