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हेल्सिंकी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन(Vladimir Putin) ने अमेरिका को चेतावनी दी है। अमेरिका द्वारा हाल ही में एक मिसाइल का परीक्षण करने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिका के इस कदम से उनके देश के लिए नए खतरे पैदा हो गए हैं। पुतिने ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि रूस इसके जवाब जरूर देगा।एफे समाचार की सूचना के मुताबिक बुधवार को यहां फिनिश राष्ट्रपति सूली निइनिस्टो के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुतिन ने कहा कि हम अमेरिका के इस कदम से रूसी सरकार निराश है क्योंकि अमेरिका ने यह नया मिसाइल परीक्षण 1987 के इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर प्रॉपर्टीज (INF) को औपचारिक रूप से त्यागने के तीन सप्ताह से कम समय में किया है। पुतिन ने कहा कि संधि से हटने के बाद अमेरिकियों ने इस मिसाइल का बहुत तेज़ी से परीक्षण किया है।
'अमेरिकी खतरे का देंगे जवाब';-पुतिन ने आगे कहा, 'हमें इस बात पर विश्वास करने का मजबूत कारण है कि उन्होंने संधि से बाहर निकलने के बहाने की तलाश शुरू करने से पहले समुद्र में प्रक्षेपित मिसाइल पर काम करना शुरू कर दिया था।' रूस के लिए पुतिन ने कहा कि अमेरिकी परीक्षण नए खतरों की ओर संकेत दे रहा है, जिसका हम जल्द जवाब देंगे।' हालांकि उन्होंने रूस की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात भी कही।

वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता के अधिकार को खत्म करने की तैयारी में जुट गए हैं। उन्होंने बुधवार को कहा कि वह अमेरिका में जन्म लेने वाले उन बच्चों के नागरिकता के अधिकार को खत्म करने के बारे में गंभीरता से विचार कर रहे हैं, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। ट्रंप अगर इस अधिकार को समाप्त कर देते हैं तो इससे बड़ी संख्या में भारतीय भी प्रभावित होंगे।जन्म के आधार पर नागरिकता के बारे में पूछे गए एक सवाल पर ट्रंप ने कहा, 'हम इस पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहे हैं। साफ तौर पर कहूं तो यह बकवास है।' ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि वह जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता के अधिकार को खत्म कर देंगे।
अमेरिकी संविधान ने दिया है अधिकार:-अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में अमेरिका में जन्म लेने वाले ऐसे बच्चों को भी देश की नागरिकता देने की गारंटी दी गई है, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं हैं।
शरणार्थी परिवारों को बंदी बनाने के नए नियम का एलान;-ट्रंप प्रशासन ने बुधवार को एक नियम का एलान किया, जिससे अमेरिका के इमिग्रेशन अधिकारियों को शरणार्थी परिवारों को अनिश्चितकाल तक बंदी बनाए रखने का अधिकार मिल जाएगा। नए नियमोंे से शरणार्थी परिवारों के बच्चों को 20 दिन से ज्यादा हिरासत में रखने का प्रावधान भी खत्म हो गया है। अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने इन नियमों की घोषणा की है।वर्ष 2017 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ही ट्रंप ने अमेरिका में अवैध रूप से दाखिल होने वाले शरणार्थियों को लेकर सख्त रुख अपना रखा है। अमेरिका में शरणार्थियों को दाखिल होने से रोकने के लिए वह मेक्सिको से लगती सीमा पर दीवार भी बनवा रहे हैं।
जानिए- आगे क्या हो सकता है;-ट्रंप का मानना है कि आव्रजन पर ध्यान केंद्रित करने से समर्थकों को नए सिरे से ऊर्जा मिलेगी और रिपब्लिकन सदस्यों को संसद पर अपना नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलेगी। जन्म के आधार पर मिली नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को खत्म करने के मुद्दे को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इसमें संविधान के संशोधन को बदलने की राष्ट्रपति की एकपक्षीय क्षमता पर सवाल उठ सकते हैं। अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन अमेरिका में जन्मे बच्चों को अमेरिकी नागरिकता के अधिकार की गारंटी देता है। ऐसे किसी कार्यकारी आदेश की वैधानिकता के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस के वकील इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं।

न्‍यूजीलैंड। न्‍यूजीलैंड के एक पुरुष सांसद ने पितृत्‍व अवकाश के बाद संसद में बच्‍चे के साथ पहुंचकर कार्यवाही में हिस्‍सा लिया। दरअसल, न्‍यूजीलैंड संसद में पितृत्‍व अवकाश के बाद सांसद अपने बच्‍चे को लेकर बुधवार की कार्यवाही में हिस्‍सा लेने पहुंचे। इतना ही नहीं सांसद टमाटी कॉफे (Tamattey Coffey) जब कार्यवाही के दौरान अपना पक्ष रख रहे थे तो उस वक्‍त उनके नन्‍हे से बेटे को संसद के स्‍पीकर ट्रेवर मलार्ड (Trevor Mallard) को प्रसन्‍नता पूर्वक बोतल से दूध पिलाते हुए देखा गया।सबसे पहले न्‍यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डन ने ऐसा काम किया। पिछले साल संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में वे अपने साथ बच्‍चे को लेकर पहुंची और इतिहास रच दिया।संसद अध्‍यक्ष ट्रेवर मलार्ड ने ट्वीट कर खुशी जाहिर की और टमाटी कॉफे को पिता बनने की बधाई दी। ट्वीट में उन्‍होंने बताया, ‘सामान्‍य तौर पर स्‍पीकर की कुर्सी पर केवल अध्‍यक्ष का अधिकार होता है लेकिन आज एक वीआइपी ने मेरी कुर्सी शेयर की।’न्‍यूजीलैंड संसद के अध्‍यक्ष की यह तस्‍वीर को सैंकड़ो लाइक मिल चुके हैं। साथ ही उनके इस काम की दुनिया में प्रशंसा की जा रही है। एक ट्वीटर यूजर ने कहा है,’न्‍यूजीलैंड है छोटा देश लेकिन इससे पूरी दुनिया को दे रहा अच्‍छी सीख।‘कुछ माह पहले ही केन्या के संसद में महिला सांसद जुलेका हसन को पांच माह के बच्‍चे को साथ लेकर आने पर संसद से निकाल दिया गया था क्‍योंकि संसद के नियमों के मुताबिक चैंबर में अजनबी के प्रवेश पर रोक है। हालांकि जुलेका ने तर्क भी दिया था कि घर में कुछ इमरजेंसी थी जिसकी वजह से उन्‍हें बच्‍चे को साथ लाना पड़ा।

नई दिल्‍ली। जम्‍मू कश्‍मीर के मसले पर अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट में जाने का मन बना चुके पाकिस्‍तान की हालत किसी से छिपी नहीं है। प्रधानमंत्री इमरान खान की बात करें तो वह जब से सत्‍ता पर काबिज हुए हैं तब से ही देश आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। महंगाई की मार से देश का आम आदमी परेशान है। आपको बता दें कि इमरान खान नए पाकिस्‍तान का सपना दिखाकर सत्‍ता में आए थे। उनके मुताबिक इस नए पाकिस्‍तान में विकास होना था, रोजगार के अवसर बढ़ने थे देश के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की नीतियों का फायदा पहुंचना था। लेकिन सरकार के एक साल गुजरने के बाद भी यह वायदे फिलहाल महज वायदे ही बनकर रह गए हैं। इसको लेकर देश की जनता में आक्रोश है। इतना ही नहीं पाकिस्‍तान के सभी प्रांत सरकार के खिलाफ बिगुल बजाते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में देश की राजनीति में कश्‍मीर का मुद्दा उछालकर इमरान खान ने अपने हाथ जलने से फिलहाल बचा लिए हैं। इसको समझने के लिए इन बातों पर गौर करना बेहद जरूरी होगा।
देश की खराब हालत से लोगों का ध्‍यान भटकाना:-कश्‍मीर मुद्दे को हवा देना इमरान के लिए फिलहाल फायदे का सौदा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि वर्तमान में देश आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। देश में जरूरी चीजों की कीमतें इमरान खान की सरकार आने के बाद बेतहाशा बढ़ी हैं। आलम ये हैं कि दूध से लेकर नान, ब्रेड रोटी तक भी आम आदमी से दूर हो रही हैं। देश के आम लोगों में इसको लेकर जबरदस्‍त नाराजगी है। इतना ही नहीं भारत से संबंध तोड़ने के बाद देश की महंगाई में और इजाफा हुआ है। इस फैसले के बाद पाकिस्‍तान के लोगों ने इमरान खान से यहां तक पूछ लिया कि भारत से संबंध तोड़ने के बाद क्‍या अब वो घास खाएंगे। इमरान खान की सरकार बनने के बाद देश में मुद्रास्फिति की दर दहाई के आंकड़े को पार कर गई है। देश के गुस्‍से को भांपते हुए इमरान खान के लिए यह जरूरी था कि वहां की आवाम का ध्‍यान किसी दूसरे मुद्दे से भटकाया जाए। कश्‍मीर इसके लिए सबसे बड़ा और अच्‍छा जरिया था। इस मुद्दे ने इमरान की सोच के मुताबिक काम भी किया है।
अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर इस मुद्दे का प्रभाव;-अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी इस मुद्दे ने दूसरे मुद्दों को छोटा बनाने का काम किया है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि आतंकवाद के मुद्दे पर न सिर्फ अमेरिका बल्कि कई देशों ने पाकिस्‍तान को सीधेतौर पर कटघरे में खड़ा किया है। एफएटीएफ की तलवार भी इसी मुद्दे पर पाकिस्‍तान के ऊपर लटकी है। कुछ माह बाद इसकी एक अहम बैठक भी होनी है, जिसमें पाकिस्‍तान को काली सूची में डालने पर विचार किया जाएगा। एफएटीएफ ने माना है कि पाकिस्‍तान ने आतंकवाद पर वो कार्रवाई नहीं की है जो उसको करनी चाहिए थी, लिहाजा उसको अब तक निगरानी सूची में डाला हुआ है। यदि आने वाले दिनों में उसको काली सूची में डाल दिया गया तो वहां पर बाहरी देश निवेश करने से अपने हाथ खींच लेंगे। यह पाकिस्‍तान के बहुत बुरा साबित होगा। इमरान खान द्वारा उठाए गए कश्‍मीर के मुद्दे ने पाकिस्‍तान में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई मंचों पर ध्‍यान को भटकाने का काम किया है। पाकिस्‍तान इस बात को भलीभांति जानता है कि अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट में ले जाने के बाद भी उसको निराशा ही हाथ लगनी है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि भारत का पक्ष हमेशा से ही इस विषय पर बेहद मजबूत रहा है।
सेना के हाथों मजबूर;-कश्‍मीर को लेकर इमरान खान सेना के हाथों मजबूर हैं। दरअसल, सेना हमेशा से ही देश की सर्वोच्‍च ताकत रही है। देश में सबसे अधिक समय तक स्थिर शासन देने वालों में सैन्‍यशासक ही रहे हैं। ऐसे में सेना ही देश की कमान किसके हाथों में होगी यह तय करने का काम करती रही है। इमरान खान ने पिछले वर्ष जब अगस्‍त में सत्‍ता संभाली थी तब हर तरफ इसी बात की चर्चा थी कि इमरान को सत्‍ता की दहलीज तक पहुंचाने वाली सेना ही है। कश्‍मीर और भारत की बात करें तो पाकिस्‍तान में इसको लेकर रणनीति भी सेना के हाथों बनती और बदलती आई है। जब-जब किसी पीएम ने इसमें खुद से बदलाव करने की कोशिश की तो उसका हाल नवाज शरीफ या जुल्‍फीकार अली भुट्टो जैसा ही हुआ है। वर्तमान में भी इस नीति में कुछ नहीं बदला है। यही वजह है कि इमरान खान इस मुद्दे पर खुद से कोई फैसला न तो कर सकते हैं और न ही उनकी इतनी क्षमता है। यहां पर उन्‍हें अपनी सत्‍ता छिन जाने का भी डर है।
ढाका का बदला:-दिसंबर 1971 को पाकिस्‍तान आज तक अपने दिल और दिमाग से नहीं निकाल सका है। 1971 में ही भारत के दखल के बाद बांग्‍लादेश आजाद हुआ और एक राष्‍ट्र के तौर पर उसकी अलग पहचान बनी। पाकिस्‍तान की हमेशा से ही ये कोशिश रही है कि वह इसका बदला ले। वहां के नेताओं की जुबान पर बांग्‍लादेश के अलग होने का दर्द कई बार सार्वजनिक तौर पर सामने आया है। जहां तक जम्‍मू कश्‍मीर का प्रश्‍न है तो पाकिस्‍तान की पूरी सियासत कश्‍मीर पर टिकी है। इसके आगे और पीछे उसके लिए कुछ और नहीं है। इसी कोशिश के मद्देनजर वह जम्‍मू कश्‍मीर में आतंकवाद को फलने-फूलने में पूरी मदद करता है। इसके ही मद्देनजर वह अपनी जमीन पर युवाओं के हाथों में बंदूक थमाकर भारतीय सीमा में उनकी घुसपैठ करवाता है जेहाद के नाम पर लोगों को मारने की ट्रेनिंग देता है। पाकिस्‍तान ऐसा दशकों से करता आया है।

वा‍शिंगटन। भारत और अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों के बीच एशिया-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र से जुड़ी समुद्री सुरक्षा एवं उसके उपायों पर अपने-अपने विचार साझा करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह जानकारी देते हुए कहा कि दो दिवसीय वार्ता का मकसद दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाना है। भले ही वार्ता सचिव स्‍तर की हो, लेकिन भारत और अमेरिका के लिए यह बेहद संवेदनशील मामला है। सामरिक लिहाज से यह पूरा समुद्री इलाका बेहद अहम है। इसलिए इस समुद्री क्षेत्र पर चीन की भी पैनी नजर रहती है। दोनों देशों की वार्ता पर ड्रैगन की पैनी नजर होगी, क्‍योंकि यह इलाका सामरिक लिहाज से चीन के लिए काफी उपयोगी है। आखिर इस समुद्री इलाके का क्‍या है सामरकि महत्‍व। किस तरह से चीन, भारत को चारों तरफ से घेर रहा है। आदि-आदि।दक्षिण और मध्‍य एशियाई मामले के लिए सहायक सचिव एलिस वेन्‍स और एशियाई प्रशांत क्षेत्र मामलों के रक्षा सचिव के सहायक रान्‍डेल अपने भारतीय समकक्ष के साथ वर्ता कर रहे हैं। विदेश विभाग ने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए यह वार्ता काफी अहम है। एशिया प्रशांत एवं हिंद महासागर में चीन की दिलचस्‍पी को देखते हुए यह बैठक अहम मानी जा रही है। जिस तरह से इस समुद्री इलाके में चीन का दखल बढ़ रहा है, उससे यहां सामरिक संतुलन काे खतरा उत्‍पन्‍न हो गया है।
भारतीय नेवी चीफ ने कहा कि चीन का दखल खतरे की घंटी;-गत माह हिंद महासागर में चीन की नौसेना के बढ़ते दखल पर भारतीय नौसेना ने भी चिंता जाहिर की थी। भारतीय नेवी चीफ ऐडमिरल करमबीर सिंह ने कहा था कि अब भारतीय सेनाओं को चनी को जवाब देने का वक्‍त आ गया है। उन्‍होंने कहा कि चीन ने अपनी पीपल्‍स लिबरेशन आर्मी की नेवी इकाई को अत्‍याधुनिक हथियार एवं संसाधन भेजे हैं। चीन के इस प्‍लान से भारत को सतर्क हो जाना चाहिए। जुलाई में चीन ने अपने सैन्‍य विकास के लिए एक श्‍वेत पत्र जारी किया था। नेवी चीफ ने इसे भारत के लिए खतरे की घंटी करार दिया था।
श्रीलंका पर प्रभुत्‍व कायम करने की पहल;-चीन बहुत सोची समझी रणनीति के तहत इस इलाके में अपना प्रभुत्‍व कायम कर रहा है। इस क्रम में उसने द्वीपीय देशों के साथ सैन्‍य संबंधों को मजबूत करने की कोशिश में जुटा है। हिंद महासागर में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए उसने श्रीलंका को एक युद्ध पोत गिफ्ट कर उसे अपने करीब लाने की पहल वह कर चुका है। इसी तरह से श्रीलंका में रेल के डिब्‍बे और इंजन बनाने की कंपनी बनाने की घोषणा करके अपनी नीति को आगे बढ़ा रहा है।श्रीलंका पर भारी कर्ज थोपने के बाद चीन ने वर्ष 2017 में उसका हंबनटोटा पोर्ट का अधिग्रहण कर लिया। उसके बाद से ही उसकी नजर इस क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाने पर है। चीन लगातार हिंद महासागर में नौसेना मौजूदगी बढ़ा रहा है। श्रीलंका के जिबूती में एक बेस तैयार कर चुका है। इसे चीन अपना लॉजिस्टिक्‍स बेस बताता है।
पाकिस्‍तान से गाढ़ी दोस्‍ती भारत के लिए खतरा;-पाकिस्‍तान में चीन का बढ़ता हस्‍तेक्षप भी भारत के लिए खतरे की घंटी है। कराची में नौसैनिक टर्नअराउंड सुविधाएं जारी रखने के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसेना के घुसपैठ को नजरअंदाज करना भारत के लिए बहुत जोखिम भरा हो सकता है। इस क्षेत्र में चीन ने अपने छह से आठ युद्धपोत लगा रखे हैं। इस तरह से चीन ने हाल ही में म्‍यामांर में बंगाल की खाड़ी पर बंदरगाह निर्माण करने के लिए बड़ा निवेश कर रहा है। सामरिक दृष्टि से यह इलाका बे‍हद अहम है। हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में अपना प्रभुत्‍व कायम कर वह भारत को घेरने की तैयारी में है।

सियोल। उत्तर कोरिया ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से परमाणु वार्ता पर बिल्कुल भी बातचीत नहीं करेगा. इसके पीछे की वजह बताते हुए उत्तर कोरिया की तरफ से कहा गया है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य चाल से बाज नहीं आएगा तब तक वह इस वार्ता के लिए तैयार नहीं होगा। बता दें कि उत्तर कोरिया लगातार परमाणु हथियार बना रहा है. इसका विरोध लगातार यूएस की तरफ से हो रहा है. इसी के संदर्भ में दोनों देशों के बीच कलह बना हुआ है।
अमेरिका परमाणु वार्ता पर पहले भी कर चुका है बैठक;-उत्तर कोरिया की तरफ से आए बयान में कहा गया है कि वह परमाणु हाथियार बनाने का काम बिल्कुल नहीं बंद करेगा। इसके साथ ही इस बयान में कहा गया कि अमेरिका के राजदूत ने नोर्थ कोरिया की राजधानी फियोंगयांग में परमाणु वार्ता करने के लिए दौरा किया था। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच परमाणु हाथियार को रोकने के लिए डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के साथ वियतनाम की राजधानी हनोई में बैठक हुई थी, लेकिन दोनों देशों के बीच कोई भी समझौता नहीं हो पाया था।
दोनों देशों की बैठक में बनीं थी सहमति;-इससे पहले भी उतर कोरिया और अमेरिका की बातचीत परमाणु वार्ता के लिए शुरू हुई थी। इस बैठक में दोनों देश बातचीत करने के लिए भी तैयार हो गए थे, लेकिन दोबारा इस विषय पर बातचीत नहीं हुई। दरअसल इस बीच उत्तर कोरिया ने मिसाइल परीक्षण किया था, जिसके बाद दोनों देशों की बातचीत संभव नही हो पाई।
अमेरिका ने उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण का दिया ऐसे जवाब;-उत्तर कोरिया ने जैसे ही अपनी तरफ से मिसाइल परीक्षण किया तो उसके जबाव में अमेरिका ने उसके इस क्रूज मिसाइल परीक्षण पर हमला किया। जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनातनी बनी हुई है।

 

 

ह्यूस्टन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) अगले महीने 27 सितंबर को अमेरिका (America) के दौरे पर जाने वाले हैं। पीएम मोदी यहां पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ( United Nations General Assembly) में भाग लेंगे। इससे पहले पीएम मोदी ह्यूस्टन जाएंगे, जहां पर उनके लिए एक मेगा कार्यक्रम 'हाउडी, मोदी' (Howdy, Modi) का आयोजन किया जा रहा है। पीएम मोदी को सुनने के लिए लगभग 50 हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन…
बीजिंग। चीनी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि हांगकांग में ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास के कार्यकर्ता को कानून का उल्लंघन करने के लिए चीन के सीमावर्ती शहर शेनझेन में हिरासत में लिया गया है। मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने एक समाचार ब्रीफिंग में यह टिप्पणी की।वहीं ब्रिटेन ने मंगलवार को कहा कि वह उन रिपोर्टों से बेहद चिंतित है, जिसमें हांगकांग के अपने पूर्व उपनिवेश में वाणिज्य दूतावास…
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने को लेकर जहां पाकिस्तान की बौखलाहट कम होने का नाम नहीं ले रही, वहीं पाकिस्तान का ही एक बुद्धिजीवी वर्ग उसके इस रवैये से काफी चिंतित है। इन लोगों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल हुआ है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पाकिस्तानी के जाने-माने पत्रकार हसन निसार और लंबे अर्से से भारत में रह रहे पाकिस्तानी गायक अदनान समी ने अपने…
नई दिल्‍ली। टैंकों से लगातार हो रही फायरिंग, खंडहर में तब्‍दील हुए मकान और उठता हुआ धुएं का गुबार... यह दुनिया की पुरानी सभ्‍यताओं में शुमार उस देश की तस्‍वीरें हैं जो आतंकवाद की मार से बर्बादी के कगार पर है। नाम है सीरिया जो बीते आठ वर्षों से बमों, मिसाइलों और केमिकल हमलों की मार झेल रहा है। मुल्‍क की आबादी महज एक करोड़ 94 लाख है लेकिन इसमें…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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