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नई दिल्ली - अमेरिकी प्रशासन एच1बी वीजा के तहत रोजगार समेत अन्य नियमों में बदलाव करने जा रहा है। अगर इन नियमों में बदलाव किया जाता है, तो इससे भारत की आईटी कंपनियों पर बुरा असर पड़ेगा। इसके साथ ही उन छोटी कंपनियों पर भी बुरा असर पड़ेगा, जिनकी कमान भारतीय-अमेरिकी लोगों के हाथों में है।
एच1बी वीजा विशेष तरह का वीजा है, जिसकी मदद से अमेरिकी कंपनियां खास तरह की विशेषज्ञता वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखती हैं। इस वीजा की मदद से अमेरिकी टेक कंपनियां भारत और चीन जैसे देश से हर साल हजारों की संख्या में कर्मचारियों को नौकरी पर रखती हैं।
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) ने बुधवार को कहा कि जनवरी 2019 तक यूएस सिटीजनशिप एंड इमाइग्रेशन सर्विसेज की योजना नए प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने की है। विभाग के मुताबिक वीजा के नियमों में किया जा रहा बदलाव ज्यादा प्रतिभावान विदेशी नागरिकों को मौका देने के लिए है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक नियमों में इसलिए बदलाव किया जा रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि मौजूदा नियमों की वजह से अमेरिकी कंपनी स्थानीय लोगों को नौकरी पर नहीं रखकर विदेशी लोगों से काम करवा रही हैं।
ट्रंप ने साफ तौर पर कहा था कि वह एच 4 वीजा होल्डर्स को जारी किए गए वर्क परमिट को वापस लेंगे। सरकार के इस फैसले से आम तौर पर भारतीय-अमेरिकी मूल के लोग प्रभावित होंगे। इसके साथ ही भारतीय आईटी कंपनियों की सेहत पर इसका खासा असर पड़ेगा, जो ओबामा के समय से अब तक सबसे बड़े लाभार्थी रहे हैं।


नई दिल्ली - यस बैंक के सीईओ राणा कपूर को अपना पद चार महीने में ही छोड़ना पड़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने कपूर के कार्यकाल बढ़ाने के चल रहे कयासों पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया है कि 1 फरवरी 2019 तक बैंक को राणा कपूर की जगह दूसरी नियुक्ति करनी होगी। आरबीआई ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी देते हुए यह बताया। आपको बता दें कि आरबीआई इससे पहले एक्सिस बैंक की शिखा शर्मा के मामले में भी इसी तरह की सख्ती दिखा चुका है।
शेयरहोल्डर कार्यकाल बढ़ाने की कर रहे थे मांग
भारतीय रिजर्व बैंक के इस फैसले से उन शेयरहोल्डर्स को झटका लगा है, जो मांग कर रहे थे कि यस बैंक के सीईओ के तौर पर राणा कपूर के कार्यकाल को कम से कम तीन साल के लिए बढ़ाया जाए लेकिन ऐसा नहीं हो सका। आरबीआई ने बैंकिंग अप्वाइंटिंग कमेटी को कह दिया है कि वो राणा कपूर की जगह किसी और के नियुक्ति की प्रोसेस दिसंबर मध्य तक पूरा कर लें। ताकि समय से राणा कपूर की जगह दूसरे की नियुक्ति हो सके।
13 साल में 28 फीसदी की ग्रोथ
राणा कपूर पिछले 13 सालों से यस बैंक से जुड़े हुए थे। उन्होंने साल 2004 में अशोक कपूर के साथ मिलकर यस बैंक की शुरुआत की थी। आपको बता दें कि राणा कपूर के नेतृत्व में बैंक ने बीते 13 साल में 28 फीसदी की सालाना ग्रोथ दर्ज की है।
बैंकिंग सीईओज पर RBI की सख्ती जारी
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब भारतीय रिजर्व बैंक ने किसी बैंक के मुखिया का कार्यकाल बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इससे पहले एक्सिस बैंक की सीईओ शिखा शर्मा के कार्यकाल को भी बढ़ाने से रिजर्व बैंक ने साफ इनकार कर दिया था। दरअसल बीते कुछ सालों में बैंकिंग सेक्टर में जिस तरह से बैंक एनपीए के बढ़ते बोझ को कम नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में आरबीआई ने बैंकिंग सेक्टर की सेहत को दुरूस्त करने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं।


नई दिल्ली - दशहरा के मौके पर वाहन चालकों व मालिकों के लिए एक अच्छी खबर है कि पेट्रोल और डीजल के दाम में कमी आई है। गुरुवार को पेट्रोल जहां 21 पैसे प्रति लीटर सस्ता हो गया तो डीजल की कीमत भी 11 पैसे प्रति लीटर घट गई। इससे पहले बुधवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहीं।
इंडियन ऑयल की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में गुरुवार को पेट्रोल का दाम 21 पैसे घटकर क्रमश: 82.62 रुपये, 84.44 रुपये, 88.०8 रुपये और 85.88 रुपये प्रति लीटर हो गया। वहीं, चारों महानगरों में डीजल गुरुवार को क्रमश: 75.58 रुपये, 77.43 रुपये, 79.24 रुपये और 79.93 रुपये प्रति लीटर था।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है। न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर अमेरिकी लाइट क्रूड डब्ल्यूटीआई का भाव गुरुवार को 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।
वहीं, ब्रेंट क्रूड भी इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर 80 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसला। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव अमेरिका में तेल का भंडार बढ़ने की रिपोर्ट के बाद लुढ़का है।
अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी ईआईए के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिकी में कच्चे तेल के भंडार में 65 लाख बैरल का इजाफा हुआ और तेल का भंडार 41.61 करोड़ बैरल हो गया।
दशहरा का अवकाश होने के कारण गुरुवार को घरेलू वायदा बाजार में दिन के सत्र के दौरान कारोबार बंद रहा। हालांकि, शाम और देर रात के सत्र के दौरान कारोबार खुला रहेगा।


नई दिल्ली - जेट एयरवेज को संकट से उबारने के लिए टाटा ग्रुप इसमें बड़ी हिस्सेदारी खरीद सकती है। एक अंग्रेजी अखबार के हवाले से यह खबर सामने आई है। हिस्सेदारी खरीदने को लेकर टाटा ग्रुप और जेट एयरवेज के बीच बातचीत की शुरुआत हो चुकी है।
बता दें कि जेट एयरवेज अपने पायलटों को सैलरी देने में लगातार देरी कर चुकी है। इसके अलावा एयरलाइन अन्य कर्मचारियों को भी सैलरी नहीं दे पा रही है। ऐसे में कर्ज के संकट से निकलने के लिए कंपनी अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। लेकिन, अब टाटा ग्रुप की पैरंट कंपनी टाटा संस इसे अपने हाथ में लेने का फैसला किया है। हालांकि टाटा ग्रुप ने इसपर कोई कमेंट करने से इनकार किया है, जबकि जेट ने इसे पूरी तरह से काल्पनिक बताया है।
बता दें कि जेट के चेयरमैन नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनिता के पास जेट का 51 फीसद शेयर है। टाटा ग्रुप गोयल और उनकी पत्नी से कम-से-कम 26 फीसद हिस्सेदारी खरीदना चाहेगा। इससे उसके पास जेट के अन्य शेयरधारकों से और 26 फीसद शेयर खरीदने का मौका बन जाएगा।
इसके अलावा अबू धाबी की कंपनी एतिहाद एयरवेज की भी जेट में 24 फीसद हिस्सेदारी है। इसी महीने जेट की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए एतिहाद ने जेट को 3.5 अरब डॉलर दिए थे।
गौरतलब है कि टाटा पहले से ही एविएशन सेक्टर में उतरी हुई है। उसके पास दो वेंचर हैं। पहला वेंचर सिंगापुर एयरलाइंस के साथ है जो विस्तारा का संचालन करती है जबकि दूसरे वेंचर से एयर एशिया का संचालन होता है। अगर टाटा जेट की हिस्सेदारी खरीदती है तो एतिहाद जेट की अपनी पूरी या आंशिक हिस्सेदारी बेच सकती है।


ब्रसेल्स - यूरोपीय संघ (ईयू) ने ब्रेक्जिट पर नवंबर में होने वाली अहम बैठक को रद कर दिया है। ईयू का कहना है कि बैठक से पहले कुछ मसलों पर अभी और तैयारियां करना बाकी है इसलिए नवंबर में ब्रेक्जिट मुद्दे पर बैठक करने की अभी योजना नहीं है। यह सूचना गुरुवार को सार्वजनिक हुई।
ईएफई न्यूज के मुताबिक, ईयू के प्रमुख वार्ताकार माइकल बार्नियर ने कहा,'यदि इस मुद्दे पर निर्णायक प्रगति होती है तो वह यूरोपीय परिषद की बैठक बुलाने के लिए तैयार हैं। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने ब्रसेल्स में बुधवार को ब्रेक्जिट पर ईयू के 27 देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष अपनी बात रखी थी, लेकिन ईयू और ब्रिटेन के बीच नवंबर को होने वाली बैठक के लिए कोई सहमति नहीं बन सकी।
ईयू परिषद के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क पहले ही कह चुके थे कि अक्टूबर बैठक सच्चाई का पल है। यह अगली बैठक की दिशा तय करेगी। अगर मुझे लगा कि हम नवंबर की बैठक में समझौते को औपचारिक तौर पर अंतिम रूप देने में कामयाब होंगे, तभी बैठक बुलाई जाएगी।

 


नई दिल्ली - लोकसभा चुनाव से पहले भारत और इसकी सरकार को लक्ष्य कर चीन और पाकिस्तान से चलाए जा रहे दुष्प्रचार का जबाब देने के लिए केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश से लेकर राजस्थान की सीमा तक डेढ़ दर्जन एफएम चैनल शुरू किए हैं। हाल में दोनों पड़ोसी देशों से भारत विरोधी दुष्प्रचार बढ़ने के बाद यह कदम उठाया गया है। पाक सीमा के करीब जम्मू-कश्मीर में उच्च शक्ति वाला एक ट्रांसमीटर भी लगाया गया है, ताकि डीडी कश्मीर की पहुंच को व्यापक बनाकर पाक के चैनलों का झूठ बेनकाब किया जा सके।
चीन और पाकिस्तान से भारत विरोधी दुष्प्रचार पहले भी होता रहा है, लेकिन अब उसे राजनीतिक रंग भी दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन देशों से भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में मोदी सरकार को लक्ष्य कर चीनी ट्रासमीटरों से प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। इसमें डोकाला में चीन की जीत और भारत के दावे को गलत बताया जा रहा है। खास बात यह है कि चीन से भारतीय भाषाओं में भी प्रचार किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश में स्थानीय भाषा का इस्तेमाल कर चीन यह भी बता रहा है कि वह उसी का हिस्सा है और उसकी भाषा का चीन पूरी तरह सम्मान करता है।
पाक टीवी चैनलों को भी जबाब :
इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में उच्च शक्ति वाला एक ट्रांसमीटर लगाया गया है जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में डीडी कशीर की पहुंच को बढ़ाया गया है। इन क्षेत्रों में पाक टीवी चैनलों की व्यापक पहुंच है और वहां से भारत विरोधी जहर उगला जा रहा है।
भारत से ज्यादा मोदी सरकार पर निशाना
पाकिस्तान की तरफ से सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़े कर भारत में सीमावर्ती लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। पिछले कुछ महीनों से दोनों पड़ोसी देश भारत से ज्यादा मोदी सरकार को निशाना बना रहे है। इससे निपटने के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश में आठ, नेपाल से लगती सीमा पर बिहार और उत्तर प्रदेश में पांच, जम्मू-कश्मीर में तीन और पाक सीमा पर राजस्थान में दो एफएम चैनल शुरू किए हैं। इन चैनलों से चीन और पाकिस्तान के दुष्प्रचार का करारा जबाब दिया जा रहा है।

 


नई दिल्‍ली - कभी आतंकी ओसामा बिन लादेन का इंटरव्यू लेकर सुर्खियां बटोरने वाले सऊदी के पत्रकार जमाल खाशोगी की नृशंस हत्‍या की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है। कुछ समय पहले उनके अचानक से लापता होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद अमेरिका ने सऊदी अरब को चेतावनी भी दी थी कि यदि उसने खाशोगी के साथ कुछ गलत किया तो वह बर्दाश्‍त नहीं करेगा। लेकिन अमेरिका की कोई धमकी काम नहीं आई। काफी समय से खाशोगी और सऊदी अरब के शासकों के बीच तनाव चल रहा था। इसकी वजह यह थी उन्‍होंने सऊदी अरब के शासकों की कई गलतियों पर अंगुली उठाई थी। आपको बता दें कि 1987 और 1995 में उन्‍होंने आतंकी ओसामा बिन लादेन का इंटरव्‍यू किया था। खाशोगी की हत्‍या के बाद बदले माहौल में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अमेरिका का साथ देते हुए 22 से रियाद में शुरू हो रहे फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव समिट का बहिष्‍कार कर दिया है।
कौन हैं जमाल खाशोगी
जमाल सऊदी में लंबे वक्त से पत्रकारिता कर रहे हैं। सुन्नी शासकों के के खिलाफ लिखने की वजह से वह हमेशा ही विवादों में रहे। जब सऊदी की कमान क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के हाथों में आई तो वह खुद निर्वासन लेकर अमेरिका चले गए थे। फिलहाल वह वॉशिंगटन पोस्ट के लिए लिख रहे थे। अखबार ने उनके आखिरी आर्टिकल को भी अपने ताजा अंक में प्रकाशित किया है।
सऊदी दूतावास से गायब हुए थे खाशोगी
जमाल हाल ही में सऊदी के वाणिज्य दूतावास गए थे जिसके बाद वह गायब हो गए। वह अपनी तुर्की की मंगेतर से शादी करना चाहते थे। इसके लिए उन्‍हें कागजी कार्रवाई करनी थी जिसको लेकर वह 28 सितंबर को तुर्की में स्थित सऊदी दूतावास गए। दूतावास की तरफ से उन्हें दोबारा दो अक्टूबर को बुलाया गया था। दो अक्‍टूबर को वह अपनी मंगेतर के साथ दूतावास पहुंचे थे। लेकिन मंगेतर दूतावास के बाहर उनका इंतजार करती रही वह दूतावास से बाहर ही नहीं निकले। इसको लेकर सऊदी और तुर्की दोनों में तनाव बढ़ गया है। तुर्की अधिकारियों का आरोप है कि सऊदी ने दूतावास में ही जमाल को मार दिया है। उन्होंने अपने पास कुछ विडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा भी किया है। वहीं सऊदी अरब ने इसमें किसी तरह का हाथ होने का खंडन किया है।
हत्‍या से पहले दी गई यातना
तुर्की मीडिया के मुताबिक इस्तांबुल स्थित रियाद के वाणिज्य दूतावास के भीतर सऊदी पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या से पहले उन्हें यातना दी गई। अखबार ने कहा कि उसने इससे संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनी है। येनी सफाक अखबार ने दावा किया है कि दूतावास में खाशोगी से पूछताछ के दौरान उनकी अंगुलियां काट दी गईं।उनका सिर धड़ से अलग कर शरीर के टुकड़े कर दिए गए। तुर्की का यह भी कहना है कि खाशोगी की हत्‍या में सऊदी अधिकारियों की विशेष टीम का हाथ है। इतना ही नहीं वाशिंगटन पोस्ट ने भी तुर्की की तरफ एक ऑडियो विडियो का जिक्र किया है। दरअसल, जिस ऑडियो विडियो की बात यहां पर की जा रही है उसके बारे में तर्क यह दिया जा रहा है कि यातना के समय खाशोगी ने एप्‍पल वाच पहन रखी थी, जिसमें यह सबकुछ रिकॉर्ड हो गया। हालांकि इस बारे में अभी तस्‍वीर पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है।
टेप में सुनाई दी ये बातें
तुर्की के अखबार येनी सफाक के मुताबिक खाशोगी को यातना के दौरान एक टेप में इस्तांबुल में सऊदी अरब के वाणिज्य दूत मोहम्मद अल ओतैबी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘यह काम बाहर करो। आप मुझे परेशानी में डालने जा रहे हो। अखबार का यह भी कहना है कि एक दूसरे टेप में एक अंजान व्यक्ति ओतैबी से यह कहते सुनाई देता है, ‘यदि तुम जीवित रहना चाहते हो तो जब तुम सऊदी अरब आओ तो चुप रहना।’ अखबार ने यह नहीं बताया कि ये टेप किस तरह सामने आए और उसे कैसे हासिल हुए।
इनपर है शक
खाशोगी की गुमशुदगी से लेकर उनकी हत्‍या तक के बीच एक व्‍यक्ति पर शक की सूंई जा रही है। पहला संदिग्ध मेहर अब्दुल अजीज मुतरेब एक डिप्लोमेट है जिसे 2007 में लंदन में सऊदी दूतावास में भेजा गया था। मुतरेब को प्रिंस सलमान के साथ विमान से उतरते हुए फोटो में भी देखा गया। अल- हरबी और अलजहरानी की पहचान सऊदी रॉयल गार्ड के सदस्य के रूप में की गई है। एक अन्‍य संदिग्ध सलाह-अल-तुबाइगी एक ऑटॉप्सी एक्सपर्ट है जिसकी पहचान उसके ट्विटर एकाउंट से 'सऊदी साइंटिफिक काउंसिल ऑफ फोरेंसिक' के प्रमुख के रूप में हुई है।


अंकारा - लापता सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी के मामले में स्वर बदलते हुए अमेरिका ने सऊदी अरब की कोई भूमिका होने से इनकार किया है। रियाद में शाह सलमान से वार्ता के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने तुर्की की राजधानी अंकारा पहुंचकर राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन से मुलाकात की और सऊदी अरब के पाक-साफ होने की बात कही। इस बीच इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में खशोगी के साथ बर्बरता किए जाने और उनकी हत्या के सुबूत सामने आए हैं। खशोगी अपनी शादी से संबंधित दस्तावेज पेश करने वाणिज्य दूतावास में गए थे, लेकिन वहां से बाहर नहीं आए।
तुर्की के सरकारी मीडिया के अनुसार, खशोगी की हत्या सऊदी अरब के खुफिया हत्यारे दस्ते ने की है। यह दस्ता सऊदी के युवराज मुहम्मद बिन सलमान के इशारे पर काम करता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी इस आशंका की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि खशोगी तुर्की और अन्य देशों में रहकर सऊदी अरब की राजसत्ता के खिलाफ अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट व कुछ अन्य अखबारों-पत्रिकारों में लेख लिखते थे। सऊदी युवराज उन्हें घोर नापसंद करते थे, लेकिन पोंपियो ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में किसी भी तथ्य पर बात नहीं करना चाहते।
उधर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि मामला बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया हुआ लग रहा है। इस बीच तुर्की पुलिस ने इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास की तलाशी लेकर वहां से जहरीला पदार्थ और मिट्टी में मिले मांस और खून के डीएनए नमूने लिए हैं।


लाहौर - पाकिस्‍तान में निहत्‍थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के आरोप में 116 पुलिकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मामला साल 2014 का है। इस दौरान पुलिस की फायरिंग में 14 लोग मारे गए थे। इस घटना के लिए पाक पुलिस की काफी आलोचना हुई थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 में सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों की हत्या के सिलसिले में पाकिस्तान में लगभग 116 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित पुलिसकर्मियों में कई अधिकारी भी शामिल हैं। यह घटना 2014 में लाहौर के मॉडल टाउन क्षेत्र में हुई थी, जहां कनाडाई-पाकिस्तानी धार्मिक नेता ताहिरुल कादरी के घर के बाहर पाकिस्तान अवामी तेहरिक (पीएटी) के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान पुलिस की फायरिंग में 14 लोग मारे गए और 100 अन्य घायल हो गए थे।
न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के नए नियुक्त हुए पुलिस महानिरीक्षक अमजद जावेद सलीमी ने 14 लोगों की मौत के मामले में इस हफ्ते 116 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इनमें पुलिस अधीक्षक, निरीक्षक और जांच अधिकारी भी शामिल हैं। हटाए गए अधिकारियों को आगे के आदेशों के लिए लाहौर में पुलिस लाइनों को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। हत्याओं की जांच के मामले में पुलिस के चार अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पहले ही स्थानांतरित कर दिए गए थे।

 


नई दिल्ली - रूस के क्रीमिया स्थित वोकेशनल कॉलेज में एक 18 वर्षीय आत्मघाती बंदूकधारी ने बुधवार को हमला बोल दिया। हमलावर ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई और 40 लोग घायल हुए। इनमें अधिकतर युवा थे।
रूसी जांच एजेंसी ने कहा कि हमलावर 18 वर्षीय छात्र व्लादिस्लाव रोसिल्याकोव दोपहर 12 बजे कॉलेज पहुंचा। सीसीटीवी फुटेज में वह बंदूक लेकर कॉलेज में घुसता दिख रहा है। पुलिस को बाद में सका शव घटनास्थल से मिला था। इसे गोली लगी थी। जांच एजेंसी इसे प्राथमिक तौर पर आतंकी हमला मान रही है। हालांकि बाद में इसे जन संहार करार दिया। जांच एजेंसी के अनुसार इस छात्र ने कॉलेज में घुस कर लोगों पर गोलियां बरसाईं जिसमें 18 लोगों की मौत हुई और 40 से अधिक लोग घायल हुए। इस छात्र ने अंत में खुद को गोली मारकर जान दे दी।
रूस की राष्ट्रीय आतंक रोधी समिति ने इस घटना को किसी अज्ञात वस्तु में धमाका माना था। जांच एजेंसी के मुताबिक छात्र इसी कॉलेज में चौथे वर्ष का विद्यार्थी था। उसका शव कॉलेज के प्रथम तल में लाईब्रेरी के पास मिला। रूसी सरकार ने इस विदारक घटना पर तीन दिन का शोक घोषित किया है। काला सागर के दौरे पर सोची गए रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने एक टेलीविजन संदेश में इस हिंसा पर शोक जताया है7

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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