इस्लामाबाद। पाकिस्तान के क्वेटा में बसा शिया हजारा समुदाय लंबे समय से आतंकी हमलों से परेशान हैं। चारों ओर से सशस्त्र चौकियों से घिरे होने के बावजूद यहां लगातार आतंकी हमले होते रहते हैं। पिछले महीने ही यहां हुए एक बम ब्लास्ट ने 21 लोगों की जान ले ली थी, जिनमें 47 लोग घायल हो गए थे। शिया हजारा एक अल्पसंख्यक समुदाय है, जिसकी सबसे ज्यादा आबादी क्वेटा में ही रहती है। अब तक यहां कई सौ लोगों की मौत हो चुकी है। यहां रहने वाले हजारा एक्टिविस्ट बोस्टन अली ने बताया कि यहां के लोग मानसिक रूप से भी प्रताड़ना झेल रहे है। ये लोग हमलों के ड़र से शहर में कहीं आते-जाते नहीं हैं। यहां लोग हमलों की वजह से दहशत में जी रहे हैं। हालांकि क्वेटा में सेनाओं की तरफ से आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन भी चलाए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां हमलों में कोई कमी नहीं आई है। पाकिस्तानी पैरामिलिट्री फोर्सेस आत्मघाती हमलों को रोकने में भी नाकाम ही रही है। 2013 में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और क्षेत्र में इसके सहयोगी समूह लश्कर-ए-जहांगवी द्वारा किए गए हमले में 200 लोगों की मौत हो गई थी।अधिकारियों के मुताबिक यहां पिछले पांच सालों में 500 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं जबकि 627 लोग आतंकी हमलों में घायल हो चुके हैं। एक स्थानीय पुलिस अधिकारी रज्जाक चीमा ने बताया कि पिछले छह सालों से समुदाय की सुरक्षा में लगे कई पुलिस अधिकारी अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई आतंकियों को हम गिरफ्तार कर चुके हैं और कई को उनके नापाक इरादों के चलते मार दिया गया है।उन्होंने बताया कि और भी कई समूह अब उभरने लगे हैं लेकिन हम उनको ट्रैक करके उनकी योजनाओं को विफल करने की कोशिश कर रहे हैं। इन हमलों को रोकने के लिए बजारों में सीसीटीवी कैमरे और बैरियर्स लगाने की भी योजना है। पाकिस्तान के दैनिक अखबार डॉन में प्रोफेसर और एक्टिविस्ट मुहम्मद अमान ने हजारा समुदाय पर एक लेख लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा कि अगर हर तीन किलोमीटर की दूरी पर मौजूद सुरक्षाबलों की चोकियां इन्हें रोकने में विफल हैं तो क्या सीसीटीवी कैमरा और बैरियर्स कुछ कर पाएंगे। हजारा समुदाय मध्य अफगानिस्तान में पाया जाता है, यहां इनकी आबादी को लेकर विवाद है। ये लोग शिया होते हों और हजारगी उपभाषा बोलते हैं। अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के दौरान हजारा लोगों पर कई जुल्म ढाए गए थे। जिसके बाद ये लोग काफी बड़ी संख्या में पाकिस्तान में आकर बस गए थे, ये यहां ज्यादातर क्वेटा में बसे हैं।

 

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