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साल 2018 अपने आखिरी पड़ाव पर है और इसी के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री समेत सिनेप्रेमी तमाम अवॉर्ड् फंक्शन का बेसब्री से इंतजार भी करते है। बता दें कि बीती रात ही मुंबई में स्टार स्क्रीन अवॉर्ड्स 2018 का आयोजन किया गया था। इस दौरान बॉलीवुड के कई सेलेब्स ने चार चांद लगाए वहीं रेड कारपेट पर आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण, जैकलीन फर्नांडीस और कटरीना कैफ जैसी अदाकारारों ने अपने ग्लैमरस लुक से लोगों का दिल जीत लिया।बता दें कि इन हसीनाओं के अलावा विक्की कौशल, आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव, सलमान खान, ईशान खट्टर, नुसरत भरुचा, रेखा जैसे सितारों ने इस अवॉर्ड फंक्शन में शिरकत की। फिलहाल तो हम आपके लिए इस अवॉर्ड फंक्शन की विजेता लिस्ट लेकर आए है तो चलिए देर किस बात की...नजर डालते स्टार स्क्रीन अवॉर्ड्स के दौरान चमकने वाले सितारों की।
देखें पूरी विनर लिस्ट...
बेस्ट एक्टर- रणवीर सिंह (पद्मावत) और राजकुमार राव (स्त्री)
बेस्ट एक्ट्रेस- आलिया भट्ट (राजी)
बेस्ट रीयल स्टार ऑन सोशल मीडिया- कटरीना कैफ
बेस्ट एक्टर फीमेल (क्रिटिक्स)- नीना गुप्ता (बधाई हो)
बेस्ट एक्टर मेल (क्रिटिक्स)- गजराज राव (बधाई हो)
बेस्ट फिल्म- स्त्री
लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड- शबाना आजमी
बेस्ट एक्ट्रेस इन ए सपोर्टिंग रोल- सुरेखा सिकरी (बधाई हो)
बेस्ट डेब्यू एक्टर (मेल)- ईशान खट्टर (धड़क और बियॉन्ड द क्लाउड्स)
बेस्ट डेब्यू एक्टर (फीमेल)- राधिका मदान (पटाखा)
बेस्ट एक्टर इन ए सपोर्टिंग रोल – पंकज त्रिपाठी (स्त्री)
बेस्ट फीमेल सिंगर- हर्षदीप कौर (दिलबरो-राजी)
बेस्ट लिरिक्स- गुलजार (ए वतन-राजी)
बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर- अरिजीत सिंह (ए वतन- राजी)
बेस्ट म्यूजिक- अमित त्रिवेदी (मनमर्जियां)
बेस्ट फिल्म राइटिंग- अरिजीत विश्वास और श्रीराम राघवन (अंधाधुन)
बेस्ट एक्शन- अहमद खान (बागी 2)
बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स)- आयुष्मान खुराना
बेस्ट डायरेक्टर- श्रीराम राघवन
बेस्ट फिल्म (क्रिटिक्स)- मुल्क
बेस्ट डेब्यूटेंट डायरेक्टर- अमर कौशिश (स्त्री)
बेस्ट कोरियोग्राफी- पद्मावत
बेस्ट डायलॉग्स- स्त्री
बेस्ट सिनेमेटोग्राफी- तुम्बाड
बेस्ट प्रोडक्शन डिजाइन- अमित और सुब्रतो (राजी)
बेस्ट कॉस्ट्यूम- पद्मावत
बेस्ट साउंड डिजाइन- मधु (अंधाधुन)
तो ये रहे इस साल के स्टार स्क्रीन अवॉर्ड्स की विजेता लिस्ट।

वाशिंगटन। अमेरिकी सांसद ब्रैड शरमन ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) पाकिस्तान को चीन का उधार चुकाने के लिए कर्ज नहीं दे सकता। डेमोक्रेट सांसद ने कहा कि कई देशों को कर्ज के जाल में फंसा चुके चीन का धन लौटाने के लिए आइएमएफ से लोन ले लेना कोई सुविधाजनक तरीका नहीं है। अपनी खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए पाकिस्तान ने आइएमएफ से आठ अरब डॉलर (करीब 57 हजार करोड़ रुपये) का कर्ज देने की अपील की है।पाकिस्तान के असंतुष्ट बुद्धिजीवियों और पत्रकारों के साथ रविवार को यहां एक बैठक में शरमन ने कहा, 'पाकिस्तान यदि चीन की उधारी चुकाने के लिए कर्ज लेना चाहता है तो अमेरिका आइएमएफ में अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर ऐसा नहीं होने देगा।चीन खुद देशों को कर्ज के जाल में फंसाता है। यदि वे देश कर्ज नहीं चुका पाते तो यह चीन की समस्या है। इसके लिए आइएमएफ जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग नहीं होने दिया जा सकता।'अमेरिका-पाक संबंधों के भविष्य पर बात करते हुए शरमन ने कहा कि जब तक डॉ शकील अफरीदी का मामला नहीं सुलझता, संबंधों में दरार बनी रहेगी। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए को एबटाबाद में छिपे अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की जानकारी देने वाले अफरीदी को पाकिस्तान में 33 साल की जेल हुई है। अमेरिका अफरीदी की रिहाई चाहता है।

वाशिंगटन। अमेरिकी सिख समुदाय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करतारपुर गलियारा खोलेजाने को लेकर धन्यवाद दिया है। इस गलियारे से भारतीय तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब का बिना वीज़ा के दर्शन करने की सुविधा मिलेगी।उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पिछले महीने 26 नवंबर को इस परियोजना की नींव रखी थी और इसे छह माह के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। यह गलियारा पाक के करतारपुर में स्थित दरबार साहब को भारत के गुरूदासपुर में स्थित डेरा बाबा नानक से जोड़ेगा। इस गलियारे के बनने के बाद भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को बिना वीजा के केवल एक परमीट के सहारे 1522 ई में गुरू नानक देव द्वारा स्थापित करतारपुर साहब का दर्शन करने का मौका मिलेगा। अमेरिकी सिख समुदाय ने कहा कि हम प्रवासी सिख, नरेंद्र मोदी और उनके सरकार का इस गलियारे की नींव रखने और हमारे इस सपने को पूरा करने के लिए शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। चूंकि यह कवायद पाकिस्तान के तरफ से भी गई तो दुनियाभर के सिख समुदाय के लोगों को इससे काफी उम्मीदें हैं।पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री इमरान खान ने पिछले माह 28 नवंबर को इसकी नींव रखी थी। वाशिंगटन के मैरीलैंड में अमेरिका सिखों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय दूतावास के वरिष्ठ अधिकारियों को इसका संकल्प पत्र की एक प्रति प्रस्तुत की गई। इस मौके पर अमेरिकी सिखों के चेयरमैन जसदीप सिंह ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से,सिख समुदाय के लिए भारत और विदेशों में अच्छी खबर आ रही है, उन्होंने1984 सिख दंगों में शामिल कुछ आरोपियों को सजा दिलाने के लिए भारत सरकार की सराहना की।

 

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना राणावत लगातार फिल्म मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। इसका नया पोस्टर सामने आ गया है। इस पोस्टर के सामने आते ही फिल्म रिलीज की भी घोषणा हुई है। आपको यह भी बता दें, पिछले दिनों दमदार टीजर रिलीज हुआ था, जोकि दर्शकों को बहुत पसंद भी आया था। अब दर्शकों को ट्रेलर का बेसब्री से इंतजार है। खैर, ट्रेलर रिलीज से पहले फिल्म का नया पोस्टर सामने आया है। यह पोस्टर महाराजा राजा गंगाधर राव का है। महाराजा राजा गंगाधर रानी लक्ष्मीबाई के पति थे। झांसी के महाराजा राजा गंगाधर राव नेवालकर का किरदार अभिनेता जीशू सेनगुप्ता निभाते हुए नजर आएंगे। आपको यह भी बता दें, सोशल मीडिया के जरिए इस फिल्म के रिलीज की भी घोषणा हुई है। यह घोषणा फिल्म के डायरेक्शन राधा कृष्ण जगरलामुड़ी और झांसी की रानी का किरदार निभा रही कंगना राणावत ने किया है।बात दें, जब से इस फिल्म की शूटिंग शुरू हुई है तब से इस फिल्म से जुडी कई खबरें सामने आई है। मिली जानकरी के मुताबिक, इस फिल्म में असली पुराने हथियारों का इस्तेमाल शूटिंग के दौरान किया है। कंगना राणावत ने शूटिंग के दौरान एक्शन सीन को फिल्माते हुए 150 साल पुराने हथियारों का उपयोग किया है। इसके अलावा फिल्म के कुछ सीन फिल्माते हुए कंगना राणावत 5 किलोग्राम का असली कवच भी पहना था।मिली जानकरी के मुताबिक, कंगना राणावत ने शूटिंग के दौरान ना सिर्फ तलवार बल्कि कैपलॉक पिस्टल का भी उपयोग किया है। तलवार और कैपलॉक पिस्टल का इस्तेमाल उस दौरान खुद रानी लक्ष्मीबाई भी करती थी। पिछले दिनों खुद कंगना राणावत ने इसकी जानकरी सोशल मीडिया के जरिए अपने फैन्स को दी थी। कंगना राणावत इन दोनों फिल्म मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी के अलावा आगामी फिल्म 'पंगा' की शूटिंग में बिजी है। इस फिल्म का निर्देशन अश्विनी अय्यर तिवारी कर रही है। इस फिल्म में कंगना राणावत के अलावा जस्सी गिल और नीना गुप्ता भी मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे। इस फिल्म में कंगना राणावत एक कबड्डी प्लेयर की भूमिका निभाएंगी।

सीरियल किसर नाम से मशहूर एक्टर इमरान हाशमी इनदिनों अपनी आगामी फिल्म चीट इंडिया को लेकर सुर्खियों में बने हुए है। इस फिल्म के अब तक तीसरा पोस्टर रिलीज हो गया है। लेकिन इस लेटेस्ट पोस्टर में इमरान हाशमी चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान लिए 1000 के नोटों की गड्डी से पूरे इंस्टिट्यूट को अपने हाथ में लिए हुए दिखे। इसके साथ ही पोस्टर में भगवान के साथ ही आम लोग भी नजर आ रहे है। मिली खबर के मुताबिक, इमरान हाशमी फिल्म में एक भ्रष्ट टीचर के किरदार में है। जोकि मेडिकल, इंजीनियरिंग के दाखिले को लेकर कॉलेजेस और इंस्टीट्यूशन में अमीर छात्रों से पैसे वसूल करते हुए पैसे कमाते हुए नजर आएंगे।दर्शकों को ये भी बताना जरूरी है की इमरान हाशमी भले ही भ्रष्ट काम करते हो लेकिन इसके पीछे भी नेक काम भी छिपा हुआ है। दरअसल, इमरान हाशमी अमीर बच्चों से पैसे वसूल कर गरीब बच्चों की फीस भरते हुए मदद करते है। इस फिल्म के जरिए इमरान हाशमी नेगेटिव के साथ-साथ पॉजिटिव किरदार भी निभाते हुए नजर आएंगे। आपको बता दें, पिछले काफी समय से इमरान हाशमी बड़े पर्दे से दूर दिखे लेकिन अब गंभीर मुद्दे के साथ फिल्म चीट इंडिया से वो फिर से एक बाद धमाकेदार वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।आपको यह भी बता दें, साल 2018 खत्म होने को है। इससे पहले बॉक्स ऑफिस पर दो बड़ी फ़िल्में यानी शाहरुख़ खान की जीरो और रणवीर सिंह को रिलीज होने वाली है। इसके बाद नए साल में इमरान हाशमी फिल्म चीट इंडिया के जरिए वापसी करेंगे। यह फिल्म 25 जनवरी 2019 को रिलीज हो रही है। अपनी इस आगामी रिलीज फिल्म के लिए इमरान हाशमी काफी उत्साहित है। अभी तक फिल्म चीट इंडियाकी टीम ने फिल्म प्रमोशन की शुरुआत नहीं की है लेकिन नए साल के शुरू होने के साथ फिल्म का प्रमोशन भी शुरू होगा।

लंदन। गंभीर बोन मैरो कैंसर के इलाज की दिशा में उम्मीद की नई किरण दिखी है। ब्रिटेन की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने क्लीनिकल ट्रायल में एक दवा को मायलोमा के मरीजों पर प्रभावी पाया है। इस कैंसर से जूझ रहे मरीजों को लेनालिडोमाइड दवा दी गई। लैंसेट ओंकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित नतीजों के मुताबिक, जिन मरीजों को यह दवा दी गई, उनमें अन्य के मुकाबले ज्यादा सुधार देखा गया।मायलोमा प्लाज्मा कोशिकाओं का कैंसर है जो रीढ़, सिर, पेल्विस और पसलियों में होता है। यह गंभीर किस्म का कैंसर है। इसके इलाज में प्राय: कीमोथेरेपी और स्टेम-सेल प्रत्यारोपण की पद्धति अपनाई जाती है। प्रोफेसर ग्राहम जैकसन ने कहा, ‘हमारे शोध से यह सामने आया है कि ऐसे मरीज जिनमें हाल ही में इस कैंसर की पहचान हुई हो, उन्हें स्टेम- सेल प्रत्यारोपण से पहले यह दवा देनी चाहिए।’ यह दवा इलाज की प्रक्रिया के दौरान मरीजों की सेहत को बेहतर रखने में मददगार है।
बोन मैरो कैंसर के कारण:-बोन मैरो यानि अस्थि मज्जा मुख्य हड्डियों के बीच में एक मुलायम व स्पॉंजी टिशू है। इसमें रक्त बनाने वाली अपरिपक्व कोशिकाएं होती हैं जिन्हें स्टेम सेल्स कहते हैं। स्टेम सेल्स लाल रक्त कोशिकाओं (जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाती है), सफेद कोशिकाएं (जो संक्रमण से लड़ती हैं) और प्लेटलेट्स( जो ब्लड क्लॉटिंग से मदद करती है) में विकसित होती हैं।
बोन मैरो कैंसर के प्रकार:-बोन मैरो कैंसर दो तरह का होता है प्राइमरी और सेकंडरी। इन्हें प्राथमिक और माध्यमिक बोन कैंसर के नाम से भी जाना जाता हैं। जब बोन मैरो कैंसर के सेल्स हड्डियों के बजाए अन्य भागों में मिलते हैं तो ये प्राथमिक बोन कैंसर की श्रेणी में आता है। प्राथमिक बोन कैंसर के भी कई रूप हैं जैसे- ल्यूकेमिया, लिम्फोंमस और मल्टी माइलोमा। जब बोन मैरो में असामान्य रूप से सफेद कोशिकाओं का उत्पाद होने लगता हैं।मल्टीपल माइलोमा कैंसर तब विकसित होता है जब बोन मैरो में प्लाज्मा सेल्स की उत्पति होने लगती हैं। लिम्फोमा आमतौर पर लसिका प्रणाली को प्रभावित करता है लेकिन कुछ और स्थितियों में भी बोन मैरो प्रभावित हो सकते हैं। जैसे बुखार होना, वजन का कम होना, हड्डियों में दर्द होना, बिना कारण फ्रैक्चर होना, एनीमिया, शारीरिक कमजोरी होना, शरीर में सूजन आना, ठीक से पोषण ना लेना, अत्यधिक थकान होना, चक्कर आना, प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना सभी बोन मैरो कैंसर और बोन कैंसर के लक्षणों में से एक हैं।
कीमोथेरेपी:-बोन मैरो कैंसर के इलाज में सबसे पहले कीमोथेरेपी प्राथमिक उपचार के लिए अपनाई जाती हैं। कीमोथेरेपी के दौरान दवाएं दी जाती हैं जो कि कैंसर सेल्स को नष्ट करती हैं। यह दवाएं खाने के लिए या फिर नसों में दी जाती है। कैंसर के इलाज के लिए आमतौर पर कुछ दवाएं मशहूर हैं जो कि डॉक्टर की सला‍ह पर दी जाती हैं।
रेडिएशन थेरेपी:-इस प्रक्रिया के द्वारा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए विकिरण चिकित्सा दी जाती है। इस थेरपी से जल्दी ही कैंसर के सेल्स‍ मर जाते हैं और मरीज जल्दी ही ठीक होने लगता हैं।
रेडियो इम्यून थेरेपी;-इस थेरपी के माध्यम से सिर्फ ट्यूमर को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है जिससे हेल्दी सेल्स बच जाते हैं और ट्यूमर से प्रभावित सेल खत्म हो जाते हैं।
शल्य चिकित्सा:-सर्जरी से कई बार बोन कैंसर का उपचार करना पड़ता है। इसके लिए यदि बोन कैंसर बहुत फैल गया है और रोगी को कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। या फिर बोन कैंसर किसी जोड़ के आसपास है तो इस स्थिति में शल्स चिकित्सा की जरूरत पड़ती है। कई बार जब मरीज गंभीर स्थिति में होता है तो भी सुरक्षा की दृष्टि से शल्य चिकित्सा से बोन कैंसर का ईलाज किया जाता है।
जानें कैसे होता है बोन कैंसर का उपचार
नर्म, खंखरे ऊतक जो हड्डी के केंद्र में मौजूद होते हैं उनको बोन मैरो कहा जाता है। ये टिश्‍यु स्टेम सेल में शामिल होते हैं और अलग-अलग रूप से रक्त में शामिल होते हैं। सफेद रक्त कोशि‍काओं, लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेंटलेट्स में ये ऊतक पाए जाते हैं। बोन मैरो कैंसर तब होता है जब मैंलीगेंट सेल्सो यानी घातक कोशिकाएं रक्त में वि‍कसित होनी शुरू हो जाती हैं। सभी बोन मैरो कैंसर से पीडि़त मरीजों के पास एक ही प्रश्न होता है कि क्या बोन मैरो कैंसर का इलाज संभव है। क्या बोन मैरो कैंसर का ईलाज संभव है तो आइए जानें कुछ बातों को।
-बोन कैंसर के उपचार से पहले बोन कैंसर का निदान होना जरूरी है।
-बोन कैंसर का उपचार बोन कैंसर की अवस्था और मरीज की स्थिति देखकर ही किया जाता है।
-बोन कैंसर के ईलाज के लिए कई बार तो कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या फिर इसी तरह की अन्य थेरपी से भी चिकित्सा की जाती है।
-बोन कैंसर की चिकित्सा बोन कैंसर से ग्रसित रोगी पर भी निर्भर करता है कि वह किस उम्र का है, बोन कैंसर किस स्टेज का है।
-बोन कैंसर के उपचार के लिए कई विधियां अपनाई जाती हैं। कई बार बोन कैंसर के लिए शल्य चिकित्सा अपनानी पड़ती है तो कई बार घरेलू नुस्खों से ही काम चल जाता है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट:-बोन मैरो कैंसर के इलाज के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट थेरेपी भी अपनाई जाती हैं। हालांकि यह बहुत ही जटिल प्रणाली हैं। लेकिन इस उपचार के जरिए संक्रमित बोन मैरो को स्वस्थ बोन मैरो से बदल दिया जाता है। जिससे मरीज पहले से कहीं अधिक स्वस्थ महसूस करता है और प्रभावित कोशिकाओं के बदले स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण होने लगता हैं। जो कि बोन मैरो कैंसर से लड़ने के लिए प्रयासरत होती हैं। हालांकि बोन मैरो कैंसर का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा की मदद से भी किया जा सकता है। इसके साथ ही मरीज को डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए और अपने खानपान पर खास ध्यान देना चाहिए।

 

 

नई दिल्ली। आइपीएल 2019 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी 18 दिसंबर यानि मंगलवार को जयपुर में होगी। इस नीलामी में युवराज सिंह, मोहम्मद शमी और सैम कुर्रन की बोली पर तो सभी की नजरें रहेंगी ही, लेकिन एक खिलाड़ी ऐसा भी है जिसे अपने बेड़े में शामिल करने के लिए सभी फ्रैंचाइज़ी मालिकों में होड़ लगने की उम्मीद है। ये खिलाड़ी है वेस्टइंडीज़ के विस्फोटक बल्लेबाज़ शिमरन हेटमायर।
सभी मालिकों की क्यों है हेटमायर पर नज़र?:-वेस्टइंडीज़ के इस खब्बू बल्लेबाज़ पर सभी की नज़रें हैं। ये विस्फोटक बल्लेबाज़ अकेले अपने दम पर मैच जीताने का माद्दा रखता है। इसकी झलक हमें भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच खेली गई वनडे सीरीज़ में देखने को मिली थी। याद तो होगा ही आपको अक्टूबर में भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच गुवाहाटी में खेले गए पहले मुकाबले में हेटमायर ने तूफानी शतक ठोका था। उन्होंने 78 गेंदों में 106 रन की आतिशी पारी खेली थी। इस पारी के दौरान उन्होंने 6 चौके और 6 ही छक्के जड़े थे। हालांकि हेटमायर की इस तूफानी पारी के बावजूद भी उनकी टीम ये मैच हार गई थी।इसके बाद भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच खेले गए दूसरे वनडे मैच में भी इस युवा बल्लेबाज़ ने 64 गेंदों में 94 रन ठोक दिए थे। इस पारी में भी हेटमायर ने भारतीय गेंदबाज़ों की जमकर पिटाई की थी। इस पारी में हेटमायर ने 4 चौके और 07 छक्के जड़े थे।वेस्टइंडीज़ का ये खिलाड़ी ऐसी ही ताबड़तोड़ पारियां खेलने के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि आइपीएल 2019 की नीलामी के लिए सभी की नज़रें इस खिलाड़ी पर हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी टीम इस खिलाड़ी को अपने बेड़े में शामिल करने में सफल होती है। हो सकता है कि हेटमायर पर ही सबसे बड़ी बोली भी लग जाए।

नई दिल्ली। जरा कल्पना कीजिए कि एक 13 वर्ष का भारतीय बच्चा दुबई में किसी कंपनी का मालिक है। सुनने में आपको यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है लेकिन है सोलह आने सच। पढ़ने-लिखने और खेलने-कूदने की उम्र में दुबई में रहने वाला एक भारतीय बच्चा अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी चला रहा है।हम बात कर रहे हैं 13 वर्ष के दुबई में रहने वाले भारतीय बच्चे आदित्यन राजेश की। आदित्यन ने चार वर्ष पहले अपना पहला मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया था। एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से वो एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी का मालिकाना हक भी रखते हैं।आदित्यन राजेश केरल के छात्र हैं और वो उस वक्त मात्र 9 वर्ष के थे जब उन्होंने अपना पहला मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया था, बोरियत को मिटाने के लिए यह उनका शौक है। उनकी कंपनी ग्राहकों को लिए वेबसाइट और लोगो डिजाइन करने का काम कर रही है।इस नन्हें टेक दिग्गज ने मात्र 5 वर्ष की उम्र में ही कंप्यूटर चलाना शुरू कर दिया था और 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने खुद की कंपनी "ट्रिनेट सॉल्यूशंस" खोल दी। आदित्यन ने दुबई के एक अंग्रेजी दैनिक को बताया, "मेरा जन्म थिरूविला में हुआ और मेरा परिवार यहां उस वक्त आ गया जब मैं पांच वर्ष का था। मेरे पिता ने मुझे जो पहली वेबसाइट दिखाई थी उसका नाम बीबीसी टाइपिंग था, जो कि बच्चों के लिए एक वेबसाइट थी, जहां छात्र छोटी उम्र में टाइपिंग सीख सकते हैं।"

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रयागराज में कुंभ के निर्बाध तथा सफल आयोजन को लेकर संगम तट पर पूजा-अर्चना करने के बाद झूंसी में विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने मंच संभालने के बाद अपनी लय में जनसभा को भी संबोधित किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तीर्थराज के जन जन को मेरा सादर प्रणाम। यहां आने का कार्यक्रम बनते ही नई ऊर्जा का संचार होता है। प्रयाग के बारे में कहा गया है कि को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। प्रयाग के महात्म का वर्णन मुश्किल है। अर्धकुंभ से पहले देश वासियों को खुशखबरी देना चाहता हूं। सभी श्रद्धालु अक्षयवट व सरस्वती कूप के दर्शन कर सकेंगे। अक्षयवट जीवन में जीवट बने रहने की प्रेरणा देता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं प्रयागराज से देश को भी सतर्क करना चाहता हूं। सबसे अधिक समय तक सत्ता में रही पार्टी न्याय प्रणाली को कमजोर करना चाहती है। न्यायपालिका इस पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ रही है। साथियों अब देश की संवैधानिक संस्थाओं को एक पार्टी के आगे हाथ बांधकर खड़ा रहने के लिए मजबूर करने की कोशिश की जा रही है। यह पार्टी छल बल, प्रपंच की हर हद पार कर जाती है। न्यायपालिका को सत्ता में रहने पर लटकाते हैं विपक्ष में रहने पर धमकाते हैं। केशवानंद मामले में सबसे सीनियर जज को चीफ जस्टिस नहीं बनाया गया। यह न्यायपालिका पर दवाब बनाते हैं। जस्टिस खन्ना की वरिष्ठता नजरंदाज की गई है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि साढ़े चार हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण/ शिलान्यास किया गया है। इससे कुंभ में प्रवास करने वाले प्रवासियों को सुविधाएं मिलेंगी। देश के कई शहरों से प्रयागराज की एयर कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। यह प्रयास कुंभ के बाद भी काम आएंगे। स्मार्ट प्रयागराज के लिए तमाम व्यवस्थाएं कमांड सेंटर से होगी। तप से तकनीकी की सुखद अनुभूति होगी। सेल्फी प्वाइंट भी आकर्षण होगा। मां गंगा स्वच्छ , अवरिल निर्मल हो, इसके लिए कई प्रोजेक्ट हैं। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से एक दर्जन नालों को गंगा में गिरने से रोका जाएगा। प्रयागराज, काशी, कानपुर में ऐसी ही योजनाएं चल रही है। 24.50 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट नमामि गंगे के तहत मंजूर किए गए हैं। गंगा जी के प्रति जनभागीदारी ने हमारे प्रयासों को गति दी है। शास्त्रों में स्वच्छता से जोड़ा गया है। इसलिए स्वच्छ कुंभ के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।केंद्र- राज्यों के प्रयासों में प्रयागराज का नागरिक जुड़ा है। प्रदर्शनी में मैंने शहर में कराई जा रही पेटिंग सुखद है।पीएम मोदी ने कहा कि इस कार्यक्रम के बाद मैं यहां से आपके प्रयागराज एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन करने भी जा रहा हूं। इस नए टर्मिनल को रिकॉर्ड एक वर्ष के भीतर बनाया गया है। कुंभ को ध्यान में रखकर रेलवे मंत्रालय इस बार भी अनेक नई ट्रेनें चलाने जा रहा है। अभी शहर के बड़े फ्लाईओवर, रेलवे-ओवरब्रिज और अंडरपास, बिजली व पेयजल की जिन परियोजनाओं का लोकार्पण मैंने किया है। उससे यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर और क्नेक्टिविटी दोनों ही सुधरेगी। केंद्र तथा राज्य सरकार ने कुंभ के दौरान कनेक्टिवटी से लेकर यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया है। हमारा प्रयास प्रयागराज तक आने वाले हर रास्ते को मजूबत करने के साथ ही सुधारने का है। चाहे वो रेलमार्ग हो, एयर कनेक्टिविटी हो या फिर सड़कों को सुधारने की बात हो। किसी को भी जरा भी परेशानी न हो। पीएम मोदी ने कहा कि मैंने दुनिया भर को कुंभ का न्योता दिया है। मैं भी अब उत्तर प्रदेश वाला हूं ना। आपने देखा होगा कि कल ही यहां संगम पर 70 देशों का झंडा फहराया है। ऐसे प्रयास इसे वैश्विक पहचान दिलाएंगे। जब कुंभ के लिए दुनिया जुटेगी तब काशी में प्रवासी भारतीयों का मिलन होगा। कुंभ का संवाद देश को दिशा देता है। यह भारत और भारतीयता का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह हमें जोड़ता है। एक भारत, श्रेष्ठ भारत की तस्वीर यहीं दिखती है। यह आयोजन देश की प्रतिष्ठा का सवाल है। भारत की एक ऩई तस्वीर से दुनिया में यहां से जाय।
पीएम का नरेंद्र मोदी का झूंसी में जनसभा स्थल पर जोरदार स्वागत:-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज प्रयागराज में कुंभ के कमांड कंट्रोल कार्यालय का निरीक्षण तथा स्वागत करने के बाद गंगा नदी का पूजन किया। अक्षयवट का दर्शन करने के बाद झूंसी के अंदावां में होने वाली जनसभा के मंच पर पीएम नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत किया गया। मंच पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा अन्य जनप्रतिनिधियों ने जोरदार स्वागत किया। मंच पर पीएम नरेंद्र मोदी को बड़ी माला पहनाई गई। इसके बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पीएम नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल राम नाईक को कुंभ कलश सौंपा।डिप्टी सीएम केशव ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में आपने कुंभ के लिए खजाना खोला है, उससे हम सब गदगद हैं। हमें विश्वास है कि देश प्रदेश में विकास की गंगा बहेगी। उन्होंने कहा कि निर्मल गंगा- यमुना मिली है। कुंभ सफल हो। आपकी दूसरी पारी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी है। जय श्री राम का नारा लगवाते हुए संबोधन खत्म किया।
अक्षयवट को आम जनता के लिए खोलने की अनुमति प्रधानमंत्री जी ने दी:-मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयाग की धरती पर स्वागत किया। बोले पहली बार कोई प्रधानमंत्री सनातन आस्था का सम्मान करने आया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सैकड़ों वर्ष से बंद अक्षयवट को आम जनता के लिए खोलने की अनुमति प्रधानमंत्री जी ने दी है। यह ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भव्य व दिव्य कुंभ की सोच है।आपके प्रयासों से इसे विश्व के सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता मिली है। यह तय है कि यह कुंभ भव्यता व दिव्यता के लिए जाना जाएगा। पीएम मोदी ने आज गंगा का पूजन कर कुंभ का औपचारिक आगाज कर दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के संबोधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से विभिन्न योजनाओं का बटन दबाकर लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने मेकिंग आफ द कुंभ काफी टेबिल बुक का विमोचन किया।प्रयागराज में पीएम नरेंद्र मोदी 4048 करोड़ रुपया की लागत से बनीं 355 योजनाओं का लोकार्पण करेंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गवर्नर राम नाईक गंगा पूजन- आरती के लिए आसान पर बैठे। पीएम नरेंद्र मोदी हाथ में नारियल लेकर गंगा नदी की आराधना में लीन हैं।नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो कुंभ की शुरुआत से पहले तीर्थराज प्रयागराज के पूजन के लिए पहुंचे हैं। यहां पर तीर्थ पुरोहितों के समुदाय ने प्रधानमंत्री को संकल्प दिलाया। इस दौरान प्रधानमंत्री व अन्य अतिथियों ने त्रिवेणी का अभिषेक किया है।संगम पर गंगा नदी के पूजन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकाग्र होकर हाथ जोड़कर बैठे थे। इसके बाद उन्होंने गंगा जी की आरती की। प्रधानमंत्री यमुना तट से लगे अकबर के किले के अंदर कल्पवृक्ष कहलाने वाले अक्षयवट पहुंचे। सैन्य अधिकारी भी उनके साथ हैं। अक्षयवट दर्शन के उपरांत प्रधानमंत्री को स्मृति चिह्न भेंट किया गया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूजन स्थल पर अखाड़ों के पदाधिकारियों (संतों) से भेंट की। यहां पर संतों ने उन्हें शॉल ओढ़ाई। इसके साथ ही पूजन कराने वाले तीर्थ पुरोहितों के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाईं। इस दौरान मुख्यमंत्री व अखाड़ा परिषद के नरेंद्र गिरि भी मौजूद थे। संगम पर पूजन - आरती के बाद प्रधानमंत्री मोदी अक्षयवट जाकर दर्शन-पूजन करेंगे। प्रधानमंत्री ने पूजन स्थल पर लगी छोटी सी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। काफिला अक्षयवट की तरफ रवाना।पीएम नरेंद्र मोदी की अंदावां की जनसभा को लेकर यहां के लोगों में बहुत उत्साह है।
जोरदार तैयारी:-प्रयागराज (इलाहाबाद) में अगले महीने जनवरी में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। परियोजनाएं पर काम कुंभ मेला 2019 को ध्यान में रखकर ही हो रहा है। प्रयागराज में कुंभ मेले का आरंभ 15 जनवरी; 2019 से होगा।
कब होता है कुंभ:-गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम स्थल पर हर 12 वर्ष के अंतराल में कुंभ मेले का आयोजन होता है। कुंभ मेले को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। हर तीन वर्ष के अंतराल में प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन है। सबसे वृहद कुंभ का आयोजन प्रयागराज में संगम के तट पर होता है।
रेलवे की 700 करोड़ की योजना:-रेलवे ने इस बार कुंभ मेले के लिए 41 परियोजनाएं शुरू की हैं। जिनपर 700 करोड़ रुपये की लागत आएगी। 41 परियोजनाओं में से 29 पूरी हो चुकी हैं। अन्य अंतिम चरण में हैं तथा जल्द पूरी होने वाली हैं। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के महाप्रबंधक राजीव चौधरी ने बताया कि इलाहाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन पर चार बड़े अहातों का निर्माण किया गया है। जिनमें 10,000 तीर्थयात्रियों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं। इनमें वेडिंग स्टॉल, पानी के बूथ, टिकट काउंटर, एलसीडी टीवी, सीसीटीवी, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग- अलग शौचालय होंगे। कुंभ मेले के दौरान मेले में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए इलाहाबाद जिले के विभिन्न स्टेशनों से करीब 800 विशेष ट्रेन चलाने का प्रस्ताव है।

रायपुर/नई दिल्ली। आखिरकार सस्पेंस खत्म हुआ और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। विधायक दल की बैठक में बघेल के नाम पर मुहर लगी है। सोमवार को बघेल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। चार प्रमुख नेताओं- भूपेश बघेल, टीएस सिंह देव, ताम्रध्वज साहू और चरणदास महंत के नाम पर मंथन के बाद कांग्रेस हाईकमान ने बघेल के नाम पर मुहर लगाई।बताया जा रहा है कि कांग्रेस पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे ने राहुल गांधी का भेजा गया लिफाफा खोला और भूपेश बघेल का ऐलान किया। इस दौरान वहां मंच पर पीएल पुनिया, टीएस सिंहदेव और चरणदास महंत भी मौजूद थे। इसके साथ बैठक में सभी विधायक थे। मुख्यमंत्री का सुरक्षा दस्ता छत्तीसगढ़ पीसीसी दफ्तर पहुंच गया है।
विधायक दल के नेता चुने गए बघेल:-विधायक दल की बैठक के बाद कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जैसे ही भूपेश बघेल के नाम की घोषणा की, वहां मौजूद बघेल समर्थक उत्साह से झूम उठे। इस दौरान भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव साथ बैठे दिखे। कांग्रेस पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमने सभी विधायकों से देर रात तक बात की। इतने दिनों से मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन हो रहा था। कांग्रेस अध्यक्ष से चर्चा हुई, फिर राज्य के वरिष्ठ नेताओं से भी बात हुई। खड़गे ने आगे कहा कि यह फैसला बहुत कठिन था, क्योंकि सभी ने पार्टी के लिए काम किया है। सभी बराबर हैं, दिक्कत तब होती है कि जब बराबर में चुनना होता है। राहुल गांधी ने सारे लोगों को धन्यवाद किया है और उन्होंने अंतिम फैसला विधायक दल की बैठक में लेने को कहा, जहां सभी ने सर्वसहमति से भूपेश बघेल को चुना।
टीएस सिंहदेव और बघेल समर्थकों में झड़प:-इस बीच मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल के समर्थकों के बीच टकराव की खबर भी सामने आई है। रायपुर में कांग्रेस मुख्यालय पर दोनों पक्षों ने जमकर नारेबाजी की है। यहां तक की कार्यालय का गेट भी तोड़ दिया है। नाराज समर्थकों ने पुलिस के साथ भी झड़प की है।11 दिसंबर को छत्तीसगढ़ में बहुमत के साथ चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस को सीएम चुनने में 5 दिन लग गए। इस दौरान दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के घर सीएम के प्रमुख चार दावेदारों भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू और चरणदास महंत की लगातार बैठक होती रही, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया था।
जानिए कौन है भूपेश बघेल?;-भूपेश बघेल...प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। 23 अगस्त, 1961 को जन्मे बघेल कुर्मी जाति से आते हैं। छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनका महत्वपूर्ण स्थान है। वह छत्तीसगढ़ में कुर्मी समाज के साल1996 से वर्तमान तक संरक्षक बने हुए हैं। 1999 में मध्य प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री रहे हैं।अक्टूबर 2017 में कथित सीडी कांड में भूपेश के खिलाफ रायपुर में एफआईआर हुई और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल जाना पड़ा। अक्टूबर में ही भूपेश बघेल नए विवाद में पड़ गए थे। एक सभा के दौरान भाजपा पर निशाना साधते वक्त उनके मुंह से लड़कियों के लिए आपत्तिजनक शब्द निकल गए थे। इससे सभा में उपस्थित महिलाएं बीच कार्यक्रम में ही उठकर चली गईं थीं।
बघेल का सियासी सफर:-जब छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था, उस 80 के दशक में भूपेश ने राजनीति की पारी यूथ कांग्रेस के साथ शुरू की। दुर्ग जिले के रहने वाले भूपेश दुर्ग के यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बने।
पहली बार 1993 में विधायक बने थे बघेल
-1994-95 में भूपेश बघेल को मध्यप्रदेश यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने।
-1993 में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भूपेश कांग्रेस से दुर्ग की पाटन सीट से उम्मीदवार बने और जीत दर्ज की।
-अगला चुनाव भी वे पाटन सीट से जीते।
-मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार के वक्त भूपेश कैबिनेट मंत्री बने।
-2000 में जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना और पाटन छत्तीसगढ़ का हिस्सा बना तो भूपेश छ्त्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचे और कैबिनेट मंत्री बने।
-2003 में कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने के बाद भूपेश को विपक्ष का उपनेता बनाया गया।
-2004 में लोकसभा चुनाव में भूपेश को दुर्ग से उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन भाजपा के ताराचंद साहू से हार गए।
-अक्टूबर 2014 में बघेल को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।
ढाई-ढाई साल का फार्मूला क्या है?;-भले ही भूपेश बघेल के नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया है, लेकिन अंदरुनी सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार दो नेताओं को संतुष्ट करने के लिए ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पर फैसला होने की बात सामने आई थी। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो, हाईकमान ने इसमें लोकसभा चुनाव को देखते हुए एक नाम जातिगत समीकरण और दूसरा नाम घोषणापत्र के वादों को पूरा करने के हिसाब से तय किया। सूत्रों का यह भी कहना है, अभी सार्वजनिक नहीं किया जाएगा कि ढाई साल बाद कांग्रेस सरकार का मुख्यमंत्री बदल सकता है। यह हाईकमान और दावेदारों के बीच की बात है। बाकी दो दावेदार नेताओं को यह आश्वस्त किया गया है कि उन्हें मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण विभाग मिलेंगे।
रेस में कौन-कौन शामिल था:-छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री की रेस में टीएस सिंहदेव का नाम सबसे आगे चल रहा था। इसके अलावा भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू और चरणदास महंत का नाम भी रेस में था। हालांकि विधायक दल की बैठक में बघेल के नाम पर मुहर लगी है

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