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मास्को। रूसी प्रोटॉम-एम प्रक्षेपण यान से ले जाई गई अंतरिक्ष वेधशाला स्पेक्ट्रा-आरजी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गई है। इसकी जानकारी रूसी सरकारी अंतरिक्ष संघ रॉसकॉसमॉस ने दिए एक बयान में दी है। खबरों के मुताबिक, यह अंतरिक्ष यान शनिवार को कजाकिस्तान में बाईकोनुर कोस्मोड्रोम से लॉन्च किया गया।यह 2019 के इस तरह के लॉन्च व्हीकल का दूसरा लॉन्च है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बयान के हवाले से कहा कि दो अनोखे एक्स-रे दूरबीनों से सुसज्जित कक्षीय वेधशाला ने इसकी शुरुआत कर दी है। एक्स-रे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन में ब्रह्मांड का पता लगाने के लिए अपनी 100 दिवसीय उड़ान शुरू कर दी है।गौरतलब है कि स्पेक्ट्रा-आरजी जर्मन भागीदारी के साथ एक रूसी परियोजना है। इसका मुख्य लक्ष्य आकाशगंगाओं के लगभग एक लाख सबसे बड़े समूहों और 30 लाख विशालकाय ब्लैक होल्स को दर्ज करते हुए पूरे आकाश का नक्शा बनाना है।

नई दिल्ली। सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एक बड़ी छलांग लगाने वाला है। भारत का शक्तिशाली भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण वाहन, जीएसएलवी-मार्क 3 चंद्रयान-2 को लेकर श्रीहरिकोटा से उड़ान भरेगा। यह यान अपने साथ एक लैंडर और एक रोवर भी ले जाएगा। लैंडर का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर ‘विक्रम’ रखा गया है।रोवर एक छह पहियों वाली चंद्र गाड़ी है जिसका नाम ‘प्रज्ञान’ नाम रखा गया है। चंद्रयान-2 इसरो का बेहद महत्वाकांक्षी मिशन है। इससे पहले भारत ने अक्टूबर 2008 में चंद्रयान-1 को चंद्रमा पर 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर वृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया था। इसरो के इतिहास में चंद्रयान-2 सबसे चुनौतीपूर्ण और तकनीकी दृष्टि से अत्यंत जटिल मिशन है, क्योंकि इसरो न सिर्फ मुख्य परिक्रमा-यान (ऑर्बिटर) को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करेगा, बल्कि चंद्रमा की मिट्टी पर लैंडर को बहुत हल्के ढंग से उतारेगा।रोवर से युक्त लैंडर ऑर्बिटर से अलग होने के बाद छह या सात सितंबर को धीरे-धीरे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। इस तरह चंद्रयान-2 को पृथ्वी से चंद्रमा की सतह तक 3.84 लाख किलोमीटर की दूरी तय करने में 53 से 54 दिन लगेंगे। सबसे खास बात यह है कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला दुनिया का पहला देश होगा।

 

वॉशिंगटन।अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के इंजीनियरों ने मंगल ग्रह पर जाने वाले मार्स 2020 रोवर को बनाने की दिशा में एक और नया कीर्तिमान हासिल किया है। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) की एक नवीनतम रिलीज के अनुसार, हाल ही में अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा अपॉरच्युनिटी रोवर में व्हील्स और लैग्स इंस्टॉल किए गए हैं, जिसे मार्स 2020 रोवर की गतिशीलता निलंबन के रूप में जाना जाता है।जेपीएल के मुताबिुक इंजीनियरों की टीम के एकीकरण के प्रयास की जटिलता को जोड़ने के लिए लिए "रॉकर-बोगी" निलंबन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया, जो रोवर के शरीर को संतुलित रखती है, जो छह पहियों के विभिन्न पदों के आधार पर "रॉक" को ऊपर या नीचे करने में सक्षम बनाती है। जेपीएल ने कहा कि 52.5 सेंटीमीटर व्यास में निर्मित और कर्षण प्रदान करने वाले क्लीट्स या ग्रुसर के साथ मशीनी मौजूदा पहिए इंजीनियरिंग मॉडल हैंं जिन्हें अगले साल उड़ान मॉडल के साथ बदल दिया जाएगा। हर पहियए का अपना मोटर होता है। दो फ्रंट और दो रियर व्हील्स में अलग-अलग स्टीयरिंग मोटर्स भी हैं जो वाहन को पूर्ण 360 डिग्री मोड़ने में सक्षम बनाती हैं।रोवर को जुलाई 2020 तक प्रक्षेपित किया जायेगा और इस अंतरिक्ष यान के फरवरी 2021 में मंगल की सतह को छूने की संभावना जताई जा रही है। 1,000 किलोग्राम से अधिक वजन वाला रोवर ग्रह पर किसी समय मौजूद रहे सूक्ष्मजीवीय जीवन के चिह्न तलाश कर सकेगा और वहां की जलवायु एवं भूतत्वों की विशेषता का पता लगाएगा।

 

 

नई दिल्ली। फेसबुक के यूजर्स की गोपनीय सूचनाओं को भंग किए जाने को लेकर फेडरल ट्रेड कमीशन(FCI) ने FACEBOOK पर 5 अरब डॉलर (34 हजार करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। एक अमेरिकी अखबार ने यह जानकारी दी है। अखबार ने कहा कि संघीय व्यापार आयोग(FCI) ने 3-2 वोटों के साथ इस जुर्माने को मंजूरी दी है। उपभोक्ता संरक्षण एजेंसी के दो डेमोक्रेटिक सदस्यों ने इसके लिए असंतोष जताया था। रिपोर्ट के अनुसार गोपनीयता के उल्लंघन के मामले पर लगाया गया यह अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना होगा हालांकि अंतिम रूप देने से पहले अभी इसके लिए न्याय विभाग से स्वीकृति मिलने की आवश्यकता है।
सोशल मीडिया के हैं फायदे भी:-इस साल की शुरूआत में फेसबुक ने भी 'उपयोगकर्ता डेटा व्यवहार' पर कानूनी निबटारे के लिए 3 बिलियन डॉलर से 5 बिलियन डॉलर का भुगतान करने की उम्मीद जताई थी। एफटीसी ने पिछले साल घोषणा की थी कि उसने कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा करोड़ों यूजर्स का निजी डेटा चुराने का मामला सामने के बाद फेसबुक के साथ 2011 के गोपनीयता समझौते में अपनी जांच को फिर से शुरू कर दिया है, राजनीतिक सलाहकार कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए काम किया था।
इतना भी बुरा नहीं है फेसबुक, दूर करता है डिप्रेशन और टेंशन:-दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया नेटवर्क फेसबुक को अमेरिका और दुनिया भर के तमाम देशों में यूजर्स की निजता के उल्लंघन के मामले में पूछताछ और जांच का सामना करना पड़ रहा है। फेसबुक से यह भी पूछा गया है कि क्या उसने पहले किए गए समझौते का उल्लंघन करते हुए बिजनेस पार्टनर्स के साथ अनुचित तरीके से यूजर्स का डाटा शेयर तो नहीं किया। कुछ फेसबुक आलोचकों का तर्क है कि कंपनी पर डेटा व्यवहार की निगरानी सहित सख्त प्रतिबंध लगाने चाहिए, या फेसबुक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को दंड के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होना चाहिए। वहीं उपभोक्ता समूह पब्लिक नॉलेज के शार्लोट श्लेमन ने एक बयान में कहा, "मुझे उम्मीद है कि फेसबुक की व्यावसायिक कार्यप्रणालियों पर अतिरिक्त शर्तें लागू होंगी। समूह की प्रतिस्पर्धा नीति के वकील चार्लोट स्लेमियन ने कहा, क्या फेसबुक को अपने व्यवसाय मॉडल या प्रथाओं में कोई बदलाव करना चाहिए। अपने आप से, फेसबुक के व्यवहार को बदलने के लिए यह जुर्माना पर्याप्त नहीं होगा।" फेसबुक ने समझौते पर एएफपी क्वेरी का तुरंत जवाब नहीं दिया। एफटीसी ने पिछले साल घोषणा की कि उसने फेसबुक के साथ 2011 के गोपनीयता समझौते में अपनी जांच को फिर से खोल दिया, जिसमें बताया गया कि दसियों करोड़ उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा को राजनीतिक कंसल्टेंसी कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा चोरी कर लिया गया था, जो 2016 में डोनाल्ड ट्रम्प अभियान पर काम कर रहा था।
दो अरब से अधिक इस्तेमाल करने वाले;-फेसबुक का इस्तेमाल दुनिया भर में दो अरब से अधिकलोग कर रहे हैं, इस वजह से ये सोशल नेटवर्किंग कंपनी की ग्रोथ इतनी अधिक है। इतने अधिक यूजर्स के साथ ये टॉप कंपनी है। जिस कंपनी के जितने अधिक यूजर्स हो उनको यूजर्स का डेटा उतना अधिक संभालकर रखना चाहिए मगर यहां ऐसा नहीं किया गया जिसकी वजह से फेसबुक पर इतनी बड़ी पेनाल्टी लगाई गई है। जुर्माना की घोषणा के बाद फेसबुक का स्टॉक मूल्य 1.8 प्रतिशत बढ़ गया, लगभग USD 205 पर बंद हुआ, जो कि सभी वर्ष में सबसे अधिक है।कुछ फेसबुक आलोचकों ने तर्क दिया है कि कंपनी को अपने डेटा प्रथाओं की निगरानी सहित सख्त प्रतिबंधों का सामना करना चाहिए, या मुख्य कार्यकारी मार्क जुकरबर्ग को दंड के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होना चाहिए। फेसबुक के प्रमुख निक क्लेग ने सरकारों से कंपनियों को काम छोड़ने के बजाय सामाजिक नेटवर्क को नियमित करने के लिए और अधिक करने का आह्वान किया। क्लेग ने बीबीसी के साथ 24 जून को दिए एक साक्षात्कार में कहा यह निजी कंपनियों के लिए नहीं है, यह लोकतांत्रिक दुनिया में लोकतांत्रिक राजनेताओं के लिए है। लेकिन बड़े पैमाने पर सामाजिक नेटवर्क को खत्म करने के लिए कॉल बढ़ रही हैं। मई में, फेसबुक के सह-संस्थापकों में से एक ने सोशल मीडिया के बेमॉथ को तोड़ने के लिए कहा, यह चेतावनी देते हुए कि ज़करबर्ग बहुत शक्तिशाली हो गए थे। यह फेसबुक को तोड़ने का समय है। द न्यू यॉर्क टाइम्स के लिए एक संपादकीय में क्रिस ह्यूजेस ने कहा, सोशल नेटवर्क को फेसबुक की इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सेवाओं से अलग करना आवश्यक हो गया था।

लंदन। जिब्राल्टर की पुलिस ने कहा कि ईरानी तेल टैंकर ग्रेस-1 के चालक दल के सभी चार सदस्यों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। इन पर कोई आरोप तय नहीं किया गया है। जमानत पर छूटे चालक दल के सभी सदस्य भारतीय बताए जा रहे हैं।ब्रिटिश नौसेना ने गत चार जुलाई को जिब्राल्टर द्वीप के पास इस तेल टैंकर को पकड़ा था। यह टैंकर तभी से ब्रिटेन के अधिकार वाले क्षेत्र जिब्राल्टर के तट पर खड़ा है। 330 मीटर लंबे इस तेल टैंकर को यूरोपीय यूनियन (ईयू) के प्रतिबंधों का उल्लंघन कर कच्चा तेल सीरिया ले जाने के संदेह में पकड़ा गया था।शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, जिब्राल्टर की पुलिस ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, 'गिरफ्तार किए गए ग्रेस-1 के चालक दल के सभी सदस्यों को बिना किसी आरोप के जमानत पर छोड़ दिया गया है। जांच चल रही है और ग्रेस-1 अभी कब्जे में है।' इसके पहले गुरुवार को जिब्राल्टर पुलिस ने ईरानी तेल टैंकर के भारतीय कैप्टन और एक मुख्य अधिकारी को गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन उनके दो अन्य साथियों को भी पकड़ लिया गया था।
ईरान और ब्रिटेन में बढ़ा तनाव:-तेल टैंकर पकड़े जाने के कारण ईरान और ब्रिटेन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन के राजदूत रॉब मैकेयर को तलब कर इस घटना पर विरोध दर्ज कराया था और तेल टैंकर छोड़ने की मांग की थी। साथ ही यह आरोप भी लगाया था कि अमेरिका के कहने पर तेल टैंकर को पकड़ा गया। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा था कि ब्रिटेन को तेल टैंकर पकड़ने का परिणाम भुगतना होगा।ब्रिटेन ने बीते गुरुवार को आरोप लगाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के पास ईरान के तीन पोतों ने उसके एक तेल टैंकर का रास्ता रोकने का प्रयास किया था। हालांकि ईरान ने इससे इन्कार किया था।

मोगादिशू। दक्षिण सोमालिया के एक होटल में शनिवार को एक बड़ा आतंकवादी हमला किया गया। यहां एक आत्मघाती हमलावर ने किसमायो शहर के लोकप्रिय मेदिना होटल में विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी लेकर घुस गया। इसके बाद भारी हथियारों से लैस कई बंदूकधारी आतंकी गोलीबारी करते हुए होटल में घुस गए। इस हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है। वहीं हमले में 56 लोग घायल बताए जा रहे हैं। बता दें, इस हमले की जिम्मेदारी अल शबाब नाम के आतंकी संगठन ने ली है। क्षेत्रीय अध्यक्ष अहमद मोहम्मद इस्लाम के अनुसार, 'हमले में 26 लोग मारे गए। मारे गए लोगों में कई विदेशी नागरिक हैं। इनमें तीन केन्याई, एक कनाडाई, एक ब्रिटिश, दो अमेरिकी और तीन तंजानिया के निवासी हैं। इसके अलावा दो चीनी नागरिक घायल भी हैं। जुबैलबंद क्षेत्र के राष्ट्रपति अहमद मोहम्मद ने एक बयान में कहा कि अल-कायदा से जुड़े अल शबाब द्वारा किए गए हमले में आगामी क्षेत्रीय चुनावों के लिए एक राष्ट्रपति उम्मीदवार भी मारे गए।
'अल शबाब' ने ली हमले की जिम्मेदारी;-बता दें, इस हमले की जिम्मेदारी अल शबाब नाम के आतंकी संगठन ने ली है। अल शबाब, अलकायदा से जुड़ा एक समूह है जिसने इससे पहले भी कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है। फिलहाल सोमालिया में सुरक्षाबलों ने रात से जारी आतंकवादी ऑपरेशन को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया है। पुलिस अधिकारी ने बताया, 'ऑपरेशन अब खत्म हो गया है। चारों हमलावरों को भी हमने मार गिराया है।
'अल शबाब' बड़ा खतरा:-अल शबाब एक बड़ा सुरक्षा खतरा बना हुआ है।अल शबाब के आतंकी अक्सर सोमालिया और पड़ोसी केन्या में बमबारी करते हैं। जिनकी सेना अफ्रीकी संघ-शासित शांति सेना का हिस्सा बनती है जो सोमाली सरकार की रक्षा में मदद करती है। अल शबाब को 2011 में मोगादिशु से बाहर कर दिया गया था और तब से इसे इसके अन्य गढ़ों से हटा दिया गया है। यह 2012 में किसमायु से बाहर निकाल दिया गया था।शहर का बंदरगाह करों, लकड़ी के निर्यात और हथियारों और अन्य अवैध आयातों पर कर से समूह के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत था। Kismayu जुब्लांद की वाणिज्यिक राजधानी है, दक्षिणी सोमालिया का एक क्षेत्र अभी भी आंशिक रूप से अल शबाब द्वारा नियंत्रित है। अल शबाब एक बड़ा सुरक्षा खतरा बना हुआ है, जिसमें लड़ाके अक्सर सोमालिया और पड़ोसी केन्या में बमबारी करते हैं, जिनकी सेना अफ्रीकी संघ-शासित शांति सेना का हिस्सा बनती है जो सोमाली सरकार की रक्षा करने में मदद करती है।

हांग कांग/मनीला। जापान और दक्षिणी फिलीपींस में शनिवार को भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए गए। जापान (Japan) के नाजे (Naze) से 169 किलोमीटर उत्‍तर पश्चिम में 6.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। वहीं दक्षिणी फिलीपींस में 5.8 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया जिसमें कम से कम 25 लोग घायल हो गए और कुछ इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। तड़के आए इस भूकंप से घबराकर लोग अपने घरों को…
नई दिल्ली। ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने टीवी को दिए अपने अंतिम इंटरव्यू में कहा कि वो डाउनिंग स्ट्रीट को छोड़ते हुए गर्व और निराशा दोनों के भाव महसूस कर रही हैं। उनको अगले 12 दिनों में डाउनिंग स्ट्रीट छोड़नी है। एक टीवी को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ब्रैक्सिट में अपने को ना देखकर उनके मन में हताशा जरूर होगी। वो अपने को कमजोर भी महसूस करेंगी।…
चीन। छुट्टे नहीं हैं... भिखारियों को देख पॉकेट में छुट्टे की तलाश करने वाले हाथों को चीन के भिखारियों ने राहत देने का काम किया है। दरअसल, आधुनिक तकनीक यहां भिखारियों तक को मिल गई है। अब ये अलीबाबा ग्रुप के अलीपे या टेनसेंट के वीचैट वॉलेट से पैसे लेने के लिए कटोरी में QR कोड लेकर घूमते हैं। यानि जो भीख न देना चाहे उनका गुजारा चीन में नहीं।…
बीजिंग/ताइपे। चीन ने अमेरिकी कंपनी को धमकी दी है कि यदि उसने स्वशासित ताइवान के साथ 2.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (150.82 अरब रुपये) के हथियार बिक्री समझौते पर आगे बढ़ने की कोशिश की तो उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इसके बाद ताइवान ने भी चीन को तगड़ा जवाब दिया है। ताइवान ने कहा है कि वह किसी भी सूरत में अपने रक्षा बलों को मजबूत करना जारी रखेगा।जिद पर…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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