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वाशिंगटन। बोइंग कंपनी की 737 मैक्स जेट विमानों की नई उड़ान नियंत्रण प्रणाली का सुरक्षा विश्लेषण करने वाली प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण खामियां थी। सिएटल टाइम्स ने रविवार को यह जानकारी दी। पिछले रविवार को इथोपियन एयरलाइंस का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उसमें सवार सभी 157 लोगों की मौत हो गई थी।अमेरिकी फेडरल एविएशन (एफएए) में वर्तमान और पूर्व इंजीनियरों का हवाला देते अखबार ने कहा कि उड़ान नियंत्रण प्रणाली का सुरक्षा विश्लेषण करने वाली इस प्रक्रिया को एमसीएएस कहा जाता है। अखबार ने एफएए के प्रवक्ता का हवाला देते हुए कहा कि एफएए ने इस संबंध में कोई विस्तृत जांच-पड़ताल नहीं की और मैक्स को अनुमति देने के संबंध में एक मानक प्रक्रिया का पालन किया।एफएए ने सिएटल टाइम्स की खबर पर प्रतिक्रिया देने से तो इन्कार किया, लेकिन प्रमाणन प्रक्रिया के बारे में पिछले बयानों का उल्लेख किया। यह कहा गया है कि 737-मैक्स के प्रमाणन प्रक्रिया में एफएए की मानक प्रमाणन प्रक्रिया का पालन किया गया। खबर में यह भी कहा गया है कि इथोपियाई विमान हादसे से पहले बोइंग और एफएए दोनों को इसके खतरे से अवगत कराया गया था और 11 दिन पहले जवाब भी मांगा गया था। बता दें कि हादसे के बाद पिछले सोमवार को बोइंग कंपनी ने कहा था कि वह 737 मैक्स 8 में एक सॉफ्टवेयर अपग्रेड करेगा। वहीं एफएए ने अप्रैल तक इसकी डिजाइन में बदलाव की बात कही थी।
ब्लैक बॉक्स मिलने पर हुआ खुलासा:-इथियोपिया एयरलाइंस विमान के ब्लैक बॉक्स से मिले डाटा का विश्लेषण करने पर पता चला है कि यह दुर्घटना कमोवेश वैसे ही हुई है जैसे पिछले साल अक्टूबर में इंडोनेशिया में विमान दुर्घटना हुई थी। दोनों विमान बोइंग 737 मैक्स 8 एस थे और दोनों के पायलटों ने उड़ान नियंत्रण समस्याओं की सूचना देने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गए। यह जानकारी इथियोपियाई परिवहन मंत्रालय ने दी है। परिवहन मंत्री के हवाले से वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा कि दुर्घटना पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट 30 दिनों में जारी की जाएगी।

बीजिंग। चीन ने दावा किया है कि उसने हिंसाग्रस्त शिनजियांग प्रांत में 2014 से जारी कार्रवाई के तहत अब तक करीब 13 हजार आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान सूबे में सक्रिय सैकड़ों आतंकी संगठनों का सफाया भी किया गया।चीन ने यह दावा ऐसे समय किया, जब इस प्रांत में उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार को लेकर उसकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय में खूब आलोचना हो रही है। चीन ने इस राज्य में बढ़ती इस्लामी कट्टरता पर अंकुश लगाने के लिए सख्त नीति अपना रखी है। इसके तहत उइगर मुस्लिमों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। दस लाख से ज्यादा उइगरों को हिरासत केंद्रों में रखा गया है। चीन इन हिरासत केंद्रों को व्यावसायिक शिक्षा केंद्र कहता है।चीन की सरकार ने सोमवार को श्वेत पत्र जारी किया और प्रांत में अपनाई गई सख्त नीति का बचाव करते हुए उपरोक्त दावा किया है। बताया कि उइगर मुस्लिम बहुल शिनजियांग में आंतकी खतरों से निपटने के लिए और भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है। श्वेत पत्र के अनुसार, साल 2014 से शिनजियांग में जारी दहशतगर्दी विरोधी कार्रवाई के दौरान 1,588 आतंकी गिरोहों को खत्म किया गया।12,995 आतंकी गिरफ्तार किए गए और 2,052 बम बरामद हुए। इसके अलावा अवैध धार्मिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए 30,645 लोगों को दंडित किया गया। श्वेत पत्र में यह भी बताया गया है कि साल 1990 से 30 हमलों को रोका गया और अंतिम हमला दिसंबर 2016 में हुआ था। प्रांत में हुए हमलों और ¨हसक घटनाओं में 458 लोग मारे गए और 2,540 घायल हुए थे।

वाशिंगटन। अंतरिक्ष यात्रा के दौरान चर्मरोग का कारण बनने वाले निष्क्रिय वायरस शरीर में फिर से सक्रिय हो जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आइएसएस) में गए अंतरिक्ष यात्रियों पर हुए अध्ययन में यह बात सामने आई है। इसके बाद भविष्य में मंगल व अन्य ग्रहों पर भेजे जाने वाले मानव मिशन खतरे में आ सकते हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने कहा कि वायरस के सक्रिय होने की गति अंतरिक्ष यात्र पर की अवधि पर निर्भर करती है। अंतरिक्ष यात्र जितनी लंबी होगी, वायरस उतनी ही तेजी से सक्रिय होंगे।
कॉस्मिक रेडिएशन का सामना सबसे बड़ी समस्‍या;-नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर के वैज्ञानिक सतीश के मेहता ने कहा, ‘अंतरिक्ष यात्री कई हफ्तों व महीनों के लिए माइक्रोग्रैविटी ( गुरुत्वाकर्षण का कम होना) व कॉस्मिक रेडिएशन का सामना करते हैं। मिशन के दौरान उनके सोने व जागने का चक्र बिगड़ जाता है। लोगों से कट जाने के कारण उन्हें तनाव की समस्या रहती है।’ अंतरिक्ष यात्रा के दौरान शरीर पर पड़ने वाले इन्हीं प्रभावों का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष यात्रियों के सलाइवा, ब्लड व यूरीन के नमूने इकट्ठा किए थे। यात्रा के दौरान व उसके पहले व बाद में जमा किए गए नमूनों के अध्ययन में सामने आया कि अंतरिक्ष यात्र के वक्त शरीर में तनाव के लिए जिम्मेदार हार्मोन का स्नाव होने लगता है। इसके चलते शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है।
निष्क्रिय वायरस भी सक्रिय हो जाते हैं:-कई बार अंतरिक्ष से लौटने के 60 दिन बाद तक अंतरिक्ष यात्रियों की प्रतिरक्षी कोशिकाएं अप्रभावी रहती हैं। कोशिकाओं के कमजोर पड़ने से निष्क्रिय वायरस भी सक्रिय हो जाते हैं। अध्ययन की जानकारी देते हुए मेहता ने कहा, ‘स्पेस शटल से जाने वाले 89 में से 47 जबकि आइएसएस में लंबे समय तक रुकने वाले 23 में 14 अंतरिक्ष यात्रियों में चर्म रोग संबंधी वायरस तेजी से बढ़ने लगते हैं। यात्र से पहले व बाद की अपेक्षा यात्र के दौरान इन वायरसों के बढ़ने की गति बहुत अधिक हो जाती है।’ कुछ ही लोगों में इन वायरसों के सक्रिय होने के लक्षण दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य पर बड़ा संकट हो सकता है। चांद व मंगल मिशन पर मानवों को भेजने से पहले इस समस्या का हल निकालना जरूरी है।
पाए गए आठ में से चार चर्मरोग वायरस:-सलाइवा व यूरीन की जांच में वैज्ञानिकों ने पाया कि अंतरिक्ष यात्र के दौरान चर्मरोग संबंधी आठ में से चार वायरस सक्रिय हो जाते हैं। इनमें चेचक व मुंह में छालों के लिए जिम्मेदार एचएसवी के साथ वीजेडवी, सीएमवी और ईबीवी शामिल हैं। मोनो या किसिंग डिजीज के लिए जिम्मेदार सीएमवी व ईबीवी वायरस के चलते बुखार, गला खराब होना और चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है।

उट्रेच। नीदरलैंड के उट्रेच शहर में गोलीबारी की खबर है। बताया जा रहा है कि इस गोलीबारी में कई लोग घायल हैं। पुलिस के अनुसार कई लोगों को चोटें आयी हैं। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, घटनास्थल पर आतंकवाद निरोधी पुलिस पहुंच गई है।गोलीबारी की घटना स्थानीय समयानुसार 10:45 बजे पर बताई गई है। हालांकि अब गोलीबारी नहीं हो रही है। पुलिस ने अपना ऑपरेशन जारी कर दिया है। आपातकाल की स्थिति में घटनास्थल पर एंबुलेंस तैनात की गई हैं।यूट्रेक्ट पुलिस ने ट्विटर पर कहा कि उट्रेच में 24 ओकट्राप्लिन पर गोलीबारी एक घटना हुई है। आसपास के इलाके को घेर लिया गया है और हम इस मामले की जांच कर रहे हैं।घायलों की मदद के लिए हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं। स्थानीय मीडिया ने ट्राम के आसपास नकाबपोश, सशस्त्र पुलिस और आपातकालीन वाहनों की तस्वीरें दिखाईं हैं जो एक पुल के पास दिख रही हैं। क्षेत्र में ट्राम यातायात को पूरी तरह रोक दिया गया है।बता दें कि हाल ही में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में एक सिरफिरे ने मस्जिद में घुसकर ताबड़तोड़ गोलीबारी की थी। इस गोलीबारी में 49 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। पुलिस ने गोलीबारी करने वाले ऑस्ट्रेलियाई नागरिक को गिरफ्तार कर लिया था। न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों पर आतंकी हमला करने वाले हमलावर ऑस्ट्रेलियाई बंदूकधारी ने कहा कि अब वह अपना केस खुद लड़ेगा। ब्रेंटन टैरंट हत्या के आरोप में क्राइस्टचर्च जिला अदालत में पेश हुआ। वकील रिचर्ड पीटर्स ने बताया कि वह वकील नहीं चाहता है। आरोपित खुद ही अपना केस लड़ना चाहता है।
क्‍या है क्राइस्‍टचर्च हमला:-न्‍यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में एक हमलावार ने अचानक से गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमलावर की उम्र 28 वर्ष बताई गई है। इस घटना के बाद न्यूजीलैंड पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें से एक को छोड़ दिया गया है और दो लोग हिरासत में हैं। बता दें कि न्यूजीलैंड की गिनती दुनिया के सबसे शांत देशों में होती है। मौजूद लोगों के मुताबिक हमलावर ने पांच मिनट तक गोलीबारी की। हमलावर गोलीबारी के दौरान Facebook पर लाइव था। इस दौरान उसने कहा कि वह 28 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई है। उसने अपना नाम ब्रेंटन टैरंट बताया। वह इस हमले की पिछले दो वर्षों से योजना बना रहा था।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को दुबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इसके चलते उनका नर्वस सिस्टम कमजोर हो गया है। मुशर्रफ की पार्टी ने बताया कि उनका इलाज पहले से ही चल रहा था, लेकिन उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद शनिवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।75 साल के मुशर्रफ मार्च 2016 से ही दुबई में रह रहे हैं। उनके उपर 2007 में संविधान को भंग करने का आरोप लगा था, जिसमें उन्हें साल 2014 में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद से वह सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए दुबई में ही रह रहे हैं। ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एपीएमएल) के महासचिव मेहरिन अदम मलिक ने रविवार को कहा कि अचानक तबियत बिगड़ने के बाद शनिवार रात मुशर्रफ को अस्पताल ले जाया गया। पार्टी के ओवरसीज़ प्रेसिडेंट अफजल सिद्दीकी ने बताया कि मुशर्रफ को एमाइलॉइडोसिस (amyloidosis) से पीड़ित हैं। वह लंबे समय से इस बीमारी का इलाज करा रहे हैं।पार्टी के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति को डॉक्टरों ने पूर्ण रूप से ठीक होने तक आराम करने की सलाह दी है। बता दें कि सिद्दीकी ने पिछले साल अक्टूबर में मुशर्रफ की बीमारी के बारे में जानकारी दी थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति की बीमारी ने उनका नर्वस सिस्टम कमजोर हो गया है। उस समय लंदन में उनका इलाज चल रहा था। एमाइलॉइडोसिस के चलते प्रोटीन शरीर के विभिन्न अंगों में जमा होने लगता है। सिद्दीकी ने कहा कि इसके चलते परवेज मुशर्रफ को खड़े होने और चलने में कठिनाई होती है। सिद्दीकी ने कहा कि मुशर्रफ का इलाज पांच या छह महीने तक जारी रह सकता है। पूरी तरह ठीक होने पर ही मुशर्रफ पाकिस्तान लौटेंगे ।
अमाइलॉइडोसिस (amyloidosis) क्या है;-अमाइलॉइडोसिस (amyloidosis) एक दुर्लभ बीमारी है जो तब होती है जब एमाइलॉयड नामक पदार्थ आपके अंगों में बनने लगता है। अमाइलॉइड एक असामान्य प्रोटीन है जो बोन मैरो में उत्पन्न होता है और यह किसी भी अंग में जमा हो सकता है। अमाइलॉइड एक असामान्य प्रोटीन है जो बोन मैरो में उत्पन्न होता है और यह किसी भी अंग में जमा हो सकता है। इससे ज्यादातर हृदय, गुर्दा, नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र प्रभावित होता है।

क्राइस्टचर्च। न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों पर आतंकी हमला करने वाला हमलावर आस्ट्रेलियाई बंदूकधारी अब अपना केस खुद लड़ना चाहता है। बता दें कि न्यूजीलैंड के दो मस्जिदों में सामूहिक रूप से गोलीबारी कर 50 लोगों हत्‍या करने का इस शख्‍स पर जुर्म है। शनिवार को ब्रेंटन टैरंट हत्या के आरोप में क्राइस्टचर्च जिला अदालत में पेश हुआ। वकील रिचर्ड पीटर्स ने बताया कि वह वकील नहीं चाहता है। आरोपित खुद ही अपना केस लड़ना चाहता है।
क्‍या है क्राइस्‍टचर्च हमला:-न्‍यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की मस्जिदों में हुई एक हमलावार ने अचानक से गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमलावर की उम्र 28 वर्षीय बताई जा रही है। इस घटना के बाद न्यूजीलैंड पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें से एक को छोड़ दिया गया है और दो लोग हिरासत में हैं। बता दें कि इस घटना में 50 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 48 लोग घायल बताए जा रहे हैं। बता दें कि न्यूजीलैंड की गिनती दुनिया के सबसे शांत देशों में होती है। मौजूद लोगों के मुताबिक हमलावर ने पांच मिनट तक गोलीबारी की। हमलावर गोलीबारी के दौरान Facebook पर लाइव था। इस दौरान उसने कहा कि वह 28 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई है। उसने अपना नाम ब्रेंटन टैरंट बताया। वह इस हमले की पिछले दो वर्षों से योजना बना रहा था।मस्जिदों में हुए आतंकी हमले में 50 लोगों को मौत में से सात भारतीय परिवार भी शामिल हैं। इसकी जानकारी भारतीय उच्चायोग से मिली थी। उच्चायोग ने ट्वीट में कहा था कि 'हम बहुत भारी दिल ये यह खबर साझा कर रहे हैं कि क्राइस्टचर्च में आतंकी हमले में हमने अपने सात नागरिकों की जिंदगियां भी गंवाई हैं। मृतकों के नाम हैं-हफीज मूसा पटेल, रमीज वोरा, आसिफ वोरा, एंसी अलीबावा, मोहम्मद इमरान खान, फरहज अहसान और जुनेद कारा।' इस घटना के बाद से दुनिया भर में इसकी निंदा की जा रही है।

 

 

जकार्ता। इंडोनेशिया के पूर्वी प्रांत पापुआ में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ से कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है। कई लोग लापता बताए जा रहे हैैं। इलाके मेें अफरातफरी मची हुई है।स्थानीय अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।अधिकारी ने बताया कि शनिवार को जयपुरा जिले के कई गांवों में करीब शाम 6 बजे मूसलाधार बारिश से बाढ़ आ गई। इस हादसे में कम से कम…
नई दिल्‍ली। दक्षिण अफ्रीका में भले ब्‍लैक और व्‍हाइट लोगों को एक समान अधिकार मिल गए हों, लेकिन इस बात को किसी भी सूरत से नहीं भुलाया जा सकता है कि यहां के लोगों ने वर्षों तक रंगभेद की घटिया मानसिकता को झेला है। आपको बता दें कि दक्षिण अफ्रीका में 1948 से रंगभेद की नीति चली आ रही थी, इसकी वजह से दुनिया भर ने उस पर पाबंदी लगा…
नई दिल्‍ली। पुलवामा हमले को एक माह से अधिक का वक्‍त हो चुका है। तब से लेकर आज तक पाकिस्‍तान भारत को लेकर कई तरह की बयानबाजी भी कर चुका है। खुद पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इसको लेकर कई बड़ी-बात भारत के खिलाफ कर चुके हैं। यहां तक की वह इसे चुनाव जीतने का जरिया कहने तक से भी नहीं चूके। इस हमले के एक माह बाद भी उनका…
नई दिल्ली। न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों में गोलीबारी कर 49 लोगों को मौत के घाट उतारने की घटना के बाद से ‘व्हाइट सुपरमेसिस्ट’ (White Supremacist) शब्द काफी चर्चा में है। माना जा रहा है कि इस घटना और इतिहास में हुई इस तरह की अन्य घटना के पीछे भी इसी विचारधारा का हाथ है। ये एक ऐसी विचारधारा है जो दुनिया भर में अश्वेतों से नफरत करने वालों…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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