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कराची। जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव ने रिव्यू पिटीशन दाखिल करने से इनकार कर दिया है। समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार पाकिस्तान ने यह दावा किया। साथ ही यह भी कहा है कि उसने जाधव को दूसरा काउंसुलर एक्सेस देने की पेशकश की है। पाकिस्तान के एडिशन अटॉर्नी जनरल के अनुसार 17 जून 2020 को कुलभूषण जाधव को सजा पर पुनर्विचार के लिए एक याचिका दायर करने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने याचिका दायर करने से इनकार कर दिया। समाचार एजेंसी एएनआइ ने पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से जानकारी दी है कि जाधव ने इसके बजाय अपनी लंबित दया याचिका का पालन करने की बात कही। हालांकि, भारत की तरफ से इसे लेकर अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है।बता दें कि पाकिस्तान का दावा है कि जाधव को उसके सुरक्षाबलों ने ईरान से घुसने के बाद 3 मार्च, 2016 को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया था। हालांकि, भारत के अनुसार व्यापार के सिलसिले में ईरान गए जाधव को अगवा किया गया था। पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा भारतीय नौसेना के अधिकारी जाधव को अप्रैल 2017 में कथित तौर पर जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। बाद में भारत ने जाधव की सजा के खिलाफ हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आइसीजे) में अपील की थी। जहां पाकिस्तान को करारी हार मिली।भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने कुलभूषण मामले में विएना संधी का उल्लंघन किया है। तकरीबन दो वर्ष दो महीने तक आइसीजे में यह मामला चला। इसके बाद 18 जुलाई 2019 को कोर्ट के 16 सदस्यीय न्यायाधीशों की पीठ ने भारत के हक में फैसला सुनाया। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने साफ तौर किया कि दूसरे देश के अधिकारी या सैन्यकर्मी को पकड़े जाने पर लागू विएना समझौते के मुताबिक पाकिस्तान ने कदम नहीं उठाए। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाधव की का केस वकील हरीश साल्वे लड़े थे। कोर्ट ने मामले में पाकिस्तान को जाधव की सजा की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार करने को कहा था। साथ ही बगैर किसी देरी के कांसुलर एक्सेस प्रदान करने की भी बात कही थी।

बीजिंग। आस्‍ट्रेलिया द्वारा अपने नागरिकों को चीन न जाने के लिए एक एडवाइजरी जारी करने की घटना को चीन ने हास्‍यास्‍पद करार दिया है। चीन का कहना है कि ये न केवल हास्‍यास्‍पद है बल्कि चीन के प्रति एक तरह से दुष्‍प्रचार करने की भी कोशिश है। दरअसल एक दिन पहले ही आस्‍ट्रेलिया ने अपने नागरिकों के लिए एक ट्रेवल एडवाइजरी जारी की थी। इसमें चीन जाने या वहां जाने का प्‍लान बनाने वाले आस्‍ट्रेलियाई नागरिकों को आगाह किया गया था कि वे ऐसा न करें। एपी के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया था क्‍योंकि आस्‍ट्रेलिया मानता है कि वर्तमान में चीन के हालात ऐसे नहीं हैं जहां पर उसके नागरिकों का जाना सही हो। एडवाइजरी में कहा गया था कि चीन में विदेशियों को मनघड़ंत तरीके से हिरासत में लिया जा रहा है, इसलिए नागरिक वहां न जाएं। आस्‍ट्रेलिया का ये भी कहना था कि चीन की तरफ से ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्‍योंकि वो मानता है कि ये विदेशी लोग उसकी राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं।चीन ने इस एडवाइजरी पर न सिर्फ नाराजगी जाहिर की है बल्कि इसको चीन के खिलाफ एक दुष्‍प्रचार भी बताया है। रॉयटर्स के मुताबिक चीन की तरफ से कहा गया है कि चीन में रहने वाला हर विदेशी नागरिक, जिसमें आस्‍ट्रेलियाई भी शामिल हैं, चीन के नियम कानूनों का पालन करने पर लंबे समय तक रह सकते हैं। ऐसे किसी भी विदेशी नागरिक को चीन में आने या रहने से डरने की कोई जरूरत नहीं है। चीन की तरफ से जारी ये बयान उसकी अपनी वेबसाइट पर भी मौजूद है।

 

बीजिंग। चीन का अमेरिका से टकराव और तेज होता जा रहा है। चीन ने तिब्बत पर अहंकारी व्यवहार का हवाला देते हुए अमेरिकी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाया है। चीन का यह कदम अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो की उस घोषणा के बाद सामने आया है जिसमें चीन के अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाए जाने की बात कही गई है। अमेरिका ने तिब्‍बत एक्‍ट के विरोध स्‍वरूप उक्‍त कदम उठाए जाने की बात कही थी। अमेरिका के इस कदम को गलत बताते हुए चीन ने कहा कि उसने फैसला किया है कि वह उन अमेरिकी अधिकारियों को वीजा नहीं देगा जिन्‍होंने तिब्‍बत से जुड़े मामलों में बुरा बर्ताव किया है।चीन के इस कदम को अमेरिका के खिलाफ बदले की कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। चीन की इस घोषणा से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा था क‍ि मैं आज चीन की सरकार और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंधों की घोषणा कर रहा हूं जो तिब्बती क्षेत्रों में विदेशियों की पहुंच से संबंधित नीतियों के निर्माण या क्रियान्वयन में शामिल हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि उनका यह कदम ‘रेसिप्रोकल एक्सेस टू तिब्बत कानून (तिब्बत में पारस्परिक पहुंच कानून) 2018' के अनुरूप है। उन्‍होंने यह भी कहा कि चीन द्वारा तिब्बत में किए जा रहे मानवाधिकार हनन के मामलों को देखते हुए तिब्बती इलाकों तक पहुंच महत्वपूर्ण होती जा रही है।अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका तिब्‍बत में सतत आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण को गति देने और चीन से बाहर तिब्बती समुदाय की स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम करता रहेगा। अमेरिका तिब्बति लोगों की सार्थक स्वायत्तता के लिए और उनके बुनियादी मानवाधिकारों के लिए, उनके विशिष्ट धर्म, संस्कृति और भाषायी पहचान को बरकरार रखने के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। पोंपियो ने यह भी कहा कि कहा कि चीन, तिब्बत स्वायत्त एवं अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी राजनयिकों, अधिकारियों, पत्रकारों और पर्यटकों को जाने से जानबूझकर रोकता रहा है।

वाशिंगटन। पूरी दुनिया में अमेरिका कोरोना महामारी से बुरी तरह से पीडि़त हैं। यहां पर इससे संक्रमित मरीजों की संख्‍या 30 लाख को भी पार कर चुकी है वहीं 1.30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के एक बयान ने सभी को हैरान कर दिया है। उन्‍होंने कहा है कि देश में कोरोना वायरस का खतरा कम हो रहा है और उन्‍होंने इसकी गंभीरता को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि देश में करीब एक करोड़ लोगों का टेस्‍ट किया जा चुका है। इनमें से कई लोगों में इसकी पुष्टि होने के बावजूद करीब 99 फीसद मरीज पूरी तरह हार्मलैस हैं।उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब देश में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। उनके इस बयान से हर कोई हैरान है। एनवाईटी पब्लिक हेल्‍थ ऑफिशियल के हवाले से लिखा है कि करीब 28 लाख अमेरिकी ऐसे हैं जिनमें संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों का तो यहां तक कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीजों की वास्तविक संख्या इससे 10 गुना अधिक हो सकती है।राष्‍ट्रपति ट्रंप का कहना है कि किसी दूसरे देश ने इतने बड़े पैमाने पर लोगों की टेस्टिंग नहीं की है जितनी अमेरिका में हुई हैं। उनके मुताबिक देश में अब तक 4 करोड़ लोगों का टेस्‍ट किया जा चुका है। उनके मुताबिक इनमें से 99 फीसद मरीजों को कोई खतरा नहीं है। उन्‍होंने ये भी कहा कि इतने बड़े पैमाने पर आंकड़े भी किसी अन्‍य देश ने प्रस्‍तुत नहीं किए हैं। हालांकि ट्रंप के इन बयानों को एक्‍सपर्ट बेबुनियाद मानते हैं।

नई दिल्ली। चीन की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कोरोना से परेशान दुनियाभर के देश पहले से ही चीन के खिलाफ हुए है। हांगकांग में सुरक्षा कानून लागू किए जाने की बात से ही वहां के हजारों लोग सड़क पर उतरे हुए हैं वो इसे मानना नहीं चाहते हैं। अब चीन के उइगर मुसलमान भी चीन के खिलाफ है।दरअसल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी वहां रहने वाले उइगर मुसलमानों पर भी तरह-तरह से जुल्म ढाती है। यहां उनको अपने इस्लाम का पालन करने तक में मनाही है। यहां की मस्जिदों पर अरबी में उनका नाम तक लिखना मना है। जो कुछ भी लिखा होगा वो चीनी भाषा में ही लिखा जाएगा। यहां तक की कुरान को भी अरबी में पढ़ना मना है। मुस्लिमों के लिए उसे भी कम्युनिस्ट सरकार चीनी भाषा में अलग से छपवाती है।अपने ऊपर तमाम तरह से कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से किए जा रहे जुल्मों के खिलाफ अब उइगर मुसलमान अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट की शरण में जाने का मन बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में वो अपने ऊपर कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से किए जा रहे इस तरह के जुल्मों से अवगत कराएंगे। कम्युनिस्ट पार्टी यहां मुस्लिमों को उनके हिसाब से नमाज तक अदा नहीं करने देती है।लंदन स्थित वकीलों की एक टीम ने दो उइगर कार्यकर्ता समूहों के माध्यम से बीजिंग की ओर से उइगर मुसलमानों पर किए जा रहे अत्याचार की रिपोर्ट फाइल की है। बीजिंग की ओर से यहां रहने वाले उइगर मुसलमानों को पकड़कर उनको कंबोडिया और ताजिकिस्तान में प्रत्यर्पित कर दिया जाता है। इस तरह के कई और जुल्म यहां रहने वाले उइगर मुसलमानों पर कई सालों से किए जा रहे हैं।अब इस तरह के मामले के अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट में उठाए जाने से चीन की और भद्द पिटनी तय है। वकीलों की 80 पेज की फाइलिंग में 30 से अधिक चीनी अधिकारियों की सूची शामिल है, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि वे उइगर मुसलमानों पर किए जा रहे अत्याचार के लिए जिम्मेदार थे, जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी के नेता शी जिनपिंग भी शामिल हैं। चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुसलमानों की संख्या सर्वाधिक है, यहां पर इनकी आबादी लगभग 10 लाख है।

मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न समेत विभिन्न क्षेत्रों में लॉकडाउन फिर से लागू कर दिया गया है। पिछेल 24 घंटों में कोरोना के 191 नए मामले सामने आने के बाद यह निर्णय लिया गया है, जिसके मुताबिक मेलबर्न समेत विक्टोरिया राज्य के कई कस्बों में लॉकडाउन 6 हफ्तों के लिए फिर से लागू कर दिया गया है।लोगों को सिर्फ कुछ कामों के लिए ही घर से बाहर निकलने की इजाजत दी गई है। इस दौरान जरूरी सामान खरीदने, दवाइयां खरीदने, व्यायाम और अध्ययन कार्यों के लिए ही लोगों को घर से बाहर निकलने की अनुमति होगी।विक्टोरिया के प्रीमियर डैनियल एंड्रयूज ने कहा, "सार्वजनिक स्वास्थ्य टीमों ने तीसरे चरण के लॉकडाउन की सलाह दी है और कल रात आधी रात से अगले छह हफ्तों तक के लिए यह प्रभावी रहेगा।" उन्होंने कहा कि अब इस स्थिति में और कोई विकल्प नहीं है।विक्टोरिया में कोरोना के 722 एक्टिव मामलों के साथ, अब तक 22 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। हालांकि पिछले 24 घंटों में मौत का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। इस बीच, न्यू साउथ वेल्स 100 सालों में पहली बार विक्टोरिया के साथ अपनी सीमा को बंद करने के लिए तैयार हुआ है। पुलिस मंगलवार आधी रात से दोनों राज्यों के बीच 55 बोर्डरों की निगरानी करने के लिए मेलबर्न और आस-पास के इलाकों में गश्त पर रहेगी।
ऑस्ट्रेलिया में कोरोना के 8,755 मामले:-ऑस्ट्रेलिया में अभी तक कोरोना के 8,755 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 106 लोगों की मौत अब तक यहां इस घातक वायरस से हो चुकी है।
दुनियाभर में अब तक 1.16 करोड़ लोग आए कोरोना की चपेट में;-दुनियाभर में अब तक कोरोना की चपेट में 1 करोड़ 16 लाख 26 हजार 2 सौ 65 लोग आ चुके हैं, वहीं इस घातक वायरस के कारण 5 लाख 38 हजार 1 सौ 72 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके अलावा 63 लाख 4 हजार 3 सौ 28 लोग संक्रमण से ठीक हुए हैं।

नई दिल्ली। हांगकांग में चीनी सरकार के खिलाफ काफी लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहा है। हांगकांग के लोग विरोध प्रदर्शन के लिए हर माध्यम का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसमें सोशल मीडिया भी शामिल है।जनवरी माह से ही यहां के हजारों निवासी चीन सरकार के लाए जाने वाले नए कानून के खिलाफ विरोध कर रहे थे। मार्च माह में कोरोना संक्रमण फैल गया, जिसके कारण पूरी दुनिया परेशान…
हांगकांग। पूर्वी लद्दाख में पिछले महीने भारत और चीन के बीच खूनी सैन्य झड़प ने उभरते भारत को लेकर ड्रैगन के सामरिक आकलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे दोनों एटमी ताकतों के बीच हिंसक संघर्ष का खतरा भी बढ़ गया है। साउथ चाइना मार्निग पोस्ट में प्रकाशित एक विश्लेषण में यह बात कही गई है।पूर्व राजनयिक शी जियांगताओ ने इस लेख में कहा है कि चीन पहले से…
लंदन। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन की वजह से ब्रिटेन के करीब 13 विश्वविद्यालय सरकार से बेलआउट पैकेज मिले बिना अपना अस्तित्व बरकरार नहीं रख सकेंगे। ये विश्वविद्यालय देश के करीब पांच फीसद छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हैं। द इंस्टीट्यूट ऑफ फिस्कल स्टडीज (आइएफएस) का अनुमान है कि ब्रिटेन के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए दीर्घकालीन नुकसान तीन अरब पाउंड…
इस्लामाबाद। गैर-सरकारी संगठन के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी ने न केवल पाकिस्तान में महिलाओं को आर्थिक रूप से प्रभावित किया है, बल्कि उनके खिलाफ हिंसा की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। डॉन अख़बार के हवाले से कहा गया है कि औरात फ़ाउंडेशन की परियोजना अधिकारी यासमीन मुग़ल, जो महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करती हैं, उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में तेजी आई है।बलूचिस्तान…
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