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श्रीनगर। कश्मीर में बदलाव की बयार के बीच अब अलगाववादियों की धमकियों और फतवों के खिलाफ भी लोग खुलकर सामने आ रहे हैं। कल तक उनके इशारे पर सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ती थी अब उनके फरमानों पर आम कश्‍मीरी कान ही नहीं दे रहे हैं। अब न कोई उनके हड़ताली कैलेंडर पर ध्यान दे रहा है और न जिक्र करना पसंद करता है। जिसे पूछो वही कहता है, अब दिल्ली को इनकी दुकान पर बड़ा ताला लगा चाबी झेलम में फेंक देनी चाहिए, तभी वादी में हमेशा के लिए अमन बहाल हो पाएगा।अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद पिछले एक पखवाड़े में पूरी वादी में माहौल तेजी से बदला है। पाबंदियों में जैसे-जैसे ढिलाई दी जा रही है, वादी में सामान्य जनजीवन भी पटरी पर लौट रहा है। ऐसे में अपनी दुकान पर ताला लगते देख हताश अलगाववादी व उनके समर्थक फिर जहर फैलाने की साजिश रच रहे हैं।वह विभिन्न माध्यमों से लोगों को उकसाकर, राष्ट्रीय विरोधी प्रदर्शनों का दौर शुरु करने के लिए हर तरीका इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहे हैं। पोस्‍टर के माध्‍यम से धमकियां दी जा रही है और अराजक तत्‍वों के सहारे खुली दुकानों और वाहनों पर पथराव कराने की साजिश रची जा रही है लेकिन आम कश्‍मीरी अब उनके फरमान को मानने से इन्‍कार कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग स्‍वयं सामने आकर सुरक्षा बलों से अराजक तत्‍वों की शिकायत भी कर रहे हैं।श्रीनगर के सौरा इलाके में बुधवार को हुर्रियत समेत कई अलगाववादी संगठनों के साझा संगठन जेआरएल (ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप) ने कुछ पोस्‍टर चिपकाकर कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया। कंप्‍यूटर से निकाले गए इन पोस्‍टरों में भड़काऊ भाषा का इस्‍तेमाल किया गया था और मार्च निकालने का आह्वान किया था।इससे पूर्व आठ अगस्त को राजबाग इलाके में जेआरएल व एक अन्य संगठन द्वारा हड़ताली कैलेंडर के पोस्टर चिपकाकर फरमान प्रदर्शनों के लिए उकसाया गया। ईद से दो दिन पहले भी डाउन-टाउन और बटमालू में कुछ आपत्तिजनक पोस्टर मिले। पर लोगों ने उनकी तमाम साजिशों की हवा निकाल दी और कोई भी प्रदर्शन करने नहीं पहुंचा। अलबत्ता, कुछ स्थानीय लोग ऐसी साजिशों के बारे में उसी समय पुलिस व सुरक्षा बलों को सूचित कर रहे हैं।राजबाग में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुछ दिन पहले कुछ स्थानीय लोग ही पोस्टर लेकर हमारे पास पहुंचे। साथ ही ऐसे तत्‍वों से बचाने की गुहार की। हालत यह है कि न किसी ने हड़ताल के उकसावे पर अमल किया और बाजार भी खुले रहे। उन्‍होंने कहा कि यह मेरे लिए बहुत हैरानी की बात थी। पहले इस तरह के पोस्टर तक हटाने में हमें खासी मशक्‍कत करनी पड़ती थी।

नई दिल्ली।देश की सड़कों पर हर घंटे 17 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। ये खुद भारत सरकार कह रही है कि ज्यादातर जानें तेज रफ्तार वाहनों के चलते जा रही है। यह आकड़ा भले ही चौंकाने वाला हो, लेकिन है 100 फीसद सच। ऐसे में खूनी एक्सप्रेस-वे के रूप में कुख्यात हो चुके ग्रेटर नोएडा से यमुना एक्सप्रेस-वे (Yamuna Expressway or Taj Expressway) पर वाहनों की रफ्तार पर लगाम लगाने की कयावद शुरू हो गई है। इसके तहत तेज रफ्तार और गलत लेन में चलने पर चालान तो काटा ही जा रहा है। इस बीच यह भी नियम बनने जा रहा है कि अगर किसी वाहन चालक ने तय समय से पहले 165 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे को पार किया तो चालान कटना तय है वह भी 2000 रुपये होगा।
तेज रफ्तार पर कटेगा चालान:-तेजरफ्तार वाहन चालकों पर लगाम लगाने के मकसद से अब यमुना एक्सप्रेस-वे के जीरो प्वाइंट पर दोनों ओर टाइम बूथ बनाए जा रहे हैं। बता दें कि ग्रेटर नोएडा शहर में स्थित सफीपुर और आगरा में जीरो पॉइंट के पास 20 दिन के अंदर इनका निर्माण पूरा हो जाएगा। ग्रेटर नोएडा में सफीपुर गांव के पास तो आगरा में भी जीरो प्वाइंट पर 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेस-वे पर समाप्त होता है।
2000 रुपये कटेगा चालान:-नए नियम के मुताबिक, यमुना एक्सप्रेस-वे पर वाहन चालक की रफ्तार तय समय सीमा से ज्यादा रही तो 2000 रुपये जुर्माना देना होगा। इसके ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती भी जरूरी नहीं है। ग्रेटर नोएडा और आगरा में एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट पर दोनों ओर टाइम बूथ बन रहे हैं। जो समय से पहले पहुंचने वालों पर भारी जुर्माना लगाएंगे।

यह है योजना
-सफीपुर और आगरा में जीरो पॉइंट पर लगेंगे टाइम बूथ
-20 दिन के अंदर निर्माण कार्य पूरा होने पर लागू हो जाएगी व्यवस्था
-2000 रुपये न्यूनतम होगा चालान, डीएल भी हो सकता है सस्पेंड
बताया जा रहा है कि दोनों ओर से वाहन के चलने का समय एक-दूसरे स्थानों पर भेज दिया जाएगा और फिर वाहन चालक ने यात्रा मानक समय से पहले पूरा की तो ओवरस्पीड का चार्ज लगेगा। यह चालान पूरे 2000 रुपये का होगा। इतना ही नहीं गति ज्यादा मिलने पर वाहन चालक का लाइसेंस भी निलंबित हो सकता है। यहां पर बता दें कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर कार के लिए गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटे तो भारी वाहनों के लिए 80 किलोमीटर है।
सड़क हादसों पर लगेगी लगाम;-यमुना एक्सप्रेस-वे पर गति सीमा के साथ निगरानी तंत्र मजबूत होने से लोग जुर्माने के साथ लाइसेंस निरस्त होने के डर से वाहन धीमी गति से चलाएंगे।बता दें कि नया मोटर वाहन संशोधन विधेयक 2019 लोकसभा और राज्यसभा में भी पास हो चुका है। ऐसे में सरकार आगामी एक सितंबर से इसे प्रभावी कर सकती है। इतना ही नहीं, सरकार की योजना है कि इसके कुछ प्रावधानों को तुरंत लागू किया जाए।नए मोटर अधिनियम में शराब पी कर गाड़ी चलाने पर दो हजार रुपये की जगह 10 हजार जुर्माना देना होगा। वहीं बिना सीट बेल्ट लगाए ड्राइविंग करने पर 100 रुपये की बजाय एक हजार रुपये जुर्माना देना होगा।
-यमुना एक्सप्रेसवे पर जाने वाले हैं तो ठहरिए।
-2 मिनट की यह खबर आपके 2000 रुपये बचा सकती है।
-कैमरों पर निगाहें रखकर फर्राटा भरना भारी पड़ सकता है।
-एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट पर दोनों ओर टाइम बूथ बन रहे हैं।
-ग्रेनो में सफीपुर और आगरा में जीरो पॉइंट के

प्राधिकरण की ओर से दिए गए इन सुझावों पर नहीं हुआ अमल
-चालकों को नींद न आए, इसके लिए जगह-जगह रंबल स्ट्रिप लगाने
-एक्सप्रेस-वे पर लेन बदलने के लिए पेंटिग का निशान लगाने
-खराब वाहनों को पांच मिनट के अंदर एक्सप्रेस-वे से हटाने
-तेज रफ्तार वाहनों को कैद करने के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने
-खराब वाहनों को हटाने के लिए क्रेन की संख्या बढ़ाने
-एक्सप्रेस-वे पर लगे इमरजेंसी बाक्सों को सही कराने
-हर पांच किमी पर चालकों को यातायात के नियम बताने के लिए बोर्ड लगाने
-तेज रफ्तार वाहनों के चालान काटने
-कॉल सेंटर पर जानकारी देने के लिए एसएमएस सेवा शुरू करने बाक्स

सफर के दौरान इन सुझावों पर करें अमल
-वाहनों को सौ किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से अधिक पर वाहन न चलाएं
-नींद आने और थकान होने पर वाहन न चलाए
-पास लेने के दौरान दाहिने और बाएं दूसरे वाहनों पर नजर रखे
-शराब पीकर एक्सप्रेस वे पर वाहन न चलाए
-ड्राइविंग करते समय मोबाइल पर बात न करें
-टायर पुराने हैं तो वाहन की गति 60 किमी प्रतिघंटा से अधिक न रखें
-यातायात नियमों का पूरी सजगता से पालन करें
-वाहन खराब होने पर इसकी सूचना तत्काल एक्सप्रेस वे प्रशासन को दें
-एक्सप्रेस-वे पर सफर शुरू करने से पहले टायरों की जांच जरूर करें
-एक्सप्रेस-वे प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या - 28000
-प्रतिदिन एक्सप्रेस-वे से 84000 वाहन गुजर सकते हैं

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम का पूर्व वित्तमंत्री से लेकर सीबीआई हिरासत के सफर में एक महिला की अहम भूमिका रही। ये महिला है इंद्राणी मुखर्जी, जो खुद अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं। इंद्राणी मुखर्जी के एक बयान की वजह से पी चिदंबरम जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं और देश की राजनीति में भूचाल मचा हुआ है। कांग्रेस चिदंबरम की गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर हमलावर है, जबकि ये मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पूर्व चिदंबरम को राहत देने से इंकार कर चुके हैं। आइये जानते हैं कौन हैं इंद्राणी मुखर्जी और पी चिंदबरम के खिलाफ उन्होंने ऐसा कौन सा बयान दिया था, जिससे वह सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिकंजे में पहुंच गए हैं।
कौन हैं इंद्राणी मुखर्जी;-इंद्राणी मुखर्जी, देश की मशहूर लाइजनर रही हैं। बड़े-बड़े उद्योगपतियों, सेलिब्रिटीज से लेकर राजनेताओं तक पहुंच रखने वाली इंद्राणी मुखर्जी को मुंबई पुलिस ने अगस्त 2015 में उनकी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। शीना बोरा, इंद्राणी मुखर्जी और उनके प्रेमी सिद्धार्थ दास की बेटी थी। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई और जांच एजेंसी ने भी इंद्राणी मुखर्जी को इस हत्याकांड में आरोपी माना। इंद्राणी और सिद्धार्थ दास 1986 से 1989 तक संबंध में रहे हैं। इंद्राणी की गिरफ्तारी के साथ ही उनकी हाईप्रोफाइल जिंदगी के पन्ने खुलने लगे।
2007 में इंद्राणी ने शुरू किया था INX मीडिया;-इंद्राणी के पहले पति का नाम संजीव खन्ना है। दूसरे पति का नाम पीटर मुखर्जी है। पीटर मुखर्जी की भी इंद्राणी मुखर्जी से दूसरी शादी हुई थी। यूके में जन्में पीटर मुखर्जी, रिटायर्ड इंडियन टेलीविजन एक्जक्यूटिव हैं। वह 1997 से 2007 के बीच स्टार भारत के सीईओ भी रहे हैं। लाइजनर का काम शुरू करने से पहले इंद्राणी मुखर्जी ने पति पीटर मुखर्जी संग 2007 में आईएनएक्स मीडिया की शुरूआत की। 2009 में दोनों ने आईएनएक्स मीडिया से इस्तीफा दे दिया। इसके पहले इंद्राणी मुखर्जी एचआर कंसल्टेंट और मीडिया एक्जक्यूटिव भी रह चुकी थीं।
शीना बोरा मर्डर केस;-इंद्राणी मुखर्जी और उनके प्रेमी सिद्धार्थ दास की बेटी शीना बोरा मुंबई मेट्रो में काम करती थी। 24 अप्रैल 2012 से वह लापता थी। 23 मई 2012 को शीना बोरा का शव रायगढ़ जिले के पेन थाना अंतर्गत जंगल क्षेत्र में स्थानीय लोगों को मिला था। शव को हत्या के बाद ठिकाने लगाने के लिए जंगल में दफनाने का प्रयास किया गया था। ग्रामीणों की सूचना पर स्थानीय पुलिस ने शव को कब्र से बाहर निकाला और उसका पोस्टमार्टम करा, उसे दोबारा दफना दिया। तब तक शव की शिनाख्त नहीं हुई थी। 2015 में मुंबई में शीना बोरा की हत्या का मामला दर्ज होने पर शव की शिनाख्त हो सकी।
इसलिए हुई थी शीना बोरा की हत्या;-पहले मुंबई पुलिस और फिर सीबीआई ने इस केस में शीना बोरा की मां इंद्राणी मुखर्जी, उसके सौतेले पिता पीटर मुखर्जी और इंद्राणी के ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। फिलहाल, इंद्राणी और उनके पति पीटर दोनों इस हत्याकांड में जेल में बंद हैं। सीबीआई के मुताबिक शीना की हत्या इसलिए हुई क्योंकि वह इंद्राणी से मुंबई में एक फ्लैट की मांग कर रही थी। जांच एजेंसी ने बताया कि शीना बोरा अपनी मां को ब्लैकमेल कर रही थी। दरअसल, इंद्राणी नहीं चाहती थी कि दुनिया के सामने शीना बोरा का नाम उनकी बेटी के तौर पर आए, लिहाजा वह उसे अपनी बहन बताती थीं। इसी बात को लेकर शीना उन्हें ब्लैकमेल करती थी। इसके अलावा इंद्राणी और उनके पीटर इस बात से भी नाराज थे कि शीना के पीटर के बेटे राहुल से संबंध थे। इस वजह से उसकी हत्या की गई। इस केस में 50 से ज्यादा गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज हो चुके हैं।
पी चिंदबरम के खिलाफ सरकारी गवाह हैं इंद्राणी:-इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी ने INX मीडिया केस की जांच कर रही सीबीआई टीम और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बताया था कि उन्होंने 2006 में नार्थ ब्लॉक कार्यालय में तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम से कंपनी में विदेशी निवेश की मंजूरी प्राप्त करने के लिए मुलाकात की थी। उस वक्त वित्तमंत्री ने उनसे अपने बेटे कार्ति से मिलने की बात कही थी। बदले में पी चिदंबरम ने उनसे कार्ति के व्यवसाय में मदद करने के लिए कहा था। सीबीआई ने इंद्राणी को इस केस में सरकारी गवाह बना रखा है। उसका बयान इस केस की सबसे मजबूत कड़ी है। सीबीआई ने 17 फरवरी 2018 को इंद्राणी का बयान कोर्ट में दर्ज कराया था।
इंद्राणी ने दिया था ये बयान:-कोर्ट में इंद्राणी ने बयान दिया था कि पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने उनसे 10 लाख डॉलर की रिश्वत मांगी थी। उन्होंने कार्ति से दिल्ली के हयात होटल में मुलाकात की थी। रिश्वत की रकम देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से इंद्राणी मुखर्जी, कार्ति की कंपनी में शामिल हुईं। इसके बाद फर्जी मुआवजे के तौर पर कार्ति की कंपनी ASCPL और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों ने INX मीडिया के लिए सात लाख डॉलर के चार चालान बनाए और उनका भुगतान किया गया। इसी मामले में फरवरी 2018 में कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार किया गया था। पी चिदंबरम पर जांच में सहयोग न करने का भी आरोप सीबीआई ने लगाया है।
क्या है INX मीाडिया मामला;-सीबीआई के अनुसार मार्च 2007 में INX मीडिया द्वारा विदेशी निवेश के लिए संवर्धन बोर्ड (FIPB) से अवैध तरीके से मंजूरी हासिल की थी। INX मीडिया को शेयर जारी कर 46 फीसद इक्विटी जुटाने की मंजूरी प्रदान की गई थी। इस मामले में इद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी को भी आरोपी बनाया गया था। इंद्राणी मुखर्जी ने जांच के दौरान सीबीआई और ईडी को बताया कि एफआईपीबी मंजूरी में हुए उल्लंघन को रफा-दफा करने के लिए तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरण के बेटे कार्ति चिदंबरम ने 10 लाख डॉलर की रिश्वत मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था

नई दिल्ली। आज जब लगभग हर चीज फोन के एक टच पर उपलब्ध है, तो ऐसे में सरकारें भी अपने कामकाज के तरीके कोबदल रही हैं ताकि बहुमूल्य समय और संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल कर तेजी से काम किया जा सके। पिछले कुछ सालों में ई-गवर्नेंस के जरिए सरकारी सेवाओं को जनता तक जल्द पहुंचाने में उत्साहजनक सफलता मिली है। सरकारी कामकाज में इसी डिजिटल क्रांति का अगला चरण है UPSWAN 2.0, जिसे देश की अग्रणी टेलीकॉम कंपनी Airtel ने खासतौर पर उत्तर प्रदेश के लिए बनाया है।
UPSWAN 2.0 की जरूरत क्यों?;-बड़ा राज्य, भारी जनसंख्या और सीमित संसाधन- ये चीजें किसी भी स्टेट मशीनरी को सुस्त बनाने के लिए काफी हैं। और उत्तर प्रदेश जैसा बड़ा राज्य, लंबे समय से इन समस्याओं के साथ जूझ रहा है- जिसका नतीजा है सरकारी दफ्तर में राशन कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, पेंशन और सरकारी मदद के लिए आवेदन जैसे मूलभूत कागजों के लिए भी लंबी लाइनें और लंबा इंतजार। जाहिर है इतनी बड़ी आबादी के इतने बड़े डेटा की सहज उपलब्धता न होने के चलते ही इन कामों में जरूरत से ज्यादा वक्त लग जाता है। इसी के चलते उत्तर प्रदेश सरकार ने UPSWAN 2.0 का सहारा लिया है- ताकि उत्तर प्रदेश की सभी सरकारी और प्रशासनिक मशीनरी को एक तार में जोड़कर कामों में होनेवाली देरी से निजात मिले और जनता तक पहुंचनेवाली सरकारी सुविधाओं का लाभ जल्द से जल्द दिया जा सके।
क्या है UPSWAN 2.0?:-UPSWAN 2.0 उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी आधारभूत परियोजना है जिसे राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लान के तहत अमल में लाया गया है। ये परियोजना अपने आप में देश की सबसे बड़ी ऐसी परियोजना है जिससे पूरे उत्तर प्रदेश के राज्य स्तरीय, जिले, ब्लॉक और तहसील मुख्यालय आपस में जुड़ जाएंगे। इस आधुनिक नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर में 885 प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस हैं जो एक सुरक्षित और हाई स्पीड नेटवर्क के जरिए सरकारी सेवाएं जनता तक पहुंचाएंगे। साधारण शब्दों में इस नेटवर्क के जरिए ब्लॉक स्तर से लेकर पूरे राज्य का सरकारी डेटा सभी मुख्यालयों की पहुंच में होगा। जिससे सरकारी सेवाएं तेजी से जनता तक पहुंचायी जा सकेंगी।
आम जनता के लिए मददगार;-अब तक उत्तर प्रदेश सरकार 57 सरकारी सेवाएं अपने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के जरिए जनता तक पहुंचाती रही है।
लेकिन UPSWAN 2.0 के जरिए अब-
• सुदूर इलाकों और कोनों तक सरकारी सेवाएं ई-डिलिवरी के जरिए पहुंचाई जा सकेंगी।
• राज्य के सभी निवासी, राज्य सरकार के किसी भी मुख्यालय से अपनी जरूरत का सर्टिफिकेट आसानी से आवेदन करके ले सकते हैं।
• राज्य के नागरिक आसानी से पेंशन, सरकारी मदद, नए राशन कार्ड या नवीनीकरण और रोजगार के लिए राज्य के सभी मुख्यालयों में आवेदन दे सकते हैं।
• अब मुख्यालयों से बिना किसी देरी के जन्म/मृत्यु प्रमाणपत्र बेहद आसानी से जारी किए जा सकेंगे।
कैसे साकार हुआ UPSWAN 2.0 ?;-UPSWAN 2.0 Airtel का ऐसा प्रोडक्ट है जिसे खास तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार के लिए डिजाइन किया गया है। इसके लिए कंपनी ने राज्य में बृहद नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है ताकि सरकारी सेवाओं को डिजिटल माध्यम के जरिए प्रदेश के कोने-कोने में पहुंचाया जा सके। इसमें MPLS, इंटरनेट, नेटर्क हार्डवेयर के संसाधन, सेक्योरिटी फायरवॉल, सिस्टम इंटीग्रेशन और मैनेज्ड सर्विस समेत तमाम चीजें Airtel ने मुहैय्या करवाई हैं। सभी राजकीय मुख्यालयों को 10 GBPS और तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों को 10 MBPS की नेटवर्क कनेक्टिविटी दी गई है। साथ ही इस प्रोजेक्ट के तहत नेटवर्क परफॉर्मेंस की निगरानी के लिए लखनऊ में एक नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर भी स्थापित किया गया है। यही नहीं, UPSWAN 2.0 के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार एक ऐसी नींव रख रही है, जिस पर भविष्य में पूरे राज्य में स्मार्ट सिटी बनाई जाएंगी।

नई दिल्ली: जमीयत उलेमा -ए हिन्द संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक के फैसले को चुनौती दी है। हाल ही में नरेंद्र मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं की आजादी के लिए तीन तलाक को खत्म करने का फैसला सुनाया था। इस फैसले के बाद मुस्लिम महिलाओं के चेहरे पर खुशी की लहर आ गई थी। भारतीय कानून के हिसाब से अब मुस्लिम सुमदाय में कोई भी पति अपनी पत्नी को महज तीन बार तलाक बोलने पर नहीं छोड़ सकता है।
जमीयत उलेमा- ए हिन्द संगठन की मांग:-ट्रिपल तलाक के फैसले का विरोध करने वाले जमीयत उलेमा -ए हिन्द संगठन ने मांग की है वह महिलाओं की शादी से संबंधित एक्ट 2019 को सही दिशा पर ले जाने की मांग की है।
क्या है जमीयत उलेमा- ए हिन्द संगठन;-जमीयत उलेमा-ए-हिंद संगठन को जमीयत उलमा-ए हिंद भी कहा जाता है। यह संठन भारतीय इस्लामी विद्ववानों का एक संगठन है। इसकी स्थपना कई मुस्लिम समुदाय के लोगो ने मिलकर की है।
ट्रिपल तलाक का कट्टरपंथी मुस्लिम समुदाय ने किया था विरोध;-ट्रिपल तलाक के पास होने से पहले भी इस को खत्म करने के लिए काफी कट्टरपंथी समुदाय के लोगों ने विरोध किया, लेकिन लंबे विरोध के बाद भी इस कानून को पास करके भाजपा ने मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाया।

तिरुवनंतपुरम। केरल में बड़ा बदलाव किया गया है। यहां दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ा गया है। अह आपको राज्य में सरकारी वाहन चलाते हुए महिलाएं भी नजर आएंगी। इससे पहले तक केरल में सरकारी वाहन चलाने के लिए सिर्फ पुरुषों को ही रखा जाता था।अब राज्य सरकार ने फैसला किया है कि सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और सरकारी विभागों में महिलाओं चालकों को भी रखा जाएगा। बुधवार को मुख्यमंत्री पिनाराई की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ये फैसला लिया गया है।
इसलिए लिया गया ये फैसला;-सरकार ने ये फैसला समाज में लिंग लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए किया है। प्रदेश सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इस बात की जानकारी दी गई है। साथ ही इसके लिए अब मौजूदा नियमों में संशोधन किया जाएगा। इसके अलावा विज्ञप्ति में बताया गया है कि मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खेलों में 83 पुरस्कार विजेताओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त करने का भी फैसला किया है।
महिला बटालियन का भी किया गया था गठन;-सरकार ने हाल ही में पहली महिलाओं बटालियन का गठन भी किया था। इसका गठन 550 सदस्यों के साथ पुलिस बल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व दिखाने के लिए किया गया था।

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्‍या भूमि विवाद मामले में गुरुवार को दसवें दिन सुनवाई शुरू हो गई। वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने बहस शुरू की। गोपाल सिंह विशारद की ओर से मामले में पक्ष रखा जाएगा। बता दें कि विशारद की याचिका में कहा गया है कि रामलला की पूजा अर्चना का अबाधित अधिकार मिले। विशारद की ओर से 1950 में मुकदमा दाखिल किया गया था।चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ अयोध्या भूमि विवाद पर सुनवाई कर रही है। बता दें कि बुधवार को हुई सुनवाई में रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन (CS Vaidyanathan) ने कानून का हवाला देकर भगवान को नाबालिग बताया था और कहा था कि नाबालिग की संपत्ति नहीं छीनी जा सकती है और न कब्‍जे का दावा किया जा सकता है।सुप्रीम कोर्ट की ओर से सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन सुनवाई करने का फैसला किया था। पांच दिन सुनवाई की बात पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने आपत्ति जताई थी, जिसे शीर्ष आदलत ने नकार दिया था। सनद रहे कि अयोध्या मामले में मध्यस्थता की कोशिश नाकाम होने पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने रोजाना सुनवाई का फैसला किया है। 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 अपीलें दाखिल की गईं थी। फैसले में कहा गया था कि अयोध्‍या के 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर भागों में सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बांट दिया जाए। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्‍या में बाबरी मस्‍जिद को गिरा दिया गया था।

इंदौर। मध्यप्रदेश में 5 लोगों को टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है। इन सभी को एटीएस ने सतना से गिरफ्तार किया है। इन सभी का पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ा होने की जानकारी है। आरोपियों के पास से मोबाइल में करीब 13 पाकिस्तानी नंबर मिले हैं। फिलहाल इनसे पूछताछ जारी है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ये आरोपी इन नंबरों का इस्तेमाल वीडियो कॉल, और व्हाट्सएप संदेश भेजने के लिए करते थे।मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक ये आरोपी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के अनुसार काम कर रहे हैं। साथ ही कहा जा रहा है कि ये सभी यहां पर अपना नेटवर्क मजबूत कर रहे थे। हालांकि आधिकारिक रुप से इन बातों की पुष्टि नहीं की गई है क्योंकि, अभी भी मामले में जांच जारी है।
जम्मू कश्मीर में एनआइए ने की कार्रवाई:-पिछले हफ्ते शुक्रवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पूर्व विधायक और अवामी इत्तेहाद पार्टी के चेयरमैन इंजीनियर रशीद को टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद टेरर फंडिग मामले में पकड़े गए लोगों की संख्या करीब 17 हो गई है। गौरतलब है कि टेरर फंडिंग में एनआइए ने कश्मीर के कई नामी पत्रकारों व्यापारियों और दो दर्जन अलगाववादियों व उनके परिजनों से पूछताछ की है। इतना ही नहीं कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चेयरमैन मिया क्यूम, हुर्रियत चेयरमैन मीरवाइज और गिलानी के दोनों बेटों व एक नाती से भी पूछताछ हो चुकी है।

नई दिल्ली। अमेरिकी का साइबर सुरक्षा फर्म फायरआइ (fire eye) ने गुरुवार को कहा कि हैकर्स ने भारत की एक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा वेबसाइट को हैक कर लिया है। हैकर्स ने मरीज और डॉक्टर की जानकारी वाले 68 लाख रिकॉर्ड को चोरी कर लिया है। वेबसाइट का नाम बिना बताए फायर आइ ने कहा कि ज्यादातर हैकर्स चीन के है और वह भारत सहित दुनिया भर में स्वास्थ्य संगठनों और वेब पोर्टलों से चोरी किए गए डेटा को सीधे बेच रहे हैं।फर्म ने आगे कहा कि फरवरी में भारत स्थित स्वास्थ्य सेवा वेबसाइट से जुड़े 6,800,000 रिकॉर्ड्स चुरा लिए हैं। जिसमें रोगी की जानकारी और व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी (पीआईआई), डॉक्टर की जानकारी और पीआईआई और क्रेडेंशियल्स शामिल हैं। फायरआई ने एक रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि 1 अक्टूबर, 2018 और 31 मार्च, 2019 तक हेल्थकेयर से जुड़े डेटाबेस देखें जिसके बाद ये बात सामने आई है। ओपन सोर्स रिपोर्टों से पता चला है कि हाल के दशकों में कैंसर की मृत्यु दर में वृद्धि हुई है, जिसमें कैंसर चीन की मौत का प्रमुख कारण बन रहा है। जैसा कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) 2020 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा को आगे बढ़ाता है, लागत को नियंत्रित करता है फायरआई ने अपनी रिपोर्ट ने कहा।पीआरसी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते फार्मास्युटिकल बाजारों में से एक है, जो घरेलू फर्मों, विशेष रूप से ऑन्कोलॉजी उपचार या सेवाएं प्रदान करने वाले आकर्षक अवसर पैदा करता है। इस साल अप्रैल की शुरुआत में, संदिग्ध चीनी साइबर जासूसों ने अमेरिका के एक स्वास्थ्य केंद्र पर EVILNUGGET" malware के साथ निशाना साधा था। एक चीनी समूह जिसने जैव चिकित्सा, दवा और स्वास्थ्य संगठनों पर ध्यान केंद्रित किया पूर्व वर्षों में भी इसी संगठन को लक्षित किया है।

बॉलीवुड स्टार शिबानी दांडेकर और फरहान अख्तर ने हाल ही में लैक्मे फैशन वीक के दौरान रैंप पर धांसू एंट्री कर सभी का दिल जीत लिया। इस दौरान दोनों बेहद प्यारे नजर आ रहे थे।बॉलीवुड स्टार, फिल्म निर्माता और निर्देशक फरहान अख्तर ने अपनी गर्लफ्रेंड शिबानी दांडेकर के साथ रैंप पर चलकर सारी महफिल लूट ली।रैंप पर चलते वक्त ये लवबर्ड बेहद प्यारा लग रहा था। इस कपल को देखते ही वहां मौजूद लोग बस देखते ही रह गए।रैंप पर संग चलते वक्त शिबानी दांडेकर और फरहान अख्तर एक दूसरे की आंखों में बस देखते ही रह गए।लेकिन कुछ ही पल बाद फरहान अख्तर की गर्लफ्रेंड शिबानी दांडेकर ने शर्माते हुए कुछ ऐसा रिएक्शन दे डाला।इस दौरान ये कपल एक दूसरे के साथ ऐसा लग रहा था कि मानों सीधा आसमान से ही ये जोड़ी उतरी हो।फरहान और शिबानी दोनों फैशन डिजायनर पायल सिंघल के लिए बतौर शो स्टॉपर बनकर यहां पहुंचे थे।इस बेहद क्यूट कपल को यहां देखकर सभी की निगाहें इनकी ओर ठहर गईं। शो के अंत में दोनों ने डिजायनर पायल सिंघल के साथ खड़े होकर पोज दिए।

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