इस्लामाबाद। भारत से कपास के आयात के फैसले पर इमरान सरकार के यू टर्न लेने से देश के टेक्सटाइल सेक्टर में निराशा है, लेकिन प्रधानमंत्री इमरान खानअपनी जिद्द पर अड़े हैं। वे अपनी भारत विरोधी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। टेक्सटाइल जगत से जुड़े अधिकांश उद्यमियों का कहना है कि पड़ोसी देश से कपास का आयात वक्त की जरूरत है। वहीं इमरान खान कह रहे हैं कि मौजूदा हालात में भारत से व्यापार नहीं हो सकता। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने मंत्रिमंडल के प्रमुख सदस्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद फैसला किया है कि पड़ोसी देश  के साथ किसी भी कारोबार को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने विचार-विमर्श के बाद वाणिज्य मंत्रालय और अपनी वित्तीय टीम को वैकल्पिक सस्ते स्रोत और जरूरी वस्तुओं का आयात कर संबंधित क्षेत्र को  मदद के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक समन्वय समिति (ECC) के समक्ष कई प्रस्ताव पेश किए गए हैं. जो आर्थिक और वाणिज्यिक दृष्टिकोण से इन सुझावों पर विचार करता है। इसीसी द्वारा विचार करने के बाद, इसके निर्णय को मंजूरी और अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट के समक्ष पेश किया गया। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा मामले में इसीसी ने घरेलू जरूरतों के मद्देनजर  भारत से कपास और चीनी के आयात के लिए स्वीकृति दी थी।भारत से चीनी और कपास के आयात की अनुमति देने के ईसीसी के फैसले के मद्देनजर इमरान खान ने शुक्रवार को अपने मंत्रिमंडल के प्रमुख सदस्यों के साथ बैठक की थी और फैसला किया कि पाकिस्तान मौजूदा परिस्थितियों में भारत के साथ किसी भी व्यापार के साथ आगे नहीं बढ़ सकता है।बता दें कि इमरान सरकार ने 24 घंटे के अंदर ही भारत से कपास और चीनी आयात करने के अपने फैसले को वापस ले लिया था। इसके बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने  जब तक भारत सरकार जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के अपने 2019 के फैसले को नहीं बदलती है, वह इस कारोबार को बहाल नहीं करेंगे। कुरैशी ने कहा कि यह छवि बनाने की कोशिश की जा रही है कि भारत के साथ रिश्ते सामान्य हो गए हैं और व्यापार बहाल हो गया, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। भारत और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंध 2016 में हुए पठानकोट एयरफोर्स बेस आतंकी हमले के बाद से ही बिगड़े हुए हैं। 

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