टोक्यो। चीन और जापान के बीच सेनकाकू द्वीप पर चला आ रहा गतिरोध बरकरार है। इसे लेकर दोनों देशों के बीच व‍िवाद काफी पुराना है। इस द्वीप को लेकर एक बार फ‍िर दोनों देशों के नेता वार्ता कर रहे हैं। बता दें कि हाल ही में जापान के स्‍थानीय परिषद में चीन और ताइवान के साथ विवादित सेनकाकू द्वीप क्षेत्र में स्थित कुछद्वीपों की प्रशासनिक स्थिति बदलने वाले विधेयक को मंजूरी दी थी। इस विधेयक के अनुसार टोक्‍यो द्वारा नियंत्रित  सेनकाकू द्वीप जिसे जापान में टोनोशीरो तथा ताइवान और जापान में दियोयस के नाम से जाना जाता है, का नाम बदलकर टोनोशीरो सेनकाकू कर दिया गया है।गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ दो दिवसीय यात्रा पर जापान पहुंचे हैं और प्रमख रूप से सेनकाकू द्वीप के विवाद और घुसपैठ के मुद्दे पर ही दोनों पक्षों के बीच वार्ता हो रही है। जापान ने चीन से सख्त आपत्ति जताई है कि वह निरंतर उसके क्षेत्र के द्वीपों पर घुसपैठ करने का प्रयास कर रहा है। दोनों ही पक्ष सहमत हैं कि वे भड़काने वाली गतिविधियों से परहेज करेंगे। ज्ञात हो कि पूर्वी चीन सागर के सेनकाकू द्वीप पर निरंतर चीन घुसपैठ के प्रयास करता रहा है, वह इसको अपना डियाओयू द्वीप बताता है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है। केटो ने बताया कि इस साल चीन 306 बार घुसपैठ का प्रयास कर चुका है। हमने यहां आए चीन के विदेश मंत्री वांग यी से अपना विरोध जता दिया है।सेनकाकू द्वीप एक निर्जन द्वीप समूहों का हिस्‍सा है। यह पूर्वी चीन सागर में स्थित है। चीन ड‍ियाओयू द्वीप  तथा उससे संबद्ध क्षेत्र को अपनी सीमा में स्थित मानता है। चीन के अनुसार जापान द्वारा क्षेत्र की प्रशासनिक स्थिति में किया गया बदलाव चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्‍लंघन करता है। चीन ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए दृढ़ है। इतना ही नहीं चीन ने इन द्वीपों के आस-पास के क्षेत्र में जहाजों के बड़े भी तैनात कर रखे हैं। उधर, ताइवान का दावा है कि डियाओयू द्वीपीय क्षेत्र उसका हिस्‍सा है। उसने कहा इसमें किसी भी तरह के बदलाव अमान्‍य होंगे। उधर, वर्ष 2014 में अमेरिका ने यह स्पष्ट किया था जापान की सुरक्षा के लिए की गई अमेरिका-जापान सुरक्षा संधि विवादित द्वीपों को भी कवर करती है। अत: सेनकाकू द्वीप विवाद में अमेरिका भी शामिल हो सकता है।

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