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नई दिल्ली - रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह पहले चाणक्यपुरी में नेशनल पुलिस मेमोरियल व म्यूजियम का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने लाला किले में आजाद हिंद सरकार की 75वीं वर्षगांठ मनाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने बिना नाम लिए कांग्रेस और गांधी परिवार पर जमकर हमला बोला।
लाल किले में आयोजित आजाद हिंद सरकार की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर पीएम ने कहा, ‘ये भी दुखद है कि एक परिवार को बड़ा बताने के लिए, देश के अनेक सपूतों, वो चाहें सरदार पटेल हों, बाबा साहेब आंबेडकर हों, उन्हीं की तरह ही, नेताजी के योगदान को भी भुलाने का प्रयास किया गया। आज मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि स्वतंत्र भारत के बाद के दशकों में अगर देश को सुभाष बाबू, सरदार पटेल जैसे व्यक्तित्वों का मार्गदर्शन मिला होता और भारत को देखने के लिए वो विदेशी चश्मा नहीं होता, तो स्थितियां बहुत भिन्न होती।'
प्रधानमंत्री ने कहा ‘कैंम्ब्रिज के अपने दिनों को याद करते हुए सुभाष बाबू ने लिखा था कि - "हम भारतीयों को ये सिखाया जाता है कि यूरोप, ग्रेट ब्रिटेन का ही बड़ा स्वरूप है। इसलिए हमारी आदत यूरोप को इंग्लैंड के चश्मे से देखने की हो गई है।‘ आगे पीएम ने कहा, भारत अनेक कदम आगे बढ़ा है, लेकिन अभी नई ऊंचाइयों पर पहुंचना बाकी है। इसी लक्ष्य को पाने के लिए आज भारत के 130 करोड़ लोग नए भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक ऐसा नया भारत, जिसकी कल्पना सुभाष बाबू ने भी की थी।
पीएम बोले, ‘नेताजी का एक ही उद्देश्य था, एक ही मिशन था, भारत की आजादी। यही उनकी विचारधारा थी और यही उनका कर्मक्षेत्र था। आजाद हिन्द सरकार सिर्फ नाम नहीं था, बल्कि नेताजी के नेतृत्व में इस सरकार द्वारा हर क्षेत्र से जुड़ी योजनाएं बनाई गई थीं। इस सरकार का अपना बैंक था। अपनी मुद्रा थी। अपना डाक टिकट था। अपना गुप्तचर तंत्र था। आज मैं उन माता पिता को नमन करता हूं जिन्होंने नेता जी सुभाष चंद्र बोस जैसा सपूत देश को दिया। मैं नतमस्तक हूं उन सैनिकों और परिवारों के आगे जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में खुद को न्योछावर कर दिया।'
नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अब एक ऐसी सेना के निर्माण की तरफ बढ़ रहा है, जिसका सपना नेताजी ने देखा था। जोश, जुनून और जज्बा तो हमारी सैन्य परंपरा का हिस्सा रहा ही है। अब तकनीक और आधुनिक हथियारों की शक्ति भी जुड़ रही है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के लिए जो समर्पित हुए वो उनका सौभाग्य था। हम जैसे लोग, जिन्हें ये अवसर नहीं मिला, हमारे पास देश के लिए जीने का, विकास के लिए समर्पित होने का मौका है। देश का संतुलित विकास, समाज के प्रत्येक स्तर पर, प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र निर्माण का अवसर, राष्ट्र की प्रगति में उसकी भूमिका, नेताजी के वृहद विजन का हिस्सा थी।
लालकिले पर आजाद हिंद सरकार की वर्षगांठ मनाने से पहले पीएम ने सुबह आठ बजे चाणक्यपुरी में नेशनल पुलिस मेमोरियल व म्यूजियम का उद्घाटन किया। यहां भी प्रधानमंत्री ने बिना निशाना लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय पुलिस मेमोरियल सेवा, साहस और शौर्य का प्रतीक है, लेकिन क्या कारण है जो इसको अस्तित्व में आने में 70 वर्ष लग गए। आज मुझे राष्ट्रीय पुलिस मेमोरियल पर गर्व है, लेकिन कुछ सवाल भी हैं। आखिर इस मेमोरियल को अस्तित्व में आने में आज़ादी के 70 वर्ष क्यों लग गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं मानता हूं कि कानूनी वजहों से कुछ वर्ष काम रुका, लेकिन पहले की सरकार की इच्छा होती, उसने दिल से प्रयास किया होता, तो ये मेमोरियल कई वर्ष पहले ही बन गया होता। इसके विपरीत पहले की सरकार ने आडवाणी जी द्वारा स्थापित पत्थर पर धूल जमने दी। ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे राष्ट्र सेवा और समर्पण की अमर गाथा के प्रतीक, राष्ट्रीय पुलिस मेमोरियल को देश को समर्पित करने का अवसर मिला है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में जब फिर NDA की सरकार बनी तो हमने बजट आवंटन किया। आज ये भव्य स्मारक देश को समर्पित किया जा रही है। ये हमारी सरकार के काम करने का तरीका है। आज समय पर लक्ष्यों को प्राप्त करने की कार्य संस्कृति विकसित की गई है। देश के हर राज्य में, हर पुलिस स्टेशन, हर पुलिस चौकी में तैनात, राष्ट्र की हर संपदा की सुरक्षा में जुटे साथियों को, राहत के काम में जुटे साथियों को, आप सभी को, भी मैं बधाई देता हूं।
पीएम ने कहा कि बहुतों को तो ये पता तक नहीं होता कि कोई इमारत गिरने पर, नाव हादसा होने पर, आग लगने पर, रेल हादसा होने पर, राहत के काम की कमान संभालने वाले ये लोग कौन हैं। आज का ये दिन देश में आपदा प्रबंधन में जुटे, किसी प्राकृतिक संकट के समय या हादसे के समय, राहत के काम में जुटने वाले उन जवानों को भी याद करने का है, जिनकी सेवा की बहुत चर्चा नहीं की जाती।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट में डटे हमारे साथियों का शौर्य और बलिदान भी अब शांति के रूप में दिखने लगा है। शांति और समृद्धि का प्रतीक बन रहे हमारे उत्तर-पूर्व के विकास में आपका भी योगदान है। देश के नक्सल प्रभावित जिलों में जो जवान अभी ड्यूटी पर तैनात हैं, उनसे प्रधानमंत्री ने कहा कि आप बेहतरीन काम कर रहे हैं। शांति स्थापना की दिशा में आप तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
पीएम मोदी ने कार्यक्रम के शुरूआत में कहा कि देश की सुरक्षा में समर्पित प्रत्येक व्यक्ति को, यहां उपस्थित शहीदों के परिवारों को मैं पुलिस स्मृति दिवस पर नमन करता हूं। आज का ये दिन आप सभी की सेवा के साथ-साथ, आपके शौर्य और उस सर्वोच्च बलिदान को याद करने का है, जो हमारी पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की परिपाटी रही है। इस दौरान पीएम देश के पुलिस जवानों के साहस, सेवा और समर्पण को याद कर कई बार भावुक भी हो गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सैन्य ताकत हमेशा से आत्मरक्षा के लिए रही है और आगे भी रहेगी। हमें कभी किसी दूसरे की भूमि का लालच नहीं रहा। भारत की संप्रभुता के लिए जो भी चुनौती बनेगा, उसको दोगुनी ताकत से जवाब मिलेगा।

 


अमृतसर - ऐसा दृख्‍य जिस पर मौत भी जार-जार रोई। किसी का सिर रेलवे ट्रैक पर पड़ा था तो धड़ अस्‍पताल लाया जा सका था। पूरा मंजर इतना दर्दनाक की जो भी देखता सिसक पड़ता। जलते हुए रावण को देख रहे कई घरों के चिराग बुझ गए हैं। मासूम बच्चों की लाशों को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रो रहे लोग उस घड़ी को कोस रहे हैैं जब रावण का दहन देखने जोड़ा फाटक गए थे। प्रशासन पहले सोया रहा, अब रात-रात जागकर मृतकों के परिवारों से शोक व घायलों के जिस्म पर संवेदना का मरहम लगाने का अर्थहीन प्रयास कर रहा है। घटना में मारे गए लोगों के अंग भंग हो चुके हैं। शवों की क्षत-विक्षत तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, इसलिए इन्हें दिखाना संभव नहीं। जरा सोचिए जिन मृतकों की तस्वीरों को हम और आप देख नहीं सकते, उनके परिजनों के दिल पर क्या बीतती होगी।
लाशों को सीने से लगाकर रोते लोग, पिता को बेटे का धड़ गुरु नानक देव अस्पताल में मिला, सिर रेलवे ट्रैक पर
दशहरा मेले में 18 वर्षीय मनीष उर्फ आशु भी पहुंचा था। घटना के बाद परिवार वाले उसे तलाशने के लिए रेलवे ट्रैक पर पहुंचे। क्षत-विक्षत लाशों के बीच मनीष नहीं मिला। उसके पिता विपिन कुमार ने बताया कि वह सिविल अस्पताल, गुरु नानक देव अस्पताल व निजी अस्पतालों में भी गए, पर उसके बारे में कुछ पता नहीं चल सका। इसके बाद मनीष की फोटो सोशल मीडिया पर भेजी गई। शनिवार सुबह पता चला कि रेलवे ट्रैक से एक युवक का कटा हुआ सिर बरामद हुआ है। यह सिर मनीष का था। विपिन ने बताया कि मनीष का धड़ गुरु नानक देव अस्पताल में था और सिर रेलवे ट्रैक पर। छोटे भाई रिशु ने बताया कि मनीष 12वीं कक्षा का छात्र था। शाम पांच बजे दशहरा देखने गया था।
मनीष की फाइल फोटो व रेलवे ट्रैक से बरामद हुआ सिर दिखाते हुए उसके चाचा।
मां अभी भी कर रही बेटे के आने का इंतजार
जूते बनाकर परिवार का पेट पालने वाले विपिन कुमार के लिए बेटे की मौत का गम बहुत बड़ा है। वह अस्पताल में फूट-फूट कर रोए। साथ ही प्रशासन व सरकार को इस घटना के लिए कसूरवार बताया। कहा, मेेरा सब कुछ लुट गया। पत्नी रेखा को अभी तक नहीं बताया कि उसके जिगर का टुकड़ा नहीं रहा। वह तो अभी भी मनीष के आने का इंतजार कर रही है।
संदीप के नन्हें फूल मुरझाए
अभागी मां.. जोड़ा फाटक निवासी संदीप का आंचल सूना हो गया है। दुर्घटना में संदीप ने दो मासूम बच्चों के साथ-साथ अपने पिता को भी खो दिया। सिविल अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में दाखिल संदीप शुक्रवार से ही कोमा में है। उसके पति जितेंद्र सिंह ने बताया कि पत्नी संदीप और दो बच्चे तीन वर्षीय नीरज व छह वर्षीय सोनिया तथा सास मनजीत कौर व ससुर अभय दशहरा देखने गए थे। सभी रेलवे ट्रैक पर खड़े थे। अचानक रेल आई और लोग कटने लगे। संदीप ने दोनों बच्चों को धक्का मारकर पटरियों से दूर कर दिया और खुद भी कूद गई।
उसके सिर पर गहरी चोट लगी और वह मौके पर ही बेहोश हो गई, जबकि दोनों बच्चे सोनिया तथा नीरज भीड़ के पैरों तले दबकर मौत की आगोश में समा गए। दोनों बच्‍चाें को सिविल अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद ही उन्हें मृत करार कर दिया। जिंतेद्र बोले, बच्चों का अंतिम संस्कार करके आया हूं। घटना के वक्त संदीप के पिता अभय ट्रेन से कट गए और उनकी मौके पर मौत हो गई, जबकि संदीप की मां मनजीत कौर भगदड़ में गिरकर जख्मी हो गई।
पिता के साथ जख्मी हुए बच्चे
दो बच्चों के साथ जख्मी हुए ललित कुमार ने बताया कि ट्रेन के आते ही धक्का लगा। मैं और मेरे दो बच्चे लवकुश तथा संदीप पटरी के किनारे जा गिरे। मेरे हाथ में फैक्चर है और लवकुश के सिर पर गहरी चोट लगी। मैं और मेरे बच्चे सलामत हैं, लेकिन इस घटना में जिन परिवारों के चिराग बुझ गए, उनके बारे में सोचकर ही रूह कांप उठती है।
लोगों को रौंदते हुए निकल गई ट्रेन
बिहार के गोपालगंज के गांव समराल निवासी मतिलाल ने बताया कि ट्रेन आते ही चीखें मच गई। ट्रेन की रफ्तार इतनी थी कि किसी को समझने और संभलने का मौका नहीं मिला। मैं पटरी से कूदकर नीचे उतरा, लेकिन ट्रेन की चपेट में आ गया। छाती की पसलियां टूट गई हैं।
नंदलाल का कट गया कान
बिहार के भागलपुर जिले के गांव माल भंडारीडी निवासी नंदलाल भगत मेले में अकेले गए थे। हादसे से पहले ट्रैक पर खड़े थे। ट्रेन आई और लोग कटते गए। लोगों की धक्का-मुक्की के बीच वह ट्रैक की दूसरी तरफ गिर पड़े। इस दौरान उनका कान कट गया।
पटाखों के शोर में नहीं सुनाई दिया ट्रेन का हॉर्न
10 वर्षीय विशाल अपने पापा राजेश के साथ मेला देखने गया था। भगदड़ में पिता का साथ छूट गया। भीड़ में दब गए, शायद इसलिए बच गए। पिता-पुत्र दोनों सिविल अस्पताल में दाखिल हैं। राजेश के अनुसार पटाखों की आवाज के बीच हमें ट्रेन का हॉर्न सुनाई नहीं दिया।
पोस्टमार्टम हाउस में बिछ गईं लाशें, पोस्‍टमार्टम करने वाले स्‍टाफ भी हो गए द्रवित
अमृतसर के सिविल अस्पताल व गुरुनानक देव अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस में चीख पुकार मची रही। एक के बाद एक शव यहां लाए जाते रहे। परिजनों की चीखों ने पोस्टमार्टम हाउस के स्टाफ की आंखें भी नम हो गईं। शवों का पोस्टमार्टम किया गया। सिविल अस्पताल में 37 शवों का पोस्टमार्टम हुआ, जबकि गुरुनानक देव अस्पताल में 17 शवों के पोस्टमार्टम हुए। क्षत-विक्षत शवों का पोस्टमार्टम करने वाला स्टाफ भी इनकी हालत देखकर द्रवित हो उठे।
आरएसएस ने जारी किए हेल्प लाइन नंबर
आरएसएस अमृतसर ने सहायता एवं जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। संघ के इस मानवीय सेवा कार्य की ओर से हादसे के शिकार लोगों और पीडि़त लोगों की जानकारी हासिल की जा सकती है। घटना में ज्यादातर लोग यूपी और बिहार के रहने वाले हैैं। जानकारी के लिए इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।
संघ कार्यालय - 01832227356,
संघ कार्यालय - 01832229585,
कंवल कपूर - 9216972700,
रघु - 9464118436
अश्वनी - 9872029987
मारे गए लाेगों में 39 पुरुष, 7 महिलाएं, 10 बच्चे, पांच की पहचान नहीं, 36 का हुआ अंतिम संस्कार
रेल हादसे में मारे गए लोगों में 39 पुरुष, सात महिलाएं और पांच बच्‍चे थे। इस हादसे में मारे गए 36 लोगों का शहर के अलग-अलग श्मशान घाटों में शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस हादसे में उत्तर प्रदेश के मरने वाले चार लोगों में से एक का शव उनके पैतृक राज्य भेज दिया गया। शष तीन का अंतिम संस्कार उनके परिजनों यहीं पर कर दिया। डिप्टी कमिश्नर कमलदीप सिंह संघा ने कहा कि जख्मियों के इलाज में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आए, इसके लिए जिले के 8 अस्पतालों में दो-दो नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

 


लखनऊ - उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति रमेश यादव के छोटे पुत्र अभिजीत की आज यहां संदिग्ध हालात में मौत हो गई। अभिजीत यादव का शव दारुलशफा विधायक निवास के डी ब्लॉक के कमरा नम्बर 28 में मिला है। पुलिस पड़ताल में लगी है जबकि परिवार के लोग बता रहे हैं कि सीने में अचानक दर्द के बाद अभिजीत ने दम तोड़ा है।सभापति रमेश यादव अभी तक आए नहीं हैं।
अभिजीत उर्फ विवेक का शव जहां मिला है, उस कमरे में उनके बड़े भाई और मां भी थे। परिवार के लोगों का कहना है कि विवेक के आज सुबह अचानक तेज दर्द उठा था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। परिवार के लोगों ने बिना पुलिस को सूचना दिए ही 21 वर्षीय अभिजीत 21 का शव अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया।
इसकी जानकारी होने पर हजरतगंज पुलिस ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया। परिवार में प्रापर्टी का विवाद आया सामने। विवेक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। विधान परिषद सदस्य रमेश यादव की दूसरी पत्नी मीरा यादव ने कहा मेरी और बड़े बेटे अभिषेक की जान को खतरा है। रमेश यादव हमारी हत्या करवा सकते हैं।
परिवार का कहना है कि विवेक शनिवार रात करीब 11 बजे घर आया था। तब उसने सीने में दर्द की जानकारी मां को दी थी। मां ने सीने में मालिश कर उसे सुला दिया था। सुबह जब काफी देर तक अभिजीत नहीं उठा तो मां उसे उठाने पहुंची। शरीर में कोई हरकत न होती देख भाई को भी बुलाया।
भाई ने विवेक की नब्ज जांची तो पता चला उसकी मौत हो चुकी थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौत को संदिग्ध बताया है, लेकिन परिवार की ओर से कोई शिकायत दर्ज न कराने पर शव को परिवार के हवाले कर दिया।


तिरुवनंतपुरम - सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर छिड़ा विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट के आदेश पर प्रदर्शनकारियों का विरोध भारी पड़ रहा है और उनके सामने पुलिस भी बेबस नजर आ रही है। एक ओर कोर्ट सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे चुका है, दूसरी ओर प्रदर्शनकारी 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में घुसने न देने पर अड़े हैं। रविवार को भी कड़ी सुरक्षा के बीच दो महिला श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन के कारण उन्हें भी बेबस वापस लौटना पड़ा।
बता दें कि केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के कपाट खुले पांच दिन हो चुके हैं और 10 से 50 साल की उम्र वाली किसी भी महिला को मंदिर में प्रवेश नहीं मिल पाया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं को मंदिर के कपाट तक ही नहीं पहुंचने दे रहे हैं। वे मंदिर की ओर जाने वाले सरकारी और निजी वाहनों को रोककर महिलाओं को वापस लौटने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में कई महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने भारी सुरक्षा के बीच कुछ महिलाओं को मंदिर के प्रवेश द्वार तक लेकर भी गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी के कारण पुलिस को भी उनके सामने झुकना पड़ा और महिलाएं बिना दर्शन किए लौटने को मजबूर हो गईं।
रविवार को भी कड़ी सुरक्षा में दो महिलाओं को लेकर पुलिस मंदिर की ओर जा रही थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया। इसके बाद दोनों को पंबा में पुलिस कंट्रोल रूम लाया गया। इस बीच केरल आईजी ने रविवार को लौटाई गई महिलाओं को लेकर कहा, ' वे नियमों की जानकारी मिलने के बाद सबरीमाला नहीं जाना चाहती थीं।' उन्होंने कहा, 'वे आंध्र प्रदेश के एक श्रद्धालुओं के समूह का हिस्सा थीं और बाकी मंदिरों में भी जा चुकी थीं। उन्हें सबरीमाला के विशेष नियमों के बारे में नहीं पता था, जब उनसे किसी ने कहा कि वह मंदिर नहीं जा सकतीं तो वह नहीं जाना चाहती थीं और उन्होंने यह बयान भी दिया।'
बता दें कि खुद मंदिर के पुजारी भी प्रदर्शनकारियों के साथ हैं और महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के पक्ष में नहीं हैं। भाजपा और कांग्रेस भी इस मामले में विरोध कर रही हैं। कांग्रेस का कहना है कि सबरीमाला मंदिर कोई पर्यटन स्थल नहीं है, तो सिर्फ श्रद्धालु ही मंदिर जा सकते हैं। इससे पहले बीते शुक्रवार को दो महिलाओं ने आईजी के साथ करीब 250 पुलिसकर्मियों के सुरक्षा घेरे में मंदिर में प्रवेश की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। मंदिर में घुसने का प्रयास करने वाली महिलाओं में पत्रकार कविता जक्कल और ऐक्टिविस्ट रेहाना फातिमा शामिल थीं, जिन्हें प्रवेश नहीं मिला। फातिमा के मंदिर दर्शन के लिए पहुंचने से नाराज लोगों ने तो कोच्चि स्थित उनके घर पर तोड़फोड़ भी की।


श्रीनगर - जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में सेना को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। रविवार सुबह कुलगाम जिले में हुई मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया है, जबकि सेना का एक जवान गंभीर रूप से जख्मी हो गया है। ये मुठभेड़ दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के लर्रू इलाके में हो रही थी, फिलहाल मुठभेड़ खत्म हो चुकी है। बता दें कि आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने लर्रू गांव में घेराबंदी कर खोज अभियान शुरू किया था। जहां आतंकियों की ओर से की गई फायरिंग के बाद मुठभेड़ शुरू हुई।
सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच ये मुठभेड़ करीब 5 घंटे तक चली। इस दौरान सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मारकर बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस कार्रवाई के बाद से ही इलाके में सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सेना की राष्ट्रीय राइफल्स को शनिवार-रविवार देर रात कुलगाम जिले के लर्रू इलाके में दो से तीन आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी। इस सूचना के आधार पर रविवार सुबह सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की एसओजी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस के जवानों ने बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया।
इस बीच इलाके के एक मकान में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी कर भागने का प्रयास किया, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी फायरिंग की। दोनों ओर से फायरिंग शुरू होने के बाद करीब पांच घंटे बाद सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मार गिराया। गौरतलब है कि हाल ही में जम्मू कश्मीर में सेना ने मुठभेड़ के दौरान हिज्बुल आतंकी और एएमयू का पीएचडी स्कॉलर रहा मन्नान वानी को मार गिराया था।


नई दिल्ली - अमृतसर रेल हादसे में ट्रेन ड्राइवर अरविंद कुमार का बयान पहली बार सामने आया है। अरविंद ने अपने लिखित बयान में कहा है कि ट्रेन के इमरजेंसी ब्रेक लगाए गए थे, उसके बावजूद मेरी गाड़ी के चपेट में कुछ लोग आ गए। उसने कहा, ने ट्रैक पर लोगों का हुजूम देखते ही इमरजेंसी ब्रेक लगा दी लेकिन इसके बावजूद ट्रेन की चपेट में कुछ यात्री आ गए। ड्राइवर का दावा है कि जब ट्रेन पूरी तरह से रुकने की स्थिति में पहुंच गई थी, तभी ट्रेन पर कुछ लोगों ने पत्थरों से हमला कर दिया, जिससे यात्रियों की सुरक्षा के लिए उसने फिर से ट्रेन चला दी।
पटरियों से हटाए गए प्रदर्शनकारी
ट्रेन हादसे के बाद से पटरियों पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया है और ट्रेनों का परिचालन करीब 40 घंटे बाद रविवार दोपहर बहाल हो गया। रेलवे के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि रेलवे को स्थानीय अधिकारियों से दोपहर 12:30 बजे ट्रेन सेवाएं बहाल करने की मंजूरी मिली। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार ने बताया, “पहले मालगाड़ी को दोपहर दो बजकर 16 मिनट पर मनावला से अमृतसर रवाना किया गया।” उन्होंने बताया कि इसके बाद मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों का आवागमन शुरू किया जाएगा।
पटरी पर बैठे प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया
पंजाब पुलिस ने अमृतसर में हुए ट्रेन हादसे के बाद से पटरियों को अवरोधित कर उनपर बैठे प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाकर रविवार को रेल मार्ग साफ किया। पटरी से हटाए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मी के साथ झड़प की और उनपर पथराव किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस झड़प में पंजाब पुलिस का एक कमांडो और एक फोटो पत्रकार घायल हो गया।
दशहरे की शाम हुए ट्रेन हादसे में 61 लोगों की मौत की बाद से स्थानीय निवासी घटना वाली जगह पर प्रदर्शन कर रहे थे और पटरियों को अवरोधित कर बैठे हुए थे।

 


रांची - एयर एशिया का विमान दिल्ली से रांची आने के दौरान लैंडिंग के क्रम में बर्ड हिट का शिकार हो गया। इस हादसे में विमान के पंखों को नुकसान पहुंचा है। पायलट ने विमान को सुरक्षित रन-वे पर उतार लिया। विमान में लगभग 200 यात्री सवार थे।
विमान को रांची से कोलकाता जाना था। इस दौरान खराबी आने के कारण विमान के रन-वे पर काफी देर तक खड़े रहने से परेशान यात्रियों ने हंगामा किया। उनके हंगामा किए जाने के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी के द्वारा बेंगलुरु से देर रात वैकल्पिक विमान मंगवा कर यात्रियों को गंतव्य तक भेजा गया। इधर एयरपोर्ट अथॉरिटी का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारण विमान में समस्या हुई।
सुरक्षा के इंतजामों पर ही उठ रहे सवाल
एयरपोर्ट पर समय-समय पर बर्ड हिटिंग से जुड़ी घटनाएं होती रही हैं। इसी साल दो अप्रैल को भी इंडिगो का विमान बर्ड हिट का शिकार होते-होते बचा था। रात 8 बजकर 45 मिनट के आसपास जब इंडिगो का विमान राची एयरपोर्ट पर लैंड कर रहा था तो एक पक्षी विमान से टकरा गया था। वहीं जुलाई में भी राची से बेंगलुरु उड़ान भर रहे गो एयरवेज के विमान से पक्षी टकरा गया था। इसके बाद विमान की तत्काल इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान में 161 यात्री सवार थे।
नहीं किया है विशेष इंतजाम
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने रात में विचरण करने वाले पक्षियों से विमान की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं। ऐसे में बर्ड हिटिंग से बड़ी दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। वैसे इस मामले में बात करने पर एयरपोर्ट के अधिकारी भी बर्ड हिटिंग जैसी घटना से साफ इनकार भी कर देते हैं।
मास, मछली की गंध से पक्षी होते हैं आकर्षित
एयरपोर्ट के आसपास मास और मछली की दुकान बर्ड हिट का सबसे बड़ा कारण मानी जाती है। एयरपोर्ट के तीन किमी का दायरा मास बिक्री के लिए प्रतिबंधित होता है, लेकिन बिरसा चौक, विधानसभा के पास, सेक्टर टू मार्केट, हिनू चौक, डोरंडा, आदि क्षेत्रों में खुले में मास-मछली बिकते हैं। जिसकी गंध पाकर पक्षी इस ओर आकर्षित होते हैं। नियमित खुराक मिलने के कारण पक्षी एयरपोर्ट के आसमान में मंडराते रहते हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी और निगम की इंफोर्समेंट की टीम समय-समय पर प्रतिबंधित क्षेत्र में खुले में मास, मछली बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर जुर्माना भी वसूलती है, लेकिन मास मछली की दुकान पहले की तरह फिर से सज जाती है। जिससे बर्ड हिटिंग की संभावना हमेशा बनी रहती है।


इंफाल - सीआरपीएफ की गाड़ी पर ग्रेनेड से हुए हमले में एक जवान की मौत हो गई जबकि दूसरा घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि यह हमला मणिपुर की राजधानी इंफाल के नागमपाल इलाके में शनिवार को हुआ।
पुलिस ने बताया कि शानिवार शाम करीब 6:30 बजे हुए इस हमले में सीआरपीएफ के जवान उमेश की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, घायल राम रंजन को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह राज्य में कुछ ही घंटों के दौरान हुआ दूसरा धमाका है। क्योंकि शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह के कार्यक्रम से कुछ देर पहले भी कांगपोकपी में भी एक धमाका हुआ था।
पुलिस ने बताया कि यह हमला उस समय हुआ जब सीआरपीएफ के जवान एक छोटी गाड़ी से कांगपोकपी से अपने लंफाल स्थित कैंप जा रहे थे।


बेंगलुरु - कर्नाटक के लिंगायत समुदाय के प्रसिद्ध संत सिद्दलिंगा का शनिवार को निधन हो गया। राज्य सरकार ने उन्हें राज्योत्सव और बासवश्री के पुरस्कार से सम्मानित किया था। उन्हें 'कन्नड़ जगद्गुरु' के तौर पर भी जाना जाता था।
सिद्धलिंगा स्वामी के थोंटादार्य मठ से जुड़े एक सदस्य ने कहा कि सुबह दिल का दौरा पड़ा था। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के अनुसार सुबह नौ बजे तक जब स्वामी जी अपने कमरे से बाहर नहीं निकले तो मठ के लोगों को चिंता हुई। उन्हें तुरंत ही अस्पताल ले जाया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
कुमारस्वामी ने एक बयान में कहा कि सिद्दलिंगा कर्नाटक में सम्मानित लिंगायत संतों में एक थे। उन्होंने समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के सिद्दरमैया सरकार के फैसले का विरोध करने पर वीरशैव-लिंगायत के संतों की आलोचना की थी। कुमारस्वामी के मुताबिक 2006 में जब भाजपा के साथ गठबंधन सरकार बनाई थी तब स्वामी जी ने ही उन्हें जनता दर्शन और ग्राम विश्राम जैसे कार्यक्रम शुरू करने की सलाह दी थी।


नई दिल्ली - अमृतसर में ट्रेन दुर्घटना में मारे गये 61 लोगों में से अब तक 40 लोगों की पहचान कर ली गई है और 36 लोगों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के रहने वाले चार अन्य लोगों के शव उनके गृह नगर भेज दिए हैं। राज्य सरकार के अधिकारियों और मृतकों के परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में यहां शीतला माता मंदिर के निकट एक मैदान में 36 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया।
अधिकारियों के अनुसार 29 शवों का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि अमृतसर के पास शुक्रवार की शाम को रावण दहन देखने के लिए रेल की पटरियों पर खड़े लोग एक ट्रेन की चपेट में आ गए जिससे कम से कम 59 लोगों की मौत हो गई और 72 अन्य घायल हो गए। उन्होंने बताया कि घायलों को सात अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अमृतसर के समीप जोड़ा फाटक पर जब यह हादसा हुआ, उस समय ट्रेन जालंधर से आ रही थी और पटरियों के पास मैदान पर रावण दहन देखने के लिए कम से कम 300 लोग एकत्र थे।

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