Editor

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जम्मू। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर मुद्दे पर मिली हार से बौखलाए पाकिस्तान ने एकबार फिर सीमा पर नापाक हरकत दिखाई है। बौखलाहट में पाकिस्तानी सेना ने शनिवार को राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एकबार फिर सीजफायर उल्लंघन किया है।पाकिस्तानी सेना ने शनिवार सुबह 6.30 बजे भारत की अग्रिम चौकियों और गांवों पर मोर्टार और छोटे हथियारों से गोलीबारी की। इस गोलीबारी में सेना का एक जवान शहीद हो गया। लांस नायक संदीप थापा( 35 वर्ष) इस गोलीबारी में शहीद हो गए हैं। वह देहरादून के रहने वाले थे। भारतीय सेना ने इस गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया है। अब भारतीय सेना ने राजौरी सेक्‍टर में पाकिस्‍तानी पोस्‍ट को उड़ा दिया है।एक रक्षा प्रवक्ता के मुताबिक, सीमा पार से गोलीबारी सुबह लगभग 6.30 बजे नौशेरा सेक्टर में शुरू हुई, जिसका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।
पाकिस्तानी सेना के 4 सैनिक ढेर;-इससे पहले गुरुवार को भारतीय सेना ने सीमा पर पाकिस्तान आर्मी को मुंहतोड़ जवाब दिय। भारतीय सेना ने एलओसी पर गोलीबारी में चार पाकिस्तानी जवानों को ढेर कर दिया। भारतीय सेना ने गुरुवार को सीमा पर गोलीबारी में तीन पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया था। इस तरह भारत ने कुल 4 पाकिस्तानी सैनिकों को सीमा पर मार गिराया है।
भारतीय सेना का करारा जवाब:-गुरुवार को स्वतंत्रता दिवस के दिन भी पाकिस्तानी सेना ने सीमा पर अपने नापाक मंसूबे एकबार फिर दिखाए।सेना के सूत्रों ने बताया कि उसी दिन उरी और राजौरी सेक्टर में पाकिस्तानी सेना ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। पाकिस्तानी सेना ने पुंछ के कृष्णा घाटी सेक्टर में संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए भारी गोलाबारी शुरू कर दी। इस पर भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की ओर पाक सेना के तीन जवान मार गिराए और दुश्मन के कई बंकर भी नष्ट कर दिए। इसके अलावा पाकिस्तान के कई सैनिकों के घायल होने की भी खबर है।इसके अलावा पाकिस्तान के कई सैनिकों के घायल होने की भी खबर है।
UNSC से खाली हाथ लौटा PAK:-बता दें, पाकिस्‍तान की ओर से ये सीजफायर ऐसे समय में हुआ है, जब कश्‍मीर (Kashmir) मामले पर सुरक्षा परिषद की दहलीज से पाकिस्‍तान और चीन खाली हाथ लौट आए हैं। पाकिस्‍तान की फरियाद को अनसूना करते हुए सुरक्षा परिषद ने कश्‍मीर मुद्दे पर अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं। ऐसे में भारत के लिए यह बैठक राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से काफी अहम है। भारत समेत दुनिया के अन्‍य मुल्‍क इस पर नजर बनाए हुए हैं कि आखिर अब कश्‍मीर मामले में पाकिस्‍तान का क्‍या स्‍टैंड होगा।कश्‍मीर मामले में सुरक्षा परिषद की बैठक में यह मामला उठाया गया। यह बैठक चीन ने पाकस्तिान के इशारे पर बुलाई थी। लेकिन इस मसले पर सुरक्षा परिषद के अन्‍य सदस्‍यों ने कश्‍मीर मामले को एक मत से खारिज कर दिया। इस बैठक में चीन के स्‍टैंड को भी अस्वीकारर दिया गया। परिषद में पाकिस्‍तान और चीन अलग-थलग पड़ गए।
PAK के बदले 'सुर':-भारत के कूटनीतिक दांव से कश्‍मीर मामले में चीन और पाकिस्‍तान को मुंह की खानी पड़ी है। चीन के दबाव के बावजूद संयुक्‍त राष्‍ट्र परिषद में पाकिस्‍तान के प्रयास को खारिज कर दिया गया। संयुक्‍त राष्‍ट्र से निराश होने के बाद पाकिस्‍तान की भाषा बदल गई है। एक संवाददाता सम्‍मेलन में यह पूछे जाने पर कि क्‍या पाकस्तिान कश्‍मीर मामले में भारत के साथ वार्ता करने को तैयार है तो कुरैशी ने कहा है कि पाकिस्‍तान कश्‍मीर मामले में शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता है। उन्‍होंने कहा कि पहले कश्‍मीर में कर्फ्यू खत्‍म हो तभी वार्ता संभव होगी।

नई दिल्ली। देश के साथ दुनियाभर को झकझोर देने वाले बुराड़ी सामूहिक फांसीकांड (delhis burari death case) में एक साल बाद हैंड राइटिंग एक्सपर्ट (Hand Writing Expert) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 11 लोगों की सामूहिक आत्महत्या मामले में मौके से जो रजिस्टर प्राप्त हुए थे, वह चूड़ावत परिवार ने ही लिखे थे। इतना ही नहीं, यह भी पता चला है कि ज्यादातर रजिस्टर परिवार के ही 2 बच्चों ने लिखे थे। वैसे ललित अपनी बातें बोलकर प्रियंका से रजिस्टर में लिखवाता था।गौरतलब है कि 30 जून-एक जुलाई, 2018 की रात चूड़ावत परिवार के 11 सदस्यों ने आत्महत्या कर ली थी। जांच में यह पता चला है कि परिवार के 11 लोगों ने आस्था के नाम पर एक साथ आत्महत्या की थी। बुराड़ी पुलिस ने शुरुआत में यह मामला आईपीसी की धारा 302 (हत्या) में दर्ज किया था।
मोबाइल फोन रिकॉर्ड का इंतजार कर रही है पुलिस:-परिवार द्वारा संदेह जताए जाने के बाद मामले की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (Dehi police crime branch) को सौंप दी गई थी। शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौके से करीब 13 रजिस्टर मिले थे। अब हैंड राइटिंग एक्सपर्ट ने खुलासा किया है कि मौके पर मिले रजिस्टर में लिखी गई बातें परिजनों की हैं। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को मिली हैंडराइटिंग की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस अब इस मामले में चूड़ावत परिवार के लोगों के मोबाइलों की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
दो बच्चों ने लिखे थे रजिस्टर:-पुलिस के मुताबिक, परिवार के लोगों की हैंडराइटिंग और रजिस्टर को मिलान के लिए भेजा था। इसमें किसी तरह का कोई संदेह नहीं रहे इसलिए अपराध शाखा ने सभी 11 परिजनों की हैंडराइटिंग के सैंपल भेजे थे। अपराध शाखा को एफएसएल, रोहिणी से पिछले सप्ताह मिली रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रजिस्टर परिवार के सात सदस्यों ने लिखे थे। रिपोर्ट से पता लगा कि ज्यादातर रजिस्टर दो बच्चों ने लिखे थे।पुलिस अब मोबाइल फोन की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसमें इसका पता चलेगा कि आत्महत्या से पहले किस-किस करीबी से संपर्क साधा गया था।
पुलिस बंद करेगी हत्या का केस:-दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो परिजनों के कहने पर 11 लोगों की आत्महत्या के मामले में धारा-302 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब आत्महत्या की पुष्टि होने के बाद यह धारा हटा दी जाएगी।
इन 11 लोगों ने अनजाने-अनचाहे की थी आत्महत्या:-बुराड़ी आत्महत्या मामले में 11 लोगों ने आत्महत्या की थी। मृतकों की पहचान नारायण देवी (77), उनकी बेटी प्रतिभा (57) और दो बेटे भावनेश (50) और ललित भाटिया (45) के रूप में हुई है। भावनेश की पत्नी सविता (48) और उनके तीन बच्चे मीनू (23), निधि (25) और ध्रुव (15), ललित भाटिया की पत्नी टीना (42) और उनका 15 वर्ष का बेटा शिवम , प्रतिभा की बेटी प्रियंका (33) भी मृत मिले थे। इनमें प्रियंका की जून महीने ही सगाई हुई थी और दिसंबर, 2018 में उसकी शादी होनी थी।
एक जुलाई 2018 की वह खौफनाक सुबह;-एक जुलाई, 2018 की सुबह करीब 5:30 बजे भुवनेश के किराने की बंद दुकान के आगे दूध के पैकेट से भरे क्रेट को वाहन चालक रख चला जाता है। आम तौर पर यह दुकान सुबह 5 बजे खुल जाया करती थीं। ऐसे में बंद दुकान को देखकर वाहन चालक को भी अटपटा लगता है। वह करीब 6:30 बजे जब वापस दूध के पैसे लेने के लिए दुकान पर आता है, तो दुकान बंद ही मिलती है। ऐसे में वह क्रेट लेकर चला जाता है। इस बीच 7 बज चुके होते हैं, लेकिन जब दुकान नहीं खुलती है, तो पड़ोसी गुरचरन सिंह अपने एक पड़ोसी कुलदीप के साथ भुवनेश को आवाज लगाते हुए पहली मंजिल तक पहुंच जाते हैं। दोनों को दरवाजा खुला मिलता है। ऐसे में दरवाजे को हल्का धक्का देकर अंदर कमरे के अंदर दाखिल होते ही उनके पैरों तलों की जमीन खिसक जाती है। एक कमरे में नारायणी देवी की बेटी प्रतिभा, बेटे भुवनेश व ललित, दोनों भाइयों की पत्नी सविता व टीना, उनके बच्चे मीनू, निधि, धुव्र, शिवम व प्रतिभा की बेटी प्रियंका कुल 10 लोग फंदे से झुल रहे होते हैं, उनकी आंखों पर पट्टी बंधी होती है, तो दूसरे कमरे में परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य नारायणी देवी फर्श पर पड़ी मिलती हैं। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी जाती है और कुछ ही घंटों में संत नगर की गली नंबर दो में लोगों का हुजूम जमा हो जाता है।

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छे-370 हटाने के बाद से पाकिस्तान की बौखलाहट खत्म होने का नाम नहीं ले रही। इसी बौखलाहट में पाकिस्तान ने पहले भारत से राजनयिक और व्यावसायिक संबंध तोड़े। फिर मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया। हर जगह उसे मुंह की खानी पड़ी। उधर पाकिस्तान के फैसले से उनकी आवाम भी बहुत खुश नहीं है। भारत से व्यावसायिक संबंध खत्म करने के बाद से पाकिस्तान में महंगाई कई गुना और बढ़ चुकी है। इस वजह से पाकिस्तान में इस बार बकरीद का त्यौहार भी काफी फीका रहा।ऐसे में शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र में एक पाकिस्तानी पत्रकार ने यूएन में भारत के स्थाई दूत सैय्यद अकबरूद्दीन से पूछ लिया कि आखिर दोनों देशों के बीच वार्ता फिर से कब शुरू होगी? सैय्यद अकबरूद्दीन से पूछा गया था कि आप (भारत) पाकिस्तान से वार्ता कब शुरू करेंगे?
तीनों पाकिस्तानी पत्रकारों से मिलाया हाथ;-इस सवाल के जवाब में भारतीय दूत सैय्यद अकबरूद्दीन माइक छोड़कर आगे बढ़े। वह सवाल पूछने वाले वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार के पास पहुंचे और उनसे हाथ मिलाया। उन्होंने कहा, 'चलिए मैं आपके पास आकर और आपसे हाथ मिलाकर इसकी शुरुआत करता हूं।' इसके बाद भारतीय दूत ने वहां मौजूद दो अन्य पाकिस्तानी पत्रकारों से भी उनके पास जाकर हाथ मिलाया।
भारतीय दूत ने दिया ये जवाब:-शीर्ष भारतीय राजनयिक के इस अनौपचारिक और हास्यपूर्ण व्यवहार ने पाकिस्तानी पत्रकारों के सवालों का क्रम रोक दिया। उनके इस व्यवहार से मीडियाकर्मियों से खचाखच भरा हॉल हंसी-ठहाकों से गूंज पड़ा। इसके बाद अकबरुद्दीन वापस माइक पर लौटे और कहा, 'मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमने पहले से ही अपनी दोस्ती का हाथ आगे बढ़ा रखा है। हम अब भी शिमला समझौते को लेकर गंभीर हैं। हमें इस पर पाकिस्तान की तरह से कोई उचित प्रतिक्रिया मिलने का इंतजार है।'
भारत ने UNSC में रखा अपना पक्ष:-सैय्यद अकबरूद्दीन शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर मुद्दे पर बंद दरवाजे के पीछे हुई बैठक के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे। मालूम हो कि शुक्रवार को चीन की मदद से पाकिस्तान ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाया था। UNSC ने इस मुद्दे पर बंद दरवाजे के पीछे में बैठक की। भारत ने यूएनएससी में मजबूती से अपना पक्ष रखा। भारत ने कहा कि कश्मीर का मुद्दा पूरी तरह से भारत का अपना अंदरूनी मामला है।
पाकिस्तानी पत्रकार ने पूछा था ये सवाल:-यूएनएससी में हुई बैठक के बाद पहले चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने मीडिया से बात की। इसके बाद भारतीय दूत सैय्यद अकबरूद्दीन ने मीडिया से बात की। मीडिया से बात करने पहुंचे सैय्यद अकबरूद्दीन ने सबसे पहले वहां मौजूद तीन पाकिस्तानी पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका दिया। इस पर एक पाकिस्तानी पत्रकार ने उनसे पूछा था कि क्यों दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच में कोई संपर्क स्थापित नहीं किया जा रहा है? क्यों भारत पाकिस्तान के बातचीत करने के अनुरोध को अनसुना कर रहा है?
आतंकवाद बंद, बातचीत शुरू;-बातचीत न करने संबंधी पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल के जवाब में भारतीय दूत ने सिर्फ इतना कहा, 'बातचीत शुरू करने के लिए आतंकवाद को बंद करना होगा।' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पूरे मसले को गलत तरीके से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, जो कि वास्तविकता से बिल्कुल परे है। सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि एक देश हमारे खिलाफ जिहाद का प्रयोग कर रहा है। भारत में हिंसा को बढ़ावा दे रहा है और इसमें उनके नेता भी शामिल हैं।
J&K की स्थिति से कराया अवगत;-यूएन में मीडिया से बात करते हुए भारतीय दूत सैय्यद अकबरूद्दीन ने ये भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार कश्मीर में हालात सामान्य करने के लिए जल्द पाबंदियों को धीरे-धीरे हटाना शुरू कर दिया है। सरकार घाटी के हालात सामान्य करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि घाटी में फिलहाल हालात बिल्कुल सामान्य है। कहीं से किसी प्रकार की कोई हिंसा या विरोध प्रदर्शन की कोई खबर नहीं है।

बेंगलुरु। भारी बारिश की मार झेल रहे कर्नाटक के लोगों को अब एक और मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। कर्नाटक के मंगलुरू के लोगों के लिए बारिश के बाद अब डंपिंग यार्ड से निकलने वाला कचरा परेशानी का सबब बन गया है। दरअसल, राज्य में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पचांडी डंपिंग यार्ड का कचरा बह कर रिहायशी इलाकों में पहुंच गया है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों को मजबूरन अपना घर छोड़कर जाना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे की वजह से हमे अपने घरों को घोड़ कर जाना पड़ रहा है। लोगों के मुताबिक बदबू के कारण यहां रहना असंभव हो गया है। न तो यहां पीने का पानी है और यहां तक कि हवा भी प्रदूषित है। अधिकारी मास्क पहनकर मौके पर जाते हैं लेकिन हमें हर दिन यहां रहना पड़ रहा है।पचांडी डंपिंग यार्ड का कचरा पानी के साथ बहकर मंदरा गांव में घुस गया, जिसकी वजह से कई घरों और खेतों को नुकसान पहुंचा है। जानकारी के मुताबिक कचरे के कारण लगभग 25 घरों को नुकसान पहुंचा है। यहीं नहीं इसकी वजह से भारी तादात में नरियल के पेड़ भी बरबाद हो गए है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस(14 अगस्त) को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान (GB) के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त किया। लेकिन इसकी जमीनी हकीकत इसके ठीक विपरीत है।पाकिस्तान की इमरान खान सरकार के इशारे पर चीनी कंपनियां गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके में प्राकृतिक संसाधनों को लूट रही है।चीनी कंपनियां इस इलाके से बेशकीमती प्राकृतिक संसाधन को लूटने में जुटी हुई है जिसमें सोना, प्लैटिनम, कोबाल्ट और कीमती रत्न जैसे कीमती धातुएं शामिल हैं।
पाकिस्तान और चीन की 'मिलीभगत';-पाकिस्तान और चीन मिलकर इस इलाके से बड़े पैमाने पर यहप्राकृतिक संसाधनों को लूटने का काम कर रहे हैं, जिसके विरोध में लोग पिछले दिनों सड़कों पर भारी विरोध-प्रदर्शन करते नजर आए। इतना ही नहीं इसका विरोध करने वाले कई नाताओं की आवाज दबाने की भी कोशिश की जा रही है। शौकत कश्मीरी और मुमताज़ खान सहित कई नेताओं, जिन्होंने विदेशी कंपनियों को खनन अनुबंध आवंटित करने के पाकिस्तान के फैसले पर चिंता व्यक्त की, उन्हें या तो जेल में डाल दिया गया या पीओके से बाहर निकाल दिया गया है।बता दें गिलगित-बाल्टिस्तान एक भारतीय क्षेत्र है, जिसपर पाकिस्तान ने जबरदस्ती कब्जा कर रखा है। गिलगित-बाल्टिस्तान में अक्सर पाकिस्तान से आजादी को लेकर नारे लगते रहते हैं। वहां के लोग आए दिन सड़कों पर पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते नजर आते रहते हैं।
गिलगित-बाल्टिस्तान में यूं 'खेल' कर रहा पाकिस्तान;-भारत के शीर्ष थिंक टैंक, इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (आईडीएसए) द्वारा आयोजित पीओके के रणनीतिक क्षेत्र पर तीन साल के शोध परियोजना में यह पता चला है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में विदेशी कंपनियों द्वारा लूटी गए भारी पैसे स्थानीय आबादी के लिए अर्जित नहीं की गई थी। ऐसी ही एक परियोजना से जुड़े विशेषज्ञ, अशोक बहुरिया ने कहा, 'बाल्टिस्तान क्षेत्र में पाए जाने वाले बहुमूल्य खनिज, रत्न, धातुएं और यहां तक ​​की यूरेनियम जैसे संसाधनों को भी लूटा जा रहा है। हालांकि, राजस्व को स्थानीय सरकार के साथ साझा नहीं किया गया।'बहुरिया ने बताया कि जब भी गिलगित-बाल्टिस्तान में अशांति होती थी, चीनी अधिकारी घबरा जाते थे। कारण यह है कि हाल के वर्षों में चीन ने गिलगित-बाल्टिस्तान में खनन परियोजनाओं में भारी निवेश किया है। गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजना के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक कनेक्टिविटी भी प्रदान करता है, जिससे बीजिंग इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र पर गहरा शोध:-अपने गहन शोध के आधार पर आईडीएसए ने हाल ही में पीओके पर एक पुस्तक प्रकाशित की है, जो इसके तीन वरिष्ठ विश्लेषकों, सुरिंदर कुमार शर्मा, यक़ूब उल हसन और बेहुरिया द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित की गई है। रणनीतिक गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र पर तीन दशकों से अधिक के अनुसंधान का अनुभव रखने वाले सुरिंदर शर्मा ने कहा कि एक तरफ बाल्टिस्तान में प्राकृतिक संसाधनों को सरकार द्वारा लूटा जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ पूरे इलाके में सरकार द्वारा उपेक्षा की जा रही है।उन्होंने आगे कहा कि कोई आश्चर्य नहीं कि जीबी एशिया के सबसे गरीब क्षेत्रों में से एक है, जहाँ लगभग 85 प्रतिशत लोग निर्वाह कृषि पर रहते हैं।आईडीएसए की रिसर्च में कहा गया है कि पाकिस्तान खनिज विकास निगम का अनुमान है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में 1480 सोने की खदानें हैं, जिनमें से 123 सोने की खानों में सोने की बेहतर गुणवत्ता है।गुलाम कश्मीर(PoK) पर पाकिस्तान के दोहरे मापदंड हैं। एक तरफ वो यह आरोप लगाता है कि भारत को जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द नहीं करना चाहिए था, जबकि पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को लूटकर लोगों का बुनियादी हक छीनने का काम कर रहा है।

 

नई दिल्ली। Reliance Jio Fiber broadband plan पर से काफी लंबे समय के बाद Reliance की 42वीं AGM मीटिंग में पर्दा हटा है। पिछले साल आयोजित 41वीं AGM मीटिंग में Jio Giga Fiber के नाम से घोषित हुई हाई स्पीड ब्रॉडबैंड प्लान के व्यावसायिक रोल आउट के बारे में इस बार बताया गया। इस हाई स्पीड ब्रॉडबैंड प्लान को 5 सितंबर 2019 को व्यावसायिक तौर पर रोल आउट किया जाएगा। इस बात की घोषणा कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने की।5 सितंबर को Reliance Jio के तीन साल पूरे हो जाएंगे। महत तीन साल में ही Jio देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बन गई है। यही नहीं Jio इस समय दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी भी बन गई है। कंपनी के पास 34 करोड़ से ज्यादा एक्टिव उपभोक्ता है। Reliance Jio Giga Fiber का नाम बदल कर Jio Fiber कर दिया गया है। इस ब्रॉडबैंड सर्विस में यूजर्स को Rs 700 प्रति महीने से लेकर Rs 10,000 प्रति महीने के प्लान्स ऑफर किए जाएंगे।हालांकि, किस प्लान में क्या ऑफर किया जाएगा, इसके बारे में 5 सितंबर को ही पता चलेगा। इस ब्रॉडबैंड प्लान में यूजर्स को कम से कम 100 Mbps की स्पीड से इंटरनेट डाटा का लाभ मिलेगा। यही नहीं, इसमें यूजर्स को अधिकतम 1 Gbps की स्पीड से डाटा का लाभ मिलेगा। यानी की आप एक HD क्वालिटी की मूवी को महज चंद सेकेंड में डाउनलोड कर सकेंगे। इस हाई स्पीड ब्रॉडबैंड प्लान के साथ कई और भी घोषणाएं की गई है।
Jio Fiber में मिलने वाली सुविधाएं
-महज Rs 500 प्रति महीने की खर्च पर अमेरिका और कनाडा में अनलिमिटेड इंटरनेशनल कॉल की सुविधा भी दी जाएगी।
-Jio Fiber यूजर्स को लाइफटाइम अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग की सुविधा मिलेगी।
-ईयरली प्लान लेने वाले यूजर्स को फ्री में HD सेट टॉप बॉक्स और स्मार्ट HD या 4K टीवी ऑफर किया जाएगा।
-OTT (ओवर द टॉप) सर्विस के तहत यूजर्स को जिस दिन मूवी सिनेमाघरों में रिलीज होगी, उसी दिन टीवी पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
-Internet Of Things के तहत, Jio Fiber यूजर्स के घर या ऑफिस को स्मार्ट होम या स्मार्ट ऑफिस बनाया जाएगा।
-पोस्टपेड प्लस की भी घोषणा की गई, जिसमें यूजर्स को फ्री सिम डिलीवरी से लेकर कई और प्रॉयरिटी सर्विस भी उपलब्ध कराई जाएगी।
-Jio-Microsoft की साझेदारी से भारत में कई डाटा सेंटर्स ओपन किए जाएंगे। इन डाटा सेंटर्स में यूजर्स के डाटा भारत में ही स्टोर किए जाएंगे।
-Jio OTT सर्विस को अगले साल जून तक व्यावसायिक तौर पर रोल आउट किया जाएगा। वहीं, IoT सर्विस को यूजर्स के लिए 1 जनवरी 2020 से रोल आउट की जाएगी।
-Jio Fiber यूजर्स को एक ही प्लान में Jio TV, ब्रॉडबैंड सर्विस, फिक्स्ड लाइन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी कई सुविधाएं मिलेगी।
Jio Fiber के लिए कैसे करें अप्लाई:-Jio Fiber की सर्विस लेने के लिए आपको पहले Jio Fiber प्रिव्यू ऑफर लेना होगा। इसे आप Jio की वेबसाइट से या फिर अगर आप Jio प्रीपेड या पोस्टपेड मोबाइल यूजर्स हैं तो आपको My Jio ऐप के जरिए प्रिव्यू ऑफर के लिए अप्लाई करना होगा। इसके लिए दो प्लान Rs 2,500 और Rs 4,500 उपलब्ध हैं। प्रिव्यू ऑफर के तहत जो भी राशि जमा की जाएगी, वो सिक्युरिटी डिपोजिट के तौर पर जमा की जाएगी, जिसे बाद में रिफंड कर दिया जाएगा। आपके पास अड्रेस प्रूफ, आईडी प्रूफ जैसी बेसिक डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध होने चाहिए।
Installation प्रक्रिया:-जैसे ही आप Jio Fiber के लिए अप्लाई करेंगे, Jio के इंजीनियर आपके एरिया को विजीट करके आपके कनेक्शन को इंस्टॉल कर देंगे। इंजीनियर की विजिट के महज 2 घंटे के बाद इंस्टॉलेशन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। Jio Fiber के लिए अप्लाई करते समय यह जरूर ध्यान दें कि आपके एरिया में ये सर्विस उपलब्ध है कि नहीं। इसे चेक करने के बाद ही आप आगे बढ़ सकते हैं। अगर, आपके एरिया में ये सर्विस उपलब्ध नहीं है तो आपका रिक्वेस पेंडिंग रहेगा, जैसे ही सर्विस अवेलेबल होगी, आपको नोटिफाई किया जाएगा, ताकि आप फिर से अप्लाई कर सकें। प्रिव्यू ऑफर के तहत, इंस्टॉलेशन के लिए फिलहाल कोई चार्ज नहीं लिया जा रहा है। इसके व्यावसायिक लॉन्च के बाद चार्ज भी लिया जा सकता है।

जम्मू कश्मीर। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 (Article 370) को खत्म करने के बाद से राज्य में हाई अलर्ट जारी है। इस क्रम में पाकिस्तान लगातार पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और भारत सरकार के खिलाफ जहर उगल रहा है। चीन की मदद से पाकिस्तान इस मसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी ले गया। अनुच्छेद 370 पर सुयक्त राष्ट्र परिषद में शुक्रवार को बंद दरवाजों के पीछे एक मीटिंग भी रखी गई, लेकिन यहां भी पाकिस्तान के हाथ कुछ नहीं लगा। बता दें कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र को एक चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि भारत ने अनुच्छेद 370 को खत्म करके यूएन रेजोल्यूशन का उल्लंघन किया है। इससे पहले साल 1971 में इस संस्था ने कश्मीर के विषय पर बातचीत की थी।
पहली बार लद्दाख का नाम संयुक्त राष्ट्र में लिया गया:-संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर हुई बैठक पर अपनी बात रखते हुए लद्दाख से भाजपा सांसद जामयांग शेरिंग नामग्याल ने कहा कि वह बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी की लीडरशीप में लद्दाख के बारे में सोच कर अलग-राज्य का दर्जा दिया और आज इस पर संयुक्त राष्ट्र में बात हुई, पहले कांग्रेस की सरकारों के दौरान को लद्दाख पर संसद में भी बात नहीं होती थी।
कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का इतिहास;-अगर हम इतिहास की बात करें तो सयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के लिए महत्पूर्ण भूमिका निभाई है। जब भारत को वर्ष 1947 में आजादी मिली थी तो भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध के बाद, भारत के तत्कालीन गवर्नर-जनरल लुइस माउंटबेटन ने मुहम्मद अली जिन्ना के साथ एक सम्मेलन किया था, जिसमें एक प्रस्ताव आया था कि रियासत की आबादी के हिसाब से अगर राज्य स्थापित नहीं होता है तो यह लोगों की इच्छा के अनुसार किया जा सकता है।इसके अलावा दूसरी मीटिंग हुई। ये बैठक जवाहरलाल नेहरू और लियाकत अली खान के साथ उसी वर्ष दिसबंर में हुई। इस बैठक में उन्होंने खुद कहा कि ये आर्टिकल 35 ए के विषय पर यूएन में बातचीत होगी।
साल 1948 - ब्रिटिश राज से आजादी मिलने के बाद यूएन ने कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने के लिए वर्ष 1948 में बैठक की। इस बैठक में 39 के नियम को पास किया गया। जिसमें तीन सदस्यों का कमीशन बनाया गया। इस कमीशन में एक सदस्य भारत, दूसरा सदस्य पाकिस्तान और तीसरा सदस्य कमीशन के बाहर से चुना गया। यूएन ने उसी साल 47 के संकल्प को भी पास किया था, जिसमें कहा गया कि हर तरह के युद्ध पर तुरंत विराम लगाया जाए।दोनों देशों में कश्मीर के मुद्दे पर उस समय कोई भी प्रस्ताव पास न हो सका। जम्मू-कश्मीर के राजा महारजा हरि सिंह के साथ भारत में कश्मीर के विलय पर सहमति नहीं बन पायी थी। अंत में दोनों देशों के बीच कोई भी एग्रीमेंट पास नहीं हुआ।
साल 1949 से 1951 - साल 1949 में यूएन के नए अध्यक्ष कनाडा से बने। इस दौरान जनरल एम.सी. मैकनाटन ने फरवरी 1980 में अपनी एक रिपोर्ट रखी। इस रिपोर्ट में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान अपनी-अपनी सेनाएं कश्मीर से हटा ले, लेकिन दोनों देशों में से किसी ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी।
साल 1951 - एक रिपोर्ट से पता चला कि भारत और पाकिस्तान के बीच जनमत संग्रह कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र वर्ष 1951 में एक नया संकल्प लाया। इसके बाद यूएन को रिप्रेंजट करने के लिए डॉक्टर फ्रांक गरहाम को नियुक्त किया गया। इस दौरान एक एग्रीमेंट रखा गया कि दोनों देश नजर रखेंगे कि दोनों देशों की तरफ से कब तक सीजफायर का उल्लंघन होगा। इस पर दोनों ही देशों ने सहमति बना ली। इसके बाद वर्ष 1951 में भारत और पाकिस्तान के बीच कराची एग्रीमेंट को साइन किया गया। संकल्प 91 के खत्म होने के बाद यूएन ने मिलिट्री ऑब्जर्वर ग्रुप बनाया। जो भारत और पाकिस्तान के लिए था। ये संगठन दोनों तरफ से होने वाले सीजफायर उल्लंघन के लिए जिम्मेदार था।
साल 1952 - वर्ष 1952 में यूएन ने संकल्प 98 को अपनाया। इस दौरान पाया गया कि पाकिस्तान और भारत के पास काफी संख्या में हाथियार हैं।
साल 1957 - इस साल 122, 123 और 126 संकल्प को अपनाया गया। तीसरे संकल्प के खत्म होने के बाद संकल्प 126 अपनया गया। इस दौरान भारत और पाकिस्तान की सरकार को सलाह दी गई कि वह राज्य में शांति बनाए रखें और इस संदर्भ में यूएन ने दोनों देशों को सलाह दी कि वह जम्मू-कश्मीर की रिपोर्ट के बारे में पढ़ें।
साल 1965 - वर्ष 1965 में संकल्प 209, 210, 211, 214 और 215 को अपनाया गया। यूएन ने यूनाइेट नेशन ऑब्जर्वर की शक्ति बढ़ाने का फैसला किया और ये फैसला काफी महत्वपूर्ण रहा। पिछले संकल्प में असफल होने के बाद यूएन के प्रतिनिधि ने भारत और पाकिस्तान के मुखिया से मिलने के बाद कहा कि वह अपनी अपनी शिकायत रिपोर्ट को यूएन में समिट करें।
साल 1971 - वर्ष 1971 में यूएन ने संकल्प 303 और 307 को अपनाया। इस दौरान देशों के रिश्ते कश्मीर के चलते काफी खराब हो गए। इस दौरान यूनाइडेट नेशंस मिलिट्री ने बताया कि इंडियन और पाकिस्तान बॉर्डर पर सीजफायर का उल्लंघन हुआ है। इसी दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध भी हुआ। इसके बाद दोनों देशों ने शिमला एग्रीमेंट किया। जिसमें कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल को तय करने की बात हुई।

नई दिल्ली। तब क्या हो जब आप देर रात बीच सड़क पर खड़े हो ना कोई रिक्शा मिल रहा हो और ना ही कोई बस। आप कैब बुक करें तो उसका किराया सामान्य से कही ज्यादा हो। ऐसा में आप क्या करेंगे। आप जो भी करें ऐसा तो बिल्कुल नहीं करेंगे जैसे उस शख्स ने किया है जिसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।हैदराबाद के रहने वाले ओबेश के साथ कुछ ऐसा ही हुआ वह देर रात घर जा रहा था, लेकिन ना तो उसे कोई बस मिली और ना ही कोई लिफ्ट, उसने uber कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन, उसका किराया काफी ज्यादा था तो ओबेश ने ऐसा तरीका निकाला कि वह घर तक बिना किराया दिए गया।
घर जाने के लिए नहीं मिला कुछ तो अपनाया ये तरीका;-ओबेश ने पूरा वाक्य अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर भी किया है। उसके बाद से ही फेसबुक से लेकर ट्विटर तक सभी ओबेश की होशियारी की तारीफ कर रहे हैं। साथ ही Zomato की भी प्रशंसा की जा रही हैं। ओबेश ने लिखा कि जब घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला तो उन्हें समझ नहीं आया कि क्या करना चाहिए।
पहले ऑर्डर किया डोसा फिर पहुंचा घर;-ओबेश ने पोस्ट में लिखा कि भूख भी लगी थी। तो सबसे पहले Zomato पर अपने आसपास खाने की दुकान सर्च की। तभी मुझे मेरे पास ही में एक डोसे की दुकान मिली। मैंने वहां से डोसा ऑर्डर किया और फिर मैंने डिलवरी बॉय को फोन किया और जब वह मेरा ऑर्डर लेने आया तो मैंने उससे कहा कि वो मेरे ऑर्डर का साथ मुझे भी छोड़ दें। मैंने डिलवरी के लिए अपने कमरे का एड्रस लिखा था। डिलवरी बॉय ने मुझे वहां तक छोड़ दिया हालांकि उसने कहा कि मैं इसके बदले उसे पांच स्टार रेटिंग दूं। ओबेश के इस पोस्ट को कई लोगों ने लाइक किया और कई लोगों ने शेयर भी किया।

हैदराबाद। सम्‍मान और आदर मिलना तो खास है ही लेकिन उससे भी विशेष बात है उस सम्‍मान को बरकरार रखना और संभालना। तेलंगाना में कुछ ऐसा ही हुआ कांस्‍टेबल को सम्‍मानित तो किया गया पर वह अपना सम्‍मान बमुश्‍किल एक ही दिन संभाल पाया। स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर जिले का ‘सर्वश्रेष्‍ठ कांस्‍टेबल’ का सम्‍मान पाए एक दिन ही बीता और घूस लेते रंगे हाथों कांस्‍टेबल गिरफ्तार कर लिया गया।एंटी करप्‍शन ब्‍यूरो (ACB) ने शुक्रवार को तेलंगाना के महबूबनगर में रेत व्‍यापारी से 17,000 रुपये लेते हुए कांस्‍टेबल पी तिरुपति रेड्डी को रंगे हाथों पकड़ लिया। बता दें कि कांस्‍टेबल को यह सम्‍मान स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर गुरुवार को दिया गया था।महबूबनगर के पुलिस स्‍टेशन में तैनात कांस्‍टेबल रेड्डी व्‍यापारी मुदवथ रमेश को कथित तौर पर यह कहकर काफी दिनों से परेशान कर रहा था कि उसके ट्रैक्‍टर को वह जब्‍त कर लेगा। उसने यह भी कहा था कि अगर पैसे नहीं दिए तो रमेश को झूठे केस में फंसा देगा।तब रमेश ने भ्रष्‍टाचार विरोधी एजेंसी (ACB) के पास मामला दर्ज कराया। इसके बाद ACB ने जाल बिछाया और कांस्‍टेबल को गिरफ्तार कर लिया। मात्र एक दिन पहले ही उसके कठिन परिश्रम और काम के प्रति कर्तव्‍यनिष्‍ठा के लिए सम्‍मानित किया गया था। 15 अगस्‍त को स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्‍य के आबकारी मंत्री वी श्रीनिवास ने उसे सम्‍मानित किया था।

तेलंगाना। दो साल पहले एक बैल के पेट से ऑपरेशन कर प्‍लास्‍टिक के ढेर सारे कचरे को निकालने वाले वीडियो ने हैदराबाद के प्रशांत लिंगम व उनकी पत्‍नी अरुणा को सोचने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद ही उन्‍होंने ऐसी तरकीब निकाली की प्‍लास्‍टिक के कचरे का इस्‍तेमाल मकान से लेकर फुटपाथ तक बनाने में कर समाज के सामने उदाहरण पेश किया।
ऐसे आई तरकीब:-दुनिया भर में समस्‍या बनी प्‍लास्‍टिक के कचरे को रिसाइकिल कर इसका इस्‍तेमाल उन्‍होंने घर व अन्‍य स्‍ट्रक्‍चर बनाने में किया। एंटरप्रेन्‍योर दंपति प्रशांत लिंगम व उनकी पत्‍नी अरुणा के पास घरों को डिजाइन करने का लंबा अनुभव है। 2017 में उन्‍होंने एक वीडियो देखने के बाद यह फैसला लिया। दरअसल वीडियो में एक बैल के पेट का ऑपरेशन कर प्‍लास्‍टिक को हटाया जा रहा था। इसे देख दंपति भयभीत हो गए और तभी उन्‍होंने इस समस्‍या का समाधान ढ़ूंढने का निर्णय लिया। उन्‍होंने बताया, ‘इस वीडियो को देख हम भयभीत हो गए थे। तब हमने इस विषय पर रिसर्च शुरू कर दिया।’
‘प्‍लाइवुड की जगह प्‍लास्‍टिक प्‍लैंक (तख्‍ती)’:-देश की बढ़ती इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर जरूरतों को देखते हुए हमने केवल प्‍लास्‍टिक से मकान बनाने का फैसला लिया। प्‍लाइवुड की जगह हमने प्‍लास्‍टिक के प्‍लैंक का इस्‍तेमाल किया जो दूध के पैकेट से बनाए गए। इनका इस्‍तेमाल फर्नीचर, टॉयलेट, बेंच और बस शेल्‍टर बनाने में किया जा सकता है। उन्‍होंने बताया कि टूथब्रश, बाल्‍टियां, मगों व अन्‍य हार्ड प्‍लास्‍टिक की वस्‍तुओं के इस्‍तेमाल से उन्‍होंने फुटपाथ की टाइलों का निर्माण किया।
हैदराबाद में है पहला प्‍लास्‍टिक का मकान:-लिंगम ने हैदराबाद के उप्‍पल में 800 वर्ग फीट का पहला मकान बनाया। इस मकान को बनाने में 7 टन प्‍लास्‍टिक का इस्‍तेमाल किया गया। लिंगम ने बताया, ‘इतना प्‍लास्‍टिक जलने से बच गया और इसका इस्‍तेमाल नए मकान को बनाने में किया गया।’
प्‍लास्‍टिक के मकान की उम्र 40-50 साल;-इसे लेकर लोगों के बीच शंका है लेकिन इसमें चिंता की कोई बात नहीं। यह ईंट और मोर्टार के मकानों जितना ही अच्‍छा है। जहां कंक्रीट के मकानों को बनाने में 40 लाख रुपये का खर्च आता है वहीं प्‍लास्‍टिक के मकान में 700 रुपये प्रति वर्ग फीट का खर्च होगा। उन्‍होंने आगे बताया कि प्‍लास्‍टिक का मकान आग, गर्मी और जल रोधक है। इसलिए यह 40-50 साल तक आसानी से चल सकेगा।
तेलंगाना सरकार का समर्थन:-लिंगम को तेलंगाना सरकार व ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम की ओर से समर्थन मिल रहा है। उन्‍होंने बताया कि कुछ स्‍कूलों की ओर से भी बेंच बनाने की डिमांड आ गई है। भारत में 11 राज्‍यों ने प्‍लास्‍टिक पर पूरी तरह या आंशिक रूप से बैन लगा रखा है। हालांकि देश में यह प्रतिबंध लागू करने का काम आसान नहीं है।
प्‍लास्‍टिक का विकल्‍प;-उन्‍होंने आगे बताया कि स्‍वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश में प्‍लास्‍टिक के इस्‍तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। देश के नागरिक के तौर पर हमें कुछ करना होगा। हमें प्‍लास्‍टिक के लिए विकल्‍प खोजना होगा। जूट, बंबू और कॉटन में हमें इसके विकल्‍प मिल जाएंगे।
हमने बनाया प्‍लास्‍टिक को ‘समस्‍या’;-लिंगम का कहना है कि प्‍लास्‍टिक हमारे लिए इतना उपयोगी है कि इसपर प्रतिबंध लगाना काफी कठिन कार्य होगा। दूसरे शब्‍दों में अगर ऐसा कहें कि यह हमारे रोजमर्रा के कामों का अभिन्‍न अंग है तो कहीं से गलत नहीं होगा। लिंगम ने बताया, ‘यह काफी बेहतर और उपयोगी खोज है और इसके बिना हम रह नहीं सकते। वास्‍तव में इसे समस्‍या हमने बना दिया है। जिस तरह से हम इसका दुरुपयोग करते हैं इसका रिसाइकिल भी मुश्‍किल है।‘
दी ये सलाह:-लिंगम ने कहा, ‘हर जरूरत के लिए लोगों को प्‍लास्‍टिक बैग का इस्‍तेमाल छोड़ देना चाहिए, शैंपू के छोटे छोटे पाउच की जगह बड़े पैकेट का इस्‍तेमाल करना चाहिए।’ प्‍लास्‍टिक फ्री सोसाइटी का निर्माण हम दो तरीकों से कर सकते हैं पहला प्‍लास्‍टिक के उपयोग में कटौती और दूसरा इसका पुन: इस्‍तेमाल कर।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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