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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा है कि फिलहाल असम के अलावा देश के किसी अन्य राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू नहीं होगा। एनआरसी को लेकर तमाम विवाद सामने आए थे। यही नहीं ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। गौरतलब है कि एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट 30 जुलाई को प्रकाशित होने के बाद करीब 40 लाख आवेदक इससे बाहर रह गए लेकिन दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है और इसकी अंतिम तारीख 31 दिसंबर, 2018 कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट में है मामला:-इससे पहले इसी माह के 12 तारीख को राज्य सरकार की अर्जी पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई व न्यायमूर्ति आरएफ नारिमन की पीठ ने असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) में नाम शामिल करने का दावा पेश करने की समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी थी। कोर्ट ने इसके अलावा दावों की जांच पड़ताल की तिथि को भी बढ़ाकर 15 फरवरी कर दी थी। दावा पेश करने की तारीख 15 दिसंबर को खत्म हो रही थी।गौरतलब है कि असम सरकार ने अर्जी दाखिल कर कोर्ट से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को नई तिथि के मुताबिक काम करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि गलत तरीके से एनआरसी में शामिल होने से रह गये लोगों को दावा पेश करने के लिए ड्राफ्ट एनआरसी की कॉपी सभी संबंधित लोगों को जांच पड़ताल के लिए सुविधाजनक जगह उपलब्ध कराई जाए।

पटना। पटना में चलने वाला आसरा शेल्टर होम की संचालिका मनीषा दयाल को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और वो बेऊर जेल से आज रिहा हो गई। उन्हें कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है। ये जमानत उन्हें पहले ही मिल जाती लेकिन कुछ जरूरी कागजात नहीं मिलने की वजह से उन्हें जेल में ही रहना पड़ा था। आज उनकी रिहाई हो गई है।
जेल से निकलते ही कहा-मैं निर्दोष हूं, मुझे फंसाया गया:-मनीषा दयाल जेल से बाहर आ रही थी तो उनके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। बाहर आते ही मीडिया के सवाल के जवाब में मनीषा ने सिर्फ इतना कहा कि मुझे फंसाया गया है। मैं निर्दोष हूं। इससे पहले न्यायाधीश एस कुमार की एकल पीठ ने आसरा शेल्टर होम की संचालिका मनीषा दयाल द्वारा दायर नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। बता दें कि वे पिछले 4 महीने से जेल में बंद थीं।मुजफ्फपुर शेल्टर होम मामला सामने आने के बाद राज्य के अन्य आसरा होम की जांच में यह पता चला कि राजधानी पटना के राजीव नगर स्थित आसरा होम में भी कुछ गड़बड़ियां हुई है। खबर ये भी थी कि यहां के शेल्टर होम में दो लड़कियों की संदिग्ध मौत हुई है।साथ ही मनीषा दयाल के आसरा होम से 10 अगस्त को कुछ लड़कियां भागने की कोशिश करते पकड़ीं गई थीं।जांच में पता चला कि शेल्टर होम में रह रही लड़कियों के साथ अत्याचार हुआ करते थे। वहां दो लड़कियां संदिग्‍ध परिस्थितियों में मृत भी पायीं गईं थीं। इसके बाद मनीषा दयाल को उनके सहयोगी चिरंतन कुमार के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।
आसरा शेल्टर होम में हुई थी दो महिलाओं की संदिग्ध मौत;-पटना स्थित आसरा शेल्टर होम में दो महिलाओं की संदिग्ध तरीके से हुई मौत से बवाल मच गया था। इस संबंध में पुलिस ने शेल्टर होम के संचालक चिरंतन कुमार और उसे संचालित करने वाली एनजीओ की कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल को गिरफ्तार किया था।आसरा शेल्टर होम की पोल तब खुली जब यहां से तीन लड़कियां फरार हो गईं और फरार होने की कोशिश कर रही एक अन्य लडकी की शिकायत पर आश्रय गृह के पड़ोस में रह रहे एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
कौन हैं मनीषा दयाल:-आसरा शेल्टर होम की संचालिका मनीषा दयाल बहुत सारे काम किया करती थीं। मनीषा खुद को अनुमाया ह्यूमन रिर्सोसेज फाउंडेशन की डायरेक्टर बताती हैं। उसने खुद को भामा शाह फाउंडेशन का कमेटी मेंबर भी बताया है। इसके अलावा वो स्पर्श डी एडीक्शन एंड रिसर्च सोसायटी में भी काउंसलर हैं।मनीषा पटना की हाई प्रोफाइल सोसायटी में चर्चित हैं। एनजीओ चलाने के अलावा वो मैगजीन भी निकालती थीं। कई फोटो में वो मंत्रियों के साथ भी दिखी थीं। उनका पॉलिटिकल कनेक्शन भी मजबूत माना जा रहा है।

 

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बाद एमके स्टालिन के बयान पर अपनी सहमति नहीं दी है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के गठबंधन के पीएम उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नाम को आगे करने पर अखिलेश यादव सहमत नहीं हैं। अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि यह जरूरी नहीं है कि एमके स्टालिन की राय पर गठबंधन के सभी सदस्य एकमत हों। गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में राहुल गांधी का नाम सामने लाने पर अखिलेश यादव ने कहा कि जनता अब भाजपा से नाराज है। इसी कारण कांग्रेस को तीन राज्यों में सफलता मिली है।अब गठबंधन को तैयार होना होगा। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री, ममता जी और शरद पवार जी ने गठबंधन बनाने के लिए सभी नेताओं को एक साथ लाने का प्रयास किया था। इस प्रयास में अगर कोई अपनी राय दे रहा है, तो जरूरी नहीं है कि गठबंधन की राय समान हो। प्रधानमंत्री पद के नाम पर किसी का भी नाम गठबंधन के सभी नेता तय करें तो बेहतर है।
मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ के बयान का विरोध;-समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत न करने के बाद अब उनके बयान का भी विरोध किया है। कमलनाथ ने शपथ लेने के बाद बिहार व उत्तर प्रदेश के निवासियों के कारण मध्य प्रदेश के युवकों को नौकरी नहीं मिल पाती है।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि कमलनाथ का यह बयान गलत है। अक्सर आप महाराष्ट्र से भी यही सुनते हैं। उत्तर भारतीय यहां क्यों आये हैं। उन्होंने यहां नौकरियां क्यों ली हैं। दिल्ली से और अब एमपी से भी। उन्होंने कहा कि अब तो उत्तर भारतीयों को फैसला करना होगा कि केंद्र सरकार उनके लिए क्या करेगी। मध्य प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि उत्तर प्रदेश व बिहार के लोग यहां पर आकर नौकरी करते हैं। स्थानीय लोगों को काम नहीं मिलता है। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया के काफी हंगामा मचा था। कमलनाथ ने यह भी कहा था कि हमारी रोजगारपरक योजना का लाभ उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जो कि 70 फीसदी स्थानीय लोगों को जॉब देंगी। इससे उत्तर प्रदेश व बिहार के लोग अपने आप कम होंगे। निवेश के प्रोत्साहन प्रदान करने की हमारी योजनाएं केवल मध्य प्रदेश के 70 प्रतिशत लोगों को रोजगार देने की शर्त पर लगाई जाएंगी। बिहार व उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों के लोग यहां आते हैं और स्थानीय लोगों को नौकरी नहीं मिलती है। मैंने इस के लिए फाइल पर हस्ताक्षर किए हैं।अखिलेश यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ का उत्तर प्रदेश व बिहार के लोगों को निशाना बनाना सही नहीं है। यहां के लोग ही केंद्र सरकार बनाते हैं।

मुंबई। टीवी इंडस्ट्री की क्वीन एकता कपूर, टेलीविजन और फिल्मों के बाद वेब सीरिज में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी हैं। इस बार उन्होंने रोमांच, थ्रिलर और सेक्स से भरपूर ‘अपहरण’ के साथ वेब सीरिज की दुनिया में कदम रखा है।
क्या है अपहरण की कहानी ?;-इस वेब सीरिज की शुरुआत एक ऐसे पुलिस ऑफिसर रुद्र श्रीवास्तव से होती है, जो भ्रष्टाचार के आरोप के चलते अपनी नौकरी गवां देता है। स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि उसे चोरी तक करनी पड़ती है। इसके बाद रुद्र की जिंदगी में नया मोड़ तब आता है जब एक बिजनेसमैन की पत्नी मधु उसकी लाइफ में आती है। फिर रुद्र के साथ मिलकर मधु अपनी सौतेली बेटी के अपहरण का प्लान बनाती है, लेकिन यह वेब सीरिज जैसा आप सोच रहे हैं वैसा नहीं है बल्कि इसमें कई सारे ट्विस्ट और टर्न है जो इसे और ज्यादा रोमांचक बनाती है। आपको बता दें कि मधु की भूमिका में अभिनेत्री माही गिल हैं जबकि रुद्र श्रीवास्तव की भूमिका अरुणोदय सिंह ने निभाई है।
कैसी है एक्टिंग;-फिल्म ‘साहब, बीवी और गुलाम’ सीरिज की तरह अभिनेत्री माही गिल ने ‘अपहरण’ वेब सीरिज में अपनी दमदार अभिनय को दर्शाया है। वह एक मिस्टीरियस वूमेन की भूमिका में हैं। वहीं देसी टच के साथ इस वेब सीरिज में काम करना अरुणोदय सिंह के लिए काफी नया रहा। इसके अलावा राइटर और एक्टर वरुण बडोला तथा निधि सिंह ने भी अपनी दमदार परफॉर्मेंस दी है।
क्यों देखें ये वेब सीरिज:-यदि आपको रोमांस के साथ संस्पेस और थ्रिलर वाली कहानी पसंद है, तो ‘अपहरण’ आपके लिए एक बेहतरीन वेब सीरिज साबित हो सकती है। 70 के दशक की मसालेदार एंटरटेनमेंट, पुराने गानों से भरा संगीत, सेक्स तथा एक्शन से भरपूर ये वेब सीरिज आपको अंत तक बांधे रखेगी। इसके अलावा वेब सीरिज में देसी ह्यूमर को टच देते हुए जबरदस्त डायलॉग लिखा गया है, जो दर्शकों को अपनापन का एहसास दिलाती है। व्य‌ंगपूर्ण डायलॉग और जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग इसे अन्य वेब सीरिज से बिलकुल ही अलग करती है। आपको बता दें कि इस वेब सीरीज के कई सारे सीन्स की शूटिंग हरिद्वार और ऋषिकेश में हुई है, जहां निर्देशक सिद्धार्थ सेनगुप्ता ने कैमरामैन के साथ मिलकर कई दर्शनीय ड्रोन शॉट्स लिये और अपने निर्देशन की काबिलियत का परिचय दिया।अंत में यही कहना चाहेंगे कि जिस्म 2, ब्लैकमेल और मोहनजोदड़ो जैसी फिल्में कर चुके अरुणोदय सिंह इस वेब सीरिज में सर्प्राइजिंग पैकेज की तरह हैं जिसका खुलासा इस सीरिज को देखने के बाद ही होता है। अगर बात करे रेटिंग की तो आईएमडीबी (IMDb) ने इस वेब सीरिज को 10 में से 9 रेटिंग दी है जो यह बताती है कि ये सीरिज दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी।

सबरीमाला (केरल)। चार किन्नरों ने मंगलवार को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में भगवान अयप्पा मंदिर में पूजा-अर्चना की। पारंपरिक काले रंग की साड़ी पहने अनन्या, तृप्ति, रेंजुमल और अवंतिका ने इस दौरान भगवान को चढ़ाने के लिए पारंपरिक 'इरुमुदिकेतु (भगवान का चढ़ावा)' ले रखा था। इन चारों को पुलिस ने निलक्कल से पंबा तक सुरक्षा प्रदान की। बता दें कि इससे पहले सोमवार को इन्हें मंदिर की ओर बढ़ने से रोक दिया गया था।चारों ने कहा कि वे इसको लेकर अत्यंत खुश हैं कि उन्हें मंदिर में पूजा करने का मौका मिला। यह उनके जीवन का एक मिशन था जो साकार हो गया। इन चारों ने सोमवार को केरल हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के सदस्य डीजीपी ए हेमचंद्रन और पुलिस महानिरीक्षक मनोज अब्राहम से सोमवार को यहां मुलाकात की थी जिसके बाद इन्हें आगे बढ़ने की इजाजत दी गई। पुलिस ने इससे पहले उनकी यह कहकर कोई मदद करने से इनकार कर दिया था कि उन्हें इस मुद्दे पर कुछ विधिक स्पष्टीकरण लेना है।बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10-50 आयुवर्ग के बीच की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को हटा दिया था, जिसके बाद से राज्य में लगातार विरोध-प्रदर्शन जारी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भी 10-50 से आयुवर्ग की कोई भी महिला विरोध-प्रदर्शनों के चलते प्रवेश नहीं कर सकी है।

नई दिल्ली। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सईद अकबरुद्दीन ने कहा कि 26/11 के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को इसके लिए न तो कभी माफ किया जा सकता है न ही भुलाया जा सकता है। सईद ने कहा कि हाफिज को सजा दिलाकर न्याय होगा।सॉफ्ट पावर कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि हाफिज सईद के मामले में न्याय जरूर होगा और हाफिज ने जो किया उसके लिए उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि विकासशील देश के रूप में भारत की प्रमुख जरूरत हमेशा आंतरिक होंगी। हमारी जनसंख्या एक अरब से अधिक है। इसलिए हमारी सार्वजनिक कूटनीति का हर पहलू हमारी आंतरिक परिस्थितियों में सुधार की दिशा में होगा। उन्होंने देश के सामने आने वाली कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों को भी सूचीबद्ध किया।उन्होंने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती जलवायु (परिवर्तन) और स्वच्छता है। इसे स्वीकार करने में हमें कोई शर्म नहीं होनी चाहिए कि हमें इस क्षेत्र में सुधार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कोई भी राजनयिक हमारी कमियों को स्वीकार करने के लिए खड़ा नहीं होता था। लेकिन आज भारतीय कूटनीति का चेहरा बदला है और सुधार के प्रयास जारी हैं।

गुवाहाटी। जल्द ही ऐसा मुमकिन है कि एक सुअर का दिल किसी आदमी के अंदर धड़के। यह बात सुनने में जरूर अटपटी लग सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस चमत्‍कार को सच को दिखाया है। इस तकनीक से हृदय रोगियों को एक नई जिंदगी मिल सकती है। दरअसल, दुनियाभर में अंग दान करने वालों की भयंकर कमी है। इसके चलते इंसान की जान बचाने के लिए जानवरों के दिल, फेफड़े और लिवर का इस्तेमाल कर पाना मेडिकल साइंस के लिए हमेशा से यक्ष प्रश्न रहा है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसका समाधान खोज लिया है।
डॉक्टर धनी राम बरुआ का दावा:-हालांकि, भारतीय डॉक्टर धनी राम बरुआ का दावा है कि उन्‍होंने दो दशक पूर्व ही इस तकनीक को खोज निकाली थी। उन्‍होंने मानव के अंदर सुअर के दिल का सफल प्रत्यारोपण किया था। इस प्रत्‍यारोपण के बाद वह व्‍यक्ति सात दिनों तक जीवित रहा। इस प्रत्‍यारोपण के चलते उन्‍हें जेल तक जाना पड़ा था। इन दिनों डॉ बरुआ गुवाहाटी से 20 किलोमीटर दूर सोनपुर नामक स्‍थान पर हर्ट सिटी में हृदय रोगियों को जीवन प्रदान कर रहे हैं। उनका यह हर्ट सिटी करीब 50 एकड़ में फैला हुआ है।
जर्मन, स्‍वीडन और स्‍वीटजरलैंड के वैज्ञानिकाें का दावा:-क्रॉस स्पीशीज ऑर्गन ट्रांस्प्लांटेशन यानि अलग-अलग किस्म के जीवों के आपस में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। जर्मन, स्‍वीडन और स्‍वीटजरलैंड के वैज्ञानिकाें ने सुअर के दिल को मानव में सफल प्रत्‍यारोपण किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रत्‍यारोपण के बाद वह व्‍यक्ति छह माह तक जीवित रहा। सफल प्रत्‍यारोपण के बाद वैज्ञानिकों में उत्‍साह है। इसमें वह असीम संभावना देख रहे हैं। प्रत्यारोपण के दौरान अंगों का बेकार हो जाना इस दिशा में सबसे बड़ी दिक्कत रही है। लेकिन अब वैज्ञानिकों सूअर के हृदय को लंगूर में जोड़कर अधिक समय के लिए जीवित अवस्था में रखने में कामयाब हो गए हैं। उन्होंने इसके लिए जीन मॉडिफिकेशन और रोगप्रतिरोधी क्षमताओं को रोकने वाली दवाओं का इस्तेमाल कर अपना तरीका तैयार किया है।
हृदय प्रत्यारोपण के लिए सूअर ही बेहतर क्यों:-वैज्ञानिक 1960 के दशक से दूसरे जानवरों की गुर्दे, हृदय और यकृत को इंसानों में प्रत्यारोपित करने की कोशिशें कर रहे हैं। इंसानों में हृदय प्रत्यारोपण के लिए शुरुआत में उनके सबसे करीबी रिश्तेदार, बंदरों और लंगूरों के हृदय का इस्तेमाल किए जाने के बारे में सोचा गया था। लेकिन इन जानवरों के विकास में एक लंबा समय लगता है और चिंपैंजी जैसे जानवर तो लुप्तप्राय जानवरों की श्रेणी में हैं। इसके अलावा बंदरों और लंगूरों का इंसानों से जेनेटिक तौर पर बेहद करीबी होने से बीमारियों के आपस में फैलने का भी एक बड़ा खतरा हो सकता था। इसलिए सूअरों को एक बेहतर विकल्प के तौर पर चुना गया, क्योंकि उनके हृदय का आकार भी लगभग इंसानी दिल की ही तरह होता है। साथ ही उनके साथ रोगों के संक्रमण का खतरा भी कम है। इनका विकास भी कम समय में हो जाता है और ये आसानी से उपलब्ध भी हैं।
लंगूर में हुआ सफल प्रयोग:-मैरीलैंड के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इंसानों में भी यह ट्रांसप्लांट संभव हो जाता है, तो इससे हर साल हजारों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकेगी। इस प्रयोग के दौरान पांच लंगूरों से जोड़ा गया सूअर का हृदय 945 दिनों तक जिंदा रहा था। लंगूरों में हृदय को प्रत्यर्पित नहीं किया गया था, बल्कि उसे लंगूर के पेट से दो बड़ी रक्त नलियों के जरिये संचार तंत्र से जोड़ा गया था। इस हृदय की धड़कन सामान्य हृदय की तरह ही थी लेकिन लंगूर का हृदय भी लगातार खून को पंप कर रहा था।ऐसी स्थिति में अक्सर ऑर्गन रिजेक्शन हो जाने का खतरा रहता है। लेकिन इस प्रयोग में सूअर के हृदय को जेनेटिकली मॉडिफाई किया गया था ताकि वह लंगूर की प्राकृतिक प्रतिरोधी प्रणाली के अनुरूप खुद को ढाल ले। वैज्ञानिकों ने सूअर के हृदय में मानवीय जेनेटिक लक्षण भी डाले थे। साथ ही लंगूर को एसी दवा दी गई थी जो रोग प्रतिरोधी प्रणाली को निष्प्रभावी कर देती है।
प्रत्‍यारोपण का सिलसिला
-17 वीं शताब्दी में पहली बार जीन बैपटिस्ट डेनिस ने जानवरों से मनुष्यों में रक्त संक्रमण का ​​अभ्यास शुरू किया।
-19वीं शताब्दी में विभिन्न प्रकार के जानवरों के त्‍वचा का मानव में प्रत्‍यारोपण किया गया। इसमें मेंढक सबसे ज्‍यादा लोकप्रिय था।
-1963-1964 में रीमेत्स्मा ने 13 रोगियों में चिम्पांजी के गुर्दे को ट्रांसप्लांट किया था। इसमें अधिकतर मरीजों की मौत चार से छह सप्‍ताह के अंदर हो गई। एक मरीज अपने काम पर लौटा लेकिन नौ माह बाद उसकी भी मौत हो गई।
-1964 में हार्डी द्वारा एक चिम्पांजी के दिल को इंसान में प्रत्‍यारोपण किया गया। लेकिन यह असफल रहा, दो घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई।
-स्टारज़ल ने 1966 में पहली बार चिम्पांजी के यकृत को मानव में प्रत्‍यारोपण किया। 1992 में दोबारा यकृत प्रत्यारोपण का प्रयास किया गया और मरीब 70 दिनों तक जीवित रहा।

 

 

 

नई दिल्ली। सरकार बैंकों और मोबाइल फोन कंपनियों को ग्राहकों के ईकेवाइसी के लिए आधार का विकल्प फिर से देने जा रही है। हालांकि यह अनिवार्य नहीं होगा। आधार कानून में संशोधन कर सरकार ग्राहकों के लिए इन सेवाओं में आधार का इस्तेमाल वैकल्पिक कर रही है। अर्थात यदि ग्राहक चाहे तो वह बैंकों और मोबाइल सिम के ईकेवाइसी के लिए आधार का इस्तेमाल कर सकता है।सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इस आशय के एक प्रस्ताव पर सोमवार को मुहर लगा दी। सरकार औपचारिक तौर पर इसकी घोषणा संसद में करेगी। सरकार अब इस आशय का विधेयक संसद के मौजूदा सत्र में ही पेश कर सकती है।प्रस्ताव के मुताबिक इसके लिए प्रिवेन्शन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) और टेलीग्राफ एक्ट में भी संशोधन करेगी। संशोधन के बाद पीएमएलए के तहत आधार को वैध दस्तावेज की मान्यता मिल जाएगी। दैनिक जागरण ने 29 नवंबर को इस आशय का समाचार प्रकाशित किया था कि सरकार कानून में संशोधन के जरिए यह सुविधा प्रदान करने जा रही है।संसद से कानून बन जाने के बाद लोगों के पास बैंक खातों और मोबाइल सिम खरीदने के लिए आधार के इस्तेमाल का विकल्प भी होगा। इसी साल 26 सितंबर को आधार की अनिवार्यता के मसले पर ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी से मिलने वाली विभिन्न सब्सिडी और छात्रवृत्तियों को छोड़कर बाकी चीजों के लिए आधार की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी।अपने फैसले में अदालत ने आधार अधिनियम की धारा 57 को ही समाप्त कर दिया था जिसके तहत केंद्र व राज्य सरकार और कंपनियों को ईकेवाइसी के लिए आधार मांगने का अधिकार मिला था।फैसले के बाद न केवल वित्त मंत्री अरुण जेटली बल्कि कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा भी था कि बैंक या मोबाइल कंपनियों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन सुनिश्चित कराने के लिए सरकार कानून में बदलाव भी करेगी। सरकार इस संशोधन को शीतकालीन सत्र में ही पारित कराना चाहती है।यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मौजूदा सरकार के लिए संसद का यही एक पूर्णकालिक सत्र बचा है। फरवरी में अंतरिम बजट प्रस्तुत करने के लिए एक लघु सत्र बुलाया जाएगा। उसके बाद मार्च-अप्रैल 2019 में आम चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप नियम बनाने के लिए यह आवश्यक है कि आधार अधिनियम में संशोधन संसद के इसी सत्र में ही करा लिया जाए।

मुंबई। मुंबई के अंधेरी स्थित ईएसआइसी कामगार अस्पताल में आग लगने से 8 लोगों की मौत हो गई है। इस हादसे में 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। आग लगने के बाद से राहत और बचाव का कार्य जारी है मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंच गई हैं और आग पर काबू करने की कोशिश की जा रही है।मुंबई के अंधेरी इलाके के ईएसआइसी कामगार अस्पताल में सोमवार शाम अचानक आग लग गई, इस दौरान वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया जिसके चलते दुर्घटना में घायल एवं अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों को निकट के आधा दर्जन अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है।दमकल विभाग को शाम चार बजे मिली सूचना के अनुसार अंधेरी उपनगर के मरोल स्थित ईएसआईसी कामगार अस्पताल की चौथी मंजिल स्थित ऑपरेशन थिएटर के सामने आग भड़की और देखते ही देखते पूरी चौथी मंजिल पर फैल गई। यह भूतल सहित छह मंजिल का अस्पताल है। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 10 गाड़ियां एवं आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंच गई। लेकिन अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों में अफरातफरी का माहौल था।
4 बजे से 7 बजे तक अस्पताल में होती है भीड़;-अस्पताल में उस समय भीड़ इसलिए भी ज्यादा थी, क्योंकि शाम को चार से सात के बीच ही भर्ती मरीजों से मिलने का समय होता है। आग से बचने के लिए कुछ लोग चौथी व पांचवीं मंजिल की खिड़की पर लटके देखे गए। उन्हें ट्रॉली एवं सीढ़ी की मदद से नीचे उतारा गया। कुछ लोगों ने हड़बड़ी में चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। जिसके चलते कुछ लोगों को फ्रैक्चर हो गया।
15 दिन पहले ही फायर ऑडिट में फेल हुआ था अस्पताल:-मुंबई के महापौर वी. महादेश्वर के अनुसार अस्पताल के फायर ऑडिट की जिम्मेदारी महाराष्ट्र उद्योग विकास निगम (एमआईडीसी) की थी। उन्होंने फायर ऑडिट किया था या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। जबकि एमआईडीसी के एक अग्निशमन अधिकारी का कहना है कि अस्पताल का फायर ऑडिट 15 दिन पहले ही हुआ था, जिसमें वह फेल हो गया था। अस्पताल के स्प्रिंकल्स और आग की सूचना देनेवाले सेंसर ठीक से काम नहीं कर रहे थे।
अब तक 8 लोगों की जान गई:-आपदा प्रबंधन टीम के अनुसार अब तक छह लोगों को जान गंवानी पड़ी है और करीब 100 लोग जख्मी हुए हैं। जख्मी हुए 19 लोगों को कूपर अस्पताल में, 39 को बालासाहब ठाकरे अस्पताल में, 40 को होली फैमिली स्पिरिट अस्पताल में, 44 को सेवन हिल्स अस्पताल में, तीन को हीरानंदानी अस्पताल में और दो को सिद्धार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इंदौर। आध्यात्मिक संत भय्यू महाराज आत्महत्या केस में पहली बार पत्नी और बेटी खुलकर सामने आई हैं। उन्होंने डीआइजी को शिकायत कर संदेही सेवादार और अन्य पर कार्रवाई की मांग की है। दोनों ने उस ड्राइवर के कोर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने की मांग की है, जो एक युवती और दो सेवादारों पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा रहा है। डीआइजी ने संदेहियों को पकड़ने के आदेश दिए हैं।
'गृह कलह के कारण नहीं की भय्यू महाराज ने आत्महत्या';-गौरतलब है कि भय्यू महाराज (उदयसिंह देशमुख) ने गत 12 जून को घर में लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। रविवार को उनकी पत्नी डॉ.आयुषी व बेटी कुहू डीआइजी हरिनारायणचारी मिश्र के पास पहुंचीं। दोनों ने कहा कि महाराज ने गृह कलह के कारण आत्महत्या नहीं की थी। उन्हें करोड़ों रुपये, फ्लैट और गाड़ी के लिए ब्लैकमेल किया जा रहा था, इसकी जांच होनी चाहिए। एमआइजी थाना पुलिस की हिरासत में बंद पूर्व ड्राइवर कैलाश पाटिल उर्फ भाऊ को षड्यंत्र की पूरी जानकारी है। उसने सेवादार विनायक, शरद देशमुख और युवती द्वारा रची साजिश के बारे में भी बयान दिए हैं। कैलाश द्वारा दिए बयान कोर्ट के समक्ष धारा 164 में दर्ज करवाना चाहिए।
आखिर धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने की मांग क्यों?:-गौरतलब है कि पुलिस के सामने दिए बयान से लोग अक्सर कोर्ट में मुकर जाते हैं, जबकि धारा 164 में कोर्ट के समक्ष दिए बयान से मुकरना आसान नहीं होता। बयान बदलने पर सजा हो सकती है। डीआइजी के मुताबिक, सीएसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सीएसपी ने संदेहियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब करना शुरू कर दिया है।
राज दबाने के लिए सुनाई 'कलह कथा';-भय्यू महाराज की मौत के बाद सेवादार व परिचितों ने साजिश के तहत यह खबर उड़ाई कि महाराज पत्नी और बेटी के बीच चल रही लड़ाई में उलझ गए थे। दोनों एक-दूसरे पर प्रताड़ना का आरोप लगा रही हैं। उन्होंने इसी तनाव में आत्महत्या की है। यह पहला मौका है जब पत्नी और बेटी एकजुट हुई और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर शिकायत दर्ज करवाई।
चुपके से महाराज की पत्नी को कार दे गया भाजयुमो नेता:-भय्यू महाराज के ट्रस्ट के नाम रजिस्टर्ड कार को भाजयुमो नेता मयूरेश पिंगले ने सोमवार शाम उनकी पत्नी डॉ.आयुषी को लौटा दिया। कार्रवाई के डर से वह चुपके से घर पहुंचा और चाबी देकर लौट गया। इस मामले के सामने आने के बाद खुद परिवहन आयुक्त ने जांच बैठाई है। पिंगले पर आरोप है कि उसने महाराज की मौत के 10 दिन बाद कार को गलत तरीके से खुद की कंपनी के नाम ट्रांसफर करवा लिया था। पिंगले ने आरटीओ में प्रस्तुत किए दस्तावेजों में भी हेराफेरी की थी।
ब्लैकमेलिंग में खास सेवादार थे शामिल;-पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार कैलाश पाटिल उर्फ भाऊ (ड्राइवर) ने बताया कि महाराज की मौत सामान्य आत्महत्या नहीं, बल्कि उन्हें गोली मारने के लिए मजबूर किया गया था। इसमें मुख्य किरदार फूटी कोठी क्षेत्र में रहने वाली युवती थी, जो महाराज की देखभाल करने के लिए लगी थी। उसने महाराज से प्रेम संबंध स्थापित कर अश्लील वीडियो बना लिया था। डॉ. आयुषी से शादी के बाद इस लड़की का आना-जाना बंद हो गया। उसने वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी और महाराज से हर महीने डेढ़ लाख रुपये लेने शुरू कर दिए। ब्लैकमेलिंग में खास सेवादार विनायक दुधाले और शेखर भी शामिल थे। विनायक ही लड़की को रुपये देने जाता था। कई बार उसके फोन से ही बातचीत होती थी। पुलिस विनायक और शेखर की तलाश में जुट गई है।जानकारी मिली है कि वह महाराष्ट्र में छुपा है और उसने एक क्रिश्चियन युवती से शादी कर ली है। जांच में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, ब्लैकमेल करने वाली लड़की के गोपनीय नंबर मिले हैं। उसकी कॉल डिटेल निकाली जा रही है

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