काबुल। तालिबान ने अफगानिस्‍तान के हेरात शहर में पूर्व मुजाहिद्दीन कमांडर मोहम्‍मद इस्‍माइल खान को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। हेरात शहर पर अब तालिबान का कब्‍जा हो चुका है। आपको बता दें कि मोहम्‍मद इस्‍माइल खान हेरात के शेर (Lion of Herat) के नाम से जाने जाते हैं। उन्‍होंने अपने लड़ाकों को अफगान सेना के साथ मिलकर लड़ने का आदेश दिया था, जिसके बाद हजारों की तादाद में उनके समर्थक तालिबान से विभिन्‍न इलाकों में लोहा ले रहे हैं। इस्‍माइल खान के अफगान सेना के साथ मिलकर अपने लड़ाकों को तैनात करने पर पाकिस्‍तान ने कड़ी नाराजगी भी जताई थी। पाकिस्‍तान का कहना था कि इससे हालात और अधिक खराब हो जाएंगे। तालिबान के प्रवक्‍ता जबीहुल्‍लाह मुजाहिद ने इस बात की पुष्टि की है कि इस्‍माइल खान उनकी गिरफ्त में है।आपको ये भी बता दें कि इस्‍माइल खान ने अमेरिकी सेना के साथ मिलकर तालिबान को एक इलाके तक सीमित करने में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। इस्‍माइल खान का तालिबान की हिरासत में आना उनके समर्थकों के लिए मायूस करने वाला हो सकता है। उनके तालिबान के कब्‍जे में आने के बाद इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति है कि आखिर तालिबान उनके साथ कैसे सुलूक करेगा। बता दें कि पिछले माह अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रपति अशरफ गनी ने भी हेरात के दौरे पर इस्‍माइल खान से मुलाकात की थी। तालिबान लड़ाकों ने उनके अलावा हेरात प्रांत के गवर्नर और दूसरे सुरक्षाकर्मियों को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इसकी जानकारी प्रांतीय काउंसिल के सदस्‍य गुलाम हबीब हाशिमी ने रायटर्स को दी है। हाशिमी ने कहा है कि तालिबान ने विश्‍वास दिलाया है कि उनके सामने आत्‍मसमर्पण करने वाले किसी भी सरकारी अधिकारी को वो कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।गौरतलब है कि इस्‍माइल खान ने 1980 में सोवियत संघ के खिलाफ भी अफगानिस्‍तान में जंग की थी। उस वक्‍त वो नॉर्दन एलांइस के एक अहम सदस्‍य थे। इसके बाद वर्ष 2001 में अफगानिस्‍तान में अमेरिका के आने के बाद इस्‍माइल खान के लड़ाकों ने तालिबान को बाहर करने में पूरी ताकत झोंक दी थी। इस्‍माइल का तालिबान के कब्‍जे में होना न सिर्फ अफगान सेना बल्कि अमेरिका के लिए भी बुरी खबर है।

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