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बीजापुर। वर्ष 2005 में सलवा जुडूम की प्रताड़ना से परेशान होकर नक्सलवाद को अपनाने वाले नक्सली दंपति की कहानी मार्मिक है। इनका दर्द इस बात को बयां करने के लिए काफी है कि माओवादी और क्रांतिकारी विचारधारा के नाम पर नक्सली नेता संगठन में किस तरह बस्तर के युवाओं का शोषण और उनके अधिकारों का हनन करते हैं। यही नहीं बल्कि दाम्पत्य और संतान सुख से भी कोसों दूर कर दिया जाता है। ऐसी ही कहानी नक्सली दंपति सेक्शन कमांडर नागेश और सोमे की है, जिन्होंने नक्सलियों से परेशान होकर संतान की चाह में देश की मुख्य धारा में लौट आए हैं।बुधवार को आत्मसमर्पण करने यहां पहुंचे नक्सली दंपति मनकेली निवासी नागेश उर्फ बुधराम कुरसम और सोमे उर्फ भीमे दोनों ही संगठन में सेक्शन कमांडर के पद पर काम कर रहे थे। दोनों ने करीब 15 साल पहले सलवा जुडूम के डर से नक्सलियों की लाल सेना का हिस्सा बन गए थे।
आठ साल पहले किया था विवाह:-नागेश का कहना है कि उसने पूवर्ती निवासी सोमे भीमे से वर्ष 2011 में संगठन में रहने के दौरान ही शादी कर ली थी। परंतु बड़े लीडरों ने शादी के तुरंत बाद जबरदस्ती नसबंदी करवाकर संतान सुख से दूर कर दिया। इसके चलते वे आठ साल से काफी परेशान और प्रताड़ित होते रहे। उन्हें संतान की इच्छा थी लेकिन बड़े नक्सली नेताओं के आगे वे मजबूर थे।नागेश ने बताया कि एक दिन संतान की चाह के चलते उसने अपनी पत्नी भीमे से समर्पण की इच्छा जताई तो उसने हामी भर दी। इसके बाद दोनों काम के सिलसिले में आंध्र प्रदेश जाने का बहाना बनाकर आत्मसमर्पण करने बीजापुर आ गए। यहां एसपी से संपर्क करने के बाद उन्हें जीने की एक नई राह मिली है।
बच्चे बनते हैं रोढ़ा, इसलिए इनके खिलाफ हैं नक्सली:-नक्सल संगठन में महिला और पुरुष दोनों शामिल होते हैं। दोनों को ही लड़ाई और बंदूक चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। नक्सली कैंप एक से दूसरी जगह तक मूव करते रहते हैं और इनका कोई स्थाई ठिकाना नहीं होता। नक्सली गतिविधियों के विस्तार में बच्चे रोढ़ा होते हैं। इस वजह से संगठन में शादी और बच्चे पैदा करने तक की मनाही है।संगठन में जोड़ों के बीच प्रेम होता है और वे गुप्त तरीके से शादी कर लेते हैं। इस शादी की खबर लगने पर उन्हें सजा दी जाती है और सजा के तौर पर नसबंदी करा दी जाती है। नक्सली लीडरों का मानना है कि प्रेम और दांपत्य संबंध और बच्चे नक्सल संगठन को कमजोर करते हैं। इस वजह से वे परिवार और वंश वृद्धि के खिलाफ हैं।
नक्सलवाद से हो रहा मोहभंग:-बस्तर आईजी विवेकानंद सिन्हा ने कहा कि बस्तर के भोले- भाले आदिवासियों को बहला- फुसलाकर बाहर के नक्सली संगठन में भर्ती कर रहे हैं, लेकिन बस्तर के लोग अब समझ चुके हैं कि नक्सली जन विरोधी हैं। स्कूल, अस्पताल, सड़क बनने नहीं देते और ग्रामीणों को सरकारी सुविधाओं से वंचित रखते हैं। अब स्थानीय कैडरों का नक्सलवाद से मोह भंग हो रहा है। वे मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं और क्षेत्र के विकास की बात भी कर रहे हैं। सिन्हा ने समर्पित नक्सलियों का स्वागत करते अन्य भटके नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की

मंगलौर। मंगलौर के सिटी सेंटर मॉल भीषण आग की चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि बुधवार की सुबह मॉल के टॉप फ्लोर पर अचानक आग लग गई। आग सुबह करीब 11:30 बजे लगी। इस घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें मॉल की ऊपरी मंजिल से धुंआ निकलता दिख रहा है।आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियों मौके पर पहुंचीं और वक्त रहते आग पर काबू पा लिया। गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी भी जान के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।अधिकारी आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मान रहे हैं। फिलहाल राहत-बचाव कार्य किया जा रहा है। मॉल के शीशे तोड़ दिए गए हैं, ताकि धुंआ बाहर निकल सके।

नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्‍मद भारत में एक बार फिर पुलवामा से बड़ा हमला करने का प्‍लान कर रहा है। इसको लेकर खुफिया एजेंसियों ने जानकारी दी है कि आतंकी एक बार फिर आत्‍मघाती हमले की योजना बना रहे हैं। पाकिस्‍तान में बैठे आतंकियों के आका और कश्‍मीर में बैठे आतंकियों के बीच हुई बातचीत को इंटरसेप्‍ट करने के बाद यह जानकारी खुफिया एजेंसी की तरफ से आई है। ये हमला अगले दो से तीन दिनों के भीतर ही हो सकता है, जिसके लिए गाड़ी भी तैयार कर ली गई है। खुफिया एजेंसियों को जो इनपुट मिले हैं उसके अनुसार जैश उत्तरी कश्मीर में चौकीबल और तंगधार में IED ब्लास्ट के जरिए हमला करने की साजिश रच रहा है।
पांच सौ किग्रा आरडीएक्‍स का इस्‍तेमाल;-खुफिया एजेंसियों ने यह भी कहा है कि जैश के आतंकियों के द्वारा एक हरे रंग की स्‍कार्पियो गाड़ी को तैयार कर लिया गया है। इस आत्‍मघाती हमले के लिए पहले से कहीं अधिक आरडीएक्‍स का इस्‍तेमाल किया जा सकता है।खुफिया एजेंसी ने कहा है कि आतंकी इसके लिए पांच सौ किग्रा आरडीएक्‍स का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। एक अन्य इनपुट में ये भी पता चला है कि कुछ लोकल कश्मीरियों को आतंकी बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। बताया गया है कि सरहद के उसपार 5-6 आतंकी घुसपैठ के लिए गुरेज सेक्टर के पास बैठे हैं जो आतंकी आकाओं की तरफ से इजाजत मिलते ही भारत में दाखिल हो जाएंगे।
इंटरसेप्‍ट की गई आतंकियों की बातचीत:-आतंकियों के बीच 16-17 फरवरी के बीच यह बातचीत हुई है। अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, यह हमला भी जवानों पर ही किया जाना था। इनपुट के मुताबिक, यह हमला जम्‍मू या राज्‍य के बाहर किया जाता। आपको यहां बता दें कि सीमा पार से करीब 21 आतंकी भारत के अंदर घुसने के इंतजार में है। इसमें तीन आत्‍मघाती हमलावर भी शामिल हैं। खुफिया एजेंसियों से मिला इनपुट बेहद खास इस लिहाज से भी है, क्‍योंकि मंगलवार को ही पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने टीवी पर आकर न सिर्फ भारत को धमकी दी थी, बल्कि यहां तक कहा था कि यदि भारत के पास पुलवामा हमले को लेकर जो भी जानकारी हो वो उन्‍हें मुहैया करवाएं तो पाकिस्‍तान जरूर कार्यवाही करेगा।
पाकिस्‍तान के लिए घातक होगा कदम:-आपको बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद एक बार फिर दोनों देशों के रिश्‍ते काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। भारत ने आतंकियों को सबक सिखाने के लिए जहां सेना को पूरी छूट दे दी है, तो वहीं इमरान ने साफ कर दिया है कि यदि भारत ने पाकिस्‍तान में किसी तरह की कोई भी कार्रवाई की तो वह निश्चित तौर पर इसका जवाब देंगे। वहीं उनके मंत्री ने भारत को परमाणु हमले तक की धमकी दे डाली है। ऐसे में दूसरे बड़े हमले का खुफिया इनपुट दोनों ही देशों को चिंता में डालने वाला है। ऐसा इसलिए, क्‍योंकि दोनों ही देशों के लिए यह समय बड़ा चुनौतीपूर्ण है। भारत जहां अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर पाकिस्‍तान को अलग-थलग करने की योजना पर काम कर रहा है, वहीं पाकिस्‍तान अपनी छवि को बचाने की कोशिश कर रहा है। पाकिसतान के लिए यह समय इसलिए भी काफी संवेदनशील है, क्‍योंकि वह अफगानिस्‍तान की शांतिवार्ता में मध्‍यस्‍थ बना हुआ है। इस छवि को वह भुनाने में भी लगा है। ऐसे में खुफिया एजेंसियों से मिला इनपुट उसके लिए घातक साबित हो सकता है। ऐसे में पाकिस्‍तान को जरूरी होगा कि वह न सिर्फ पाकिस्‍तान में बैठे जैश के सरगना मसूद अजहर कड़े कदम उठाए, बल्कि पाकिस्‍तान के लिए आत्‍मघाती बनने वाले इन कदमों को हर हाल में रोक दे।
अफगानिस्‍तान का रुख:-गौरतलब है कि पुलवामा हमले के बाद भारत की सख्‍त कार्रवाई की चेतावनी के बाद पाकिस्‍तान के अफगानिस्‍तान स्थित राजदूत ने यहां तक कहा था कि भारत की वजह से यहां की शांतिवार्ता बेपटरी हो सकती है। इस पर अफगानिस्‍तान ने राजदूत जाहिद नसरुल्‍लाह को तलब कर उनके बयान पर सख्‍त एतराज जताया है। यहां पर ये भी ध्‍यान देने वाली है कि पिछले दिनों इस शांतिवार्ता का तीसरा दौर पाकिस्‍तान में होना था, जिसको रद कर दिया गया है। अफगानिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति इस हक में नहीं थे कि वार्ता का दौर पाकिस्‍तान में हो। अब इसका दौर दोहा में होगा।

नई दिल्‍ली। चीन के बढ़ते कदमों की आहट से कई देश परेशान हैं। भारत भी इसमें शामिल है। इसके अलावा उसके कदमों की आहट भारत के हर पड़ोसी मुल्‍क में सुनाई दे रही है। ताइवान ने चीन के बढ़ते खतरे को लेकर सभी एशियाई देशों को आगाह किया है। सीएनएन को दिए एक खास इंटरव्‍यू में ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वें ने आगाह किया है कि यदि चीन को नहीं रोका गया तो एशिया के दूसरे देश उसके निशाने पर आ जाएंगे। दरअसल, त्‍साई का यह बयान इस वजह से भी बेहद खास है क्‍योंकि जनवरी में ही चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि ताइवान अगर बातचीत से नहीं माना तो वह सैन्‍य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा। इसके लिए शी ने हवाई कार्रवाई की भी बात कही थी।आपको यहां पर बता दें कि वर्ष 2016 में डेमोक्रेटिक प्रगतिशील पार्टी की नेता त्साई के नेतृत्व में राष्ट्रपति चुनाव जीता था। यहां पर ये भी ध्‍यान रखने वाली बात है कि चीन के अंतिम छोर से ताइवान की दूरी महज सौ किमी है। चीन हमेशा ही ताइवान को अपना हिस्‍सा बताता आया है वहीं ताइवान ने खुद को आजाद देश घोषित किया हुआ है। राष्‍ट्रपति त्‍साई का बयान इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि कुछ समय पहले ही ताइवान के निकट समुद्र में फायर ड्रिल की थी। इसके अलावा चीन के लड़ाकू विमानों ने भी ताइवान के हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरी थी। त्‍साई ने ताइवान की मदद करने और उसकी सुरक्षा में भागीदार बनने के लिए अमेरिका का भी धन्‍यावाद अदा किया है। लेकिन चीन का कई मुद्दों पर अमेरिका से सीधा टकराव है। इसमें दक्षिण चीन सागर भी शामिल है। वहीं चीन ताइवान के करीब आने वाले सभी देशों को लेकर कई बार तीखी बयानबाजी कर चुका है।यहां आपको बता दें कि इसी वर्ष जनवारी में बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ पीपल्‍स में ताइवान नीति से जुड़े कार्यक्रम के दौरान शी यहां तक कहने से नहीं चूके थे कि ताइवान और चीन के अंदरूनी मामलों में उसको किसी भी बाहरी देश की दखल कतई मंजूर नहीं है। इसके अलावा उन्‍होंने यह भी कहा था कि ताइवान का अलग राष्‍ट्र के तौर पर सामने आना उसके लिए बेहद घातक साबित होगा। विश्‍व के करीब 17 देश ताइवान को स्‍वतंत्र राष्‍ट्र के तौर पर मान्‍यता देते हैं। इनमें से 16 देशों के ताइवान में दूतावास भी हैं। वहीं करीब 50 देशों के ताइवान से डिप्‍लोमेटिक रिलेशन नहीं हैं। इसके बाद भी इन देशों के यहों पर ट्रेड ऑफिस भी हैं। इनमें अमेरिका समेत भारत, रूस समेत दूसरे देश भी शामिल हैं। लेकिन इसके बाद भी चीन और ताइवान के बीच की कहानी को कम ही लोग जानते हैं। आज हम आपको इसका ही जवाब दे रहे हैं।दरअसल, चीन में दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1946 से 1949 तक राष्ट्रवादियों और कम्युनिस्ट पीपुल्स आर्मी के बीच गृह युद्ध हुआ था। 1949 में खत्म हुए इस युद्ध में राष्ट्रवादी हार गए और चीन की मुख्यभूमि से भागकर ताइवान नाम के द्वीप पर चले गए। उन्होंने ताइवान को एक स्वतंत्र देश घोषित किया और उसका आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ चाइना रख दिया गया। आपको बता दें कि चीन का आधिकारिक नाम पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना है। तनाव के बाद भी दोनों पक्षों के बीच गहरे कारोबारी, सांस्कृतिक और निजी व्यक्तिगत संबंध हैं। लेकिन लोकतंत्र के मुद्दे पर चीन और ताइवान में काफी अंतर है। ताइवान जहां लोकतांत्रिक शासन में विश्‍वास रखता है वहीं चीन एकपार्टी शासन में विश्‍वास रखता है।आपको यहां पर बता दें कि चीन की विस्‍तार नीति का ही हिस्‍सा था कि 1951 में तिब्बत पर हमला कर उसको अपने कब्‍जे में ले लिया गया।

नई दिल्ली। देश में जल्द ही ऐसी तकनीक विकसित कर ली जाएगी, जिससे किसी भी जगह पर आपदा की सूचना अथॉरिटी तक कुछ ही पल (सेकेंड) में पहुंच जाए। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्पेशल सेंटर फॉर डिजास्टर रिसर्च (एससीडीआर) की तरफ से इस दिशा में काम किया जा रहा है। एससीडीआर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये एक प्रणाली तैयार कर रहा है। साथ ही इस परियोजना के लिए जेएनयू में 11 से 13 मार्च तक एससीडीआर की ओर से व‌र्ल्ड सिपोजियम का आयोजन किया जा रहा है।इसमें देश समेत विदेशों से भी कई विशेषज्ञ पहुंचेंगे। इसमें चर्चा होगी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सरकारी तंत्र आपदा प्रबंधन के लिए किस तरह का सहयोग कर सकता है। एससीडीआर की अध्यक्ष प्रो. अमिता सिंह ने बताया कि व‌र्ल्ड सिपोजियम का सबसे पहला अधिवेशन मीडिया से होगा। इसमें नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, अमेजॉन रोबोटिक्स के डॉ. केशव सूद , जेएनयू में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ प्रो टी.वी.विजय कुमार मौजूद रहेंगे।
17 सेकेंड में तैयार होगा मैप:-प्रो. अमिता सिंह ने कहा कि आज के दौर में हमारे स्मार्ट फोन का इस्तेमाल बेहद बढ़ गया है। इसमें भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का इस्तेमाल हो रहा है। ठीक इसी तरह से हमारी तरफ से ऐसी प्रणाली विकसित करने पर काम किया जा रहा है, जिससे इस एआइ के जरिये किसी भी तरह की आपदा की जानकारी सेकेंडों में अथॉरिटी तक पहुंच जाए। एआइ का आपदा प्रबंधन में बहुत बड़ा महत्व है। इससे आपदा का पुर्वानुमान जानने में भी बेहद मदद मिल सकती है।आमतौर पर जब भी कोई आपदा आती है तो वहां से लोगों को बचाने के लिए एक मैप अथॉरिटियो की तरफ से तैयार किया जाता है। इसको तैयार करने में सात दिनों से दस दिनों तक का समय लग जाता है, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से यह मैप महज 17 सेकेंडों में तैयार हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम हो रही तैयार:-प्रो. अमिता ने बताया कि हमारी तरफ से अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम तैयार की जा रही हैं। एआइ से आपदा प्रबंधन की प्रक्रिया को बहुत तेजी से तैयार किया जा सकेगा। हमारा प्रयास यह भी है कि इस क्षेत्र में भारतीय मूल के विदेशों के विशेषज्ञों को भारत में लाया जाए।

वाराणसी। बड़े भइया प्रो. नामवर सिंह हिंदी साहित्य के एक असाधारण व्यक्तित्व रहे। उन्होंने आजीवन एक योगी का जीवन जिया, जिन्हें साहित्यिक योगी भी कह सकते हैं। पढ़ने -लिखने और किताबों के सिवा जीवन में उन्होंने कुछ नहीं जाना। नागफनी का जिक्र वे जब अपने जीवन के संदर्भ में करते तो इशारा उनके संघर्षों की तरफ ही होता।वास्तव में नागफनी में कांटे ज्यादा होते हैं और उनकी जिंदगी भी कांटों भरी ही रही। दो विश्वविद्यालयों से निकाले गए, एक जगह मुकदमे का भी सामना करना पड़ा। उनकी बातें भी कभी-कभी बहुतों के लिए नागफनी हुआ करतीं तो आलोचना में भी नागफनी के कांटे दिखाई पड़ते। इन सबके बाद भी भइया असल में छतनार वृक्ष रहे, एक विशाल वृक्ष। सबको छाया देने वाले और उसी तरह अडिग भी। उनके जाने से सिर से छतनार की छांव उठ गई।बड़े भइया के जीवन के सबसे अच्छे दिन लोलार्क कुंड के थे जिसमें संघर्ष के साथ सुख भी था। दिन भले गरीबी के रहे लेकिन ये वही दिन थे जब मां-पिता जी थे। मां और मैं तो रहते ही थे साथ में। मंझले भइया भी सप्ताह या पखवारे भर में आते रहते थे। इस तरह सामूहिकता का भाव बराबर बना रहता।यह कह सकते हैं कि भइया का मानसिक निर्माण बनारस में ही हुआ और अंत तक मुख्य रूप से बनारसी ही रहे। वे जब तक अपने शहर बनारस में आ सकते थे, आते रहे। यहां आने की इच्छा भी बराबर उनकी बनी रहती है लेकिन उम्र ढलने के साथ उनका आना क्रमश: कम होता गया। बाद में हम लोग खुद इस पक्ष में नहीं रहे कि वे दिल्ली से बाहर ज्यादा जाएं। मिलना होता तो मैं खुद ही चला जाता।मुझे सदा से गर्व रहा कि मैं उनका छोटा भाई हूं। उन्होंने मुझे गोद में खिलाया, पढ़ाया-लिखाया। हर सुख-दुख में मैंने उन्हें साथ पाया। डेढ़ दशक तक बनारस में उनकी छाया की तरह रहा। लेखक के रूप में जहां कहीं मुझमें भटकाव आया, बराबर उनसे बातें की। कुछ अच्छा लिख सका, तो उसके पीछे कहीं-न-कहीं उनके दिए सूत्र रहे। बड़े भइया जब दिल्ली चले गए तो मैं साल में दो तीन-बार, सप्ताह भर के लिए जाता रहा और सेवा वाला क्रम बराबर जारी रखा। यही वक्त होता था जब भइया खाली होते और उनसे समकालीन भारतीय साहित्य, हिंदी साहित्य, विश्व साहित्य आदि के बारे में बातें होती थीं।कथा- लेखन का मेरा पूरा शिक्षण गुरु कुल शैली में हुआ, मैंने गुरु सेवा करते बहुत कुछ सीखा। भइया को सदा मेरी चिंता रहती। इसे उन्होंने 'जीवन क्या जिया' में लिखा भी। वास्तव में यह भाई-भाई का लगाव ही रहा लेकिन हम दोनों भाइयों की चिंता यह रही है कि उन्हें घर-परिवार की चिंता से मुक्त रखा जाए। कारण यह कि भइया जब गांव में मिडिल में पढ़ते थे, तभी वे इलाके में कवि रूप में प्रसिद्धि पा चुके थे। वे सम्मेलनों में काव्य-पाठ करते और लोग उन्हें तल्लीनता से सुनते।बनारस में भी वे कभी गीतों के राजकुमार ही थे। इससे हमने तय किया कि हम लोग कुछ बनें या न बनें लेकिन हम में से एक भाई कुछ बन रहा है तो उसके लिए जो कुछ हो सकता है, करेंगे। यह हम तीनों भाइयों का लगाव था जो जैसा था, वैसा ही रहा।

नई दिल्ली। भारतीय शोधकर्ताओं ने माइक्रोहाइडलिडी परिवार के मेंढक की एक नई प्रजाति का पता लगाया है। मेंढक की यह प्रजाति केरल के दक्षिणी-पश्चिमी घाट में सड़क किनारे मौजूद अस्थायी पोखर में पाई गई है। मेंढक की इस प्रजाति की आंतरिक एवं बाह्य संरचना, आवाज, लार्वा अवस्था और डीएनए नमूनों का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस अध्ययन से जुड़े दिल्ली विश्वविद्यालय के उभयचर वैज्ञानिकों सोनाली गर्ग और प्रो. एसडी बीजू ने विकासवादी जीव-विज्ञानी प्रो. फ्रैंकी बोसुइट के नाम पर इस नई प्रजाति को मिस्टीसेलस फ्रैंकी नाम दिया है।यह प्रजाति दक्षिण-पूर्वी एशिया के माइक्रोहाइलिने उप-परिवार के मेंढकों से मिलती-जुलती है। इसकी करीबी प्रजातियां लगभग दो हजार किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व एशिया के भारत-बर्मा और सुंडालैंड के वैश्विक जैव विविधता क्षेत्रों में पाई जाती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, मेंढक की यह प्रजाति अपने दक्षिण-पूर्व एशियाई संबंधियों से लगभग चार करोड़ वर्ष पूर्व अलग हो गई थी।शोधकर्ताओं का कहना है कि इस समानता का कारण सेनोजोइक काल में भारत और यूरेशिया के बीच होने वाला जैविक आदान-प्रदान हो सकता है। माइक्रोहाइलिडी परिवार के मेंढकों को संकीर्ण-मुंह वाले मेंढक के नाम से भी जाना जाता है। प्रमुख शोधकर्ता सोनाली गर्ग ने बताया कि प्रायद्वीपीय भारत के प्रमुख जैव विविधता केंद्र में स्थित होने के बावजूद इस प्रजाति की ओर पहले किसी का ध्यान नहीं गया था। स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में उभयचरों का दस्तावेजीकरण अभी पूरा नहीं हुआ है। इस मेंढक को अब तक शायद इसलिए नहीं देखा जा सका क्योंकि यह वर्ष के अधिकतर समय गुप्त जीवनशैली जीता है और प्रजनन के लिए बेहद कम समय के लिए बाहर निकलता है।इस प्रजाति के नर मेंढक कीट-पतंगों जैसी कंपकंपाने वाली आवाज से मादा को बुलाते हैं। यह ध्वनि कीट-पतंगों के कोरस से निकलने वाली आवाज की तरह होती है। नर मेंढक आमतौर पर उथले पानी के पोखर के आसपास घास की पत्तियों के नीचे पाए जाते हैं। इस मेंढक के पाश्र्व भाग में आंखों की संरचना जैसे काले धब्बे होते हैं। नर मेंढक शरीर के पिछले भाग को उठाकर कमर पर मौजूद इन धब्बों को प्रदर्शित करते हैं। इन मेंढकों में इस तरह का व्यवहार उस वक्त देखा गया है, जब वे परेशान होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये धब्बे शिकारियों के खिलाफ रक्षात्मक भूमिका निभाते हैं।जीवों के आश्रय स्थलों के नष्ट होने के कारण उभयचर प्रजातियां भी विलुप्ति से जुड़े खतरों का सामना कर रही हैं। इस नए मेंढक के आवास संबंधी जरूरतों और इसके वितरण के दायरे के बारे में अभी सीमित जानकारी है। इसलिए इस मेंढक से संबंधित स्थलों को संरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि इस प्रजाति को बचाया जा सके।

नई दिल्ली। कुंभ मेला भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विविधताओं को दर्शाता है। यहां भारत देश से ही नहीं बल्कि पूरे विश्व से विभिन्न जाति, धर्म और वर्ग के लोग आते हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन है। इस बार का कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित किया गया है, जो 15 जनवरी, 2019 से 04 मार्च,2019 तक चलेगा।इतने बड़े मेले में सबसे बड़ी समस्या कनेक्टिविटी और व्यवस्था की रहती है जैसे रोड, ट्रेन और हवाई यात्रा के जरिए कैसे प्रयागराज पहुंचा जाए, साथ ही वहां पहुंचने वाले लोगों के लिए किस तरह की व्यवस्था है आदि। हालांकि उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है और वहां पहुंचने वालों के लिए जरूरी व्यवस्था की है। उधर सरकार की इस व्यवस्था में टेलीकॉम नेटवर्क्स ने भी अपना योगदान दिया है। जैसे Airtel ने पूरे शहर में 100 नए टॉवर लगाए हैं, खासकर मेले वाली जगह पर ताकि वहां पहुंचने वाले श्रद्धालु और स्थानीय लोग बिना किसी रुकावट आराम से कॉल और डेटा का इस्तेमाल कर सकें।कुंभ मेले में लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए Airtel ने 24 घंटे वार रूम की भी व्यवस्था की है। इसके लिए 97 सदस्यों की टीम पूरी सजगता के साथ काम कर रही है। Airtel के इस सपोर्ट से कुंभ जैसे भीड़भाड़ वाली जगह पर सूचनाओं का आदान-प्रदान काफी आसान और तेज बना दिया है। वर्चुअल रिऐलिटी (VR) जैसी तकनीक इस साल कुंभ में मुख्य आकर्षण है और Airtel कई जगह वीआर जोन बनाकर लोगों को इस तकनीक के जरिए मेले का एक अनोखा और आधुनिक अनुभव दे रही है। इसके अलावा ऐसे ऐप्स भी हैं जिनके जरिए आरती और स्नान की लाइव स्ट्रीमिंग देखी जा सकती है, जैसे Airtel TV ऐप। इसका लाभ उन लोगों को मिल रहा है, जो किसी वजह से कुंभ में नहीं जा सके।कुंभ में बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी की वजह से हर किसी को फायदा मिल रहा है। उदाहरण के लिए, Airtel के फास्ट इंटरनेट से न केवल श्रद्धालुओं को इसका लाभ मिल रहा है बल्कि सुरक्षा में तैनात पुलिस और पल-पल की खबरें देने वाले रिपोर्ट्स भी इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं।कुंभ मेले में हमेशा से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए बड़ी तादात में पहुंचते हैं। ऐसे में बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी न केवल उनके धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव को शानदार बनाता है बल्कि इस तरह के बड़े आयोजनों में वह खुद को सुरक्षित भी महसूस करते हैं।

 

 

 

किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में तिब्बत सीमा के निकट पूह ब्लॉक के तहत डोगरी (नमज्ञा) क्षेत्र में बुधवार सुबह ग्लेशियर गिरा। इसकी चपेट में सेना की सात जैक राइफल के छह जवान आ गए। इनमें से एक जवान की मौत हो गई। पांच जवान लापता हैं। ग्लेशियर में दबे तीन जवान हिमाचल के और एक-एक जवान उत्तराखंड व जम्मू कश्मीर का बताया जा रहा है।आइटीबीपी (इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस) की 17वीं बटालियन व सात जैक राइफल का कैंप डोगरी में साथ ही है। सेना के 16 जवान पानी की पाइपलाइन ठीक करने बुधवार को डोगरी से ऊपर शिपकिला ग्लेशियर की ओर गए थे। वहां से सैन्य जवानों को पेयजल आपूर्ति होती है। बर्फबारी के कारण पाइपों में पानी जमने से पेयजल आपूर्ति बाधित थी। आइटीबीपी के आठ जवान तड़के तीन बजे सामान्य पेट्रोलिंग करने के लिए निकले थे। वे पहाड़ी के ऊपर थे।पेट्रोलिंग कर रहे आइटीबीपी जवानों ने सेना की टुकड़ी को अलर्ट किया था कि ग्लेशियर गिर सकता है। सुबह करीब साढ़े दस बजे नाले में पाइप की मरम्मत करते समय सेना के जवान ग्लेशियर की चपेट में आ गए। त्वरित कार्रवाई बल, सेना, आइटीबीपी, जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स, पुलिस व स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। ग्लेशियर में दबे हिमाचल के बिलासपुर निवासी 41 वर्षीय जवान राजेश कुमार को शाम साढ़े छह बजे निकाल लिया गया। उसे पूह के निकट सैन्य अस्पताल ले जाया गया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।दुर्घटनास्थल पर सिग्नल की कमी के कारण संपर्क में दिक्कत आई। किन्‍नौर के उपायुक्‍त गोपाल चंद्र ने कहा कि पांच जवानों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन देर शाम तक जारी रहा। बाद में अधिक ठंड व अंधेरे के कारण सर्च ऑपरेशन बंद कर दिया गया जिसे वीरवार सुबह दोबारा शुरू किया जाएगा।किन्‍नौर जिले की एसपी साक्षी वर्मा ने कहा कि जब तक ग्लेशियर में दबे जवान न मिलें, तब तक कुछ कहना उचित नहीं होगा। घटना के बारे में हिमाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि ग्लेशियर में दबने से सेना के जवान की मौत दुखद घटना है। प्रदेश सरकार जवानों को राहत के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध करवाएगी। किन्नौर के उपायुक्त को सेना व आइटीबीपी प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
हिमाचल, उत्तराखंड में भारी बर्फबारी की चेतावनी:-हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बुधवार को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश व बर्फबारी दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हिमाचल के केलंग में न्यूनतम तापमान -9.8 रहा जबकि जम्मू-कश्मीर में बनिहाल में -11 डिग्री सेल्सियस रहा। अगले 24 घंटे के दौरान हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बारिश व बर्फबारी की चेतावनी जारी की है।हिमाचल प्रदेश में बारिश व बर्फबारी से प्रदेश में 225 सड़कें बुधवार को भी बंद रही। भारी हिमपात के कारण चिनाब घाटी की 134 सड़कों को यातायात के लिए बंद कर दिया है। उत्तराखंड में बुधवार को बदरीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड, मुनस्यारी समेत हिमालय की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई।
किसानों की बढ़ी परेशानी;-बुधवार को पंजाब के कई जिलों में हल्की व तेज बारिश रिकार्ड की गई और ठंडी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी। वहीं मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश से फसलों को हो रहे नुकसान से किसान पहले से ही चिंतित हैं। मौसम विभाग के अनुसार अभी एक सप्ताह तक पंजाब में इसी तरह बारिश होती रहेगी।

कानपुर। भिवानी जा रही कालिंदी एक्सप्रेस में शिवराजपुर (कानपुर) के बर्राजपुर स्टेशन पर विस्फोट हो गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि टॉयलेट की छत उड़ गई। बुधवार शाम करीब सात बजे हुई घटना के बाद बोगी में धुआं भर गया और चीख-पुकार के बीच अफरा-तफरी मच गई।जीआरपी जवानों ने बारूद की गंध आने पर बम निरोधक दस्ते को बुलाया। विस्फोट वाले स्थान के पास जैश ए मोहम्मद के नाम का धमकी भरा पत्र मिला है। उसे आरपीएफ ने कब्जे में ले लिया। विस्फोट की सूचना पर पुलिस उच्चाधिकारियों के साथ ही फोरेंसिक एक्सपर्ट व एटीएस की टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो गई। जांच-पड़ताल के चलते देर रात तक ट्रेन रवाना नहीं हुई थी।बर्राजपुर स्टेशन पर कालिंदी एक्सप्रेस के रुकते ही जनरल बोगी के टॉयलेट में तेज धमाका हुआ तो यात्रियों में भगदड़ मच गई। धुएं के बीच लोग जान बचाकर भागे और एक-दूसरे पर ही गिरकर घायल हो गए। ट्रेन में मौजूद जीआरपी जवान शोर-शराबा सुनकर बोगी में पहुंचे और यात्रियों को बाहर निकालकर छानबीन शुरू की।पहले जीआरपी जवानों ने टॉयलेट के ऊपर लगे बैट्री बॉक्स में विस्फोट होने की बात कही। लेकिन बाद में बारूद की गंध आने पर घटना की संवेदनशीलता समझी और रेलवे के बम निरोधक दस्ते को सूचना दी गई। तलाशी के दौरान आरपीएफ को जैश-ए-मोहम्मद के नाम का पत्र मिला। इसको लेकर संवेदनशीलता और बढ़ गई।विस्फोट वाले स्थान के पास एक बोरी में मृत पशु के अंग व खाना बनाने का सामान मिला। जांच टीम ने सभी चीजों को कब्जे में लेकर पड़ताल शुरू की है। घटना के बाद से ट्रेन को दो घंटे से स्टेशन पर रोका गया है। स्टेशन मास्टर एके मिश्र ने बताया कि बोगी में धमाके के बाद ट्रेन को स्टेशन पर रोका गया है।विस्फोट में बारूद या फिर टेक्निकल फाल्ट से धमाका होने की बात एक्सपर्ट टीम की जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। मामले की सूचना रेलवे उच्चाधिकारियों को भी दी गई है। एसएसपी अनंतदेव तिवारी ने बताया कि ट्रेन में धमाका हुआ है। धमकी भरा पत्र मिला है। जांच के लिए एटीएस की टीम पहुंच रही है।

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