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पटना - आयकर टीम ने आज अहले सुबह जदयू के पूर्व विधायक सुनील पांडेय के भाई संतोष पांडेय के पटना स्थित घर पर छापेमारी की और एक एके 47 बरामद किया है। हथियार बरामद होने से सनसनी फैल गई है। बता दें कि मुंगेर जिले से एके 47 का जखीरा बरामद हुआ था और तब से ही एनआइए की टीम हथियार तस्करी के मामले में जांच कर रही है।
संतोष पांडेय के घर पर पांच घंटे तक चली छापेमारी में एके 47 के अलावा औऱ क्या बरामद हुआ है उस बार में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिली है।
संतोष पांडेय के घर पर हुई छापेमारी के साथ ही सुनील पांडेय के एक और भाई पूर्व एमएलसी हुलास पांडेय के बक्सर स्थित आवास पर भी छापेमारी की गई है। इसके साथ ही आरा स्थित उनके करीबियों के घर भी छापेमारी जारी है।
बता दें कि पटना से आई आयकर विभाग की टीम ने आज अहले सुबह हुलास पांडेय के घर पर धावा बोला और छापेमारी की।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पटना से आई एनआइए की टीम छापेमारी कर रही है। फर्जी लेन-देन के साथ ही हथियार तस्करी की भी बात सामने आ रही है। वहीं हुलास के रिश्तेदार लड्डू पांडेय के घर पर भी पिछले एक घंटे से छापेमारी जारी है। छापेमारी के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।
हुलास पांडेय के यहां से सोने-चांदी हुए थे बरामद
पूर्व एमएलसी और लोजपा नेता हुलास पांडेय के पटना स्थित घर पर भी कुछ महीने पहले छापेमारी की थी और उनके लॉकर से 1.5 किलो सोना बरामद किया था जिसकी कीमत करीब 45 लाख रुपए बतायी गई थी। हुलास पांडेय बालू कारोबारी हैं और बालू माफिया सुभाष यादव के साथ उनके व्यावसायिक ताल्लुकात भी हैं जिसकी वजह से वो आयकर की रडार पर हैं।
इससे पहले आयकर की टीम ने हुलास पांडेय के बोरिंग रोड स्थित एचडीएफसी बैंक के लॉकर को खंगाला था जिसमें सोने के जेवरात मिले थे। तफ्तीश में लगे एक अफसर के मुताबिक बैंक की शाखा में हुलास पांडेय व उनकी पत्नी के नाम से लॉकर खोला गया था।
इससे पहले भी राजधानी के समनपुरा इलाके में स्थित पूर्व एमएलसी के घर पर आयकर की छापेमारी में 40 किलो चांदी (कीमत 16 लाख रुपए से अधिक) बरामद किए गए थे।
फर्जी कंपनियों के जरिए करीब 60 करोड़ रुपए आयकर चोरी आदि आरोपों में घिरे बालू व्यवसायी सुभाष यादव आैर पूर्व एमएलसी से आने वाले दिनों में जांच टीम फिर पूछताछ कर सकती है। पहले भी दोनों से कई बार पूछताछ हो चुकी है। फिलहाल हर पहलू पर जांच जारी है।

 


मुंबई - भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा को 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस (2008 Malegaon Blast Case) में बड़ा झटका लगा है। मुंबई की विशेष एनआइए कोर्ट ने उनकी हफ्ते में एक बार हाजिर होने को लेकर छूट की मांग को खारिज कर दिया है। बता दें कि उन्होंने सांसद बनने के याचिका दायर कर कहा था कि वह एक सांसद हैं लिहाजा उन्हें संसदीय औपचारिकताएं पूरी करने होती हैं इसलिए उन्हें पेशी से स्थाई छूट दी जाए।
एनआइए कोर्ट के जज वीएस पडालकर ने शुक्रवार को उनके इस तर्क से सहमत नहीं हुए और इस याचिका को खारिज कर दिया। प्रज्ञा ने सुनवाई के दौरान दोबारा दोहराया कि उन्हें ब्लास्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं। हालांकि कोर्ट ने गुरुवार को होने वाली पेशी से उन्हें पेशी से छूट दे दी है।
गौरतलब है कि स्पेशल कोर्ट इस मामले में नियमित सुनवाई कर रहा है। इस मामले में ठाकुर समेत कुल सात अरोपित हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल से सांसद चुने जाने के बाद ठाकुर पिछले सप्ताह पहली बार कोर्ट में पेश हुई थीं। कोर्ट ने पिछले महीने सभी आरोपितों को सप्ताह में कम से कम एक बार पेश होने का आदेश दिया है।
बात दें कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के समीप हुए धमाके में छह लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हो गए थे। मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में बांधे गए विस्फोटक पदार्थ से इसे अंजाम दिया गया था।


नई दिल्ली - इंडियन एयर फोर्स की ओर से AN-32 विमान के दुघर्टनाग्रस्त होने के बाद उसमें सवार सदस्यों के लिए खोजी अभियान जारी रहा। फोर्स की टीम ने अब इस विमान में सवार सभी 13 सदस्यों के शव बरामद कर लिए हैं। इसमें से कुछ सदस्यों के शव काफी खराब हालात में बरामद किए गए हैं।
भारतीय वायु सेना का विमान एएन-32 अरुणाचल प्रदेश में गहरी खाई में दुघर्टनाग्रस्त हो गया था। उसके बाद से ही इसकी तलाश की जा रही थी। सेना के गरुण कमांडो, पोर्टर और शिकारियों का एक दल इस विमान की तलाश कर रहा था। सेना ने इसकी बरामदगी के लिए स्थानीय शिकारियों की भी मदद ली थी, उसके बाद अब विमान का पता चल सका और सभी शव बरामद कर लिए गए हैं।
एमआइ 17 हेलीकॉप्टर ने 11 जून को विमान के मलबे को ढूंढा था। उसके बाद 15 पर्वतारोहियों की टीम को वहां उतारा गया था। बाद में तीन और पर्वतारोहियों को वहां भेजा गया था। टीम ने बताया कि घने जंगलों के बीच गहरी खाई में गिरे हेलीकॉप्टर के मलबे से शवों को निकालकर पैदल ही बाहर लाया जा सकता है। उसके बाद वहां से शवों को लाने के लिए इस तरह से प्रयास किए गए।
बता दें कि अरूणाचल प्रदेश में चीन सीमा के पास वायुसेना का AN-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें सवार वायुसेना के जवान और अधिकारी शहीद हो गए थे। घटना के बाद भारतीय वायुसेना की सर्च टीम घटनास्थल पर पहुंची थी। जिसके बाद टीम ने विमान में सवार सभी लोगों की मौत की पुष्टि कर दी थी। वायुसेना सूत्रों के अनुसार घने बादलों के कारण दृश्यता बाधित होना दुर्घटना की वजह रही। इंडियन एयरफोर्स ने विमान में सवार सभी जवानों और अधिकारियों के परिजनों को इस बारे में सूचित कर दिया था। भारतीय वायुसेना ने हादसे के दौरान जान गंवाने वाले जवानो को श्रद्धांजलि भी दी।
AN-32 एयरक्राफ्ट में ये लोग थे सवार
- विंग कमांडर जीएम चार्ल्स
- स्क्वाड्रन लीडर एच विनोद
- फ्लाइट लेफ्टिनेंट आर थापा
- फ्लाइट लेफ्टिनेंट ए तंवर
- फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस मोहंती
- फ्लाइट लेफ्टिनेंट एम के गर्ग
- वारेंट ऑफिसर केके मिश्रा
- सार्जेंट अनूप कुमार
- कारपॉरल शेरिन
- लीड एयरक्राफ्ट मैन एसके सिंह
- लीड एयरक्राफ्ट मैन पंकज
- नॉन कॉम्बैट एंप्लॉयी पुतालीनॉन कॉम्बैट एंप्लॉयी राजेश कुमार
तीन जून को विमान हुआ था लापता
रूस निर्मित यह एएन-32 विमान तीन जून की दोपहर असम के जोरहाट से चीन की सीमा के निकट मेंचुका एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड जा रहा था। उड़ान भरने के 33 मिनट बाद ही उससे संपर्क टूट गया था। जिसके बाद से तलाशी अभियान जारी था। विभिन्न एजेंसियों के आठ दिनों तक चले खोजी अभियान के बाद विमान का मलबा अरुणाचल प्रदेश में सियांग और शी-योमी जिलों की सीमा पर गट्टे गांव के पास समुद्रतल से 12,000 फीट की ऊंचाई पर वायुसेना के एमआइ-17 हेलीकॉप्टर द्वारा देखा गया था।


तिरुवनंतपुरम - श्रीलंका में हुए आतंकी हमले के बाद से ही भारत और श्रीलंका दोनों देशों में आइएसआइएस (ISIS) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच खुफिया एजेंसियो ने आइएसआइएस (ISIS) को लेकर खुलासा किया है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अब आइएसआइएस (ISIS) की निगाह भारत और श्रीलंका में आतंक का नया ठिकाना बनाने पर टिकी हुई है। इंटेलीजेंस रिपोर्ट के मुताबिक भारत और श्रीलंका में पांव पसारने के लिए आतंकी संगठन आइएसआइएस (ISIS) हिंद महासागर के इलाके के रास्ते यहां घुस सकते हैं। आइएसआइएस (ISIS) का ये रुख सीरिया और इराक में हुए उसके नुकसान के बाद सामने आया है।
केरल पुलिस के अधिकारियों को ऐसे तीन पत्र राज्य की खुफिया एजेंसी ने दिए हैं, जिसमें आतंकियों की इन गतिविधियों को लेकर लिखा गया है। एक पत्र में लिखा गया है, 'इराक और सीरिया के इलाकों में नुकसान के बाद, आइएसआइएस (ISIS) ऑपरेटर्स से अपने-अपने देशों में वापस रहते हुए जिहाद के हिंसक रूप दिखाने की बात कही गई है।'
एक अन्य पत्र में लिखा गया है 'कोच्चि के प्रमुख इलाकों, जिसमें एक प्रमुख शॉपिंग मॉल भी शामिल है, आइएसआइएस (ISIS) आतंकियों का टारगेट बन सकता है।' लेटर में लिखी गई इन बातों ने भारत में आइएसआइएस (ISIS) से संबंधित साइबर गतिविधियों को बढ़ाने के लिए हमलों के संकेत दिए हैं।
अधिकारियों ने केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कश्मीर का हवाला देते हुए कहा कि देश में आइएसआइएस के प्रभाव के कारण ये सभी राज्य सबसे असुरक्षित हो गए हैं। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पहले टेलीग्राम मैसेंजर आइएसआइएस (ISIS) आतंकियों के बीच संचार का सबसे पसंदीदा तरीका था, लेकिन सूचना लीक होने के डर से आइएसआइएस (ISIS) आतंकी अब चैटसेक्योर, सिग्नल और साइलेंटटेक्स्ट जैसे एप्स का इस्तेमाल कर रहे है, ऐसे ही एक एप में यह लेटर मिला है।
केरल में पिछले कुछ समय में आइएसआइएस (ISIS) की गतिविधियों में तेजी से इजाफा हुआ है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में कम से कम 100 लोग आतंकी संगठन आइएसआइएस (ISIS) में शामिल हुए हैं। इनमें से अधिकतर उत्तर केरल इलाके से हैं। उन्होंने कहा कि लगभग तीन हजार दक्षिणी राज्य के 21 परामर्श केंद्रों में "डी-रेडिकलाइज़्ड" हुए हैं और अब उनकी निगरानी की जा रही है।


नई दिल्ली - वैज्ञानिकों ने एक कॉम्पैक्ट और पोर्टेबल सेंसर विकसित किया है जो डीएनटी और टीएनटी जैसे विस्फोटक का आसानी से पता लगा सकता है और इसका उपयोग आतंकवाद को खत्म करने और सार्वजनिक स्थानों की निगरानी के लिए किया जा सकता है।
डीएनटी, टीएनटी जैसे नाइट्रोएरोमैटिक
विस्फोटक नागरिकों और सैन्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। इन रसायनों को पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले जहरीले दूषित पदार्थों के रूप में भी जाना जाता है। साइंटिफिक रिपोट्र्स जर्नल में बताया गया है कि यह उपकरण छोटा और हल्का है। इसे कहीं भी आसानी से ले जाया सकता है। साथ ही यह पर्यावरण निगरानी का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
आतंकी गतिविधियों में बड़े पैमाने पर विस्फोटकों का इस्तेमाल होता है और भारी जन-धन की हानि भी होती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की के वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसे विस्फोटकों का पता लगाने के लिए नया सेंसर विकसित किया है। इस टीम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च
(आइआइएसईआर) कोलकाता से बिनॉय मैती और प्रियदर्शी डी शामिल थे। इन्होंने मिलककर फ्लोरेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी पर आधारित तकनीक का उपयोग करके इस सेंसर को विकसित किया। जब भी कोई विस्फोटक इस नए सेंसर के संपर्क में आता है तो इसके पॉलीमर का रंग बदलने लगता है जिसे आसानी से देखा जा सकता है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की के असिस्टेंट प्रोफेसर सौमित्र सतपथी ने कहा कि यह पॉलीमर यौगिकों के विस्फोटक वर्ग का पता लगा सकता है, जिसे नाइट्रोएरोमैटिक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यह सेंसर रक्षा और फोरेंसिक विभाग के लिए सहायक सिद्ध हो सकता है। सतपथी ने कहा कि आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों की निगरानी करने के साथ ही यह सेंसर जल में घुले नाइट्रोएरोमैटिक का भी आसानी से पता कर लेता है।
प्रोफेसर सतपथी ने कहा कि इस उपकरण की लागत मास स्पेक्ट्रोफोटोमीटर जैसे पारंपरिक उपकरणों की तुलना में बहुत कम होगी। शोधकर्ताओं के अनुसार इस सेंसर का सार्वजनिक स्थानों जैसे हवाई अड्डों, ट्रेन स्टेशनों, शॉपिंग मॉल आदि में इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही इसे आधिकारिक रूप से भी मान्यता मिलेगी और आतंकवादरोधी गतिविधियों में इसका उपयोग किया जाएगा। शोधकर्ताओं की टीम अब नाइट्रो-एस्टर (नाइट्रोग्लिसरीन, पीईटीएन) और नाइट्रो-एमाइन (एचएमएक्स) जैसे अन्य विस्फोटकों का पता लगाने के लिए एक तकनीक पर काम कर रही है।


नई दिल्ली - ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हिमालय के 650 ग्लेशियरों पर खतरा मंडरा रहा है, ये ग्लेशियर लगातार पिघलते जा रहे हैं। यदि इसी रफ्तार से ग्लेशियर पिघलते रहे तो आने वाले कुछ सालों में हिमालय के अधिकतर ग्लेशियर पानी में तब्दील हो जाएंगे। बढ़ते पानी की वजह से जमीन पर रहने वालों को इससे अधिक समस्या का सामना करना पड़ेगा। वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन का पता लगाने के लिए अध्ययन किया। 40 साल के उपग्रह डेटा पर आधारित इस तरह के एक अध्ययन में ये बातें सामने आई हैं।
साइंस एडवांसेज में बुधवार को प्रकाशित अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि हिमालय के ग्लेशियर साल 2000 के बाद से हर साल 1.5 फीट बर्फ खो रहे हैं। इस तरह से देखा जाए तो हिमालय की बर्फ पिछले 25 साल की अवधि की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से पिघल रही है। हाल के वर्षों में, ग्लेशियरों से एक वर्ष में इतनी बर्फ पिघल चुकी है, इससे लगभग 8 बिलियन टन पानी पैदा हो चुका है। अध्ययन के लेखकों ने इसे 3.2 मिलियन ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल द्वारा आयोजित पानी की मात्रा के बराबर बताया।
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने ग्लोबल वार्मिंग के खतरे की ओर इशारा किया है। अभी तक ग्लेशियरों को जल मीनार कहा जाता था। इसी के साथ जिन जगहों पर सूखा पड़ता था वहां के लोगों के लिए इन ग्लेशियरों को बीमा पॉलिसी माना जाता था मगर जिस तरह से ये ग्लेशियर पिघल रहे हैं उससे खतरा दुगुना हो रहा है। फरवरी में, इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट द्वारा निर्मित एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि सदी के अंत तक हिमालय अपनी बर्फ के एक तिहाई हिस्से तक को खो सकता है।
पिछले 150 वर्षों में औसत वैश्विक तापमान पहले ही 1 डिग्री बढ़ गया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस सदी के अंत तक औसत वैश्विक तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। मई में नेचर में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि हिमालय के ग्लेशियर गर्मियों में तेजी से पिघल रहे हैं क्योंकि वे सर्दियों में बर्फ द्वारा फिर से बनाए जा रहे हैं।
गर्म मौसम में पहाड़ों से पिघलने वाली बर्फ का पानी नदियों में आकर मिल जाता है जिसके कारण वहां पर पानी के लेवल में इजाफा हो रहा है। अभी तक इन्हीं ग्लेशियरों से निकलकर आने वाले पानी से फसलों की सिंचाई की जा रही है। इनसे पीने का पानी भी मिलता है और उनसे सिंचाई भी की जा रही है। ग्लेशियरों का पीछे हटना बढ़ते वैश्विक तापमान के सबसे भयावह परिणामों में से एक है। दुनिया भर में, लुप्त हो रहे ग्लेशियरों का मतलब लोगों, पशुधन और फसलों के लिए आने वाले समय में पानी की मात्रा एकदम कम हो जाएगी।
हिमालय में, ग्लेशियरों के नष्ट होने से दो गंभीर खतरे हैं। कम समय में पिघलने वाले ग्लेशियर पहाड़ पर ही छोटे-छोटे तालाब बनाते हैं, यदि इनमें पानी की मात्रा बढ़ेगी तो इससे अधिक नुकसान होगा। यहां बसे छोटे गांव आदि खत्म हो जाएंगे। लंबी अवधि में ग्लेशियर की बर्फ के नुकसान का मतलब है कि एशिया के भविष्य के पानी का नुकसान। यदि इन ग्लेशियरों को पिघलने से रोकने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो लंबे समय में अत्यधिक गर्मी और सूखे के समय पानी मुहैया करा पाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा।
कोलंबिया विश्वविद्यालय में लामोंट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में नवीनतम अध्ययन, हाल ही में अघोषित यू.एस. जासूस उपग्रह डेटा सहित हिमालय के 6000 किलोमीटर या 600 मील से अधिक की दूरी पर 650 ग्लेशियरों के उपग्रह चित्रों के विश्लेषण पर निर्भर है। शोधकर्ताओं ने छवियों को 3 डी मॉडल में बदल दिया, जोकि ग्लेशियरों के क्षेत्र और मात्रा में परिवर्तन दिखाते हैं।
उन्होंने पाया कि 1975 से 2000 तक, पूरे क्षेत्र के ग्लेशियर हर साल 10 इंच बर्फ खो देते हैं। 2000 में इनका पिघलना शुरू हुआ था। अब इनेक नुकसान की दर दोगुनी हो गई, प्रत्येक वर्ष लगभग 20 इंच बर्फ पिघलकर पानी हो रही है। अध्ययन में यह भी निष्कर्ष निकला है। ईंधन से जलने से बर्फ के पिघलने में योगदान होता है। इन ग्लेशियरों के पिघलने का बड़ा कारक तापमान का बढ़ना था जबकि विशाल पर्वत श्रृंखला में तापमान औसत से अधिक था। पहले के वर्षों की तुलना में 2000 और 2016 के बीच काफी तेजी ग्लेशियर पिघल रहे हैं जिसका नतीजा दिख रहा है। हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने से वैज्ञानिक काफी चिंतित है।

 


नई दिल्ली - देश में मोबाइल फोन चोरी होने की घटनाएं काफी ज्यादा बढ़ गई है। पुलिस में शिकायत करने पर भी ज्यादातर लोगों के फोन का अता-पता नहीं लग पाता, लेकिन अब आने वाले दिनों में आपको इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है। देश में बड़े पामाने पर हो रही मोबाइल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए दूरसंचार विभाग ने IMEI नंबरों का एक डेटाबेस तैयार किया है।
दूरसंचार विभाग (Department of Telecom) ने चोरी हुए मोबाइल का पता लगाने के लिए सेंट्रल इक्विपमेंट आईडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) तैयार किया है। इसमें देश के हर नागरिक के मोबाइल का मॉडल, सिम नंबर और IMEI नंबर की जानकारी फिड होगी। इसकी मदद से चोर के हाथ में मोबाइल जाने पर उसे बंद किया जा सकेगा। जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन खो गए हैं या चोरी हो गए हैं, वो पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद एक हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से दूरसंचार विभाग (DoT) को सूचित कर सकते हैं।
दूरसंचार विभाग इसके माध्यम से IMEI (इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी) नंबर को ब्लैकलिस्ट कर सकता है। इसके अलावा वो मोबाइल को भी ब्लॉक कर देगा, ताकि भविष्य में किसी दूसरे सेल्यूलर नेटकर्व का एक्सेस न हो सके। भारत में सीइआइआर (Central Equipment Identity Register) का उद्देश्य विशेष रूप से IMEI आधारित गैर कानूनी गतिविधियों को रोकना है। ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2019 तक भारत में 1.16 बिलियन वायरलेस सब्सक्राइबर थे।
दूरसंचार विभाग ने जुलाई 2017 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस परियोजना का महाराष्ट्र में संचालन किया था। मोबाइल फोन की चोरी और क्लोनिंग एक गंभीर समस्या बन गई है। मोबाइल फोन की चोरी न केवल एक वित्तीय नुकसान है, बल्कि नागरिकों के निजी जीवन के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है। बाजार में नकली मोबाइल फोन भी दूरसंचार विभाग के लिए एक गंभीर मुद्दा है। नकली मोबाइल फोन की एक बड़ी तादात हमारे मोबाइल नेटवर्क में नकली IMEI नंबरों के साथ सक्रिय है। कई बार चोरी हुए मोबाइल फोन के पार्ट को अलग-अलग बेच दिया जाता है, जिससे इशका पता लगाना काफी मुश्किल हो जाता है।
दरअसम भारत में एमआइएन ( Mobile Identification Numbers) का डेटाबेस तैयार करने की योजना की कल्पना सबसे पहले साल 2012 में की गई थी। 2019-20 के अंतरिम बजट में सरकार ने सीईआरआई परियोजना के लिए दूरसंचार विभाग को 15 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।


भुवनेश्वर - जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 18 जून को आतंकियों के आईईडी ब्लास्ट में शहीद नायक अजीत कुमार साहू को ओडिशा के राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने शहीद नायक अजीत कुमार साहू के शव यात्रा पर माल्यार्पण किया। 18 जून को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों द्वारा किए गए आईईडी ब्लास्ट में नायक अजीत कुमार साहू घायल हो गए थे। जिसके बाद मंगलवार को वह शहीद हो गए थे। शहीद नायक अजीत कुमार साहू ढेकनाल जिले के कमाख्यानगर ब्लॉक के तहत आने वाले बदसुंला गांव के रहने वाले थे।
बता दें जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 18 जून को आतंकियों ने सेना पर हमला बोला था। आतंकियों ने सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स(RR) की गाड़ी को तब आईईडी से उड़ाया, जब अरिहाल इलाके में वो पेट्रोलिंग कर रही थी। इस आतंकी घटना में सेना के 9 जवान जख्मी हुए थे वहीं दो जवान मंगलवार सुबह इलाज के दौरान शहीद हो गए। इनमें नायक अजीत कुमार साहू भी शामिल थे।
जम्मू कश्मीर में ओडिशा के जवान नायक अजित कुमार साहू के शहीद होने पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बुधवार को 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि का ऐलान किया। सीएम पटनायक ने आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह सहायता मुख्यमंत्री राहत कोष से दी जाएगी। उन्होंने कहा, 'शहीद साहू ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।' साथ ही मुख्यमंत्री पटनायक ने ट्वीट भी किया, ‘जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में ओडिशा के जवान अजित कुमार साहू की शहादत से काफी दुखी हूं। बहादुर सिपाही के सर्वोच्च बलिदान को सलाम। मेरी संवेदनाएं एवं प्रार्थनाएं परिवार के साथ हैं।
शहीद नायक अजीत कुमार साहू 2015 में सेना में भर्ती हुए थे। अजीत की शहादत की खबर मंगलवार सुबह उनके घर वालों को फोन के जरिए मिली। शहादत की खबर सुनकर परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।


जालौन - ‘उफ, याद मत दिलाइए, ब्रिटिश सरकार से ज्यादा जुल्म सहे हैं आपातकाल में। पानी मांगों तो जबरन मूत्र पिलाया जाता था। यातना इतनी कि नाखून तक उखाड़ लिए जाते थे। पेड़ से उलटा लटकाकर पीटा जाता था। अंगुलियों में पिन चुभो दी जाती थी। संघ के वरिष्ठ नेताओं की जानकारी पाने के लिए कड़ी यातना दी जाती थी।’ भले ही यह दर्द 44 साल पुराना हो, लेकिन इसकी सिहरन अभी भी सेवानिवृत अध्यापक राजाराम व्यास के जेहन में ताजा है। उरई के राजेंद्र नगर में रहने वाले राजाराम आपातकाल के दौरान 20 महीने से ज्यादा जेल में रहे थे।
सात जून 1975 को देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। 26 जून 1975 को देश के किसी भी अखबार ने संपादकीय नहीं लिखा। फिर देशभर में उत्पीड़न शुरू हो गया। झूठे मुकदमे लिख मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) और डीआइआर (डिफेंस ऑफ इंडिया रूल) जैसे काले कानूनों में जेल में बंद किया जाने लगा। संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। राजाराम बताते हैं कि चार जुलाई 1975 को घर को भारी फोर्स ने घेर लिया था। मानो किसी डकैत या खूनी को पकड़ने आई हो। आपातकाल की घोषणा के समय मैं गांव में था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हमीरपुर में तत्कालीन जिला प्रचारक ओमप्रकाश तिवारी का संदेश मिला तो वहीं जाकर संघ कार्य में जुट गया। चार जुलाई को उन्हें यमुना नदी पार कराकर किसी अज्ञात जगह भेज दिया और मैं अपने घर आ गया। उसी रात गिरफ्तारी की गई। मैं हमीरपुर में गिरफ्तार होने वाला पहला शख्स था। अगले दिन डीआइआर कानून लगाकर जेल में बंद कर दिया गया। मेरे साथ ओंकार नाथ दुबे एडवोकेट, जयकरन सिंह, इंद्र बहादुर सिंह भी बंद किए गए।
नहीं था कोई इंतजाम
राजाराम कहते हैं कि प्रशासन को भी इतनी संख्या में गिरफ्तारी का अंदाजा नहीं था। जेल में कपड़े, रहने-खाने की समुचित व्यवस्था नहीं थी। छोटी सी बैरक में डेढ़ सौ लोग बंद थे। लेटना तो दूर बैठने में भी दिक्कत थी। व्यवस्था के लिए अनशन पर बैठे तो जेल प्रशासन ने तीन दिन बाद कहा कि मिलने के लिए लोग आए हैं। गेट पर पहुंचे तो वहां पहले से खड़े पुलिस वाहन में जबरन बैठा दिया गया। कोई नहीं जानता था, कहां जा रहे हैं। सुबह पहुंचे तो सामने का आगरा जेल का गेट था।
बाबा जय गुरुदेव के पैरों में पड़ी थीं बेड़ियां
राजाराम व्यास के मुताबिक आपातकाल का विरोध करने के कारण आगरा जेल में बाबा जय गुरुदेव भी बंदी थे। उनके पैरों में लोहे की बेड़ियां थी। उनके भक्त जेल की परिक्रमा के बाद जो फल आदि दे जाते थे, वहीं हम लोग खाते थे।
रिवॉल्वर लगा पूछा पता, फिर लटका दिया उलटा
राजाराम बताते हैं कि तानाशाही इतनी थी कि हर वह यातना जो सोच भी नहीं सकते, दी गई। संघ के सतीश शर्मा को सिर पर रिवॉल्वर लगा दी गई। ओमप्रकाश तिवारी का पता नहीं बताने पर पेड़ से उलटा लटकाकर पीटा गया। मुझे 19 नवंबर 1975 को फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जेल भेज दिया गया। वहां तीन माह तक तनहाई बैरक में रखा गया। जेल भेजने से पहले भी पुलिस ने बहुत प्रताड़ित किया। हमीरपुर के रामकेश विश्वकर्मा व विश्वंभर शुक्ला को थाने में उस समय दारोगा प्रभुदयाल ने जो यातनाएं दीं, उसके सामने अंग्रेज कुछ नहीं थे।
मानसिक यातानाओं का भी चला था दौर
राजाराम बताते हैं कि हम लोगों को शारीरिक ही बल्कि मानसिक यातनाएं भी दी गईं। परिजनों के भेजे पत्र पहले जेलर पढ़ते थे। फिर हमें देकर वापस ले लेते थे। मिलाई संभव नहीं थी। लंबी सांस लेकर राजाराम बोलते हैं कि 23 मार्च 1977 को आए चुनाव परिणाम ने तानाशाही के बादल छांट दिए और 25 मार्च 1977 को रिहा किए गए।


कोलकाता - पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के भाटपाड़ा में गुरुवार को दो समूहों के बीच हुए संघर्ष में व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मृतक की पहचान रामबाबू शॉ के तौर पर हुई है जबकि हिंसा में घायल हुए लोगों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है।
खबरों के मुताबिक नवनिर्मित थाने के पास दो विरोधी समूहों के सदस्यों के बीच तीखी झड़प हुई और इस दौरान कई बम दागे गए और गोलियां चलाई गईं। नवनिर्मित थाने का गुरूवार को ही उद्घाटन होना है।
त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) के जवानों के साथ पुलिस अधिकारियों का एक दल इलाके में तैनात किया गया है जबकि हंगामे और हिंसा के बाद इलाके में दुकानें और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद हो गए। भाटपाड़ा में 19 मई को हुए विधानसभा चुनावों के बाद झड़प के कई मामले सामने आ चुके हैं।

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