दुनिया

दुनिया (1895)

जेरूसलम। कोरोना महामारी के कारण इस बार दुनिया के 1.8 अरब मुसलमानों के लिए ईद के पर्व फीका रहेगा। अन्‍य वर्षों की तरह इस बार ईद के पूर्व लोगों के बीच खरीदारी का उत्‍सव नहीं दिखेगा। दुनिया भर के मुस्लिम ईद के दौरान अपने घरों में ही कैद रहेंगे। दुनिया के कुछ इस्‍लामिक देश जिनमें तुर्की, इराक और जॉर्डन ने ऐलान किया है कि वह छुट्टी के दौरान समय-समय पर कर्फ्यू लगाएंगे। सऊदी अरब में मक्का और मदीना के पवित्र शहर में लोगों को केवल भोजन और दवा खरीदने के लिए अपने घरों को छोड़ने की अनुमति होगी।
इंडोनेशिया पर लगाया प्रतिबंध;-सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने अवकाश के माध्‍यम से प्रतिबंधों को लागू किया है। राष्ट्रपति जोको विडोडो ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि शारीरिक दूरी की नीति में कोई ढील नहीं दी जाएगी। बता दें कि 20 करोड़ 70 लाख आबादी वाले इस मुल्‍क में कोरोना वायरस से 12,000 मौतें हो चुकी हैं। उधर, स्‍वास्‍थ्‍यविशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शारीरिक नियमों के ढील से देश में कोरोना वायरस का प्रसार दोबारा हो सकता है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में एक सिविल सेवक नूर हिदायत असरी ने कहा कि इस महामारी ने हमारी परंपराओं को बदल दिया है। हमें ईद मनाने से वंचित कर दिया है। हम इस समय एक निर्दयी और अदृश्य शत्रु से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।
मलेशिया में प्रतिबंधों के साथ छूट:-मलेशिया ने ईद के दिन नागरिकों को थोड़ी ढील प्रदान की है। सरकार ने कहा कि ईद के दिन लोग अपने निकट रिश्‍तेदारों से मिल सकेंगे। कुछ मस्जिदों को शर्त के साथ खोलने की इजाजत दी गई है। इन मस्जिदों में 30 से अधिक लोग एकत्र नहीं हो सकते। इसके साथ कुछ प्रतिबंधों को भी साझा किया गया है। किसी भी सार्वजनिक सम्‍मेलन में 20 लोगों की ही मौजूदगी को सुनिश्चित किया गया है। सरकार ने ईद के दिन गले लगने, चुंबन लेने और खाले की प्‍लेट साझा करने पर रोक लगा दी है। आगंतुकों को मास्‍क पहनने को अनिवार्य किया गया है।
ईरान में मस्जिदों में सामूहिक नमाज अदा करने पर रोक:-ईरान सरकार ने ईद के दौरान सामुहिक नमाज अदा करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। ईरान के प्रमुख नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व में तेहरान में मस्जिदों में सामूहिक नमाज अदा करने पर रोक के साथ छुट्टियों के दौरान कुछ अन्‍य प्रतिबंध लगाए हैं। बता दें कि ईरान ने कोरोना वायरस के प्रसार के बावजूद राष्‍ट्रव्‍यापी लॉकडाउन लगाने में संकोच किया था। उसकी इस नीति पर दुनिया भर में उसकी काफी निंदा भी हुई थी। इस पर ईरान का तर्क थी अमेरिका प्रतिबंधों का सामना करने के लिए लॉकडाउन से अर्थव्‍यवस्‍था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बता दें कि इरान में कोरोना वायरस से 130,000 लोग संक्रमित है। इसके साथ कोरोना से मौत का आंकड़ा 7,000 के पार कर गया है। राहत की बात यह है कि हाल के दिनों में ईरान में कोरोना के मरीजों में गिरावट दर्ज की गई है।
इराक में ईद की छुट्टियों में 24 घंटे का कर्फ्यू;-इराक में कोरोना महामारी के बीच सरकार ने राष्‍ट्रव्‍यापाी लॉकडाउन में ढील देते हुए अधिकांश व्‍यवसायों खोलने की अनुमति दी है। हालांकि, इराक सरकार ने कोरोना प्रसार को रोकने के लिए ईद की छुट्टी के दौरान 24 घंटे के कर्फ्यू को बहाल करने का ऐलान किया है।
इजरायल में अधिकांश प्रतिबंध हटे:-इजरायल के यरूशलेम में ईद के मद्देनजर अधिकांश प्रतिबंध हटा दिए गए हैं, लेकिन इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल अल-अक्सा मस्जिद परिसर बंद रहेगा। उधर, ओल्ड सिटी छह सप्ताह के लॉकडाउन के प्रभावों से उबर रहा है। यहां दुकानदारों के साथ पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को छूट दी गई है।
मिस्र में अधिकारियों ने रात के कर्फ्यू को बढ़ाया;-ईद के मद्देनजर मिस्र में अधिकारियों ने रात के कर्फ्यू को बढ़ा दिया है। कर्फ्यू को 9 बजे रात के बजाए शाम 5 बजे से शुरू होगा। यह व्‍यवस्‍था 29 मई तक लागू रहेगी। देश के सार्वजनिक स्‍थ्‍लों को जैसे शॉपिंग सेंटर, मॉल, समुद्र तट और पार्क को बंद रखा जाएगा।

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान में बढ़ते कोरोना के मामलों और इससे लड़ने के लिए पीएम इमरान खान लगातार देश में रहने वाले और विदेशों में रह रहे अपने नागरिकों से ज्‍यादा दा से ज्‍यादा पीएम केयर रिलीफ फंड में पैसा देने की अपील कर रहे हैं। लेकिन अफसोस की बात ये है कि जिसके लिए ये फंड इकट्ठा किया जा रहा है इसका इस्‍तेमाल उसके लिए न होकर सरकार इसका इस्‍तेमाल अपना कर्ज उतारने के लिए कर रही है। पाकिस्‍तान के अखबार एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून के डिजिटल एडिशन की एक खबर के मुताबिक कोरोना वायरस से लड़ने के लिए बने पीएम कोरोना रिलीफ फंड में जमा रकम में से दस अरब रुपये का इस्‍तेमाला देश के ऊर्जा क्षेत्र पर चढ़े कर्ज के ब्याज को चुकाने के लिए किया जाएगा।इस अखबार की एक खबर के मुताबिक 13 मई तक इस रिलीफ फंड में 3.5 बिलियन की धनराशि जमा हो चुकी है। रेडियो पाकिस्‍तान के हवाले से इस खबर में कहा गया है कि इसमें हर क्षेत्र के लोगों ने योगदान दिया है। इसमें उम्‍मीद जताई गई थी कि पीएम इमरान खान जल्‍द ही इसका बंटवारा कोरोना वायरस से शुरू की गई जंग के लिए करेंगे। लेकिन हुआ कुछ और ही। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कैबिनेट की आर्थिक समन्वय समिति की बैठक में यह फैसला किया गया है इसमें से कुछ रकम कर्ज की ब्‍याज की राशि चुकाने के लिए इस्‍तेमाल की जाए। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के वित्तीय मामलों के सलाहकार अब्दुल हफीज शेख ने की थी।बैठक के बाद वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, समिति ने प्रधानमंत्री कोरोना रिलीफ फंड से पाकिस्तान सरकार की गारंटीशुदा 200 अरब रुपए की सिक्योरिटी 'पाकिस्तान एनर्जी 'सुकूक-2' के कर्ज की ब्याज की अदायगी लिए तात्कालिक रूप से 10 अरब रुपए देने का फैसला किया। यह अस्थायी व्यवस्था छह महीने के लिए होगी। अगर इस बीच, ऊर्जा नियामक प्राधिकरण कानून में बदलाव हो गया, तो इस ब्याज का बोझ उपभोक्ता पर जा सकता है, अन्यथा यह अदायगी कोरोना रिलीफ फंड से होगी। अफसोस की बात ये है कि इमरान खान ने कोरोना के नाम पर अपने हाथ खाली दिखाते हुए लोगों से जो अपील की थी अब वही लोग इस फैसले से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।गौरतलब है कि पीएम लगातार इस बात का जिक्र कर रहे थे कि देश की आर्थिक हालत बेहद खराब है। इसी वजह से उन्‍होंने लॉकडाउन नहीं किया था। उन्‍होंने कई मर्तबा देशवासियों से फंड में अधिक से अधिक धन देने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि लोग इस फंड में जो एक रुपया डालेंगे, सरकार उसके बदले में इसमें चार रुपए अपनी तरफ से डालेगी। लेकिन अब जबकि ये साफ हो गया है कि इस फंड का इस्‍तेमाल ऐसी जगहों पर हो सकता है जिसको कोरोना से शुरू हुई लड़ाई से कोई लेना देना ही नहीं है तो पाकिस्‍तान की जनता ऊपर वाले के भरोसे अधिक लग रही है।

प्योंगयोंग। नार्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के बारे में तरह-तरह की खबरें सामने आती रहती हैं मगर अब जो एक खबर सामने आ रही है उसमें काफी हद तक दम दिख रहा है। कहा जा रहा है कि किम जोंग उन का स्वास्थ्य ठीक नहीं है इस वजह से वो अपने इलाज पर ध्यान दे रहे हैं। इन्हीं वजहों से वो बीते दो माह से आम लोगों से दूरी बनाए हुए हैं।अप्रैल में सालगिरह के मौके पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में उनके शामिल न होने पर भी तमाम तरह की अफवाहों को बल मिला था, अप्रैल माह में वो तीन सप्ताह तक गायब थे। उसके बाद उनके मरने तक की अटकलें लगाई जाने लगी मगर एक मई को एक फैक्ट्री के उद्घाटन समारोह में शामिल होकर किम ने सारी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया था। उस कार्यक्रम के बाद से अब तक दुबारा से किम को किसी कार्यक्रम में नहीं देखा गया है ना ही उन्होंने सामने आकर जनता के लिए कोई संदेश जारी किया है। जबकि कोरोना वायरस से पूरी दुनिया के लोग परेशान है, लाखों लोगों की मौत हो चुकी है। अब एक बार फिर उनके स्वास्थ्य को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो रहा है। इसके पीछे वजहें भी बताई जा रही हैं जो काफी हद तक सही प्रतीत होती हैं।कोरिया के एक विशेषज्ञ का दावा है कि किम जोंग के साथ स्वास्थ्य एक बड़ा मुद्दा है वो इसे दिखाना नहीं चाहते हैं मगर कई तरह की चीजों को देखने के बाद अब ये स्पष्ट हो रहा है क्योंकि चीजें उससे जुड़ रही हैं।कोरिया विश्वविद्यालय में उत्तर कोरियाई अध्ययन के एक प्रोफेसर नाम सेओंग-वूक ने इस महीने की शुरुआत में रॉयटर्स को बताया था कि अब किम जोंग उन के लिए जिन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है वहां पर कुर्सी और डेस्क की व्यवस्था जरूर की जा रही है। ये भी देखने में आया है कि किम बहुत देर तक खड़े नहीं रह पाते हैं वो बहुत अधिक दूरी तक चल भी नहीं पाते हैं। इस तरह की खबरें एक्सप्रेस नामक वेबसाइट में कैरी भी की गई हैं।

वॉशिंगटन। जानलेवा कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 50 लाख के पार पहुंच गई है, जबकि 3 लाख 28 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। दुनिया में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में अमेरिका सबसे उपर है। यहां अब तक 15 लाख 51 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं, जबकि 93 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, भारत में भी कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। देश में तीन दिन के अंदर 16 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं।दुनिया में कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित देशों की सूची में दूसरे नंबर पर रूस ह। वहां अबतक 3 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं, जबकि मरने वालों का आंकड़ा करीब 3 हजार है। तीसरे नंबर पर कोविड-19 का नया हॉटस्पॉट बना ब्राजील है, जहां 2 लाख 91 हजार 619 लोग संक्रमित हैं और अब तक 18 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
- जापान में अब तक कोरोना वायरस से 16,433 लोग संक्रमित हो चुके हैं, जिसमें से 12,286 लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है। वहीं, देश में अभी तक कोरोना संक्रमण से 784 लोगों की जान जा चुकी है।
- पूरी दुनिया में कोरोना का संक्रमण फेला हुआ है। ईरान में कोरोना संक्रमितों की संख्या एक लाख 27 हजार हो गई है, जिसमें से 98,808 लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। वहीं, देश में अब तक कोरोना संक्रमण से अब तक 7,183 लोगों की जान जा चुकी है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि उनकी हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्विन की खुराक एक-दो दिनों में खत्म हो जाएगी। ट्रंप ने मंगलवार को खुलासा किया था कि वह संभावित गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में चेतावनी के बावजूद हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा ले रहे हैं।
- वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हल्की सी भी हवा चल रही हो तो यह वायरस हवा में काफी दूर तक जा सकता है। ऐसे में मात्र छह फीट की दूरी बहुत ज्यादा कारगर नहीं है। हल्की खांसी से मुंह के बाहर आए लार के सूक्ष्म कण 18 फीट तक हवा में चलने में सक्षम हैं।
- चीन के शहर वुहान में कोरोना वायरस के 33 नए मामले सामने आए हैं। इनमें 31 स्पर्शोन्मुख हैं, जिनमें से अधिकांश वुहान शहर से हैं।

जेनेवा। विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation या WHO) ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) कोरोना वायरस से बचाव के लिए मलेरिया के इलाज में काम आने वाली जो दवा यानी हाइड्रॉक्‍सी क्‍लोरोक्‍वि‍न ले रहे हैं... उस मेडिसिन असर के बारे में अभी तक कोई साफ वैज्ञानिक प्रमान नहीं मिल सका है। WHO का कहना है कि वह कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए दवा के इस्तेमाल की सिफारिश केवल सीमि‍त तौर पर इलाज के परीक्षणों के बारे में ही करता है।विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation या WHO) में आपातकालीन सेवा के प्रमुख डॉ. माइकल रेयान ने कहा कि कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए जिन दवाओं या तरीको का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रायल हो रहा है। उक्‍त दवा यानी हाइड्रॉक्‍सी क्‍लोरोक्‍वि‍न उनमें से एक है। अभी भी इसके बारे में पता लगाया जा रहा है कि यह कोरोना वायरस के खिलाफ प्रभावी रूप से काम करती है या नहीं... WHO की ओर से आए इस बयान से साफ हो गया है कि कोरोना महामारी पर ट्रंप की ओर से बार बार की जा रही आलोचना के आगे वह झुकने वाला नहीं है।रेयान ने कहा कि बेहतर होगा कि ट्रंप जो दवा ले रहे हैं पहले उसका परीक्षण हो जाए। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि देशों की अपनी पसंद या नापसंद हो सकती है। मालूम हो कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने बीते दिनों कहा था कि वह हाइड्रॉक्सि क्लोरोक्वीन ले रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि उनकी हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्विन की खुराक एक या दो दिनों में खत्म हो जाएगी। हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन एक दवा है जो 65 सालों से ल्यूपस, गठिया और मलेरिया के इलाज में उपयोगी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसके कुछ साइड इफेक्‍ट भी हो सकते हैं। गौरतलब है कि अभी हाल ही में चीन में मरीजों का इलाज कर रहे एक भारतीय डॉक्‍टर ने खुलासा किया था कि जिंक, हाइड्राक्सी क्लोरोक्विन और एंडीबायोटिक दवा एजिथ्रोमाइसिन के मेल से वहां के कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। शंघाई के सेंट माइकल अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के डाक्टर संजीव चौबे की मानें तो चीन में अधिकांश मरीजों को जिंक, हाइड्राक्सी क्लोरोक्विन और एजिथ्रोमाइसिन का कांबिनेशन दिया गया जिससे वे जल्दी ठीक हुए और उनको वेंटिलेंटर की भी जरूरत नहीं पड़ी।

न्यूयॉर्क। अमेरिका में कोरोना वायरस (COVID-19) के मरीजों को बीमारी से उबारने में लगे भारतवंशी चिकित्सक सुधीर एस चौहान की मंगलवार को मौत हो गई। कुछ हफ्ते पहले उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था। बुधवार को इसकी जानकारी अमेरिका में भारतवंशी चिकित्सकों के संगठन एएपीआइ के मीडिया समन्वयक अजय घोष ने दी। इसी महीने में अमेरिका में कोरोना से तीसरे भारतीय चिकित्सक की मौत है।डॉक्टर चौहान न्यूयॉर्क के जमैका हॉस्पिटल में अपनी सेवा दे रहे थे। वह यहांं इंटरनल मेडिसिन फिजिशियन और आईएम रेजीडेंसी प्रोग्राम के एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर थे। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई 1972 में कानपुर विश्वविद्यालय के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल (जीएसवीएम) मेडिकल कॉलेज से पूरी की थी। चौहान ने आगे की पढ़ाई अमेरिका से की थी। उनकी विशेषज्ञता इंटरनल मेडिसिन में थी।
इसी महीने दो अन्य भारतवंशी चिकित्सकों की कोरोना से मौत;-इसी महीने अमेरिका में दो अन्य भारतवंशी चिकित्सकों की भी कोरोना की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वायरस के शिकार डॉक्टर सत्येंद्र देव खन्ना (78) और डॉक्टर प्रिया खन्ना (43) पिता-पुत्री थे। एएपीआइ की अध्यक्ष सीमा अरोड़ा ने बताया कि अमेरिका में कोरोना पीड़ितों की इलाज में जुटे हर सात चिकित्सकों में एक भारतीय मूल के हैं।
कोरोना वायरस की सबसे ज्यादा मार न्यूयॉर्क पर पड़ी:-अमेरिका में कोरोना वायरस की सबसे ज्यादा मार न्यूयॉर्क पर पड़ी है। यहां अब तक संक्रमण से 28,636 लोगों की मौत हो गई है। और 76,410 मामले सामने आ गए हैं। वहीं अमेरिका दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। यहां अब तक 15,51,853 मामले सामने आए हैं और 93,439 लोगों की मौत हो गई है। दोनों ही मामलों में विश्व में सबसे आगे है।
भारतीय-अमेरिकी चिकित्सा बिरादरी महामारी के खिलाफ लड़ाई के अग्रीम मोर्चे पर खड़ी:-एएपीआइ ट्रस्ट बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. सीमा अरोड़ा ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण पूरे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र विशेष रूप से भारतीय-अमेरिकी चिकित्सा बिरादरी महामारी के खिलाफ लड़ाई के अग्रीम मोर्चे पर खड़ी है। एएपीआइ ने कहा कि भारतीय-अमेरिकियों की आबादी अमेरिका के एक प्रतिशत से भी कम है, लेकिन इनमें से नौ प्रतिशत अमेरिका स्वास्थ्य सुविधा के जुड़े हैं।

वाशिंगटन। क्‍या सफेद बर्फ की चादर से ढका हुआ अंटार्कटिका हरा भरा हो सकता है। यदि आप भी इसका जवाब न में सोच रहे हैं आप गलत सोच रहे हैं। दरअसल नासा द्वारा जारी की गई तस्‍वीरें आपकी और हमारी सोच को गलत साबित कर रही हैं। इन तस्‍वीरों में बर्फ की मोटी और सफेद चादर से ढके रहने वाले अंटार्कटिका पर शैवाल की परत देखी गई है। यह शैवाल…
कराची। कोरोना वायरस पर नियंत्रण कर पाने में विफल रहने की वजह से अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार ये राग अलाप रहे हैं कि भारत पाकिस्तान पर सशस्त्र हमले की योजना बना रहा है। बीते 5 दिनों के दरम्यान बुधवार को दूसरी बार उन्होंने सार्वजनिक मंच से ये बात कही, इससे पहले भी वो एक बार ये कह चुके हैं कि भारत पाकिस्तान पर हमले की तैयारी कर…
बीजिंग। दुनिया भर में कोरोना वायरस पहुंचाने के बाद अब चीन अपने यहां इस तरह के वायरसों के बारे में पहले से पता लगाने के लिए मॉनीटरिंग स्टेशन बनाने की तैयारी कर रहा है। ये स्टेशन कुछ उसी तरह से काम करेंगे जैसे आजकल के दिनों में मौसम के बारे में पूर्वानुमान लगाया जाता है।इस मॉनीटरिंग स्टेशन से चीन के हर प्रांत को जोड़ा जाएगा और यदि किसी राज्य में…
बीजिंग। चीन के स्वास्थ्य प्राधिकरण ने आधिकारिक तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण से बाद अंगों के नुकसान को संभावित प्रभावों में शामिल किया है। इससे मरीजों के लिए चिकित्सा बीमा कवरेज का विस्तार होगा। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) ने कोविड-19 से उबरे लोगों के लिए जारी अपने दिशा-निर्देशों में कहा कि कुछ लोगों को फेफड़ों और हृदय के नुकसान के लिए उपचार की आवश्यकता होगी। कुछ लोगों को…
Page 9 of 136

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

pr checker

ताज़ा ख़बरें