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मुंबई। नब्बे के दशक में घायल, घातक और दामिनी जैसी बेहतरीन फिल्मों के जरिये सनी देओल और राजकुमार संतोषी ने बॉलीवुड में अपना दबदबा बनाया था लेकिन कुछ समय के बाद दोनों में मनमुटाव हो गया। पिछले साल दोनों के बीच दूरियां ख़त्म हुई और एक फिल्म बनने की तैयारी हुई लेकिन सनी ने अपने बेटे की फिल्म के लिए संतोषी की फिल्म को फिलहाल रोक दिया है।राजकुमार संतोषी की ये फिल्म फ़तेह सिंह की कहानी पर है। ये एक काल्पनिक किरदार है। इस फिल्म को इस साल फरवरी में शुरू होना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका । इसका सीधा कारण ,करण देओल से जुड़ा है। उनकी फिल्म पल पल दिल के पास अभी पूरी नहीं हुई है और सनी पहले बेटे के डेब्यू पर पूरी तरह ध्यान देना चाहते हैं। संतोषी भी इस बात से वाकिफ रहे हैं और कहते हैं कि करण मेरे बेटे के जैसा ही है और ऐसे में उसका काम पहले होगा। जुलाई में पल पल दिल के पास को रिलीज़ किया जाना है और उसके बाद ही सनी उनकी फिल्म के लिए फ्री हो पाएंगे।संतोषी के मुताबिक वैसे उनकी फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन का काम पूरा हो चुका है। फ़तेह सिंह की शूटिंग लन्दन और पंजाब में होगी। सनी देओल भी इस फिल्म को जल्द शुरू करना चाहते थे लेकिन बेटे की फिल्म पर उनका ध्यान पहले है। सनी के मुताबिक हम एक बार में ही शूटिंग पूरी कर देंगे और चाहेंगे कि फिल्म 15 अगस्त तक रिलीज़ हो जाए। ये आज के दौर की कहानी है। करण की इस रोमांटिक एक्शन का नाम भी किसी 'अपने' से ही लिया गया है। फिल्म का नाम ' पल पल दिल के पास ' रखा गया है जो कि धर्मेन्द्र की फिल्म ' ब्लैकमेल' का एक सुपरहिट गाना है।सनी के मुतबिक वो वो अपने बेटे को एक ऐसी रोमांटिक फिल्म से लॉन्च करना चाहते हैं जिससे आज का यूथ खुद को पूरी तरह जोड़ कर देख पाए। देओल परिवार करण की लांचिंग के साथ किसी भी तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहता आज के दर्शकों का टेस्ट ध्यान में रख कर कहानी और डायलॉग लिखे गए हैं।यह सनी देओल द्वारा डायरेक्ट की जा रही तीसरी फिल्म है। यह फिल्म इस साल 19 जुलाई को रिलीज होने जा रही है। फिल्म में करण की हीरोइन सहर बम्बा हैं।

वाशिंगटन। सूडान के नए सैन्‍य नेता द्वारा राजनीतिक कैदियों की रिहाई और देश में कर्फ्यू समाप्‍त करने के आदेश की अमेरिका ने प्रशंसा की है। अमेरिका ने कहा है कि सैन्‍य प्रशासन के इस कदम से सुडान में लोकतंत्र की बहाली में मदद मिलेगी। अमेरिका ने इसे सूडानी लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत कहा है।अमेरिका विदेश विभाग के प्रवक्‍ता मॉर्गन ऑर्टगस ने कहा कि सूडान में घटित हो रही घटनाओं के लिहाज से ही अमेरिकी नीति तय होगी। इस मौके पर उन्‍होंने साफ किया कि अमेरिका आतंकवाद प्रयोजक सूची में शामिल सूडान पर इस मामले में कोई वार्ता नहीं करेगा। उन्‍होंने जोर देकर कहा अमेरिका सूडान में नागरिकों के मानवाधिकार एवं कानून के शासन के लिए सूडानी नागरिकों की इच्‍छा के साथ खड़ी है।इस सप्‍ताह अमेरिकी विदेश विभाग की उप सहायक मकील जेम्‍स सूडान की राजधानी खार्तूम जाएंगी। लेकिन अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि जेम्‍स खार्तूम में किससे मिलेंगी। हालांकि, यह स्‍पष्‍ट किया गया है अमेरिका सूडान पर पैनी नजर बनाए हुए है और लोगों के संपर्क में है। उन्‍होंने कहा कि सूडान में जो भी हो रहा है वह बहुत निकटता से देख रहे हैं और कानों से सून रहे हैं।बता दें कि सूडान में सैन्य तख्तापलट के बाद वहां की जनता सड़क पर उतर आई है। इस दौरान अबतक 16 लोगों के मरने और 20 लोगों के घायल होने की खबर है। सूडान के पुलिस प्रवक्ता के अनुसार यह विरोध नए नेता को चुनने को लेकर हो रहा है। बता दें कि सेना ने गुरुवार को इस देश पर 30 साल से तक राज करने वाले राष्ट्रपति उमर अल-बशीर का तख्तापलट कर दिया था। इसके अलावा सेना ने दो साल के लिए सैन्य शासन की घोषणा भी कर दी थी और कहा था कि इसके बाद ही चुनाव कराए जाएंगे ।

 

 

नई दिल्ली। दिल्ली कैपिटल्स (DC) के कप्तान श्रेयस अय्यर हार के बाद निराश नजर आए। उन्होंने मुंबई इंडियंस (MI) के खिलाफ मिली हार के लिए डेथ ओवर्स में की गई गेंदबाजी को जिम्मेदार बताया। अय्यर ने कहा कि डेथ ओवर्स में गेंदबाजी करना उनकी टीम के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। दिल्ली ने गुरुवार को खेले गए आइपीएल (IPL) मैच में मुंबई के सामने 40 रन से बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
आखिरी के ओवर्स में जमकर लुटाए रन:-दिल्ली के गेंदबाजों ने डेथ ओवर्स में खराब गेंदबाजी की। वे आखिरी 18 गेंद पर 51 रन लुटा दिए। खराब गेंदबाजी पर अय्यर ने कहा, 'डेथ ओवर्स में गेंदबाजी हमारे लिए एक चिंता का विषय है, वहीं दूसरे हॉफ में बल्लेबाजी करना आसान नहीं था। गेंद रुककर बल्ले पर आ रही थी, जिस वजह से नए बल्लेबाजों के खेलना आसान नहीं था। पहले पारी में आखिरी के तीन ओवर ने खेल का पासा पलट दिया। हमने 20 रन अधिक खर्च किए।'
घर में मिली तीसरी हार:-अपने ही घर में यह दिल्ली की तीसरी हार है। वे अपने घरेलू मैदान फिरोजशाह कोटला में खेले पिछले चार मैच में से तीन गंवा चुके हैं। अपने ही मैदान पर मिली हार के बाद कप्तान अय्यर ने कहा, 'हमारे लिए घरेलू मैदान पर मैच जीतना महत्वपूर्ण है। वो भी तब, जब कि पिच ऐसी हो। हमने पहले टॉस गंवाया और फिर तीनों डिपार्टमेंट में पिछड़ गए।'
हार के बाद तीसरे स्थान पर खिसके:-दिल्ली इस मैच से पहले अंक तालिका में दूसरे पर नंबर थी, लेकिन मुंबई ने उन्हें हराकर इस स्थान पर कब्जा कर लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई की टीम ने 20 ओवर में पांच विकेट पर 168 रन बनाए थे। दिल्ली की टीम को जीत के लिए 169 रन का लक्ष्य मिला, लेकिन ये टीम अपने घरेलू मैदान पर 20 ओवर में नौ विकेट पर 128 के स्कोर तक ही पहुंच सकी और 40 रन से इस मैच को गंवा दिया।

 

नई दिल्ली। अगर आप अक्सर रेल यात्रा करते रहते हैं तो आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि आप बिना पैसों का भुगतान किए भी अपनी टिकट बुक करा सकते हैं। आईआरसीटीसी की ओर से पेश किया गया अर्थशास्त्र प्राइवेट लिमिटेड का पायलट प्रोजेक्ट ePayLater इसमें आपकी मदद करेगा। आप रेलवे के इस यूनीक फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, आपको टिकट बुकिंग के अगले 14 दिनों के भीतर इसके किराए का भुगतान करना होता है। हम अपनी इस खबर में आपको आईआरसीटीसी की इस सुविधा के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।
समझिए आखिर क्या है ई-पेलेटर?;-ePayLater आईआरसीटीसी की ओर से शुरू की गई एक खास सेवा है, जिसकी मदद से यात्री रेलवे को एक भी पैसा दिए बिना अपनी टिकट बुक करा सकते हैं। इसके लिए आईआरसीटीसी ने आईसीआईसीआई बैंक से गठजोड़ किया है। यात्री को बुकिंग के अगले 14 दिन के भीतर इसका भुगतान करना होता है। यात्रियों को इस सेवा का लाभ लेने के लिए 3.5 फीसद का सर्विस चार्ज देना होता है। यह चार्ज भी यात्रियों से पेमेंट के दौरान लिया जाता है। अगर यात्री बुकिंग के अगले 14 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करते हैं तो उनका क्रेडिट कम कर दिया जाता है और फिर वो अगली बार इस सेवा का लाभ नहीं उठा पाएंगे। ऐसे में आपका आईआरसीटीसी अकाउंट बंद भी किया जा सकता है।
कैसे उठा सकते हैं ePayLater का लाभ?
-IRCTC में अपने अकाउंट पर लॉगइन करें।
-टिकट बुक करने के लिए अपनी डिटेल एंटर करें। अब बुक नाउ के विकल्प पर क्लिक करें।
-यहां एक नया पेज ओपन होगा। यहां पैसेंजर की डिटेल के साथ कैप्चा एंटर कर दें। अब नेक्ट्क बटन पर क्लिक करें।
-इसके बाद एक और नया पेज ओपन होगा। यहां पर आपको क्रेडिट, डेबिट, भीम और नेट बैंकिंग और ePayLater का ऑप्शन दिया जाएगा। ePayLater पर क्लिक करें।
-इसके बाद आपके सामने एक नया पेज ओपन होगा जहां आपको अपना मोबाइल नंबर एंटर करना होगा। मोबाइल नंबर एंटर करने के बाद आपके सामने एक नया पेज ओपन होगा जो कि कुछ ऐसा होगा। यहां पर आपको अपना ओटीपी एंटर कर कॉन्टीन्यू पर क्लिक करना होगा और फिर आगे की प्रक्रिया का पालन करना होगा। इस सुविधा का लाभ लेने से पहले आपको ePayLater पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए www.epaylater.in पर जाइए।
-रजिस्ट्रेशन करने के बाद आपके सामने बिल पेमेंट का ऑप्शन आएगा। ePayLater का चुनाव करते ही आपको बिना पैसे दिए टिकट मिल जाएगा। फिलहाल यह सुविधा सिर्फ आईसीआईसीआई बैंक के ग्राहकों के लिए है।

 

 

-नन्दिता पाण्डेय
ऐस्ट्रोटैरोलोजर आध्यात्मिक गुरु, लाइफ़ कोच
Mob. +91-93127-11293, E-mail - nandita.pandey@gmail.com

मेष (22 मार्च से 21 अप्रैल)
आर्थिक मामलों में उन्नति होगी एवं निवेश द्वारा फ़ायदे होंगे। इस मामले में इस सप्ताह कोई सकरात्मक समाचार आपको प्राप्त हो सकता है। इस सप्ताह की गयी यात्राओं द्वारा शुभ स्तिथियाँ बनती जाएँगी। परिवार में स्नेह बड़ेगा लेकिन की बात फिर भी रहेगी जिस वजह से आपको मानसिक कष्ट हो सकता है। सेहत में धीरे धीरे सुधार आता जाएगा। कार्य क्षेत्र में नेटवर्किंग द्वारा फ़ायदा हो सकता है। प्रेम सम्बंध रोमांटिक रहेंगे। सप्ताह के अंत में किसी बात को लेकर मन चिंतित रहेगा। शुभ दिन : 21 , 23,26

वृषभ (22 अप्रैल 21 मई)
कार्य क्षेत्र में शुभ संयोग बनेगा एवं जीवन में उन्नति होगी। साझेदारी में किए गए काम आपके लिए शुभ स्तिथियाँ बनाएँगे। आर्थिक मामलों में साधारण सुधार रहेगा। प्रेम सम्बंध में इस सप्ताह एफ़र्ट करना पड़ेगा लेकिन भविष्य में सुंदर स्तिथियाँ बनेगी। सेहत की तरफ़ आपको ध्यान देने की आवश्यकता है। परिवार में किसी की सेहत को लेकर मन चिंतित रह सकता है। यात्राओं को भी इस सप्ताह टाल दें तो बेहतर होगा। सप्ताह के अंत में आपके जीवन में जीवन को सुधारने के कई अवसर प्राप्त होंगे। शुभ दिन : 22,23,27

मिथुन (22 मई से 21 जून)
आर्थिक समृद्धि के शुभ संयोग बनेंगे। इस सप्ताह आपको इस मामले में कोई सकरात्मक समाचार प्राप्त हो सकता है। सेहत में भी अच्छे सुधार रहेंगे। परिवार में सुकून प्राप्त करेंगे एवं आपके विचारों का सम्मान भी होगा। यात्राओं को सफल बनाने के लिए आपको कुछ एक मामलों में तटस्थ होना पड़ेगा तभी सफलता प्राप्त होगी। प्रेम सम्बंध रोमांटिक रहेंगे, हालाँकि आपको अधिक सुकून की कामना फिर भी रहेगी। कार्य क्षेत्र में परिस्थितियाँ प्रतिकूल हो सकती हैं एवं धैर्य द्वारा अनुकूलता आती जाएगी। सप्ताह के अंत में किसी बात को लेकर मन व्यथित हो सकता है। शुभ दिन : 21, 23,24,25

कर्क (22 जून से 21 जुलाई)
कार्य क्षेत्र में आपको अपने कलिग, बॉसेज़ एवं परिवार से मदद मिल सकती है। सेहत में भी अच्छे सुधार रहेंगे एवं जीवन में सुकून प्राप्त होगा। इस सप्ताह की गयी यात्राओं द्वारा शुभ स्तिथियाँ बनती जाएँगी एवं जीवन में सफलता के मार्ग प्रशस्त होंगे। लव लाइफ़ में सुकून प्राप्त करने के लिए आपको इस तरफ़ प्रयासरत रहना पड़ेगा। आर्थिक व्यय अधिक रहेंगे। परिवार में अपनी बात पर अगर आप विश्वास करते हैं तो उस पर अडिग रहें तभी शुभ संयोग बनेगा। सप्ताह के अंत में कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है। शुभ दिन : 22,24,26,27

सिंह (22 जुलाई से 21 अगस्त)
कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी एवं युवा वर्ग के सहयोग से उन्नति होगी। सेहत में भी सुधार रहेगा एवं किसी महिला डॉक्टर की राय आपके लिए कारगर सिद्ध होगी। परिवार में किसी बात को लेकर मन चिंतित रह सकता है एवं थोड़ा बंधन महसूस कर सकते हैं। इस सप्ताह यतराओं को अवोईड करें तो ही बेहतर होगा। आर्थिक मामलों में स्तिथियाँ प्रतिकूल हो सकती हैं एवं नए निवेशों को अवोईड करना ही बेहतर होगा। लव लाइफ़ में रोमांस बना रहेगा एवं आपसी अंडरस्टैंडिंग भी अच्छी होगी। सप्ताह के अंत में आप रिलैक्स महसूस करेंगे। शुभ दिन : 21,22,24,27

कन्या (22 अगस्त से 21 सितम्बर)
नए प्रयोग आपके कार्य क्षेत्र में उन्नति लेकर आ सकती हैं। आर्थिक मामलों में भी शुभ सतिथ्यान बनेंगी एवं निवेशों द्वारा फ़ायदा होगा। क्रीएटिव प्रोजेक्ट आपके लिए शुभ स्तिथियाँ बनाएँगी। सेहत में सुधार अच्छा रहेगा एवं किसी बुज़ुर्ग की राय इस मामले में आपके लिए शुभ स्तिथियाँ बनाएँगी। लव लाइफ़ में पुरानी यादें ताज़ा होंगी एवं सकरात्मक बदलाव आएँगे। परिवार में साधारण स्तिथियाँ रहेंगी लेकिन आप अपनी इंटूइशन के द्वारा उसमें भी सुधार लेकर आ सकते हैं। यात्राओं के लिए यह समय शुभ नहीं हैं एवं इन्हें अवोईड करना ही बेहतर होगा। सप्ताह के अंत में मेडिटेशन करना आपके लिए शुभ होगा अन्यथा ऐंज़ाइयटी से पीडि़त रह सकते हैं। शुभ दिन : 21,22,23,24

तुला (22 सितम्बर से 21 अक्तूबर)
आर्थिक मामलों में उन्नति होगी एवं महिला वर्ग की राय द्वारा आपके लिए शुभ परिणाम आएँगे। परिवार में आपसी स्नेह बड़ेगा एवं परिवार के सानिध्य में सुकून प्राप्त करेंगे। प्रेम सम्बंध रोमांटिक रहेंगे एवं आप किसी अच्छी जगह शिफ़्ट होने का मन भी बना सकते हैं। बाहरी हस्तक्षेप आपकी सेहत में प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। दाँत से समबंधित कष्ट भी इस सप्ताह हो सकता है। प्रेम सम्बंध आपको इस सप्ताह काफ़ी बिज़ी रखेंगे। इस सप्ताह की गयी यात्राओं द्वारा भी शुभ स्तिथियाँ बनती जाएँगी। कार्य क्षेत्र में थोड़ा बंधन महसूस कर सकते हैं। सप्ताह के अंत में स्तिथियाँ अनुकूल होती जाएँगी एवं आप काफ़ी सुकून महसूस करेंगे। शुभ दिन : 21,23,25,27

वृश्चिक (22 अक्तूबर से 21 नवम्बर)
परिवार में इस सप्ताह से आप कुछ नए बदलाव ला सकते हैं जो भविष्य में आपके लिए शुभ स्तिथियाँ बनाएँगे। परिवार के साथ कहीं यात्रा करने का विचार भी बन सकता है। यात्राएँ इस सप्ताह आपको सुकून देंगी एवं सफलता दायक स्तिथियाँ बनाएँगी। कार्य क्षेत्र में अधिक मेहनत की आवश्यकता है तभी उन्नति होगी। आर्थिक व्यय अधिक हो सकते हैं एवं किसी की सेहत में भी व्यय अधिक रहेगा। आपकी अपनी सेहत अच्छी रहेगी एवं आप इसमें काफ़ी सुधार पाएँगे। सप्ताह के अंत में किसी बात को लेकर मन व्यथित रह सकता है। एक अकेलापन मन ही मन आपको कष्ट देगा। शुभ दिन : 24,25,26

धनु (22 नवम्बर से 21 दिसंबर)
कार्य क्षेत्र में विशेषकर उन्नतिकारक स्तिथियाँ बनती जाएँगी एवं जीवन में शुभ संयोग बनेंगे। इस सप्ताह कोई भी नया कार्य आपके लिए मन माफि़क़ स्तिथियाँ बना सकता है। आर्थिक मामलों में भी सुकून रहेगा एवं कोई दो निवेश आपके लिए सुकून लेकर आ सकते हैं। सेहत को सुधारने के भी आपको कई अवसर प्राप्त होंगे एवं इस मामले में आपके लिए शुभ संयोग बनते जाएँगे। परिवार में जश्न का माहौल रहेगा, हालाँकि आपकी उमीदों से थोड़ा कम ही रहेगा। यात्राओं द्वारा आपको साधारण सफलता प्राप्त होगी। लव लाइफ़ में अपने पर भरोसा कर आगे बड़ें एवं निर्णय लें तभी सुखद समय आएगा। सप्ताह के अंत में स्तिथियों में धीरे धीरे सुधार आता जाएगा। शुभ दिन : 22,23,24

मकर (22 दिसंबर से 21 जनवरी)
आर्थिक मामलों में कहीं से सकरात्मक समाचार प्राप्त हो सकता है। निवेश द्वारा फ़ायदे होंगे। परिवार में जश्न का माहौल रहेगा एवं एक नयी सोच आपके लिए शुभ स्तिथियाँ बनती जाएँगी। सेहत में तकलीफ़ रहेगी एवं इस तरफ़ ध्यान देने की आवश्यकता है। यह सप्ताह यात्राओं के लिए भी ठीक नहीं है एवं बेवजह के कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। कार्य क्षेत्र में साधारण स्तिथियाँ रहेंगी। सप्ताह अंत में किसी समाचार को लेकर मन व्यथित रहेगा। लव लाइफ़ में हालाँकि आपको काफ़ी सुकून प्राप्त होगा। शुभ दिन : 21,23,25

कुंभ (22 जनवरी से 21 फरवरी)
सेहत में सुधार अच्छे रहेंगे एवं कोई पुरानी हेल्थ ऐक्टिविटी आपके लिए शुभ स्तिथियाँ पैदा होंगी। परिवार में सुकून रहेगा एवं अपने परिवार के सानिध्य में रह कर आप सुख एवं शांति महसूस करेंगे। यह सप्ताह यात्राओं के लिए भी अत्यंत शुभ है एवं यात्राओं द्वारा जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे। प्रेम सम्बंध रोमांटिक रहेंगे एवं आपकी समजहदारी के क़ायल आपके पार्ट्नर इस सप्ताह रहेंगे। कार्य क्षेत्र में किए गए वादे आपके लिए ऐंज़ाइयटी पैदा कर सकते हैं। आर्थिक व्यय अधिक रहेंगे। सप्ताह के अंत में शुभ स्तिथियाँ पैदा होंगी। कोई नया प्रोजेक्ट आपके लिए शुभ होगा। शुभ दिन : 21,24,25,26,27

मीन (22 फरवरी से 21 मार्च)
इस सप्ताह यात्राओं द्वारा शुभ स्तिथियाँ बनी रहेंगी एवं जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे। सेहत के लिए भी यह समय अनुकूल है एवं जीवन में ख़ुशियाँ प्राप्त होंगी। कार्य क्षेत्र में हालाँकि ऐंज़ाइयटी बड़ सकती है। आर्थिक मामलों में किसी बुज़ुर्ग पर व्यय अधिक हो सकते हैं। परिवार के मामलों में आपको थोड़ा सा यथार्थवादी रहन चाहिए तभी सुकून प्राप्त होगा। प्रेम सम्बंध में ऐंज़ाइयटी बड़ेगी एवं अहं के टकराव से आपको बचना चाहिए। सप्ताह के अंत में हालाँकि आप बहुत सारी प्रॉब्लम से उबर पाएँगे एवं सुख प्राप्त करेंगे। शुभ दिन : 24,26,27


-प्रदीप श्रीवास्तव/निजामाबाद,तेलंगाना
17वीं लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण के मतदान में तेलंगाना की निजामाबाद जिले में लगभग 60% से अधिक लोगों ने मतदान किया। निजामाबाद जिले का यह मतदान अपने आप में इस लिए महत्व रखता है कि इस संसदीय क्षेत्र से 1,2,3 या 10 नहीं पूरे 185 प्रत्याशी के भाग्य आजमा रहे हैं। जिसमें मुख्य टक्कर तेलंगाना राष्ट्र समिति की प्रत्याशी पूर्व सांसद के कविता एवं भाजपा के डी अरविंद के बीच है । कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व सांसद मधु आशिकी गौड़ की स्थिति नगण्य के बराबर है । पता हो कि इस संसदीय क्षेत्र से 11,53,684 मतदाता हैं । जिनमें 5 लाख 49 हजार पुरुष मतदाता और 60,3,897 महिला मतदाता शामिल है । 2014 के सदीय चुनाव की मद्दे नजर इस बार 58,877 मतदाताओं की संख्या बढ़ी है जिसमें काफी संख्या युवाओं की है जिन्होंने इसी वर्ष 19 वर्ष की आयु पूरी की है। यह संसदीय क्षेत्र विश्व के चुनाव प्रणाली में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं ।भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह पहली बार है जब एक ही संसदीय क्षेत्र से एक साथ इतने प्रत्याशी चुनावी दंगल में कूदे हैं। निजामाबाद संसदीय क्षेत्र ( जिसके अन्तर्गत निजामाबाद शहर, ग्रामीण, आरमूर ,बोधन,बालकोंडा एवं बांसवाड़ा विधान सभा क्षेत्र आते हैं ।) से तेलंगाना राष्ट्र समिति के के 'कार' चुनाव चिन्ह से प्रदेश के मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी पूर्व सांसद के. कविता है वहीं उनके सामने कभी आंध्र प्रदेश के इस (तेलंगाना बनने से पूर्व)क्षेत्र से दबंग राजनीतिक डी श्रीनिवास के छोटे बेटे डी. अरविंद पहली बार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से दो बार सांसद रहे मधु याश्की गौङ भी चुनावी मैदान में है ।लेकिन वह बेमन से चुनाव लड़ रहे हैं ।राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि तेलंगाना की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे लेकिन दो बार सांसद होने की वजह से हाईकमान ने उन्हें जबरन यहां से चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया ।स्थानीय लोगों का कहना है कि मधु ने यहां पर कोई चुनाव प्रचार जैसा काम नहीं किया , क्योंकि उनको मालूम था कि उनका क्या हश्र क्या होगा । मुख्य लड़ाई भाजपा और तेरस के बीच ही है ।लेकिन प्रश्न यह उठता है कि इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा इसके पीछे जो आकलन किए जा रहे हैं उसके मुताबिक पूर्व सांसद के कविता से स्थानीय किसान बहुत ही नाराज हैं । इस नाराजगी के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि उन्होंने इस हल्दी व गन्ने बाहुल्य वाले क्षेत्र में सरकार से हल्दी गठन बोर्ड की स्थापना नहीं करवा पाई ।जिसकी मांग स्वतंत्रता के बाद से किसान बराबर करते आ रहे हैं ।इसलिए अंतिम क्षण में 177 किसानों ने कविता के खिलाफ वोट काटने के लिए मैदान में उतरने का फैसला लिया और नामांकन किया । इस बीच इतने प्रत्याशियों के नामों को लेकर चुनाव आयोग भी चिंतित हो उठा कि कैसे चुनाव कराए जाएं । क्योंकि एक ईवीएम मशीन में अधिक से अधिक 12 से 16 नामों को ही सम्मिलित किया जा सकता है, लेकिन प्रत्याशियों की संख्या को देखते हुए आज हर पोलिंग बूथ पर 12 ईवीएम मशीनों का प्रयोग किया गया जिसके लिए चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया से विशेष आग्रह पर 26,820 ईवीएम मशीन और उनके लिए 2,240 कंट्रोल यूनिट स्थापित की गई । हर पोलिंग बूथ के बाहर बड़े फ्लेक्स पर सभी 185 प्रत्याशियों के नाम उनकी फोटो को बैलट बॉक्स ईवीएम मशीन के अनुसार अंकित किया गया था ।जिससे मतदाताओं को असुविधा ना हो मतदाताओं के मुताबिक पहले नंबर पर भाजपा दूसरे पर तेरास एवं तीसरे नंबर पर कांग्रेस की प्रत्याशी का नाम और चुनाव चिन्ह बना हुआ था,उसके बाद शेष के ।
निजामाबाद संसदीय क्षेत्र का यह चुनाव विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज भी किया जा चुका है ।

 

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प्रणाम पब्लिशिंग हाउस
537-F/64-A, उद्गम
इंद्रपुरी कालोनी
आई आई एम -हरदोई रोड
बिठोली तिराहा
लखनऊ-226013


-डॉ प्रदीप उपाध्याय
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों को चुनना एक अनिवार्य प्रक्रिया है।चुनाव निष्पक्ष तरीक़े से सम्पन्न हो, यह लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए जरूरी है।संवैधानिक प्रावधानों के अन्तर्गत संवैधानिक संस्थाएँ अपने दायित्वों का बिना किसी दबाव, प्रभाव एवं पक्षपात के निर्वाह करें,यह स्वस्थ्य लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त है लेकिन हाल ही के वर्षों में संवैधानिक संस्थाओं पर भी ऊंगली उठने लगी है और उनकी निष्पक्षता पर भी संदेह किया जाने लगा है।यह स्थिति किसी भी दशा में स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए कदापि उचित नहीं कही जा सकती है।संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्र प्रस्थिति के साथ उनकी निष्पक्षता भी उतनी ही आवश्यक है।यह भी तब जबकि आपातकाल का काला अध्याय हमारे लोकतंत्र के इतिहास का अंग बन चुका है और वर्तमान हालात भी चिंतनीय स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं।
हाल ही के वर्षों में हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुत ज्यादा विकृतियाँ घर कर गई हैं ,जहाँ लोकतान्त्रिक मूल्यों और परम्पराओं का ह्रास होता जा रहा है।लोकतंत्र को अक्षुण्य बनाये रखने के लिए जरूरी है कि राजनीतिक दल अपने आदर्शों, मूल्यों,सिद्धांतों के साथ अपनी नीतियों और कार्यक्रम लेकर चुनाव मैदान में उतरें और जब इसी आधार पर कोई दल सत्ता प्राप्त करता है तो उसे उन्हीं नीतियों और कार्यक्रमों को लागू एवं क्रियान्वित करना चाहिए।लेकिन प्रायः ऐसा हो नहीं रहा है।राजनीतिक दलों के सिद्धांत, नीतियाँ और कार्यक्रम केवल घोषणा पत्र तक ही सीमित रह जाते हैं जबकि लोकलुभावन और भेदभाव पूर्ण कई नये कार्यक्रम लागू कर दिये जाते हैं।जिससे नागरिकों में असंतोष व्याप्त हो जाता है। यह स्थिति उचित नहीं कही जा सकती।
हमें इस मामले में ब्रिटेन से सीख लेना चाहिए।वहाँ यदि सत्ताधारी दल कोई नई नीति या कार्यक्रम लागू करना चाहता है तो उसपर जनता का मेन्डेट लेना अनिवार्य समझा जाता है।विपक्ष को भी विश्वास में लेकर कदम उठाए जाते हैं जबकि हमारे देश में सत्तापक्ष मनमाने और अड़ियल रूख के साथ काम करता है, दूसरी ओर विपक्ष सदैव अड़ंगे लगाने और विरोध करने के एकसूत्री फार्मूले पर काम करता है।हमें पश्चिमी देशों की लोकतांत्रिक व्यवस्था से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है।अमेरिका जैसे देश में चाहे रिपब्लिकन पार्टी हो या डेमोक्रेटिक पार्टी, अपनी नीतियों और कार्यक्रमों पर खुली बहस करती हैं और जनता की भी उतनी ही सहभागिता होती है।ऐसा नहीं है कि मीडिया की सहभागिता से प्रायोजित अनर्गल बहस और प्रलाप हों।हालांकि वहाँ इस बार के राष्ट्रपति चुनाव में चुनाव प्रचार के अनैतिक एवं विकृत तरीक़े अपनाये जाने के आरोप भी लगे हैं और इसी बात पर अमेरिकी मीडिया और विश्व भर में राष्ट्रपति ट्रम्प की आलोचना भी हुई थी किन्तु बावजूद इसके लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था राजनीतिक दलों की नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर ही पुष्ट होती है।
विगत कुछ वर्षों में हमारे राजनीतिक दलों और उनके नेताओं ने अपने लोकतांत्रिक ढ़ाँचे को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।चाहे कोई भी राजनीतिक दल रहा हो,चाहे वह क्षेत्रीय दल हो या राष्ट्रीय, अपनी अस्थिर नीतियों और कार्यक्रमों के द्वारा देश के साथ ही लोकतान्त्रिक व्यवस्था को भी कमजोर कर रहा है।राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव है।किसी समय कैडर बेस्ड पार्टी भाजपा,जो कि दलगत अनुशासन के मामले में बेहतर थी, में भी अनुशासनहीनता और तानाशाही पूर्ण प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है।कांग्रेस में तो व्यक्ति पूजा का इतिहास ही रहा है।वर्तमान दौर में लगभग सभी राजनीतिक दलों में आन्तरिक लोकतंत्र समाप्त सा हो गया है और यही कारण है कि दलीय अनुशासन भी नहीं रह गया है।पार्टी सदस्यों में पार्टी से लगाव सत्ता मोह तक सीमित हो गया है।जनसेवा की भावना के स्थान पर पद और प्रतिष्ठा प्राथमिकता में आ गए हैं। हाल ही के वर्षों में यह भी देखा गया है कि किसी भी राजनीतिक दल की कोई स्पष्ट विचारधारा, आदर्श, सिद्धांत या फिर कार्यक्रम नहीं है।उनका एकमात्र मूल ध्येय मतदाता को किसी तरह आकर्षित कर अपने पक्ष में वोट बैंक तैयार करना ही रह गया है।
सत्ता प्राप्ति के लिए विचारहीन तथा बेमेल गठबन्धन आम बात हो गई है जो कल तक कट्टर विरोधी थे, वे आज घनिष्ठ दोस्ताना सम्बन्धों के साथ चुनाव लड़ रहे हैं।ऐसे बेमेल गठबन्धन और महागठबन्धन चुनाव पूर्व बन रहे हैं।यहाँ तक कि सत्ता में भी साथ रहते हैं।यह आमजन भी समझ रहा है कि राजनीतिक दलों का एकमात्र लक्ष्य जनसेवा न होकर येनकेन प्रकारेण सत्ता की डोर थामना है। वर्ष 2014 के चुनाव जहाँ विकास के नारे के साथ कांग्रेस मुक्त भारत के नाम पर लड़े गये थे,वहीं वर्ष 2019 के चुनाव विपक्ष द्वारा मोदी मुक्त या कहें भाजपा मुक्त भारत के नाम पर लड़े जा रहे हैं।इसमें कहीं कोई छुपा हुआ एजेंडा नहीं दिखाई दे रहा है।सत्ताधारी दल भी अपनी कमजोरियों को छुपाते हुए राष्ट्रवाद के नाम पर मोर्चा सम्भाले हुए है।
बहरहाल, विगत चुनाव से ही चुनाव प्रचार घटिया स्तर तक जा पहुँचा है।नेताओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह आ खड़े हुए हैं।व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप, छिछालेदारी और निम्नस्तरीय भाषा का प्रयोग इन चुनावों में हो रहा है।लोकतंत्र एक मजाक बनकर रह गया है।कोई भी दल अपनी जनहितकारी नीतियों और कार्यक्रमों के बलबूते मतदाता से वोट की अपील नहीं कर रहा है बल्कि एक दूसरे पर अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप लगाकर ,एक दूसरे को नीचा दिखाकर वोट कबाड़ना चाह रहा है।रही सही कसर वोटर को तरह -तरह के प्रलोभन देकर पूरी कर रहे हैं।
पार्टी टिकट के लिए मारा-मारी,पार्टी प्रत्याशियों का अपना आपराधिक रेकार्ड तथा अकूत सम्पत्ति की स्थिति, चुनाव खर्च में बेतहाशा वृद्धि जिससे ईमानदार और अच्छे लोगों की राजनीतिक नेतृत्व में बढ़ती दूरी,यह सब बातें स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए हितकारी न होकर शुभ संकेत भी नहीं हैं।वर्तमान स्थिति देखते हुए लोकतंत्र के विकृत होते स्वरूप के कारण निराशा के भाव के साथ व्यवस्था पर ही प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं।इसका एकमात्र हल भी जनजागरूकता ही दिखाई देता है।

16,अम्बिका भवन,बाबूजी की कोठी,उपाध्याय नगर,मेंढकी रोड़,देवास,म.प्र.


-नवेन्दु उन्मेष, सीनियर पत्रकार
आधी रात के वक्त मेरी गली में किसी ने जोर-जोर से चिल्लाया चोर-चोर। आवाज
सुनते ही पूरा मुहल्ला जाग गया। किसी के हाथ में डंडा था तो किसी के हाथ
में तलवार और भाला। कई लोग यह पूछने के लिए आये कि आखिर चोर किस ओर भागा
और भाग तो आपने पकड़ा क्यों नहीं। कई लोगों ने कहा कि अगर चोर पकड़ा जाता
तो उसकी जमकर धुनाई की जाती। इसके बाद वह मुहल्ले में आने की हिम्मत नहीं
करता।
कुछ देर के बाद थाने की पुलिस को भी सूचना मिल गयी कि मेरे मुहल्ले में
चोर आया है। पुलिस वालों ने आकर पूछा कि आखिर चोर किधर गया और किसके घर
में वह घुसा था। लेकिन कोई यह नहीं बता पाया कि आखिर चोर किधर से आया और
गया किधर।
तब तक बाबा बोलतदास भी आ गये। पुलिस ने उनसे पूछा आपने चोर को देखा है।
उन्होंने कहा कि मैंने चोर को तो नहीं देखा है लेकिन चोर की पत्नी का
फोटो जरूर देखा है। पुलिस ने कहा क्या बकवास करते हैं। ऐसा हो नहीं सकता।
इसका मतलब है आप चोर को अच्छी तरह से जानते हैं और पुलिस से छिपा रहे
हैं।
बोतलदास ने कहा इन दिनों देश में चोर-चोर का शोर है और मीडिया में रोज
खबरें आ रही हैं अमुक नेता चोर है और अमुक नेता चोर की पत्नी है। अमुक
नेता का बेटा चोर है, अमुक नेता का रिश्तेदार चोर है। इसके बावजूद पुलिस
की आंखें बंद हैं। मुहल्ले में चोर का हल्ला क्या मचा कि पुलिस की आंखें
खुल गयी। वह दौड़ी चली आयी। लेकिन देश में चोर-चोर का शोर मचने के बावजूद
पुलिस की आंखें नहीं खुल रही है।
पुलिस वालों ने कहा कि अगर देश में चोर-चोर का शोर है तो आप प्राथमिकी
दर्ज कराने चलिये हम उन चोरों को पकड़ लेंगे। बाबा बोतलदास ने पुलिस वालों
से कहा कि आपकी हिम्मत ही नहीं है उन बड़े चोरों को पकड़ने की। न ही देश के
बड़े पुलिस अधिकारियों में बड़े चोरों को पकड़ने की ताकत है। पुलिस सिर्फ
छोटे चोरों की आवाज सुनकर मुहल्ले में तेजी से चली आती है।
तभी वहां खड़े एक सज्जन से रहा नहीं गया। उसने कहा कि ये सभी चुनावी चोर
हैं। चुनाव तक चोर-चोर का शोर मचायेंगे। कुर्सी मिलने के बाद चोरी का माल
बिछाकर कुर्सी पर सो जायेंगे। इसके बाद पांच साल तक न कोई चोर नजर आयेगा
न कोई पुलिस उन्हें पकड़ पायेगी क्योंकि पुलिस और इन चुनावी चोर में पूरी
तरह से सांठगांठ है। उसने आगे कहा मीडिया वालों का तो काम है इन चुनावी
चोरों की शोर छापने का।
जब बातें चुनावी चोर की होने लगी तो बाबा बोतलदास ने कहा कि चुनाव आते ही
देश में चुनावी चोरों की संख्या में भी इजाफा हो जाता है। कोई यहां फर्जी
डिग्री का चुनावी चोर है तो कोई राफेल सौदे का चुनावी चोर है। तो कोई चोर
की पत्नी है, तो कोई चुनावी टिकट का चोर है। कोई बागी चोर है तो कोई दागी
चोर है। मतलब साफ है देश में चोर-चोर मौसेरे भाई का कारोबार चल रहा है।
हर कोई चोरी के इस कारोबार में अपना धंधा बढ़ाने में लगा है और चुनाव तक
यह सब चलता रहेगा।
छोटे चोर को पकड़ने के लिए आयी पुलिस तक तक जा चुकी थी। मुहल्ले में चोर
तो नहीं पकड़ाया लेकिन लोगों की नींद जरूर खराब हो गयी। लोग अब उस व्यक्ति
को गालियां दे रहे थे जिसने चोर-चोर का हल्ला मचाया था। तभी एक व्यक्ति
ने कहा कि लगाता है मीडिया में चोर-चोर का शोर सुनने के बाद किसी ने नींद
में ही चोर-चोर की आवाज लगा दी होगी। इससे कई लोग सहमत भी हुए। इसके बाद
सभी अपने घर वापस लौट गये। इसके बाद मुहल्ले में चोर पुराण खत्म हो गया।
कोई यह नहीं बता पाया कि आखिर चोर आया भी था या नहीं। वैसे एक पुरानी
कहावत भी है कि चोर मचाये षोर। इसका मतलब है कि चोर ही चोर का शोर भी
मचाते हैं।

रांची, झारखंड
संपर्क: 9334966328


-अब्दुल रशीद
लखनऊ से 367.1 किलोमीटर और दिल्ली से 867.1 किलोमीटर दूरी पर बसा रॉबर्ट्सगंज, उत्तर प्रदेश का एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है,जिसका जिला मुख्यालय सोनभद्र है।रॉबर्ट्सगंज लोकसभा,अपने गर्भ में प्रकृतिक धनसंपदा को संजोए रखने के बावजूद आज जनप्रतिनिधियों और परियोजनाओं के उदासीनता के कारण प्रदूषण के प्रकोप से अभिशापित और विकास के किरण को मोहताज हैं। इस शहर का नामकरण ब्रिटिश-राज में अंग्रेजी सेना के फिल्ड मार्शल फ्रेडरिक रॉबर्ट के नाम पर हुआ था।
जिले के शहरी क्षेत्रों को छोड़ दें तो ग्रामीण इलाकों में इंसानी जीवन के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं। इसे संयोंग ही कहेंगें के मुलभूत सुविधाओं को तरसते जिले के विस्थापितों के वोट से चुने गए प्रत्याशियों के नाम में ‘राम’ जुड़े हुए हैं। जी हां उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज संसदीय सीट पर अभी तक 15 सांसद चुने जा चुके हैं,चुने गए ज्यादातर सांसदों के नाम में ‘राम’ लगा हुआ है,आंकड़ो के अनुसार से 10 सांसदों के नाम में ‘राम’ और तीन सांसदों के नाम में ‘लाल’ जुड़ा हुआ है। राजनीती में “राम” का नाम लेकर सत्ता के शिखर पर नेता तो पहुँच गए लेकिन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र राबर्ट्सगंज की जनता की आंख विकास की राह देखते देखते पथरा गई है।

2009 में सपा के टिकट पर जीते पकौड़ी लाल कोल 2019 भाजपा गठबंधन के उमीदवार होंगें

राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट पर 1962 में कांग्रेस के टिकट पर राम स्वरूप पहली बार सांसद बने थे। स्वरुप ने 1967 और 1971 के आम चुनावों में भी कांग्रेस के ही टिकट पर जीत हासिल की। 1977 में राबर्ट्सगंज में जनता पार्टी के उम्मीदवार शिव संपत्ति राम ने लोकसभा चुनाव जीत हासिल की। 1980 और 1984 के आम चुनाव में कांग्रेस के राम प्यारे पानिका को जीत मिली थी।

भाजपा के हिस्से में पहली बार यह सीट 1989 के लोकसभा चुनाव में यह सीट आई। भाजपा के टिकट पर सूबेदार प्रसाद ने जीत दर्ज की थी, लेकिन, भाजपा के पास यह सीट ज्यादा समय तक नहीं रह सकी। 1991 के लोकसभा चुनाव में यह सीट एक बार फिर जनता पार्टी के खाते में चली गयी। वर्ष 1991 में जनता पार्टी के प्रत्याशी राम निहोर राय को चुनाव में सफलता मिली। वर्ष 1996, 1998 और 1999 के चुनाव में यह सीट भाजपा के पास रही। भाजपा के टिकट पर प्रत्याशी राम शकल तीन बार सांसद रहे।

वर्ष 2004 में बसपा यह सीट अपने हिस्से करने में कामयाब रही, बसपा के टिकट पर लाल चंद्र कोल को जीत मिली थी। 2009 के लोकसभा चुनाव में पहली बार समाजवादी पार्टी के अपना परचम लहराया,समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर पकौड़ी लाल ने पहली बार चुनाव जीता। 2014 के मोदी लहर में इस सीट का समीकरण बदला और भाजपा के प्रत्याशी छोटेलाल को जीत मिली।

2009 में सपा के टिकट पर जीते पूर्व सांसद पकौड़ी लाल कोल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और अपना दल (एस) ने गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार होंगे।

विस्थापित कर सकते हैं लोकसभा चुनाव का बहिष्कार

उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला उर्जांचल के नाम से भी जाना जाता है।प्रकृति की गोद में बसा यह जिला सिर्फ उत्तर प्रदेश को ही रौशन नहीं करता बल्कि कई अन्य राज्य को भी रौशन करता है।देश प्रदेश को रौशन करने वाले आदिवासी बाहुल्य जिले में विकास की हकीकत यहां के मूल निवासियों की आंखो में साफ़ झलकता है।न पीने को साफ़ पानी न सांस लेने को स्वच्छ हवा और तो और विकास के नाम पर ठगे गए इन लोगों को विस्थापित कर ऐसे जगह पर बसा दिया जहां मुलभुत सुविधाओं के नाम पर टोटका को ही सामाजिक दायित्व निभाना परियोजनाओं द्वारा परिभाषित कर दिया गया। परियोजनाओं की विस्थापितों के प्रति सकारात्मक सोंच का इससे बेहतरीन उदाहरण क्या होगा के कई रत्नों से सम्मानित परियोजनाओं के विकासशील सोंच ने डेंजर जोन में ही शक्तिनगर का चिल्काटांड विस्थापित बस्ती बसा दिया। जहां जिंदगी कब काल के गाल में समा जाए पता नहीं। अब इन अभागों पर रेलवे विभाग ने भी अपना मानवीय पक्ष दिखाने में तनिक भी संकोच नहीं करते हुए इनका आवागमन बंद करने का फरमान जारी कर दिया है। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार सोनभद्र जिले के जिलाधिकारी ने इनकी पीड़ा सुनी है। अपने समस्याओं से तंग विस्थापितों ने न केवल अपनी पीड़ा जिलाधिकारी को सुनाया बल्कि समाधान न होने पर लोकतंत्र के महापर्व में भाग न लेने की बात कही है।



- योगेश कुमार गोयल
विगत दिनों जब सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम के मतों की वीवीपैट पर्चियों से मिलान की संख्या पांच करने का निर्णय सुनाया था तो उम्मीद जगी थी कि इस निर्णय के बाद ईवीएम राग शांत हो जाएगा किन्तु प्रथम चरण के मतदान के बाद जिस प्रकार 21 विपक्षी दलों ने एकजुट होकर एक बार फिर ईवीएम में गड़बडि़यों के आरोप लगाकर सारा ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है, उससे यह आईने की तरह साफ हो गया है कि लोकसभा चुनाव के परिणाम आने तक तो ईवीएम राग शांत नहीं होने वाला है। इससे पहले विपक्षी दलों की वीवीपैट की 50 फीसदी पर्चियों की गिनती की मांग को अव्यावहारिक मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग को निर्देशित किया था कि वह हर विधानसभा क्षेत्र से एक के बजाय पांच मतदान केन्द्रों से मतों की गिनती करे। फिलहाल सारा विवाद पहले चरण के मतदान के तुरंत बाद तब खड़ा हुआ, जब आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों और 175 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ और मुख्यमंत्री चंद्रबाबूनायडू द्वारा आशंका जताई जाने लगी कि उनके राज्य में चुनाव प्रक्रिया में काफी गड़बडि़यां हुई हैं।
दरअसल देश में चुनावों के दौरान कुछ वर्षों से यही ट्रैंड बन चुका है कि कहीं भी हार की स्थिति दिखाई देने पर विपक्षी दलों द्वारा अपनी हार के लिए ईवीएम को दोषी ठहराकर सारा ठीकरा ईवीएम पर ही फोड़ दिया जाता है। हर राजनीतिक दल द्वारा अपनी हार के लिए नए-नए बहाने तलाशने की कोशिश की जाती है और पिछले कुछ समय से इसके लिए ईवीएम ही तमाम राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ा हथियार बना है। ये वही ईवीएम हैं, जिन्होंने पिछले साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान तीन में कांग्रेस को सत्ता के पायदान तक पहुंचाया और सत्ता तक पहुंचने में सफलता मिलते ही तमाम विपक्षी दलों के ईवीएम विरोधी स्वर खामोश हो गए थे। ऐसे में हर बार चुनावी प्रक्रिया के दौरान ही ईवीएम के विरोध का कोई औचित्य समझ से परे है। तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त ओमप्रकाश रावत बैलेट पेपर से मतदान कराए जाने की मांग पर अपने कार्यकाल के दौरान कह चुके हैं कि जो भी दल हारता है, वह किसी को तो जिम्मेदार ठहराता ही है और जिस प्रकार खेल में हारने पर रैफरी को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, उसी प्रकार चुनाव में हारने पर ईवीएम को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
चुनाव आयोग तमाम दलों को कई बार ईवीएम में गड़बड़ी साबित करने या ईवीएमहैक करके दिखाने की चुनौती दे चुका है लेकिन हर बार चुनावों के दौरान ईवीएम का बेसुरा राग अलापने वाले राजनीतिक योद्धा ऐसी चुनौती स्वीकारने के बजाय अपनी भूमिका ईवीएम को कोसने तक ही सीमित रखते हैं। इस तथ्य को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है कि चुनाव के लिए नामांकन भरते समय तमाम दलों के प्रत्याशियों द्वारा ईवीएम से चुनाव कराए जाने पर सहमति प्रकट की जाती है किन्तु जनता को बरगलाने के लिए ईवीएम को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोशिशें की जाती हैं। यह हाल तो तब है जबकि कई अवसरों पर न केवल चुनाव आयोग बल्कि सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि ईवीएम से बेहतर और कोई चुनावी प्रक्रिया नहीं है। हालांकि तमाम आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि लोकसभा के बाकी चरणों के मतदान के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी के मामले सामने न आएं।
हालांकि कई बार मतदान प्रक्रिया के दौरान ईवीएम में खराबी के कुछ मामले सामने आते हैं लेकिन ऐसे मामलों को ईवीएम में छेड़छाड़ या हैकिंग जैसे आरोपों से जोड़ना कदापि उचित नहीं ठहराया जा सकता। वैसे ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग द्वारा यह स्पष्ट किया जा चुका है कि ईवीएम के फेल होने का प्रतिशतमहज0.6 फीसदी ही है। दरअसल किसी भी इलैक्ट्रॉनिक मशीन में कभी भी खराबी आना संभव है और ऐसे में अगर ईवीएम में आने वाली खराबियों के समाधान को लेकर विपक्षी दलों द्वारा आवाज उठाई जाती तो उसका स्वागत होता लेकिन ईवीएम के बजाय बैलेट पत्र से चुनाव कराए जाने की मांग को पूर्णतया अव्यावहारिक बताते हुए अदालत भी पहले ही इसे नकार चुकी है। चुनाव के दौरान मतपत्रों के इस्तेमाल की मांग कर विपक्षी दल देश को कौनसे पुराने युग में ले जाने की बातें कर रहे हैं? आधुनिकीकरण में हम अब इतने आगे निकल चुके हैं कि मतपत्रों के युग में वापस लौटना असंभव है। वैसे भी इस प्रकार की मांग उठाते वक्त हमें यह तथ्य को भी ध्यान में रखना चाहिए कि मतपत्रों से चुनाव कराने के लिए हमें हर चुनाव के लिए कितनी बड़ी संख्या में पेड़ काटने पड़ेंगे और ऐसी स्थिति में पर्यावरण की क्या दुर्दशा होगी। हम इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते कि चुनावी प्रक्रिया में ईवीएम के इस्तेमाल के बाद से ही निरस्त मतों की संख्या में अभूतपूर्व गिरावट देखने को मिली है।
कुछ ही माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह धारणा गलत है कि ईवीम के बजाय मतपत्रों के जरिये चुनाव ज्यादा विश्वसनीय है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कहना था कि हर मशीन के ठीक या गलत होने की संभावना रहती है और यह उपयोग करने वालों पर निर्भर करता है कि वे उसका कैसे इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ईवीएम के सही इस्तेमाल की जिम्मेदारी और जवाबदेही अब चुनाव आयोग तथा संबंधित अधिकारियों की ही है। हालांकि हम इस तथ्य की अनदेखी नहीं कर सकते कि ईवीएम के जरिये चुनाव कराने की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। अब ईवीएम के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल होता है, जिसके जरिये मतदाता अपने मत का प्रयोग करते हुए स्वयं यह देखकर आश्वस्त हो सकता है कि उसका मत उसी उम्मीदवार को गया है या नहीं, जिसके लिए उसने ईवीएम का बटन दबाया है और ऐसे में ईवीएम मशीनों को वीवीपैट से जोड़े जाने के बाद ईवीएम में छेड़छाड़ कर चुनावी नतीजों में हेरफेर की संभावना लगभग खत्म हो गई है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद जब ईवीएम पर गंभीर सवाल उठे थे तो चुनाव आयोग द्वारा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए वीवीपैट मशीनों का प्रयोग शुरू किया गया था।
ईवीएम को देश की मतदान प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा गया है क्योंकि इससे जहां देश के हर क्षेत्र में और यहां तक कि आतंकवाद प्रभावित इलाकों में भी मतदान प्रतिशत बढ़ता गया, मतों की गिनती में लगने वाला कई-कई दिनों का समय चंद घंटों में सिमट गया, वहीं बूथों पर कब्जे की घटनाएं भी अप्रत्याशित रूप से बेहद कम हो गई तथा ईवीएम के इस्तेमाल से निरस्त होने वाले मतों की संख्या में काफी कमी आई है। जब बैलेट पेपर के जरिये मतदान होता था, तब प्रायः रद्द होने वाले मतों की संख्या हार के अंतर से भी ज्यादा होती थी। ईवीएम पर वोट डालने का सिस्टम ऐसा है कि लोग चाहकर भी कैप्चरिंग नहीं कर सकते। हालांकि कड़वा सच यही है कि ईवीएम हमेशा ही किसी न किसी राजनीतिक दल के निशाने पर रही है। जो भी दल चुनाव हारता है, वह हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ देता है। कभी विपक्ष में रही भाजपा ईवीएम के विरोध में मुखर थी तो भाजपा के केन्द्र में सत्तासीन होने के बाद से विपक्ष ईवीएम विरोध का राग अलापता रहा है। आश्चर्य की बात सदैव यही रही कि जब भी कोई विपक्षी दल चुनाव जीत जाता है तो ईवीएम राग पर विराम लग जाता है और अगले चुनाव के समय फिर यही बेसुरा राग शुरू हो जाता है।
बहरहरल, ईवीएम पर आरोप-प्रत्यारोपों के इस दौर में यह भी जान लेते हैं कि वास्तव में ईवीएम और वीवीपैट हैं क्या और ये कैसे कार्य करते हैं। ईवीएम यानी ‘इलैक्ट्रानिक वोटिंग मशीन’ का इस्तेमाल भारत की चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सबसे पहले 1998 में हुआ था, जब केरल के नॉर्थपारावूर विधानसभा क्षेत्र के कुछ बूथों पर ईवीएम के जरिये चुनाव कराए गए थे। प्रथम चरण में प्रयोग सफल रहने के बाद लोकसभा व विधानसभा चुनाव ईवीएम से ही कराए जाने लगे। ईवीएम वास्तव में दो अलग-अलग मशीनें होती हैं, जिसकी कंट्रोल यूनिट मतदान अधिकारी के पास होती है जबकि बैलेट यूनिट का प्रयोग मतदाता करते हैं और जब तक मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट से बैलेट का बटन नहीं दबाता, बैलेट यूनिट से वोट नहीं डाले जा सकते। कई बार ईवीएम धोखा भी दे जाती हैं लेकिन उस स्थिति के लिए हर सेक्टर मजिस्ट्रेट को कुछ अतिरिक्त ईवीएम दी जाती हैं तथा मशीन खराब होने पर पांच मिनट में इसे बदला जा सकता है। हालांकि ईवीएम को लेकर हमेशा संदेह व्यक्त किया जाता रहा है लेकिन कोई भी राजनीतिक दल चुनाव आयोग की खुली चुनौती के बावजूद ईवीएम में धांधली साबित करने में नाकाम रहा है। चुनावी प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए अब ईवीएम के साथ वीवीपैट अर्थात् ‘वोटर वैरीफाइड पेपर ऑडिटट्रेल’ को भी जोड़ा जाता है। जब भी कोई भी व्यक्ति ईवीएम का उपयोग कर अपना वोट देता है तो वह इस मशीन में उस प्रत्याशी का नाम और चुनाव चिन्ह अपनी चुनी गई भाषा में देख सकता है, जिसे उसने वोट दिया है। वीवीपैट से मतदाता की जानकारी प्रिंट कर मशीन में स्टोर कर ली जाती है और विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर सुरक्षित जानकारी के जरिये समस्या का समाधान किया जाता है।

*(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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