Editor

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पटना। पत्‍नी ऐश्‍वर्या से तलाक मामले में परिवार से नाराज राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव रविवार को पार्टी कार्यालय पहुंचे। उन्‍होंने कहा कि घर व बाहर की लड़ाइयां अलग-अलग हैं। उन्‍होंने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ अपना सुदर्शन चक्र उठा लिया है। साथ ही यह भी कहा कि वे फिलहाल घर नहीं जा रहे, अभी जनता का हाल जानने जाएंगे। इसके पहले तेजप्रताप की शनिवार की रात एक पारिवारिक शादी में मां राबड़ी देवी के भावुक मुलाकात भी हुई।विदित हो कि तेजप्रताप यादव बीते दो नवंबर को पत्‍नी ऐश्‍वर्या राय से तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल करने के बाद घर से दूर हैं। पिता लालू प्रसाद यादव व मां राबड़ी देवी सहित पूरा परिवार तलाक के मामले में उनके खिलाफ है। इससे नराज होकर घर से दूर काशी-वृंदावन गए तेजप्रताप तलाक के मुकदमे की पहली सुनवाई के दिन पटना लौटे ताे उम्‍मीद जगी कि वे अब घर में रहेंगे। लेकिन तेजप्रताप पटना में रहकर भी घर से दूरी बनाए हुए हैं। इस बीच उन्‍होंने सरकार से अपने लिए अलग बंगले की मांग की है।
बंगला मिलने तक जनता के घर को ही बताया अपना घर;-तलाक मामले को लेकर घर व पार्टी से दूरी बनाए तेजप्रताप रविवार को अचानक राजद कार्यालय जा पहुंचे। जानकारी मिली तो मीडिया भी पहुंच गई। इस दौरान उन्‍हाेंने कहा कि वे सरकार से अपने लिए अलग बंगला मांग रहे हैं, ताकि वहां से अपनी गतिविधियां चला सकें। फिलहाल बिहार की जनता के घर ही उनके घर हैं। परिवार के पास लौटने की संभावना से इनकार करते हुए उन्‍होंने कहा कि अभी उन्‍हें जनता का हाल जानना है।
कहा: धारण कर लिया सुदर्शन चक्र;-तलाक मामले में परिवार में अलग पड़ने की बाबत तेजप्रताप ने कहा कि अभी ये मुद्दा नहीं, उसका बिगुल तो कोर्ट में फूंका जा चुका है। अभी मुद्दा पॉलिटिकल है। तेजप्रताप ने कहा कि वे वृंदावन भगवान श्रीकृष्‍ण से वरदान लेने गए थे। दुष्‍मनों के नाश के लिए भगवान श्रीकृष्‍ण ने अपना सुदर्शन चक्र दे दिया है। आज युद्ध का ऐलान हो गया, उन्‍होंने सुदर्शन चक्र धारण कर लिया है। अब युद्ध में सांप्रदायिक ताकतों की हार तथा राजद व महागठबंधन की जात तय है।
अब 'अर्जुन' करेगा दुश्‍मनों का संहार:-तेजप्रताप यादव ने कहा कि इस लड़ाई में वे कृष्‍ण की भूमिका में अपना सुदर्शन चुक्र उठा चुके हैं। अब उनका अर्जुन (तेजस्‍वी यादव) दुश्‍मनों का संहार करेगा। उन्‍होंने यह भी कहा कि तेजस्‍वी को आगे बढ़ाने वाले वे हीं है।
नीतीश नहीं संघ व भाजपा से लड़ाई;-पूरी तरह राजनीतिक मूड में दिख रहे तेजप्रताप ने लोकसभा चुनाव में नौजवानों को अधिक सीटों की मांग रखी। उन्‍होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ जाे भी आना चाहे, उसके लिए राजद के दरवाजे खुले हैं। तेजप्रताप ने कहा कि असली लड़ाई तो संघ व भाजपा तथा मोहन भागवत से है, मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से नहीं।
एक दिन पहले मां राबड़ी देवी से भावुक मुलाकात:-इसके एक दिन पहले पटना के दरोगा राय पथ स्थित एक कम्युनिटी हॉल में मौसेरे भाई अरूण की शादी में तेजप्रताप पहुंचे थे। शादी में राबड़ी देवी भी तेजस्वी यादव के साथ आईं थीं। वहां तेजप्रातप के ससुर चंद्रिका राय भी मौजूद थे। राबड़ी देवी ने जैसे ही तेजप्रताप को देखा, सीधे उनके पास आकर बैठ गईं। हालांकि, उनकी भाई तेजस्वी और ससुर चंद्रिका राय से मुलाकात नहीं हुई। शादी के बाद तेजप्रताप वहां से चले गए।

नई दिल्ली। साल का अंत ऑटोमोबाइल खरीदारी के लिए एक बेहतर समय माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि डीलर्स पुरानी इन्वेंट्री खत्म करने के लिए अपने मौजूदा मॉडल्स पर भारी डिस्काउंट की पेशकश करते हैं। जी हां, अब टू-व्हीलर्स कंपनियां अपने टू-व्हीलर्स पर भारी डिस्काउंट की पेशकश कर रही हैं, जिसमें कैश डिस्काउंट्स, फ्री इंश्योरेंस और एक्सेसरीज शामिल हैं। आज हम आपको अपनी इस खबर में बताने जा रहे हैं उन टू-व्हीलर कंपनियों के बारे में जो दिसंबर महीने में अपने टू-व्हीलर्स पर डिस्काउंट दे रही हैं।
हीरो मोटोकॉर्प:-देश की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माता कंपनी ने आधिकारित तौर पर अपने किसी भी मॉडल्स को लेकर किसी भी तरह के डिस्काउंट की कोई घोषणा नहीं की है। हीरो अपने नए स्कूटर डेस्टिनी 125 और हीरो एक्सट्रीम 200 R की बिक्री में दिलचस्पी तलाश करेगा। कंपनी ने अपने किसी भी प्रोडक्ट्स पर कोई स्पेशल ऑफर्स की घोषणा नहीं की है। हालांकि, हीरो डीलरशिप्स कुछ ऑफर्स की पेशकश कर रही है जो कि डीलर से डीलर विभिन्न हैं। सबसे बेहतर ऑफर हीरो टू-व्हीलर को अगर आप पेटीएम के जरिए खरीदते हैं तो आपको 5,000 रुपये तक के बेनेफिट्स मिलेंगे, जिसमें कैश पेबैक और पैमेंट वॉचर शामिल हैं। इसके अलावा हीरो टू-व्हीलर्स को अगर कैश खरीदते हैं तो कुछ डीलर्स 1,000 रुपये तक का कैश डिस्काउंट दे रहे हैं।
होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (HMSI):-हीरो का पूर्व पार्टनर होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया भी आधिकारित तौर पर कोई ईयर-एंड डिस्काउंट नहीं दे रही है। पेटीएम के जरिए होंडा टू-व्हीलर्स खरीदने पर 4,000 रुपये तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है। इसके अलावा कुछ होंडा डीलरशिप पर एक नए होंडा टू-व्हीलर खरीदने पर एक टैंकफुल ईंधन या मुफ्त हेलमेट दे रहे हैं। हमेशा की तरह ये ऑफर्स भी डीलर से डीलर विभिन्न हैं। इसलिए अगर आप होंडा का कोई टू-व्हीलर खरीदने जा रहे हैं तो आपको एक से ज्यादा डीलर्स के पास जाना चाहिए।
सुजुकी:-सुजुकी डीलर्स अपने स्कूटर्स और मोटरसाइकिल्स पर कई डिस्काउंट्स दे रहे हैं। अगर आप पेटीएम के जरिए नया सुजुकी टू-व्हीलर खरीदने जा रहे हैं तो आपको 7,000 रुपये तक का बेनिफिट्स मिलेगा। सुजुकी डीलर्स के मुताबिक यह डिस्काउंट स्कूटर्स पर 4,000 तक और मोटरसाइकिल्स पर 7,000 रुपये तक है। HDFC बैंक के डेबिट या क्रेडिट कार्ड यूजर्स को इंश्योरेंस पर 50 फीसद तक छूट मिल जाएगी।
बजाज ऑटो:-बजाज ऑटो ने कोई ईयर-एंड डिस्काउंट्स की पेशकश नहीं की है। हालांकि, बजाज के कुछ डीलरशिप्स पर कंपनी की ओर से 5-ऑन-5 ऑफर दिया जा रहा है। इस ऑफर के तहत 5-साल की वारंटी, 5 फ्री सर्विस और 5-साल ऑन-डैमेज इंश्योरेंज फ्री दिया जा रहा है। ये ऑफर्स अभी डीलर्स से डीलर्स और मॉडल से मॉडल तक सीमित हैं।
TVS मोटर कंपनी:-TVS मोटर कंपनी ने भी फिलहाल अपने प्रोडक्ट्स पर किसी ईयर-एंड डिस्काउंट्स के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, लेकिन अगर आप TVS टू-व्हीलर पेटीएम के जरिए खरीदते हैं तो आपको 6,000 रुपये का का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही आपको TVS स्कूटर या मोटरसाइकिल खरीदने पर 1300 रुपये का कैशबैक मिलेगा।
यामाहा;-इंडिया यामाहा भी यामाहा स्कूटर या फिर मोटरसाइकिल पेटीएम के जरिए खरीदने पर कई बेनेफिट्स दे रही है। इसके अलावा यामाहा टू-व्हीलर खरीदने पर कुछ डीलर्स 1,200 रुपये का कैश डिस्काउंट और 1,500 रुपये के दो पेटीएम वाउचर्स दे रहे हैं। यानी आपको 4,200 रुपये का कुल बेनेफिट्स मिलेगा।

मुंबई। स्वर्गीय एक्टर विनोद खन्ना की पहली पत्नी गीतांजलि खन्ना का 70 साल की आयु में निधन हो गया है। कुछ बेचैनी होने पर गीतांजलि को परिजन अस्पताल लेकर गये थे, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मौत की सही-सही वजह का खुलासा नहीं हो सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, गीतांजलि मांडवा में बेटे अक्षय के साथ थीं, जहां उनका फार्म हाउस है। शनिवार रात को गीतांजलि को कुछ तकलीफ़ हुई तो अक्षय और राहुल अलीबाग सिविल हॉस्पिटल लेकर गये, मगर तब तक देर हो चुकी थी और गीतांजति को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, फार्म हाउस से अस्पताल लगभग 20 किलोमीटर दूर है। गीतांजलि और अक्षय शनिवार सुबह 11 बजे फार्म हाउस पहुंचे थे।दोपहर में उन्होंने बेचैनी होने की बात कही। उन्हें स्थानीय चिकित्सक के पास ले जाया गया, जिसने कुछ दवाएं दे दीं। इसके बाद गीतांजलि सोने चली गयीं। रात 9 से 10 बजे के बीच, जब अक्षय ने उनका हालचाल लेने गये तो पाया कि शरीर ठंडा हो गया है। अक्षय ने तभी राहुल को कॉल किया और फिर दोनों उन्हें अस्पताल लेकर गये। गीतांजलि का अंतिम संस्कार कर दिया है।गीतांजलि और विनोद खन्ना की शादी 1971 में हुई थी और 1985 में दोनों का तलाक़ हो गया था। 1990 में विनोद खन्ना ने कविता दफ़्तारी से दूसरी शादी कर ली थी, जिनसे एक बेटा साक्षी और बेटी श्रद्धा है। विनोद खन्ना का निधन ब्लैडर कैंसर की वजह से पिछले साल 27 अप्रैल को हो गया था।

इंदौर। संत भय्यू महाराज को ब्लैकमेल करने वाले गिरोह की छानबीन शुरू हो चुकी है। इस मामले में फूटी कोठी स्थित उस युवती के मोबाइल की जांच की जा रही है, जो 40 करोड़ कैश, कार और फ्लैट की मांग कर रही थी। साथ ही लापता सेवादार विनायक व शेखर की तलाश भी की जा रही है।पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार कैलाश पाटिल उर्फ भाऊ (ड्राइवर) ने बताया कि महाराज की मौत सामान्य आत्महत्या नहीं, बल्कि उन्हें गोली मारने के लिए मजबूर किया गया था। इसमें मुख्य किरदार फूटी कोठी क्षेत्र में रहने वाली युवती थी, जो महाराज की देखभाल करने के लिए लगी थी। उसने महाराज से प्रेम संबंध स्थापित कर अश्लील वीडियो बना लिया था। डॉ. आयुषी से शादी के बाद इस लड़की का आना-जाना बंद हो गया। उसने वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी और महाराज से हर महीने डेढ़ लाख रुपये लेने शुरू कर दिए।ब्लैकमेलिंग में खास सेवादार विनायक दुधाले और शेखर भी शामिल थे। विनायक ही लड़की को रुपये देने जाता था। कई बार उसके फोन से ही बातचीत होती थी। पुलिस विनायक और शेखर की तलाश में जुट गई है। जानकारी मिली है कि वह महाराष्ट्र में छुपा है और उसने एक क्रिश्चियन युवती से शादी कर ली है। जांच में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, ब्लैकमेल करने वाली लड़की के गोपनीय नंबर मिले हैं। उसकी कॉल डिटेल निकाली जा रही है।
महाराज को इमोशनल ब्लैकमेल करता था विनायक;-विनायक महाराज का खास राजदार बन चुका था। वह बात-बात पर इमोशनल ब्लैकमेल करने लगा था। कैलाश ने कहा कि महाराज और डॉ.आयुषी एक बार घर में क्रिकेट मैच देख रहे थे। अचानक विनायक दाखिल हो गया। डॉ.आयुषी ने आने का कारण पूछा तो नाराज होकर चला गया। महाराज उसे मनाने के लिए दौड़े और बेडरूम में लेकर आए। विनायक को लाने ले जाने के लिए भी गाड़ी लगा रखी थी।
युवती के कॉल के बाद रास्ते से लौटे थे महाराज:-शनिवार को डीआइजी हरिनारायणचारी मिश्र ने ड्राइवर कैलाश से पूछताछ की। उसने कहा कि 11 जून को महाराज बेटी कुहू से मिलने पुणे जा रहे थे। रास्ते में लड़की के फोन आ रहे थे। करीब 10 बार बातचीत हुई। सभी को गाड़ी से उतारा और महाराज ने लड़की से बात की। इसके बाद वो तनाव में आ गए और सेंधवा से लौट आए। दरअसल लड़की ने अल्टीमेटम दिया था।
बेटी बोली- मुझे पता है क्या चल रहा है, वक्त आने पर दूंगी जवाब:-मध्य प्रदेश के इंदौर में भय्यू महाराज की मौत के छह महीने बाद हो रहे खुलासों पर उनकी बेटी कुहू का बड़ा बयान सामने आया है। कुहू ने कहा है कि वक्त आने पर मुझसे जुड़े हर सवालों का जवाब दूंगी। मुझे पता है यहां क्या चल रहा है। पुणे में मेरे सेमेस्टर एग्जाम चल रहे थे, मैं उसकी तैयारी में लगी हुई थी। मैं अपनी नानी के साथ हूं। आश्रम, ट्रस्ट और बाबा से जुड़े लोग अलग-अलग बातें कर रहे हैं। मीडिया में जो बातें आ रहीं, उनकी क्लिपिंग मेरे पास है।

 

 

 

नई दिल्ली। भारत आज 47वां विजय दिवस मना रहा है। पाकिस्तान के खिलाफ 1971 का युद्ध हमने आज ही के दिन जीता था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विजय दिवस के मौके पर युद्ध में शहीद हुए सेवा के जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'विजय दिवस के अवसर पर, 1971 के युद्ध में देश की और मानवीय स्वतंत्रता के सार्वभौमिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए अपनी सशस्‍त्र सेनाओं को हम कृतज्ञता के साथ याद करते हैं। विशेषकर उस साहसिक अभियान में बलिदान हो गए सैनिकों के प्रति हम श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीदों को याद करते हुए ट्वीट किया, 'आज विजय दिवस के मौके पर हम 1971 के युद्ध में अदम्य साहस के साथ लड़े अपने बहादुर जवानों को याद करते हैं। उनके अटल पराक्रम और देशप्रेम की वजह से देश सुरक्षित है।'विजय दिवस के मौके पर आज रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी ।विजय दिवस 16 दिसंबर को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत के कारण मनाया जाता है। साल 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्‍तान को करारी शिकस्‍त दी, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान आजाद हो गया, जो आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। यह युद्ध भारत के लिए ऐतिहासिक और हर देशवासी के दिल में उमंग पैदा करने वाला साबित हुआ। बांग्लादेश का स्वतंत्रता संग्राम 1971 में हुआ था, इसे 'मुक्ति संग्राम' भी कहते हैं। यह युद्ध 1971 में 25 मार्च से 16 दिसंबर तक चला था। इस रक्तरंजित युद्ध के माध्यम से बांलादेश ने पाकिस्तान से स्वाधीनता प्राप्त की। पाकिस्तान पर यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक थी। भारत ने 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।महज 14 दिनों में जीत लिए गए इस युद्ध ने भूगोल और इतिहास को नए सिरे से गढ़ डाला। 1965 के युद्ध में पाकिस्तान को चित कर देने के बाद भारतीय योद्धाओं ने अबके उसकी टेढ़ी पूंछ को काफी हद तक सीधा कर दिखाया था। उस युद्ध में बतौर सेकेंड लेफ्टिनेंट भाग लेने वाले रिटायर्ड मेजर जनरल गगन दीप बख्शी बताते हैं, 'हमने मात्र 14 दिन में पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए ही मजबूर कर दिया था।उन्होंने बताया, '1971 के दिसंबर माह में मेरे बैच को पास आउट होना था, लेकिन देश पर खतरा देख बैच को नवंबर में ही पास आउट कर दिया गया। पासिंग आउट परेड के तुरंत बाद ही मुझे युद्ध के लिए भेज दिया गया। यह मेरे लिए विशेष अनुभूति वाला क्षण था। कई नदियां और नाले पार करके हमने सेना के साथ काफी दूर तक पैदल ही सफर तय किया। 1971 का युद्ध सैन्य इतिहास की सबसे शानदार विजय थी। पाकिस्तानी सेना के जनरल नियाजी के अहंकार को हमने नेस्तनाबूद कर दिया था। जनरल नियाजी कहता था की एक-एक पाकिस्तानी सैनिक एक-एक हजार भारतीय सैनिकों के बराबर है।'

उज्जैन। मध्य प्रदेश में उज्जैन जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री भरत पोरवाल ने भय्यू महाराज की हत्या की आशंका जताते हुए सीबीआइ जांच की मांग दोहराई है। दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया से चर्चा में पोरवाल ने कहा कि महाराज गोली नहीं चला सकते थे। बंदूक पकड़ने में उनके हाथ कांपते थे। कई लोग महाराज के करोड़ों रुपये दबाकर बैठे हैं, इसलिए सच्चाई बाहर नहीं आने देना चाहते। जांच को गुमराह किया जा रहा है। पत्नी-बेटी का नाम आगे कर कई लोग खुद को बचा रहे हैं।महाराज के अनुयायी पोरवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के शपथ लेते ही उनसे भी इस केस में सीबीआइ जांच की मांग की जाएगी। पोरवाल इस केस की जांच सीबीआइ से कराने के लिए केंद्र तक को पत्र लिख चुके हैं। केंद्र ने इस संबंध में एक पत्र मुख्य सचिव को भी भेजा है। पोरवाल के मुताबिक, एक बार महाराज महाराष्ट्र के किसी वन क्षेत्र से गुजर रहे थे। उनके साथ राकांपा नेता शरद पवार भी थे। गाड़ी खराब होने पर महाराज को उतरना था। वाहन में ही लोडेड बंदूक रखी थी मगर उसे पकड़ने के दौरान उनके हाथ कांपने लगे। यह देख पवार ने उनसे बंदूक ली थी। महाराज सीधे हाथ से सारा काम करते थे, फिर गोली बाएं हाथ से क्यों चलाई? ऐसे कई बिंदु हैं, जिन पर पुलिस को फिर से जांच करनी चाहिए।
पैसों की कोई कमी नहीं थी:-पोरवाल ने बताया कि महाराज कभी पैसे की ओर ध्यान नहीं देते थे। उनके कहने पर कोई भी बड़ी राशि दान कर सकता था। विदेश में भी उनके सैकड़ों अनुयायी थे, जो दान देने के लिए तैयार रहते थे। अगर कोई यह कह रहा है कि उन्हें महाराज ने गाड़ी दी थी, जमीन दी थी तो उसमें सच्चाई हो सकती है। महाराज किसी को भी लाखों रुपये या जमीन, गाड़ी दान दे सकते थे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं। उन्होंने कहा कि इस केस में महाराज की पत्नी और बेटी का नाम जबरन लाया जा रहा है। षडयंत्रकारी लोग ऐसा कर रहे हैं। महाराज की पत्नी को महाराज की मौत से क्या लाभ मिलता? या बेटी को क्या फायदा था? बेटी तो विदेश पढ़ने जा रही थी, ऐसे में विवाद की बात भी गले नहीं उतरती।
राजनीति में आने वाले थे:-पोरवाल ने दावा किया कि महाराज राजनीति में आने वाले थे। उज्जैन के एक होटल में उन्होंने कहा था कि इस बार कांग्रेस की सरकार आएगी। मैं खुद उस समय उनके साथ था। वह सत्य का साथ देते थे। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस। कई लोगों को उनका सत्य बोलना पच नहीं रहा था, इसलिए हर बिंदु पर जांच की जानी चाहिए। कई राज खुल सकते हैं।

नई दिल्ली। 1947 में भारत से अलग होने के बाद पाकिस्तान की किस्मत में एक और बंटवारा लिखा था। पश्चिमी पाकिस्तान की ओर से हो रही उपेक्षा और सियासी तिरस्कार से पूर्वी पाकिस्तान के लोगों में जन्मे आक्रोश ने पाकिस्तान के इतिहास और भूगोल को हमेशा-हमेशा के लिए बदल दिया। वो तारीख थी, 16 दिसम्बर 1971 और घटना थी - बांग्लादेश की मुक्ति की। मुक्ति पाक सेना के अत्याचारों से, उसके शोषण से, कलेजा फाड़ देने वाले उनके कुकृत्यों से, सियासी तिरस्कारों से। 16 दिसंबर को पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा आजाद हो गया और दुनिया के नक्शे पर एक नए मुल्क बांग्लादेश का जन्म हुआ।दरअसल बांग्लादेश के जन्म की पृष्ठभूमि से जुड़ी बात ये है कि पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य तानाशाह याह्या खान ने आम चुनाव में विजयी रहने के बाद भी मुस्लिम लीग के नेता शेख मुजीब-उर-रहमान को पीएम नहीं बनने दिया। मुजीब-उर-रहमान ने संसद में बहुमत भी साबित कर दिया था। उन्हें पीएम बनाने के बजाए जेल में डाल दिया गया। पूर्वी पाकिस्तान के नेता के साथ हुई इस घटना ने सियासी तौर पर दरकिनार किए जाने वाले पाकिस्तान के पूर्वी इलाके में आक्रोश को जन्म दे दिया। इसे कुचलने के लिए जनरल टिक्का खान ने बल प्रयोग किया।25 मार्च 1971 को पाक सेना और पुलिस ने पूर्वी पाकिस्तान में जमकर नरसंहार किया। लगभग आठ महीने तक चले अत्याचार के दौरान पाकिस्तानी सेना के हाथ मासूमों के खून से रंग गए। 14 दिसम्बर 1971 को पाक सेना और उसके समर्थकों ने 1000 से अधिक बंगाली बुद्धिजीवियों को मार डाला। रजाकर, अल बदर और अल शम्स जैसे संगठनों ने काफी कत्ल-ए-आम मचाया। बंगाली बुद्धिजीवियों को उनके घरों से खींचकर मार डाला गया। इनका मकसद था कि नए राष्ट्र में बुद्धिजीवियों की पीढ़ी खत्म कर दी जाए।25 मार्च को नरसंहार के बाद ही पाक सेना में पूर्वी पाकिस्तान के तैनात जवानों ने बगावत कर दी और मुक्ति वाहिनी का गठन कर दिया और पाक सेना के अत्याचार के खिलाफ खड़े हो गए। मुक्ति वाहिनी को सबसे बड़ा साथ मिला पड़ोसी देश भारत का, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मुक्ति वाहिनी को समर्थन दिया और फिर भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 की जंग शुरू हो गई। भारतीय सैनिकों की जांबाजी के आगे पाकिस्तान की हेकड़ी खत्म हो गई, 93 हजार से अधिक पाक सैनिकों ने बंदूकें डाल दी। भारतीय जनरल जगजीत सिंह के सामने पाकिस्तान के जनरल नियाजी ने भी आत्मसपर्पण कर दिया।16 दिसम्बर 1971 को बांग्लादेश का जन्म हुआ और अवामी लीग के नेता शेख मुजीब बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बने। लेकिन इस स्वतंत्रता में 30 लाख लोग पाक सेना की बर्बरता का शिकार होकर शहीद हो गए। पाक सेना ने महिलाओं और बच्चों तक को नहीं छोड़ा। पाकिस्तान के तत्कालीन तानाशाह यह नहीं समझ पाए कि मासूमों पर होने वाला जुल्म उनके ही मुल्क की किस्मत को बदल देंगे और उनका एक हिस्सा उनसे सदा के लिए आजाद हो जाएगा।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अचानकमार सेंचुरी एरिया के घने जंगलों के बीच मौजूद है लमनी गांव। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा पिछले तीस साल से कुटिया बनाकर रह रहे हैं। इसके पीछे उनके त्याग और संकल्प की एक अद्भुत कहानी है। प्रोफेसर साहब बैगा आदिवासियों के बीच रहकर शिक्षा का उजियारा फैलाते आए हैं। उन्हें जीने की राह दिखा रहे हैं।
पेंशन की राशि से बनवाया स्‍कूल:-पेंशन की राशि से उन्होंने यहां 12वीं तक का नि:शुल्क स्कूल भी बनवा दिया है। खुद भी पढ़ाते हैं। डॉ. खेड़ा गणित में एमएससी व समाजशास्त्र में एमए के साथ ही पीएचडी धारी हैं। साल 1983 में दिल्ली विवि के समाजशास्त्र विभाग के छात्रों के एक दल को लेकर अचानकमार के घने जंगलों में बैगाओं पर अध्ययन करने आए थे। उद्देश्य था आदिवासियों के रहन-सहन व सामाजिक परिवेश को करीब से देखना और अध्ययन के बाद आदिवासियों के जीवन स्तर को सुधारने के संबंध में केंद्र सरकार को रिपोर्ट पेश करना। पर जैसे ही वे वनग्राम में पहुंचे और आदिवासियों की दुर्दशा देखी तो मन भर आया।
ऐसे शुरू किया सफर:-डॉ. खेड़ा बताते हैं कि उस रात वे सो नहीं पाए थे। दूसरे दिन भोजन भी ठीक से नहीं किया। एक सप्ताह का शैक्षणिक भ्रमण जब समाप्त हुआ और दिल्ली जाने की बारी आई तो प्रो. खेड़ा का छात्रों के लिए सपाट आदेश था- तुम लोग जाओ और मेरी एक सप्ताह की छुट्टी का आवेदन भी साथ ले जाओ। मैं कुछ दिनों बाद आता हूं..। यह सुनकर छात्र भी हैरान रह गए। घने जंगलों में अनजान लोगों के बीच दिल्ली जैसे शहर का प्रोफेसर आखिर किनके सहारे यहां रहेगा? छात्रों ने उन्हें समझाया, पर प्रो. खेड़ा का मन तो अलग ही दुनिया में भटक रहा था। बैगाओं की हालत देखकर संकल्प ले लिया कि अब चाहे जो हो जाए, उनके बीच ही रहना है और उनके बीच ही अंतिम सांस लेना है। 30 साल पहले लिए संकल्प को प्रो. खेड़ा आज भी पूरे मनोयोग से निभा रहे हैं। आदिवासियों के कल्याण के लिए जीवन समर्पित कर देने के संकल्प के साथ उन्होंने उनके साथ ही गांव में झोपड़ी बनाकर रहना शुरू किया। दो वक्त का भोजन वे खुद बनाते हैं। धीरे-धीरे उन्होंने वनवासियों से बातचीत शुरू की।
बच्‍चों को दिया अक्षर ज्ञान:-जब उनकी बातों पर वनवासी भरोसा करने लगे तब कुटिया में ही वनवासी बच्चों को अक्षर ज्ञान देना शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई। जो बच्चे ताड़ी के नशे में चूर रहते थे, वे आज फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं। प्रो. खेड़ा वनवासियों के बीच 12वीं तक स्कूल का संचालन कर रहे हैं। अपनी पेंशन का पूरा पैसा वे वनवासियों की दिशा और दशा ठीक करने में लगा रहे हैं। वनवासी बच्चों के लिए स्कूल, यूनिफार्म से लेकर कॉपी-किताब तक वे नि:शुल्क देते हैं। प्रो.खेड़ा ने अपना तन, मन और धन सबकुछ वनवासियों की बेहतरी के लिए लगा दिया है। पिछले दिनों छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें कायार्ंजलि पुरस्कार से सम्मानित किया। उनके द्वारा छपरवा में संचालित स्कूल के शासकीयकरण की घोषणा भी की गई है।
राज्‍य सरकार से सम्‍मानित:-प्रोफेसर खेड़ा को उनके किए गए काम के लिए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने दो माह पहले महात्मा गांधी नेशनल अवार्ड से सम्मानित भी किया था। इसके तहत उनके स्कूल की बिल्डिंग बनवाने के लिए 20 लाख रुपये भी जारी किए गए थे। आपको बता दें कि खेड़ा देश के बंटवारे के बाद लाहौर से दिल्ली एक रिफ्यूजी की तरह आए थे। उनका जन्म 1928 में लाहौर में हुआ था। यहां आकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और पीएचडी हासिल की। कुछ वर्षों तक उन्होंने एनसीईआरटी में अपनी सेवाएं दी। इसके बाद उन्‍होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में सोशल स्टडीज डिपार्टमेंट में बतौर प्रोफेसर ज्वाइन किया। छत्तीसगढ़ में वह एक स्टडी टूर के तौर पर आए थे और फिर यहीं के होकर रह गए। 1993 में रिटायर होने के बाद से वह यहां पर एक कुटिया में रहकर आदिवासियों के लिए काम कर रहे हैं।
90 साल की उम्र में चलते हैं 18 किमी पैदल:-प्रोफेसर डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा का आत्मबल गजब का है। 90 वर्ष के हो रहे हैं। आज भी वे 18 किमी पैदल चलते हैं। पहाड़ की ऊंचाइयां चढ़ना और उसी रफ्तार से नीचे की ओर पैदल जाना कोई प्रोफेसर से ही सीखे। पहाड़ों, घने जंगलों और वन पुत्रों के बीच वे अपना जीवन गुजार रहे हैं। वे आज भी अपने स्कूल में नौवीं से लेकर 12वीं के छात्रों को गणित और समाजशास्त्र की शिक्षा खुद ही देते हैं।

नई दिल्ली। कर्नाटक के बगलकोट जिले के मुढ़ोल में एक हादसे में छह लोगों की मौत हो गई है। मुढ़ोल की निरानी शुगर फैक्टी का बॉयलर फटने से ये हादसा हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं।पुलिस के अनुसार सरकारी चीनी मील के अंदर मजदूर काम कर रहे थे कि तभी बॉइलर के अंदर तेज धमाका हुआ। यह धमाका इतना तेज था कि चीनी मील की पूरी इमारत हिल गई और इसमें दरारे आ गई। वहां काम कर रहे 6 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें फौरन अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। पुलिस राहत बचाव काम में जुट गई है। हालांकि अभी घटना के कारण का पता नहीं चल सका है। यह ब्लास्ट ट्रीटमेंट प्लांट में हुआ है, जो फैक्ट्री से आधा किलोमिटर दूर स्थित है। फैक्ट्री में करीब हजार मजदूर काम करते हैं। घटना के बाद मृतकों की पहचान की जा रही है।जानकारी के अनुसार यह शुगर मिल निरानी बंधु भाजपा विधायक मुरुगेश निरानी और उमके भाई संगामेश व हनुमंथा का बताई जा रही है।

मुंबई। मुंबई-दिल्ली इंडिगो फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी किसी की शरारत थी।दरअसल, इंडिगो की एक फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया था। हालांकि, छानबीन के दौरान विमान में कोई भी बम नहीं मिला, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि विमान को बम से उड़ाने की धमकी देना किसी की शरारत थी। हालांकि अबतक यह नहीं पता चल सका है कि धमकी वाला कॉल किया किसने था?
धमकी भरे कॉल से मचा हड़कंप:-जानकारी के मुताबिक, इंडिगो सिक्यॉरिटीज को मुंबई हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाली दिल्ली-मुंबई फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी भरा फोन कॉल आया था। धमकी भरे कॉल के बाद एयरलाइंस और मुंबई हवाई अड्डे दोनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई। मुंबई से दिल्ली होकर लखनऊ जाने वाले इस विमान में बम रखे होने की धमकी मिलने के बाद शनिवार को उसे उड़ान भरने से रोक दिया गया, हालांकि इंडिगो ने बाद में बताया कि उड़ान को रोका नहीं गया था।
एक घंटे देरी से उड़ा विमान:-इंडिगो ने बताया कि एक यात्री ने मुंबई एयरपोर्ट पर हमारे कर्मचारियों को बताया कि मुंबई-दिल्ली फ्लाइट 6 ई 3612 में बम हो सकता है। यात्री बहुत टेंशन में नजर आ रहा था। इस सूचना के बाद छानबीन शुरू हुई, जिस कारण उड़ान में एक घंटे की देरी हुई।
बीटीएसी ने गंभीरत से ली धमकी:-बताया जा रहा है कि बम धमकी आकलन समिति (बीटीएसी) ने इस धमकी को गंभीरता से लिया, जिसके बाद विमान को एक खाली स्थान पर ले जाया गया। जांच-पड़ताल के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने विमान को ‘सुरक्षित' घोषित कर दिया।
सुबह 6:05 पर उठना था विमान:-जानकारी के मुताबिक, मुंबई हवाई अड्डे से विमान को सुबह छह बजकर पांच मिनट पर प्रस्थान करना था। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि विमान में कितने यात्री सवार थे। इस बीच हवाई अड्डे के एख सूत्र ने बताया है कि गो एयर फ्लाइट जी8 329 से दिल्ली जा रही एक महिला यात्री टी1 पर इंडिगो के चेक-इन काउंटर पर गई और वहां बताया कि इंडिगो की फ्लाइट 6ई 3612 में बम है।'
'...वे राष्ट्र के लिए खतरा हैं':-सूत्र ने बताया, 'महिला यात्री ने कुछ लोगों की तस्वीरें भी दिखाईं और दावा किया कि वे राष्ट्र के लिए खतरा हैं।' इसके बाद सीआईएसएफ के जवान उसे पूछताछ के लिए हवाई अड्डा पुलिस थाने लेकर गए। सूत्र ने कहा, ‘सीआईएसएफ के सहायक कमांडर के कार्यालय में बीटीएसी की बैठक बुलाई गई, जिसमें धमकी को विशिष्ट बताया।'

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