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वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि उसने इराक में अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया तो वह 'निर्णायक कार्रवाई' के लिए बाध्‍य होगा। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो (Mike Pompeo) ने शुक्रवार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान (Iran) ने इराक (Iraq) में अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया तो अमेरिका उस पर निर्णायक कार्रवाई करेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री का यह बयान सैन्‍य ठिकानों पर हुए सिलसिलेवार रॉकेट हमलों के बाद आया है।पोंपियो (Mike Pompeo) ने कहा कि हमें ...इस मौके का इस्‍तेमाल ईरान के नेताओं को यह याद दिलाने में करना चाहिए कि उनके या उनके समर्थकों द्वारा किए गए किसी भी हमले का निर्णायक जवाब दिया जाएगा जिनसे हमारे सहयोगियों या हमारे हितों को चोट पहुंचती है। ईरान को अपने पड़ोसियों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। ईरान को इराक समेत पूरे क्षेत्र में तीसरे पक्ष की मदद नहीं करनी चाहिए।गौरतलब है कि अमेरिकी विदेश मंत्री का यह बयान उन इराकी सैन्‍य ठिकानों पर हुए हमलों के बाद आया है जिनका अमेरिकी सैन्‍य बल इस्‍तेमाल कर रहे हैं। इन हमलों के पीछे ईरानी समर्थित शिया अर्धसैनिक समूहों (Shiite paramilitary groups) का हाथ बताया जा रहा है। इस हफ्ते बगदाद अंतरराष्‍ट्रीय हवाइअड्डे (Baghdad International Airport) के नजदीक दो रॉकेटों से हमले किए गए हैं।बता दें कि इराक में सद्दाम हुसैन (Saddam Hussein) के खात्‍मे के बाद से ईरान ने कथित तौर पर अपने पड़ोसी देश पर दबदबा कायम करने की कथित कोशिशें की हैं। दूसरी ओर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) प्रशासन भी इस दबदबे को खत्‍म करने की कवायदों में जुटा हुआ है। अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर तमाम प्रतिबंध भी लगा रखे हैं। मालूम हो कि बीते द‍िनों ईरान के सहयोगी इराकी प्रधानमंत्री अदेल अब्दुल महदी (Adel Abdel Mahdi) ने देशभर में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बीच अपना इस्‍तीफा दे दिया था। सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ बगदाद में अक्टूबर की शुरुआत में ये विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। इन सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक 460 लोगों की मौत हो चुकी है।

 

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पोलियो मामलों के उभार पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह मुल्क के लिए शर्म की बात है। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे पोलियो रोधी अभियान में ना सिर्फ अपने बच्चों की भलाई के लिए बल्कि मुल्क की इज्जत के लिए भी शामिल हों।प्रधानमंत्री इमरान ने शुक्रवार को यहां राष्ट्रव्यापी पोलियो उन्मूलन अभियान की शुरुआत करते हुए कहा, 'पाकिस्तान दुनिया के उन दो देशों में एक है, जहां पोलियो अब भी मौजूद है। यह शर्म की बात है। मैं माताओं से आग्रह करता हूं कि वे हेल्थ वर्करों के पास जाएं और अपने बच्चों को पोलियो रोधी दवा की खुराक दिलाएं। यह आपके बच्चे और मुल्क के लिए अहम है।' विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और नाइजर में अभी तक पोलियो पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।
पाकिस्तान में इस साल पोलिया के 98 मामले:-पाकिस्तान में इस साल पोलियो के 98 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 72 मामले सिर्फ खैबर पख्तूनख्वा से हैं। 2018 में पोलियो के 12 मामलों का पता चला था। जबकि 2017 में महज आठ मामले पाए गए थे।
पाकिस्तान में सालों से बढ़ रहे पोलियो के मामले:-पाकिस्तान में बच्चों को पोलियो ड्रॉप ना पिलाए जाने के मामले में कहीं मुस्लिम परिवारों का धर्म आड़े आ जाता है तो कहीं पर अफवाह के चलते वह अपने बच्चों को पोलियो ड्रॉप नहीं पिलाए जाते हैं, जिसका असर धीरे-धीरे दिखता रहता है। पाकिस्तान में पोलियो के बढ़ते मामलो के पीछे ये बड़ी वजह है। साल दर साल पाकिस्तान में पोलियो को जड़ से मिटाना एक चुनौती बनता जा रहा है।साल 2018 के मुकाबले इस साल पाकिस्तान में पोलियो के ज्यादा मामले सामने आए हैं। 2018 में पाकिस्तान में पोलियो के सिर्फ 12 मामले सामने आए थे। लेकिन इस साल जबकि ये साल खत्म होने में कुछ दिन ही बाकी है, पाकिस्तान में पोलियो के मामले ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं।

वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Barack Obama) की पत्नी मिशेल ओबामा (Michelle Obama) स्वीडन की जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) के बचाव में आगे आई हैं। उन्होंने ग्रेटा को प्रोत्साहित करते हुए ट्वीट किया। दरअसल, टाइम (Time) द्वारा ग्रेटा थनबर्ग को पर्सन ऑफ द इयर (Person of the year) चुना जाना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हजम नही हुआ और उन्‍हेांने ने ट्वीट कर ग्रेटा पर ताना कसा था। इसके लिए दुनिया में हर जगह ट्रंप की आलोचना हुई। वहीं मिशेल ओबामा ने बगैर ट्रंप का नाम लिए ही ग्रेटा को प्रोत्‍साहित किया। बता दें कि एसपर्गर सिंड्रोम (Asperger Syndrome) से ग्रस्त 16 साल की लड़की पूरी दुनिया में पर्यावरण के लिए लड़ाई लड़ रही है।मिशेल ने अपने ट्वीट में लिखा कि किसी को अपनी रोशनी मंद करने मत दो। पूरी दुनिया व वियतनाम में जैसी लड़कियों से मैं मिली हूं, उन सबको देने के लिए तुम्हारे पास बहुत कुछ है। जो तुम पर या तुम्हारी प्रतिभा पर शक कर रहे हैं उन्हें नजरअंदाज करो और लाखों लोग जो तुम्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं उन्हें देखो।टाइम मैगजीन द्वारा ग्रेटा को पर्सन ऑफ द इयर चुने जाने से नाराज ट्रंप ने अपने ट्वीट में लिखा- ‘ग्रेटा को अपने एंगर मैनेजमेंट प्रॉब्लम (Anger Management Problem) पर काम करना चाहिए और इसके बाद अपने दोस्तों के साथ बेहतरीन पुरानी फिल्में देखनी चाहिए। चिल ग्रेटा चिल (Chill Greta Chill) !’ इसके बाद ग्रेटा ने ट्रंप के इस कथन को ट्वीटर पर अपना परिचय बना दिया।ट्रंप ने ग्रेटा पर पहली बार नहीं बल्कि इससे पहले भी व्‍यंग्‍यात्‍मक कमेंट किया है। सितंबर में जब ग्रेटा संयुक्त राष्ट्र में इमोशनल हो गई थीं तब ट्रंप ने कहा था, काफी खुश लड़की अपने उज्‍जवल भविष्‍य की कामना कर रही है।
ब्राजील के राष्‍ट्रपति ने बताया था बिगड़ी बच्‍ची:-ऐसा ही वाकया ब्राजील के राष्‍ट्रपति जायर बोलसोनारो की ओर से भी किया गया था। उन्‍होंने ग्रेटा को पुर्तगाली भाषा में 'पिर्रलहा (pirralha) बताया था। इसका मतलब होता है बिगड़ी बच्‍ची। कुछ दिनों तक ट्वीटर पर ग्रेटा का परिचय यही था- 'pirralha।'ऐसा नहीं कि ग्रेटा के लिए सबने आपत्तिजनक शब्‍द ही बोले रूस के राष्‍ट्रपति ब्‍लादीमिर पुतिन ने उन्‍हें दयालु और कम नॉलेज वाली टीनएजर बताया था। इसे भी ग्रेटा ने ट्वीटर पर अपना परिचय बनाकर रखा।
जानें ग्रेटा की बीमारी एसपर्गर सिंड्रोम है क्‍या:-वर्ष 1944 में आस्‍ट्रेलिया के एक डॉक्‍टर हंस एस्‍पर्गर (Hans Asperger) ने इस सिंड्रोम की पहचान की थी । इसके बाद ही इस सिंड्रोम का नाम एस्‍पर्गर हो गया। एस्पर्गर सिंड्रोम एक तरह का ऑटिस्टिक बीमारी है। इसमें सामाजिकता प्रभावित होती है यानि लोगों से संपर्क रखने और बातचीत की क्षमता कम होती है। इस सिंड्रोम से ग्रस्‍त लोगों का व्‍यवहार सामान्‍य नहीं होता बल्कि उसमें दोहराव होता है। लेकिन लोगों में कुछ विशेषताएं भी होती है जैसे विशेष ध्यान और दृढ़ता पैटर्न को पहचानने की क्षमता।

 

 

 

मैड्रिड। महज आठ साल की उम्र में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली भारतीय लड़की लिसिप्रिया कंगुजम ने अपनी चिंताओं से दुनिया को झकझोरा है। मणिपुर की इस नन्ही पर्यावरण कार्यकर्ता ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में सीओपी25 जलवायु शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेताओं से अपनी धरती और उन जैसे मासूमों के भविष्य को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने की गुहार लगाई।लिसिप्रिया ने मंगलवार को अपने भाषण में कहा, 'मैं यहां वैश्विक नेताओं से कहने आई हूं कि यह कदम उठाने का वक्त है क्योंकि यह वास्तविक क्लाइमेट इमरजेंसी है।' इतनी छोटी उम्र में इतने अहम मसले पर बात रखने के कारण लिसिप्रिया स्पेन के अखबारों की सुर्खियां बनी हैं। स्पेनिश अखबारों ने उन्हें भारतीय 'ग्रेटा' बताते हुए उनकी जमकर तारीफ की है। स्वीडन की 16 साल की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने गत सितंबर में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक नेताओं को झकझोरा था। लिसिप्रिया के पिता केके सिंह ने कहा, 'मेरी बेटी की बातों को सुनकर कोई यह अनुमान नहीं कर पाया कि वह महज आठ साल की है।'
21 देशों का कर चुकी हैं दौरा:-लिसिप्रिया अब तक 21 देशों का दौरा कर चुकी हैं और जलवायु परिवर्तन मसले पर विविध सम्मेलनों में अपनी बात रख चुकी हैं। वह दुनिया में सबसे कम उम्र की पर्यावरण कार्यकर्ता बताई जा रही हैं।
इस सम्मेलन से बदली जिंदगी;-महज छह साल की उम्र में लिसिप्रिया को 2018 में मंगोलिया में आपदा मसले पर हुए मंत्री स्तरीय शिखर सम्मेलन में बोलने का अवसर मिला था। उन्होंने कहा, 'इस सम्मेलन से मेरी जिंदगी बदल गई। मैं आपदाओं के चलते जब बच्चों को अपने माता-पिता से बिछड़ते देखती हूं तो रो पड़ती हूं।'
पिता की मदद से बनाया संगठन;-मंगोलिया से लौटने के बाद लिसिप्रिया ने पिता की मदद से 'द चाइल्ड मूवमेंट' नामक संगठन बनाया। वह इस संगठन के जरिये वैश्विक नेताओं से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कदम उठाने की अपील करती हैं।
पीएम मोदी से भी लगाई थी गुहार;-लिसिप्रिया गत जून में संसद भवन के पास तख्ती लेकर पहुंची थीं। इसके जरिये उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया था कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कानून बनाएं।
छोड़ना पड़ा स्कूल;-लिसिप्रिया का जन्म इंफाल में हुआ, लेकिन वह आमतौर पर पूरे समय शहर से बाहर रहती हैं। वह ज्यादातर दिल्ली और भुवनेश्वर में रहती हैं। जलवायु परिवर्तन मसले पर अपने जुनून के चलते वह स्कूल नहीं जा पाती थीं। इस कारण उन्होंने गत फरवरी में स्कूल छोड़ दिया।
स्पेन की सरकार ने उठाया खर्च;-लिसिप्रिया के पिता के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र ने शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बेटी को आमंत्रित किया था। लेकिन तब हमें लगा था कि स्पेन जाने के खर्च का कैसे प्रबंध होगा? इसके लिए ईमेल के जरिये कई मंत्रियों से मदद की गुहार लगाई गई। लेकिन कोई जवाब नहीं आया। बाद में भुवनेश्वर के एक व्यक्ति ने मैड्रिड के लिए टिकट बुक कर दिया। लेकिन गत 30 नवंबर को मैड्रिड रवाना होने से एक दिन पहले एक ईमेल मिला, जिसमें लिखा था कि उनकी 13 दिन की यात्रा का खर्च स्पेन सरकार वहन करेगी।

वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान की महान विमानन कंपनी और जहाजरानी उद्योग पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए बुधवार को यहां अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीव मुचिन ने कहा, आतंकी संगठनों को हथियारों की आपूर्ति के लिए ईरान अपने विमानन और जहाजरानी उद्योग का उपयोग करता है। ऐसा कर वह सीरिया और यमन में विनाशकारी मानवीय संकट में सीधे योगदान दे रहा है। विमानन और जहाजरानी उद्योग को सतर्क रहना चाहिए और आतंकी गतिविधियों की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
इराक में हालात बिगाड़ने की थी साज‍िश:-अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने बताया कि महान एयर के तीन कर्मचारी इस काम में लगे हुए थे। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों की घोषणा ईरान और अमेरिका के बीच कैदियों की अदला-बदली के कुछ ही दिनों बाद तब की गई जब ईरान समर्थित तीन आतंकी इराकी नेताओं और बेकसूर लोगों की हत्या कर इराक में हालात बिगाड़ने की योजना बना रहे थे।
ईरान से लंबे अर्से से जारी है अमेरिका की खुन्‍नस:-गौरतलब है कि 2006 में ईरान ने अपने यहा पांच परमाणु रिएक्टर लगाए थे।उनमें से एक रूस की मदद से लगाया था। इसके बाद इजरायल और अमेरिका समेत कई और देशों की नजरें टेढ़ी हो गई थीं। हालांकि, ईरान बार-बार कहता रहा कि उनके परमाणु रिएक्टर का मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं बल्कि ऊर्जा उत्पन्न करना है। लेकिन, अमेरिका और इजरायल ये मानने को तैयार नहीं हुए। इन्हें शक था कि बुशेर परमाणु प्लांट में ईरान चोरी-छुपे परमाणु बम परमाणु बना रहा है।इसके बाद परमाणु रिएक्टर के इस्तेमाल को लेकर फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने ईरान के साथ वार्ता की। इसमें अमेरिका, चीन और रूस भी शामिल हुए। फिर नौ साल बाद 2015 में इन देशों ने ईरान के साथ एक समझौता किया। इसमें ईरान अपने परमाणु प्‍लांट की जांच के लिए तैयार हो गया ताकि ये पता चल सके कि ईरान के परमाणु प्लांट में हथियार बना रहा है या नहीं।

 

नई दिल्‍ली। स्‍वीडन की 16 वर्षीय ग्रेटा थनबर्ग आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। वह पर्यावरण को लेकर पूरी दुनिया को जागरुक कर रही हैं। पर्यावरण प्रेमी के तौर पर ग्रेटा की पूरी दुनिया में एक अलग पहचान है। टाइम मैगजीन ने उन्‍हें अपने कवर पेज पर्सन ऑफ पर ईयर (Time: Person of the Year) के तौर पर जगह देकर दुनिया के लिए उनकी अहमियत को बता दिया है। वर्ष 2018 में भी ग्रेटा को वर्ष की सबसे प्रभावशाली किशोरी के तौर पर शामिल किया गया था अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को आंख दिखाने और पर्यावरण को लेकर सरेआम नेताओं को उनकी असलियत बताने वाली ग्रेटा को जब नोबेल पुरस्‍कार देने की बात कही गई तो उन्‍होंने इसको ग्रहण करने से ही इनकार कर दिया था। ग्रेटा की यही बातें उन्‍हें दूसरों से अलग बनाती हैं और वर्तमान में उनके साथ पूरा विश्‍व खड़ा है।
जब पहली बार दुनिया के सामने आई ग्रेटा;-ग्रेटा पहली बार मीडिया की सुर्खियां में मार्च 2018 में आई थी। उस वक्‍त उनकी उम्र महज 15 वर्ष थी। पर्यावरण पर जागरुकता फैलाने के मकसद से उन्‍होंने स्‍कूल में हड़ताल का आह्वान किया था। उनके इस आह्वान पर दुनिया के 105 देशों में स्‍कूली बच्‍चों ने सड़कों पर उतरकर पर्यावरण के मुद्दे पर प्रदर्शन किया था। भारत में भी स्‍कूली बच्‍चे सड़कों पर उतरे थे और लोगों को इस मुद्दे पर जागरुक करने की कोशिश की थी। पर्यावरण को बचाने के लिए उन्‍होंने #FridaysForFuture और #SchoolsStrike4Climate नाम से मुहिम शुरू की थी। दुनियाभर में छात्रों की इस हड़ताल को अंजाम देने वाली ग्रेटा को पूरी दुनिया की मीडिया ने सुर्खियों में अपने यहां पर जगह दी थी। ग्रेटा ने कहा था कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जो कदम उठाए जा रहे हैं वह नाकाफी हैं। कदमों को नाकाफी बताया है।
क्‍यों आश्‍वस्‍त हैं नेता;-पूरी दुनिया में इस मुद्दे पर हुई स्‍टूडेंट्स स्‍ट्राइक को लेकर दुनियाभर की मीडिया ने 16 वर्षीय ग्रेटा को अपने यहां पर प्रमुखता से जगह दी थी। नवंबर 2018 में ही ग्रेटा को TEDxStockholm में बतौर वक्‍ता बुलाया गया था। इसके अलवा दिसंबर 2018 में उन्‍हें संयुक्‍त राष्‍ट्र की क्‍लाइमेट चेंज कांफ्रेंस में भी बुलाया गया था। इसके अलावा जनवरी 2019 में दावोस में उन्‍हें वर्ल्‍ड इकनॉमिक फोरम में बुलाया गया। 2019 में 224 शिक्षाविदों ने ग्रेटा द्वारा किए गए प्रदर्शन के समर्थन में एक ओपन लेटर पर साइन किए। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरिस ने भी उनके आंदोलन की सराहना की।
रैलियों से कुछ नहीं होने वाला:-जहां भी ग्रेटा गईं वहां पर उनके भाषणों की काफी सराहना हुई। इसमें सबसे खास बात ये थी कि जिस उम्र में बच्‍चे पर्यावरण के नाम पर कुछ नहीं जानते हैं वहां पर ग्रेटा उस मुद्दे पर काफी उग्र थीं। अपने भाषणों में उन्‍होंने उन नेताओं पर जमकर निशाना साधा जो पर्यावरण पर किए गए कामों को काफी मानते थे। ग्रेटा का कहना था कि उनके आश्‍वस्‍त होने से काम नहीं चलने वाला है, उन्‍हें इस मुद्दे पर परेशान होना चाहिए। ग्रेटा का कहना है कि पर्यावरण की सुरक्षा के नाम पर महज रैलियां करने भर से कुछ नहीं होने वाला है।
एयर ट्रेवलिंग को कहा 'ना' ;-आपको बता दें कि ग्रेटा पर्यावरण की रक्षा को लेकर बचपन से ही काफी जागरूक रही हैं। यही वजह थी कि दुनिया की सोच को बदलने से पहले उन्‍होंने अपने परिवार की सोच में बदलाव किया। उन्‍होंने अपने पेरेंट्स से अपना लाइफस्‍टाइल बदलने को कहा था। उन्‍होंने सबसे पहले अपने घर में शाकाहारी खाने को तवज्‍जो देना शुरू किया। इसके बाद जानवरों के अंगों से बनीं चीजों का इस्तेमाल करना बंद किया। ग्रेटा ने अपने पेरेंट्स से हवाई जहाज से यात्रा न करने को राजी किया। उनकी ही मुहिम थी कि स्‍वीडन के ज्‍यादातर लोगों ने एयर ट्रेवलिंग को ना कह दिया था। इसकी वजह एयर ट्रेवलिंग से होने वाला कार्बन था। उनकी इसी मुहिम की बदौलत दुनिया को एक नया शब्‍द Flygskam के रूप में मिला। इसका अर्थ होता है flight shame।
आपकी हिम्‍मत कैसे हुई ?;-सितंबर 2019 में ग्रेटा ने जब पूरी अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप समेत अन्‍य नेताओं को कहा How dare you? तो पूरी हॉल में खामोशी छा गई। ग्रेटा का ये गुस्‍सा उन नेताओं के खिलाफ जो पर्यावरण के मुद्दे पर अपनी ही पीठ थपथपाने से बाज नहीं आ रहे थे। उन्‍होंने भरे हॉल में अपना गुस्सा जाहिर करते हुए सवाल किया की आपकी हिम्मत कैसे हुई? उनकी ट्रंप को घूरने वाली फोटो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुई थी। कई लोगों ने इसके लिए ग्रेटा को बधाई भी देते हुए बहादुर लड़की तक बतया था।
पुतिन की आलोचना का यूं दिया जवाब;-अक्‍टूबर 2019 में रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने ग्रेटा की यह कहते हुए आलोचना की थी कि वह एक नेक लड़की हैं, लेकिन शायद उन्हें पता होना चाहिए कि दुनिया तेजी से विकसित हो रही है। इसके जवाब में ग्रेटा ने माइक्रोब्लागिंग साइट पर अपनी प्रोफाइल बदल दी। अपने नए प्रोफाइल में उन्‍होंने लिखा कि 'एक दयालु, लेकिन कम जानकारी वाली नाबालिग।'
पर्यावरण पुरस्‍कार लेने से इनकार:-इसी वर्ष नॉर्डिक काउंसिल की तरफ से उन्‍हें पर्यावरण के क्षेत्र में पुरस्कार देने की घोषणा की थी। इसके तहत 52 हजार अमेरिकी डॉलर की राशि भी दी जाती है। लेकिन ग्रेटा ने इसको ग्रहण करने से इनकार करते हुए कहा था कि इस आंदोलन को किसी पुरस्कार की जरूरत नहीं है। हमें बस इतना ही चाहिए कि सरकारें इस मुद्दे पर ध्‍यान दें।

वाशिंगटन।भारत में संसद के दोनों सदनों से नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (India's Citizenship Amendment Bill 2019) के पास हो जाने के बावजूद इस पर देश से लेकर विदेश तक सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। अब अमेरिका के मुस्लिम सांसद आंद्रे कार्सन (Andre Carson) ने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पर कहा है कि यह भारत सरकार की मुस्लिमों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने का एक प्रभावी प्रयास…
नई दिल्ली। पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता और आतंकी संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) के प्रमुख हाफिज सईद और उसके तीन करीबियों के खिलाफ आतंकी फंडिंग के मामले में आरोप तय कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव में पाक अफसरों ने लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा व फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के खिलाफ जांच शुरू की, तो पता चला आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए धन जुटाने को इन ट्रस्टों का इस्तेमाल…
यरुशलम। इजरायल में एक साल के अंदर तीसरी बार संसदीय चुनाव कराने का एलान कर दिया गया है। यह चुनाव अगले साल दो मार्च को कराया जाएगा। गत सितंबर में हुए संसदीय चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिलने पर राष्ट्रपति रुवेन रिवलिन ने पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और फिर विपक्षी नेता बेनी गेंट्स को सरकार बनाने का मौका दिया था। इजरायली संसद को भंग करने के लिए प्रस्ताव…
नई दिल्‍ली। इस एक दशक में कई बड़ी घटनाएं हुईं। राजनीति‍, प्राकृतिक आपदाओं के अलावा अपना देश छोड़ दूसरे देश की शरण में जाने को लोग मजबूर हो गए। वहीं ब्रिटेन के प्रिंस विलियम और प्रिंस हैरी विवाह के बंधन में बंध गए। हैती के विनाशकारी भूकंप से सीरिया व अन्‍य कई देशों में जंग समेत प्राकृतिक आपदाओं ने भी राहत नहीं दी। इसके अलावा दुनिया के कई कोने में…
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