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कराची। क्या कोई ठेलेवाला 24 साल में 96 लोगों की हत्या कर सकता है, ये एकबारगी सुनने में थोड़ा अजीब लगता है मगर है सच। दरअसल पाकिस्तान के कराची शहर में एंटी स्ट्रीट क्राइम और सोल्जर बाजार पुलिस ने बुधवार को यहां एक ऐसे ही आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस आरोपित ने 1995 में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट लंदन की सदस्यता ली थी, उसी के बाद से वो हत्या करने लगा था। इसका नाम यूसुफ उर्फ ठेलेवाला बताया गया है। पाकिस्‍तान के अखबार डॉन के मुताबिक पुलिस ने एक टीटी पिस्तौल, ग्रेनेड और एक मोटरसाइकिल जब्त की है। पुलिस ने जब इससे सख्ती से पूछताछ की तो उसने कई सारे राज बताए।
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-लंदन का सदस्य:-यूसुफ उर्फ ठेलेवाला मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट का सदस्य है। यूसुफ ने अपने साथियों के साथ सीधे 30 लोगों की हत्या में शामिल रहना स्वीकार किया, इसी के साथ उसने ये भी बताया कि उसने 66 शवों को भी ठिकाने लगाया है। बताया जा रहा है कि जब उसने मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट लंदन की सदस्यता ले ली थी। उसी के बाद से उसने हत्याएं करना शुरू कर दिया था।
एसएसपी ने दी जानकारी:-यूसुफ उर्फ ठेलेवाले को पकड़े जाने के बाद शहर के एसएसपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, इसमें उन्होंने विस्तार से इसके बारे में सारी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूसुफ ने बताया कि वो डॉ.फारूक सत्तार के संपर्क में था, उनसे संपर्क होने के बाद उसने इस तरह की चीजों को अंजाम देना शुरू किया। जब डॉ.सत्तार से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने यूसुफ नाम के किसी भी व्यक्ति को जानने से इनकार कर दिया।
सैन्यकर्मी, वायुसेना अधिकारी व 12 लोगों को मारा;-यूसुफ ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसने दो सैन्यकर्मी, पाकिस्तान वायु सेना के एक अधिकारी को मार डाला, इसके अलावा 12 ऐसे लोगों की भी हत्या कर दी, इनमें पुलिस मुखबिर, एक पुलिसकर्मी, मोहजीर कौमी आंदोलन के पांच कार्यकर्ता, एक सरकारी कर्मचारी और कई अन्य लोग शामिल थे। उसने खुलासा किया कि उसने अपने अन्य साथियों - नदीम उर्फ ​​मार्बल, रियाज उर्फ ​​चाचा, अज़ीम उर्फ ​​छोटा, रशीद उर्फ ​​छोटा, अब्दुल सलाम के साथ - अपने दो भाइयों, आसिफ और काशिफ को मोमिनाबाद से अपहरण कर लिया और संदेह पर उनकी हत्या कर दी। इनके मुखबिर होने का शक था।
1996 में पहली बार किया गया गिरफ्तार:-एसएसपी ने कहा कि यूसुफ को पहली बार 1996 में रेंजर्स ने गिरफ्तार किया था, लेकिन उसे 1997 में जमानत पर रिहा कर दिया गया। फिर उसे दो व्यक्तियों की हत्या में कथित संलिप्तता के लिए मोमिनबाद पुलिस ने 1998 में गिरफ्तार किया था। इस आरोप में उसने पांच साल जेल में बिताए और 2003 में पैरोल पर रिहा हुआ। उसके बाद से वो छिपी हुई जिंदगी जी रहा था।उस अवधि के दौरान उसे लंदन में एमक्यूएम नेतृत्व से निर्देश मिला। उन्होंने कहा कि उनकी पैरोल रद्द होने के बाद से गृह विभाग ने यूसुफ की गिरफ्तारी के निर्देश भी जारी किए थे। मगर वो पकड़ में नहीं आ रहा था। उन्होंने बताया कि ठेलेवाले ने जिला पश्चिम में आतंक कायम कर रखा था। इस दौरान उसके कई साथी या तो मारे गए थे या जेल में बंद थे।
डॉ.फारूक सत्तार के संपर्क में था ठेलेवाला:-यूसुफ ने बताया कि वो एमक्यूएम के वरिष्ठ नेता डॉ.फारूक सत्तार के संपर्क में था, उसकी पार्टी मुख्यालय नौ इलेवन में कई बार डॉ.सत्तार से मुलाकात भी हुई है। डॉ.सत्तार ने ही यूसुफ के लिए एक अलग कमरे की व्यवस्था की थी। डॉ.सत्तार ने इस तरह की किसी भी बात से इनकार कर दिया, उनका कहना था कि वो यूसुफ उर्फ ठेलेवाले नामक किसी भी शख्स को नहीं जानते हैं।उनका कहना था कि वो नहीं जानते कि नौ शून्य या खुर्शीद बेगम हॉल में उनसे मिलने कौन आया था, क्योंकि सैकड़ों लोग वहां अपनी शिकायतें लेकर आए थे। ऐसे किसी भी खास शख्स के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है। डॉ. सत्तार ने कहा कि ये उनके विरोधियों और संदिग्धों द्वारा रची गई साजिश का हिस्सा हो सकता है

नई दिल्ली। भारत ही नहीं दुनिया के बाकी हिस्सों में भी सड़क धंसने के हादसे होते रहते हैं। कई बार ये हादसे लोगों की जान भी ले लेते हैं तो कई बार मामूली खरोंच ही आती है। ऐसे हादसे देखकर लोग दांतों तले उंगली दबाने को भी मजबूर हो जाते हैं। दरअसल उनको उम्मीद भी नहीं होती कि ऐसा भी कोई हादसा हो सकता है। कुछ दिन पहले ब्राजील में भी एक ऐसा ही सड़क हादसा देखने को मिला। इस हादसे का वीडियो देखने के बाद हर किसी का मुंह खुला का खुला रह गया। मौके पर मौजूद महिला भगवान से यही मानती रही कि जो कार इस गड्ढे में गिरी है उसमें सवार लोगों को कोई गंभीर चोट न लगे।
कैमरे में कैद हुई घटना;-ब्राजील के फ्लोर्स दा कुन्हा, रियो ग्रांडे डो सुल में सड़क किनारे एक कैमरा लगा हुआ है, इसी कैमरे में ये पूरी घटना कैद हो गई। सड़क धंस जाने के बाद आसपास में लगे कैमरों को चेक किया गया जिससे इस पूरी घटना के बारे में सारी जानकारी सामने आ सकी। कई विदेशी अखबारों ने पूरी वीडियो के साथ इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
ट्रक के पीछे चल रही महिला ने लेन बदली तो गड्ढे में गिरने से बची;-इस सड़क पर जो ट्रक आगे जा रहा था, उसके पीछे एक महिला भी कार से चल रही थी। ट्रक आगे निकल गया तो महिला ने अपनी लेन बदल ली, लेन बदलने के बाद महिला ने देखा कि सड़क पर गड्ढा हो गया है जब तक वो अपनी कार से उतरकर आती और वहां से गुजरने वाले कार चालकों को सावधान करती तब तक पीछे से आ रही कार गड्ढे में समा गई। उसके बाद महिला ने वहां आ जा रही कारों को एलर्ट किया और बाकी लोगों को इस गड्ढे की चपेट में आने से बचाया।
गड्ढे में गिरने से टूटी ड्राइवर की नाक;-कार को कैवेगनॉली नामक महिला चला रही थी। इसमें वो अपनी बेटी अंड्रेस कारनेला के साथ जा रही थी। जब कार गड्ढे में गिरी उसकी वजह से उनकी नाक की हड्डी टूट गई। गड्ढे में गिरने के बाद वो दरवाजा खोलकर बाहर आईं और किसी तरह से गड्ढे से बाहर निकल पाईं, उसके बाद उनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। उनकी बेटी को मामूली चोटें आई थीं।
पानी और सीवेज सिस्टम की वजह से धंसी सड़क:-कारनेसेला ने बताया कि जिस जगह सड़क धंसी, वहां नीचे से पानी और सीवेज सिस्टम की लाइनें जा रही है। माना जा रहा है कि यहां किसी तरह से लीकेज रहा होगा जिसके कारण सड़क का बेस कमजोर हो गया और जब भारी वाहन ट्रक वहां से गुजरा तो सड़क धंस गई, उसके बाद वो बड़ा हो गया, कुछ देर बाद जब कार वहां से गुजरी तो वो उसमें समा गई। कुछ देर के बाद इसकी मरम्मत का काम शुरू करवाया गया।

पेशावर। मानवाधिकार कार्यकर्ता इदरीस खट्टक के अपहरण के मामले में इंटरनेशनल कमीशन फॉर ज्यूरिस्ट (आइसीजे) ने पाकिस्तान के अधिकारियों को एफआइआर दर्ज करने के लिए कहा है। आइसीजे एक गैर सरकारी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन है।जिबरान नासिर नामक एक नेता ने ट्वीट के जरिये बताया कि इदरीस को खुफिया एजेंसियों ने गत 13 नवंबर को पख्तूनख्वा प्रांत में इस्लामाबाद-पेशावर हाईवे से अगवा कर लिया था। उनके ड्राइवर को भी अगवा किया गया था, लेकिन उसे तीन दिन पहले छोड़ दिया गया।
ह्यूमन राइट्स वाच के साथ काम कर चुके हैं इदरीस:-इदरीस एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वाच के साथ काम कर चुके हैं। उनके ड्राइवर ने अनबर पुलिस स्टेशन में दी अपनी शिकायत में कहा है कि इदरीस जब अकोरा खट्टक गांव से स्वाबी जा रहे थे तभी चार अज्ञात लोगों ने कार रोकी और उनका अपहरण कर लिया। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी इदरीस को खोज निकालने की मांग करते हुए कहा कि उनका छात्र जीवन से प्रगतिशील राजनीति से जुड़ाव रहा है।
पांच हजार से ज्यादा केस दर्ज;-पाकिस्तान सरकार की ओर गठित जांच आयोग के अनुसार, साल 2014 से पांच हजार से ज्यादा अपहरण के मामले दर्ज किए गए हैं। ज्यादातर मामले आज तक अनसुलझे हैं।
अकेले बलूचिस्तान में 20 हजार लोगों का अपहरण:-वहीं, स्वतंत्र स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के सरकार के आंकड़े को बहुत कम बताया है। उन्होंने कहा है कि यह आंकड़ा कहीं ज्यादा है। बलूचिस्तान में अकेले लगभग 20 हजार लोगों का अपहरण किया गया है, जिसमें से 2,500 से अधिक लोग मारे गए हैं, उनके शरीर पर गोलियों के निशान थे, जो अत्यधिक यातना के लक्षण हैं।
पाकिस्तान की आलोचना;-अंतरराष्ट्रीय निकायों और स्थानीय मानवाधिकार संगठनों द्वारा लोगों के गायब होने और असाधारण हत्याओं के मुद्दे को लेकर लंबे समय से पाकिस्तान की आलोचना की जाती रही है। सितंबर में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उत्पीड़न से परेशान होकर मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्लामिल ने पाकिस्तान छोड़कर अमेरिका से शरण मांगी थी।

वाशिंगटन। नियमित एक्सरसाइज से ना सिर्फ तन और मन को स्वस्थ रखा जा सकता है बल्कि कई बीमारियों से बचाव भी हो सकता है। डॉक्टर भी अच्छी सेहत के लिए व्यायाम की सलाह देते हैं। इस अध्ययन का भी कुछ ऐसा ही कहना है। इसमें पाया गया कि हफ्ते में तीन घंटे की वाकिंग, जॉगिंग, योग या किसी भी तरह की एक्सरसाइज से डिप्रेशन (अवसाद) के खतरे को रोकने में मदद मिल सकती है।अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की ओर से बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययन के अनुसार, हफ्तेभर कुछ समय टहलने, दौड़ने या डांस करने से डिप्रेशन के खतरे को दूर रखा सकता है। एक्सरसाइज के जरिए वे लोग भी बचाव कर सकते हैं, जिनमें इस मनोरोग का आनुवांशिक तौर पर खतरा रहता है।शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष करीब आठ हजार पुरुषों और महिलाओं के डीएनए नमूनों व अन्य परीक्षणों के विश्लेषण के आधार पर निकाला है। अध्ययन की अगुआई करने वाले हार्वर्ड के टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ता कार्मेल चोई ने कहा, 'शारीरिक गतिविधि का प्रभाव यह है कि डिप्रेशन के जोखिम के साथ जन्म लेने वाले लोगों में भी इस मनोरोग के खतरे को निष्प्रभावी किया जा सकता है।'
इस तरह किया गया अध्ययन;-शोधकर्ताओं ने आठ हजार प्रतिभागियों से एक्सरसाइज के बारे में उनकी आदत के बारे में प्रश्नावली भरवाई। उनसे पूछा गया था कि वे हफ्ते में कितने घंटे और किस तरह की एक्सरसाइज करते हैं? इसके बाद शोधकर्ताओं ने आनुवांशिक विविधताओं पर गौर करने के लिए उनके डीएनए का परीक्षण किया। उन्होंने प्रतिभागियों के मेडिकल रिकार्ड को भी खंगाला।
अध्ययन का यह रहा निष्कर्ष;-सुस्त लोगों की तुलना में हफ्ते में कम से कम तीन घंटे तक टहलने, दौड़ने या योग करने वाले प्रतिभागियों में डिप्रेशन का खतरा कम पाया गया। जबकि हफ्ते में 30 मिनट अतिरिक्त एक्सरसाइज करने पर यह खतरा 17 फीसद और कम हो गया।
30 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित;-डिप्रेशन एक तरह का आम मानसिक विकार है। इस विकार के कारण मन हमेशा उदास रहता है और किसी काम में मन नहीं लगता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, डिप्रेशन से दुनिया भर में 30 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हैं।

वाशिंगटन। अमेरिका ने एक बार फ‍िर चीन और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को लेकर पाक को सख्‍त चेतावनी दी है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि यदि पाकिस्‍तान इस समझौते पर अपने कदम पीछे नहीं खींचता तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। उसे दीर्घकालिक आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ सकता है।यह तय है कि अगर अमेरिका ने सख्‍त रूख अपनाया तो बदहाल पाकिस्‍तान के पास कोई विकल्‍प नहीं होगा। अमेरिका के इस रूख से भारत के दृष्टिकोण को समर्थन मिला है। भारत शुरू से ही इस परियोजना का विरोधी रहा है। इसकी कई वजहें रही हैं। गुरुवार को एक शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ऐलिस वेल्स ने कहा कि चीन-पाकिस्‍तान के इस आर्थिक गलियारे का मकसद दक्षिण एशिया में चीन की महत्‍वाकांक्षा है। वह इस क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी की भूमिका में रहने की ख्‍वाहिश रखता है। राजनयिक ने कहा कि इस करार से पाकिस्‍तान को कुछ भी नहीं मिलने वाला है, इससे केवल बीजिंग को ही लाभ होगा। उन्‍होंने पाकिस्‍तान को इसके एवज में एक बेहतर मॉडल की पेशकश की है।
चीन की मंशा से अनजान है पाकिस्‍तान:-उन्‍होंने जोर देकर कहा कि चीन इस मंहगी योजना पर यूं ही निवेश नहीं कर रहा है। उसका मकसद पाकिस्‍तान को भारी कर्ज देकर उसकी आवाज को दबाना है। चीन ने इस परियोजना के निर्माण में जो रणनीति अपनाई है उससे पाकिस्तान में बेरोजगारी बढ़ेगी। उन्‍होंने साफ किया कि जिस तरह से परियोजना में केवल चीन के ही श्रमिक काम कर रहे हैं, उससे पाकिस्‍तान में भयंकर बेरोजगारी उत्‍पन्‍न होगी। पाकिस्‍तान उसकी इस मंशा से अनजान है।
भारतीय विरोध की बड़ी वजह;-भारत द्वारा इसका विरोध इस कारण किया जा रहा है, क्योंकि यह गलियारा पाकिस्तान में गुलाम कश्‍मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान से होते हुए जाएगा। यातायात और ऊर्जा का मिलाजुला यह प्रोजेक्ट समंदर में बंदरगाह को विकसित करेगा, जो भारतीय हिंद महासागर तक चीन की पहुंच का रास्ता खोल देगाl
आर्थिक गलियारे की लंबी अवधि की योजना;-18 दिसंबर, 2017 को चीन और पाकिस्‍तान ने मिलकर इस आर्थिक गलियारे की लंबी अवधि की योजना को मंजूरी दे दी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चीन द्वारा "वन बेल्ट एंड वन रोड" या नई सिल्क रोड परियोजना भी कहा जाता है l नवम्बर 2016 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत चार लेन के वाहन मार्ग की आधारशिला रखी गई थी। इस योजना के तहत चीन और पाकिस्‍तान वर्ष 2030 तक आर्थिक साझेदार रहेंगे। इसके साथ ही पाकिस्‍तान ने इस योजना में चीनी मुद्रा युआन का इस्‍तेमाल करने की भी मंजूरी दे दी है। इस गलियारे को लेकर भारत ने अपनी आपत्ति जताई है। यह गलियारा गुलाम कश्‍मीर से होकर गुजरता है। अंतरराष्‍ट्रीय कानून के अनुसार, यह अवैध है। भारत गुलाम कश्‍मीर को लेकर भी अपना विरोध जताता रहा है। भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी अपना विरोध जताया है।
इसकी लागत 46 अरब डॉलर;-आर्थिक गलियारा पाकिस्तान के ग्वादर से लेकर चीन के शिनजियांग प्रांत के काशगर तक लगभग 2,442 किमी लंबी एक परियोजना है l इसकी लागत 46 अरब डॉलर आंकी जा रही है। चीन इसके लिए पाकिस्तान में इतनी बड़ी मात्रा में पैसा निवेश कर रहा है कि वो साल 2008 से पाकिस्तान में होने वाले सभी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के दोगुने से भी ज़्यादा है। चीन का यह निवेश साल 2002 से अब तक पाकिस्तान को अमेरिका से मिली कुल आर्थिक सहायता से भी ज़्यादा है।
इस परियोजना से चीन को क्या होगा लाभ
1- चीनियों के लिए यह रिश्ता रणनीतिक महत्व का हैl यह गलियारा चीन को मध्यपूर्व और अफ़्रीका तक पहुंचने का सबसे छोटा रास्ता मुहैया कराएगा, जहां हज़ारों चीनी कंपनियां कारोबार कर रही हैं।
- इस परियोजना से शिनजिंयाग को भी कनेक्टिविटी मिलेगी और सरकारी एवं निजी कंपनियों को रास्ते में आने वाले पिछड़े इलाकों में अपनी आर्थिक गतिविधियां चलाने का मौका मिलेगा, जिससे रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।
2- अमेरिका द्वारा पाकिस्तान पर शिकंजा कसते हुए उसकी आर्थिक सहायता में कमी कर दी गई है। दूसरी ओर भारत की अमेरिका से बढती नजदीकी के बीच चीन पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते और भी मीठे करने में लगा है। चीन, पाकिस्तान के विकास को बढ़ावा देकर भारत पर दबाव बढ़ाना चाहता है।
3- वर्तमान में मध्यपूर्व, अफ़्रीका और यूरोप तक पहुंचने के लिए चीन के पास एकमात्र व्यावसायिक रास्ता मलक्का जलडमरू है; यह लंबा होने के आलावा युद्ध के समय बंद भी हो सकता है।
4- चीन एक पूर्वी गलियारे के बारे में भी कोशिश कर रहा है जो म्यांमार, बांग्लादेश और संभवतः भारत से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जाएगा।

हांगकांग। छह दिन तक हांगकांग में भारी हिंसा और आंदोलन के बीच अब सन्‍नाटा पसरा है। पूरा हांगकांग छावनी में तब्‍दील हो गया है। हांगकांग के पॉलिटेक्निक विश्वविद्यालय (पॉलीयू) में अब छात्र नहीं भारी पुलिस बल तैनात हैं। पूरे परिसर मे मातम और सन्‍नाटा है। छात्रों के लिए बनी रसाई में कॉकरोचों का अड्डा बन चुका है। छात्रों से चहल पहल रहने वाली विश्‍वविद्याल खामोश है।बता दें छह द‍िनों तक पॉलिटेक्निक विश्वविद्यालय (पॉलीयू) में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बना हुआ था। उस वक्‍त हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ पालिटेक्निक में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। पुलिस ने विश्वविद्यालय को चारों तरफ से घेर रखा था और जो भी बाहर निकलता है उसे वे गिरफ्तार कर रहे थे। इस हिंसा को लेकर अमेरिका ने भी चिंता जाहिर की थी।हांगकांग की मुख्य कार्यकारी कैरी लाम ने कहा था कि 600 लोग यूनिवर्सिटी परिसर से निकल चुके हैं, इनमें से 18 साल से कम आयु वर्ग के 200 किशोर भी शामिल थे। बता दें कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मनाने के लिए दो मध्यस्थों को भी सोमवार देर शाम विवि के अंदर भेजा था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने विवि परिसर छोड़ने से इंकार कर दिया था।मुख्य कार्यकारी ने कहा था कि जो प्रदर्शनकारी 18 साल से कम आयु के थे, उन्हें तत्काल गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्‍होंने कहा लेकिन बाद में उनको आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। विवि से बाहर निकले 400 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। सलाहकारों के साथ साप्ताहिक बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि वह विवि परिसर में मौजूद बाकी प्रदर्शनकारियों को बाहर आने के लिए मनाने की हर तरह की कोशिश करेंगी ताकि जितनी जल्दी हो सके इस पूरे अभियान को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कराया जा सके।बता दें कि प्रत्यर्पण विधेयक को लेकर पांच महीने पहले शुरू हुआ था आंदोलन विवादित प्रत्यर्पण विधेयक को लेकर हांगकांग में पांच महीने पहले शुरू हुआ प्रदर्शन अब लोकतंत्र और स्वायत्तता की मांग को लेकर जोर पकड़ने लगा। यह आंदोलन अब विश्वविद्यालयों में फैल गया। पिछले सप्ताह एक प्रदर्शनकारी छात्र की मौत के बाद यह विरोध और हिंसक हो गया था।

 

 

लंदन। लंदन में बुधवार को चिकित्‍सा विशेषज्ञों ने पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के स्‍वास्‍थ्‍य की जांच की। इस दौरान शरीफ को गंभीर जांच एवं परीक्षण से गुजराना पड़ा। बता दें कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद शरीफ मंगलवार को इलाज के लिए लंदन पहुंचे। अगले कुछ दिनों तक हार्ले स्‍ट्रीट के डॉक्‍टरों की निगरानी में रहेंगे।वरिष्‍ठ पीएमएल-एन नेता ने बताया कि पार्टी प्रमुख नवाजा शरीफ सेंटल लंदन में…
नई दिल्ली। क्या कोई ठेलेवाला 24 साल में 96 लोगों की हत्या कर सकता है, ये एकबारगी सुनने में थोड़ा अजीब लगता है मगर है सच। दरअसल पाकिस्तान के कराची शहर में एंटी स्ट्रीट क्राइम और सोल्जर बाजार पुलिस ने बुधवार को यहां एक ऐसे ही आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस आरोपित ने 1995 में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट लंदन की सदस्यता ली थी, उसी के बाद से वो हत्या…
वॉशिंगटन। प्राचीन भारतीय अभ्यास में अनुसंधान के साथ योग शिक्षा प्रदान करने के लिए एक योग विश्वविद्यालय जल्द ही अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया में स्थापित किया जाएगा। भारत के योग गुरु ने कहा। उन्होंने कहा कि योग अमेरिका में प्रसिद्ध हो गया है और इसके स्टूडियो देश के विभिन्न हिस्सों में नजर आने गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के विश्वव्यापी उत्सव के कारण पिछले कुछ वर्षों में यह प्राचीन प्रथा काफी…
नई दिल्ली। पाकिस्तान के मुख्य विपक्षी दल नवाज शरीफ के पूर्व प्रधानमंत्री और सर्वोच्च नेता को बुधवार दोपहर लंदन में एक अस्पताल में पहुंचे, वहां उनको मेडिकल उपचार के लिए स्कैन और परीक्षण की एक श्रृंखला के लिए ले जाया गया। इसके बाद उनको वहां से वापस भेज दिया गया।नवाज जब पाकिस्तान से लंदन पहुंचे तो उनको सबसे पहले लंदन के साउथवार्क के बोरो में एक एनएचएस अस्पताल, गुइसेज़ हॉस्पिटल…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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