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नई दिल्‍ली। श्रीलंका, रविवार को चर्च और होटलों में हुए सिलसिलेवार धमाकों से दहल गया। इसमें कम से कम 156 लोगों की मौत हो गई है जबकि 400 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। इन हमलों की भारत समेत पूरी दुनिया भर में निंदा हो रही है। भारत ने कहा है कि हमारे क्षेत्र में ऐसी बर्बरता के लिए कोई जगह नहीं है। हम स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं इन हमलों की कड़ी निंदा करता हूं। हमारे क्षेत्र में इस तरह की बर्बरता के लिए कोई जगह नहीं है। भारत इस मुश्किल वक्‍त में श्रीलंका के लोगों के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है। मेरी संवेदना शोक संतप्त परिवारों के साथ है। मैं इन हमलों में घायल हुए लोगों के जल्‍द स्‍वस्‍थ्‍य होने की कामना करता हूं। भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने हमलों पर दुख जताते हुए कहा कि ईस्टर रविवार के पवित्र मौके पर कोलंबो में हुए धमाकों में हताहत मासूम नागरिकों और उनके परिजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है। मैं घायलों के जल्‍द स्‍वस्‍थ्‍य होने की कामना करता हूं। ईश्वर पीडि़त परिजनों को शोक की इस घड़ी में धैर्य और साहस दें। श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने भी धमाकों पर गहरा शोक जताया है और देशवासियों से शांति की अपील की है।वहीं भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने कहा है कि मैं कोलंबो स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में हूं। हम हालात पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। संकट में पड़े भारतीय कोलंबो में भारतीय उच्चायोग से संपर्क कर सकते हैं। हम आपको सभी जरूरी मदद मुहैया कराएंगे। पाकिस्‍तान ने भी इन हमलों की निंदा करते हुए कहा है कि वह इस मुश्किल घड़ी में श्रीलंका सरकार और वहां के लोगों के साथ खड़ा है। पाकिस्‍तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता मोहम्‍मद फैजल ने कहा कि वह ऐसे आतंकी हमलों की निंदा करते हैं। आतंकवाद के खिलाफ वह श्रीलंका की सरकार के साथ खड़े हैं। भारतीय नेताओं में ममता बनर्जी, शशि थरूर और सुखबीर सिंह बादल ने भी इन हमलों की निंदा की है।

न्यूयॉर्क। भारत और अमेरिका की नौसेना ने हिंद महासागर में संयुक्त युद्धाभ्यास किया है। दोनों देशों के बीच 15 अप्रैल को शुरू हुआ यह पनडुब्बी रोधी युद्धाभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता के मद्देनजर आयोजित किया गया।इस युद्धाभ्यास में मिसाइल विध्वंसक अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस स्प्रूंस के अलावा भारत और अमेरिका के पी-8 पनडुब्बी रोधी लड़ाकू विमानों ने भी हिस्सा लिया। डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिकी नौसेना के सातवें बेड़े ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस युद्धाभ्यास में भारत के पी-8आई नेपच्यून लड़ाकू विमान भी शामिल थे।यूएसएस स्प्रूंस के कमांडर मैथ्यू स्मिट ने कहा, 'हम भारतीय दल के पेशेवर तरीके और उनकी योग्यता से काफी प्रभावित हुए।' हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की लगातार बढ़ती सक्रियता के मद्देनजर पिछले साल जून में गुआम तट से सटे समुद्र में अमेरिका, भारत और जापान ने संयुक्त युद्धाभ्यास किया था। भारत और अमेरिका 1992 से ही संयुक्त युद्धाभ्यास कर रहे हैं। 2015 में जापान भी इसमें शामिल हो गया था।

बीजिंग। अंतरराष्ट्रीय समुद्री परेड में हिस्सा लेने के लिए भारत के दो युद्धपोत आइएनएस कोलकाता और आइएनएस शक्ति चीन के किंगदाओ शहर पहुंच गए हैं। सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल से लैश आइएनएस कोलकाता का नेतृत्व कैप्टन आदित्य हारा और आइएनएस शक्ति का नेतृत्व कैप्टन श्रीराम शंकर कर रहे हैं।
चीन की नौसेना की 70वीं वर्षगांठ:-चीन की नौसेना अपनी 70वीं वर्षगांठ के मौके पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री परेड का आयोजन कर रही है। इसमें नौसेना के पोतों, विमानों और पनडुब्बियों की परेड होती है। 23 अप्रैल को होने वाली इस परेड में भारत, रूस, थाइलैंड और वियतनाम समेत दस देशों के पोत शामिल होंगे।
विवादित इलाके से गुजरा युद्धपोत:-चीन तक के इस सफर में दोनों भारतीय पोत चीन और ताइवान को अलग करने वाले विवादित ताइवान स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) से होकर गुजरे। इस पर चीन अपना दावा करता है। कैप्टन आदित्य हारा ने कहा कि उन्हें इस स्ट्रेट से गुजरने में कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि चीन के जहाज उनकी सहायता के लिए वहां मौजूद थे।
पाकिस्तान का जहाज नहीं होगा शामिल;-पाकिस्तानी नौसेना का कोई पोत इस परेड का हिस्सा नहीं बनेगा। हालांकि पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल किंगदाओ में 21 से 26 अप्रैल तक होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। चीनी नौसेना के इस जश्न में 60 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।

लाहौर। पाकिस्तान ने पहली बार 1919 के जालियांवाला बाग नरसंहार से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इस वीभत्स कांड की 100वीं बरसी पर लाहौर हेरिटेज म्यूजियम में छह दिवसीय प्रदर्शनी लगाई गई है। शनिवार को शुरू हुई इस प्रदर्शनी में जालियांवाला बाग कांड और तत्कालीन पंजाब में मार्शल लॉ (सैन्य शासन) लागू किए जाने से संबंधित 70 दुर्लभ दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया है। 13 अप्रैल, 1919 को बैसाखी के मौके पर सैकड़ों भारतीय स्वतंत्रता की मांग करने के लिए अमृतसर के जालियांवाला बाग में इकट्ठा हुए थे। जनरल डायर ने अपने सैनिकों को उन पर गोलियां बरसाने का आदेश दिया था जिसमें सैकड़ों की जान गई थी।पाकिस्तान में अभी तक इस नरसंहार के किसी भी दस्तावेज को सार्वजनिक नहीं किया गया था। पंजाब प्रांत के लेखागार विभाग के निदेशक अब्बास चुगतई ने कहा, 'सरकार ने आम नागरिकों के सामने उन दस्तावेजों को इसलिए रखा है ताकि वह उस समय की घटनाओं को जान पाएं।'
ये दस्तावेज हैं शामिल:-जिन दस्तावेजों की प्रदर्शनी लगाई गई है उनमें मार्शल लॉ के तहत दिए गए आदेश, लाहौर के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ रहे 47 छात्रों को निष्कासित करने का आदेश और क्रांतिकारी लेखक मुहम्मद बशीर को सुनाई गई सजा पर हाउस ऑफ लॉ‌र्ड्स (ब्रिटेन संसद का उच्च सदन) के सदस्य लॉर्ड सिडेनहमीन द्वारा उठाए गए सवालों से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। नरसंहार में मरने वालों की संख्या से जुड़े कई दस्तावेज भी सार्वजनिक किए गए हैं।
पिछले साल भगत सिंह से जुड़े दस्तावेज किए थे सार्वजनिक:-पिछले साल लाहौर में क्रांतिकारी भगत सिंह पर चले मुकदमे से संबंधित दस्तावेजों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। चुगतई ने बताया कि मशहूर किताब 'द जंगल बुक' के लेखक व पत्रकार रुडयार्ड किपलिंग से जुड़े दस्तावेज भी सार्वजनिक करने की तैयारी की जा रही है।

लंदन। पासवर्ड को लेकर जागरूकता की तमाम कोशिशों के बाद भी लोग आसान पासवर्ड का रास्ता नहीं छोड़ रहे हैं। एक अध्ययन के मुताबिक लाखों लोग आज भी पासवर्ड के रूप में '123456' और 'क्यूडब्ल्यूईआरटीवाई यानी क्वर्टी' (की-बोर्ड के शुरुआती छह अक्षर) का इस्तेमाल करते हैं।ब्रिटेन के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (एनसीएससी) ने लोगों में जागरूकता की कमी को लेकर अध्ययन किया है। जागरूकता की यह कमी उन्हें गंभीर साइबर हमलों का शिकार बना सकती है। एनसीएससी ने ऐसे अकाउंट के डाटाबेस का अध्ययन किया है, जिनमें हैकर्स ने सेंध लगाई है। अध्ययनकर्ताओं ने यह पता लगाने की कोशिश की कि लोग पासवर्ड के तौर पर किन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इसमें पाया गया कि 2.3 करोड़ मामलों में पासवर्ड के तौर पर '123456' का प्रयोग किया गया था।दूसरे नंबर पर '123456789' का इस्तेमाल किया गया। इनके अलावा टॉप पांच पासवर्ड में 'क्यूडब्ल्यूईआरटीवाई', 'पासवर्ड' और '1111111' शामिल रहे। पासवर्ड के रूप में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला नाम 'एश्ले' है। इसके बाद 'माइकल', 'डेनियल', 'जेसिका' और 'चार्ली' का नंबर रहा। कई लोग पासवर्ड के तौर पर अपने यहां की स्थानीय फुटबॉल टीम का नाम इस्तेमाल करते हैं, तो बहुत से लोग किसी लोकप्रिय गाने के बोल का।इन सभी पासवर्ड को बहुत आसानी से हैक किया जा सकता है। एनसीएससी के टेक्निकल डायरेक्टर इयान लेवी ने कहा कि किसी को अपना संवेदनशील डाटा ऐसे पासवर्ड के भरोसे पर नहीं छोड़ना चाहिए, जिसका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता हो। अपने नाम, फोन नंबर, सीधी गिनतियों या अन्य प्रसिद्ध नामों का इस्तेमाल पासवर्ड के रूप में नहीं करना चाहिए। इन सभी पासवर्ड का आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है और अकाउंट हैक किया जा सकता है।

कोलंबो। Serial Blasts In Sri Lanka श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के पुलिस प्रमुख ने 10 दिन पहले ही इनपुट दिया था कि देश में बम धमाकों के जरिए बड़े हमले हो सकते हैं। अलर्ट में कहा गया था कि फिदायीन हमलावर देश के प्रमुख चर्चों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं। खुफिया रिपोर्ट की मानें तो कोलंबो में भारतीय उच्चायोग भी हमलावरों के निशाने पर था। यही नहीं इन हमलों के पीछे एक मुस्लिम संगठन का हाथ होने का संदेह जताया जा रहा है।रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस प्रमुख पुजुथ जयसुंदर ने 11 अप्रैल को ही देश के आला अधिकारियों को इनपुट भेजा था जिसमें ऐसे हमलों की आशंका जताई गई थी। उक्‍त अलर्ट में एक विदेशी इंटेलीजेंस एजेंसी का भी इनपुट जोड़ा गया था। ताजा इनपुट में कहा गया था कि नेशनल तौहीत जमात (एनटीजे) नामक संगठन श्रीलंका के अहम गिरजाघरों को निशाना बनाने की ताक में है। यही नहीं ऐसे हमलों के निशाने पर भारतीय दूतावास भी है। बता दें कि नेशनल तौहीत जमात एक चरमपंथी मुस्लिम चरमपंथी संगठन है। श्रीलंका में पिछले साल बौद्ध प्रतिमाओं के विध्‍वंस की घटनाओं में इस संगठन का नाम सामने आया था।बता दें कि श्रीलंका इस्टर के मौके पर रविवार को सीरियल बम धमाकों से दहल गया। राजधानी कोलंबो समेत कुल आठ जगहों पर हुए सीरियल बम धमाकों में 156 लोग मारे गए हैं। मरने वालों की संख्‍या लगातार बढ़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि 7वां धमाका दक्षिणी कोलंबो के देहिवाला में एक होटल में हुआ है, जिसमें दो लोगों की मौत हुई है। आठवें धमाके की जानकारी सामने नहीं आई है।

 

 

वाशिंगटन। भारत में 2005 में घोषणा की गई थी कि कुष्ठ पर हमने विजय पा ली है। लेकिन आगे चलकर यह दावा खोखला साबित हुआ। हां, उस दौरान देश में कुष्ठ उन्मूलन को लेकर चले अभियान के तहत संक्रमण को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफलता मिली थी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं था। भारत में कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉक्टर अनिल कुमार इस विफलता के लिए देश में…
इस्लामाबाद। चीन के 'टेक्निकल होल्ड' पर कायम रहने के एलान के बाद पाकिस्तान ने कहा कि आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर वह किसी के दबाव में नहीं आएगा।पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मुहम्मद फैजल ने गुरुवार को कहा कि अजहर पर पाकिस्तान का रुख एकदम साफ है। मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचाने के लिए…
खार्तूम। सूडान की राजधानी खार्तूम में सेना मुख्‍यालय परिसर के बहार प्रदर्शनकारियों ने देश के नए सैन्‍य शासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सूडान में मौजूदा सैन्‍य शासन की मुखालफत कर रहे हैं। उनकी मांग है जल्‍द ही सूडान में नागरिक प्रशासन की बहाली की जाए। सूडानी नागरिकों के इस विरोध के बीच गुरुवार को सैन्‍य नेताओं द्वारा राजनीतिक कैदियों की रिहाई और देश में कर्फ्यू समाप्‍त करने का…
जोहानसबर्ग। पूर्वी दक्षिण अफ्रीकी शहर डरबन के नजदीक एक चर्च की छत गिर गई जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई जबकि कम से कम 16 लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि घटना के दौरान चर्च में लोग जमा थे। हादसे की वजह भारी बारिश बताई जा रही है। सरकारी प्रवक्‍ता लेनोक्‍स मबासो ने बताया कि यह हादसा उत्‍तरी डरबन के डैंगुबो कस्‍बे में हुआ।बता दें…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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