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नई दिल्‍ली। उत्‍तर पूर्व का एक राज्‍य मेघालय अपनी खूबसूरती के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां का एक बड़ा हिस्‍सा वन से भरा हुआ है। ऐसे ही जंगल से घिरा एक गांव है कोंगथोंग। यहां की सबसे खास बात ये है कि यहां के जंगल में दिन में भी अजीबो-गरीब आवाजें आती रहती हैं। यह आवाज न तो किसी जंगली जानवर ही हैं न ही किसी पक्षी की। मेघालय के सुदूर इस इलाके में बाहर से आने वालों के लिए यह किसी पहेली से कम नहीं है। लेकिन इस पहेली की बड़ी दिलचस्‍प कहानी भी है। इसी कारण इस गांव को व्हिसलिंग विलेज भी कहा जाता है।
सच जानकर होगी हैरानी:-आपको इन आवाजों के पीछे सुनकर हैरानी जरूर होगी। दरअसल, यहां के जंगल में गूंजने वाली आवाजों के पीछे वह राज है जिसपर आप शायद यकीन भी न करें। आपको बता दें कि यहां पर रहने वाले स्‍थानीय लोग इस तरह की अजीबो-गरीब आवाज का इस्‍तेमाल दूर मौजूद अपने किसी भी साथी, परिजन आदि से बात करने के लिए करते हैं। यह सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन यही सच है। कोंगथोंग में रहने वाले लगभग हर व्‍यक्ति को इस तरह की भाषा का ज्ञान है। यह अपनों से इसी भाषा में बात भी करते हैं। यह आवाजें किसी पक्षी की तरह नहीं होती हैं बल्कि यह सुनने में एक धुन या सीटी की तरह लगती हैं। इन आवाजों के पीछे की वजह भी बेहद दिलचस्‍प है। दरअसल, इस तरह की आवाजें ज्‍यादा तेजी और ज्‍यादा दूर तक जाती हैं। इसकी दूसरी वजह ये भी है कि सबसे अलग होने की वजह से यह आसानी से इनके परिजन या जानने वाले पहचान लेते हैं और फिर उसी भाषा में जवाब भी देते हैं।
जंगल में पूरे दिन गूंजती हैं आवाजें:-मेघालय के इस गांव कोंगथोंग के जंगल में इस तरह की आवाजें लगभग पूरे दिन ही गूंजती रहती हैं। यहां के लोगों की यह म्‍यूजिकल लैंग्‍वेज भले ही आपको न समझ में आए और आपको ये आवाजें किसी पक्षी की लगें, लेकिन यहां के स्‍थानीय लोग इस भाषा को बखूबी पहचानते हैं। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती रही हैं। इसकी जिम्‍मेदारी खासतौर पर यहां के बुजुर्ग और परिवार का मुखिया उठाता है। मौजूदा समय में यह यहां की संस्‍कृति का हिस्‍सा भी है। यह यहां की फिजाओं में दिखाई देता है। यहां की एक मजेदार बात यह भी है कि यह भाषा यहां के ही लोगों की बनाई गई है। आपको बता दें कि इस गांव में खासी जनजाति के लोग रहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह एक दूसरे के नाम को भी इसी भाषा में लेते हैं। यहां कर नाम को पुकारकर किसी को बुलाना यदा-कदा ही होता है। यहां की प्रमुख सड़क पर पैदल गुजरने के बाद इसका अहसास बखूबी हो भी जाता है।
दिल से निकलती है आवाज:-तीन बच्‍चों की मां पेनडाप्लिन शबोंग यहां की स्‍थानीय निवासी हैं। वह बताती हैं कि जब कभी भी उन्‍हें अपने बच्‍चों को जंगल से बुलाना होता है या उनकी खैर-खबर लेनी होती है तो वह इसी भाषा का इस्‍तेमाल करती हैं। यह आवाज सही मायने में उनके दिल से निकलती है। उनके बच्‍चे भी उन्‍हें इसी भाषा में जवाब देते हैं। यहां कम्‍युनिटी लीडर रोथेल खोंगसित बताते हैं कि यह भाषा उनके बच्‍चों के प्रति उनके प्‍यार को दर्शाता है। उनके मुताबिक जब उनका कोई बच्‍चा गलती करता है तो गुस्‍से में जरूर उनके नाम से उन्‍हें आवाज लगाई जाती है। इसके अलावा बच्‍चों को बुलाने के लिए भी भी अजीबो-गरीब धुन का इस्‍तेमाल करते हैं।
प्रकृति के करीब हैं ये लोग:-लकड़ी के बने खूबसूरत घर प्रकृति के काफी करीब दिखाई देते हैं। यह हिस्‍सा काफी समय तक अलग-थलग रहा था। वर्ष 2000 में यहां पर पहली बार बिजली आई और वर्ष 2013 में पक्की सड़क बनी। जंगल में उगने वाली ब्रूम ग्रास यहां की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। काम की तलाश में यहां के काफी लोग गांव के बाहर रहते हैं। यहां के लोग जो आवाज निकालते हैं उसकी अ‍वधि लगभग तीस सेकेंड की होती है। घने जंगल के बीच बसे कोंगथोंग गांव के लोग अपने को प्रकृति के काफी करीब मानते हैं। वह यहां के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हैं। जिस भाषा का वह एक दूसरे को बुलाने के लिए इस्‍तेमाल करते हैं उसको यहां जिंगरवई लाबेई कहते हैं। इसका अर्थ उनके कबीले की पहली महिला का गीत, जिसे वह पौराणिक तौर पर अपनी मां मानते हैं।
महिलाओं को मानते हैं देवी:-इस गांव की हर चीज निराली है। यहां पर समाज पितृात्‍मक न होकर मातृात्‍मक है। यही वजह है कि यहां पर जमीन-जायदाद भी मां से बेटी को जाती है। यहां पर महिला को परिवार के मुखिया का दर्जा दिया जाता है। मां को ही यहां पर सर्वोच्‍च स्‍थान प्राप्‍त है। यहां के लोगों का मानना है कि मां ही बच्‍चों समेत पूरे परिवार का जिम्‍मा संभालती है, इसलिए उससे बड़ा कोई और नहीं हो सकता है। इसलिए महिला को यहां पर परिवार की देवी के रूप में मान्‍यता है। लेकिन इसके बाद भी महिला को यहां पर किसी तरह का फैसला लेने का हक नहीं है। वह राजनीति में शामिल नहीं हो सकती है।
ऐसे बनती है खास आवाज:-जानकारी के अनुसार इस गांव में 100 से ज्यादा परिवार हैं जिनके सदस्यों के नाम अलग-अलग धुन के हिसाब से रखे गए हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस गांव के लोग इस खास घुन को बनाने के लिए प्रकृति का सहारा लेते हैं। यानी पक्षियों की आवाज से नई-नई धुनों का निर्माण। यह गांव पहाड़ियों और जंगलों से घिरा है, जहां विभिन्न प्रकार के पक्षी निवास करते हैं, नईं धुन बनाने के लिए परिवार के सदस्यों को जंगल का भ्रमण करना होता है। जिसके बाद में किसी अलग धुन का निर्माण करते हैं। धुन बनाने का तरीका पूरी तरह से अलग है, जो शायद आपको कहीं ओर दिखाई देगा।
सभी की जिम्‍मेदारी बंंटी हुई:-महिलाओं और पुरुषों के लिए यहां के नियम बेहद साफ हैं। बच्‍चों और परिवार की देखभाल करना महिलाओं की जिम्‍मेदारी है, इसके अलावा दूसरे कामों का जिम्‍मा पुरुष संभालते हैं। एक तरफ जहां पर लोग अपने को मॉर्डन वर्ल्‍ड के नाम पर मोबाइल समेत दूसरी चीजों में काफी उलझा चुके हैं वहां पर ये गांव अपनी सभ्‍यता और संस्‍कृति को वर्षों से संजोए हुए है। यहां पर अपनों से बात करने के लिए फोन का इस्‍तेमाल नहीं करते बल्कि इनके लिए अपनी प्‍यारी-सी धुनें ही इसके लिए काफी साबित होती हैं।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकियों ने शुक्रवार को 3 पुलिसकर्मियों को अगवा कर हत्या कर दी। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इन्हें ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। बताया जा रहा है स्थानीय आतंकियों ने इन पुलिसकर्मियों का अपहरण किया था। जिनमें 3 स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) और 1 पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिसकर्मियों के शव सर्च ऑपरेशन के दौरान कापरन गांव में मिले।आतंकियों द्वारा तीन पुलिसकर्मियों को अगवा कर मौत के घाट उतारे जाने के बाद शुक्रवार को छह पुलिसकर्मियों ने नौकरी से इस्तीफे का एलान कर दिया है।अगवा किए गए पुलिसकर्मियों की पहचान फिरदौस अहमद कूचे, कुलदीप सिंह, निसार अहमद धोबी और फैयाज अहमद बट के रुप में हुई है। संबधित सूत्रों ने बताया कि अगवा किए गए पुलिसकर्मी दक्षिण कश्मीर में दो गांवों कापरिन और बटगुंड के रहने वाले हैं। इनमें तीन एसपीओ हैं और एक पुलिस कांस्टेबल है।जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव होने से पहले आतंकियों की तरफ से इसे टालने के लिए पुरजोर कोशिशें की जा रही हैं। एक बार फिर घाटी में आतंकियों ने स्थानीय पुलिसकर्मियों को अगवा कर उनकी निर्मम हत्या की है।शुक्रवार को शोपियां में चार स्पेशल पुलिस अफसरों (एसपीओ) को किडनैप कर लिया गया। इनमें से तीन पुलिसकर्मियों को आतंकियों ने मार दिया है। जबकि कुछ देर बाद ही आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी को छोड़ दिया है। तीनों पुलिसवालों के शव बरामद कर लिए गए हैं। चार पुलिसकर्मियों में से सिर्फ फयाज़ अहमद भट्ट ही वापस लौटे हैं।ये किडनैपिंग तब हुई है जब हिज्बुल के आतंकी रियाज़ नाइकू ने पुलिसकर्मियों को धमकी दी है। एक ऑडियो क्लिप सामने आई है जिसमें नाइकू कह रहा है कि सभी पुलिसकर्मियों को चार दिन में अपनी नौकरी छोड़ दें।नाइकू का कहना था कि नए कश्मीरी लड़के पुलिस ज्वाइन ना करें। आपको बता दें कि इससे पहले भी कई बार आतंकियों ने पुलिसकर्मियों को किडनैप कर उनकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। जिसके बाद से ही घाटी में काफी बवाल है।इससे पूर्व गत 31 अगस्त को दक्षिण कश्मीर में आतंकियों ने पुलिसकर्मियों के 11 रिश्तेदारों को अगवा किया था। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया था। आतंकियों का कहना था कि पुलिसकर्मी उनके परिवार के कुछ सदस्यों को ले गए हैं और हम चाहते हैं कि उन्हें वापस भेज दें।
हिज्बुल आतंकी ने दी थी धमकी, पुलिस की नौकरी छोड़ो वर्ना अंजाम भुगतो:-यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि दो दिन पहले हिज्ब अातंकी रियाज नायकू ने एक वीडियो जारी कर पुलिसकर्मियों व एसपीओ को नौकरी छोड़ने की धमकी दोहराई थी। ऑडियो क्लिप में नौकरी छोड़ने के लिए चार दिन का वक्त दिया गया था। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को भी नौकरी छोड़ने के लिए धमकाया गया था। उस दो मिनट के वीडियो में नौकरी नहीं छोड़ने वालों के परिजनों को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। धमकी देने वाले शख्स ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, एसटीएफ, ट्रैफिक पुलिस, सीआईडी, राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ, बीएसएफ और केंद्र सरकार की नौकरी करने वाले कश्मीरियों से नौकरी छोड़ने की धमकी देते हुए नौकरी छोड़ने का सबूत इंटरनेट पर अपलोड भी करने को कहा था। नौकरी छोड़ने के लिए उसने चार दिन का वक्त दिया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस (जेकेपी) के पास करीब 35,000 एसपीओ हैं जो पुलिस विभाग में नियमित नौकरी मिलने की आस लगाए हुए हैं। पुलिस विभाग राज्य के युवाओं के लिए रोजगार का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। जुलाई 2016 में हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद दो वर्षों में घाटी के करीब 9,000 युवा पुलिस में भर्ती हो चुके हैं।इस साल 29 अगस्त की हत्या को मिलाकर कुल 35 पुलिसकर्मियों की हत्या हो चुकी है, जो 2017 में पूरे साल कुल हत्या से भी ज्यादा है। हाल के महीनों में आतंकियों के मारे जाने के जवाब में पुलिसकर्मियों पर हमलों की अभूतपूर्व घटनाएं देखने को मिली हैं।

नई दिल्ली। अल्जाइमर्स डिजीज को सिर्फ भूलने की बीमारी समझना एक भूल है, क्योंकि, रोगी की याददाश्त के अत्यधिक कमजोर होने के अलावा उसके परिवार के सदस्य भी अनेक समस्याओं से रूबरू होते हैं। आमतौर पर मिडिल एज व वृद्धावस्था में होने वाली इस जटिल बीमारी की चुनौती का सामना कैसे किया जाए? अल्जाइमर्स डिजीज डिमेंशिया का ही एक प्रकार है। डिमेंशिया की तरह अल्जाइमर्स में भी मरीज को किसी भी वस्तु, व्यक्ति या घटना को याद रखने में परेशानी महसूस होती है और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में भी दिक्कत महसूस होती है। आइए जानते हैं इस मर्ज के विभिन्न पहलुओं के बारे में। वर्ल्ड अल्जाइमर डे के संदर्भ में विवेक शुक्ला ने की कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों से बात...
क्या है अल्जाइमर:-अल्जाइमर भूलने की बीमारी है। इसके लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना आदि शामिल हैं। रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सिर में चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। 60 वर्ष की उम्र के आसपास होने वाली इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थाई इलाज नहीं है।
कारणों को जानें:-उम्र बढ़ने के साथ तमाम लोगों में मस्तिष्क की कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) सिकुड़ने लगती हैं। नतीजतन न्यूरॉन्स के अंदर कुछ केमिकल्स कम हो जाते हैं और कुछ केमिकल्स ज्यादा हो जाते हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में अल्जाइमर्स डिजीज कहते हैं। अन्य कारणों में 30 से 40 फीसदी मामले आनुवांशिक होते हैं। इसके अलावा हेड इंजरी, वायरल इंफेक्शन और स्ट्रोक में भी अल्जाइमर सरीखे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं, लेकिन ऐसे लक्षणों को अल्जाइमर्स डिजीज नहीं कहा जा सकता।
ब्रेन केमिकल्स में कमी;-ब्रेन सेल्स जिस केमिकल का निर्माण करती हैं, उसे एसीटिलकोलीन कहते हैं। जैसे-जैसे ब्रेन सेल्स सिकुड़ती जाती है, वैसे-वैसे एसीटिलकोलीन के निर्माण की प्रक्रिया कम होती जाती है। दवाओं के जरिये एसीटिलकोलीन और अन्य केमिकल्स के कम होने की प्रक्रिया को बढ़ाया जाता है। बढ़ती उम्र के साथ ब्रेन केमिकल्स का कम होते जाना एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया है लेकिन अल्जाइमर्स डिजीज में यह न्यूरो केमिकल कहीं ज्यादा तेजी से कम होता है। इस रोग को हम क्योर (यहां आशय रोग को दूर करने से है) नहीं कर सकते, लेकिन दवा देने से रोगी को राहत जरूर मिलती है। जांच: पॉजीट्रॉन इमीशन टोमोग्राफी (पी. ई.टी.) जांच से इस रोग का पता चलता है। एमआरआई जांच भी की जाती है।
बात इलाज की:-मस्तिष्क कोशिकाओं में केमिकल्स की मात्रा को संतुलित करने के लिए दवाओं का प्रयोग किया जाता है। दवाओं के सेवन से रोगियों की याददाश्त और उनकी सूझबूझ में सुधार होता है। दवाएं जितनी जल्दी शुरू की जाएं उतना ही फायदेमंद होता है। दवाओं के साथ-साथ रोगियों और उनके परिजनों को काउंसलिंग की भी आवश्यकता होती है। काउंसलिंग के तहत रोगी के लक्षणों की सही पहचान कर उसके परिजनों को उनसे निपटने की सटीक व्यावहारिक विधियां बतायी जाती हैं।
अल्जाइमर के खतरे को कम कर सकती है हल्दी:-गुणों से भरपूर हल्दी की एक और खूबी सामने आई है। नए शोध का दावा है कि भारत में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली हल्दी से बढ़ती उम्र में स्मृति को बेहतर करने के साथ ही भूलने की बीमारी अल्जाइमर के खतरे को कम किया जा सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने डिमेंशिया पीड़ितों के मस्तिष्क पर करक्यूमिन सप्लीमेंट के प्रभाव पर गौर किया। करक्यूमिन हल्दी में पाया जाने वाला एक रासायनिक कंपाउंड है। पूर्व के अध्ययनों में इस कंपाउंड के सूजन रोधी और एंटीआक्सीडेंट गुणों का पता चला था। संभवत: यही कारण है कि भारत के बुजुर्गों में अल्जाइमर की समस्या कम पाई जाती है।
लक्षणों पर रखें नजर:-अगर किसी व्यक्ति को अल्जाइमर्स डिजीज से संबंधित निम्नलिखित कोई लक्षण महसूस हों, तो उसे शीघ्र ही विशेषज्ञ डॉक्टर (न्यूरोफिजीशियन या न्यूरो सर्जन) से परामर्श करना चाहिए। डॉक्टर सबसे पहले यह निश्चित करते हैं कि वास्तव में ये लक्षण डिमेंसिया के प्रकार अल्जाइमर्स के हैं या फिर किसी और कारण से हैं। अल्जाइमर्स के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं...
- स्मरण शक्ति में कमी के कारण पीड़ित व्यक्ति कई बातें भूलने लगता है। जैसे- नहाना भूल जाना।
- नाश्ता किया है या नहीं, यह भूल जाना।
- दवा खाई है या नहीं यह भूल जाना।
- घर के लोगों के नाम भूल जाना या याद न रख पाना।
- वस्तुओं या जगह का नाम न याद रहना। जैसे गिलास है तो कटोरी कहना।
- अपने घर का रास्ता भूल जाना।
- संख्याओं को याद न रखना।
- अपने सामान को रखकर भूल जाना।
- अत्यधिक चिड़चिड़ापन महसूस करना।
- एक ही काम को अनेक बार करना या एक ही बात को बार-बार पूछते रहना।
’ बात करते समय रोगी को सही शब्द, विषय व नाम ध्यान में नहीं रहते।
इलाज के बारे में:-याददाश्त में कमी की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को डॉक्टर के परामर्श से नियमित रूप से दवा लेनी चाहिए। अल्जाइमर्स के कुछ कारणों का इलाज सर्जरी से सफलतापूर्वक किया जा सकता है। जैसे सबड्यूरल हिमेटोमा, नार्मल प्रेशर हाइड्रोसेफेलस और ब्रेन ट्यूमर या सिर की चोट आदि कारणों से अगर व्यक्ति अल्जाइमर्स से ग्रस्त हो जाता है, तब कुछ मामलों में सर्जरी से सफलता मिलती है। इसके अलावा मरीजों और उनके परिजनों को कुछ अन्य बातों पर भी ध्यान देना जरूरी है...
- परिजन रोगी को सक्रिय जीवन जीने के लिए प्रेरित करें। आसपास के वातावरण को खुशनुमा बनाएं।
- थोड़ा शारीरिक परिश्रम करें।
- खुद को कैसे खुश रखना है, इस बारे में सोचें।
- अगर डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो अपना खानपान नियमित रखें और समय पर दवाएं लें।
परिजन दें ध्यान;-अल्जाइमर्स डिजीज से पीड़ित रोगियों की सुरक्षा का पहलू अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैसे..
- रोगी अक्सर घर से बाहर निकल जाते हैं और भटक जाते हैं। ऐसे में रोगी की जेब में पहचान पत्र रखें या उन्हें फोन नंबर लिखा हुआ लॉकेट पहनाएं।
- रोगी अक्सर गिर पड़ते हैं और चोटिल हो जाते है। इसलिए रोगी को मजबूत छड़ी या वॉकर दें।
- रोगी की दिनचर्या को सहज व नियमित रखने का प्रयास करें।
रोगी से संवाद:-रोगी की देखभाल के दौरान उसके साथ पूर्ण संवाद बनाए रखें। रोगी को बताएं कि अभी समय क्या है, घर में कौन आया है और आप उसके लिए क्या करने जा रहे हैं।
ऐसे करें रोकथाम:-लोगों को शुरू से ही संतुलित व पोषक आहार ग्रहण करना चाहिए। मानसिक संतुलन कायम रखने के लिए ध्यान (मेडिटेशन) करें और ईश्वर पर विश्वास रखें। इसके अलावा किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों की लत से दूर रहें।
मरीज को प्रेरित करें:-अगर कोई व्यक्ति अल्जाइमर्स डिजीज से ग्रस्त है, तो प्रारंभिक अवस्था में व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत साफ- सफाई और प्रसन्न रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उसे प्रेरित करना चाहिए कि वह अपना कार्य स्वयं करे। इस संदर्भ में कुछ अन्य सुझाव इस प्रकार हैं..
- दैनिक कार्यों में उस व्यक्ति को याद रहे कि उसे सुबह उठकर क्या कार्य करना है। घर के लोगों को व्यक्ति की सामथ्र्य के अनुसार उसकी मदद करनी चाहिए।
- पीड़ित व्यक्ति को अपना कार्य करने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।
- पीड़ित व्यक्ति के प्रति धैर्य रखें।
- मरीज को डराएं और डांटें नहीं।
- व्यक्ति को अपना कार्य पूरा करने पर उसे उत्साहित करें या शाबासी दें।
- अल्जाइमर्स डिजीज वाले व्यक्ति को अकेला न छोड़ें और उसके साथ जो काम शुरू करें,उसे अंत तक पूरा करें।
- इस रोग के कारण याददाश्त कमजोर पड़ जाती है। इस कारण व्यक्ति की जेब में हमेशा परिचय पत्र या घर का पता, कॉन्टैक्ट नंबर डाल कर रखें जिससे अगर उसे कोई समस्या होती है तो दूसरा व्यक्ति उसकी मदद कर सकता है।

नई दिल्‍ली। भारत की दस सबसे बड़ी मीडिया कंपनियां, जो ऑनलाइन पाठकों को कुल मिलाकर 70 फीसद सामग्री उपलब्‍ध कराती हैं, उन्‍होंने मिलकर एक नए मंच की घोषणा की है। इसे डिजिटल न्‍यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन(डीएनपीए) नाम दिया गया है।डीएनपीए सभी सदस्यों के व्यापार और संपादकीय हितों को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय दर्शकों को विभिन्‍न भाषाओं में सबसे विश्वसनीय समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत में डिजिटल मीडिया का दायरा बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में डिजिटल मीडिया की वर्तमान और भविष्य की क्षमता को अधिकतम करने में सहयोग करने के तरीकों को खोजने के लिए डीएनपीए का गठन किया गया है।इस संगठन के 10 संस्थापक सदस्य हैं: दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, इंडिया टुडे समूह, एनडीटीवी, हिंदुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, अमर उजाला, एनाडु और मलयाला मनोरमा। डीएनपीए नाममात्र शुल्क के साथ स्वयं वित्त पोषित संगठन है। संगठन के द्वार किसी भी ऑनलाइन समाचार प्रकाशक के लिए खुले हैं। नए मीडिया हाउस को सदस्यता बोर्ड द्वारा मंजूरी मिलने के बाद दे दी जाएगी।

भिलाई। भिलाई सिर्फ पिघलता लोहा ही नहीं उगलता, प्रतिभाओं को भी जन्म देता है। भिलाई की लड़कियों की बास्केटबॉल टीम पिछले 30 साल से नेशनल चैंपियन है। इस टीम के आगे देश की कोई भी दूसरी टीम टिक ही नहीं पाती। इन खिलाड़ियों की प्रतिभा का अब बॉलीवुड भी कायल हो गया है। बॉलीवुड अभिनेत्री लारा दत्ता इस टीम की कहानी पर एक फिल्म बनाने जा रही हैं, जिसका निर्माण इस साल नवंबर से शुरू होगा। यह फिल्म रेलवे की इस टीम के 30 साल से चले आ रहे जीत के सफर और कोच के संघर्ष की कहानी आधारित होगी। फिल्म में दिवंगत अंतरराष्ट्रीय कोच राजेश पटेल की भूमिका एक्टर इरफान खान निभाएंगे।
कोच के संघर्ष की कहानी;-बास्केटबॉल के अंतरराष्ट्रीय कोच राजेश पटेल के परिजनों से मिलने फिल्म अभिनेत्री लारा दत्ता सितंबर के पहले पखवाड़े में भिलाई आई थी। लारा दत्ता ने कहा कि यह फिल्म 2014 के नेशनल बास्केटबॉल चैम्पियनशिप पर फोकस है। इसमें लगातार 30 साल से विजेता भारतीय रेलवे की टीम को छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य की बेटियों ने धूल चटा दिया था। साथ ही फिल्म में अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रशिक्षक राजेश पटेल के जीवन पर भी फोकस किया जाएगा।वे इंदौर में जन्म लेने के बाद कैसे भिलाई आए, भिलाई स्टील प्लांट में उनकी नौकरी और बास्केटबॉल में प्रशिक्षक के तौर पर उनका जीवन, छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य की बेटियों का सौ से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतररष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीतना। इन सभी का भी उल्लेख होगा। एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजेश ने अपने संघर्ष और खेल प्रतिभा के दम पर एक अंतर्राष्ट्रीय कोच के रूप में ख्याती हासिल की थी। वे टीम की खिलाड़ियों को अपनी बेटियों की तरह प्यार देते थे और उन्हें अपने अपने परिवार का हिस्सा समझते हुए अपने घर पर ही रखते थे। इनमें से कई लड़कियां राज्य के अलग-अलग हिस्से के आदिवासी और गरीब परिवारों से आईं और आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम कमाया है। कई लड़कियां रेलवे में अच्छे पदों पर जॉब भी कर रही हैं।
खिलाड़ियों से मिलने भिलाई आई थीं अभिनेत्री लारा दत्ता:-10 सितंबर को यहां पहुंची लारा दत्ता ने राजेश पटेल के परिवार के साथ करीब दो घंटे का वक्त गुजारा। दिवंगत राजेश पटेल के छोटे बेटे रोहित पटेल बताते हैं कि फिल्म में पापा का रोल इरफान खान कर सकते हैं। क्योंकि पापा की भूमिका में इरफान ठीक बैठेंगे। साथ ही अभिनेत्री के नाम का खुलासा नहीं किया। इतना जरूर कहा कि फिल्म में बड़ी अभिनेत्री काम करेगी।
फिल्म की इस थीम को किया बेपर्दा:-राजेश पटेल के बेटे रोहित पटेल ने कहा कि अपने भिलाई प्रवास के दौरान लारा दत्ता ने अपने द्वारा बनाई जाने वाली फिल्म पर और कई बातें कहीं। कहा कि इस फिल्म के माध्यम से यह भी बताया जाएगा कि भारत में क्रिकेट के अलावा भी प्रतिभाएं हैं। साथ ही जिम्मेदारों से पूछा जाएगा कि आखिर सौ से ज्यादा पदक और इतने ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देश को देने वाले प्रशिक्षक राजेश पटेल को द्रोणाचार्य अवॉर्ड क्यों नहीं दिया जा रहा है।
नवंबर से शुरू हो सकती है शूटिंग;-रोहित पटेल ने बताया कि लारा ने कहा कि फिल्म की शूटिंग नवंबर से शुरू की जाएगी। फिल्म में भिलाई को फिल्म सिटी में क्रिएट करने के बजाए भिलाई में ही शूटिंग किया जाएगा। इसमें उनके निवास में रहने वाली बास्केटबॉल की प्रशिक्षु खिलाड़ियों, उनका घर, सेक्टर-1 स्थित बास्केटबॉल कॉम्पलेक्स और भिलाई के कुछ सीन लेंगे।

 

नई दिल्‍ली। हम लोगों के पास काफी ऐसे नोट होते हैं, जो कटे-फटे होते हैं, जिसका उपयोग लेन-देन और व्‍यवसाय के लिए नहीं किया जा सकता है। इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के विस्तृत नियम हैं, जो इस तरह के पास कटे-फटे नोटों के आदान-प्रदान के लिए शर्तों को निर्धारित करते हैं। किसी को नोट की स्थिति के आधार पर कटे-फटे नोट के मूल्य की पूर्ण या आधा धन वापसी मिल सकती है।
किस प्रकार के नोट किए जाते हैं स्‍वीकार
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (नोट रिफंड) नियम 2009 के अनुसार, निम्नलिखित प्रकार के नोट के लिए धनवापसी पर विचार किए जाएंगे
महत्‍वपूर्ण नोट : इसका मतलब है कि कोई भी नोट जो पूरी तरह से या आंशिक रूप से, मिटाया हुआ, संकुचित, धोया गया, बदला गया या अस्पष्ट है लेकिन इसमें एक कटे-फटे नोट शामिल नहीं है।
कटे-फटे नोट : का अर्थ है कि एक नोट जिसमें एक हिस्सा गुम है या जो दो से अधिक टुकड़ों से बना है
बेमेल नोट : का अर्थ है एक कटे-फटे नोट जिसका निर्माण किसी भी नोट के आधे नोट में, किसी अन्य नोट के आधा नोट में शामिल करके किया गया है। एक कटे-फटे नोट की पहचान संख्या, हस्ताक्षर इत्यादि के आधार पर और अन्य सुरक्षा फीचर्स की जांच के बाद की जा सकती है।
कैसे नोटों के मामले में कोई धनवापसी दावा नहीं किया जाएगा
-ऐसे नोटों को वास्तविक नोट के रूप में निश्चितता के साथ पहचाना नहीं जा सकता है
-कोई भी नोट जो पूरा नहीं है या कटा-फटा हो, लेकिन उस नोट का उच्च मूल्य का प्रतीत होता है या किसी अन्य तरीके से जानबूझ कर कटे-फटे, बदले हुए या निपटाया गया है, जिससे इसका झूठा दावा किया जा सकता है।
-नारे या राजनीतिक प्रकृति या धार्मिक संदेश लिखे नोट की कानूनी निविदा समाप्त हो जाती है। इस तरह के नोट को बदलने का दावा नहीं किया जा सकता।
-किसी भी नोट को जानबूझ कर या गुस्से में नहीं काटा जा सकता इसलिए जिन नोटों को जानबूझ कर काटा गया है, उन्हें बदलने का दावा नहीं माना जाएगा।
-किसी भी कानून के प्रावधान के उल्लंघन में भारत के बाहर किसी भी स्थान से आयात किया गया हो
-निर्धारित अधिकारी द्वारा बुलाए गए किसी भी सूचना को नोटिस प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर दावेदार द्वारा प्रस्तुत नहीं किया जाता है या जानकारी मांगने के लिए पत्र भेजने पर प्रस्‍तुत नहीं होता है।
किस तरह से कटे-फटे नोटों से होती है धनवापसी;-ऐसे नोट केवल आरबीआई के कार्यालय और विभिन्न बैंकों की सभी करेंसी चेस्‍ट शाखाओं पर स्वीकार किए जाएंगे। विभिन्न बैंकों की करेंसी चेस्‍ट शाखा की सूची आरबीआई वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है। इन शाखाओं में कटे-फटे नोट काउंटर पर स्वीकार किए जाएंगे और फॉर्म में एक टोकन डीएन-1 को नोट जमा करने वाले व्यक्ति को जारी किया जाएगा। अलग-अलग नोटों के लिए धनवापसी और मानदंड अलग-अलग हैं।गाइडलाइन में रिजर्व बैंक ने साफ कहा है कि ऐसे नोट जो पानी, पसीना या कोई अन्य चीज लगने से बुरी तरह गंदे हो गए हो या जिनके दो टुकड़े हो गए हों लेकिन उनमें कोई जरूरी फीचर गायब न हुआ हो, उनसे सरकारी बकाया हाउस टैक्स, सीवर टैक्स, वाटर टैक्स, बिजली बिल आदि का भुगतान किया जा सकता है। साथ ही बैंक काउंटर पर उन्हें स्वीकार किया जाए। हालांकि इन नोटों को दोबारा जनता को जारी नहीं किया जाए। इसके बाद इन्हें नष्ट करने के लिए भेजा जाए।
50 रुपये से कम मूल्य के नोट के लिए : 50 रुपये से कम मूल्‍य के नोटों की पूर्ण धनवापसी केवल तभी होगी, जब बैंक में प्रस्तुत किए गए नोट के सबसे बड़े अविभाजित टुकड़े का क्षेत्र 50% से अधिक हो, जो अगला पूर्ण वर्ग सेंटीमीटर तक खत्‍म होना चाहिए। यदि प्रस्तुत किए गए नोट के सबसे बड़े अविभाजित टुकड़े का क्षेत्र नोट के क्षेत्र के 50% से कम या बराबर है तो दावा स्वीकार नहीं कर दिया जाएगा और कोई धनवापसी नहीं होगी। नोट का विस्तृत मूल्यवान आकार और पूर्ण धनवापसी के लिए आवश्यक क्षेत्र नियमों में परिभाषित किया गया है और प्रासंगिक तालिका नीचे दी गई है।
50 रुपये से ऊपर के नोट के लिए : 50 रुपये या इससे अधिक के लिए कई मापदंड नीचे दिए गए हैं। आरबीआई ने हाल में 65% या 80% से अधिक की पूरी वापसी के लिए आवश्यक अविभाजित टुकड़े के क्षेत्र को बढ़ाने के नियमों में संशोधन किया है।जब प्रस्तुत किए गए नोट के एकल सबसे बड़े अविभाजित टुकड़े का क्षेत्र संबंधित मूल्य के 80% से अधिक क्षेत्र का है तो पूर्ण धनवापसी तभी की जाएगी।यदि प्रस्तुत किए गए नोट के एकल सबसे बड़े अविभाजित टुकड़े का अविभाजित क्षेत्र 40% से अधिक या संबंधित मूल्य के 80% से कम या उसके बराबर है तो आधा मूल्य वापस किया जाएगा।सबसे बड़े अविभाजित टुकड़े का अविभाजित क्षेत्र 40% से कम हो तो कोई धनवापसी नहीं होगी।यदि 50 रुपये और उससे अधिक मूल्यों के कटे-फटे नोटों का दावा एक ही नोट के दो टुकड़ों से बना एक नोट होता है। दो टुकड़े, व्यक्तिगत रूप से उस क्षेत्र में नोट के कुल क्षेत्रफल के 40% से अधिक या उसके बराबर है तो एक की पूर्ण धनवापसी की जाएगी।

 

 

 

 

क्रिकेट की दुनिया में अपना सिक्का जमाने के बाद भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली अब अदाकारी के क्षेत्र में भी अपना नाम बनाने जा रहे हैं। विराट कोहली के चाहने वालों को उनकी डेब्यू फिल्म 'ट्रेलर: द मूवी' जल्द ही देखने को मिलेगी। विराट कोहली ने आज सुबह अपने ट्विटर अकाउंट से अपनी पहली फिल्म का पोस्टर रिलीज किया है, जिसमें वो सुपरहीरो अवतार में दिखाई दे रहे हैं। विराट कोहली ने पोस्टर को ट्वीट करते हुए लिखा है, '10 साल के बाद एक बार फिर से डेब्यू करने जा रहा हूं। मैं इसके लिए काफी बेकरार हूं।’पोस्टर में विराट कोहली एक सुपरहीरो की तरह हवा में उड़ते दिखाई दे रहे हैं। उनके पीछे दो बिल्डिंगों के बीच में आग जलती नजर आ रही है और गाड़ियां उड़ती दिख रही हैं। ऐसा लग रहा है कि विराट की आने वाली यह फिल्म एक एक्शन थ्रिलर होगी, जिसमें दर्शकों को खूब सारी मार-धाड़ देखने को मिलेगी।विराट कोहली के फैंस के लिए यह खबर जहां खुशी देने वाली है कि वो अब पर्दे पर अदाकारी भी करते नजर आएंगे, वहीं थोड़ी परेशान करने वाली भी क्योंकि विराट कोहली की पहली फिल्म ट्रेलर 28 सितम्बर के दिन रिलीज होगी।इसी दिन विराट कोहली की पत्नी अनुष्का शर्मा की नई फिल्म 'सुई-धागा' आ रही है। इस फिल्म में अनुष्का शर्मा के साथ वरुण धवन दिखाई देंगे। दोनों कलाकार इस समय अपनी फिल्म का प्रमोशन जबरदस्त तरीके से कर रहे हैं। आज ही फिल्म 'सुई-धागा' का नया गाना 'सब ठीक है' आया है, जिसमें वरुण धवन देसी अंदाज में नाचते नजर आ रहे हैं।

नई दिल्ली। एशिया कप में भारत और बांग्लादेश के बीच सुपर-4 दौर का मुकाबला खेला जा रहा है। इस अहम मुकाबले में भारत के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी का फैसला किया है। खबर लिखे जाने तक बांग्लादेश ने 18 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 65 रन बना लिए हैं।
बांग्लादेश को लगे 5 झटके;-भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने बांग्लादेश को पहला झटका दिया, उन्होंने लिटन दास को केदार जाधव के हाथों कैच आउट करवाया। इसके बाद बुमराह ने अगली ही ओवर में नजमुल हुसैन को स्लिप में शिखर धवन के हाथों कैच आउट करवा अपनी टीम को दूसरी सफलता दिलाई। इसके बाद जडेजा ने 17 रन पर खेल रहे शाकिब अल हसन को शिखर धवन के हाथों कैच आउट करवाकर भारत को तीसरी सफलता दिला दी। जडेजा ने ही मिथुन को LBW आउट कर बांग्लादेश को चौथा झटका दिया।इसके बाद जडेजा ने पिछले मैच में मैव ऑफ द मैच रहे मुश्फिकुर रहीम को चहल के हाथों कैच आउट करवा कर बांग्लादेश को 5वां झटका दिया।
भारतीय टीम मेँ हुआ एक बदलाव:-बांग्लादेश के खिलाफ मैच के लिए भारतीय टीम में एक बदलाव किया गया है। इस मैच में चोटिल हार्दिक पांड्या की जगह रवींद्र जडेजा को मौका दिया गया है। जडेजा ने अपना आखिरी वनडे मैच जुलाई 2017 में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ किंगस्टन में खेला था।
इस मैच के लिए भारतीय टीम;-रोहित शर्मा (कप्तान), शिखर धवन, अंबाती रायुडू, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव, महेंद्र सिंह धौनी (विकेटकीपर), भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल और रवींद्र जडेजा।
भारत के खिलाफ बांग्लादेश की टीम:-लिटन कुमार दास, नजमुल हुसैन शांतो, शाकिब अल हसन, मुश्फिकुर रहीम (विकेटकीपर), मुहम्मद मिथुन, महमूदुल्लाह रियाद, मोसादेक हुसैन, मेहदी हसन मिराज, मशरफे मुर्तजा (कप्तान), मुस्तफिजुर रहमान और रूबेल हुसैन।
भारत ने जीते दोनों मैच;-भारत ने अपने पहले मैच में हांगकांग को मात दी थी तो वहीं अगले मैच में पाकिस्तान को हराया था। बांग्लादेश ने इस टूर्नामेंट के अपने पहले मैच में श्रीलंका को मात दी में थी, लेकिन बाद में उसे अफगानिस्तान से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बावजूद बांग्लादेश को कमज़ोर आंकना भारतीय टीम के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

 

नई दिल्ली। भारत के पूर्व तूफानी ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने एक राज की बात बताते हुए कहा कि अगर वह क्रिकेटर नहीं होते तो किसान होते या आर्मी की नौकरी कर रहे होते। अपने बल्लेबाजी से अच्छे अच्छे गेंदबाजों की धुनाई करने वाले सहवाग ने एक शो में ये बात कही।इस शो में सहवाग के साथ पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद आफरीदी भी थे। सहवाग ने कहा कि मेरे पिता किसान थे और मैं ज्यादा पढ़ा लिखा भी नहीं हूं। इसी वजह से मैं डॉक्टर या इंजीनियर तो बन नहीं सकता था इसलिए मुझे लगता है मैं किसान ही बनता।सहवाग ने कहा कि हो सकता है कि मैं आर्मी में भी चला जाता क्योंकि मेरे बहुत से रिश्तेदार आर्मी में है लेकिन आर्मी में आपको अच्छी फिटनेस चाहिए, जो मेरे पास नहीं थी। सहवाग ने 104 टेस्ट में 8586, 252 वनडे में 8273, 19 टी20 में 394 और 104 आईपीएल मैचों में 2728 रन बनाए हैं।जिस तरह से सहवाग अपनी बल्लेबाज़ी के लिए मशहूर थे, ठीक उसी तरह वो अब ट्विटर पर अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं। सहवाग भारत के पहले ऐसे क्रिकेटर हैं जिनके नाम टेस्ट क्रिकेट में दो-दो तिहरे शतक हैं। इतना ही नहीं सहवाग के नाम वनडे में भी दोहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड है।सहवाग ने ये दोहरा शतक दिसंबर 2011 में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ इंदौर में जड़ा था। वो सचिन तेंदुलकर के बाद वनडे क्रिकेट में दूसरा दोहरा शतक लगाने वाले खिलाड़ी हैं। सहवाग इस समय आइपीएल टीम किंग्स इलेवन पंजाब के मेंटॉर है हालांकि साल 2018 में उनके और पंजाब की सह मालिकन प्रीति जिंटा के बीच मतभेद की खबरें थी, इसलिए अब देखना होगा कि अगले सीजन भी वह क्या पंजाब से जुड़ेंगे रहेंगे या नहीं।

नई दिल्ली। इंग्लैंड से वनडे और टेस्ट सीरीज हार के बाद भी रवि शास्त्री ने कहा था कि यह टीम पिछले 10-15 सालों की सर्वश्रेष्ट टीम है। इसके बाद ना केवल फैंस ने बल्कि कई क्रिकेट दिग्गजों ने क्लास लगाई थी। अब उस बयान पर भारत के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने भी अपनी राय देते हुए कहा कि यह मायने नहीं रखता कि कौन सर्वश्रेष्ट है और कौन नहीं। अभी टीम के लिए ये जरूरी है कि टीम ने उससे क्या सीख ली और उसे अब किस तरह आगे बढ़ना है। इसके साथ ही द्रविड़ ने साफ कर दिया की शास्त्री के बयान में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है और ना ही इस पर टिप्पणी भी नहीं करना चाहता।आपको बता दें कि भारत ने आखिरी बार इंग्लैंड में सीरीज साल 2007 में जीती थी और द्रविड़ उस टीम के कप्तान थे। टीम इंडिया दीवार रहे इस खिलाड़ी ने कहा कि शास्त्री के बयान को काफी बढ़ा चढ़ा के पेश किया गया है। वहीं टीम इंडिया के प्रदर्शन पर द्रविड़ ने कहा कि इंग्लैंड में टीम इंडिया ने मौकों को नहीं भुनाया। द्रविड़ ने कहा कि इस दौरे पर भारतीय टीम की गेंदबाजी ने बहुत भरोसा दिया है लेकिन टीम इंडिया ने हाथ आए मौकों का फायदा नहीं उठाया।भारतीय टीम के इस पूर्व कप्तान ने टीम इंडिया का सपोर्ट करते हुए कहा कि भारतीय टीम को 3 या 4 साल में इंग्लैंड का दौरा करना होता है और इस दौरान खिलाड़ियों के साथ सपोर्ट स्टाफ को भी निराशा होती है क्योंकि कोई नहीं जानता कि अगले 4 सालों में क्या होगा। लेकिन इस बार वास्तव में हमारी टीम काफी अच्छी थी। हमारी गेंदबाजी शानदार रही और इस बार हमारे फील्डर्स ने भी जबरदस्त प्रदर्शन किया।द्रविड़ यूएई में चल रहे एशिया कप के बारे में कहा कि वास्तव में टूर्नामेंट में पूरा ध्यान भारत और पाकिस्तान के मैच पर केंद्रित किया जा रहा है, लेकिन आपको ये समझना होगा कि बांग्लादेश और अफगानिस्तान भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं हमें अन्य टीमों से भी सतर्क रहने की जरूरत है।

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