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नई दिल्‍ली। जम्‍मू कश्‍मीर पर शोर मचा रहे पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को उनके ही लोग बुरा-भला कहने से पीछे नहीं हट रहे हैं। इसकी वजह कुछ ये भी है कि उनका यूं शोर मचाना पूरी दुनिया को न तो रास आ रहा है और न ही यह मुहिम किसी भी स्‍तर पर सफल हुई है। इसके चलते भी पाकिस्‍तान के राजनेता ही नहीं बल्कि आम आदमी भी उनसे खासा नाराज हैं। यहां पर इमरान की वो मुहिम भी विफल हो गई है जिसके तहत वह देश के मुश्किल हालातों पर जम्‍मू कश्‍मीर के मुद्दे को उठाकर इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे थे। बहरहाल, हम आपको बता दें कि इस बार इमरान खान को जिसने कटघरे में खड़ा किया है वह पूर्व राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी की बेटी हैं, जिनका नाम है- आसीफा। बीबीसी उर्दू को दिए इंटरव्‍यू में उन्‍होंने पाकिस्‍तान की खराब होती हालत के लिए इमरान खान को कटघरे में खड़ा किया है। इमरान खान सरकार के एक साल पूरा होने के बाद आसिफा का यह पहला इंटरव्‍यू है।
मुशर्रफ और इमरान सरकार मेंकोई फर्क नहीं;-उनका कहना है कि इमरान खान और पूर्व तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ की सरकार में कोई फर्क नहीं है। दोनों ही सरकारों के कार्यकाल में देश का बुरा ही हुआ है। इन दोनों के ही राज में लोगों की जबरदस्‍त महंगाई से कमर टूटी है। आसिफा का कहना है कि इमरान खान के हाथ में इस एक साल में सफलता से ज्‍यादा निराशा हाथ लगी है। वह हर मोर्चे पर विफल रहे हैं। इतना ही नहीं उनके इस एक साल के दौरान लोगों के खुलकर विचार व्‍यक्‍त करने पर भी पाबंदी लगा दी गई। ऐसा कर इमरान खान ने बोलने की आजादी के हक को भी लोगों से छीन लिया है
चरमराई पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था;-आसिफा के मुताबिक पीएम बनने से पहले इमरान खान ने कई चुनावी वायदे किए थे, जिन्‍हें वह पूरा करने में पूरी तरफ से विफल रहे। उन्‍होंने देश की जनता से वादा किया था कि सरकार बनने के बाद वह दस लाख लोगों को रोजगार उपलब्‍ध करवाएंगे। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। दस लाख तो दूर किसी एक इंसान को भी वह रोजगार नहीं दिला सके। इतना ही नहीं उनके इस पहले एक साल के दौरान देश की अर्थव्‍यवस्‍था बुरी तरह से चरमरा गई है।
चुनावी वायदों पर झूठे इमरान:-इमरान के चुनावी वायदों में बेघरों को पचास लाख घर उपलब्‍ध कराना था, लेकिन वह किसी को भी घर नहीं दे सके। इसके उलट उन्‍होंने लाखों लोगों के घरों को उजाड़ने का काम किया है। आसिफ ने इमरान खान पर तंज भी कसा। उन्‍होंने कहा कि इमरान खान पीएम बनने से पहले चिल्‍ला-चिल्‍ला कर कहते थे कि यदि उन्‍हें किसी देश के आगे भीख मांगनी पड़ी तो वह आत्‍महत्‍या कर लेंगे। लेकिन पीएम बनने के बाद देश की खराब होती अर्थव्‍यवस्‍था के लिए वह कई देशों में गए और वहां से अपने लिए भीख मांगने में जरा नहीं हिचकिचाए। ऐसा कर उन्‍होंने पूरी दुनिया में पाकिस्‍तान का मजाक बनाकर रख दिया।
महंगाई के सवाल पर क्‍या बोली आसिफा;-महंगाई पर बात करते हुए आसिफा ने कहा कि यदि आम आदमी से बात की जाए तो वह बताएगा कि महंगाई पिछले एक दशक में सबसे ऊंचे स्‍तर पर आ गई है। बेरोजगारी इस वक्‍त चरम पर है। बिजली की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेड की कीमतों में भी जबरदस्‍त इजाफा हुआ है। इतना ही नहीं गैस की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसका असर हर वर्ग के लोगों पर पड़ा है। आलम ये है कि आज पाकिस्‍तान में जीना ही नहीं मरना भी महंगा हो गया है। वहीं इमरान खान हैं जो लगातार अपने ही बयानों पर यू-टर्न लिए जा रहे हैं। आसिफा का कहना है कि पाकिस्‍तान पहले इतना कमजोर मुल्‍क कभी नहीं था जितना इमरान खान की सरकार के आने के बाद हो गया है। वहीं, यदि इमरान खान और जरदारी की सरकार में तुलना की जाए तो पता चल जाएगा कि जरदारी सरकार में पाकिस्‍तान की कितनी बेहतर स्थिति थी।
इमरान ने पाकिस्‍तान को किया बर्बाद:-पीपीपी की सरकार के दौरान ऐसा नहीं था कि वह मुश्किल हालात से नहीं गुजरे थे। उस वक्‍त पूरी दुनिया में मंदी का दौर था और उस दौरान पाकिस्‍तान को दो बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा था। पीपीपी सरकार ने साठ लाख लोगों को रोजगार दिलाया। देश के बाहर रह रहे पाकिस्‍तान के लोगों ने भी दिल खोल कर सरकार की मुश्किल हालातों में मदद की। लेकिन, आज कोई हमारी तरफ देखता तक नहीं है। इमरान खान की सरकार के दौरान हमारा सबसे करीबी दोस्‍त चीन भी हमसे अलग खड़ा है, जबकि, पीपीपी सरकार ने चीन की सरकार से बेहतर संबंध स्‍थापित किए थे। सीपैक दोनों देशों की दोस्‍ती का ही नतीजा है। इसकी वजह से पाकिस्‍तान में लाखों को रोजगार मिला और क्षेत्र का विकास भी हुआ। इमरान खान की सरकार ने उन चीजों को भी तबाह कर दिया जो पूर्व की सरकार से उन्‍हें मिली थीं। राजनीति में एंट्री के सवाल पर आसिफा ने कहा कि उनके परिवार ने देश के लिए बहुत कुर्बानी दी है। हालांकि इस सवाल के जवाब में उन्‍होंने सीधेतौर पर यह नहीं बताया कि वह राजनीति में आएंगी या नहीं।

दुबई। इरान के विदेश मंत्री मोहम्‍मद जवाद जरीफ ने गुरुवार को अमेरिकी ट्रेजरी की तुलना जेल वार्डेन से की। उन्होंने इस बात का जिक्र अपने ट्वीट में किया। उन्‍होंने कहा कि दुस्‍साहस करने पर अमेरिका की ओर से दंडित किया जाता है। बता दें कि इरानी तेल की तस्‍करी को रोकने के लिए वाशिंगटन ने नए प्रतिबंध लगाए जिसके बाद इरान की ओर से यह प्रतिक्रिया दी गई है।अमेरिका ने बुधवार को एक जहाज नेटवर्क ‘ऑयल फॉर टेरर’, जहाजों के साथ उन सभी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया जिसे कथित तौर पर इरान के इस्‍लामिक रिवॉल्‍यूशनरी गार्ड कॉर्प्‍स (IRGC) की ओर से संचालित किया जाता है।अमेरिकी ट्रेजरी ने अपनी वेबसाइट पर जारी किए गए एक बयान में बताया है कि इरान स्पेस एजेंसी, इरान स्पेस रिसर्च सेंटर एंड द एस्ट्रोनॉटिक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट पर प्रतिबंध लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि इस जहाज नेटवर्क ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को फायदा पहुंचाने के लिए लाखों बैरल तेल बेचा है। इस नेटवर्क का संचालन ईरान रिवॉल्यूशनरी गार्ड कर रहा था।उल्‍लेखनीय है कि इरान की ओर से अमेरिका को चेतावनी दी गई थी कि यदि वाशिंगटन की ओर से तेहरान पर दबाव कम नहीं होता है तो परमाणु समझौते के तहत की गई अपनी प्रतिबद्धताओं में इरान कटौती कर सकता है। इसके बाद ही अमेरिका ने 16 कंपनियों, 10 लोगों और 11 जहाजों पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया। जिन संस्थाओं को नए प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है, उनमें अमेरिका के सहयोगी भारत में स्थित मेहदी समूह और इसके निदेशक अली जहीर मेहदी शामिल हैं।विदेश मंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘अमेरिकी ट्रेजरी (OFAC) जेल वार्डेन से अधिक कुछ नहीं है, माफी के लिए कहेंगे तो आपके इस दुस्‍साहस के लिए एकांत में रखा जाएगा और अगर दोबारा पूछने की हिम्‍मत की तब तो सूली पर चढ़ने से कोई नहीं बचा सकता।’पिछले साल से इरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। जब राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इरान परमाणु समझौते से अपने देश के अलग होने की घोषणा की थी। इसके बाद अमेरिका ने इरान पर कई प्रतिबंध लगा दिए।

नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान ने लाइन ऑफ कंट्रोल (Line of Control) पर एक और ब्रिगेड की तैनाती की है। इसके साथ ही भारत-पाकिस्‍तान के बीच तनाव और बढ़ गया है। गुलाम कश्‍मीर (PoK) के पुंछ इलाके के समीप कोटली सेक्‍टर में पाकिस्‍तानी फौज की एक और टुकड़ी की तैनाती से सीमा पर हलचल उत्‍पन्‍न हो गई है। इस ब्रिगेड में करीब दो हजार से अधिक सैनिक हैं। पाकिस्‍तान का यह ना-पाक कदम भारतीय क्षेत्र में आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश हो सकती है।
जैश व लश्‍कर के आतंकियों को घुसाने की कोशिश:-आशंका प्रकट की जा रही है कि पाकिस्‍तानी सेना जैश ए मुहम्‍मद और लश्‍कर ए तैयबा Lashkar-e-Toiba (LeT) and Jaish-e-Mohammed (JeM) के आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसाने की कोशिश कर सकती है। इसके पूर्व पाकिस्‍तान ने सरक्रीक और एलओसी के करीब स्‍पेशल फोर्स की तैनाती की थी। पाकिस्‍तान भारत के खिलाफ घुसपैठ और युद्धविराम तोड़ने के लिए इन सैनिकों का इस्‍तेमाल कर सकता है।
एलओसी पर भारतीय सेना हुई अलर्ट:-उधर, पाकिस्‍तानी सेना की इस हलचल से भारतीय सेना अलर्ट हो गई है। वह एलओसी पर हो रही हलचल पर पूरी नजर बनाए हुए है। बता दें कि हाल के दिनों में लश्‍कर और जैश के आतंकी पाकिस्‍तान की फॉरवर्ड पोस्‍ट की ओर से आकर भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश में लगे हैं। भारतीय सेना की मुस्‍तैदी से पाकिस्‍तान अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सका है।
अनुच्‍छेद 370 से बौखलाया पाक:-बता दें कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्‍तान सरकार पूरी तरह से बौखला गई है। पूरी दुनिया में राजनयिक पराजय से हताश निराश हाेने के बाद पाकिस्‍तान, भारत को कभी परमाणु हमले का भय दिखा रहा है तो कभी कश्‍मीर में इस्‍लाम या मुस्लिमों की आजादी की दुहाई दे रहा है। अब यह उसका नया पैंतरा है।

मियामी। तुफान डोरियन ( Hurricane Dorian) से प्रभावित लोगों की मदद में संयुक्‍त राष्‍ट्र भी आगे आया है। संयुक्‍त राष्‍ट्र ( United Nations) ने पीडि़त लोगों के लिए एक मिलियन अमेरिकी डालर की सहायता राशि देने करने का ऐलान किया है। संयुक्‍त राष्‍ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा डोरियन जिस तरह से आगे बढ़ रहा है, यह चिंता का विषय है। डोरियन की वजह से बहामास में अबतक 20 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
गुटेरेस ने जान गंवाने वाले से व्‍यक्‍त की संवेदना;-गुटेरेस ने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।उन्‍होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सरकार के नेतृत्व वाले बचाव और राहत प्रयासों का समर्थन करता है। उधर, संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख मार्क लोवॉक ने सरकारी नेताओं से मिलने और जीवन रक्षक सहायता अभियान को तेज करने के लिए बुधवार को द्वीप राष्ट्र की यात्रा की।
बहामास में डोरियन तूफान ने भयंकर तबाही;-पिछले कई दिनों में बहामास में डोरियन तूफान ने भयंकर तबाही मचाई है। वहां इस तूफान से मरने वालो की तादाद अब 20 तक पहुंच गई है। बहामास में भीषण तबाही के बाद अब ये तूफान अमेरिकी की ओर रुख करने वाला है। यूएस नेशनल हरिकेन सेंटर(NHC) ने इसको लेकर अलर्ट जारी किया है।यूएस नेशनल हरिकेन सेंटर (एनएचसी) के अनुसार डोरियन तूफान अभी जॉर्जिया से लगभग 100 किमी दक्षिण-पूर्व में सवाना के पास 11 किमी / घंटा की रफ्तार से उत्तर की ओर बढ़ रहा है। यूएस नेशनल हरिकेन सेंटर ने चेतावनी दी कि अगले कुछ दिनों में अमेरिका के दक्षिण-पूर्व और मध्य-अटलांटिक तटों के एक बड़े हिस्से के साथ महत्वपूर्ण तटीय इलाको में पहुंच जाएगा।

 

लंदन। ब्रिटेन में ब्रेक्जिट प्रक्रिया फिर से खटाई में पड़ती लग रही है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि 31 अक्टूबर को ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलगाव की प्रस्तावित योजना में खलल पड़ता है तो वह 15 अक्टूबर को मध्यावधि चुनाव करवा सकते हैं। प्रधानमंत्री की बिना शर्त ब्रेक्जिट की योजना के विरोध में एकजुट विपक्ष को सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी के 21 सांसदों का समर्थन मिलने से सरकार बहुमत खो बैठी है। विपक्ष बिना शर्त ब्रेक्जिट रोकने के लिए संसद में प्रस्ताव लाया है।मंगलवार को ही साफ हो गया था कि संसद में जॉनसन सरकार बहुमत खो बैठी है और अब बिना शर्त यूरोपीय यूनियन से अलग हो पाना आसान नहीं रह गया है। ..और सशर्त अलगाव के लिए यूरोपीय यूनियन से वार्ता प्रक्रिया की जरूरत पड़ेगी और संसद की स्वीकृति भी लेनी होगी। इसमें और ज्यादा समय लग सकता है। ब्रेक्जिट के लिए निर्धारित तिथि 31 अक्टूबर से महज 57 दिन पहले विपक्ष के इस कदम से प्रधानमंत्री जॉनसन को अब अपना रास्ता मुश्किल नजर आ रहा है।इसीलिए उन्होंने अब 15 अक्टूबर को मध्यावधि चुनाव कराने और अलगाव प्रक्रिया को 31 जनवरी को पूरा करने की बात कही है। माना जा रहा है कि चुनाव की बात कहकर जॉनसन ने अपनी पार्टी के उन 21 सांसदों पर दबाव बनाने की कोशिश की है जो विपक्षी लेबर पार्टी के साथ चले गए हैं। पार्टी ऐसे सांसदों का भविष्य के चुनाव में टिकट काटने की चेतावनी पहले ही दे चुकी है।जॉनसन ने कहा, अलगाव की प्रक्रिया पर उनकी रणनीति यूरोपीय यूनियन की 17 अक्टूबर को होने वाली समिट में मुहर लगवाने की है। आयरलैंड सीमा से आवागमन को लेकर जो गतिरोध बना हुआ था, उसे भी बातचीत के जरिये काफी हद तक सुलझा लिया गया है।प्रधानमंत्री ने यह कहकर अपनी पार्टी के विद्रोहियों को समझाने की कोशिश की है कि वे वापस आ जाएं और सरकार की ब्रेक्जिट प्रक्रिया को पूरा होने दें। इससे पहले प्रमुख विपक्षी नेता कीर स्टार्मर ने कहा, हम जॉनसन की धुन पर नाचने नहीं जा रहे। हम ब्रिटेन के भविष्य को गिरवी नहीं रख सकते। बिना शर्त ब्रेक्जिट राष्ट्र विरोधी है।

हांगकांग। हांगकांग में चीन की प्रतिनिधि कैरी लैम ने बुधवार को विवादित प्रत्यर्पण विधेयक वापस लेने का औपचारिक एलान कर दिया। यही वह विधेयक है जिसके विरोध में तीन महीने पहले हांगकांग में आंदोलन शुरू हुआ था, जो बाद में लोकतंत्र की मांग वाले आंदोलन में तब्दील हो गया।इस विधेयक में प्रावधान था कि हांगकांग में दर्ज मुकदमे के लिए आरोपित को चीन ले जाकर वहां की कोर्ट में सुनवाई की जा सकती थी। हांगकांग के बड़े वर्ग ने माना कि यह उनकी लोकतांत्रिक मांगों को दबाने के चीन के षडयंत्र का हिस्सा है। पूर्व में प्रत्यर्पण विधेयक को चीन समर्थित सरकार ने स्थगित करने की घोषणा की थी लेकिन आंदोलन थमता न देख ताजा घोषणा की गई है।लैम ने कहा, लगातार हो रही हिंसा से हमारी समाजिक बुनियादों को नुकसान हो रहा है, खासतौर पर कानूनी सत्ता को। लैम ने आंदोलनकारियों की पांच प्रमुख मांगों में शामिल इस मांग को मान लिया है लेकिन बाकी की चार मांगों के बारे में कुछ नहीं कहा। इन्हीं मांगों में एक लोकतांत्रिक अधिकार की मांग है। इन्हीं मांगों को लेकर छिड़े आंदोलन ने 70 लाख आबादी वाले हांगकांग को अस्त व्यस्त कर रखा है। आंदोलन में शामिल एक हजार से ज्यादा लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। हांगकांग चीन का अर्ध स्वायत्त क्षेत्र है, जो सन 1997 में उसे ब्रिटेन से प्राप्त हुआ है।
कैथी पैसीफिक के चेयरमैन रिटायर;-हांगकांग के आंदोलन में शामिल होने के आरोपों से घिरी कैथी पैसीफिक एयरलाइन के चेयरमैन जॉन स्लॉसर ने बुधवार को समय पूर्व अवकाश ग्रहण कर लिया। एयरलाइन पर हांगकांग के आंदोलन में शामिल अपने कर्मचारियों पर कार्रवाई का चीन सरकार का दबाव है। माना जा रहा है कि एयरलाइन के 27,000 कर्मचारी हांगकांग के आंदोलन में शामिल हैं या उसके प्रति समर्थन का भाव रखते हैं।

काबुल। आतंकी संगठन तालिबान और अमेरिका के बीच होने वाले शांति समझौते के मसौदे से अफगानिस्तान सरकार चिंतित है। राष्ट्रपति अशरफ गनी के मुख्य प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार को इस समझौते पर स्पष्टीकरण चाहिए। इसी हफ्ते अमेरिका के विशेष दूत जालमे खलीलजाद ने गनी को समझौते के मसौदे की जानकारी दी थी।गनी के प्रवक्ता सादिक सिद्दीकी ने ट्वीट किया, 'सरकार समझौते पर चिंतित है। हमें इस पर पूर्ण…
माले। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने कट्टरपंथी इस्लाम को भारतीय महासागर क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा है कि अलकायदा और आईएसआईएस मालदीव पर धीरे-धीरे कब्जा कर रहे हैं। यहां तक की सुरक्षा संस्थानों में उच्च पद तक पहुंचने में कामयाब हो गए हैं।हिंद महासागर सम्मेलन (आईओसी) में बोलते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, 'अल कायदा और ISIS मालदीव के भीतर धीरे-धीरे पांव पसार रहे…
वाशिंगटन। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद भारत को लगातार युद्ध की धमकी, परमाणु हमले की गीदड़ भभकी और घर-घर में बंदूक होने का दावा करने वाला पाकिस्तान पूरी दुनिया में बेनकाब हो चुका है। हाल ही में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए FATF (Financial Action Task Force) की सहयोगी संस्था APG (Asia-Pacific Group) ने पाकिस्तान को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया था। अब अमेरिका के…
व्लादिवोस्तोक।दो दिवसीय दौरे पर रूस पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को रूसी राष्‍ट्रपति ब्‍लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत के बाद संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारत और रूस दोनों ही अपने आंतरिक मामलों में किसी 'बाहरी देश की दखलंदाजी' के खिलाफ हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान ऐसे वक्‍त में सामने आया है जब अनुच्‍छेद-370 को हटाए जाने से पाकिस्‍तानी हुक्‍मरानों की बौखलाहट आए…
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