नई दिल्ली। जैश सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आंतकी घोषित किए जाने पर चीन ने एक बार फिर अपनी उलटी चाल चली है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने एक बार फिर पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवाद का साथ दिया है। चीन द्वारा चौथी बार वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर मसूद अजहर को संरक्षण दिया गया। चीन में रहे पूर्व भारतीय राजदूत गौतम बंबावले ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, 'हम निराश हैं कि चीन ने एक बार फिर यूएनएससी में 1267 प्रतिबंधों के तहत चौथी बार मसूद अजहर की सूची को रोक दिया है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि चीन इसलिए ऐसा कर रहा है, क्योंकि उसने कहा है कि उसे मसूद अजहर के बारे में पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं।'इसके साथ ही बंबावले ने कहा कि, 'हमने मसूद अजहर के खिलाफ सारे आतंकी गतिविधियों के सबूत दिए इसके बावजूद चीन मसूद अजहर को बचाने में लगा हुआ है। जबकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ्रांस, यूके, यूएसए ने मसूद अजहर को आंतकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया है, लेकिन चीन ने आतंकवाद को लेकर अपना रूख साफ कर दिया है, कि वो किसके साथ है।'बता दें कि चीन ने पिछले 10 साल में चौथी बार मसूद को लेकर अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल किया है। इससे पहले साल 2009 में भारत ने मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया था और दुनियाभर के देशों ने भारत के प्रस्ताव का समर्थन किया था, लेकिन चीन ने वीटो कर दिया। इसके बाद 2016 में अमेरिका, ब्रिटेन व फ्रांस के साथ भारत ने प्रस्ताव रखा था और चीन ने वीटो कर दिया। साल 2017 में अमेरिका, ब्रिटेन व फ्रांस ने प्रस्ताव रखा था, लेकिन चीन इस बार भी नहीं माना

 

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