दुनिया

दुनिया (977)

काबुल। पूर्वी अफगानिस्तान में एक सरकारी इमारत के भीतर आत्मघाती हमला हुआ है। जलालाबाद में इलेक्ट्रॉनिक पहचान पंजीकरण केंद्र में ये विस्फोट हुआ है। हमले में 10 से ज्यादा लोगों के गायल होने की खबर है। बताया जा रहा है की वहां अभी भी कुछ आतंकी छिपे हुए हैं, जिनसे सुरक्षाबलों की मुठभेड़ जारी है।प्रांतीय प्रवक्ता अताउल्लाह खोगयानी ने कहा कि धमाके के बाद सुरक्षाबलों की टीम मौके पर पहुंच गई है। फिलहाल इमारत से लोगों को निकालने का काम जारी है। हमले के पीछे तालिबान और इस्लामिक स्टेट का हाथ होने की आसंका जताई जा रही है, हालांकि किसी आतंकी संगठन ने अभीतक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।बता दें कि इससे पहले तालिबाद द्वारा किए गए अलग-अलग दो हमलों में 50 से ज्यादा लोग मारे गए थे और दर्जनों लोग घायल हो गए थे। एक धमाका राष्ट्रपति अशरफ गनी की चुनावी रैली को निशाना बनाकर किया गया था। इस धमाके में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें महिलाएं और बच्चे की संख्या ज्यादा थी। बताया जा रहा है कि जब हमला हुआ तब राष्ट्रपति वहीं मौजूद थे।
तालिबान ने दी थी धमकी;-गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अमेरिकी सैनिक के मौत के बाद अमेरिका-तालिबान शांति वार्ता को रद कर दिया था। इसके बाद तालिबान ने अमेरिका को धमकी दी थी कि वार्ता रद करने से और अमेरिकीयों की जान जाएगी। इसके बाद से देश में लगातार धमाके हो रहे हैं और अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया जा रहा है।
क्या कहा था तालिबान ने:-वार्ता को रद करने के लिए ट्रंप की आलोचना करते हुए इस्लामिक समूह ने बयान जारी किया था, इस दौरान कहा गया 'इससे अमेरिका को और नुकसान होगा। इसकी विश्वसनीयता प्रभावित होगी, इसका शांति विरोधी रुख दुनिया के सामने होगा, जान-माल का नुकसान होगा।

नई दिल्ली। दुनिया के दो बड़े तेल उत्पादक देशों के बीच यदि किसी तरह से युद्ध हुआ तो तेल के दाम आसमान छुएंगे। अभी सऊदी अरब की अरामको कंपनी (अरबी अमरीकन ऑइल कंपनी) पर ड्रोन हमले के बाद बीते 28 सालों में पहली बार कच्चे तेल की कीमतों में इतना उछाल आया है। अब माना जा रहा है कि यदि सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के लिए जिम्मेदार माने जाने देशों पर किसी तरह से कोई सैन्य हमला किया तो तेल की आपूर्ति के हालात और भी अधिक खराब होंगे।कुवैत पर इराक के हमले वाले वक्त के बाद से पहली बार कीमतें इस कदर बढ़ी हैं। दुनिया के सबसे बड़े तेल संयंत्र पर ड्रोन हमले की वजह से आपूर्ति पर असर पड़ा है। उसके बाद तेल की कीमतों में ये उछाल आया है। बीते तीन दशकों में तेल की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मालूम हो कि बीते शनिवार (14 सितंबर) को दो ड्रोन्स से सऊदी अरब के अबकैक तेल संयंत्र और खुरैस तेल प्लांट पर हमला किया गया, इसमें हुती विद्रोहियों के शामिल होने की बात सामने आई। इस हमले से सऊदी अरब के कुल उत्पादन और दुनिया की 5 प्रतिशत तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है।
भारत सबसे बड़ा तेल आयातक देश;-भारत सऊदी अरब से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है। भारत के पास मात्र 17 फीसदी तेल है, बाकी 83 फीसदी तेल आयात करना पड़ता है। भारत में ज्यादातर कच्चा तेल और कुकिंग गैस रान और सऊदी अरब से आता है। अपने तेल का 10 फीसद से अधिक हिस्सा वो ईरान से आयात करता था। साल की शुरुआत में अमरीका ने परमाणु समझौते से अलग होने के बाद भारत पर दबाव बनाया कि वो ईरान से तेल खरीदना बंद कर दे। भारत अमरीका जैसे दूसरे देशों से भी तेल आयात करता है, लेकिन ये तेल अधिक दाम पर आयात किए जाते हैं। सऊदी अरब के प्लांट पर हमला होने के बाद अब भारत की चिंता बढ़ गई है। इसका एक बड़ा कारण ये है कि यदि वहां से तेल मिलने में समय लगा तो समस्या बढ़ जाएगी।
प्लांट की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल:-एक बड़ी चिंता अब इस बात को लेकर भी हो रही है कि क्या सऊदी अरब के प्लांट अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं। यदि ये मान भी लिया जाए कि प्लांट सुरक्षित हैं तो क्या विद्रोहियों ने हमला करने के नए तरीके इजाद कर लिए हैं। यदि सुरक्षा में लगे जवान विद्रोहियों के इस हमले के बारे में नहीं जान पाए तो वो अगला हमला किसी नए तरीके से करेंगे जिसके बारे में विचार भी नहीं आ रहा होगा। इस वजह से अब ये माना जा रहा है कि सऊदी के संयंत्र अब पहले की तरह सुरक्षित नहीं रहे हैं। प्लांटों पर हमला होने की वजह से भारत जैसे दूसरे बड़े तेल आयातक देश चिंतित हैं। भारत की अर्थव्यवस्था और यहां के लोग कीमतों को लेकर बहुत संवेदनशील रहते हैं इसलिए आज कीमत को लेकर चिंता ज्यादा है।
भारत पर पड़ेगा नकारात्मक असर:-दरअसल भारत में तेल की दो तिहाई मांग इस क्षेत्र से पूरी होती है। यदि सऊदी अरब, ईरान और कुवैत के बीच किसी तरह से तनाव बढ़ेगा तो उसका असर भारत पर पड़ना तय है। यदि आप तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और बड़े पैमाने पर आयातित तेल पर निर्भर हैं तो बड़े पैमाने पर असर पड़ना तय है। कोई दूसरा देश आयात पर निर्भरता के मामले में भारत जैसी कमजोर स्थिति में नहीं है और ये सारी उथल-पुथल निश्चित तौर पर भारत पर असर डालेगी।
प्लांट ठीक होने में लगा समय तो तेल की कीमतों पर और पड़ेगा असर:-सऊदी अरब की अरामको कंपनी में हमले के बाद हुए नुकसान को ठीक करने के लिए काम शुरु कर दिया गया है। कंपनी की ओर से इस बारे में जानकारी दी गई है कि अगले कुछ दिनों में वो प्लांट को फिर से शुरु कर पाएंगे। लेकिन यदि यहां उत्पादन शुरु होने में और ज्यादा समय लगता है तो इससे तेल की कीमतों पर और असर पड़ेगा। हो सकता है कि इससे भारत में आयात की कीमत और बढ़ जाए। इन दिनों देश की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है, जीडीपी में गिरावट बताई जा रही है।अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत की मुश्किलें भी बढ़ेंगी। यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ेंगी। ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी तो इससे मैन्युफैक्चरिंग और एविएशन समेत कई उद्योगों पर असर पड़ेगा, इससे महंगाई और बढ़ जाएगी। यदि कच्चे तेल का डॉलर प्राइज बढ़ेगा तो भारत को उतने ही तेल के लिए और डॉलर खरीदने होंगे इससे डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत गिरेगी।
सऊदी के शांत बैठने से दूसरे देशों में बढ़ी है चिंता;-सऊदी अरब ने अब तक अपने यहां प्लांट पर हुए हमले का किसी तरह से जवाब नहीं दिया है, इसलिए अन्य देश चिंतित है। तेल आयात देशों का कहना है कि वो नहीं जानते कि सऊदियों के दिमाग में प्लांट पर हुए हमले का बदला लेने के लिए क्या चल रहा है? वो सैन्य तरीके से जवाब देंगे या बातचीत करके कुछ हल निकालेंगे। यदि सऊदी ने ईरान पर हमला किया तो इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा, जिससे इराक और ईरान समेत खाड़ी के पूरे क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित होगी।
जमीन के अंदर तेल भंडार;-भारत अपनी जरूरत का तीन चौथाई से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में किसी भी कारण के चलते विदेश से आ रहे तेल की आपूर्ति में जरा भी कमी उसके लिए भारी मुश्किल का सबब हो सकती है। यही वजह है कि इस तरह के सामरिक भंडार बनाने की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आइएसपीआरएल) अब तक तीन जगहों विशाखापत्तनम में 13.3 लाख टन, मंगलोर (कर्नाटक) में 15 लाख टन और पदुर (कर्नाटक) में 25 लाख टन क्षमता वाले भंडार विकसित कर चुकी है।
ऐसे हुई शुरुआत:-1973-74 में आए तेल संकट के बाद से अमेरिका ने 1975 में भूमिगत तेल भंडार बनाने की शुरुआत की थी। लुइसियाना और टेक्सास राज्य में भूमिगत रूप से बनाए गए तेल भंडार दुनिया की सबसे बड़ी आपातकालीन आपूर्ति है। मौजूदा समय में यहां करीब 8.7 करोड़ टन तेल स्टोर है। 1991 में पहले खाड़ी युद्ध के दौरान यहां से तेल का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद 2005 में कैटरीना तूफान और 2011 में लीबिया के साथ संबंध खराब होने के बाद एसपीआर का इस्तेमाल किया गया था।
सबसे बड़े भूमिगत तेल भंडार वाले देश;-अमेरिका के बाद दुनिया में कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा भूमिगत भंडार चीन के पास है। इस मामले में जापान तीसरे स्थान पर काबिज है।

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान में हिंदुओं के खिलाफ होने वाले अपराध बढ़ते जा रहे हैं। सड़क से पाक की नेशनल असेंबली तक में यह मुद्दा गूंज रहा है। सांसद व पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के सिंध की अल्पसंख्यक शाखा के प्रमुख खील दास कोहिस्तानी ने बुधवार को पाक की नेशनल असेंबली में कहा कि पिछले 4 महीनों में 25-30 हिंदू लड़कियों का अपहरण किया गया, वे कभी वापस नहीं आईं। पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ कब तक जारी रहेगा ये अत्याचार? यहां के हिंदुओं को कब तक लाशें उठानी पड़ेंगी? हमारे मंदिर कब तक जलते रहेंगे?
सिंध में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए:-कोहिस्तानी यहीं नहीं रुके उन्‍होंने आगे कहा कि सिंध के घोटकी और उमरकोट में ही ये घटनाएं क्यों हो रही हैं? अगर इन्‍हें समय रहते नहीं रोका गया, तो यह आग पूरे सिंध में फैल जाएगी। सिंध में कुछ लोग हैं जिन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उनकी शक्ति पर अंकुश लगाना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। इसी वजय से ये घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
हॉस्‍टल में मिला छात्रा का शव:-बता दें कि इससे पहले खील दास कोहिस्तानी ने ट्वीट कर कहा कि लरकाना के मेडिकल कॉलेज हॉस्टल से बीडीएस अंतिम वर्ष की छात्रा का शव मिला है जिसके साथ बर्बरता किए जाने के निशान मिले हैं। अल्पसंख्यकों की असुरक्षा और प्रताड़ना का एक और मामला।गौरतलब है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना में एक हिंदू मेडिकल छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंदेशा जताया कि छात्रा ने खुदकुशी की हो, लेकिन उसके परिजनों ने उसकी हत्या का आरोप लगाया है। यह मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो गया है और छात्रा के लिए इंसाफ की मांग की जा रही है। सत्‍तारूढ पार्टी इस मामले में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। ऐसे में लोगों को गुस्‍सा बढ़ता जा रहा है।

नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान शांति वार्ता रद्द किए जाने को लेकर तालिबान ने कहा है, 'अमेरिका ने हमारे हजारों लड़ाके मारे, हमने उनका एक सैनिक मार दिया तो वार्ता खत्म कर दी।' इस पूरे मसले पर तालिबान प्रवक्ता ने एक साक्षात्कार में खुलकर बात की। तालिबान के अनुसार, 'अफगानिस्तान में जंग का खात्मा अमेरिका और तालिबान दोनों के हित में है।'मालूम हो कि छह सितंबर को तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हमला कर एक अमेरिकी सैनिक और 11 अन्य लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान में तालिबान संग चल रही शांति वार्ता को खत्म करने का एलान कर दिया था। इसके बाद जैसा की तालिबान ने चेतावनी दी थी, उसने अफगानिस्तान में हमले तेज कर दिए हैं। ऐसे में अमेरिका के लिए तालिबान से सेना की वापसी और कठिन हो गई है।
वार्ता खत्म हुई, संघर्ष विराम नहीं हुआ:-एक तरफ तालिबान लगातार अमेरिकी सैनिकों को निशाना बना रहा है और दूसरी तरफ उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत दोबारा शुरू करने को कहा है। तालिबान के मुख्य वार्ताकार शेर मोहम्मद अब्बास ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका के लिए कहा है, 'वो कहते हैं कि उन्होंने हजारों तालिबान लड़ाकों को मारा है। इस दौरान एक अमेरिकी सैनिक मारा जाता है तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो इस तरह प्रतिक्रिया देंगे। क्योंकि दोनों पक्षों की ओर से कोई संघर्ष विराम हुआ ही नहीं है।'
बातचीत के दरवाजे अब भी खुले हैं;-तालिबान के मुख्य वार्ताकार ने कहा कि अफगानिस्तान में जंग का खात्मा अमेरिका और तालिबान दोनों के हित में है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को दोबारा शांति बहाली के लिए वार्ता शुरू करनी चाहिए। तालिबान, अमेरिका संग शांति वार्ता करने के लिए अभी भी तैयार है, क्योंकि बातचीत से ही शांति का रास्ता निकाला जा सकता है। तालिबानी वार्ताकार ने कहा, 'हमारी ओर से समझौता वार्ता के लिए दरवाजें खुले हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका भी शांति वार्ता खत्म करने के अपने फैसले पर दोबारा विचार करेगा।'
18 साल से जारी है संघर्ष:-मालूम हो कि अफगानिस्तान में अमेरिका और तालिबान के बीच 18 वर्षों से संघर्ष चल रहा है। सितंबर महीने की शुरूआत में ऐसा लग रहा था कि अमेरिका, तालिबान संग वार्ता कर किसी निर्णायक स्थिति में पहुंचने वाला है। दोनों के बीच समझौते के लिए आठ सितंबर को अहम वार्ता होनी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता के लिए तालिबान नेताओं और अफगानिस्तानी राष्ट्रपति अशरफ गनी को कैंप डेबिड आने का न्यौता दिया था। इससे ठीक एक दिन पहले सात सितंबर को ट्रंप ने शांति वार्ता खत्म करने का एलान कर दिया था। इसकी वजह छह सितंबर को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबानी हमले में मारा गया एक अमेरिकी सैनिक और 11 अन्य लोग थे। इस हमले से नाराज होकर ही ट्रंप ने वार्ता खत्म की थी।
वार्ता खत्म करने पर ट्रंप ने कहा था;-अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए अमेरिका और तालिबान के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है। छह सितंबर को हुए हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तालिबान संग शांति वार्ता खत्म करने के ऐलान के साथ कहा था, 'बातीचत के दौरान तालिबान यदि संघर्ष विराम के लिए राजी नहीं होता है तो इसका मतलब है कि तालिबान में संभवतः बातचीत करने की ताकत ही नहीं है।' वहीं तालिबान का कहना है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है।
अफगानिस्तान से US की सैन्य वापसी;-अमेरिका के मुख्य वार्ताकार रहे खलीलजाद ने दो सप्ताह पूर्व एक टीवी साक्षात्कार में कहा था कि US 20 हफ्ते में 5400 अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान से वापस बुलाना चाहता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार अफगानिस्तान से सेना की वापसी को लेकर बयान दे चुके हैं। हालांकि, अफगानिस्तान सरकार ऐसा नहीं चाहती है, क्योंकि अमेरिकी सैनिकों की वापसी से तालिबान और मजबूत होगा।
अमेरिका के लिए क्यों जरूरी है सैन्य वापसी:-अमेरिका के लिए अफगानिस्तान से अपनी सेना की वापसी बहुत जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक तरफ अमेरिका आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा, दूसरी तरफ अफगानिस्तान के सैन्य अभियान पर उसे काफी रकम खर्च करनी पड़ रही है। अमेरिका में इसे लेकर लोगों में काफी रोष है। ऐसे में आने वाले राष्ट्रपति चुनाव में अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी बड़ा मुद्दा बन सकता है। अगर डोनाल्‍ड ट्रंप अफगानिस्तान में शांति स्थापित कर, सैनिकों की वापसी कराने में सफल होते तो ये उनके चुनावी अभियान के लिए बड़ा एजेंड़ा हो सकता था। यही वजह है कि पिछले दिनों उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत अन्य एशियाई देशों को अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए आगे आने को कहा था।
अफगान सरकार से बात नहीं करना चाहता तालिबान;-अफगानिस्तान में शांति वार्ता के बीच एक बड़ा रोड़ा ये भी है कि तालिबान वहां की सरकार से सीधे बातचीत नहीं करना चाहता है। दरअसल, तालिबान अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी की सत्ता की सरकार को स्वीकार नहीं करता है। यही वजह है कि तालिबान अफगानिस्तान सरकार से सीधे बातचीत करने से पहले ही इंकार कर चुका है।
अगस्त में मारे गए 2307 लोग:-अफगानिस्तान में पिछले करीब डेढ़-दो माह से हिंसा चरम पर है। अकेले अगस्त महीने में अफगानिस्तान में कुल 611 हमले हुए, जिसमें कुल 2307 लोगों की मौत हुई और 1948 लोग घायल हुए थे। सबसे ज्यादा 162 लोग, 27 अगस्त 2019 को हुए एक हवाई हमले में मारे गए थे। मरने वालों में ज्यादातर तालिबान लड़ाके थे। आगे इस तरह के हमले और तेज होने वाले हैं। दरअसल, अफगानिस्तान में इसी माह के अंत में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। माना जा रहा है कि तालिबान इससे पहले यहां हमले और तेज कर सकता है।

इस्लामाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 से 27 सितंबर तक अमेरिका यात्रा पर जाने वाले हैं। भारत ने इसके लिए पाकिस्तान से उसकी एयरस्‍पेस के इस्‍तेमाल की इजाजत मांगी है। पाकिस्तान मीडिया के हवाले ये खबर सामने आई है कि भारत ने पाकिस्तान से औपचारिक रूप से अनुरोध किया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूयॉर्क जाने के लिए अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति दे। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, इमरान सरकार सलाह-मशविरे के बाद इस पर फैसला ले सकती है।बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के संबंध बिगड़े हुए हैं। जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। यही कारण है कि पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को पूरी तरह से बंद कर दिया है। तभी से भारत आने वाली या भारत से जाने वाली सभी फ्लाइटें दूसरे रूट से जा रही हैं।गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 सितंबर को अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में हाउडी मोदी कार्यक्रम में 50 हजार भारतीय-अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करने वाले हैं। विदेश में पीएम मोदी का ये अब तक का सबसे बड़ा इवेंट बताया जा रहा है। इसके अलावा पीएम मोदी 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGC) में भी भाषण देने वाले हैं।

इस्‍लामाबाद। खुद को मानवाधिकार का बड़ा पैरोकार होने का दिखावा करने वाले पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री इमरान खान बुधवार को उनके देश के नेताओं ने ही आइना दिखा दिया। विपक्ष के नेताओं ने संसद में अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ हो रहे अत्‍याचारों का मुद्दा उठाया। विपक्षी नेताओं ने साफ कहा कि पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों पर हो रहे हमले चिंताजनक हैं। घोटकी की घटना को लेकर हिंदू समुदाय में बहुत चिंता है। पाकिस्‍तानी अखबार द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल एसेंबली के सत्र के दौरान पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग नवाज के नेता ख्‍वाजा आसिफ ने कहा कि घोटकी की घटना को लेकर हिंदू समुदाय में भय और चिंता का माहौल है। उत्पीड़न के खिलाफ अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करना हमारा कर्तव्य है। अल्‍पसंख्‍यकों की सुरक्षा होनी चाहिए क्‍योंकि वे वफादार पाकिस्तानी लोग हैं। बता दें कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी जिले में हिंदू समुदाय के लोगों पर लगातार हमले हो रहे हैं। जिले के एक स्कूल के हिंदू प्रधानाचार्य पर एक नाबालिग छात्र की ओर से ईशनिंदा के आरोप लगाए गए जिसके बाद से हमले शुरू हो गए हैं। घोटकी, आदिलपुर, मीरपुर माथेलो जैसे शहरों में स्थिति तनावपूर्ण है। प्रशासन की ओर से अल्‍पसंख्‍यकों को घरों के भीतर ही रहने के लिए कहा गया है। ईशनिंदा के आरोपों के बाद उग्र प्रदर्शनकारियों ने तीन मंदिरों, एक प्राइवेट स्कूल और हिंदुओं के कई घरों में तोड़फोड़ की थी। ऐसा नहीं की पाकिस्‍तानी प्रशासन हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर फ‍िक्रमंद है। पुलिस उल्‍टे उन हिंदुओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर रही है जो खुद उत्‍पीड़न के शिकार हो रहे हैं। सिंध पब्लिक स्‍कूल के शिक्षक नोतल मल के खिलाफ भी पुलिस ने ईश निंदा के आरोप में एफआइआर दर्ज कर ली है।

इस्लामाबाद। भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके, इसके लिए पाकिस्तान की इमरान सरकार हर मौके पर झूठ के पुलिंदे बांध रही है। दुनिया के हर बड़े प्लेटफार्म पर हार के बाद भी पाकिस्तान कश्मीर का रोना रो रहा है। भारत सरकार द्वारा Article 370 को हटा देने के बाद पाकिस्तान की आतंकी साजिशों को नुकसान पहुंचा, जहां वो चाहता है कि भारत अपना फैसला वापल लेले।हालांकि, पाकिस्तान का…
टोक्‍यो। पूर्वी जापान में शक्तिशाली तूफान से यहां का जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित है। इसके चलते पूर्वी जापान के बड़े हिस्‍से में विद्युत आपूर्ति बाधित है। यहां करीब 80,000 हजार घर अंधेरे में डूब चुके हैं। राष्‍ट्रीय मौसम एजेंसी ने सोमवार को चिबा में भारी बारिश के लिए चेतावनी जारी किया है। भूस्‍खलन की आशंका को देखते हुए करीब 50 हजार लोगों को घर छोड़ने का आदेश दिया गया…
इस्‍लामाबाद। खुद को कश्‍मीरी मुस्लिमों का हमदर्द बताने वाले पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री का दोहरा चरित्र सामने आ गया है। दरअसल, अल जजीरा को दिए इंटरव्‍यू में जब इमरान खान से चीन में हो रहे उइगर मुसलमानों के दमन को लेकर तीखा सवाल पूछा गया तो उन्‍होंने चीन की आलोचना करने की बजाए इस सवाल को ही गोलमोल करके टाल गए। साक्षात्‍कार में जब पत्रकार मोहम्‍मद जमजूम ने इमरान खान से पूछा…
लंदन। ब्रिटेन ने सोमवार को कहा कि सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हमला तेल संयंत्रों पर हमला गंभीर और अपमानजनक है, लेकिन ब्रिटेन ने कहा कि प्रतिक्रिया देने से पहले इस हमले के लिए कौन जिम्मेदार था, इस पर पूर्ण तथ्यों की आवश्यकता जरूरी है।ब्रिटेन ने दिया बयान;-ब्रिटिश विदेश सचिव डॉमिनिक रैब ने कहा, 'यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन था। ब्रिटेन ने साथ ही कहा है कि वह…
Page 1 of 70

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें