Editor

Editor

वायनाड। नन दुष्‍कर्म मामले में आज बिशप फ्रैंको मुलक्‍कल पाला मजिस्‍ट्रेट कोर्ट में पेश किए जाएंगे। सूत्रों की मानें तो पुलिस कोर्ट में बिशप के पॉलीग्राफ टेस्‍ट की मांग कर सकती है। इधर बिशप की गिरफ्तारी के बाद भी मामला शांत होता नहीं दिख रहा है। कोच्चि में ननों के प्रदर्शन में शामिल होने वाली एक नन ने दावा किया है कि उसे चर्च की गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया है। वहीं एक पादरी के मुताबिक, उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। बिशप की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पांच ननों ने कोच्चि में केरल हाई कोर्ट के पास 13 दिन तक प्रदर्शन किया था। तीन दिन की पूछताछ के बाद शुक्रवार को पुलिस ने बिशप को गिरफ्तार किया था।कोच्चि से रविवार सुबह वायनाड लौटी नन ने कहा, 'मुझे कोई लिखित आदेश नहीं दिए गए हैं। मुझे मदर सुपीरियर ने चर्च की किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होने के लिए मौखिक रूप से सूचित किया है।' इस संबंध में वायनाड के सेंट मैरी चर्च के प्रतिनिधि फादर स्टीफन कोटक्कल ने कहा कि नन को चर्च की गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया है।मीडिया में चर्चा है कि डायोसिस ने इसी नन के खिलाफ तीन माह पहले अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। नन पर चर्च के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने, लोन लेकर कार खरीदने और सार्वजनिक समारोह के दौरान नन की वेशभूषा में नहीं रहने का आरोप है। हालांकि नन ने इससे इनकार किया है।

बालासोर। भारत ने ओडिशा के मिसाइल परीक्षण केन्द्र से इंटरसेप्टर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इसके साथ ही भारत ने दो परतों वाली बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली।बता दें कि ओडिशा में चांदीपुर के दक्षिण में लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप) से रविवार की रात आठ बजकर पांच मिनट पर इंटरसेप्टर मिसाइल का परीक्षण किया गया। इस परीक्षण केंद्र को पहले व्हीलर द्वीप के नाम से जाना जाता था.बताया जाता है कि पृथ्वी रक्षा यान (पीडीवी) इंटरसेप्टर और लक्ष्य मिसाइल दोनों सफलतापूर्वक जुड़ गए थे। पीडीवी मिशन पृथ्वी के वायुमंडल में 50 किलोमीटर से ऊपर की ऊंचाई पर लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए है। इस तकनीक को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। इससे पहले 11 फरवरी, 2017 को इसी स्थान से इंटरसेप्टर का परीक्षण किया गया था।

नई दिल्ली। हम सबने बचपन से सुना है कि रोज अखरोट खाने से दिमाग तेज होता है, लेकिन कभी सोचा है ऐसा क्यों है। क्योंकि उसका आकार दिमाग की तरह होता है। यह कुदरत का करिश्मा है कि हमारे आसपास ऐसे फल, अनाज और सब्जियां हैं, जिनका आकार हमारे शरीर के किसी न किसी अंग से मिलता है और उन्हें खाने से शरीर विशेष की बीमारी होने का जोखिम कम किया जा सकता है। यही नहीं, अगर बीमारी हो जाए तो उसके ठीक होने की संभावना भी होती है।
हम जैसा खाते हैं वैसा ही होते हैं;-यह प्राचीन मान्यता है कि हम जैसा खाते हैं, वैसा ही होते हैं। इसलिए सदियों से सात्विक भोजन पर जोर दिया जाता रहा है। अब आधुनिक शोधों से पता चल रहा है कि ये मान्यताएं बिल्कुल सही हैं। इसी क्रम में हम आपका उन अनाज, फल और सब्जियों से परिचय करा रहे हैं, जो शरीर के खास हिस्से के लिए फायदेमंद होते हैं और आपको सेहतमंद रखते हैं।
गाजर और रोशनी का रिश्ता:-अखरोट के बारे में हम बता चुके हैं। इस क्रम में अगला नंबर गाजर का है। इसे काटकर देखिए तो यह बिल्कुल आंखों के बीच के गोल हिस्से की तरह दिखता है। तभी तो इसे खाने से आंखों की रोशनी ठीक रहती है। इसमें विटामिन और बीटा केरोटीन जैसे एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी को खराब होने से बचाते हैं।
स्तन कैंसर से क्यों बचाता है संतरा:-संतरे को बीच के काटने पर जो आकृति उभरती है वह स्तन के मैमोग्राम से मिलती जुलती है। संतरे एवं साइट्रिक एसिड वाले इसी आकार के अन्य फलों में पाया जाने वाला लिमोनॉयड्स का प्रयोगशाला में जानवरों पर प्रयोग सफल रहा है और इससे कैंसर का असर करने में मदद मिली है।
दिल का दोस्त है टमाटर:-टमाटर को काटने पर उसके अंदर से भी दिल की तरह चैंबर निकलते हैं। वैज्ञानिक शोधों से साबित हुआ है कि इसमें पाए जाने वाले लाइकोपिन नामक पदार्थ के कारण टमाटर खाने वालों से दिल की बीमारियां दूर रहती हैं। टमाटर में थोड़ा मक्खन, घी या कोई भी फैट मिलाकर खाने से लाइकोपिन का असर दस गुना तक बढ़ जाता है।
अदरक को ध्यान से देखिए;-अदरक के फायदे के कायल लोग से इसके मुरीद है लेकिन कई लोग इसके स्वाद के कारण इससे कोसों दूर रहना पसंद करते हैं। खैर, कभी ध्यान से इसे देखिए। यह बिल्कुल आमाशय (स्टमक) की तरह दिखता है। अपने देश में तो इसके गुणों से हम सदियों से परिचित हैं, लेकिन यूएस ड्रग एडिमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) तक ने इसका लोहा मान लिया है। इसकी सूची में अदरक के तेल को अजीर्ण और उल्टी में इस्तेमाल के लिए रामबाण बताया गया है।
एक बींस का नाम किडनी बींस क्यों है:-कभी आपने सोचा है कि राजमा और फ्रेंच बींस या इस परिवार के अन्य बींस का आकार किडनी की तरह क्यों होता है। क्योंकि इनके सेवन से किडनी सेहमंद रहती है। यहां तक कि एक बींस का नाम ही किडनी बींस है। इसमें फाइबर, मैग्नीशियम और पोटैशियम पाया है। फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है, जबकि मैग्नीशियम और पोटैशियम किडनी स्टोन की समस्या से बचाता है।
आपके चेहरे पर मुस्कान लाता है केला:-केला शायद दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फल है और इसे कंप्लीट फूड भी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अंदर ट्रिप्टोफैन नामक एक प्रोटीन पाया जाता है जो केले के पचने के बाद सेरोटोनिन में बदल जाता है। यही सेरोटोनिन हमारे मूड को बुस्ट करता है। इसलिए, अगली बार जब भी आपका मूड डाउन हो तो उसे अप करने के लिए केला जरूर खाइएगा। शर्तिया फायदा होगा।
मशरूम भले न खाते हों लेकिन फायदा जान लीजिए:-मशरूम को बीच के काटने पर यह बिल्कुल हमारे कान की तरह दिखता है। कान से ऊंचा सुनने वालों में मशरूम के सेवन से सुधार देखने को मिला है। कान के अलावा यह हड्डियों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें काफी मात्रा में विटामिन डी भी पाया जाता है।
जानिए, शकरकंद और पैंक्रियाज का रिश्ता:-पैंक्रियाज का हमारे शरीर में काफी अहम रोल होता है। इस अंग का आकार शकरकंद से काफी मिलता-जुलता है। शोध से पता चला है कि शकरकंद में पाया जाने वाले तत्व पैंक्रियाज के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को ठीक रखते हैं जिससे यह अंग सामान्य रूप से काम करता है।
अस्थमा से क्यों बचाता है अंगूर:-हमारे फेफड़े के अंदर अंगूर के आकार की कई थैलीनुमा ग्रंथियां होती हैं जो कॉर्बन डाइ ऑक्साइड और ऑक्सीजन के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। इन्हें एल्वियोली कहा जाता है। अंगूर के सेवन से फेफड़े के संक्रमण और एलर्जी से होने वाली अस्थमा जैसी बीमारियों से लड़ने में फायदा मिलता है।
प्याज के फायदे जान हो जाएंगे हैरान:-प्याज को काटकर सलाद के रूप में खूब खाया जाता है। लोग इसे अलग-अलग आकार में काटते हैं, लेकिन गभी गोलाकार काटकर देखिए। यह आकार बिल्कुल इनसान की कोशिकाओं से मिलता है। शोधों से पता चला है कि प्याज में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल कोशिकाओं के अपशिष्ट पदार्थों की सफाई करते हैं और उन्हें स्वस्थ रखते हैं। हम सभी जानते हैं कि ये कोशिकाएं ही जीवन का आधार हैं। कोशिकाओं से ही मिलकर ऊतक (टिश्यू) बनते हैं और कई टिश्यू मिलकर ऑरगन यानी अंग का निर्माण करते हैं।

 

 

खजुराहो। चंदेल राजाओं द्वारा 11वीं सदी में बनाए गए खजुराहो के मंदिर बुंदेलखंड ही नहीं पूरे मध्‍यप्रदेश पर्यटन का सिरमौर है, लेकिन, मेंटेनेंस के नाम पर यह पहचान धुंधली और खंडित होती जा रही है। मंदिरों के रख-रखाव के नाम पर कितनी गंभीर लीपापोती हो रही है, इसकी गवाही खुद खजुराहो के मंदिर, उनकी दीवारें, गुंबद व कलश दे रहे हैं। 50 साल पहले खजुराहो के सभी मंदिर जिस रूप में थे उनमें से अधिकांश अब वैसे नहीं रहे।आधी सदी से आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया (एएसआइ) खजुराहो के मंदिरों का मेंटेनेंस करवा रही है। स्थिति यह है कि जिस मंदिर की दीवार, गुंबद या फिर कलश की मरम्मत होती है, वह अपना मूल रूप खो देता है। नक्काशी व मूर्तिदार पत्थरों को हटाकर उनकी जगह प्लेन पत्थर लगा दिए जाते हैं। जिस नक्काशी को जीर्ण बताकर हटा दिया जाता है, उसकी जगह लगाया पत्थर, सबसे अलग व भद्दा दिखता है। परिसर में ऐसे गई गुंबद, कलश व दीवारें हैं जिनमें नक्काशीदार पत्थरों की जगह भारी मात्रा में सादा पत्थर लगाए गए हैं। लीपापोती इस दर्जे की हुई है कि कई मंदिरों के गुंबद व कलश की नक्काशी को विलुप्त कर दिया गया है। उनकी जगह सपाट पत्थरों के गुंबद-कलश बना दिए गए।
खो रही पहचान:-खजुराहो में मंदिरों की तीन श्रेणी वेस्टर्न, ईस्टर्न और सदर्न हैं, जिनमें कुल 25 मंदिर हैं। हर मंदिर पर इंसान के जन्म से लेकर मरण तक की कलाकृतियां पत्थरों पर अंकित हैं। परिसर की दीवारों, मंदिर के अंदर-बाहर और गुंबद तक में महीन नक्काशी है। पत्थर पर उकेरी गई यही कलाकृतियां खजुराहो की पहचान हैं, जिसे देखने सात समंदर पार से विदेशी भी आते हैं, लेकिन, मंदिरों की यही कलाकृति गायब हो रही हैं। राजस्थान, उड़ीसा में कारीगरों की भरमार ऐसा भी नहीं है कि देश में ऐसे कारीगर न हों जो खजुराहो के मंदिरों जैसी नक्काशी पत्थरों पर जस की तस न उकेर सकें। एएसआइ के अफसर भी मानते हैं कि राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, बारां के अलावा उड़ीसा के भुवनेश्वर, कोणार्क में ऐसे कारीगरों की भरमार है जो ऐतिहासिक नक्काशी को हूबहू आकार दे देते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि उन कारीगरों का उपयोग खजुराहो में क्यों नहीं किया जा रहा?
नहीं मिला संतोषजनक जवाब:-हमारे सहयोगी न्‍यूजपेपर नईदुनिया के संवाददाता ने खजुराहो में एएसआइ के कर्ताधर्ताओं से ऐसे मेंटेनेंस को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने इस लापरवाही से खुद हो अलग कर लिया और बस इतना ही कहा कि यह पूर्व में रहे अफसरों ने किया है, अब हम क्या कर सकते हैं। खजुराहो के संरक्षण सहायक जीके शर्मा ने कहा कि मरम्मत तो एएसआइ ही कराता है, लेकिन यह मरम्मत मेरे समय में नहीं हुई। पूर्व के अफसरों ने ऐसा क्यों किया? यह मैं कैसे बता सकता हूं। हां यह बात सही है कि देश में आज भी ऐसे कई कारीगर हैं जो पुरातनकाल की नक्काशी को हूबहू बना देते हैं। ऐसे कारीगरों का उपयोग यहां क्यों नहीं हुआ, इस सवाल का जवाब भी पुराने अफसर दे सकते हैं।

नई दिल्ली। ट्रेन में यात्रा के दौरान महिलाओं से छेड़खानी और उन्हें परेशान करने वाले मनचलों की अब खैर नहीं होगी। ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने रेलवे अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। प्रस्तावित कानून के तहत अगर कोई छेड़छाड़ करता पकड़ा जाता है, तो उसे 3 साल कैद की सजा हो सकती है। हाल ही में हजरत निजामुद्दीन-बैंगलोर राजधानी एक्सप्रेस में नशे में धुत फौजी द्वारा महिला से छेड़खानी का मामला सामने आया था। महिला ने रेल मंत्री को ट्वीट किया था, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।रेलवे के एक अधिकारी का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो महिलाओं की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले को 3 साल तक कैद की सजा मिल सकेगी। फिलहाल भारतीय दंड संहिता (आअपीसी) के तहत इस तरह के मामलों में अधिकतम एक साल की सजा का प्रावधान है।
बढ़ी हैं छेड़खानी की घटनाएं:-राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में रेल मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि 2014 से 2016 के बीच रेल सफर के दौरान महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में 35 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। 2014 में जहां 448 मामले सामने आए थे। वहीं, 2015 में 553 और 2016 में 606 मामले सामने आए।
और क्या बदलाव चाहता है रेलवे;-आरपीएफ की ओर से महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में यात्रा करने वाले पुरुषों पर लगने वाले जुर्माने को भी 500 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये करने का प्रस्ताव दिया है। एक अन्य प्रस्ताव में ई-टिकटिंग में जालसाजी करने वालों पर भी दो लाख का जुर्माना लगाने और तीन साल की सजा की बात कही गई है।

 

सिलीगुड़ी। यदि आप समझते हैं कि रेलवे की कमाई का जरिया यात्री और मालभाड़ा ही है तो आप गलत हैं। रिक्तियों के लिए आवेदन भरने के लिए अभ्यर्थियों से जो शुल्क लिया जाता है, उससे होने वाली कमाई भी कम नहीं है। 2017-18 को ही लें, तो इस एक साल में रेलवे ने बेरोजगारों से फॉर्म भरवाकर आठ अरब 86 करो़ड़ 85 लाख 49 हजार रुपये कमाए।सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत मांगी गई जानकारी में यह बात सामने आई है। आरटीआई एक्टिविस्ट मिंटू प्रसाद जायसवाल ने सूचना के अधिकार के तहत रेलवे से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जैसे खाने की क्वालिटी में सुधार पर कितना खर्च हुआ। प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री से कितने राजस्व की प्राप्ति हुई। इनमें मुख्य था 2014 से अब तक कितनी रिक्तियां निकाली गई। उनसे आवेदन शुल्क के रूप में कितना राजस्व मिला। अन्य का जवाब तो अभी तक नहीं मिला। इतना भर लिखकर आया कि पत्र को संबंधित विभाग में भेज दिया गया है। सिर्फ रिक्तियों के लिए भरे गए आवेदन के साथ जमा शुल्क की राशि की जानकारी दी गई है।बताया गया है कि 2017-18 में विभिन्न पदों के लिए 90 हजार रिक्तियां निकाली गई थीं। इनके सापेक्ष दो करो़ड़ 80 लाख आवेदन आए। साथ में शुल्क के रूप में आठ अरब 86 करोड़ 85 लाख 49 हजार रुपये रेलवे को मिले। गौरतलब है कि आरटीआई से ही जानकारी मिली थी कि आरक्षित टिकटों को निरस्त कराने से 2016-17 में रेलवे को 14 अरब रुपये से ज्यादा मिले थे, जबकि इसके पहले यह रकम करोड़ में ही होती थी

नई द‍िल्‍ली। केरल में एक बार फिर संकट के बादल छा गए हैं। अभी मानसूनी बारिश से तबाह हुए केरल फिर से खड़ा होने की कोशिश कर ही रहा था कि 24 सितंबर और 26 सितंबर के लिए मौसम विभाग ने फ‍िर अलर्ट जारी कर द‍िया है। राज्य के उन्हीं जिलों के लिए यलो वार्निंग जारी की गई है, जहां भारी नुकसान हुआ था।मौसम विभाग की इस चेतावनी ने राज्य के लोगों और पूरे देश को फिर से चिंता में डाल दिया है। इसके साथ ही केरल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जिले के सभी तंत्रों को अलर्ट पर रहने की चेतावनी जारी की है। आपदा प्रबंधन ने सभी विभागों से अलर्ट से निपटने के लिए जरूरी तैयारी रखने को कहा है।मौसम विभाग ने 25 सितंबर के लिए इडुक्‍की, वयनाड, पत्तनमत्तिट्टा जिलों के ल‍िए पीला अलर्ट जारी क‍िया है। वहीं पालाक्काड, इडक्‍की और त्रिशूर ज‍िलों के लिए 26 स‍ितंबर को भी येलो अलर्ट जारी रहेंगे। इन इलाकों में तेज बार‍िश की संभावना है।यहां मौसम व‍िभाग के अनुसार 64 मिलीमीटर से लेकर 124 म‍िलीमीटर बारिश हो सकती है। यह जानकारी केरल सीएमओ ने दी है।इधर, रव‍िवार से हो रही तेज बार‍िश के कारण ह‍िमाचल प्रशासन ने राज्‍य के आठ जिलों में 24 स‍ितंबर को स्‍कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया है। यह आठों जिले पहाड़ी क्षेत्र में आते हैं। कुल्‍लू, किन्‍नौर, चंबा, कांगरा, बिलासपुर, स‍िरमौर, मंडी और शिमला में तेज बारिश के कारण प्रशासन ने स्‍कूल बंद रखने का न‍िर्णय लिया है।तेज बार‍िश के कारण मंडी जिले में नदी का पानी हाइवे पर आ गया है। इस कारण आवागमन बाधित हो गया है। तेज बारिश ने आम जनजीवन को परेशान कर द‍िया है। कुल्लू के ड‍िप्‍टी कमिश्‍नर यूनुस खान ने बताया क‍ि लोगों के पुनर्वास के ल‍िए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। हम लोगों से नदी के पास ना जाने की अपील कर रहे हैं।तेज बार‍िश के कारण नदी का जलस्‍तर बढ़ गया है और बाढ़ जैसे हालात हैं। बता दें क‍ि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक बस को नदी में आए बाढ़ में बहते देखा गया था। इन इलाकों में राहत का काम तेज चल रहा है। आर्मी ने अब तक कुल्‍लू में 19 लोगों को एयरल‍िफ्ट किया है।

मुंबई। आर्थिक भगोड़ा मामले में विजय माल्या ने आज अपना जवाब मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट में दायर कर दिया है। इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने माल्या को जवाब देने के लिए पहले 3 सप्ताह तक का समय दिया था, जिसकी अवधि अब खत्म हो रही थी। मामले में कोर्ट सोमवार को ही 2.45 पर फैसला सुनाएगा। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने माल्या को आर्थिक भगोड़ा घोषित करने के लिए अर्जी दायर की थी। इस अर्जी का जवाब देने के लिए माल्या ने वक्त मांगा था। विजय माल्या पर आरोप है कि वह कई बैकों से करीब 9,990 करोड़ रुपये का लोन लेकर फरार हैं। फिलहाल माल्या लंदन में हैं और वहां उनके खिलाफ भारत प्रत्यर्पण का केस चल रहा है। माल्या पर वह केस भारत सरकार की तरफ से सीबीआई और ईडी ने ही किया था।
क्या है आर्थिक भगोड़ा कानून:-नए अधिनियम के तहत जिसे आर्थिक भगोड़ा घोषित किया जाता है, उसकी सम्पत्ति तुरंत प्रभाव से जब्त कर ली जाती है। आर्थिक भगोड़ा वह होता है जिसके विरुद्ध सूचीबद्द अपराधों के लिए गिर‌फ्तारी का वारंट जारी किया गया होता है।साथ ही ऐसा व्यक्ति भारत को छोड़ चुका है, ताकि यहां हो रही आपराधिक कार्रवाई से बच सके या वह विदेश में हो और इस कार्रवाई से बचने के लिए भारत आने से मना कर रहा है। इस अध्यादेश के तहत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के धोखाधड़ी, चेक अनादर और लोन डिफाल्ट के मामले आते हैं।

सूरत। गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान जाम में फंसे एक कार चालक ने रविवार को अपना आपा खो दिया। वह कार से उतरा और लोगों पर ताबड़तोड़ चाकू चलाना शुरू कर दिया। हमले में घायल पांच लोगों में एक ने बाद में दम तोड़ दिया। पुलिस ने तत्‍परता दिखाते हुए आरोपी कार चालक चैतन्य रावल को गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस ने बताया कि सूरत के सायन टावर के पास गणेश विसर्जन का जुलूस निकल रहा था। इससे सड़क पर जाम लग गया। कार निकालने को लेकर चालक रावल की जुलूस में शामिल कुछ लोगों से बहस हो गई। मामला बढ़ने पर रावल ने लोगों पर ताबड़तोड़ चाकू चलाना शुरू कर दिया।पुलिस ने पांचों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान एक घायल धवन पटेल की मौत हो गई। पुलिस ने रावल को घटनास्थल से ही गिरफ्तार कर लिया और सायन थाने ले गई।इस दौरान थाने के बाहर भीड़ जमा हो गई और हंगामा करते हुए आरोपित को सौंपने की मांग की। सूरत रेंज के आइजी राजकुमार पांडियन ने कहा कि गुस्साए लोगों ने आरोपित की कार को आग लगा दी और पुलिस पर भी पथराव किया।

नई दिल्ली। भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसका कर्ता-धर्ता होता है किसान, जिसको हम अन्नदाता भी कहते हैं। जो हमारे लिए अनाज उगाता है, ताकि देश में कोई भूखा न रहे। इतना ही नहीं, देश की अर्थव्यवस्था में भी कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि इसके बाद भी आपने अन्नदाताओं की बदहाली की तस्वीरें कई बार देखी होंगी। कभी मौसम की मार, तो कभी आर्थिक तंगी ने अन्नदाता को कमजोर बना दिया।हालांकि, डिजिटलाइजेशन के इस दौर में किसानों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आई है 'ट्रैक्टर एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड' (टीएएफई) नाम की कंपनी। अब अगर किसी किसान के पास खेत जोतने के लिए ट्रैक्टर या फिर खेती से जुड़ी उपयुक्त मशीन नहीं है, तो उसे परेशान होने की जरूरत नहीं है। अब कोई भी किसान मोबाइल ऐप के जरिये किसी अन्य कृषक को अपना ट्रैक्टर किराए पर दे सकता है या दूसरे किसान से उसकी मशीन किराए पर मांग सकता है।
आपकी जरूरत ऐसे पूरा करेगा यह ऐप:-पिछले हफ्ते ट्रैक्टर एंड फार्म इक्विपमेंट ने अपने जेफार्म सर्विसेज के जरिए इस सुविधा की राष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत करने की घोषणा की है। कंपनी ने बताया कि जो किसान अपने मौजूदा ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों को किराये पर देना चाहते हैं, वे जेफार्म सर्विसेज ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस ऐप के 'किसान-से-किसान-मॉडल' के माध्यम से उन्हें सीधे उन किसानों से जोड़ा जाएगा, तो उन्हें किराए पर लेना चाहते हैं। ऐसे में दोनों की जरूरत पूरी हो सकेगी।
ऐप आपके लिए ऐसे होगा फायदेमंद;-जेफार्म सर्विसेज किसानों को ट्रैक्टरों और आधुनिक कृषि मशीनरी को किराये पर लेने और उन्हें किसान उद्यमियों से संपर्क करने, किराये की कीमतों को बातचीत से तय करने और अपनी संबंधित आवश्यकता को पूरा करने की सुविधा सेवाएं मुफ्त में प्रदान करेगा।
टीएएफई ने बताया अपना उद्देश्य:-टीएएफई के अध्यक्ष और मुख्य कार्याधिकारी सीइओ मल्लिका श्रीनिवासन ने बताया, 'हमारा उद्देश्य उन लाखों किसानों तक पहुंच बनाना है, जिनके पास कृषि मशीनीकरण और आधुनिक तकनीक की पहुंच नहीं है। साथ ही, 2022 तक कृषि आय को दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण की ओर इस प्रगति को गति प्रदान करना है।'
इन चार राज्यों से सेवा की शुरुआत:-कंपनी ने कहा कि जेफार्म सर्विसेज को फिलहाल प्रायोगिक तौर पर मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में शुरू किया गया है, जो लगभग 60,000 उपयोगकर्ताओं (किसानों) को सीधे लाभ पहुंचाते हैं। टीएएफई ने जेएफएम सेवा मंच को शुरू करने के लिए बिहार, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और असम जैसी विभिन्न राज्य सरकारों के साथ साझेदारी की है।
अगर स्मार्टफोन नहीं है तो....:-भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन कृषि क्षेत्र पीछे छूट रहा है। जबकि भारत के करीब 65 फीसद लोग कृषि पर निर्भर करते हैं। हालांकि देश में किसानों का एक बड़े हिस्से तक कृषि मशीनीकरण और आधुनिक तकनीक की पहुंच नहीं है। इस पहुंच के लिए पुल का काम करने का बीड़ा टीएएफई ने उठाया है। टीएएफई ने कहा कि देशभर में भूमि के छोटे पट्टे रखने वाले किसान अब अपनी उत्पादकता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए अत्याधुनिक कृषि उपकरण किराए पर ले सकते हैं।सबसे खास बात यह है कि इस ऐप का इस्तेमाल कम लागत वाले एंड्रायड फोन पर किया जा सकता है। इतना ही नहीं, इसे बहुत कम डेटा पर चलाने के लिए डिजाइन किया गया है। किसान जिनके पास स्मार्ट या फीचर फोन नहीं हैं, वे टोल-फ्री हेल्पलाइन का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, यह मंच बिना किसी शुल्क के स्थानीय मौसम, बाजार, कृषि-समाचार और मंडी की कीमतों के बारे में समय-समय पर महत्वपूर्ण सूचना भी प्रदान करेगा।

Page 1 of 3153

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें