अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन की वार्षिक 36वीं कन्वैंशन

12 July 2018
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*श्री श्री रविशंकर ने विश्व भर के फिजिशियंस को योग व साधना से करवाया रू-ब-रू
*उपस्थिति को एसोसिएशन के कार्यों से करवाया अवगत
कोलम्बस (ओहियो) (हम हिन्दुस्तानी)- अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन की वार्षिक 36वीं कन्वैंशन के दूसरे चरण में भारतीय आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जहां विशेषातिथि के रूप में उपस्थित हुए वहीं पर भाजपा नेत्री एवं संसद सदस्य व अभिनेत्री हेमामालिनी मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित हुए। ग्रेटर कोलम्बस कन्वैंशन सैंटर में में आयोजित इस कन्वैंशन में विशेष रूप से शामिल किए गए ध्यान एवं आध्यात्मिक सत्र की अध्यक्षता करते हुए भारतीय आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने जहां उपस्थिति को योग की महत्ता के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी वहीं पर उन्होंने ध्यान की महत्ता से भी रू-ब-रू करवाया। इस अवसर पर अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन के सदस्यों एवं पदाधिकारियों को योग एवं ध्यान की महत्ता के बारे में बताते हुए कहा कि जब सत्व की वृद्घि होती है तो सजगता, ज्ञान, बुद्घि, प्रसन्नता, आनंद, समता, शांतता इन सब की जीवन में वृद्घि होती है। जब रजस की वृद्घि होती है तो अशांतता, इच्छा और तृष्णा की शुरुआत होती है। यह कुछ हद तक अपने साथ दु:ख को भी लाती है। जब तमो गुण बढ़ता है तो उदासी, निद्रा, आलस, निरुत्साह आता है जीवन में यह तीन गुण चलते रहते हैं। एक ही दिन में कुछ समय आप महसूस करते हैं कि सत्व गुण बढ़ गया है या किसी प्रहर में तमो गुण और किसी समय में रजो गुण बढ़ गया है। जब आप ध्यान में बैठे हैं तो कुछ क्षण सत्व गुण के आएंगे और आप बहुत अच्छा महसूस करेंगे। और कुछ ही क्षणों उपरांत रजो गुण या तमो गुण आ जाएगा और आप अपनी ऊर्जा में बदलाव महसूस करेंगे। इसका उल्टा भी हो सकता है। कभी-कभी तमो गुण आ जाता है और जब आप उससे निकल जाते हैं तो सत्व गुण बढ़ जाता है। फिर आप अच्छा महसूस करते हैं। ज्ञानी व्यक्ति इसके कारण लडख़ड़ाता नहीं है। वह अपने आपको उनसे परे देखता है। वह यह भी जानता है इनमें से किसी गुण की उपस्थिति उसके मन की अवस्था पर प्रभाव डालेगी इसलिए उसे अपने मन को धोना है। उन्होंने कहा कि स्वयं में इस शुद्ध अस्तित्व की समझ को विकसित करने के लिये यह आवश्यक है कि हम अपने मन का स्नान करवाएं। जैसे हम अपने शरीर को स्नान देते हैं,या वस्त्र गंदे होते हैं तो उन्हें फिर से धोते हैं, हमारा मन इसी के समान हैं। जैसे आपको अपनी स्वच्छता बरकरार रखने के लिये निरंतर स्नान करना पड़ता है, आपको अपने मन को भी स्नान देना चाहिए। कोई यह नहीं कहता कि वे सिर्फ तभी स्नान करेंगे जब वहां अस्वच्छता है। कोई भी बार-बार यह नहीं सोचेगा कि उसे स्नान करना है कि नहीं। हमारा शरीर स्वच्छ या अस्वच्छ है, फिर भी हम प्रतिदिन स्नान करते हैं। यदि आपके हाथ में मिट्टी लग गई है और तो क्या आप बैठकर रोने लगते हैं? नहीं। आप तुरंत जाकर साबुन लगाकर अपना हाथ साफ कर लेते हो। यदि गंद काफी कठोर है और आसानी से नहीं निकल रहा है तो आप घिसकर हाथ को साफ करते रहेंगे। उसी तरह हमें निरंतर हमारे मन की गदंगी को साफ करने की आवश्यकता होती है। मन उसी तरह से बना हुआ होता है। यहां पर ध्यान मदद करता है। वह मन को स्वच्छ रखने में सहायक है। मन में हर समय खुशी और उदासी आती रहती है और वह उत्पन्न होते हुए चली भी जाती है। उन्होंने कहा कि थोड़ी देर बैठ जाए और कुछ समय के लिए ध्यान, प्राणायाम, भजन और प्रार्थना करें। अब मन पर ध्यान दें तो आप यह पाएंगे कि वह धुल गया है और फिर से स्वच्छ हो गया है। श्री श्री रविशंकर ने कहा कि ध्यान के द्वारा भूतकाल के सारे क्रोध और पूर्व की घटनाओं से निकला जा सकता है। ध्यान यानि वर्तमान क्षण को स्वीकार करना और हर क्षण को गहराई के साथ पूरी तरह जीना। इससे पूर्व अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन के अध्यक्ष डा. गौतम समादर ने जहां कन्वैंशन में उपस्थिति अतिथियों का स्वागत किया वहीं पर उन्होंने अपने सम्बोधन में प्राचीन परम्पराओं के महत्व पर जोर दिया। अंत में उन्होंने जहां कन्वैंशन के उपस्थित अतिथियों को सम्मानित किया वहीं पर कन्वैंशन के सफल आयोजन हेतु समूह पदाधिकारियों व सदस्यों का भी आभार व्यक्त किया।

ये रहे उपस्थित और इन्होंने किया सम्बोधित
कन्वैंशन में उपरोक्त के अतिरिक्त डा. नरेश पारेख (इलैक्ट) प्रैजीडैंट, डा. सुरेश रैड्डी वाइस प्रैजीडैंट, डा. सुधाकर सचिव, डा. अनुपता गोटीमुकुला कोषाध्यक्ष, डा. अशोक जैन चेयरमैन ऑफ दि बोर्ड ऑफ ट्रस्टी, डा. विमला एम. सिंह के अलावा भारी संख्या में गण्यमान्य उपस्थित थे। अपने सम्बोधन में डा. नरेश पारेख ने अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन द्वारा किए गए कार्यों के संदर्भ में उपस्थिति को जानकारी दी तथा कहा कि भविष्य में भी अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन द्वारा इसी तरह से कार्यों को निरंतर जारी रखा जाएगा।

अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन द्वारा किए जा रहे कार्य सराहनीय : हेमामालिनी
जरूरतमंदों की सेवा करना व आपदा के शिकार लोगों की मदद हेतु हमेशा तैयार रहना है और नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने को ही सर्वोत्तम सेवा का दर्जा दिया गया है। अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन द्वारा जो ये कार्य किए जा रहे हैं, सराहनीय है, जिनकी जितनी भी तारीफ की जाए बहुत ही कम है। इस बात का उल्लेख बॉलीवुड की प्रख्यात अभिनेत्री एवं संसद सदस्य हेमामालिनी ने अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन की वार्षिक कन्वैंशन को सम्बोधित करते हुए किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन आर्गेन के कार्यों में उनकी ओर से भी बहुमूल्य योगदान डाला जाएगा।

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