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लंदन। दो दिन पहले हुए सड़क हादसे के बाद ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पति प्रिंस फिलिप (97) फिर कार चलाते नजर आए। इस बार उन्होंने सीट बेल्ट भी नहीं पहन रखी थी, जिसकी वजह से पुलिस ने उन्हें चेतावनी दी है।फिलिप के इस उम्र में कार चलाने को लेकर देश में बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इतनी अधिक उम्र में कार चलाने को सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं मानते। ब्रिटेन में ड्राइविंग की कोई उम्र सीमा नहीं है। लेकिन 70 साल का होने पर व्यक्ति का लाइसेंस रद हो जाता है। उसे नवीनीकृत नहीं कराने पर वह गाड़ी नहीं चला सकता।महारानी की निजी रियासत सैंड्रिंघम में शनिवार को अपनी नई लैंड रोवर कार चलाते प्रिंस की तस्वीर सामने आई है। नॉरफॉल्क पुलिस प्रवक्ता ने रविवार को कहा कि सीट बेल्ट नहीं पहने होने के कारण प्रिंस को उचित चेतावनी दी गई। किसी अन्य मामले में भी इसी तरह की कार्रवाई की जाती है।बीते गुरुवार को एक अन्य कार से टक्कर के बाद प्रिंस की कार पलट गई थी। उस हादसे में प्रिंस बाल-बाल बचे थे। लेकिन दूसरी कार में बैठी दो महिलाएं और उनका ड्राइवर जख्मी हो गया था। पुलिस का कहना है कि वाहन टकराने की अन्य घटनाओं की तरह ही इस मामले की छानबीन की जा रही है।

नई दिल्‍ली। भूमध्‍य सागर में एक बार फिर से अच्‍छी जिंदगी की आस रखकर दूसरे देश जाने वालों को अपने आगोश में ले लिया है। दो अलग अलग घटनाओं में करीब 170 लोगों के लापता हो गए हैं। इनमें से नौका मोरक्‍को तो एक लीबिया से थी। इटली की नौसेना के हेलीकॉप्‍टर ने तीन लोगों को सुरक्षित बचा लिया है, वहीं तीन के शव भी समुद्र से निकाल लिए गए हैं, लेकिन अन्‍यों का अभी कोई पता नहीं चला है। बचाए गए तीनों लोगों को हाइपोथर्मिया की शिकायत के बाद अस्‍पताल में भर्ती करा दिया गया है। बचाए गए तीनों लोग लीबिया के हैं। इनकी नौका शुक्रवार को समुद्र में डूब गई थी जबकि दूसरी नौका के साथ शनिवार को हादसा हुआ था।इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ माइग्रेशन के मुताबिक जिस नौका में यह सवार थे उसमें करीब 120 लोग सवार थे। करीब ग्‍यारह घंटों तक ठंडे पानी में रहने के बाद धीरे धीरे लोगों की सांसे थमने लगीं। लापता हुए लोगों में दस महिलाएं, दो बच्‍चे और एक दो माह का नवजात भी शामिल है। इटली की तरफ से नौका के डूबने की जानकारी लीबिया को दे दी गई है। वहां से एक मर्चेंट शिप के मौके पर पहुंचने की जानकारी दी गई है। दूसरी घटना में करीब 53 मोरक्‍को नागरिक भी लापता हैं। इनकी नौका पश्चिमी भूमध्‍य सागर में डूबी थी। इस हादसे में करीब 47 लोगों को जिंदा भी बचा लिया गया है।आपको बता दें कि अच्‍छी जिंदगी की चाहत में इस वर्ष की शुरुआती दो सप्‍ताह में करीब 4449 लोग समुद्र के रास्‍ते इटली पहुंचे हैं। पिछले वर्ष इनकी संख्‍या करीब तीन हजार थी। पिछले वर्ष करीब 2300 लोगों की मौत भूमध्‍य सागर में नौका पलटने की वजह से हुई थी। जबकि करीब सवा लाख लोगों ने यूरोप के अलग-अलग देशों में शरण ली थी। जहां तक भूमध्‍य सागर में नौका से होने वाले हादसों की बात है तो यह सागर हर वर्ष सैकड़ों लोगों को लील लेता है।
-जनवरी 2018 में लीबिया तट के पास भूमध्यसागर में एक अस्थायी नौका के डूबने से 90 से 100 प्रवासी लापता हो गए थे। इस नौका में 150 से अधिक लोग सवार थे। बचावकर्ता इनमें से कुछ महिलाओं सहित केवल 17 लोगों को ही बचा पाए थे। मदद पहुंचने से पहले ये लोग कई घंटों तक नाव से लटके रहे। नौका लीबिया की राजधानी से पूर्व में करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित खम्स शहर के पास डूबी थी। इसके अलावा इसी दौरान एक दूसरे हादसे में लीबियाई नौसेना ने त्रिपोली के पश्चिम में जाविया के पास से करीब 267 प्रवासियों को बचाया था। इनमें से अधिकतर अफ्रीकी नागरिक थे। कासिम ने बताया कि बचाए गए लोगों में महिलाएं और 17 बच्चे शामिल हैं।
-फरवरी 2017 में लीबिया की राजधानी से लगे भूमध्य सागर के पश्चिमी तट पर करीब 74 प्रवासियों के शव बरामद किए गए। इसके अलावा मार्च 2017 में लीबिया के पास भूमध्य सागर में दो नौकाओं के डूबने से करीब 250 लोगों की मौत हो गई थी।
-जून 2016 में भूमध्य सागर यूनानी द्वीप क्री के निकट एक नौका पलट गई थी जिस पर 700 से अधिक लोग सवार थे। इटली के बचावकर्ताओं ने करीब 300 लोगों को जीवित बचा लिया था जबकि अन्‍यों का कोई पता नहीं चल सका था।
-मई 2016 में लीबिया के जुवारा से 35 समुद्री मील की दूरी पर एक शरणार्थी नौका के पलटने से 20 से 30 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 135 को जीवित बचा लिया गया था। इसके अलावा इसी वर्ष नवंबर में नौका के पलटने से करीब 240 लोगों की जान चली गई थी। बचावकार्य के दौरान करीब 140 लोगों को बचा लिया गया था जिसमें करीब 20 महिलाएं थीं। यह सभी खुशहाल जिंदगी की चाह में लीबिया से निकले थे।
-अप्रैल 2015 में करीब 700 प्रवासियों को लेकर जा रही नौका के लीबिया के उत्तरी भाग में डूब जाने से कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई थी। इस नौका में जरूरत से ज्‍यादा लोग सवार थे। संतुलन बिगड़ने से यह नौका बीच समुद्र में पलट कर डूब गई थी।

नई दिल्‍ली। अमेरिकी मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम को लेकर चीन और रूस में खौफ साफतौर पर दिखाई दे रहा है। चीन की एक और चिंता अमेरिकी योजना में भारत को अहम साझेदार बनाने और उसकी नई हिंद-प्रशांत नीति को लेकर भी है। वहीं अमेरिका ने अपनी 81 पन्‍नों की मिसाइल रक्षा समीक्षा रिपोर्ट में यह साफ कर दिया है कि चीन और रूस लगातार अपनी मिसाइल तकनीक में इजाफा कर रहे हैं इसके अलावा अमेरिका की उत्तर कोरिया से भी लगातार खतरा बना हुआ है। इन देशों से से बढ़ते खतरे के मद्देनजर अपनी सुरक्षा को मजबूत करना उसकी अहम जिम्‍मेदारी है। इसके लिए जरूरी है कि अमेरिका के पास ऐसी तकनीक हो जिसके जरिए वह अमेरिका की तरफ आने वाले हर खतरे को कहीं से भी और कभी भी खत्‍म कर सके।
आज लॉन्‍च होगा यूएस का स्‍पाई सेटेलाइट:-इसके अलावा हिंद प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की सुरक्षा एवं कूटनीति की आधारशिला जापान, दक्षिण कोरिया और आस्ट्रेलिया के साथ उसके मजबूत द्विपक्षीय संबंध और भारत जैसे देशों के साथ मजबूत होते सुरक्षा संबंध हैं। आपको यहां पर बता दें कि पहली बार अमेरिका की तरफ से इस तरह का जिक्र 2010 में किया गया था और अब ट्रंप ने इसको अमलीजामा पहनाने की तरफ कदम बढ़ा दिया है। इस योजना का खुलासा करने के एक ही दिन बाद अमेरिका अपने सबसे भारी रॉकेट एलाइंस डेल्टा -4 के साथ अपनी नई और अत्याधुनिक तकनीक से लैस स्पाई सेटेलाइट को भी प्रक्षेपित कर रहा है। यह सेटेलाइट शनिवार को केलिफोर्निया के वेंडेनबर्ग एयरफोर्स बेस से लॉन्च की जानी है। अमेरिका के मुताबिक यदि मौसम ने साथ दिया था इसको स्थानीय समयानुसार 11 बजकर 5 मिनट पर लॉन्च किया जाएगा।
चीन ने की कड़ी आलोचना:-वहीं चीन की सरकारी मीडिया की तरफ से अमे‍रिका की इस योजना की कड़ी आलोचना की गई है। चीन के अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने कहा है कि इस योजना की वजह से एशिया में हथियारों की होड़ बढ़ जाएगी जो यहां पर अस्थिरता लाने में सहायक होगी। यहां पर ये ध्‍यान में रखना होगा कि अमेरिका ने बढ़ते खतरे को देखते हुए हाइपरसोनिक और क्रुज मिसाइल विकसित करने की जिस योजना पर काम करने का मन बनाया है उस पर रास्‍ते पर रूस काफी पहले से चल पड़ा है। इतना ही नहीं रूस ने हाल ही में अपनी सबसे ताकतवर सुपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण भी किया था। इसके जरिए वह दुनिया के किसी भी कोने को एक घंटे से भी कम समय में निशाना बना सकता है। इसमें भी सबसे बड़ी बात ये है कि रूस की इस मिसाइल का तोड़ अमेरिका समेत दुनिया के किसी देश के पास नहीं है। रूस के इस मिसाइल परीक्षण के बाद अमेरिका का डर साफतौर पर दिखाई दिया था। अमेरिका की मौजूदा मिसाइल डिफेंस रिपोर्ट ने इस डर को कहीं न कहीं सही साबित कर दिया है।
भारत से चीन के डर की वजह:-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि कहीं भी' और किसी भी समय दुश्मनों की मिसाइलों को न करने के उद्देश्य से देश की मिसाइल रक्षा प्रणाली की तैनाती को और सुदृढ़ तथा दीर्घकालिक किया जाएगा। उनके मुताबिक जमीन और समुद्र में तैनात की गईं मिसाइल अवरोध रक्षा प्रणाली को और मजबूत तथा लंबे समय तक तैनात रखने के लिए उन्नत तकनीक का सहारा लिया जाएगा। जहां तक भारत की बात है तो यह बात जगजाहिर है कि क्‍योंकि चीन पूरे एशिया में अपना दबदबा कायम रखना चाहता है और उसकी इस मुहिम में भारत के बढ़ते कदम सबसे बड़ी रुकावट बने हुए हैं। ऐसे में भारत को मिला अमेरिका का साथ उसके लिए भविष्‍य में परेशानी का सबब बन सकता है। यहां पर ये भी ध्‍यान में रखना जरूरी है कि चीन और अमेरिका के संबंध कई मुद्दों पर बेहद खराब हो चुके हैं। दक्षिण चीन सागर पर तो दोनों कई बार आमने सामने भी आ चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ चीन लगातार रणनीतिक क्षेत्र में इजाफा कर रहा है। इसके तहत पिछले एक वर्ष में उसने स्‍वदेशी और अत्‍याधुनिक तकनीक से लैस युद्धपोत, परमाणु पनडुब्‍बी, जेट तक को सफलतापूर्वक सेना में शामिल किया है। उसके बढ़ते कदम और अमेरिका से उसकी प्रतिद्वंदिता का ही परिणाम है कि वह एशिया से निकलकर अफ्रीका में जिबूती तक जा पहुंचा है।
थाड को लेकर भी चिंता:-जहां तक अमे‍रिका की नई योजना का सवाल है तो ग्‍लोबल टाइम्‍स का कहना है कि अमेरिकी मिसाइल प्रणाली थाड की कई जगहों पर मौजूदगी बारबार अमेरिका का एहसास करवाती रहती है। चीन और रूस इसकी जद में पूरी तरह से हैं। भले ही यह उत्तर कोरिया से बचाव के लिए दक्षिण कोरिया में लगाई गई हो लेकिन इसका निशाना कहीं न कहीं चीन और रूस भी हैं। अखबार का कहना है कि अमेरिका की नई योजना से सबसे बड़ा खतरा भी इन्‍हीं दो देशों को है। आपको बता दें कि पूर्व राष्‍ट्रपति रोनाल्‍ड रेगन के समय में जब स्‍टार वार की एंट्री हुई थी उस वक्‍त अमेरिका का पूरा ध्‍यान एंटी मिसाइल सिस्‍टम पर केंद्रित था। अब वह इसमें काफी आगे निकल चुका है।

वॉशिंगटन। विज्ञान के क्षेत्र में इंसान दिनों-दिन तरक्की कर रहा है। उसने अपनी तरह दिखने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से काम करने वाले रोबोट भी बना लिए हैं। हालांकि, स्टीफन हॉकिंग से लेकर स्पेस एक्स कंपनी के मालिक एलन मस्क तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट को मानवता पर सबसे बड़ा संकट बता चुके हैं। हॉलीवुड से बॉलीवुड तक बनने वाली कई फिल्मों में भी रोबोट को इंसानों के दुश्मन की तरह दिखाया जा रहा है। तो क्या वाकई हम उनसे डर गए हैं? इस सवाल का जवाब शायद हां है।हाल में रोबोट के साथ हुई मारपीट की घटनाएं इसी ओर इशारा करती हैं। फिलाडेल्फिया में एक ढ्ढह्यूमनॉइड रोबोट (मानव जैसे दिखने वाले) का सिर काट दिया गया था। अमेरिका के सिलिकन वैली में सुरक्षा के लिए तैनात किए गए दो रोबोट के साथ मारपीट की गई थी। सैन फ्रांसिस्को में भी इसी तरह की एक घटना हुई। यह केवल अमेरिका की बात नहीं है, बल्कि दुनियाभर में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। जापान के मॉल में तीन बच्चों ने रोबोट की खूब पिटाई की और मास्को में भी एक व्यक्ति ने रोबोट पर बेसबॉल बैट से हमला कर दिया था।आखिर क्या वजह है कि रोबोट खासकर मानव जैसे दिखने वालों के साथ इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं? क्या हमने उन्हें वाकई मानवता पर संकट मान लिया है या कोई अन्य कारण भी है। आइए डालते हैं इस पर एक नजर।रोबोट के साथ होने वाले बुरे व्यवहार के समर्थक हैं ज्यादातर लोग सोशल मीडिया पर रोबोट के साथ हुए उत्पीड़न के वीडियो काफी लोकप्रिय हैं। हास्य कलाकार अरस्तू जॉर्जसेन ने कहा, 'ज्यादातर लोग रोबोट को मारने-पीटने को जायज ठहराते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से वह कभी भी हम पर भारी नहीं पड़ेगे। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसके पक्ष में नहीं है। उन्हें डर है कि ऐसे वीडियो देखकर रोबोट उग्र हो सकते हैं।'
घुसपैठियों जैसा होता है व्यवहार;-रोबोट के विरोध के पीछे इंसानों में कई भावनाएं हो सकती हैं। न्यूरो वैज्ञानिक एग्निएस्का कहते हैं, 'रोबोट व इंसानों के बीच का गतिरोध बाहरी लोगों से लड़ाई जैसा है। इंसान अपने से अलग स्थान, जाति या सभ्यता के लोगों को बाहरी मानता है। बाहरी लोगों को अपनी संस्कृति पर खतरा समझकर उनके प्रति रोष भी रखने लगता है। रोबोट के संबंध में भी शायद ऐसा है।'
नौकरियों पर है खतरा:-मानवीय रोबोट के साथ स्वचालित उपकरणों पर भी इंसानों का गुस्सा फूट रहा है। अमेरिका के एरिजोना में कई जगहों पर स्वचालित गाड़ियों पर पत्थर फेंके गए। कई जगह स्वचालित कारों को जानबूझकर टक्कर मारने की भी घटना सामने आई है। इससे सिद्ध है कि हम रोबोट को केवल अपने अस्तित्व पर खतरा नहीं मान रहे हैं। मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार, लोगों को डर है कि रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण उनकी नौकरी छीन जाएगी।
रोबोट को समझ न पाने से होती है असुरक्षा:-वैज्ञानिकों का कहना है कि रोबोट हमारे जैसे ही लगते हैं। हमसे करीबी बढ़ाने के लिए कई बार इनके नाम रखे जाते हैं। सोफिया नाम की रोबोट इसका उदाहरण हैं। हालांकि, उन्हें पूरी तरह समझ न पाने के कारण व्यक्ति के मन में उनको लेकर असुरक्षा पैदा होती है।
दु‌र्व्यवहार को रोकना उतना मुश्किल नहीं:-न्यूरो वैज्ञानिक एग्निएस्का का कहना है कि स्कूलों में जब किसी रोबोट को बच्चों के समक्ष लाया जाता है तो वह रोबोट से बुरा बर्ताव ही करते हैं। यदि रोबोट को कोई नाम देकर उनके सामने लाया जाए तो बच्चे उनसे बेहतर व्यवहार करते हैं। इससे वह रोबोट के ज्यादा करीब भी हो पाते हैं। लेकिन सभी मामलों में यह उपाय कारगर नहीं है।

 

 

नई दिल्‍ली। क्‍या आपने आसमान में कभी उल्‍का पिंडों की बारिश होते हुए देखी है। यह हमेशा से ही आम आदमी से लेकर वैज्ञानिकों तक को अपनी तरफ आकर्षित करती रही है। आम आदमी की यदि बात करें तो खगौलिए घटनाओं में दिलचस्‍पी रखने वाले लोगों को इस दिन का बेसर्बी से इंतजार रहता है। कई बार तो जानकारी मिलने के बाद पूरी-पूरी रात ऐसे जुनूनी लोग अंतरिक्ष को निहारते गुजार देते हैं लेकिन ज्‍यादा कुछ हाथ नहीं लगता। लेकिन जरा सोचिए यदि इस तरह की खगौलिए घटनाएं आपके मनचाहे तरीके और आपके मनचाहे समय पर हों तो कैसा रहे। सुनकर भले ही ये अजीब लगे लेकिन यह अब सच होने वाला है। दरअसल, जापान इस योजना को आज हकीकत का जामा पहनाने वाला है।
एएलई ने उठाया जिम्‍मा:-दरअसल टोक्यो स्थित एक स्टार्टअप एस्‍‍‍‍‍‍ट्रो लाइव एक्‍सपीरियंस (एएलई) ने कृत्रिम तरीके से उल्का पिंड की बरसात कराने का जिम्मा उठाया है। एएलई दुनिया की पहली शूटिंग स्टार क्रिएशन तकनीक विकसित कर रहा है। इस दिशा में कामयाबी पाने से वह कुछ कदम ही दूर है। इसके तहत पहली माइक्रोसेटेलाइट 17 जनवरी को जापान एयरोस्पस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) के एप्सिलॉन-4 रॉकेट से लॉन्च की जाएगी। यह प्रोग्राम अंतरिक्ष में अपनी कार्यक्षमता प्रदर्शित करने के एक अवसर के रूप में बनाया गया है। अपनी योजना के तहत एएलई बाहरी अंतरिक्ष में दो माइक्रोसेटलाइट से शूटिंग स्टार कणों को रिलीज करके कृत्रिम ढंग से उल्का पिंड की बारिश करवाने की योजना बना रहा है। जापान की योजना के तहत अंतरिक्ष से पहली कृत्रिम बारिश अगले वर्ष 2020 में होगी। आपको बता दें कि यह पहल स्काई कैनवास प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह दुनिया का पहला आर्टिफिशियल शूटिंग स्टार प्रोजेक्ट है। इसकी घोषणा मार्च 2016 में की गई थी। आपको यहां पर ये भी बता दें कि जापान की यह तकनीक केवल मनोरंजन के लिए ही नहीं होगी बल्कि इस प्रोजेक्ट की कुछ वैज्ञानिक वजह भी हैं। सेटेलाइट से पृथ्वी के ऊपरी वातावरण से घनत्व, हवा की दिशा, संरचना से जुड़े अहम डाटा भी जुटाया जा सकेगा।
बेहद अहम सवाल;-हम सभी के लिए यह सवाल बेहद अहम है कि आखिर जापान इसको कैसे अंजाम तक पहुंचाएगा। दरअसल, माइक्रोसेटलाइट से एक सेंटीमीटर के आकार के कण रिलीज होंगे जो कि गैर विषैले पदार्थों से बनें हैं। पिछले कुछ सालों में एएलई ने एक सुरक्षित उल्का बरसात को सुनिश्चित करने के लिए तमाम मैटेरियल परीक्षण किए हैं। यह स्टार कण जब पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करेंगे, तो प्लाज्मा उत्सर्जन प्रक्रिया के जरिये यह जल उठेंगे। इसके बाद धरती पर उल्का पिंडों की बारिश शुरू हो जाएगी। धरती के वातावरण में आने वाले इन कणों की चमक इतनी होगी कि इंसान इन्हें आसानी से देख सकेगा। योजना के मुताबिक इसके लिए हिरोशिमा और सेटो आइलैंड सी के आसपास का क्षेत्र चुना गया है। 200 किलोमीटर तक के क्षेत्र में 60 लाख से अधिक लोग इस नजारे का दीदार कर सकेंगे। उल्‍का पिंडों की यह बरसात पूरी तरह से पूरी तरह से सुरक्षित हो इसके लिए भी टेस्‍ट किए गए हैं। आपको यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि जिस तरह से जापान अंतरिक्ष में इस योजना को अंजाम ने रहा है उसी तरह से चीन ने आर्टिफिशियल मून को तैयार किया है।

नई दिल्ली। मेक्सिको वॉल (Mexico Wall) को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) की जिद की वजह से अमेरिका (America) में काफी समय से शटडाउन चल रहा है। ऐसे में बुधवार को अचानक से एक खबर सामने आयी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्तीफा दे दिया है। इस खबर ने अमेरिका समेत दुनिया भर में राजनीतिक भूचाल मचा दिया था। आइये जानते हैं क्या है डोनाल्ड ट्रंप के इस्तीफे का पूरा मामला।बुधवार को अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट (Washington Post) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस्तीफे की खबर छपी थी। कुछ लोगों ने इस पेपर को विशेष रूप से राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस के आसपास और वॉशिंगटन के कुछ अन्य व्यस्त इलाकों में बांटा गया था। वाशिंगटन पोस्ट में छपि ये खबर कुछ देर में ही अमेरिका समेत पूरी दुनिया में फैल गई। खबर फैलते ही अमेरिका समेत विश्वभर में ट्रंप के विरोधी खेमे में खुशियां मनाई जाने लगीं।हालांकि, थोड़ी देर में ही स्पष्ट हो गया कि डोनाल्ड ट्रंप के इस्तीफे की खबर फर्जी है। इतना ही नहीं, ये खबर जिस वॉशिंगटन पोस्ट के संस्करण में छपी थी, वह भी फर्जी था। हालांकि, फर्जी समाचार पत्र छापने वालों ने इसकी कॉपी हूबहू असली समाचार पत्र से मिलती-जुलती तैयार की थी। इसमें अखबार का नाम और लोगो भी वैसा ही प्रयोग किया गया था।
ऐसे प्रकाशित की गई थी न्यूज:-इस फर्जी अखबार में छह कॉलम में बोल्ड अक्षरों में शीर्षक दिया गया था ‘UNPRESIDENTED Trump hastily departs White House, ending crisis’ (अप्रत्याशित : ट्रंप व्हाइट हाउस से विदा, संकट खत्म)। साथ में चार कॉलम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर भी लगाई गई थी। इस फोटो में ट्रंप सिर झुकाए नजर आ रहे थे। खास बात ये है कि समाचार पत्र में प्रकाशन की तिथि एक मई 2019 लिखी हुई थी।
एक महिला ने बांटे थे फर्जी समाचार पत्र:-न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार अमेरिका के पेनसिलवेनिया एवेंन्यू और व्हाइट हाउस के आसपास एक महिला फर्जी समाचार पत्र की प्रति लोगों को बांट रही थी। इसे साथ ही वह लोगों से कह रही थी कि ये वॉशिंगटन पोस्ट का विशेष संस्करण है। बाद में ये संस्करण कभी नहीं मिलेगा। महिला ये समाचार पत्र मुफ्त में बांट रही थी। उसके पास प्लास्टिक बैग में इस फर्जी समाचार पत्र का पूरा बंडल रखा था।
वाशिंगटन पोस्ट ने किया खंडन;-इस मामले में व्हाइट हाउस से कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फर्जी खबर पर वाशिंगटन पोस्ट ने भी इसका खंडन किया है। ट्वीट के जरिए वाशिंगटन पोस्ट ने स्पष्ट किया कि ये फर्जी खबर जिस समाचार पत्र में छपी है, वह नकली है। इस संस्करण से वाशिंगटन पोस्ट का कोई लेना-देना नहीं है। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार उनके नाम से फर्जी संस्करण प्रकाशित करने के मामले में जांच की जा रही है।
मेक्सिको वॉल को लेकर ये है विवाद:-मालूम हो कि मेक्सिको वॉल को लेकर अमेरिका में काफी दिनों से विवाद चल रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि मेक्सिको वॉल के लिए संसद फंड को मंजूरी दे। वहीं, डेमोक्रेट्स सांसद मेक्सिको वॉल का विरोध कर रहे हैं। अमेरिकी संसद के निचले सदन में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन अल्पमत में है। इसलिए उन्हें मेक्सिको वॉल पर बहुमत नहीं मिल रहा है। इसे लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने शटडाउन की घोषणा की है। इससे पूरे अमेरिका में कामकाज लगभग बंद है।
ट्रंप के प्रति गुस्से की ये है वजह:-बताया जा रहा है कि यूएस शटडाउन की वजह से अमेरिका में करीब आठ लाख कर्मचारी छुट्टी पर चले गए हैं। जो काम कर रहे हैं, उन्हें भी तनख्वाह नहीं मिल रही है। यूएस का संकट यहीं खत्म होने वाला नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर संसद ने मेक्सिको वॉल के लिए फंड जारी नहीं किया तो वह आपातकाल लागू करेंगे। इस वजह से ट्रंप का अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में विरोध हो रहा है। इससे पहले भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार अपने कई फैसलों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। इसलिए उनके इस्तीफे की फर्जी खबर ने कुछ देर के लिए अमेरिका समेत दुनिया भर में उनके विरोधियों को खुश होने का मौका दे दिया था।

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्‍ट्रपति बनने के बाद ही डोनाल्‍ड ट्रंप पर रूस से सांठगांठ करने का आरोप लगता रहा है। दोनों नेताओं की अकेले में हुई पिछली पांच मुलाकातों के यह शक और गहरा गया है। एक बार फ‍िर रूसी राष्‍ट्रपति ब्‍लादिमीर पुतिन के साथ ट्रंप के संबंधों को लेकर सवालों के घेरे में हैं। भले ही इन दोनों नेताओं की मुलाकात पर अमेरिका में सियासत गरमा गई है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति…
वॉशिंगटन।H-1B Visa Holder Indians, अगर आप भी एच-1बी वीजा (H-1B Visa) के जरिए अमेरिका (America) में नौकरी करने के बारे में सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। क्या पता आपको बाद में पछताना पड़े। एक रिपोर्ट के मुताबिक, एच-1बी वीजाधारकों (H-1B Visa Holders) को अक्सर खराब स्थितियों में काम कराया जाता है और इन लोगों के साथ शोषण की आशंका बनी रहती है। साउथ एशिया सेंटर ऑफ द अटलांटिक…
वाशिंगटन। चीन की 'वन बेल्‍ट वन रोड' परियोजना की आंच अमेरिका तक पहुंच गई है। पेंटागन ने ड्रैगन के बढ़ते प्रभाव पर एक रिपोर्ट जारी की है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की इस रिपोर्ट ( Pentagon Report) में चीन की बढ़ती सैन्‍य ताकत और सामरिक महत्‍व वाले स्‍थानों पर प्रभुत्‍व जमाने की कोशिश से चिंता जाहिर की गई है। चीन की इस परियोजना पर भारत शुरू से अपनी आपत्ति जताया है।…
बीजिंग। होमवर्क पूरा न करने पर स्‍कूल में बच्‍चों को सजा के तौर पर मुर्गा बनाए जाने या फिर हाथ ऊपर करके खड़े करने के बारे में आपने जरूर सुना होगा। लेकिन सोचिए कि यदि आप ऑफिस में दिया गया टारगेट पूरा न कर पाएं और इसके लिए आपको सजा के दौरान पर ऐसी कोई सजा दी जाए! चीन में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है, जहां टारगेट पूरा…
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