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काबुल। आफगानिस्तान की राजधानी काबुल में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सिलसिलेवार धमाके हुए हैं। जानकारी के मुताबिक इन धमाकों में कम से कम 66 लोगों के घायल होने की खबर हैं। बताया जा रहा है कि ये धमाके पूर्वी अफगानीस्तान के जलालाबाद में हुए है।ताजा जानकारी के मुताबिक सार्वजनिक जगहों पर एक के बाद एक लगभग 10 धमाके हुए।अधिकारियों के मुताबिक अभी तक किसी भी संगठन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी नहीं ली हैं। माना जा रहा है कि धमाकों के पीछे इस्लामिक स्टेट (आईएस) और तालिबान आतंकवादी संगठनों का हाथ हो सकता है।बता दें कि इससे पहले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने राजधानी काबुल में एक शादी समारोह के दौरान हुए बम धमाकों की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 63 लोग मारे गए थे और लगभग 200 घायल हुए थे।अधिकारियों के मुताबिक इन बमों को जलालाबाद के एक बाजार के पास लगाया गया था, जहां सैकड़ों लोग स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद इकट्ठे हुए थे। इससे पहले स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादियों के ठिकानों को खत्म करने के लिए अफगानिस्तान के साथ खड़े होने का आह्वान किया था।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय सेना की ओर से कथित संघर्षविराम उल्लंघन को लेकर सोमवार को भारतीय उप उच्चायुक्त गौरव अहलूवालिया को तलब किया है। पाकिस्तान ने ऐसा एक हफ्ते में चौथी बार किया है।
मोहम्मद फैसल ने निंदा की;-पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बताया कि दक्षिण एशिया और दक्षेस मामलों के महानिदेशक मोहम्मद फैसल ने 18 अगस्त को बगैर की वजह के हॉट स्प्रिंग और चिरिकोट सेक्टरों में किए गए संघर्षविराम उल्लंघन की निंदा की। साथ ही उनका दावा है कि गोलीबारी में दो बुजुर्ग नागरिक मारे गए और सात साल का एक लड़का गंभीर रूप से घायल हो गया है।
फैसल के अनुसार वर्ष 2017 से संघर्षविराम उल्लंघन में बढ़ोतरी;-फैसल पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता भी हैं। फैसल के अनुसार भारत की ओर से संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाओं में वर्ष 2017 से अभूतपूर्व बढ़ोतरी जारी है। उनका दावा है कि भारत की ओर से 1,970 बार संघर्षविराम का उल्लंघन हुआ है।
फैसल ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर खतरा बताया:-फैसल ने कहा कि आम नागरिकों की आबादी वाले इलाकों को जानबूझकर निशाना बनाना निन्दनीय है। यह मानवता, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार अधिकार और मानवाधिकार कानूनों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से संघर्षविराम उल्लंघन किए जाने से क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को भी खतरा है। इसका नतीजा सामरिक भूल साबित हो सकता है।
संघर्षविराम समझौते का सम्मान करने के लिए कहा:-फैसल ने भारतीय पक्ष से 2003 के संघर्षविराम समझौते का सम्मान करने के लिए कहा है। इसके अलावा उन्होंने संघर्ष विराम उल्लंघन की इन घटनाओं की जांच करने के साथ-साथ भारत को संघर्षविराम का सम्मान करने का आदेश दिया। उन्होंने नियंत्रण रेखा और सीमा पर शांति बनाए रखने को भी कहा।
हफ्ते में चौथी बार अहलुवालिया को तलब किया गया;-पाकिस्तान ने कथित संघर्षविराम उल्लंघन को लेकर एक हफ्ते में चौथी बार अहलुवालिया को तलब किया है। इससे पहले इसे लेकर अहलूवालिया को पाकिस्तान 14, 15 और 16 अगस्त को तलब कर चुका है।

वाशिंगटन। अमेरिका एवं संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ ने अफगानिस्‍तान की राजधानी काबूल में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्‍दों में निंदा की है। इस हमले में 63 लोगों की जानें गई, 180 से अधिक लोग घायल हो गए। इस हमले की जिम्‍मेदारी आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट (आइएस) ने ली है।
आतंकी हमले की अमेरिका ने की निंदा;-संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्‍टन ने ट्वीट किया कि‍ 'हम काबुल में शादी की पार्टी में आइएस के हमले की भर्त्सना करते हैं।" उन्‍होंने कहा कि "इस संकट की घड़ी में अमेरिका अफगानिस्‍तान के नागरिकों के साथ खड़ा है। बोल्‍टन ने कहा कि अफगानिस्‍तान में शांति बहाली स्‍थापित करना उनके देश की बड़ी प्राथमिकता है। उन्‍होंने कहा कि इस हमले का शांति प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
संयुक्‍त राष्‍ट्र ने गहरी संवेदना व्‍यक्‍त की:-उधर, संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस हमले की निंदा की है। समाचार एजेंसी सिन्‍हुआ के प्रवक्‍ता स्‍टीफन डुजारिका के हवाले से कहा गया है कि अफगान की राजधानी काबुल में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र प्रमुख ने हमले में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्‍यक्‍त की है। एंटोनियो ने कहा कि संयुक्‍त्‍ राष्‍ट्र संकट की इस घड़ी में अफगानिस्‍तान सरकार एवं वहां के नागरिकों के साथ खड़ा है।बता दें कि शनिवार को काबुल में शाहर-ए-दुबई मैरिज हॉल के अंदर यह धमाका हुआ था, जब हॉल एक अफगान जोड़े के शादी समारोह में शामिल होने वाले मेहमानों से खचाखच भरा हुआ था। इस हमले में 63 लोगों की मारे जाने की खबर है। इस आतंकी घटना में 180 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। करीब पचास लाख आबादी वाले काबूल में कई बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं।

लाहौर। आपने कैदियों के गिरफ्तारी के किस्से तो बहुत सुने होंगे, लेकिन क्या आपने पेड़ की गिरफ्तारी का मामला सुना है। वो भी एक दो साल से नहीं, बल्कि 121 साल पहले यानी अंग्रेजी शासनकाल से। दिलचस्प बात ये है कि ये बरगद का पेड़ आज भी सजा काट रहा है। ये मामला साल 1898 का है जब पाकिस्तान, भारत का ही हिस्सा हुआ करता था।
अंग्रेजी अफसर का पेड़ को गिरफ्तार करने का आदेश;-दरअसल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा स्थित लंडी कोटल आर्मी कैंटोनमेंट में तैनात एक अफसर जेम्स स्क्विड (James Squid) शराब के नशे में धुत्त होकर पार्क में घूम रहा था। अचानक उसे लगा कि ये पेड़ हमला करने उसकी तरफ आ रहा है। उसने तुरंत अपने सिपाहियों को इस पेड़ को गिरफ्तार करने का आदेश सुनाया। इसके बाद उस बरगद के पेड़ को शक की आधार पर सिपाहियों ने गिरफ्तार कर लिया। तब से अब-तक ये पेड़ लोहे की जंजीरों में कैद है।
अफसर को गलती का हुआ एहसास:-अंग्रेज अफसर जेम्स जब नशे से होश में आया तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन उसने पेड़ की जंजीरें खोलने नहीं दी। वह इससे लोगों को एक संदेश देना चाहते था। जेम्स बताना चाहता था कि अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जाने पर किसी का भी यही हश्र होगा।
पेड़ की तख्ती पर लिखा I am Under arrest;-इस पेड़ पर एक तख्ती भी लटकी दिखाई देती है। इस तख्ती पर लिखा है 'I am Under arrest'। इसके साथ ही पूरा किस्सा भी लिखा हुआ है। बहरहाल अंग्रेज चले गए और भारत-पाकिस्तान अलग हो गए, लेकिन ये पेड़ आज भी अंग्रेजी हुकूमत के काले कानून की याद दिलाता है। यह पेड़ ब्रिटिश शासन के दौरान फ्रंटियर क्राइम रेग्युलेशन कानून (FCR) की क्रूरता को दर्शाता है। पश्तून विरोध से मुकाबला करने के लिए इस कानून को लागू किया गया था। इसके तहत पश्तूनियों को शक के आधार पर सीधे दंडित किया जा सकता था।

नई दिल्‍ली। हांगकांग में हिंसक प्रदर्शनों और शांति का दौर खत्म होता नहीं दिख रहा है। विवादित प्रत्यर्पण बिल विरोध से शुरू हुए इन प्रदर्शनों को दो महीने से ज्यादा का वक्त हो का है। अब लोग लोकतंत्र की मांग कर रहे हैं। दो दिन से प्रदर्शनकारियों हांगकांग एयरपोर्ट को अपने कब्जे में ले रखा है। उधर चीन की सरकार प्रदर्शनकारियों की निंदा की है और यह भी कहा है कि वह चुप नहीं ठेगा। हालांकि, यह सब ऐसे ही नहीं हो रहा है। इसमें कई महत्वपूर्ण प्रसंग हैं, जो दशकों पुराने हैं।
99 साल की लीज पर किया गया था चीन के हवाले:-दरअसल, हांगकांग अन्य चीनी शहरों से काफी अलग है। 150 साल के ब्रिटेन के औपनिवेशिक शासन के बाद हांगकांग को 99 साल की लीज पर चीन को सौंप दिया गया। हांगकांग द्वीप पर 1842 से ब्रिटेन का नियंत्रण रहा। जबकि द्वितीय विश्व युद्ध में जापान का इस पर अपना नियंत्रण था। यह एक व्यस्त व्यापारिक बंदरगाह बन गया और 1950 में विनिर्माण का केंद्र बनने के बाद इसकी अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल आया। चीन में अस्थिरता, गरीबी या उत्पीड़न से भाग रहे लोग इस क्षेत्र की ओर रुख करने लगे।
1984 में हुआ था सौदा:-पिछली सदी के आठवें दशक की शुरुआत में जैसे-जैसे 99 साल की लीज की समयसीमा पास आने लगी ब्रिटेन और चीन ने हांगकांग के भविष्य पर बातचीत शुरू कर दी। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने तर्क दिया कि हांगकांग को चीनी शासन को वापस कर दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों ने 1984 में एक सौदा किया कि एक देश, दो प्रणाली के सिद्धांत के तहत हांगकांग को 1997 में चीन को सौंप दिया जाएगा। इसका मतलब यह था कि चीन का हिस्सा होने के बाद भी हांगकांग 50 वर्षों तक विदेशी और रक्षा मामलों को छोड़कर स्वायत्तता का आनंद लेगा।
विवाद की जड़:-1997 में जब हांगकांग को चीन के हवाले किया गया था तब बीजिंग ने एक देश-दो व्यवस्था की अवधारणा के तहत कम से कम 2047 तक लोगों की स्वतंत्रता और अपनी कानूनी व्यवस्था को बनाए रखने की गारंटी दी थी। लेकिन 2014 में हांगकांग में 79 दिनों तक चले अंब्रेला मूवमेंट के बाद लोकतंत्र का समर्थन करने वालों पर चीनी सरकार कार्रवाई करने लगी। विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों को जेल में डाल दिया गया। आजादी का समर्थन करने वाली एक पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
बीजिंग का कब्जा:-हांगकांग का अपना कानून और सीमाएं हैं। साथ ही खुद की विधानसभा भी है। लेकिन हांगकांग में नेता, मुख्य कार्यकारी अधिकारी को 1,200 सदस्यीय चुनाव समिति चुनती है। समिति में ज्यादातर बीजिंग समर्थक सदस्य होते हैं। क्षेत्र के विधायी निकाय के सभी 70 सदस्य, विधान परिषद, सीधे हांगकांग के मतदाताओं द्वारा नहीं चुने जाते हैं। बिना चुनाव चुनी गईं सीटों पर बीजिंग समर्थक सांसदों का कब्जा रहता है।
चीनी पहचान से नफरत:-हांगकांग में ज्यादातर लोग चीनी नस्ल के हैं। चीन का हिस्सा होने के बावजूद हांगकांग के अधिकांश लोग चीनी के रूप में पहचान नहीं रखना चाहते हैं। खासकर युवा वर्ग। केवल 11 फीसद खुद को चीनी कहते हैं। जबकि 71 फीसद लोग कहते हैं कि वे चीनी नागरिक होने पर गर्व महसूस नहीं करते हैं। यही कारण है कि हांगकांग में हर रोज आजादी के नारे बुलंद हो रहे हैं और प्रदर्शनकारियों ने चीन समर्थित प्रशासन की नाक में दम कर रखा है।

थिंपू। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय भूटान दौरे से रविवार शाम दिल्ली आ गए। पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल का यह पहला भूटान दौरा था। दिल्ली एयर पोर्ट पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पीएम मोदी का स्वागत किया है।रविवार को पीएम मोदी ने सबसे पहले रॉयल यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को संबोधित किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थिंपू के ताशिचेदोज़ोंग पैलेस में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग भी लिया था।इसके पहले उन्होंने भूटान के नेता प्रतिपक्ष पेमा गिमत्सो से मुलाकात की थी। इससे पहले वह थिंपू में नेशनल मेमोरियल चोर्टेन गए थे।साथ ही आज उन्होंने रॉयल यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के संबोधित भी किया था। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों के साथ की। साथ ही उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों को बौद्ध धर्म जोड़े हुए है। इस दौरान उन्होंने भूटान के छात्रों को भारत में आने के लिए अमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत मेंशिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया जा रहा है। इसलिए भूटानी छात्र वहां आ सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि गरीबी उन्मूलन के लिए भारत में तेजी से काम चल रहा है
भारत और भूटाना की साझा संस्कृति:-पीएम मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों के जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों की संस्कृति जुड़ी हुई है। साथ ही उन्होंने छात्रों से परीक्षा के वक्त तनाव मुक्त रहने के लिए कहा और अपनी किताब एग्जाम वॉरियर्स का जिक्र भी किया।उन्होंने कहा कि मैंने ये किताब गौतम बुद्ध से प्रेरित होकर लिखी है।
भारत आएंगे भूटान के वैज्ञानिक:-पीएम मोदी ने कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि भूटान के छोटे उपग्रह को डिजाइन करने और लॉन्च करने के लिए युवा भूटानी वैज्ञानिक भारत की यात्रा करेंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि मुझे उम्मीद है कि किसी दिन जल्द ही, आप में से कई वैज्ञानिक, इंजीनियर और इनोवेटर होंगे।
भारत का सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा:-पीएम ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा योजना आयुष्मान भारत का घर है। ये योजना 500 मिलियन भारतीयों को स्वास्थ्य आश्वासन देती है। भारत में दुनिया की सबसे सस्ती डेटा कनेक्टिविटी है, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को सशक्त बना रही है।
भारत में हो रहा एतिहासिक बदलाव:-पीएम मोदी ने कहा कि आज, भारत तमाम सेक्टर में ऐतिहासिक बदलावों का गवाह बन रहा है। पिछले पांच साल में बुनियादी ढांचे के निर्माण कीर रफ्तार दोगुनी हो गई है।
पहले दिन हुआ इतने समझौते;-शनिवार को दौरे के पहले दिन पीएम मोदी ने कहा कि भूटान जैसा दोस्त और पड़ोसी कौन नहीं चाहता? ऐसे दोस्त के विकास का साथी बनना भारत के लिए भी सम्मान की बात है। इस दौरान पीएम मोदी ने रूपया कार्ड लांच करने के साथ ही 9 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इनमें से एक समझौते के तहत इसरो थिम्पू में अर्थ स्टेशन बनाएगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच एक बिजली खरीद समझौता भी हुआ। अन्य समझौते के तहत विमान हादसे और दुर्घटना की जांच, न्यायिक शिक्षा, अकादमिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विधिक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एमओयू किए गए।
भूटान में लांच हुआ रुपे कार्ड:-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान में रुपे कार्ड लांच किया है। उन्होंने यहां के सर्वाधिक पुराने मठों में शुमार सिमतोखा जोंग (मठ) में एक खरीदारी करते हुए इसे लांच किया। इस कार्ड को दो चरणों में लांच किया जाना है। पहले चरण में भारतीय बैंक भारतीयों के लिए ऐसे रुपे कार्ड जारी करेंगे, जिनका भूटान में प्रयोग हो सकेगा। दूसरे चरण में भूटान के बैंकों को ऐसे रुपे कार्ड जारी करने का अधिकार दिया जाएगा, जिनका प्रयोग भारत आने वाले भूटानी नागरिक कर सकेंगे। मोदी के दौरे पर भारत और भूटान के बीच 10 समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुआ। एमओयू शोध, उड्डयन, आइटी, ऊर्जा और शिक्षा क्षेत्र में किए गए।रॉयल भूटान यूनिवर्सिटी और भारत के विभिन्न आइआइटी के बीच हुआ समझौता भी इसमें शामिल है। मोदी और शेरिंग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से तैयार ग्राउंड अर्थ स्टेशन और सैटकॉम नेटवर्क का उद्घाटन भी किया। भारत ने भूटान के लोगों की जरूरत को देखते हुए घरेलू गैस (एलपीजी) की आपूर्ति भी 700 टन मासिक से 1,000 टन मासिक करने का फैसला किया है। भूटान की विदेशी मुद्रा की जरूरत को देखते हुए भारत ने भूटान के साथ मौजूदा स्टैंड बाय स्वैप अरेंजमेंट में 10 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त व्यवस्था की है।
जलविद्युत परियोजना का किया उद्घाटन-प्रधानमंत्री मोदी ने यहां मांगदेछू जलविद्युत प्लांट का भी उद्घाटन किया। 4,500 करोड़ रुपये लागत वाली 720 मेगावाट की इस परियोजना को दोनों देशों ने मिलकर पूरा किया है। भारत ने इसके लिए 70 प्रतिशत राशि कर्ज के रूप में और 30 फीसद राशि अनुदान के रूप में दी है। मोदी ने कहा, ‘जलविद्युत दोनों देशों के बीच सहयोग का अहम क्षेत्र है। दोनों देशों के प्रयास से भूटान की जलविद्युत क्षमता 2,000 मेगावाट से ज्यादा हो गई है। मुङो भरोसा है कि हम अन्य परियोजनाओं को भी तेजी से पूरा करेंगे।’

ढाका। बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप जारी है। इससे लगभग 40 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों के अनुसार जनवरी से अब-तक पूरे देश में 50 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। देश में यह संख्या किसी भी वर्ष की तुलना में पांच गुना अधिक है।बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार डेंगू एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है, जो फ्लू जैसी बीमारी का कारण बनता…
न्यूयॉर्क। शोधकर्ताओं का कहना है कि बृहस्पति और एक स्थिर ग्रह में 4.5 अरब साल पहले हुई टक्कर की वजह से बृहस्पति की कोर का घनत्व कम हो गया और इसका विस्तार अनुमान से ज्यादा फैल गया। इस टक्कर के कारण ही बृहस्पति ग्रह घूम रहा है। नासा के जूनो स्पेसक्राफ्ट से प्राप्त डाटा का विश्लेषण करने वाले शोधकर्ताओं ने बताया कि भले ही यह घटना 4.5 अरब वर्ष पहले…
नई दिल्‍ली। फॉक्‍स चैनल पर कुछ दिन पहले एक डॉक्‍यूमेंट्री प्रसारित की गई। यह डॉक्‍यूमेंट्री हॉलीवुड एक्‍ट्रेस मर्लिन मुनरो पर थी। इसमें कुछ ऐसी बातें सामने आईं जो अब से पहले अंधेरे में थीं। इस डॉक्‍यूमेंट्री में लीघ वीनर (Photographer Leigh Wiener), जो एक चर्चित फोटोग्राफ्रर थे और लाइफ मैगजीन के लिए फ्रीलांस करते थे, के बेटे को दिखाया गया था। वीनर का जिक्र यहां पर इसलिए भी जरूरी है…
नई दिल्ली। 1947 में भारत और पाकिस्तान को अंग्रेजों से आजादी मिली। भारतीय स्वतंत्रता एक्ट 1947 के अनुसार तमाम रियासतों को यह चयन करने की सुविधा दी गई कि वे भारत के साथ रहना चाहते हैं या फिर पाकिस्तान के साथ जुड़ना चाहते हैं। उस समय जम्मू-कश्मीर देश की सबसे बड़ी रियायत हुआ करती थी। इस रियासत पर महाराजा हरि सिंह शासन करते थे। वहां की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी के…
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