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नई दिल्ली। इन दिनों रुस में एक अलग तरह की चर्चा है। दरअसल यहां रह रहे एक दंपत्ति की इच्छा है कि उनका जो बच्चा हो हो उसको वंशानुगत के तौर पर बहरापन ना मिले। इस वजह से वो ये चाहते हैं कि जीवविज्ञानी उनके बच्चे को जीन एडिटिंग के जरिये पैदा करवाएं जिससे ये समस्या न होने पाएं। अपने बच्चे को जीन एडिटिंग से पैदा कराने के लिए इस दंपत्ति ने राष्ट्रपति व्लीदिमीर पुतिन की बेटी मारिया वोरोत्सोवा से मदद मांगी है। दंपत्ति का कहना है कि राष्ट्रपति की बेटी अपने पिता से इस पर रजामंदी लेंगी उसके बाद वो जीन एडिटिंग पर रजामंदी दिलवा देंगी क्योंकि वहां पर पुतिन ही इस काम के लिए सहमति दे सकते हैं। उनकी बिना परमीशन के जीन एडिटिंग को इजाजत नहीं मिल सकती है।
वैज्ञानिक ने कहा कि वह वंशानुगत बहरापन को ठीक कर सकते हैं;-मास्को में एक जीवविज्ञानी डेनिस रेब्रिकोव ने कहा कि वह भ्रूण पर क्रिस्प का उपयोग करना चाहते हैं, इस तरह का उपयोग किए जाने के बाद पैदा होने वाला बच्चा वंशानुगत बहरेपन का शिकार नहीं होता है। वह इसी माह अक्टूबर में स्वास्थ्य मंत्रालय को जीन एडिटिंग के लिए आवेदन प्रस्तुत करेंगे, रूसी वैज्ञानिकों ने इस संबंध में पुतिन की बेटी मारिया वोरोत्सोवा के साथ एक बैठक बुलाई।
Crispr नामक डीएनए का करेंगे उपयोग;-डेनिस रेब्रिकोव ने खुलासा किया कि वह क्रिस्प (Crispr) नामक डीएनए संपादन तकनीक का उपयोग करना चाहते हैं। इस डीएनए से इस दंपति की मदद हो पाएगी। बहरापन डीएनए के एक लापता हिस्से के कारण होता है जो किसी की सुनवाई को विकसित होने से रोकता है। श्री रेब्रिकोव को लगता है कि वह जीन एडिटिंग विज्ञान का उपयोग करके इस बीमारी को ठीक करने में सक्षम है। जीन एडिटिंग से पैदा होने वाले बच्चों में कई चीजों की खराबी भी आ सकती है। इस विषय में हंगामा होने के बाद अब रूस के शीर्ष वैज्ञानिकों ने रेब्रिकोव की योजनाओं पर चर्चा करने के लिए व्लादिमीर पुतिन की सबसे बड़ी बेटी के साथ दक्षिणी मास्को में एक गुप्त बैठक बुलाई। डेनिस रेब्रिकोव ने खुलासा किया कि वह एक बहरे दंपति की मदद करने के लिए क्रिस्प नामक डीएनए एडिटिंग तकनीक का उपयोग करना चाहते हैं, दरअसल वो इस तकनीक का इस्तेमाल इसलिए करना चाहते हैं क्योंकि वो चाहते हैं कि बहरे दंपति की बीमारी उनके बच्चे में ना जानें पाएं। यदि इस तकनीक से उनके बच्चे में ये बीमारी नहीं आती है तो वो उसका प्रयोग करना चाहते हैं।
राष्ट्रपति ही दे सकते हैं हरी झंडी;-दरअसल पुतिन एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए हरी झंडी दे सकते हैं। ये दंपत्ति चाहते है कि पुतिन की बेटी मारिया वोरोत्सोवा उनके इस काम में मदद करें, वो अपने पिता ब्लीदीमिर पुतिन से इसकी हरी झंडी दिलवाएं। उधर नेशनल एंडोक्रिनोलॉजी रिसर्च सेंटर में काम करने वालों का कहना है कि निजी क्षेत्र में जीन-एडिटिंग पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्हें लगता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तुलना में जीन-एडिटिंग का प्रभाव समाज पर और भी अधिक प्रभाव डाल सकता है। 2017 में पुतिन ने खुद को शायद ही इस विषय से अलग किया हो, यह कहते हुए कि लोग जल्द ही जन्म के पूर्व डीएनए का संपादन शुरू कर देंगे।
आनुवांशिक शोध के लिए दो बिलियन डॉलर का आवंटन:-पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने जीन एडिटिंग पर ब्लूम्सबर्ग चैनल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस तरह के आनुवांशिक शोध के लिए पुतिन ने पहले ही $ 2 बिलियन का आवंटन कर दिया है। अगर यह परियोजना आगे बढ़ती है तो चीनी वैज्ञानिक हे जियानकुई के नक्शेकदम पर चलेगा, क्योंकि उन्होंने इस तकनीकी से जुड़वां बच्चों को पैदा करने की घोषणा की थी। जो आनुवंशिक रूप से एचआईवी के लिए प्रतिरोधी थीं। चीनी सरकार द्वारा उनकी निंदा की गई और उनकी बात नहीं सुनी गई।
किस तरह से CRISPR डीएनए कर रहा है काम?;-CRISPR जीन एडिटिंग तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य अनुसंधान में एक बढ़ती हुई राशि के रूप में किया जा रहा है। बुनियादी स्तर पर, CRISPR एक डीएनए कटिंग और पेस्टिंग ऑपरेशन के रूप में काम करता है। तकनीकी रूप से CRISPR-Cas9 कहा जाता है, इस प्रक्रिया में जीवों को संपादित करने के लिए डीएनए और एंजाइमों के नए किस्में भेजना शामिल है। मनुष्यों में, जीन शरीर में कई प्रक्रियाओं और विशेषताओं के लिए ब्लूप्रिंट के रूप में कार्य करते हैं। वे आपकी आंखों और बालों के रंग से सब कुछ तय करते हैं कि आपको कैंसर है या नहीं। शुरू में बीमारियों का इलाज करने के लिए 'डिजाइनर शिशुओं' में वृद्धि हो सकती है क्योंकि डॉक्टर भ्रूण के डीएनए को बदलने के तरीके पेश करते हैं। स्रोत: ब्रॉड इंस्टीट्यूट
जीन एडिटिंग के कानूनी मापदंडों को बताने की तैयारी:-वैज्ञानिक समुदाय को इस बात का इंतजार है कि इस काम के लिए परमीशन मिलती है या नहीं। क्योंकि पुतिन ने डीएनए पर विवादास्पद प्रयोगों में शामिल होने के लिए अन्य वैज्ञानिकों के लिए बाढ़ के दरवाजे खोल दिए। श्री रेब्रिकोव खुद हाल के साक्षात्कारों में तेजी से आगे बढ़े हैं और अधिकारियों को रूस में जीन-एडिटिंग के आसपास कानूनी मापदंडों को परिभाषित करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि 'वर्तमान में एक लाख रूबल (15,500 डॉलर) की लागत से आनुवांशिक रूप से भ्रूण को बदलना - बहुत अधिक कारों से अधिक - लेकिन कीमतें अधिक उपयोग के साथ गिर जाएंगी।
नया बच्चा बिना जीन के पैदा होगा बहरा;-इस जोड़ी का प्रत्येक नया बच्चा बिना जीन उत्परिवर्तन संपादन के बहरा होगा। ' यद्यपि वह यह सुनिश्चित नहीं कर सकता है कि यह काम करेगा, वह जानता है कि डीएनए के किस बिट को लक्षित करना है - जीजेबी 2 जीन की स्थिति 35। न्यू साइंटिस्ट ने कहा कि पश्चिमी साइबेरिया में जीन त्रुटि काफी सामान्य है और अगर दोनों माता-पिता से विरासत में मिली है तो यह जन्म से बहरेपन को पूरा करता है। जोड़े तैयार हैं और उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है कि वे अपने बच्चों को पैदा होने से रोक सकें। सुनने में सक्षम नहीं होने के बावजूद, बच्चों का जीवन उनकी स्थिति से खतरे में नहीं आएगा और वे अपेक्षाकृत सामान्य जीवन जी सकेंगे।
विरासत में मिलता है एचआईवी;-चीनी वैज्ञानिक हे जियानकुई ने इस वर्ष की शुरुआत में पता लगाया कि उन्होंने अपने पिता से एचआईवी को विरासत में लेने की कोशिश करने और उन्हें बचाने के लिए एक प्रयोगशाला में भ्रूण को संपादित करने के लिए क्रिस्प का इस्तेमाल किया था और परिणामस्वरूप जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ था। चीन और दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने उनकी निंदा की और कहा कि यह उन भ्रूणों पर प्रयोग करने के लिए गैरजिम्मेदार था, जो गर्भावस्था में इस्तेमाल किए जाएंगे। अगर मां को यह बीमारी नहीं है तो पिता से एचआईवी का संचरण दुर्लभ है और इसे रोकने के अन्य खतरनाक तरीके हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और चीन में विज्ञान संगठनों द्वारा नवंबर में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय बयान में कहा गया है कि भ्रूण पर जीन एडिटिंग का उपयोग करने के लिए वर्तमान में जोखिम बहुत हैं।श्री रेब्रिकोव ने स्वीकार किया है कि वह भी बच्चों को उनकी माताओं से वायरस विरासत में लेने से बचाने के लिए इसी तरह की कोशिश करना चाहता है। लेकिन नवंबर में जारी बयान में कहा गया कि क्रिस्प का उपयोग केवल जीवित लोगों पर ही किया जाना चाहिए, अगर 'उचित विकल्प का अभाव' है। वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित एक बयान में, नेचर, अमेरिका, कनाडा और जर्मनी के शोधकर्ताओं ने कहा कि क्रिस्प 'क्लिनिक में किसी भी उपयोग को सही ठहराने के लिए अभी तक सुरक्षित या प्रभावी नहीं है।

 

न्यूयॉर्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात संयुक्त राष्ट्रमहासभा (UNGA) के 74वें सत्र के इतर होगी। दोनों नेताओं की यह मुलाकात काफी अहम है। दरअसल यह मुलाकात अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के दौरान हो रही है।पीएम मोदी का आज भी बेहद व्यस्त कार्यक्रम है। आज वह कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात करेंगे जिसमें ईरान और ग्रीस के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं। पीएम मोदी इसके अलावा साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनास्तासीदेस और ग्रीस के पीएम क्यारीकोस मित्सोटाकिस से भी मिलेंगे। पीएम मोदी ने इससे पहले बुधवार को अर्मेनियाई समकक्ष निकोल पाशिनयान और न्यूजीलैंड की पीएम जेसिंदा आर्डर्न से मुलाकात की। उन्होंने एस्तोनिया की राष्ट्रपति क्रिस्टी कालिजुलैड से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्वीपक्षीय संबंधों पर मुलाकात की।
ब्लूमबर्ग ग्लोबल बिजनेस फोरम को संबोधित किया:-इससे पहले उन्होंने बुधवार को ही कैरेबियन कम्युनिटी एंड कॉमन मार्केट (CARICOM) के सदस्य राज्यों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री ने ब्लूमबर्ग ग्लोबल बिजनेस फोरम को संबोधित किया और वैश्विक कंपनियों के 42 सीईओ से मुलाकात की। मोदी शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं।
तनाव के बीच मुलाकात:-बता दें कि पीएम मोदी और हसन रूहानी के बीच यह मुलाकात उस समय होने वाली है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हुए हैं। पिछले दिनों सऊदी के अरामको कंपनी पर ड्रोन हमले के दोनों देशों के संबंधों में और तल्खी आ गई थी। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने यह हमला कराया है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति रूहानी के बीच होनी वाली मुलाकात में आतंकवाद समेत कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
मोदी की ट्रंप से मुलाकात:-इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। दोनों के बीच आधे घंटे से ज्यादा तक यह मुलाकात चली। इस मुलाकात में आतंकवाद, व्यापार समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

न्‍यूयॉर्क। 74वें संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के मौके पर न्‍यूयॉर्क में प्रधानमंत्री नरेंद्रे मोदी ने अार्मेनिया और न्‍यूजीलैंड के अपने समकक्ष से मुलाकात की। इस क्रम प्रधानमंत्री मोदी आर्मेनिया के अपने समकक्ष निकोल पशिनयान से मुलाकात किया। वार्ता के दौरान दोनों देशों के संबंधों को और ज्‍यादा मजबूत करने और विभिन्‍न क्षेत्रों के अलावा व्‍यापार एवं सांस्‍कृतिक क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने आतंकवाद समेत संयुक्‍त राष्‍ट्र की स्‍थाई सदस्‍यता के मुद्दे पर भी चर्चा की। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री पशिनयान ने मोदी को आर्मेनिया आने का न्‍यौता भी दिया। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्राधनमंत्री मोदी ने सुरक्षा परिषद की स्‍थाई सदस्‍यता के लिए भारत की दोवदारी का लगातार समर्थन के लिए पशिनयान को थैंक्‍स कहा। दोनों देशों के बीच व्‍यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए चर्चा की। अर्मेनिया के आइटी, कृषि प्रसंस्‍करण, पर्यटन व अर्मेनिया के अन्‍य क्षेत्रों में अवसर की खोज के लिए भारतीय कंपनियों की रुचि का भी जिक्र किया।
भारत और इएयू वार्ता करने काे राजी:-प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच शीघ्र व्‍यापार व्‍यवस्‍था के समापन के लिए आर्मेनिया का समर्थन मांगा। भारत और इएयू जल्‍द ही इस संबंध में वार्ता करने पर राजी हैं। मोदी ने आर्मेनिया के हित और जरूरतों के अनुसार भारत के विकास साझेदारी को मजबूत करने की पेशकश की। बता दें कि भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों से बड़ी संख्‍या में आर्मेनियाईयों को लाभ हासिल हुआ है।
भारतीय निवेश को बढ़ावा देने पर जोर:-निकाेल पशिनयान ने भारतीय संस्‍कृति, फ‍िल्‍मों, संगीत और योग की लोकप्रियता का उल्‍लेख करते हुए दोनों देशों के बीच अधिक से अधिक सांस्‍कृतिक और मानवीय सहयोग का आह्वान किया। निकोल ने प्रधानमंत्री को अपनी सरकार की नई पहल के बारे में भी अवगत कराया। उन्‍होंने आर्मेनिया में भारतीय निवेश को आमंत्रित किया।

न्यूयॉर्क। पाकिस्तान की आतंक पर एक बार फिर चेहरा बेनकाब हो गया है। मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और अंतरराष्ट्रीय आतंकी हाफिज सईद को पाकिस्तान के गुहार पर संयुक्त राष्ट्र से राहत मिल गई है। संयुक्त राष्ट्र की समिति ने रोजमर्रा के खर्चों के लिए हाफिज सईद को अपने बैंक खाते का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। हाफिज को राहत दिलाने के लिए पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को एक चिट्ठी लिखी थी। पाकिस्तान ने इसमें यूएनएससी से हाफिज को उसके बैंक खाते का इस्तेमाल करने की इजाजत देने मांग की थी।निर्धारित समय सीमा के भीतर इस पर कोई आपत्ति नहीं आने के बाद परिषद से उसे अनुमति मिल गई।हाफिज के अलावा हाजी मुहम्मद अशरफ और जफर इकबाल को भी इसकी अनुमति मिली है। परिषद ने इसके खिलाफ अपील करने के लिए 15 अगस्त 2019 तक का समय दिया था। इसके खिलाफ अपील न करने की वजह से उन्हें इसकी अनुमति मिल गई है। पाकिस्तान ने अपने इस पत्र में लिखा 'हाफिज के परिवार में चार लोग हैं। पूरा परिवार उसपर आश्रित है। हाफिज पर अपने परिवार के सदस्यों की खर्च उठाने की जिम्मेदारी है।'
हाफिज के खिलाफ दिखावे की कार्रवाई;-बता दें कि हाफिज सईद को 17 जुलाई को आतंकी फंडिंग के मामले गिरफ्तार किया गया था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किए गए वैश्विक आतंकी सईद को फिलहाल कड़ी सुरक्षा के बीच लाहौर के कोट लखपत जेल में रखा गया है। हालांकि, उसके पाकिस्तान का यह कार्रवाई दिखावा मात्र ही है। बुधवार को लाहौर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई कर रही दो सदस्यीय पीठ बदल दी है। भारत ने सईद की गिरफ्तारी को नाटक बताया था।
UAPA के तहत हाफिज आतंकी घोषित;-भारत ने इसी महीने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून (UAPA) के तहत हाफिज समेत मसूद अजहर, जकी उर रहमान लखवी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को व्यक्तिगत तौर पर आतंकी घोषित कर दिया था। भारत के इस फैसले का अमेरिका ने भी समर्थन किया है।
कौन है हाफिज सईद;-हाफिज सईद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है। पाकिस्तान में जमात उद दावा नामक संगठन चलाता है। 2008 में मुंबई हमले का सूत्रधार रहा जिसमें 164 लोग मारे गए। इसी हमले के बाद अमेरिका ने इसके सिर पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है। 2006 में मुंबई ट्रेन धमाकों में भी इसका हाथ रहा। 2001 में भारतीय संसद तक को इसने निशाना बनाया। एनआइए की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल है। भारत सहित अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, रूस और ऑस्ट्रेलिया ने इसके दोनों संगठनों को प्रतिबंधित कर रखा है।

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैन्सी पलोसी ने राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। हम आपको बता दें कि डोनल्ड ट्रंप पर ये महाभियोग यूक्रेन के राष्ट्रपति ब्लोदीमीर जेलेंस्की के बीच हुई फोन पर बातचीत के बाद चलाना शुरु किया गया है। व्हाइट हाउस की ओर से जेलेंस्की के बीच फोन पर हुई बातचीत की डिटेल्स भी जारी कर दी गई है। इसी के बाद ट्रंप पर महाभियोग की प्रक्रिया शुरु की गई है।
ट्रंप पर लगाया जा भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच शुरु करने के दबाव बनाने का आरोप;-ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति ब्लोदीमीर जेलेंस्की पर दबाव बनाया कि वह ट्रंप के डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाईडन और उनके बेटे के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच शुरू करें, हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है। इस बातचीत में ट्रंप ने जेलेंस्की को 25 जुलाई को डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार जो बाइडेन और एक यूक्रेनी गैस फर्म में काम करने वाले उनके बेटे के खिलाफ जांच शुरु करने को कहा। ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति के बीच फोन पर ये बातचीत व्हिसल ब्लोअर की शिकायत के बाद सार्वजनिक की गई है। हालांकि महाभियोग की प्रक्रिया निचले सदन में पूरी हो भी जाएगी तो इसका रिपब्लिकन के बहुमत वाले सीनेट से पास होना मुश्किल है। डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी राष्ट्रपति के पद से हटाने के लिए 20 रिपब्लिकन सांसदों की जरूरत होगी, जो अपने राष्ट्रपति का ही विद्रोह करें।
अमरीका की सबसे ताकतवर महिला नैन्सी पलोसी:-अमरीका के कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद नैन्सी पलोसी अमरीका की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर चुनी गई हैं। इस पद पर पहुंचने के साथ ही वो अमरीका की सबसे ताकतवर महिला बन गई हैं, वहीं राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बाद अमरीका की तीसरी सबसे ताकतवर शख्सियत भी बन गई हैं।अमरीका में हाल में हुए मध्यावधि चुनाव के बाद निचले सदन यानी कि हाउस ऑफ रिप्रज़ेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत में आ गई है। पेलोसी की जीत ऐसे वक्त में हुई है जब राष्ट्रपति ट्रंप के मैक्सिको की सीमा पर दीवार बनाने को लेकर फंड की मांग पर अमरीका में लगभग शटडाउन की स्थिति है। 78 वर्षीय पेलोसी ट्रंप के दीवार बनाने की योजना के खिलाफ हैं। ये साल अमरीका में महिलओं को मिले वोट के अधिकार का 100वां साल है, सदन में 100 से ज्यादा महिला सांसद हैं जिनमें देश की सेवा करने की काबिलियत है ये संख्या अमरीकी लोकतंत्र के इतिहास में सबसे ज़्यादा है।
जो बाईडन दे सकते हैं ट्रंप को टक्कर:-गौरतलब है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाईडन 2020 में अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को टक्कर दे सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने माना है कि उन्होंने जेलेंस्की से बाईडन के बारे में चर्चा की थी, लेकिन उन पर जो आरोप लग रहे हैं वह गलत है। ट्रंप ने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन के खिलाफ अभियान चलाने और बाइडेन की छवि पर धब्बा लगाने के लिए यूक्रेन की अमरीकी सैन्य सहायता बंद करन की बात कही है।
जारी किए गए नोट्स:-बुधवार को जो विवरण जारी किया गया है वो इस बातचीत के अमरीकी अधिकारी के लिए गए नोट्स हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की से इस बात का जिक्र किया है कि अमरीकी उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने किसी तरह से यूक्रेन के शीर्ष सरकारी वकील विक्टर शौकीन को हटाने के लिए दबाव डाला था। शौकीन के ऑफिस ने उस नेचुरल गैस कंपनी के खिलाफ जांच शुरू किया था जिसमें जो बाइडेन के बेटे हंटर बाइडेन बोर्ड मेंबर हैं हालांकि पश्चिमी अधिकारियों का मानना है कि शौकीन को इसलिए हटाया गया क्योंकि वे भ्रष्टाचार के मामलों में नरमी दिखाते थे।
प्रतिनिधि सभा में बहुमत के बाद महाभियोग की प्रक्रिया होती है शुरु:-अमेरिका के संघीय सरकार की द्विसदनीय विधायिका को अमेरिकी कांग्रेस कहते हैं। सीनेट (Senate)और प्रतिनिधि सभा (House of Representatives)इस कांग्रेस के दो सदन हैं। अमेरिका के संविधान के अनुसार प्रतिनिधि सभा में बहुमत के बाद राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, राष्ट्रपति के अलावा असैन्य अधिकारी या फिर प्रांतीय सरकार के खिलाफ भी महाभियोग लाया जा सकता है। इनमें से किसी पर भी महाभियोग तब लाया जाता है जब उन पर देशद्रोह, घूस या फिर किसी बड़े अपराध में शामिल होने का शक हो।
सदन की न्यायिक समिति करती आरोपों की जांच:-अगर ऐसा होता है तो सदन की न्यायिक समिति इन आरोपों की जांच करती है फिर रजामंदी होने पर आरोप तय किए जाते हैं। इन आरोपों पर सदन में वोटिंग होती है अगर वोटिंग महाभियोग के पक्ष में होती है तो फिर आर्टिक्ल को सीनेट को सौंप दिया जाता है फिर सीनेट कोर्ट की तरह काम करती है और यूएस के मुख्य न्यायाधीश इसकी अध्यक्षता करते हैं। सुनवाई के लिए सीनेटर्स के बीच से एक मैनेजर तय किए जाते हैं। इस ट्रायल के दौरान आरोपी अपना पक्ष रखता है, दोनों पक्ष की सुनवाई पूरी होने के बाद सीनेट महाभियोग के हर आर्टिकल पर वोट करती है, इस वोटिंग में अगर दो तिहाई सदस्य आरोपी को दोषी मानते हैं तो दोष सिद्ध हो जाता है फिर सीनेट उन्हें सजा दे सकती है।
क्या है महाभियोग?;-अमरीकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति को देशद्रोह, रिश्वत और दूसरे कुछ संगीन अपराधों में महाभियोग का सामना करना पड़ता है। अमरीका में महाभियोग की प्रक्रिया हाउस ऑफ रिप्रेजेटेटिव्स से शुरू होती है और इसे पास करने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत पड़ती है। महाभियोग चलाने के लिए सीनेट में एक सुनवाई होती है लेकिन यहां महाभियोग को मंजूरी देने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ती है। अमरीकी इतिहास में अभी तक किसी भी राष्ट्रपति को महाभियोग के जरिए हटाया नहीं जा सका है।
महाभियोग चलाने के आरोप के बाद अब क्या;-अमरीकी की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैन्सी पलोसी ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में महाभियोग पास हो सकता है लेकिन सीनेट में इसे पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है और यहां रिपब्लिकन का भारी बहुमत है। ट्रंप के खिलाफ पहले भी महाभियोग चलाने की बात हुई है, 2016 में हुए चुनाव को प्रभावित करने के लिए रूस के साथ ट्रंप के कथित मिलीभगत के आरोपों के बाद उन पर महाभियोग चलाने की बात हुई थी।
किसे महाभियोग का सामना करना पड़ा?;-अमरीका के इतिहास में कई बार कुछ राष्ट्रपतियों पर महाभियोग चलाने की बात हुई है लेकिन केवल दो राष्ट्रपतियों को ही इसका सामना करना पड़ा। अमरीका के इतिहास में महाभियोग का हालिया मामला अमरीका के 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का रहा था। अब उसके बाद डोनल्ड ट्रंप पर इसे चलाने के लिए आवाज उठ रही है। बिल क्लिंटन को एक व्यापक जूरी के समक्ष झूठी गवाही देने और न्याय में बाधा डालने के मामले में महाभियोग का सामना करना पड़ा था। मोनिका लेविंस्की से प्रेम संबंधों के मामले में उन्होंने झूठ बोला था, इसके साथ ही उन पर यह भी आरोप था कि बिल क्लिंटन ने मोनिका लेविंस्की को भी इस मामले में झूठ बोलने के लिए कहा था।
17 वें राष्ट्रपति पर चला था महाभियोग;-बिल क्लिंटन के अलावा एन्ड्रयू जॉनसन एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ा था, जॉन्सन अमरीका के 17वें राष्ट्रपति थे, वह 1865 से 1869 तक अमरीका के राष्ट्रपति रहे थे, जॉनसन के खिलाफ 1868 में हाउस में महाभियोग लाया गया था तब के युद्ध मंत्री एडविन स्टैंचन के हटने के 11 दिन बाद ही उनके खिलाफ महाभियोग लाया गया था, एडविन राष्ट्रपति की नीतियों से सहमत नहीं थे। जॉनसन का मामला बिल क्लिंटन से बिल्कुल उलट था, जॉनसन का महाभियोग महज एक वोट से बच गया था।

नई दिल्ली। सीमापार से हथियार सप्लाई करने और सऊदी अरब की अरामको कंपनी पर ड्रोन से हुए हमले के बाद अब ओहियो के एक जेल में ड्रोन की मदद से मोबाइल और नशीला पदार्थ सप्लाई करने का वीडियो सामने आया है। इसकी पूरी सीसीटीवी फुटेज जारी की गई है। इस वीडियो में ये स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कुछ कैदी आपस में खेल रहे होते हैं, इसी दौरान एक ड्रोन उनके ऊपर आता है। ड्रोन से जब कुछ गिरने लगता है तो उसको पकड़ने के लिए एक कैदी उस ओर भागता है मगर वो उसे पकड़ नहीं पाता है। वो चीज नीचे गिर जाती है फिर वो कैदी उस चीज को उठाने की बजाय उस पर अपने हाथ में लिया गया कपड़ा डाल देता है उसके बाद उसे उठाकर ले जाता है।ये कैदी उस चीज को ले जाकर कहीं रख आता है उसके कुछ देर बाद वहां वापस पहुंच जाता है। वापस आने के दौरान वो ऊपर ड्रोन की तरफ देखता है। इसके बाद वो बाकी कैदियों के साथ खेलने लग जाता है। इस वीडियो में ये भी दिखाई देता है कि जब वो कैदी गिराए गए सामान को कहीं पर रखकर वापस आता है उसके बाद वो फिर से ऊपर की ओर देखता है जैसे वो ड्रोन को वापस देखना चाह रहा हो। वापस आने के बाद वो कुर्सी लेकर एक दूसरे किनारे पर चला जाता है। ये पूरा घटनाक्रम कैदियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे में कैद हो जाता है। सुरक्षाकर्मी जब इस वीडियो को देखते है उसके बाद जेल की तलाशी ली जाती है और सामान को बरामद किया जाता है।ये पूरा मामला ओहियो के यूक्लिड के क्लीवलैंड उपनगर के कुयाहोगा काउंटी जेल में लगे सीसीटीवी फुटेज में कैद हुआ है। स्थानीय फॉक्स न्यूज के सहयोगी ने स्थानीय अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि तस्करी के विमान द्वारा गिराई गई वस्तुओं में एक सेल फोन और मारिजुआना शामिल है। यदि अब लोग इन चीजों को ड्रोन के जरिए जेल में सप्लाई कर सकते हैं तो ये चीजें कहीं भी हो सकती हैं।

बीजिंग। आधारभूत परियोजनाओं में अपना लोहा मनवा चुके चीन ने नया कीर्तिमान गढ़ा है। बुधवार को राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने एक नए एयरपोर्ट की शुरुआत की। इसका आकार 100 फुटबाल मैदानों जितना है। विशालकाय स्टारफिश मछली जैसा दिखने वाला यह एयरपोर्ट (बीजिंग दाक्सिंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) थ्येनआनमन चौक से 46 किमी दक्षिण में दाक्सिंग जिले और लांगफांग की सीमा पर मौजूद है।चीन में कम्युनिस्ट शासन के 70 साल पूरे होने…
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) के खिलाफ 8 अक्टूबर से देशद्रोह के मामले (Treason case) में सुनवाई होगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की एक विशेष अदालत (Special Court) ने दिसंबर 2013 से लंबित मामले की रोजाना सुनवाई के आदेश दिए हैं।पाकिस्तान की पिछली मुस्लिम लीग-नवाज सरकार ने पूर्व सेना प्रमुख के खिलाफ नवंबर 2007 में संविधान को निलंबित करने और इमरजेंसी लगाने के खिलाफ देशद्रोह…
नई दिल्‍ली। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को Father of India PM Modi कहने के मायने अपने आप में बेहद खास हैं। उनका यह बयान न सिर्फ पीएम मोदी की उस छवि को सामने रखने में समर्थ है जिसमें वह सभी को साथ लेकर चलते दिखाई देते हैं। इसके अलावा वह अपने मुद्दों पर दुनिया के देशों को भी साधने में माहिर हैं। ऐसा उन्‍होंने एक नहीं…
न्‍यूयॉर्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात में मंगलवार को बिल्‍कुल साफ कर दिया कि पाकिस्‍तान से तो बातचीत तभी होगी जब इमरान खान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और निर्णायक कदम उठाएंगे। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि पड़ोसी देश से वार्ता बहाली से पहले भारत चाहता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कुछ ठोस और निर्णायक कदम उठाए। हालांकि, अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने भी उम्मीद…
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