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नई दिल्ली। दिल्‍ली समेत पूरे एनसीआर में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। बारिश से ठंड बढ़ गई है। India Meteorological Department इस साल फरवरी महीना खत्म होने में सिर्फ सप्ताह भर का समय बचा है, लेकिन सर्दी है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। इस बीच कुछ दिनों के अंतराल पर पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के साथ मैदानी राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि से मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। इसके चलते ठंड में इजाफा हो रहा है। वहीं, इसको लेकर India Meteorological Department (मौसम विभाग) के अधिकारियों का भी कहना है कि फरवरी के महीने में इतनी सर्दी होना असामान्य है, लेकिन सच यह है कि सर्दी मार्च तक जाएगी और लोगों को परेशान भी करेगी।मौसम विज्ञानियों की मानें तो पश्चिमी विक्षोभ के चलते ही पहाड़ों पर बड़े पैमाने पर बर्फबारी देखने को मिली है। इसके चलते उत्तर और मध्य भारत में तापमान अपेक्षाकृत कम रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल मार्च के पहले सप्ताह तक सर्दी का मौसम जारी रह सकता है। एक मार्च को आखिरी पश्चिमी विक्षोभ के चलते उत्तर भारत में सर्दी बढ़ सकती है और ऐसा मौसम कई दिनों तक बना रह सकता है।पश्चिमी विक्षोभ के चलते इस साल फरवरी में अच्छी खासी ठंड रही है। खासतौर पर उत्तर भारत के अधिकतकर इलाकों में इस महीने में ठंड जारी है। वहीं, रुक-रुक सर्दी में इजाफा होने कई तरह की बीमारियों को भी दावत दे रहा है, खासकर युवाओं के साथ बुजुर्ग व बच्चे सर्दी-खांसी की चपेट में जल्दी आ रहे हैं।
इस बार मार्च तक जारी रहेगा सर्दी का मौसम:-मौसम विभाग से जुड़े वैज्ञानिकों की मानें तो जाहिर इस महीने इतनी सर्दी होना असामान्य है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम में इस बदवाल की बड़ी वजह पश्चिमी विक्षोभ है। इसके चलते ही पहाड़ों पर बड़े पैमाने रुक-रुक पर बर्फबारी देखने को मिल रही है। इसके असर से उत्तर और मध्य भारत में तापमान में कमी जारी है।
फरवरी में छह बार पश्चिमी विक्षोभ ने डाला असर:-मौसम से अधिकारियों का भी कहना है कि फरवरी को सर्दियों का आखिरी महीना माना जाता है, लेकिन यह सर्दी जाती हुई होती है और गर्मी का अहसास आ जाता है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते इस बार सर्दी ज्यादा दिन तक है और रहेगी। सबसे बड़ी परेशानी की बात है कि दिन का तापमान बढ़ जाता है और सुबह-शाम न्यूनतम तापमान घट रहा है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि कई सालों की तुलना में फरवरी में अब तक 6 बार पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम प्रभावित हुआ है और जाती हुई सर्दी लौट आई है।मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस महीने इतनी सर्दी होना असामान्य है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते ही पहाड़ों पर बड़े पैमाने पर बर्फबारी देखने को मिली है। इसके चलते उत्तर और मध्य भारत में तापमान अपेक्षाकृत कम रहा है।
वेस्टर्न डिस्टर्बन्स (Western Disturbance) क्या है?;-वेस्टर्न डिस्टर्बन्स (Western Disturbance) जिसको पश्चिमी विक्षोभ भी बोला जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाक़ों में सर्दियों के मौसम में आने वाले ऐसे तूफ़ान को कहते हैं जो वायुमंडल की ऊंची तहों में भूमध्य सागर, अटलांटिक महासागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लाकर उसे अचानक वर्षा और बर्फ़ के रूप में उत्तर भारत, पाकिस्तान व नेपाल पर गिरा देता है। यह एक गैर-मानसूनी वर्षा का स्वरूप है जो पछुवा पवन (वेस्टर्लीज) द्वारा संचालित होता है।
वेस्टर्न डिस्टर्बन्स या पश्चिमी विक्षोभ का निर्माण कैसे होता है?:-वेस्टर्न डिस्टर्बन्स या पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर में अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के रूप में उत्पन्न होता है। यूक्रेन और उसके आस-पास के क्षेत्रों पर एक उच्च दबाव क्षेत्र समेकित होने के कारण, जिससे ध्रुवीय क्षेत्रों से उच्च नमी के साथ अपेक्षाकृत गर्म हवा के एक क्षेत्र की ओर ठंडी हवा का प्रवाह होने लगता है। यह ऊपरी वायुमंडल में साइक्लोजेनेसिस के लिए अनुकूल परिस्थितियां उत्पन्न होने लगती है, जो कि एक पूर्वमुखी-बढ़ते एक्सट्रैटॉपिकल डिप्रेशन के गठन में मदद करता है। फिर धीरे-धीरे यही चक्रवात ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मध्य-पूर्व से भारतीय उप-महाद्वीप में प्रवेश करता है।
भारतीय उप-महाद्वीप पर वेस्टर्न डिस्टर्बन्स या पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव:-वेस्टर्न डिस्टर्बन्स या पश्चिमी विक्षोभ खासकर सर्दियों में भारतीय उपमहाद्वीप के निचले मध्य इलाकों में भारी बारिश तथा पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कृषि में इस वर्षा का बहुत महत्व है, विशेषकर रबी फसलों के लिए। उनमें से गेहूं सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है, जो भारत की खाद्य सुरक्षा को पूरा करने में मदद करता है।ध्यान दें कि उत्तर भारत में गर्मियों के मौसम में आने वाले मानसून से वेस्टर्न डिस्टर्बन्स या पश्चिमी विक्षोभ का बिलकुल कोई संबंध नहीं होता। मानसून की बारिशों में गिरने वाला जल दक्षिण से हिंद महासागर से आता है और इसका प्रवाह वायुमंडल की निचली सतह में होता है। मानसून की बारिश ख़रीफ़ की फ़सल के लिये ज़रूरी होती है, जिसमें चावल जैसे अन्न शामिल हैं। कभी-कभी इस चक्रवात के कारण अत्यधिक वर्षा भी होने लगती है जिसके कारण फसल क्षति, भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन होने लगता हैभारत-गंगा के मैदानी इलाकों में, यह कभी-कभी शीत लहर की स्थिति और घना कोहरा लाता है। अन्य पश्चिमी विक्षोभ के आने तक यह स्थिति स्थिर रहती है। जब मानसून की शुरुआत से पहले पश्चिमी विक्षोभ उत्तरपश्चिम भारत में घूमता है, तो इस क्षेत्र पर मानसून की वर्तमान में अस्थायी उन्नति होती है।

नई दिल्ली। एक समय था जब मौसम विभाग की भविष्यवाणी अक्सर उपहास का विषय बन जाया करती थी। भविष्यवाणी होती थी तेज बारिश की, जबकि निकल आती थी चटक धूप। आलम यह था कि दिल्ली-एनसीआर सहित देश के तमाम हिस्सों में रहने वाले लोगों ने इस पर विश्वास करना ही छोड़ दिया था। लेकिन, अब हालात बदल गए हैं। आज मौसम विभाग की भविष्यवाणी बेहद सटीक होती है और दो-दो घंटे पहले चेतावनी भी जारी कर दी जाती है। मौसम विभाग की कार्यप्रणाली में बदलाव की यह कहानी बहुत लंबी तो नहीं, अलबत्ता रोचक जरूर है।
तीनों प्रमुख विभागों की राहें थी जुदा:-मौसम विज्ञान विभाग की मुख्यतया तीन शाखाएं हैं। पहली, मौसम विभाग दिल्ली। दूसरी, राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र नोएडा। तीसरा, आइआइटीएम पुणे। चूंकि मौसम विभाग के लिए कोई अलग मंत्रालय नहीं था तो इन तीनों में सामंजस्य भी नहीं था और तीनों की राहें जुदा थीं। तीनों अपना अलग पूर्वानुमान जारी करते थे, जिनमें एकरूपता भी नहीं होती थी। इसीलिए पूर्वानुमान में हास्यास्पद स्थिति बन जाती थी।
2006 में बना भूविज्ञान मंत्रालय:-सन 2006 में केंद्र सरकार ने अलग से भूविज्ञान मंत्रालय का गठन किया। इसके बाद उक्त तीनों शाखाएं इसके अंतर्गत आ गईं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र भी गठित कर दिया गया, जब सभी एक छाते के नीचे आए तो इनकी कार्यप्रणाली भी एक होने लगी। संयुक्त बैठकों में विचार विमर्श के बाद ही कोई भी पूर्वानुमान जारी किया जाने लगा।
पिछले 12 सालों में तेजी से हुआ आधुनिकीकरण:-भूविज्ञान मंत्रालय गठित होने के बाद मौसम विभाग और इससे संबंधित तमाम विभागों का तेजी से आधुनिकीकरण शुरू कर दिया गया। वायुमंडलीय विज्ञान पर काम करते हुए ऑब्जर्विंग मॉडलों का अध्ययन भी शुरू कर दिया गया। राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र और आइआइटीएम पुणे के वैज्ञानिकों की टीम इन मॉडलों पर अध्ययन करने लगी और मौसम विभाग के वैज्ञानिक इस अध्ययन के आधार पर पूर्वानुमान तैयार करने लगे। आइआइटीएम पुणे के बाद पिछले साल नोएडा में भी एक सुपर कंप्यूटर स्थापित कर दिया गया।
पांच स्तरों पर तैयार होता है पूर्वानुमान:-वर्तमान में कोई भी पूर्वानुमान जारी होने से पहले पांच स्तरों से गुजरता है। पहले मॉडलों का अध्ययन होता है। इस अध्ययन के आधार पर पूर्वानुमान तैयार किया जाता है। फिर वीडियो कांफ्रेंङ्क्षसग के जरिए एक घंटे सभी राज्यों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर इस पर समूह चर्चा होती है। अगले चरण में विशेषज्ञ सुपर कंप्यूटर की मदद से एक बार दोबारा इस पूर्वानुमान की प्रामाणिकता जांचते हैं। पांचवें चरण में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर स्थानीय कारकों को ध्यान में रखकर फिर से पूर्वानुमान तैयार किया जाता है। इसके बाद ही पूर्वानुमान जारी किया जाता है।
वर्तमान में इस तरह जारी होता पूर्वानुमान:-दिल्ली का पूर्वानुमान सुबह और शाम दो बार जारी किया जाता है। वैश्विक स्तर पर भी दिन में दो बार पूर्वानुमान जारी होता है। गंभीर स्तर पर दिन में एक बार आकलन किया जाता है। दो दिन के पूर्वानुमान के लिए तीन किमी, एक सप्ताह के पूर्वानुमान के लिए 12 किमी और इससे अधिक दिनों के लिए 50 किमी तक के दायरे का पूर्वानुमान जारी किया जाता है। एक पूर्वानुमान राष्ट्रीय स्तर पर, एक राज्य स्तर पर और एक जिला स्तर पर जारी होता है।डॉ. केजे रमेश (महानिदेशक, मौसम विज्ञान विभाग) ने बताया कि पिछले करीब एक दशक में मौसम विभाग में बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण हुआ है। विभिन्न स्तरों पर निगरानी भी होती है। मंत्रालय में सचिव स्तर के अधिकारी पूर्वानुमान की प्रामाणिकता पर निगाह रखते हैं। हर तीन माह में समीक्षा बैठक होती है, इसीलिए अब यह सच के अत्यंत करीब होते हैं।

नई दिल्ली। अमेरिका के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान F-21 अब भारत में बनेंगे। ‘मेक इन इंडिया’ मिशन के तहत इनका उत्पादन किया जाएगा। इन विमानों को विशेष तौर पर भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आइये जानते हैं क्या है इस फाइटर जेट की खूबी और इसके भारत में निर्माण के फायदे।अत्याधुनिक F-21 लड़ाकू विमानों का भारत में उत्पादन करने की घोषणा अमेरिकी रक्षा एवं एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने की है। कंपनी ने ये घोषणा बुधवार को बेंगलुरू में आयोजित ‘एयरो इंडिया 2019’ शो के पहले दिन की है। इस शो में कंपनी ने अपने F-21 फाइटर जेट का प्रदर्शन भी किया है। इस दौरान कंपनी ने बताया कि उन्होंने इस विमान को विशेष तौर पर भारतीय वायुसेना के लिए डिजाइन किया है।जानकारों के अनुसार अमेरिकी कंपनी इस घोषणा के जरिए अरबों डॉलर के भारतीय सैन्य ऑर्डर पर नजर जमाए हुए है। पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद जिस-तरह से भारत-पाक के बीच तनावपूर्ण स्थिति है और भारत में फ्रांस के राफेल विमानों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है, कंपनी ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत इन विमानों का उत्पादन भारत में करने की घोषणा की है। यही वजह है कि कंपनी ने भारत में इनके निर्माण की घोषणा के साथ कहा है कि ये विमान अत्याधुनिक वायु शक्ति के साथ भविष्य में भारत को मजबूत करेगी।
टाटा एडवांस्ड सिस्टम होगा भारतीय सहयोगी:-कंपनी के अनुसार भारत के लिए लॉकहीड मार्टिन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम द्वारा एफ-21 लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने इससे पहले भी भारत को एफ-16 लड़ाकू विमान बेचने की पेशकश की थी। अब कंपनी का दावा है कि एफ-21 लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना को विश्व के सबसे बड़े लड़ाकू विमान तंत्र से जोड़ेगा। रक्षा क्षेत्र की यह अमेरिकी कंपनी F-16 युद्धक विमान भारत को ऑफर कर चुकी है, जिसका इस्तेमाल दुनियाभर की सेनाएं कर रही हैं।
क्या कहा अमेरिकी कंपनी ने;-लॉहीड मार्टिन एयरोनॉटिक्स कंपनी के विजनेस डवलपमेंट और स्ट्रेटजी विभाग के उपाध्यक्ष डॉ विवेक लाल का दावा है कि एफ-21 फाइटर जेट विमान बिल्कुल अलग हैं। ये एकदम नया, अत्याधुनिक और युद्ध के दौरान की विभिन्न जरूरतों से सुसज्जित है। साथ ही एफ-21 का ‘मेक इन इंडिया, प्रोजेक्ट के तहत निर्माण करना, भारत के लिए बेमिसाल औद्योगिक अवसर भी उपलब्ध कराएगा। साथ ही भारत-अमेरिका की सैन्य सहयोग की घनिष्ठता को और मजबूत करेगा।
15 अरब डॉलर के युद्धक विमान खरीदेगा भारत:-बताया जा रहा है कि भारत सरकार अगले कुछ वर्षों में वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए तकरीबन 15 अरब डॉलर के युद्ध विमान खरीदने जा रही है। भारतीय वायुसेना के लिए 114 विमान भारत में बनाए जाने हैं। इसीलिए अमेरिकी कंपनी ने F-21 फाइटर जेट के भारत में निर्माण की घोषणा की है। बेंगलुरू एयरो इंडिया शो में कई अन्य देशी-विदेशी कंपनियां इसके लिए अपने विमानों का प्रदर्शन कर दावेदारी पेश कर रही हैं। यह एयरो इंडिया शो पांच दिन तक चलेगा।

नई दिल्ली। कोस कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी... ये कहावत मातृभाषा की महत्ता समझाने के लिए पर्याप्त है। विश्व में भाषाई व सांस्कृतिक विविधता व बहुभाषिता को बढ़ावा देने और विभिन्न मातृभाषाओं के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से हर साल 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। इस साल उन्नीसवें मातृभाषा दिवस की थीम है, विकास, शांति और संधि में देशज भाषाओं के मायने। एक नजर डालते हैं इससे जुड़े कई आयामों पर...
दुनिया में मातृभाषा;-संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं की संख्या लगभग 6900 है। इनमें से 90 फीसद भाषाएं बोलने वालों की संख्या एक लाख से कम है। लगभग 150 से 200 भाषाएं ऐसी हैं, जिन्हें दस लाख से अधिक लोग बोलते हैं। दुनिया की कुल आबादी में तकरीबन 60 फीसद लोग 30 प्रमुख भाषाएं बोलते हैं, जिनमें से दस सर्वाधिक बोले जानी वाली भाषाओं में जापानी, अंग्रेजी, रूसी, बांग्ला, पुर्तगाली, अरबी, पंजाबी, मंदारिन, हिंदी और स्पैनिश है।
भाषा के लिए हो गए शहीद:-21 फरवरी 1952 को ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन पाकिस्तान सरकार की भाषायी नीति का कड़ा विरोध जताते हुए अपनी मातृभाषा का अस्तित्व बनाए रखने के लिए विरोध प्रदर्शन किया। पाकिस्तान की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी लेकिन लगातार विरोध के बाद सरकार को बांग्ला भाषा को आधिकारिक दर्जा देना पड़ा। भाषायी आंदोलन में शहीद हुए युवाओं की स्मृति में यूनेस्को ने पहली बार 1999 में 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
विलुप्त होती मातृभाषा:-दुनिया में अगले 40 साल में चार हजार से अधिक भाषाओं के खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है।
भारत में भाषाएं:-भारत विविध संस्कृति और भाषा का देश रहा है। साल 1961 की जनगणना के अनुसार भारत में 1652 भाषाएं बोली जाती हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में फिलहाल 1365 मातृभाषाएं हैं, जिनका क्षेत्रीय आधार अलग-अलग है।
दूसरी लोकप्रिय हिंदी;-अन्य मातृभाषी लोगों के बीच भी हिंदी दूसरी भाषा के रूप में लोकप्रिय है।
पलायन का असर:-छोटे भाषा समूह जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर बसते हैं तो वे एक से अधिक भाषा बोलने-समझने में सक्षम हो जाते हैं। 43 करोड़ लोग देश में हिंदी बोलते हैं, इसमें 12 फीसद द्विभाषी है। 82 फीसद कोंकणी भाषी और 79 फीसद सिंधी भाषी अन्य भाषा भी जानते हैं। हिंदी मॉरीशस, त्रिनिदाद-टोबैगो, गुयाना और सूरीनाम की प्रमुख भाषा है। फिजी की सरकारी भाषा है।
बहुभाषी हैं हम:-हाल ही में जारी जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक भारत में जिनकी मातृभाषा हिंदी या बांग्ला है, उनमें बहुभाषियों की संख्या कम है। 43 करोड़ हिंदी भाषी में 12 फीसद लोग द्विभाषी हैं और उनकी दूसरी भाषा अंग्रेजी है। जबकि बांग्ला बोलने वाले 9.7 करोड़ लोगों में 18 फीसद द्विभाषी हैं। हिंदी और पंजाबी के बाद बांग्ला भारत में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। देश में 14 हजार लोगों की मातृभाषा संस्कृत है।

किन्नौर। हिमाचल में आटीबीपी के जवानों को ग्लेशियर गिरने की वजह से बर्फ के नीचे दबे हुए सैनिकों को बचाने के लिए राहत-बचाव कार्य गुरुवार सुबह सात बजे फिर शुरू हुआ। राहत-बचाव कार्य में और दिक्कतें आ सकती हैं, क्योंकि क्षेत्र में करीब 4 इंच बर्फबारी और हो चुकी है। अब भी क्षेत्र में बर्फबारी हो रही है और इसी बर्फबारी के बीच राहत-बचाव कार्य चल रहा है।बता दे कि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में तिब्बत सीमा के निकट पूह ब्लॉक के तहत डोगरी (नमज्ञा) क्षेत्र में बुधवार सुबह ग्लेशियर गिर गया था। इसकी चपेट में सेना की सात जैक राइफल के छह जवान आ गए थे। इनमें से एक जवान की मौत हो गई। पांच जवान अब भी लापता हैं। ग्लेशियर में दबे तीन जवान हिमाचल के और एक-एक जवान उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर का बताया जा रहा है।आइटीबीपी (इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस) की 17वीं बटालियन व सात जैक राइफल का कैंप डोगरी में साथ ही है। सेना के 16 जवान पानी की पाइपलाइन ठीक करने बुधवार को डोगरी से ऊपर शिपकिला ग्लेशियर की ओर गए थे। वहां से सैन्य जवानों को पेयजल आपूर्ति होती है। बर्फबारी के कारण पाइपों में पानी जमने से पेयजल आपूर्ति बाधित थी। आइटीबीपी के आठ जवान तड़के तीन बजे सामान्य पेट्रोलिंग करने के लिए निकले थे। वे पहाड़ी के ऊपर थे।पेट्रोलिंग कर रहे आइटीबीपी जवानों ने सेना की टुकड़ी को अलर्ट किया था कि ग्लेशियर गिर सकता है। सुबह करीब साढ़े दस बजे नाले में पाइप की मरम्मत करते समय सेना के जवान ग्लेशियर की चपेट में आ गए। त्वरित कार्रवाई बल, सेना, आइटीबीपी, जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स, पुलिस व स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। ग्लेशियर में दबे हिमाचल के बिलासपुर निवासी 41 वर्षीय जवान राजेश कुमार को बुधवार शाम साढ़े छह बजे निकाल लिया गया। उसे पूह के निकट सैन्य अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।दुर्घटनास्थल पर सिग्नल की कमी के कारण संपर्क में दिक्कत आई। किन्‍नौर के उपायुक्‍त गोपाल चंद्र ने कहा कि पांच जवानों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन बुदवार देर शाम तक जारी रहा। बाद में अधिक ठंड व अंधेरे के कारण सर्च ऑपरेशन बंद कर दिया गया, जिसे वीरवार सुबह दोबारा शुरू किया जाना था।घटना के बारे में हिमाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि ग्लेशियर में दबने से सेना के जवान की मौत दुखद घटना है। प्रदेश सरकार जवानों को राहत के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध करवाएगी। किन्नौर के उपायुक्त को सेना व आइटीबीपी प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
हिमाचल, उत्तराखंड में भारी बर्फबारी की चेतावनी:-हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बुधवार को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश व बर्फबारी दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हिमाचल के केलंग में न्यूनतम तापमान -9.8 रहा जबकि जम्मू-कश्मीर में बनिहाल में -11 डिग्री सेल्सियस रहा। अगले 24 घंटे के दौरान हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बारिश व बर्फबारी की चेतावनी जारी की है।हिमाचल प्रदेश में बारिश व बर्फबारी से प्रदेश में 225 सड़कें बुधवार को भी बंद रही। भारी हिमपात के कारण चिनाब घाटी की 134 सड़कों को यातायात के लिए बंद कर दिया है। उत्तराखंड में बुधवार को बदरीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड, मुनस्यारी समेत हिमालय की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई।

नई दिल्ली। जब से सनी लियोनी के टॉप करने की खबर सुर्खियों में आई है, लोग यह जानने के लिए बेताब हैं कि आखिर सनी ने किस एग्जाम में टॉप किया है और इसका पेपर आखिरी इन्होंने दिया कब? इस खबर के सामने आने के बाद शायद सनी के भी मन में यह सवाल उठा होगा। खैर यह तो पर्दा उठ गया कि बिहार के PHED विभाग में जूनियर इंजीनियर की परीक्षा में टॉप करने वाली सनी लियोनी फिल्म अभिनेत्री सनी लियोनी नहीं है। सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल होने के बाद फिल्म अभिनेत्री सनी लियोनी ने भी ट्वीटकर इसपर चुटकी ली है। सनी ने लिखा, 'हा हा...मैं बेहद खुश हूं कि दूसरी सनी ने इतना अच्छा स्कोर किया!'दरअसल, बुधवार को यह खबर सामने आई कि बिहार के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED) में जूनियर इंजीनियर के लिए निकली वैकेंसी के लिए किए गए आवेदन में मेरिट लिस्ट में सबसे ऊपर सनी लियोनी का नाम है। मेरिट लिस्ट में सनी लियोन नाम की छात्रा पहले नंबर पर आयी हैं, जिसे काफी लोगों ने अभिनेत्री सनी लियोनी समझा। मेरिट लिस्ट की मानें तो सनी ने इस परीक्षा में 98.5 फीसद स्कोर किया है और एजुकेशन प्वाइंट में 73.50 अंक मिले हैं, जबकि एक्सपीरियंस प्वाइंट के रूप में 25 नंबर मिले। ऐसे में वो रिजल्ट की मेरिट लिस्ट में टॉप पर रहीं।देखते ही देखते यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद इसकी जांच की गई कि कही किसी शरारती तत्व ने तो सनी लियोनी के नाम पर आवेदन तो नहीं दे दिया। इस दौरान यह बात सामने आई कि मेरिट लिस्ट में टॉप करने वाली लड़की बॉलीवुड अभिनेत्री सनी लियोनी नहीं हैं, बल्कि 13 मई, 1991 को जन्मी सनी लियोन नामक महिला अभ्यर्थी हैं। जिनका एप्लिकेशन आइडी जेइसी/0031211 है और उनके पिता का नाम लियोना लियोन है।इस मेरिट लिस्ट में तीसरे नंबर पर लिखा नाम भी सुर्खियों में रहा, क्योंकि तीसरे नंबर के आवेदक के नाम की जगह BVCXZ लिखा था। इस नाम का कोई अभ्यर्थी कैसे हो सकता है। इसने 92.89 स्कोर किया है. हालांकि पीएचइडी विभाग का कहना है कि इस लिस्ट पर दावा और आपत्ति के लिए 24 फरवरी तक का समय दिया गया है।

कानपुर। दुश्मन के जिन क्षेत्रों में सैनिक बेधड़क नहीं घुस सकते, उनमें छोटे और तेज रफ्तार मानवरहित यान सेंध लगाएंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर ने तीन अलग-अलग तरह के ड्रोन व हेलीकॉप्टर बनाए हैं। जिन क्षेत्रों में सैनिकों को जाने में मुश्किल होगी, वहां ये छोटे यान तेजी से घुसकर न केवल जानकारी जुटा लाएंगे बल्कि दुश्मन के उड़ते हुए ड्रोन को भी पकड़ लाएंगे। इनकी और भी अनेक खूबियां हैं। जरूरत पड़ने पर दुर्गम स्थानों पर 20-25 किलोग्राम तक का वजनी सामान भी पहुंचा आएंगे। ये हवा में तीन से पांच घंटे तक रह सकते हैं। ड्रोन की तरह ऊपर उठकर एयरोप्लेन की तरह उड़ान भर सकते हैं। इस तरह के विशेष मानवरहित यान बनाने में आइआइटी को एक से तीन वर्ष का समय लगा। अब इन सबका ट्रायल पूरा हो चुका है।
सैनिकों तक खान-पान व जरूरी चीजें पहुंचाएगा दो रोटार वाला यान:-दो रोटार वाला मानवरहित यान 13 से 15 किलोग्राम तक का वजन उठाकर साढ़े तीन किलोमीटर ऊंचाई तक उड़ सकता है। इस यान का उन स्थानों पर भोजन, कपड़े व छोटे हथियार पहुंचाने में इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां बड़े यान का पहुंचना मुश्किल है। इसमें ईंधन के लिए 2.4 लीटर के दो टैंक लगाए हैं। ईंधन फुल होने पर यह लगातार तीन घंटे उड़ सकता है। भौगोलिक स्थिति के अनुसार यह उस क्षेत्र की हर तरह की मैपिंग भी कर सकता है। कंप्यूटर से नियंत्रित होने वाला यह यान नाविक ऑटो पायलट सॉफ्टवेयर के जरिए चलता है, जिसे कहीं से भी बैठकर नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें 60 सीसी का इंजन, कैमरा, सेंसर व एनालिसिस डिवाइस लगी हुई है।
दुश्मन के ड्रोन पर कसेगा शिकंजा:-आइआइटी के छात्रों ने देश का पहला ऐसा अनमेंड (मानवरहित) हेलीकॉप्टर बनाया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) मॉड्यूल के जरिए अनाधिकृत ड्रोन (दुश्मन ड्रोन) को पहचान कर उसे जकड़ सकता है। 12 किलोग्राम का यह मिनी मानवरहित यान ढाई से तीन घंटे तक उड़ सकता है। स्प्रिंग मैकेनिज्म का इस्तेमाल कर इसमें जाल लोड किया गया है। दुश्मन ड्रोन के ट्रेस होते ही यह उस पर जाल छोड़कर उसे फंसा लेता है और जमीन पर ले आता है। इस यान को एयरोस्पेस साइंस के छात्र अंकुर, संजय, सागर व निदीश ने तैयार किया है। आइआइटी की एयर स्ट्रिप लैब में प्रयोग के बाद अब इसका इस्तेमाल एयर सिक्योरिटी के लिए किए जाने की तैयारी है। यह कार्बन फाइबर हेलीकॉप्टर 120 किलोमीटर की रफ्तार से उड़ सकता है। हवा में डेढ़ गुना बढ़ जाएगी
उड़ने की क्षमता:-एयरोस्पेस के छात्रों ने एक ऐसा मानवरहित यान अनमेंड एरियल व्हीकल (यूएवी) बनाया है, जो हवा में पहुंचकर डेढ़ गुना रफ्तार से उड़ सकता है। यह पहला ऐसा मानवरहित यान है, जो ड्रोन व एयरोप्लेन दोनों का काम करता है। कुछ दूरी तक उड़ने के बाद यह एयरोप्लेन बन जाता है, जिससे किसी भी दिशा में एक प्लेन की तरह मूव कर सकता है। येलाहंका बेंगलुरू के एयर फोर्स स्टेशन में प्रदर्शन करने के लिए इसे चुना गया है। इसे लेकर छात्र वहां जा चुके हैं। यह यान डेढ़ घंटे तक हवा में उड़ सकता है। इसमें पांच हजार मिली एम्पियर ऑवर की बैटरी लगी हुई है। चार रोटार होने के कारण यह 90 डिग्री पर टेक ऑफ करता है। इससे छोटे छोटे सामान व उपकरण उठाए जा सकते हैं। तीन हजार मीटर ऊंचाई तक उड़ सकने वाले इस यान को एयरोस्पेस साइंस के छात्र निधीशराज, रामाकृष्णा और अनिमेष शास्त्री ने बनाया है।

लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उत्तर प्रदेश में गठबंधन करने वाले समाजवादी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी के बीच आज सीटों का बंटवारा हो गया है। दोनों पार्टी मिलकर 75 सीट पर चुनाव लड़ेंगी। बहुजन समाज पार्टी 38 पर तथा समाजवादी पार्टी 37 सीट पर चुनाव लड़ेगी।बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती तथा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की सहमति के बाद आज दोनों पार्टियों ने अपनी सीट की घोषणा की है।बहुजन समाज पार्टी 38 सीट पर अपने प्रत्याशी उतारेगी तो समाजवादी पार्टी 37 सीट पर प्रत्याशी उतारेगी।अमेठी और रायबरेली से दोनों में से कोई भी पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा करेगी। समाजवादी पार्टी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज्यादातर सीटें दी गई हैं। बहुजन समाज पार्टी को पूर्वी उत्तर प्रदेश में ज्यादातर सीटें मिली हैं।
बहुजन समाज पार्टी की सीटें:-सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, मेरठ, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, फतेहपुर सिकरी, आंवला, शाहजहांपुर, धौरहरा, सीतापुर, मिश्रिख मोहनलालगंज, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फर्रुखाबाद, अकबरपुर, जालौन, हमीरपुर, फतेहपुर, अम्बेडकरनगर, कैसरगंज, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीरनगर, देवरिया, बांसगांव, लालगंज, घोसी, सलेमपुर, जौनपुर, मछलीशहर, गाजीपुर, भदोही।
समाजवादी पार्टी की सीटें:-लिस्ट के मुताबिक पश्चिम, अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में सपा को सीटें हासिल हुई हैं। कैराना, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, गाजियाबाद, हाथरस, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, खीरी, हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, इटावा, कन्नौज, कानपुर, झांसी, बांदा, कौशाम्बी, फूलपुर, इलाहाबाद, बाराबंकी, फ़ैजाबाद, बहराइच, गोंडा, महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, आजमगढ़, बलिया, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर और राबर्टसगंज सीट से सपा चुनाव लड़ेगी।राष्ट्रीय लोकदल तीन सीटों पर चुनाव लड़ेगी। राष्ट्रीय लोकदल को समाजवादी पार्टी के कोटे से कुछ अतिरिक्त सीट मिलेगी। राष्ट्रीय लोकदल को फिलहाल तीन सीट दी गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बाद ही इस बात का ऐलान कर दिया था कि 37 सीटों पर सपा और 38 सीटों पर बसपा लड़ेगी।

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड पर मिलने वाले ब्याज दर को 8.55 फीसद से बढाकर 8.65 फीसद कर दिया है। मोदी सरकार के इस फैसले से करीब साढ़े पांच करोड़ से अधिक कर्मचारियों को फायदा होगा।ब्याज दरों में बढ़ोतरी वित्त वर्ष 2018-19 के लिए लागू होंगी। श्रम मंत्री की अध्यक्षता वाला न्यासी बोर्ड ईपीएफओ का निर्णय लेने वाला शीर्ष निकाय है, जो वित्त वर्ष के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर पर निर्णय लेता है। बोर्ड की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय से सहमति की जरूरत होगी। वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही ब्याज दर को अंशधारकों के खाते में डाला जाएगा। ईपीएफओ ने 2017-18 में अपने अंशधारकों को 8.55 फीसद ब्याज दिया।निकाय ने 2016-17 में 8.65 फीसद और 2015-16 में 8.8 फीसद ब्याज दिया था। वहीं 2013-14 और 2014-15 में ब्याज दर 8.75 फीसद थी।

नई दिल्ली। पीरामल इंटरप्राइजेज लिमिटेड (पीईएल) ने गुरुवार को बताया कि उसकी दर्द निवारक गोली सेरिडॉन को सुप्रीम कोर्ट की ओर से फिक्स डोज कॉम्बिनेशन (FDC) की प्रतिबंधित सूची से हटा दिया गया है। नियामकीय फाइलिंग में कंपनी ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने सेरिडॉन के पक्ष में फैसला सुनाया है, जो कि उसका ऐतिहासिक हेल्थकेयर प्रोडक्ट है।इसमें कहा गया, "सितंबर 2018 को पीईएल पर लगे प्रतिबंध पर उच्चतम न्यायालय से स्थगन आदेश मिला था, जिसके बाद इसे फिक्स डोज कॉम्बिनेशन के विनिर्माण, वितरण और बिक्री को जारी रखने की अनुमति मिल गई थी।" कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए पीईएल की कार्यकारी निदेशक नंदिनी पीरामल ने बताया, "हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हैं क्योंकि यह प्रभावी और सुरक्षित हेल्थकेयर सॉल्यूशन को उपलब्ध करवाने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जो कि भारतीय ग्राहकों की जरूरत है। हमें भरोसा था कि कानून हमारे पक्ष में ही फैसला सुनाएगा।"जानकारी के लिए आपको बता दें कि पिछले साल सितंबर महीने में ही सरकार ने 349 FDC दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था जो कि सुरक्षा संबंधी मुद्दों और चिकित्सीय औचित्य के लिहाज से तर्कहीन था। यह उल्लेख करते हुए कि सेरिडॉन भारत में पिछले 50 वर्षों से ग्राहकों की ओर से भरोसा किया जाने वाला "हेरिटेज ब्रांड" है, पीरामल ने कहा, "प्रतिबंधित एफडीसी सूची से इसका बाहर किया जाना हमारी ग्राहकों की सेवा करने की भावना की पुष्टि करता है।"

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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