वाशिंगटन। अमेरिकी संसद में हर साल सभी देशों को 7 फीसद ग्रीन कार्ड जारी करने की सीमा खत्म करने वाले विधेयक पर मंगलवार को वोटिंग होगी। बता दें कि अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने वाला यहां स्‍थायी रूप से रह सकता है और काम कर सकता है।इससे हजारों भारतीय आइटी पेशेवरों को लाभ मिलेगा। ये यहां H-1B वर्क वीजा पर ही आते हैं। रिपब्लिकन व डेमोक्रेटिक पार्टी के 310 से अधिक सांसद इस विधेयक के समर्थन में हैं।अमेरिका के आव्रजन संबंधी नियमों ने वहां उच्च दक्षता वाले भारतीय पेशेवरों के सामने दिक्कत खड़ी कर दी है। नियमों के अनुसार एच-1 बी वीजा से अमेरिका पहुंचे इन पेशेवरों में से केवल सात फीसद को ही ग्रीन कार्ड मिल सकता है। अमेरिकी कांग्रेस की स्वतंत्र शोध सेवा (सीआरएस) ने कहा है कि अगर प्रत्येक देश के दक्ष पेशेवरों को ग्रीन कार्ड में मिलने वाला सात फीसद का कोटा खत्म हो जाए तो उससे भारत और चीन के लोगों को ही नहीं अमेरिका को भी लाभ होगा।बता दें कि देश के हिसाब से ग्रीन कार्ड की संख्या सीमित होने से भारत और चीन के नागरिकों को औसतन कम नागरिकता मिल पाती है। वहीं दूसरे देशों के नागरिकों को आसानी से अमेरिका की स्थायी नागरिकता मिल जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह कानून बन जाता है तो भारतीयों को ग्रीन कार्ड के साथ-साथ H-1B वीजा भी अधिक मिलेगा। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2018 तक ही अमेरिका के टेक्नोलॉजी क्षेत्र में 3 लाख भारतीय ऐसे हैं, जो ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।हाल के अध्‍ययनों के अनुसार, H-1B वीजा वाले भारतीय आइटी पेशेवरों का इंतजार 70 सालों से भी अधिक है।

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