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नई दिल्ली। बीते कुछ दिनों से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से जनता हलकान हो रही है। इसके लिए सरकार पर निशाना साधा जा रहा है, लेकिन सच तो यह है कि दुनिया के तकरीबन हर देश में पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही हैं। 2015 में ब्रेंट क्रूड की कीमत 66 डॉलर प्रति बैरल थी। अब 79 डॉलर प्रति बैरल है। ब्लूमबर्ग और ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज डॉट कॉम के आंकड़ों को संकलित करके दिस इज मनी नामक वेबसाइट ने पेट्रोल-डीजल के दामों में सर्वाधिक वृद्धि वाले दस देशों की सूची जारी की है। इसमें हांगकांग शीर्ष पर है। दूसरे व तीसरे स्थान पर क्रमश: आइसलैंड व नॉर्वे हैं जो अपनी महंगी जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं।
कैसे तय होते हैं दाम:-सबसे पहले खाड़ी या दूसरे देशों से तेल खरीदते हैं, फिर उसमें ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ते हैं। क्रूड आयल यानी कच्चे तेल को रिफाइन करने का व्यय भी जोड़ते हैं। केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और डीलर का कमीशन जुड़ता है। राज्य वैट लगाते हैं और इस तरह आम ग्राहक के लिए कीमत तय होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बदलाव घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमत को सीधे प्रभावित करता है। भारतीय घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार यह सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से है। अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि, कम उत्पादन दर और कच्चे तेल के उत्पादक देशों में किसी तरह की राजनीतिक हलचल पेट्रोल की कीमत को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
कार्बन बबल का सिद्धांत:-वर्तमान में जीवाश्म ईंधन कंपनियों के शेयरों की कीमत इस अनुमान पर तय की जाती है कि उनका तेल का सारा भंडार इस्तेमाल कर लिया जाएगा। लेकिन जैसे ही लोग कार्बन मुक्त ईंधन की तरफ पलायन करेंगे, जीवाश्म ईंधन में किया गया लाखों करोड़ों डॉलर का निवेश अपनी कीमत गवां देगा। जीवाश्म ईंधन भंडार और उत्पादन मशीनरी कोई लाभ नहीं दे पाएगी। इसी अनुमानित नुकसान को कार्बन बबल नाम दिया गया है।
एक पौंड : 95.45 रुपया
एक पेंस : 95.45 पैसा
विकासशील देश बदलाव के वाहक;-तेजी से बढ़ रहे दुनिया के बाजार इस बदलाव के सबसे बड़े वाहक हैं। इन देशों में आबादी का घनत्व ज्यादा है, प्रदूषण ज्यादा है और ऊर्जा की मांग बढ़ रही है। इन देशों के पास जीवाश्म ईंधन आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर कम है, ऊर्जा की मांग अधिक है और ये अक्षय ऊर्जा के भंडारों का लाभ उठाने को लालायित हैं।
क्या हैं वजहें;-ऊर्जा के स्रोतों में बदलाव की प्रमुख वजहें हैं जरूरत, नीतियां और तकनीक। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और लीथियम आयन बैटरी जैसी तकनीकों की क्षमताएं बढ़ रही हैं और इनकी कीमतें 20 फीसद की दर से कम हो रही हैं। यह सिलसिला आगे आने वाले समय में भी जारी रहने की संभावना है। लिहाजा लोग पारंपरिक स्रोतों से दूर हो रहे हैं।
हर देश में बढ़ रहे दाम:-कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते दुनियाभर में पेट्रोल के दाम बढ़े हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों को ईंधन का वैश्विक मानदंड माना जाता है। 2015 में ब्रेंट क्रूड का दाम 66 डॉलर प्रति बैरल था जो फिलहाल 79 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

 

 

 

नई दिल्‍ली। वीवीआइपी हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित बिचौलिये क्रिश्चियन माइकल की कोई भी दलील दुबई के कोर्ट में नहीं टिक पाई। आरोपी माइकल ने भारत में राजनीतिक रूप से प्रताड़ित किए जाने और नस्ली और धार्मिक भेदभाव की आशंका जताई थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार आपराधिक मामले में उसकी तलाश कर रही है, इसलिए उसे भारत में जाकर मामलों का सामना करना होगा।दुबई की अदालत के इस फैसले से मिशेल के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, भारतीय जांच एजेंसियों को अभी तक दुबई के अधिकारियों से आदेश की फॉर्मल कॉपी नहीं मिली है। लेकिन आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को देर रात बताया कि कुछ समय पहले भारत ने इस खाड़ी देश से औपचारिक रूप से क्रिश्चियन मिशेल जेम्स (54) का प्रत्यर्पण कराने की औपचारिक अपील की थी। भारत सरकार की यह अपील सीबीआइ और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से की गई आपराधिक जांच पर आधारित थी।मिशेल ने वकील ने दलील दी थी कि भारत में उसके साथ मानवीय व्यवहार होने की उम्‍मीद कम है। साथ ही उस पर राजनीतिक हस्तियों से संबंध होना का दबाव भी डाला जा सकता है। लेकिन दुबई कोर्ट ने मिशेल की दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, 'इस मामले में क्‍योंकि प्रत्यर्पण के अनुरोध की प्रकृति में राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय नहीं है, इसलिए दलील को स्‍वीकार नहीं किया जा सकता।'मिशेल के प्रत्यर्पण के आदेश को सीबीआइ और ईडी के पक्ष में बड़ी सफलता माना जा रहा है। ईडी ने मिशेल के खिलाफ जून, 2016 में जारी अपने आरोप पत्र में कहा है कि उसने अगस्ता वेस्टलैंड मामले में 225 करोड़ रुपये की दलाली ली थी। बता दें कि फरवरी 2017 में मिशेल को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया था। मिशेल के वकील ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) उनके मुवक्किल पर दबाव बना रही है। हालांकि जांच एजेंसी ने इन आरोपों से साफ इन्कार किया था।

नई दिल्ली। विमान यात्रा को सुगम और आरामदायक माध्यम माना जाता है लेकिन धरती से हजारों फुट ऊंचाई पर विमान के अंदर एक स्विच भी इंसान की जान के लिए बहुत अहमियत रखता है। गुरुवार को जेट एयरवेज की फ्लाइट में केबिन का एयर प्रेशर कम होने से कई यात्रियों के नाक और कान से खून बहने लगा। दरअसल ऐसा विमान के चालक दल की भूल से हुआ। फ्लाइट के उड़ान भरने पर केबिन के अंदर हवा का दबाव कम होने लगता है जिसे इस स्विच के जरिए सामान्य स्तर पर रखा जाता है।
...तो सांस लेना होगा मुश्किल:-विमान जैसे-जैसे धरती से ऊपर ऊंचाई पर पहुंचता है इसके अंदर हवा का दबाव कम होने लगता है और हवा में ऑक्सीजन कम होने लगती हैं। समुद्र तल से 10 हजार फुट ऊंचाई पर सिरदर्द और उल्टी जैसी परेशानियां होने लगती हैं।
ब्लीड वॉल्व:-टरबाइन आसमान से ऑक्सीजन को कंप्रेस कर अंदर लाते हैं और ब्लीड वॉल्व बंद कर इसे अंदर स्टोर कर लिया जाता है। अगर ये वॉल्व खुले रह जाएं तो ऑक्सीजन वापस बाहर निकलने लगती है।
कम दबाव में होते हैं ये बदलाव
- दबाव कम होने पर सांस लेने में परेशानी होती है।
- हवा में आद्रता (नमी) कम होने होने से ज्यादा प्यास लगती है।
- दबाव बहुत कम होने पर दिमाग ठीक से काम करना बंद कर देता है।
- स्वाद लेने और सूंघने की क्षमता 30 फीसद घट जाती है।
- शरीर में रक्त के बहाव में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ सकती है जो जोड़ों में दर्द, लकवा और मौत का कारण भी बन सकती है।
विमान में ऑक्सीजन;-विमान के अंदर हवा के दवाब को सामान्य स्तर पर रखा जाता है जिससे यात्रियों और चालक दल को सांस लेने में परेशानी न हो। विमान के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं रखे जा सकते हैं लिहाजा विमान के इंजन से जुड़े टरबाइन आसमान में मौजूद ऑक्सीजन को कंप्रेस कर अंदर लाते हैं। इंजन से होकर गुजरने की वजह से हवा का तापमान अधिक हो जाता है ऐसे में कूलिंग तकनीक के जरिए इसे ठंडा किया जाता है।
ऑटोमैटिक केबिन प्रेशर मशीन:-विमान में दो ऑटोमैटिक केबिन प्रेशर मशीन ऑक्सीजन के दबावको नियंत्रित रखती हैं। एक मशीन सामान्य तौर पर काम करती है जबकि दूसरी आपात स्थिति के लिए होती है। इसके अलावा एक गैर स्वचालित मोटर होता है। दोनों ऑटोमैटिक मशीनों के बंद होने पर इस मोटर का इस्तेमाल किया जाता है।

भुवनेश्‍वर। चक्रवाती तूफान 'डेई' ओडिशा के गोपालपुर से टकराने के बाद आगे निकल गया है। डेई शुक्रवार की सुबह गोपालपुर के पास समुद्र तट पर पहुंचा, जिसके कारण तेज हवाएं और बरसात होने लगी। बताया जा रहा है कि यहां अभी लगभग 23 किमी प्रतिघंटे की गति से हवाएं चल रही हैं। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा मछुआरों को समुद्री तटों से दूर रहने की सलाह दी गई है।भुवनेश्वर में मौसम विभाग के डायरेक्टर बीआर बिस्वास के अनुसार तूफान बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम से पश्चिम-उत्तर की तरफ गया है। यह गोपालपुर से 40 किमी दूर दक्षिणी ओडिशा पर केंद्रित हो सकता है। उनके अनुसार जैसे-जैसे यह आगे बढ़ेगा यह कमजोर होने लगेगा, लेकिन इसकी वजह से गजपति, गंजम, पुरी, रायागाडा, कालाहांडी, कोरापुत, मल्कानगिरी और नवरंगपुर में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। शनिवार को भी कई शहरों में भारी बारिश हो सकती है और 60-70 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं।फिलहाल इन दोनों राज्यों में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों के अलावा भी 6 अन्य राज्यों में साइक्लोन का असर भारी बारिश और तूफान के रूप में दिख सकता है। साइक्लोन का असर तेलंगाना, वेस्ट बंगाल के कुछ इलाकों, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और विदर्भ में भी भारी और सामान्य बारिश के रूप में देखा जा सकता है।मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों में ओडिशा के तटीय इलाकों और आंध्र प्रदेश में 55 किलोमीटर प्रति घंटा से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। वहीं, साइक्लोन के प्रभाव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में 21 सितंबर को कई इलाकों में भारी से भारी बारिश हो सकती है। इसका प्रभाव 22 सितंबर को भी रहेगा। तेलंगाना के कुछ इलाकों में 22 सिंतंबर को भारी से भारी बारिश की चेतावनी है।

मध्य प्रदेश के महू के पीपल के पत्ते के ताजिये की कहानी वर्षों पुरानी है। सबसे प्रमुख इस ताजिये के बिना महू में मोहर्रम की कल्पना तक नहीं की जा सकती है। इसे बनाने व निकालने में पांचवीं पीढ़ी पूरी शिद्दत के साथ परंपरा को निभा रही है। ये ताजिया गैस बत्ती की रोशनी में निकाला जाता है। शहर के सारे ताजिये इसके पीछे चलते हैं। इस ताजिये के निर्माण पर 15 वर्ष पूर्व तीन हजार रुपये का खर्च आता था, जो आज बढ़कर तीस हजार रुपये तक पहुंच गया है। सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक इस तजिये को आज भी सबसे पहले हिंदू परिवार कंधा देता है।शहर में मोहर्रम पर निकलने वाले पीपल के पत्ते के ताजिये का इतिहास भी रोचक व पुराना है। हरि फाटक निवासी नौशाद शाह व उनका परिवार हर वर्ष इस ताजिये को बिना किसी सरकारी आर्थिक मदद के बनाता है। नौशाद शाह की पांचवीं पीढ़ी है, जो इस ताजिये को बना रही है। इसके पूर्व उनके गुलबहार अली शाह, करामत अल्लादिया शाह, दादा गनी शाह व पिता अजीज शाह इस ताजिये को बनाते थे। नौशाद शाह ने बताया कि करीब 15 वर्ष पूर्व उन्होंने इस परंपरा को अपने हाथों में लिया था, तब से अब तक इसका खर्च दस गुना बढ़ गया है।
सात माले से आ गया एक माले पर;-नौशाद शाह के अनुसार सन् 1893 में यह ताजिया सात मालों का बनता था। बाद में अंग्रेजी हुकूमत के आदेश पर इसे तीन माले का कर दिया गया। अब लगातार शहर में बढ़ते तारों के जाल व संकरी गलियों के कारण इसे मात्र एक माले का कर दिया गया है।
...और भी हैं कई विशेषताएं:-इस ताजिये पर विद्युत सजावट नहीं की जाती। यह अब भी कत्ल की रात गैस बत्तियों की रोशनी में निकलता है। 19 से 21 ताजियों में सबसे आगे यही रहता है। यहां तक कि काली सय्यद की दरगाह पर सलामी देने भी यही एकमात्र ताजिया जाता है। जब तब यह वापस न आ जाए, सभी बाहर इंतजार करते हैं। यह एकमात्र ऐसा ताजिया भी है, जिसे सांप्रदायिक सौहार्द के नाम से जाना जाता है। इसे शहर का अरविंद गुरु शर्मा परिवार सबसे पहले कंधा देता है तब इसे उठाया जाता है।
चार महीने पहले से गलाकर रखते हैं पत्तों को:-यह ताजिया पीपल के पत्तों से बनाया जाता है। इसके लिए चार महीने पहले ही करीब एक हजार पत्तों को गलने के लिए रख दिया जाता है। इसमें से कुल पांच सौ पत्तों की लुग्दी से इस ताजिये का निर्माण किया जाता है। पूर्व में इसकी ऊंचाई 13 फीट हुआ करती थी, लेकिन शहर में फैल रहे तारों व केबल के जाल के कारण इस वर्ष इसकी ऊंचाई घटाकर दस फीट कर दी गई है।

राजकोट। गुजरात के गिर वन में 11 शेरों के शव पाए गए हैं। गुजरात सरकार ने तत्परता बरतते हुए इसकी जांच करने का आदेश दिया है। यह जानकारी गुरुवार को अधिकारी ने दी। अधिकारी ने कहा कि शेरों के शव गिर (पूर्वी) संभाग में पाए गए हैं। पिछले कुछ दिनों में खास तौर से दलखानिया रेंज में शव मिले हैं।उप वन संरक्षक पी. पुरुषोत्तम ने कहा, 'गिर पूर्वी वन रेंज से हमें 11 शेरों के शव मिले हैं।' प्रशासनिक लिहाज से गिर वन को पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में बांटा गया है।' अधिकारी ने कहा, 'हमने मृत पशुओं का विसरा नमूना जमा किया है और उसे जांच के लिए जूनागढ़ वेटनरी अस्पताल भेजा है। हम पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं।'बुधवार को वन में अमरेली जिले में राजुला के पास शेरों के शव मिले। उसी दिन दलखानिया रेंज क्षेत्र में तीन और शेर मृत पाए गए। अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सात और शेरों के शव मिले हैं। वन अधिकारी हितेश वामजा ने बताया कि ज्यादातर शेरों की मौत फेफड़ों में संक्रमण की वजह से हुई है। संक्रमण कुछ शेरों के शरीर में फैल गया था जिसकी वजह से इनकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि बाकी शेरों को उचित मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।हालांकि, वन्यजीव संरक्षण समिति के सदस्य जलपान रुपापारा ने कहा कि कुछ शेर आपस में भिड़ गए जिससे उनकी मौत हो गई। उन्होंने कहा 'कुछ मीडिया रिपोर्ट में शेरों की मौत की वजह फेफड़ों में संक्रमण बताया जा रहा है लेकिन ये गलत है। कुछ शेर बीमारी से मरे हैं जबकि तीन लड़ाई के कारण।'

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस अब नक्सलियों की गतिविधियों की निगरानी करने के लिए तगड़ा इंतजाम कर रही है। इसी कड़ी में मानवरहित ड्रोन खरीदने की तैयारियां हो रही है। खबर के मुताबिक अगले छह से सात महीने में नक्सली क्षेत्रों में संदिग्ध ठिकानों की निगरानी ड्रोन के जरिए होगी। पुलिस विभाग हाइटेक ड्रोन की मदद लेकर नक्सलियों के हर एक मूवमेंट को सर्विलांस में रखते हुए आगे की रणनीति तैयार करेगा।विभागीय सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन को गृह विभाग की ओर से पेश किए गए पुराने बजट में पांच करोड़ रुपये की लागत से मानवरहित ड्रोन खरीदने प्रस्ताव बनाया था। राज्य शासन ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। इधर इसके बाद पुलिस विभाग ड्रोन खरीदी के लिए तेजी से जुट गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार के अधीन भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड से पुलिस मुख्यालय ने अनुबंध किया है, जहां पांच करोड़ की लागत से ड्रोन तैयार करने की कवायद हो रही है। हालांकि विभागीय अफसर अधिकारिक तौर से कुछ भी नहीं कह रहे लेकिन जिस तरह की तैयारी है अगले छह से आठ महीने में मानवरहित ड्रोन के सहारे बीहड़ के क्षेत्रों में सर्विलांस सिस्टम और मजबूत हो सकेगा।
भेल पर एक नजर:-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड(भेल), भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन एक सैन्य एवं नागरिक उपकरण एवं संयंत्र निर्माणी है। भारत सरकार द्वारा सैन्य क्षेत्र की विशेष चुनौतीपूर्ण आवश्यकताएं पूरी करने हेतु रक्षा मन्त्रालय के अधीन इसकी स्थापना की गई थी। भाइलि सेना के लिए रडार, सन्चार तन्त्र, नौसैन्य प्रणालियां, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां, दूर संचार, दृश्य-श्रव्य प्रसारण, टैंक इलेक्ट्रॉनिकी, आप्टो इलेक्ट्रॉनिकी, सोलर फोटो वोल्टेइक प्रणालियां तथा अंतत: स्थापित सॉफ्टवेयर आदि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित उत्पाद प्रदान करती है।
अभी सीआरपीएफ की मदद:-सीआरपीएफ-कोबरा बटालियन के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस सुकमा, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, बीजापुर और जगदलपुर सहित दक्षिण बस्तर क्षेत्र में विशेष अभियान चला चुकी है। चार हेलीकॉप्टरों और तीन मानव रहित विमानों यूएवी से हवाई मदद मुहैया कराने के इंतजाम करवाए गए। अब राज्य सरकार के पास अपना यूएवी होगा। पूर्व में यूएवी के लिए भिलाई से उड़ान भरने इंतजाम किए गए थे।
हाइटेक कैमरा युक्त होगा यूएवी:-बेल द्वारा तैयार किया जाना वाला यूएवी पूरी तरह से हाइटेक होगा। कैमरा, सेटेलाइट कनेक्टिविटी के जरिए फोर्स जंगल के ऊपर हवाई निगरानी रखेगी। साफ मौसम में नक्सलियों की गतिविधियों का पता चल सकेगा।

नई दिल्‍ली। विश्‍व में बदलते राजनीतिक समीकरण काफी कुछ बयां कर रहे हैं। इन बदलते राजनीतिक समीकरणों का ही परिणाम है कि 1969 में रूस के साथ जंग लड़ चुका चीन अब उसका सहयोगी बन रहा है। आलम ये है कि चीन अब रूस से सैन्‍य उपकरण खरीद रहा है। इसके चलते अमेरिका ने चीन की सेना पर प्रतिबंध भी लगा दिए हैं। लेकिन इन दोनों देशों की बढ़ती मित्रता ने भारत को चिंता में डाल दिया है। आपको बता दें कि चीन रूस से एसयू 30 और एस-400 मिसाइल सिस्‍टम खरीद रहा है। यहां पर ये भी ध्‍यान में रखनी जरूरी है कि हाल ही में रूस-चीन ने मिलकर अब का सबसे बड़ा सैन्‍य अभ्‍यास वोस्‍तोक 2018 किया है। इसमें करीब तीन लाख सैनिकों ने हिस्‍सा लिया था जिसमें 30 विमानों के साथ चीन के 3,200 सैनिकों ने हिस्‍सा लिया था। इसको लेकर अमेरिका ने काफी समय आंख तरेर रखी हैं।
रूस-चीन दोस्‍ती:-ऑब्‍जरवर रिसर्च फाउंडेशन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत का मानना है कि कुछ क्षेत्रों में मतभेद होने के बावजूद चीन रूस का एक महत्वपूर्ण साझीदार बनकर उभरा है। उनके मुताबिक रूस के पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में तलखी आ रखी है। ऐसे में व्यापार और सैन्य सहयोग में वह चीन के काफी करीब आ गया है। कुछ साल पहले तक यह सोचा भी नहीं जा सकता था। इतना ही नहीं, रूस में चीन का निवेश लगातार बढ़ रहा है। चीन रूस से सबसे अधिक तेल की खरीद कर रहा है। इसके अलावा वह आने वाले समय में चीन के प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा स्रोत भी बन जाएगा। ऐसे वक्त में, जब ज्यादातर देशों के साथ रूस के कारोबारी रिश्ते लुढ़क रहे हैं, चीन उसके लिए एक बहुमूल्य ठिकाना साबित हो रहा है।
अमेरिका को चुनौती;-उनके मुताबिक अमेरिकी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने के लिए अब ये दोनों देश पहले से कहीं अधिक एक हुए हैं। देखा जाए, तो भारत के लिए यही असली चुनौती है। नई दिल्ली लंबे समय से मास्को के साथ करीबी रिश्ते का आग्रही रहा है। भारत के ऐतराज के बावजूद पाकिस्तान के साथ रूस के रिश्ते परवान चढ़ रहे हैं और मॉस्को अफगानिस्तान के मसले पर अपने सुर बदल रहा है। वह अब तालिबान के साथ बातचीत का मजबूत पक्षधर बन गया है। इतना ही नहीं, रूस ने भारत को यह सलाह भी दी है कि वह चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव को चुनौती न दे। जिस तरह से विभिन्न मोर्चों पर चीन ने भारत के लिए चुनौतियां खड़ी की हैं, उन्हें देखते हुए अगले महीने जब रूसी राष्ट्रपति भारत में होंगे, तब चीन और रूस की बढ़ती नजदीकियों का मसला उनके साथ बातचीत के एजेंडे में सबसे ऊपर होना चाहिए।
वोस्‍तोक 2018:-वोस्‍तोक 2018 में चीन को अपने साथ युद्धाभ्यास में शामिल करके रूस ने यह संकेत दिया है कि वह उसे आने वाले कुछ वर्षों में खतरे के रूप में नहीं देख रहा है। अब दोनों मिलकर अमेरिका से मोर्चा लेने के लिए आगे बढ़ सकते हैं। रूस और चीन, दोनों अपने तईं ट्रंप प्रशासन को जवाब देने में जुटे हुए हैं। चीन की प्राथमिकता जहां अमेरिका के साथ अपने आर्थिक संबंधों को स्थिर बनाने में है, वहीं रूस भी अपनी ताकत की हद समझता है। इस चीन-रूस मैत्री का वह जूनियर पार्टनर है और दक्षिण चीन सागर विवाद में उसकी ज्यादा रुचि भी नहीं है।
पाक के करीब रूस:-जहां तक भारत के परेशान होने का प्रश्‍न है तो भारत का अमेरिका के करीब जाना कहीं न कहीं इसका ही नतीजा है कि रूस चीन के करीब होता जा रहा है। आपको बता दें कि रूस लंबे समय से भारत की सुरक्षा की मजबूत रीढ़ की हड्डी बना रहा है। भारत की रक्षा प्रणालियों और सुरक्षा तंत्र में रूस का अहम योगदान रहा है। लेकिन हाल के कुछ समय में भारत और रूस के रिश्‍तों में गिरावट आई है। इस गिरावट की एक वजह ये भी है कि रूस का झुकाव न सिर्फ चीन बल्कि पाकिस्‍तान की तरफ भी हो रहा है। ऐसे में भारत की चिंता बढ़नी जरूरी है।

 

मुंबई। मुंबई-जयपुर फ्लाइट नंबर 9डब्ल्यू 0697 के जेट एयरवेज के कर्मचारियों और क्रू सदस्यों के खिलाफ शुक्रवार को मुंबई में यात्रियों की हत्या के प्रयास और कर्तव्यों का पालन न करने के लिए शिकायत दर्ज की गई है। गुरुवार को फ्लाइट में दबाव में कमी के कारण 166 में से 30 यात्रियों की नाक और कान से खून बहने लगा था।विमान में ये घटना क्रू मेंबर की चूक से हुई, जो केबिन प्रेशर को मेंटेन करने वाले बटन को दबाना भूल गया था। बताया जा रहा है कि विमान जब बीच हवा में पहुंचा, तो 30 यात्रियों के नाक और कान से खून निकलने लगा। ऐसे में विमान में हड़कंप मच गया।किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर, ऐसा क्‍यों हो रहा है। तब क्रू मेंबर को ध्‍यान आया कि उन्‍होंने केबिन प्रेशर मेंटेन करने वाले स्विच को नहीं दबाया है। इसके चलते विमान के ऊंचाई पर पहुंचने से लोग हवा की कमी महसूस करने लगे। ऐसे में कुछ लोगों के नाक और कान से खून निकलने लगा, वहीं काफी लोगों के सिर दर्द होने लगा।जेट एयरवेज के प्रवक्ता ने घटना पर सफाई देते हुए कहा, 'मुंबई से जयपुर जा रहे हमारे विमान को इसलिए वापस बुलाना पड़ा, क्योंकि केबिन प्रेशर कम हो गया था। 166 यात्रियों और 5 क्रू मेंबर्स समेत विमान को मुंबई में सामान्य ढंग से उतारा लिया गया है। सभी यात्री सुरक्षित हैं। विमान में जिन यात्रियों ने नाक और कान से ब्लीडिंग की शिकायत की थी, उन्हें फर्स्ट एड मुहैया कराया गया है। अब स्थिति सामान्‍य है।' उन्‍होंने बताया कि 'जिस क्रू मेंबर की गलती से यह हादसा हुआ, उसे तत्‍काल प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया गया है। साथ ही मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।'नागरिक उड्डयन के महानिदेशालय (डीजीसीए) ने बताया है कि हादसे के सामने आने के बाद क्रू मेंबर्स को ड्यूटी से तुरंत हटा दिया गया है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

नई दिल्ली। अजवाइन एक झाड़ीनुमा वनस्पति है जो मसाला एवं औषधि के रूप में प्रयुक्त होती है। छोटे पैमाने पर इसकी खेती की जाती है। अजवाइन के बीज को कैरम सीड्स भी कहा जाता है। इसका इस्‍तेमाल पेट से संबंध‍ित रोगों को मिटाने के लिए कि‍या जाता है। इसका चूरन बनाकर खाने से हाजमा ठीक रहता और मेटाबॉलिज्म भी शरीर में बढता है। वहीं एक चम्‍मच अजवाइन को रात में पानी में भिगोकर सुबह वही पानी से पेट की चर्बी कम होती है। अजवाइन सबके घर में आसानी से उपलब्‍ध होती है और यह तुरंत फायदा भी करती है।अजवाइन को सेक कर चूर्ण बनाकर शरीर की गर्मी कम होने या पसीना आने पर पैर के तलवों और शरीर पर मालिश करने से उष्णता आती है। अजवाइन के 4 रत्ती फूल, 4 रत्ती गिलोय सत्व के साथ मिलाकर चर्म रोगों में ऊंगलियों के काम न करने पर, वायु के दर्द, रक्तचाप और ब्लडप्रेशर में लाभप्रद सिद्ध होता है। अजवाइन के फूल को शहद में मिलाकर ले तो कफ आना रुकता है। अजवाइन का किसी भी रूप में सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। अजवाइन को गुनगुने पानी के साथ साबुत भी चबाया जा सकता है और अजवाइन को पानी में उबालकर भी पिया जा सकता है। आपने शायद अपनी दादी मां को या उनकी उम्र के लोगों को अजवाइन का पानी पीते देखा होगा।
क्‍या है एसिडिटी:-एसिडिटी यानी पेट में गैस बनना एक आम समस्‍या है। इसके कारण पेट में दर्द, जलन, गैस बनना, छाती में जलन, खाने के बाद पेट भारी लगना, खाना पचने में समस्‍या, भूख कम लगना, पेट भारी रहना और पेट साफ न होने जैसी समस्‍यायें एसिडिटी के कारण होती हैं। शराब पीने से, मिर्च-मसाला, तली-भुनी चीजें ज्यादा खाने से, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, उड़द की दाल के अलावा कोल्ड ड्रिंक के सेवन से पेट में एसिडिटी की समस्‍या अधिक होती है।बार-बार अपानवायु उत्सर्जित होना, पेट से बदबूदार गैस निकलना, डकारें आना, पेट में गुड़गुड़ाहट होना जैसी समस्‍यायें इसके मुख्य लक्षण हैं। जिनकी पाचन शक्ति अक्सर खराब रहती है और जो प्राय: कब्ज के शिकार रहते हैं, उन लोगों को गैस की समस्या हो जाती है। गैस की समस्या से रक्त संचार व आंतों की गतिविधि पर भी बुरा असर पड़ता है। इसके कारण ब्लडप्रेशर या आंतों की बीमारियां भी शुरू हो जाती हैं।
अजवाइन है फायदेमंद:-एसिडिटी की समस्‍या से बचाव के लिए अजवाइन का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। अजवाइन को कैरम सीड भी बोला जाता है, इसमें थिम्‍बोल नामक केमिकल होता है जो पाचन क्रिया को सुचारु करता है जिससे एसिडिटी की समस्‍या नहीं होती है। इसके अलावा यह केमिकल गैस बनने की समस्‍या से भी छुटकारा दिलाता है। यानी आपको कभी भी गैस बनने की शिकायत नहीं होगी। आज हम आपको बता रहे हैं कि अजवाइन का पानी हमें किन बीमारियों से निजात दिलाता है।
कैसे करें प्रयोग
1. बिगड़े लाइफस्टाइल के चलते आजकल हर दूसरा आदमी मुधमेह यानि कि डायबिटीज की बीमारी से घिरा हुआ है। अजवाइन या अजवाइन का पानी डायबिटीज जैसी घातक बीमारी को जड़ से खत्‍म करने में कारगार है।
2. अजवाइन का पानी नियमित रूप से पीने से दिल की बीमारियों से निजात पाई जा सकती है।
3. अजवाइन में पाया जाने वाला थाइमोल पेट से गैस्ट्रिक रिहाई जूस बाहर निकालता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है। यह अपच, पेट फूलना व मतली आदि को भी दूर करता है।
4. अजवाइन हजम शक्ति को बढ़ाने में भी मदद करता है। इसका इस्तेमाल बदहजमी, शिशुओं के पेट में दर्द आदि के इलाज में उपयोग किया जाता है।
5. अजवाइन न केवल पाचन को बेहतर बनाती है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाती है। इसके पानी को रोज सुबह पीने से मोटापे की समस्या से निजात मिलती है और पेट सुचारू ढ़ंग से काम करता है।
6. अजवाइन को उबालने पर या फिर इसके पानी को पीते समय नाक के माध्यम से जाने वाली भाप से सिर दर्द ठीक होता है और कंजेशन की समस्या से भी राहत मिलती है।
7. जैसा कि हम जानते हैं कि अजवाइन का पानी पाचन को सुधारता है, साथ ही इसकी भाप से मतली की समस्या से भी राहत मिलती है। इसका पानी पीने से उल्टी आने की समस्या भी दूर होती है।
8. अजवाइन को इसके दांत दर्द से राहत दिलाने व ओरल हैल्थ को बहाल करने के लिये भी जाना जाता है। दांत में दर्द के लिये आयुर्वेदिक डॉक्टर अजवाइन के पानी से गरारे करने की सलाह भी देते हैं।

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