नई दिल्ली:-सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के दो प्लाटों पर हुए हमले के बाद कंपनी को 100 अरब डॉलर मिलने पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। दरअसल तीन साल 2016 में सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 2016 में कहा था कि वो कंपनी का पांच फीसदी हिस्सा शेयर बाजार में लाना चाहते हैं, जिससे उनको उम्मीद थी कि शेयर बाजार से कंपनी को कम से कम 100 अरब डॉलर मिलेंगे।
अंतरराष्ट्रीय मार्केट में शेयर लाने की थी योजना;-कंपनी 2020-21 तक आईपीओ के जरिए पहले सऊदी शेयर मार्केट में अपने शेयर लाने वाली थी, इसके लिए बैंकों से बातचीत भी चल रही थी, सऊदी मार्केट में शेयर लाने के बाद कंपनी की ओर से अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी शेयर लाने की योजना थी, मगर इस हमले की वजह से अब कंपनी की शेयर मार्केट में उतरने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। मालूम हो कि अरामको कंपनी का मूल्य लगभग 20 खरब रुपये है।
दो बड़े ठिकानों पर ड्रोन से किया गया हमला;-शनिवार की सुबह इस कंपनी के दो बड़े ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया गया। इस हमले के बाद कंपनी ने वहां उत्पादन ठप कर दिया है। इसकी वजह से इस सबसे बड़ी तेल व गैस कंपनी के उत्पादन में 50 फीसद तक की कमी आई है। फिलहाल इस प्लांट पर हुए ड्रोन हमलों की वजह से 57 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जो कंपनी के कुल उत्पादन का लगभग आधा है। इसका असर भारत समेत दुनिया के अन्य देशों पर देखने को मिल सकता है।
अमरीका ने ठहराया ईरान को ज़िम्मेदार;-अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने शनिवार को सऊदी अरब के दो तेल ठिकानों पर हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था, उन्होंने इसके लिए ट्वीट भी किया और कहा था कि एक तरफ हसन रूहानी और जावेद ज़रीफ़ (ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री) कूटनीति की बात कर रह हैं और दूसरी तरफ सऊदी अरब पर होने वाले करीब 100 हमलों के लिए ईरान जिम्मेदार है। ईरान ने अब दुनिया की तेल आपूर्ति पर हमला शुरु कर दिया है। इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि हमला यमन की जमीन से हुआ था।
सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव;-दूसरी ओर सऊदी अरब और ईरान के बीच सालों से प्रभुत्व को लेकर तनाव जारी है, ये दोनों ताकतवर देश इस इलाके में अपना प्रभुत्व चाहते हैं। एक तरफ जहां ईरान में शिया मुसलमान अधिक हैं, सऊदी अरब में सुन्नी मुसलमाानों की संख्या अधिक है और सालों से इस्लाम के इन दो पंथों को मानने वालों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल संसाधनों का भी मालिक है उसे इसका भी डर है कि ईरान का प्रभुत्व बढ़ा तो शियाओं का प्रभाव बढ़ेगा और इस इलाके में ईरान का सैन्य प्रभुत्व रोकने की सऊदी पूरी कोशिश कर रहा है।
कंपनी की सुरक्षा पर उठी उंगलियां:-सबसे बड़ी कंपनी के दो प्लांटों पर हुए ड्रोन हमले के बाद प्लांट की सुरक्षा कमजोरियों को सामने ला दिया है। दरअसल कुछ दिनों के बाद कंपनी शेयर मार्केट में अपना शेयर लाने की सोच रही थी, ऐसे में कंपनी के प्लांट पर इस तरह से ड्रोन हमला करके नुकसान पहुंच जाने से बाजार से मिलने वाले रिस्पांस पर भी असर पड़ेगा। निवेशक तमाम चीजों की सुरक्षा आदि को देखने के बाद ही किसी कंपनी में निवेश करते हैं, ऐसे में यदि इस कंपनी पर ड्रोन से हमला करके उसे नुकसान पहुंचा दिया गया है तो वो एकबारगी तो इसमें निवेश करने से पहले सोचेगा जरुर। इस हमले का असर पड़ना तो तय है।
यमन पर लग रहे आरोप:-यमन में ईरान से जुड़े हूती ग्रुप के एक प्रवक्ता ने एक विदेशी अखबार के प्रतिनिधि को बताया कि उनकी ओर से इस हमले के लिए 10 ड्रोन भेजे गए थे। सैन्य प्रवक्ता याह्या सारए ने अल-मसिरह टीवी से कहा कि सऊदी पर भविष्य में ऐसे हमले और हो सकते हैं। याह्या ने कहा कि यह हमला बड़े हमलों में से एक है जिसे हूती बलों ने सऊदी अरब के भीतर अंजाम दिया, इस हमले में सऊदी शासन के भीतर के प्रतिष्ठित लोगों की मदद मिली है। अमरीका ने हूती विद्रोहियों के इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि ये हमला ईरान ने किया है लेकिन ईरान ने इसे 'बेतुका आरोप' बताया है।उधर ये भी कहा जा रहा है यमन से हमला हुआ हो लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो ये सऊदी के लिए बुरी खबर है क्योंकि वो यमन में हो रही घटनाओं पर नजर रख रहा है, इसके बावजूद वो अपने हवाई क्षेत्र में आने वाले ड्रोन को पहले रोक नहीं सका। ये अपने आप में एक गंभीर बात है।

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