नई दिल्ली। सऊदी अरब में अरामको ऑयल प्लांट पर हमले की शुरुआत सद्दाम हुसैन ने की थी, उसके बाद शनिवार को जो हमला हुआ वो अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। जिस तरह से एक बार फिर से ऑयल प्लांट पर ड्रोन से हमला किया गया है, उसके बाद इन ऑयल प्लांट की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे पहले भी सऊदी अरब में ऑयल पाइप लाइन को निशाना बनाया जा चुका है।इस प्लांट पर हमले के लिए अक्सर ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसकी जिम्मेदारी येमेन के क्रांतिकारी लेते रहे हैं। इतना ही नहीं पिछले महीने तेल कंपनी अरामको के प्राकृतिक गैस के सेंटर पर भी हमला हुआ था, यह हमला भी हूती संगठन ने ही किया था। सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको पर आतंकवादी निशाना पहले भी बनाते रहे हैं। 2006 में इस कंपनी पर अलकायदा ने आत्मघाती हमला करने की कोशिश की थी जिसे नाकाम कर दिया गया था।
फिर किया गया ड्रोन का इस्तेमाल;-सऊदी अरब के सबसे बड़े ऑयल फील्ड अरामको पर शनिवार को ड्रोन से हमला किया गया, इसकी पुष्टि यहां के गृह मंत्रालय की ओर से भी की गई थी। हमले के बाद यहां पर आग लग गई थी। इस ड्रोन हमले से अब्कैक और खुरैस इलाके में स्थित तेल संयंत्रों पर असर पड़ा, वहां पर काम होना बंद हो गया है। बताया जा रहा है कि हमले में लगभग 10 ड्रोन इस्तेमाल किए गए। इससे पहले भी इन प्लांटों पर इसी तरह से ड्रोन से हमले किए गए मगर वो बहुत अधिक नुकसान नहीं पहुंचा पाए थे मगर इस बार के हमले ने काफी नुकसान पहुंचाया है।
दूसरा सबसे बड़ा हमला;-बता दें कि सऊदी अरब में ऑयल प्लांट पर सद्दाम हुसैन के हमले के बाद अब तक का सबसे बड़ा हमला है। इससे पहले गल्फ युद्ध के दौरान इराक ने सऊदी अरब पर बड़ा हमला किया था लेकिन जिस तरह से एक बार फिर से ऑयल प्लांट पर ड्रोन से हमला किया गया है। उसके बाद इन ऑयल प्लांट की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया है। इससे पहले भी सऊदी अरब में ऑयल पाइपलाइन को निशाना बनाया जा चुका है। अक्सर इस पर हमले के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसकी जिम्मेदारी येमेन के क्रांतिकारी लेते रहे हैं।
प्लांट पर रोजाना होती है 10 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चे तेल की प्रोसेसिंग;-सऊदी अरब के इस प्लांट पर 10 मिलियन बैरल से भी ज्यादा कच्चे तेल की प्रोसेसिंग रोजाना होती है। लेकिन इस ड्रोन हमले के बाद यहां प्रोसेसिंग को काफी कम कर दिया गया है। इस ड्रोन हमले के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन बड़ी परेशानी यह है कि अगर इस प्लांट में दोबारा प्रोसेसिंग प्रक्रिया पूर्व की रफ्तार से करने में देरी हुई तो वैकल्पिक स्रोत की तलाश करनी पड़ेगी प्लांट में प्रोसेसिंग प्रभावित होने से सऊदी अरब में ऑयल प्रोसेसिंग लगभग आधी हो गई है। गौरतलब है कि सऊदी अरब ग्लोबल मार्केट में 6 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई करता है। पिछले वर्ष 16 फीसदी कच्चा तेल भारत ने सऊदी अरब से आयात किया था।
शनिवार तड़के किया गया ड्रोन से हमला:-दरअसल रात के तीसरे पहर में हर कोई नींद के आगोश में होता है। ये वो समय होता है जब नींद की झपकी आती ही है, कोई कितना भी कहें कि उसको रात में नींद नहीं आएगी मगर ये वो समय होता है जब कुछ समय के लिए आंखें बंद होती ही है। हमला करने वालों ने भी हमला करने के लिए यही समय चुना जिससे वो यहां सुरक्षा में तैनात लोगों की निगाहों से बच सके और अपने मकसद में कामयाब हो जाएं। ड्रोन से हमला करने वालों की प्लानिंग कामयाब रही। इस प्लांट पर ये हमला भी सुबह 3 से 4 के बीच किया गया जिसकी वजह से सुरक्षा में तैनात कर्मचारी इसको नाकाम नहीं कर पाए और आग लग गई।
कुछ देशों से बढ़ सकता है तनाव:-इस हमले के बाद सऊदी अरब की तेल कंपनी और उसके समझौते को लेकर कुछ देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, अरामको सऊदी अरब की राष्ट्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कंपनी है और राजस्व के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी है। पिछले कुछ महीनों में हूती विद्रोही संगठन ने सऊदी अरब के कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों से कई बार हमला किया है। 1200 किलोमीटर की इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में मुख्य तेल क्षेत्र से पश्चिम में लाल सागर के किनारे बसे शहर यानबू तक कच्चे तेल को भेजा जाता है। हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुसलाम ने ट्विटर पर लिखा कि यमन के लोगों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई के जवाब में हमले किए गए हैं।

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