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कोयंबटूर।तमिलनाडु के कोयंबटूर में दीवार गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कोयंबटूर में भारी बारिश से तीन मकान जमींदोज हो गए हैं। बताया जा रहा है कि कोयंबटूर के निकट नादूर गांव में भारी बारिश के कारण 15 फीट उंची दीवार ढह गई। दीवार की चपेट में आने से 10 महिलाअों हित 15 लोगों की मौत हो गई। मलबे में दबे बाकी लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसे स्थानीय लोगों की मदद से दमकल विभाग चला रहा है। वहीं, अब तमिलनाडु सरकार इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिजनों को 4 लाख रुपयों का मुआवजा देगी। पुलिस ने कहा कि तमिलनाडु के मेट्टुपालयम में भारी बारिश के कारण चार घरों की दीवार गिरने से चार महिलाओं सहित कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने कहा कि घरों में कई लोग थे। भारी बारिश के कारण एक निजी परिसर की दीवार जर्जर हो गई थी। पुलिस ने बताया कि राहत व बचाव कर्मियों ने अब तक नौ शव निकाले हैं।समाचार एजेंसी एएनआई से मिली जानकारी ने अनुसार तमिलनाडु में हो रही भारी बारिश के कारण चेन्नई के कोराट्टूर में कई घरों में पानी घुस गया है। सड़कों पर भारी जल जमाव के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।बता दें कि तमिलनाडु के कई जिलों के स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में और बारिश होने का पुर्वानुमान जताया है। बता दें कि चेन्नई में भारी बारिश के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई।क्षेत्रीय चक्रवात चेतावनी केंद्र के निदेशक एन पुविरासन ने कहा कि ऊपरी वायु प्रवाह के कारण राज्य में भारी बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि अगले 24 से 48 घंटे में हल्की से भारी बारिश होने की संभावना है लेकिन रामनाथपुरम, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन, वेल्लोर, तिरुवल्लुर, तिरुवन्नमलाई जिलों में अगले 24 घंटों में भारी वर्षा हो सकती है। भारी बारिश की आशंका के चलते मद्रास यूनिवर्सिटी और अन्ना यूनिवर्सिटी की सोमवार को होने वाली परीक्षा को आगे के लिए टाल दिया गया है।

नई दिल्‍ली। साइबराबाद (तेलंगाना) में महिला पशु चिकित्‍सक के साथ दुष्‍कर्म और फिर उसको बेरहमी से जलाकर मार डालने के मुद्दे पर देश भर में गुस्‍सा है। इस मामले के सभी आरोपियों को पुलिस ने पकड़ लिया है और उन्‍होंने पुलिस के समक्ष अपना गुनाह भी कुबूल कर लिया है। लेकिन, मामला सिर्फ इनके पकड़े जाने या इनके गुनाह कुबूल करने तक सीमित नहीं है। मुद्दा ये है कि आखिर इस तरह के दरींदे कब तक सड़कों पर अपनी हैवानियत का नंगा नाच करते रहेंगे और पीडि़त कब तक न्‍याय की आस में कोर्ट के दरवाजे खटखटाते रहेंगे। इसकी तरह तेलंगाना मामले में भी पूरा देश इन आरोपियों के लिए भी फांसी की मांग कर रहा है। हालांकि इसका फैसला तो कोर्ट ही करेगी। लेकिन फिलहाल इस मामले में तेलंगाना के मुख्‍यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने फास्‍ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) गठित करने की घोषणा कर दी है, लेकिन इसके बावजूद आरोपियों को सजा देने में कितना समय लगेगा यह कह पाना बेहद मुश्किल है।
निर्भया केस;-ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्‍योंकि 16 दिसंबर 2012 को दिल्‍ली में चलती बस में हुए सामूहिक दुष्‍कर्म मामले के दोषियों को भी छह वर्षों बाद भी सजा नहीं दी जा सकी है। इस मामले में भी फास्‍ट ट्रैक कोर्ट बनी थी, जिसने छह माह की सुनवाई के बाद वर्ष 2013 में दोषियों को फांसी की सजा सुना दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी अगले कुछ माह के अंदर दोषियों को निचली कोर्ट से मिली सजा को सही पाया और उस पर मुहर लगाई थी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जहां जुलाई 2018 में सभी चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके बाद भी आज तक निर्भया के परिजन इन दोषियों को फांसी के तख्‍ते पर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में निर्भया के परिजनों की तरफ से कोर्ट में एक याचिका दायर कर इन दोषियों को जल्‍द से जल्‍द फांसी देने की मांग की थी। लेकिन कानून के मुताबिक जब तक दोषियों द्वारा दायर एक भी दया याचिका या अन्‍य विकल्‍प इस्‍तेमाल नहीं कर लिए जाते तब तक उन्‍हें फांसी की सजा देने के लिए डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता है।
फास्‍ट ट्रैक कोर्ट का क्‍या फायदा;-ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि यदि इतने संगीन अपराध के दोषियों को फास्‍ट ट्रैक कोर्ट गठित करने के छह साल बाद भी सजा नहीं दी जा सकती है तो फिर उसका क्‍या फायदा है। महज निचली अदालतों में फास्‍ट ट्रैक कोर्ट गठित करने से क्‍या होगा जबकि ऊपरी अदालतों में मामले को निपटाने में लगभग वही समय लगता है।दैनिक जागरण ने संविधान विशेषज्ञ डॉक्‍टर सुभाष कश्‍यप से इन्‍हीं सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश की और ये भी जानने की कोशिश की कि ऐसा क्‍यों होता है और कानून में क्‍या प्रावधान है।
क्‍या होता है फास्‍ट ट्रैक कोर्ट:-डॉक्‍टर कश्‍यप के मुताबिक फास्‍ट ट्रैक कोर्ट हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस तरह की कोर्ट में सुनवाई के लिए आने वाले मामलों को लेकर हाईकोर्ट इसकी समय अवधि भी तय कर सकती है। यदि ऐसा नहीं होता है तो भी फास्‍ट ट्रैक इसकी सुनवाई को लेकर यह तय कर सकता है कि मामले की सुनवाई हर रोज की जानी है या समय-समय पर होगी। आपको बता दें कि जिस मामले में फास्‍ट ट्रैक कोर्ट गठित की जाती है वह केवल उसी मामले की सुनवाई करती है। फास्‍ट ट्रैक कोर्ट गठित करने के पीछे मकसद निचली अदालत से जल्‍द न्‍याय दिलवाना है। फास्‍ट ट्रैक न होने की सूरत में निचली अदालत में ही वर्षों तक मामला चलता रहता है, जिसकी वजह से पीडि़त को न्‍याय मिलने में देरी हो जाती है। ऐसा न इसके लिए ही कुछ मामलों की सुनवाई को इस तरह की कोर्ट गठित करने का प्रावधान कानून में है।
न हो किसी निर्दोष को सजा;-संविधान विशेषज्ञ डॉक्‍टर सुभाष कश्‍यप का कहना है कि दोषियों को अंतिम सजा दिलाने में जो भी कानूनी प्रक्रिया है उसको पूरा किया जाता है। निर्भया मामले में दोषियों को अब तक फांसी की सजा न दिए जाने के सवाल पर उनका कहना था कि भारत की न्‍यायिक प्रक्रिया इस सोच पर काम करती है कि भले ही दस दोषी छूट जाएं लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक निर्भया मामले में दोषियों द्वारा जब तक सभी कानूनी प्रावधानों का तय समय के अंदर इस्‍तेमाल नहीं कर लिया जाता है तब तक उन्‍हें फांसी नहीं दी जा सकती है। बावजूद इसके वह ये भी मानते हैं कि समय के हिसाब से कानून में सुधारों की गुंजाइश है।
क्‍या सुप्रीम कोर्ट में बन सकता है फास्‍ट ट्रैक कोर्ट:-यह पूछे जाने पर कि क्‍या फास्‍ट ट्रैक कोर्ट केवल निचली अदालत तक ही सीमित है या ऊपरी अदालत में भी इस तरह की कोर्ट को गठन करने का प्रावधान है, तो उनका कहना था सुप्रीम कोर्ट चाहे तो किसी मामले की जल्‍द सुनवाई के लिए स्‍पेशल बेंच गठित कर सकती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट मामले की त्‍वरित सुनवाई (Urgent Hearing in Court) के भी आदेश दे सकती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के समकक्ष किसी तरह की फास्‍ट ट्रैक कोर्ट बनाने का कानून में कोई प्रावधान नहीं है। यह पूछे जाने पर कि केवल निचली अदालत में फास्‍ट ट्रैक कोर्ट बनाकर क्‍या इसका मकसद पूरा हो जाता है। इसके जवाब में उन्‍होंने कहा कि हमारी न्‍यायिक प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है।

नई दिल्‍ली। अयोध्‍या के राम जन्‍मभूमि विवाद मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी। वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की बात कही है। बोर्ड के सदस्‍य जफरयाब जिलानी ने कहा, 'हम भी पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे लेकिन आज नहीं। याचिका का मसौदा तैयार है और 9 दिसंबर के पहले किसी भी दिन इसे कोर्ट के समक्ष दायर करेंगे।'
कही थी संवैधानिक अधिकारों की बात:-17 नवंबर को ही जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा था कि कोर्ट के फैसले की समीक्षा के लिए वह अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्‍तेमाल करेगा। मामले में कुल दस याचिकाकर्ताओं में से एक उत्‍तर प्रदेश में जमीयत के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अशद रशीदी पुनर्विचार याचिका दायर करने को आगे आए हैं। उनका कहना है कि मामले में कोर्ट के फैसले का पहला हिस्सा और दूसरा हिस्‍सा एक दूसरे का विरोधाभासी है। उनके अनुसार, कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई है कि यहां मस्‍जिद का निर्माण मंदिर तोड़कर नहीं किया गया था और 1992 का मस्जिद विवाद अवैध है। फिर कोर्ट ने यह जमीन दूसरे पक्ष को क्‍यों दे दिया।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी दाखिल करेगी याचिका;-मुस्‍लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना वली रहमानी का कहना है कि मुस्लिम समुदाय का कानून में भरोसा है इसलिए ही पुनर्विचार याचिका दायर की जा रही है। इससे पहले मामले में कोर्ट के फैसले को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पुनर्विचार याचिका दाखिल न करने का फैसला लिया था। वक्फ बोर्ड ने यह फैसला एक बैठक में किया था। इसमें कुल आठ लोग शामिल हुए थे जिसमें से छह पुनर्विचार याचिका दाखिल न किए जाने के पक्ष में थे।
ये था फैसला;-सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, अयोध्‍या की विवादित जमीन रामलला विराजमान को सौंप दिया गया। अब इसपर राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। वहीं मुस्‍लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने का राज्‍य सरकार को आदेश दे दिया। आदेश में मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्‍ट बनाने को भी कहा गया है। इस ट्रस्‍ट में निर्मोही अखाड़े को भी शामिल करने का आदेश है।

अधीर रंजन चौधरी द्वारा पीएम मोदी और अमित शाह को घुसपैठिया कहने पर संसद में जमकर हंगामा हुआ। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी लोकसभा में कहा कि मैं अधीर रंजन चौधरी के बयान की निंदा करता हूं। कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष घुसपैठिया हैं। अधीर रंजन चौधरी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ये हमारे नेता सोनिया गांधी को घुसपैठिया कह रहे हैं। क्या कर रहे हो आप लोग? अगर मेरा लीडर घुसपैठिया है तो आपका लीडर भी है। अधीर रंजन ने इलके बाद वित्त मंत्री निर्मला सितारमण को 'निर्बला सीतारमण' कहा। उन्होंने कहा कि आपके लिए सम्मान तो है, लेकिन कभी कभी सोचता हूं कि आपको निर्मला सीतारमण की जगह निर्बला सीतारमण कहना ठीक होगा कि नहीं। आप मंत्री पद पे तो हैं, लेकिन जो आपके मन में है वो कह भी पाती हैं या नहीं।झारखंड में भाजपा प्रमुख अमित शाह ने कहा कि मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि एनआरसी को देश भर में लागू किया जाएगा और सभी घुसपैठियों की पहचान की जाएगी और 2024 चुनावों से पहले निष्कासित कर दिया जाएगा।एनसीपी ने कहा है कि अगर भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े के इस दावे में सच्चाई है कि 40 हजार करोड़ के केंद्रीय फंड के दुरुपयोग को बचाने के लिए ही देवेंद्र फडणवीस को बहुमत न होने के बावजूद सीएम बनाया गया था, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा देना होगा।रक्षा मामलों के राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने लोकसभा में बताया कि जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में नियंत्रण रेखा (LoC) पर पिछले 3 महीनों (अगस्त से अक्टूबर 2019) के दौरान संघर्ष विराम उल्लंघन की 950 घटनाएं हुई हैं। इस दौरान भारतीय सेना द्वारा आवश्यकतानुसार जवाब दिया गया है।तेलंगाना: शादनगर पुलिस ने अदालत में एक याचिका दायर कर महिला पशु चिकित्सक से यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में चार आरोपियों की 10 दिन की पुलिस हिरासत की मांग की है।राजस्थान: रणथंभौर नेशनल पार्क से 1 दिसंबर 2019 का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि एक बाघ पर्यटक की गाड़ी का पीछा कर रहा है।

रांची।कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा पर जमकर ताने मारे। झारखंड में एक चुनावी सभा काे संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस प्यार बांटती है। जबकि भाजपा हिंसा को बढ़ावा देती है। सभा में मौजूद लोगों से जुड़ते हुए उन्‍होंने झारखंड में महागठबंधन की सरकार बनाने का आह्वान किया। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि देश में अंबानी-अडाणी की सरकार चल रही है। हम सत्‍ता में आए तो किसानों का कर्ज माफ करेंगे। आदिवासी हितों की रक्षा करेंगे। उद्योगपतियों से जमीन छीनकर आदिवासियों को देंगे।भाजपा को घेरते हुए राहुल ने कहा कि बीजेपी की सरकारें जमीन की लुटेरी हैं। यह आदिवासियों का जमीन पूंजीपतियों के लिए जबरन लूट लेती हैं। पांच चरणों में होने वाले झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल गांधी ने सोमवार को सिमडेगा में एक जनसभा को संबोधित किया। राहुल गांधी ने अनिल अंबानी, मेहुल चौकसी और विजय माल्‍या का जिक्र करते हुए कहा कि माेदी जी सिर्फ 15-20 पूंजीपतियों के लिए सरकार चलाते हैं। गरीबों का पैसा छीनकर इन चोरों के पॉकेट में डाल देते हैं।इससे पूर्व राहुल गांधी के हेलीकॉप्‍टर को देखकर उपस्थित जनसमूह झूम उठा। उन्‍होंने पहले झारखंड कांग्रेस के बड़े नेताओं आरपीएन सिंह, सुबोधकांत सहाय आदि नेताओं का नाम लिया। अपने भाषण की शुरुअात में उन्‍होंने बिरसा मुंडा, जयपाल सिंह मुंडा को याद किया और कहा कि उन्‍होंने रास्‍ता दिखाने का काम किया है। झारखंड में धन की कोई कमी नहीं है। उन्‍होंने जल-जंगल-खनिज आदि गिनाए और कहा कि यह चीजें छतीसगढ़ में भी हैं। एक साल के अंदर कांग्रेस ने छतीसगढ़ का चेहरा बदल दिया।राहुल ने कहा कि कांग्रेस की सरकार से पहले छतीसगढ़ में आदिवासियों की जमीनें छीन ली जाती थी। लेकिन कांग्रेस की सरकार छतीसगढ़ में आने के बाद हमने एक कानून लाकर किसानों, गरीबों और आदिवासियों की जमीनों की रक्षा की। छतीसगढ़ में भाजपा सरकार ने आदिवासियों की जमीनें छीनकर उद्योगपतियों को दी। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार झारखंड में आपकी जमीनों की रक्षा करेगी। बेरोजगारी के लिए कांग्रेस काम करना चा‍हती है। किसानों का कर्ज माफ करेगी। नोटबंदी के दौरान किसान, माताओं व बहनों को बैंक के सामने खड़ा रहना पड़ा।

कोच्चि। आज भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है। आज नौसेना को उसकी पहली महिला पायलट मिल गई है। सब लेफ्टिनेंट शिवांगी ने भारतीय नौसेना की पहली महिला पायलट बन गई हैं। कोच्चि में आज उन्होंने अपनी ऑपरेशन ट्रेनिंग पूरी कर ली है। वह आज से ही कोच्चि में ऑपरेशन ड्यूटी में शामिल हो जाएंगी। वह आज से फिक्स्ड विंग सर्विलांस डोर्नियर विमानों को उड़ाएंगी।इस मौके पर भारतीय नौसेना की सब लेफ्टिनेंट शिवांगी ने कहा कि मैं बहुत लंबे समय से इसकी कोशिश कर रही थी और आखिरकार यहां तक पहुंचने में सफल रही, इसलिए यह एक शानदार अहसास है। मैं अपने प्रशिक्षण के तीसरे चरण को पूरा करने के लिए उत्सुक हूं।
शिवांगी ने रचा इतिहास:-शिवांगी का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में हुआ है।शुरुआती प्रशिक्षण के बाद पिछले साल उन्हें भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। उन्हें इंडियन नेवल एकेडमी, एझिमाला में 27 एनओसी कोर्स के हिस्से के रूप में एसएससी (पायलट) के रूप में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।पिछले साल जून में वाइस एडमिरल एके चावला द्वारा औपचारिक रूप से उन्हें नौसेना में कमीशन दिया गया था।खबरों के मुताबिक, शिवांगी को पिछले साल जून में भारतीय नौसेना में कमीशन दिया गया था। उन्होंने वायु सेना अकादमी (AFA) डंडीगल में छह महीने तक कठोर प्रशिक्षण लिया, जहां उन्हें भारतीय वायु सेना (IAF) के पिलाटस पीसी -7 विमान का प्रशिक्षण दिया गया।एक सूत्र के मुताबिक, नेवी की एविएशन शाखा में एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारियों के रूप में महिला अधिकारी और विमान में 'पर्यवेक्षक' के तौर पर महिलाएं तैनात हैं, जो संचार और हथियारों के लिए जिम्मेदार हैं।अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने उन्हें ट्विटर पर बधाई दी। उन्होंने लिखा, 'पंखों वाली महिला ... सब लेफ्टिनेंट शिवांगी आज पहली नौसैनिक महिला पायलट बन गई, क्योंकि वह कोच्चि नौसेना बेस में शामिल हो गई। वह भारतीय नौसेना के डोर्नियर निगरानी विमान को उड़ाएगी। शिवांगी को बधाई। हमारे लिए गर्व की बात एक समझ होगी।'

नई दिल्ली। हैदराबाद में डॉक्टर की गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सोमवार को संसद में भी ये मामला गूंजता रहा। सांसद जया बच्चन ने तो संसद में यहां तक कह दिया कि ऐसे लोगों को भीड़ के हवाले कर देना चाहिए था, वो ही इनके साथ न्याय करती। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि घटना ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। इस वजह से ऐसे मामलों में सख्त कानून लाने की जरूरत है। यदि संसद के सभी सदस्य राजी हो तो इस तरह की घटना के लिए एक ऐसा कानून लाया जाना चाहिए जो सभी को मान्य हो और इस तरह की घटना करने वालों को इससे कठोर से कठोर सजा मिल सके। यदि इस तरह की वारदात करने वालों को कठोर सजा नहीं मिलेगी और इसका संदेश दूर तक नहीं जाएगा तो इन पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा। उधर पूरे देश में इस मामले को लेकर प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। महिलाएं, पुरुष, राजनीतिक और गैर राजनीतिक संगठन इस मामले में प्रदर्शन कर रहे हैं। कैंडल मार्च करके डॉक्टर को श्रद्धांजलि दी जा रही है। हैदराबाद के अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लगातार प्रदर्शन और न्याय की मांग के लिए आवाज उठाई जा रही है। सोशल मीडिया ट्विटर और फेसबुक पर बीते तीन दिनों से इसी मुद्दे पर चर्चा की जा रही है। लोग तमाम तरह से अपना विरोध दर्ज करवा रहे हैं।महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि जो कानून बने हुए हैं उसका पालन करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक कौशल और मानसिकता में बदलाव की जरूरत है। यदि इन चीजों में बदलाव नहीं हुआ तो कानून की लाठी सबके लिए नहीं चल सकती। जागरूकता का अभाव भी इसका एक बड़ा कारण है। तेलंगाना की महिला पशु चिकित्सक से बलात्कार और हत्या पर जीएस किशन रेड्डी (एमओएस होम) ने कहा कि केंद्र सरकार मामले में तेजी से न्याय के लिए राज्य को सभी मदद देने के लिए तैयार है। इस तरह के मामलों की जल्द सुनवाई होनी चाहिए और जो इसके लिए जिम्मेदार है उन सभी को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए जिससे अपराधों पर अंकुश लग सके। राज्यसभा सांसद सोनल मानसिंह ने कहा कि पशुचिकित्सक के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या पर मैं शर्मिंदा और हैरान हूं। उन्होंने कहा कि मैं भी निराश हूं कि इस तरह की घटनाएं पूरे देश में हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं पर सरकार, पुलिस, नागरिक समाज की उदासीनता क्यों है? हर बार जब कैंडल मार्च और रैलियां होती हैं, तो ही इस तरह की घटनाओं पर रोक के लिए गंभीर बातें कही जाती है। अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ (AIDWA) और अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (AIDSO) ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मुद्दे पर जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। संगठनों की मांग है कि महिलाओं और बच्चियों के साथ तमाम तरह के अपराध हो रहे हैं मगर सख्त कानून न होने की वजह से इन पर रोक नहीं लग पा रही है, इसके लिए सख्त कानून बनाया जाना चाहिए।

पुणे। भाजपा के पूर्व नेता व प्रख्यात पत्रकार अरुण शौरी की अचानक तबीयत बिगडऩे पर उन्हें पुणे के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। ताजा मिला जानकारी के अनुसार 78 वर्षीय शौरी रविवार देर रात अचानक बेहोश हो गए थे। जिसके बाद उन्हें तत्काल पास के क्लिीनिक ले जाया गया। डॉक्टर के अनुसार उनकी आवश्यक स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है, फिलहाल वह पूरी तरह से होश में हैं। ज्ञात हो कि पंजाब के जालंधर में 2 नवंबर 1941 को जन्में अरुण शौरी देश के निर्भीक पत्रकार, बुद्धिजीवी, राजनेता और विख्यात लेखक हैं। 1968 से 1972 और फिर 1975 से 1977 तक एक अर्थशास्त्री के रूप में इन्होंने विश्व बैंक में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं भी दी हैं। भारत के योजना आयोग में अरुण शौरी सलाहकार का पद भी संभाल चुके हैं। वे प्रसिद्ध समाचार पत्र 'इंडियन एक्सप्रेस ' और 'द टाइम्स ऑफ इंडिया 'के संपादक भी रह चुके हैं। 1998-2004 तक उन्हें भारत सरकार में मंत्री के पद रहने का गौरव भी प्राप्त हुआ।

 

 

 

नई दिल्‍ली। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सोमवार को अनुसूचित जाति व जनजाति समुदाय मामले को 7 जजों की बेंच को भेजे जाने का आग्रह किया है। इसपर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दो हफ्ते बाद सुनवाई की सहमति जताई गई है।केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले वर्ष 2018 मामले में लिए गए फैसले पर रिव्‍यू पीटिशन दाखिल की गई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति समुदाय की क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने का आदेश दिया गया था। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अनुसूचित जाति व जनजाति समुदाय से क्रीमी लेयर को हटाने के मामले को बड़े बेंच को सौंपा जाए। यह मामला चीफ जस्‍टिस एसए बोबड़े और जस्‍टिस बीआर गवई व सूर्यकांत के पास है। इसके लिए समता आंदोलन समिति ने जनहित याचिका दायर की थी।केंद्र ने अनुसूत जाति व जनजातियों के क्रीमी लेयर (संपन्‍न तबके) को आरक्षण से वंचित करने के फैसले से इंकार कर दिया था। केंद्र का कहना है कि समूचा समुदाय ही पिछड़ा है। इस पर कोर्ट ने जब इस मामले में फैसला लिया था तब गैर सरकारी संगठन के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा था कि क्रीमी लेयर को आरक्षण लाभ से बाहर न करने से समुदाय के जरूरतमंद इससे वंचित हो रहे हैं।कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि SC/ST पर भी क्रीमी लेयर का नियम लागू करना उचित है क्‍योंकि समुदाय के जो लोग पिछड़े नहीं हैं वे आरक्षण का लाभ न लें।
2006 में आया था नागराज फैसला, जानें;-अक्टूबर 2006 में नागराज बनाम भारत संघ के मामले में पांच जजों की संविधान बेंच ने फैसला दिया था कि नौकरी के प्रमोशन में इस समुदाय के लिए रिजर्वेशन को लेकर राज्‍य किसी तरह से बाध्‍य नहीं है। साथ ही यह भी कहा था कि इसके बावजूद यदि राज्‍य ऐसा चाहता है तो समुदाय से संबंधित तमाम डेटा जैसे उनके पिछड़ेपन और सार्वजनिक रोजगार में अपर्याप्तता आदि का संग्रह करे।

मुंबई। मुंबई के मानखुर्द रेलवे स्टेशन से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, यहां एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को ऐसा थप्पड़ मारा की उसकी मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार 35 वर्षीय सीता प्रधान सार्वजनिक शौचालय के पास किसी अन्य व्यक्ति से बात कर रही थी जिसे देख उसके प्रेमी राजू पुजारी याल्लपा को इतना गुस्सा आया की उसने सीता को थप्पड़ मार दिया। याल्लपा का थप्पड़ इतना जोरदार था कि सीता तुरंत जमीन पर गिर पड़ी और बेहोश हो गई, जिसके बाद उसे फौरन घाटकोपर में राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया, वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। याल्लपा ने बताया कि सीता प्रधान को अन्य पुरुष से बात करते देख वो सहन नहीं कर पाया और गुस्से में उसे थप्पड़ मार दिया, जिससे वो बेहोश हो गई और अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
मामला दर्ज, प्रेमी गिरफ्तार:-मानखुर्द पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नितिन बोहाडे ने बताया कि इस संबंध में आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल हम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी यालप्पा को गिरफ्तार कर लिया गया है और इस मामले की जांच की जा जारी है।
थप्पड़ से बुजुर्ग की मौत;-अभी कुछ दिन पहले ही राजस्थान के अजमेर में भी थप्पड़ की वजह से मौत का मामला सामने आया था। यहां स्कूटी हटाने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया था कि एक शख्स ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को जोरदार थप्पड़ मार दिया था। थप्पड़ लगते ही बुजुर्ग जमीन पर गिर पड़ा और और बेहोश हो गया। बुजुर्ग को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया था। घटना के बाद आरोपी शख्स फरार हो गया था जिसकी पुलिस तलाश कर रही है।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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