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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने जा रहे कलाकारों और स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए कहा है कि परेड में आप एक प्रकार से मिनी इंडिया-न्यू इंडिया को देखने वाले हैं। भारत असल में क्या है, ये हमारा देश और पूरी दुनिया आपके माध्यम से समझती है। भारत की श्रेष्ठता की शक्ति इसकी भौगोलिक और सामाजिक विविधता में ही है। हमारा ये देश एक प्रकार से फूलों की माला है, जहां रंग-बिरंगे फूल भारतीयता के धागे से पिरोए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब हम एक भारत, श्रेष्ठ भारत की बात करते हैं, तो हमें ये भी याद रखना है कि भारत असल में है क्या। भारत क्या सिर्फ सरहदों के भीतर 130 करोड़ लोगों का घर ही नहीं है, बल्कि भारत एक राष्ट्र के साथ-साथ एक जीवंत परंपरा है, एक विचार है, एक संस्कार है, एक विस्तार है।
राजपथ पर दिखती है भारत की ताकत:-'एट होम' इवेंट में पीएम ने कहा कि राजपथ पर आपके प्रदर्शन से पूरी दुनिया भारत की इस शक्ति के भी दर्शन करती है। इसका असर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ के प्रचार-प्रसार में भी होता है और भारत के टूरिज्म सेक्टर को भी इससे मजबूती मिलती है।पीएम ने परेड में शामिल होने जा रहे युवाओं से कहा कि यहां जितने भी युवा साथी आए हैं, मेरा आपसे आग्रह रहेगा कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की ज्यादा से ज्यादा चर्चा करें। चर्चा ही नहीं, बल्कि खुद अमल करके, उदाहरण पेश करें। हमारे ऐसे ही प्रयास न्यू इंडिया का निर्माण करेंगे
मोदी ने बताया गणतंत्र दिवस परेड के पीछे का ध्येय:-परेड के उद्देश्य को लेकर पीएम ने कहा, 'हम जिस न्यू इंडिया की तरफ आगे बढ़ रहे हैं, वहां यही आकांक्षाएं, यही सपने हमें पूरे करने हैं। भारत का कोई भी व्यक्ति, कोई भी क्षेत्र पीछे ना रह जाए, ये हमें सुनिश्चित करना है। गणतंत्र दिवस की परेड के पीछे भी यही ध्येय है।पीएम ने कहा कि एनसीसी और एनएसएस के माध्यम से अनुशासन और सेवा की एक समृद्ध परंपरा जब राजपथ पर दिखती है, तो देश के करोड़ों युवा प्रेरित और प्रोत्साहित होते हैं।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय बाल पुरस्कार पाने वाले बच्चों से मुलाकात की। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ये सारे अवॉर्ड्स आखिरी मुकाम नहीं हैं, यह एक प्रकार से जिंदगी की शुरुआत है। इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इन बच्चों को विभिन्न क्षेत्रों में पुरस्कार दे चुके हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी का परिचय जब हो रहा था, तो मैं सच में हैरान था। इतनी कम आयु में जिस प्रकार आप सभी ने अलग-अलग क्षेत्रों में जो प्रयास किए, जो काम किया है, वो अदभुत है। इतनी कम आयु में जिस प्रकार आप सभी ने अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ करके दिखाया है, उसके बाद आपको और कुछ अच्छा करने की इच्छा होगी। एक प्रकार से ये जिंदगी की शुरुआत है। आपने मुश्किल परिस्थितियों में साहस दिखाया, किसी ने अलग-अलग क्षेत्रों नें उपलब्धियां प्राप्त की हैं।
पुलिस के प्रति होना चाहिए आदर का भाव:-प्रधानमंत्री नरेंदे मोदी ने छात्रों को बताया कि आजादी के बाद इस देश में 33 हजार पुलिस के जवान हम लोगों की सुरक्षा के लिए शहीद हुए हैं। उस पुलिस के प्रति आदर का भाव बनना चाहिए। इससे समाज में एक बदलाव शुरु हो जाएगा। आप सभी को पुलिस मेमोरियल देखने जरूर जाना चाहिए।
आपसे मुझे भी प्रेरणा मिलती है:-पीएम ने कहा कि आप सब कहने को तो बहुत छोटी आयु के हैं, लेकिन आपने जो काम किया है उसको करने की बात तो छोड़ दीजिए, उसे सोचने में भी बड़े-बड़े लोगों के पसीने छूट जाते हैं। आप युवा साथियों के साहसिक कार्यों के बार में जब भी मैं सुनता हूं तो मुझे भी प्रेरणा मिलती है। आप जैसे बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए ही इन राष्ट्रीय पुरस्कारों का दायरा बढ़ाया गया है।
मुलाकात से पहले बच्चों ने क्या कहा?:-पीएम मोदी से मुलाकात करने से पहले पश्चिम बंगाल की राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता सुक्रिती ने कहा कि इन पुरस्कारों के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री देश के युवाओं को सशक्त बना रहे हैं। मुझे यह पुरस्कार सामाजिक सेवाओं के लिए दिया गया है। वहीं पुरस्कार पाने वाले एक अन्य बच्चे हृदयेश्वर सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी से सीखा है कि अगर देश हमें कुछ दे रहा है तो देश को भी हमें कुछ देना चाहिए।
1957 में हुई थी शुरुआत;-हर वर्ष गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी के पहले वीर बच्‍चों को सम्‍मानित किया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1957 में भारतीय बाल कल्याण परिषद ने की थी। इस सम्‍मान के तौर पर एक पदक, प्रमाण पत्र और नकद राशि दी जाती है। इस पुरस्‍कार के तहत सामान्य सम्मान भी दिया जाता है। इसके अंतर्गत प्रत्येक को 20-20 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है।

नई दिल्ली। ल्क्ष्मी अग्रवाल, ऋतु, रूपा, बाला, शबनम मधु... हर पीड़िता अपने पीछे दिल दहला देने वाली एक हकीकत लिए आगे बढ़ रही है। समाज से इनका संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है बल्कि हर पल-हर दिन-हर जगह यह संघर्ष आज भी जारी है। ये आज भी उस समाज से लड़ रही हैं, जिसने इनके दुख के समय साथ नहीं दिया। आज भी इन्हें समाज से अपने हिस्से की हमदर्दी की आस है। एसिड अटैक जैसी भीषण त्रासदी झेल चुकीं इन पीड़िताओं का इनके परिवार के अलावा किसी ने साथ नहीं दिया। न किसी ने उफ किया, न विरोध कि ऐसा फिर किसी और के साथ न हो। एक के बाद एक घटनाएं होती रही हैं, हो रही हैं।
पीड़ा को बढ़ा देता है परिवार पर पड़ा आर्थिक बोझ : ऋतु कहती हैं, आस पड़ोस हो या शहर, सभी ने अपनी नजरों और बातों से हमारी पीड़ा को और बढ़ाया। आज आपको भले ही मेरे चेहरे पर मुस्कान दिख रही है, लेकिन आपको पता है कि चेहरे को बचाए रखने के लिए एक सर्वाइवर को कितनी सर्जरी झेलनी पड़ती हैं। ऑपरेशन होगा, यह सुनते ही परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ दुख को और बढ़ा देता है। सोचिए, जब 10-15 सर्जरी होनी हों तो क्या हाल होगा। आप अंदाज लगा सकते हैं कि परिवारों ने क्या-क्या झेला होगा। अब हम सब मिलकर इस प्रयास में जुटी हैं कि आगे औरों को आर्थिक, सामाजिक व मानसिक कष्ट न सहना पड़े।
आरक्षण ही नहीं, प्रशिक्षण भी जरूरी... : सर्वाइवर बाला कहती हैं कि हमे दिव्यांग की श्रेणी में रखकर सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण तो दे दिया, लेकिन क्या कभी किसी सरकार ने हम पीड़िताओं से पूछा है कि कितनी पढ़ी-लिखी हैं? आप को जानकर हैरानी होगी कि अधिकतम पीड़िताएं बहुत कम पढ़ी-लिखी होती हैं। चाहे आप किसी भी शहर में देख लीजिए। मैं, बिजनौर, उप्र से हूं, पांचवी पास हूं। बगैर आगे की पढ़ाई किए यहां शीरोज रेस्त्रां में कंप्यूटर पर भी काम कर लेती हूं। जरूरत आरक्षण की नहीं बल्कि एक उचित दिशा में प्रशिक्षण की है। किसी भी रोजगार के काबिल बनाने के लिए प्रशिक्षण देना ज्यादा उचित रहता है।
एक सर्वाइवर जिसने 12-13 सर्जरी झेली हों, वो स्वस्थ नहीं रह पाती। पहले पढ़ाई करो फिर नौकरी तलाशो, तब जाकर आरक्षण मिलेगा। यह कष्टप्रद है। उप्र सरकार ने हमें दिव्यांग कार्ड की भी सुविधा दी है। अटैक के बाद से मुझे एक आंख से दिखाई नहीं देता है, लेकिन जब कार्ड बनवाने गई तो कहा गया कि दोनों आंखों से दिव्यांग होने पर ही कार्ड बनना संभव है। हालांकि औरों को इसका लाभ मिला। अलीगढ़ की एक सवाईवर है, उसका कार्ड तुरंत बन गया। लेकिन सभी सवाईवर्स को समान रूप से सहयोग की जरूरत है।
लोगों के दिमाग में भरे एसिड को दूर करना है...: ऋतु कहती हैं, मेरा चेहरा देख रही हैं 15 सर्जरी के बाद ऐसा दिखता है। मैं ऐसा ही चेहरा लेकर कुछ दिन पहले एक दुकान से एसिड लेने गई, दुकान वाले ने मेरे से एक सवाल तक नहीं किया और बोतल पकड़ा दी। अब इसे क्या कहेंगे? हालांकि दुकान पर बिक्री से ज्यादा जरूरी लोगों के दिमाग में भरे एसिड को दूर करना है, दुकानों पर तो खुद बिकना बंद हो जाएगा। सरकार के स्तर पर सिर्फ सरकारी अस्पतालों में इलाज मिलता है। उप्र की स्थिति बताती हूं हमसे जुड़ी कई सर्वाइवर हैं, जिन्हें कार्ड के माध्यम से इलाज तो मिलता है, लेकिन वहां तकनीकी कमी कहें या डॉक्टर्स का कम अनुभव, सर्वाइवर को कष्ट झेलना पड़ता है। वहीं मुझे देखिए मैं रोहतक, हरियाणा से हूं, यहां राज्य सरकार ने ऐसे मामलों में देश-विदेश में कहीं भी इलाज की सुविधा दी हुई है, तो मैं दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज करा रही हूं। जहां सर्जरी महंगी तो है, लेकिन बहुत किफायत बगैर शारीरिक मानसिक कष्ट के इलाज होता है।
लचर है व्यवस्था, नहीं मिलता पूरा न्याय...: ऋतु ने कहा, जरूरत इस बात की है ऐसे मामलों को सरकार, समाज और न्यायालय बेहद संवेदनशील होकर देखें- बरतें। सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बेहतर हों ताकि बिना आर्थिक बोझ डाले समुचित उपचार मिल सके। पूरा न्याय मिले, अपराधी छूटने न पाएं। समाज की संवेदना और स्वीकार्यता मिले। क्योंकि जिस वक्त एक लड़की पर अटैक होता है तो शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक हर तरह से उसकी हालत दयनीय होती है। जरूरत सुलभ माहौल की है। हम खुद तो लड़ ही रहे हैं, लेकिन समाज के इस शोषण के खिलाफ जरूरत है सरकारी, स्वास्थ्य और कानूनी सहयोग की। एक बेहद अहम बात और कहूंगी, मैंने कानूनी लड़ाई लड़ी, आरोपित को पांच साल की सजा हुई, लेकिन कुछ साल बीते हाईकोर्ट के जरिए वो छूट गया। मेरे पास नोटिस तक नहीं पहुंचा। अब यदि मुझे आगे लड़ाई लड़ना है तो सुप्रीम कोर्ट जाऊं। तो बताइए क्या इतना लड़ने के बाद मुझमें हिम्मत होगी कि अब मैं एक बार फिर न्याय की लंबी प्रक्रिया से जूझ सकूं? मैंने सैंकड़ों एसिड पीड़िता देखीं, लेकिन लक्ष्मी वाले मामले को छोड़ दें तो कभी किसी को मिसाल वाला न्याय नहीं मिल सका। आरोपित कुछ दिन बाद ही जेल के बाहर होते हैं।
कानून ही पर्याप्त नहीं, पालन भी हो...: एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल, जिन्होंने इस विषय में एक जनहित याचिका दाखिल की थी, उस के बाद एक ऐसा कानून बन सका कि अस्पताल में सर्वाइवर्स के इलाज के लिए कुछ सहूलियत होने लगी। लक्ष्मी कहती हैं कि आज कुछ चीजें बदली तो हैं, लेकिन फिर भी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि अब भी बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में महिलाएं ज्यादा शिकार हो रही हैं। दुकानों पर एसिड की खुली बिक्री पर प्रतिबंध के लिए नियम बना, लेकिन क्या हुआ? आज भी आसानी से सभी जगह मामूली सी कीमत पर एसिड मिल जाता है। लक्ष्मी ने दुख जताते हुए कहा, हाल ही का वाकया बताती हूं फिल्म छपाक आई, उसकी शूटिंग के दौरान टीम के लोगों को दुकानों पर एसिड खरीदने के लिए भेजा गया तो उन्हें बगैर कोई प्रमाण दिखाए एसिड की 24 बोतलें आसानी से मिल गईं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। इतनी लंबी लड़ाई लड़ने के बाद भी नियमों का यह हाल है तो ऐसे कानून का क्या फायदा?
जिन्होंने दी सर्वाइवर्स को हिम्मत;-छांव फाउंडेशन, शीरोज रेस्त्रां लखनऊ व आगरा मीर फाउंडेशन एसिड सर्वाइवर्स एंड वीमेन वेलफेयर फाउंडेशन, कोलकाता।
दस साल की सजा:-इसमें भारतीय दंड संहिता की 326ए और 326बी धाराएं जोड़ी गई थीं। इन धाराओं के तहत गैर-जमानती अपराध मानते हुए इसके लिए न्यूनतम सजा 10 साल रखी गई।
30 रुपये में मिल जाती है एसिड की बोतल:-छांव फाउंडेशन के संचालक आशीष बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में आरटीआइ दाखिल कर जब एसिड बिक्री को लेकर स्थिति का आकलन किया गया तो अमूमन हर जिले से नकारात्मक जवाब मिला। लखनऊ में तो हाल ही में कोर्ट में इसी मामले पर हमारी याचिका के बाद जिला अधिकारी को फटकार तक लगी थी। मध्य प्रदेश में याचिकाकर्ता और वकील ने सर्वे किया, जहां 50 से ज्यादा दुकानदार बिनी किसी पहचान पत्र और पूछताछ के एसिड देने को तैयार हो गए।
नि:शुल्क मिले इलाज:-वर्ष 2013 में लक्ष्मी अग्रवाल की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी घटनाओं को गंभीर अपराध माना था और सरकार, एसिड विक्रेता और एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे।
दिव्यांग की श्रेणी में सर्वाइवर्स:-सरकार ने वर्ष 2016 में दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम में संशोधन करते हुए उसमें एसिड अटैक्स सर्वाइवर्स को भी शारीरिक दिव्यांग के तौर पर शामिल करने का प्रावधान किया। इससे शिक्षा और रोजगार में उनको 3 फीसद आरक्षण की व्यवस्था की गई है।

भोपाल। राजगढ़ की जिला कलेक्‍टर निधि निवेदिता पर अभद्र टिप्‍पणी के आरोप में गुरुवार को भाजपा नेता और पूर्व मंत्री बद्रीलाल यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है।
तिरंगा रैली में हुआ था बवाल:-ज्ञात हो कि 19 जनवरी को सीएए के समर्थन में ब्यावरा में भाजपा ने तिरंगा यात्रा निकाली थी। इसी दौरान कलेक्टर निधि निवेदिता ने भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी रवि बड़ोने को थप्पड़ मार दिया था। डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा ने भी एक कार्यकर्ता को थप्पड़ मारे थे। इस दौरान प्रिया वर्मा के साथ बदसलूकी भी की गई। बाद में डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा के बाल खींचने और उनसे हाथापाई के आरोप में दो लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है। एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा राजगढ़ में आयोजित प्रदर्शन के दौरान धारा -144 के उल्लंघन के लिए एफआइआर दर्ज की गई।इसके विरोध में बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह, विस में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने ब्यावरा में सभा कर प्रदेश की कांग्रेस सरकार को ललकारा था। इन नेताओं के मंच पर पहुंचने से पहले ही पूर्व मंत्री बद्री लाल यादव ने कलेक्टर पर अशोभनीय टिप्पणी कर दी थी। भाजपा नेता यादव के खिलाफ ब्यावरा के एसडीएम संदीप अस्थाना की शिकायत पर ब्यावरा सिटी थाने में धारा 188 व धारा 294 के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके खिलाफ शासकीय कर्मचारियों के विभिन्न संघों ने जिलेभर के कुछ कार्यालयों में काम बंद करते हुए काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।

होशंगाबाद। नर्मदा नदी की तलहटी में दो दुर्लभ प्रजाति की मछलियां मिली हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देश पर वर्ष 2015 से लेकर 2019 तक चले शोध में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के शासकीय नर्मदा महाविद्यालय की प्राणी शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. आशा ठाकुर ने यह खोज की है। खोज में कुल 35 प्रजातियों की मछलियां मिली हैं, इनमें से दो को दुर्लभ माना गया है।
इन मछलियों की रिपोर्ट यूजीसी को भेज दी गई:-इन दो प्रजातियों के दुर्लभ होने का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि देश में मछलियों पर लिखी गई दस प्रमुख किताबों में भी इनका जिक्र नहीं है। इन मछलियों को कॉलेज की लैब में सुरक्षित रखकर आयोग को रिपोर्ट भेज दी गई है।
यूजीसी ने नर्मदा में मछलियों और जैव विविधता पर कराया था शोध;-डॉ. ठाकुर के मुताबिक, यूजीसी ने नर्मदा में मछलियों और जैव विविधता पर शोध कराया था। इसका विषय 'फिश कलेक्शन एंड प्रिजर्वेशन ऑफ नर्मदा एंड बायोडायवर्सिटी' था। शोध के लिए यूजीसी ने करीब 50 हजार रुपये दिए थे। नर्मदा के सेठानीघाट, विवेकानंद घाट, हर्बल पार्क घाट, बांद्राभान घाट, खर्राघाट, मंगलवारा घाट, घोडासफील घाट व आंवरीघाट पर मछुआरों की मदद से मछलियों की खोज कर अध्ययन किया गया।
कुल 35 प्रजातियों की मछलियां मिलीं:-डॉ. ठाकुर ने बताया कि नर्मदा क्षेत्र में कुल 35 प्रजातियों की मछलियां मिलीं। इनमें से एक दुर्लभ मछली बांद्राभान घाट के पास गहराई में मिली। शोध में मदद कर रहे तीन विशेषज्ञ मछुआरे भी इसके बारे में कुछ नहीं बता सके। मछली के एक सैंपल को कॉलेज की लैब में फार्मेलीन का लेप लगाकर सुरक्षित रखा है।
दुर्लभ मछली का नाम रखा 'नर्मदांसीस';-नर्मदा में मिलने के कारण फिलहाल इसे 'नर्मदांसीस' नाम दिया है। यह समुद्र में पाई जाने वाली जेब्रा मछली से मिलती-जुलती है। दूसरी दुर्लभ मछली खर्राघाट पर नेनड्स प्रजाति की है। नैनड्स पहाड़ी जगहों पर मिलने वाली मछली है। बरसात के दौरान इस मछली का संग्रह किया था। खर्राघाट पर पत्थरों की अधिकता है, इसलिए इस मछली की मौजूदगी वहां रही है। उन्होंने रिसर्च रिपोर्ट का शीर्षक 'कलेक्शन एंड प्रिजर्वेशन ऑफ फिशेज इन रिवर नर्मदा एट होशंगाबाद एंड स्पेशल रिफरेंस टू फिश बायोडायवर्सिटीज एंड म्यूजियम कीपिंग' रखा है। रिपोर्ट यूजीसी को भेज दी है।
इन किताबों में नहीं मिली दुर्लभ मछलियों की प्रोफाइल
-एडवान्समेंट ऑफ फिश फिशरीज एंड टेक्नालॉजी-लेखक के पी बिसवास
-एक्वाकल्चर मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी-लेखक के पी फिल्क्स
-डिसकस ऑफ फिशेज-लेखक के वी डुयुईजन
-डायवरसिफिके शन ऑफ एक्वाकल्चर-लेखक अर्चना सिन्हा
-फिश एंड फिशरीज ऑफ नार्थ ईस्टर्न स्टेट ऑफ इंडिया-लेखक एम. सिन्हा
-फ्रेश वॉटर फिशेज ए प्रेक्टीकल एप्रोच-लेखक वायके खिल्लर
-फंडामेंटल ऑफ फिश टेक्सोनॉमी-लेखक के सी जयाराम
-हैंडबुक ऑफ फिशरीज मैनेजमेंट-लेखक के सी बडापंडा
-सस्टेनेबल मैनेजमेंट एंड कनजरवेशन ऑफ बायोडायवर्सिटी-लेखक एएम पांडे
-टेक्स्ट बुक ऑफ ब्रीडिंग एंड हेचरी मैनेजमेंट ऑफ क्रेप-लेखक गुप्ता एंड मनहोत्रा।
बड़ी उपलिब्ध है:-जैव विविधता के लिहाज से नर्मदांचल को काफी विस्तृत माना जाता रहा है। यूजीसी के शोध के दौरान दुर्लभ प्रजाति की मछली को ढूंढने में सफलता मिली है, यह बहुत बड़ी उपलब्धि है- अनिल अग्रवाल, जिला प्रबंधन समिति सदस्य, मध्य प्रदेश जैव विविधिता बोर्ड।

विशाखापट्टनम। भारत ने दुश्मन को हराने के लिए अपनी सामरिक क्षमता में विस्तार करते हुए शुक्रवार को दूसरी बार शक्तिशाली के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। आंध्र प्रदेश के समुद्री तट से दागी गई इस मिसाइल की रेंज 3,500 किलोमीटर है और यह पनडुब्बी से दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है। इससे पहले इसका परीक्षण रविवार को किया गया था।सरकारी सूत्रों ने बताया कि मिसाइल का परीक्षण दिन के समय समुद्र में पानी के भीतर बने प्लेटफॉर्म से किया गया। इसका विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है। इसे अरिहंत श्रेणी की परमाणु क्षमता से संपन्न पनडुब्बियों में तैनात किया जाना है। परमाणु क्षमता से संपन्न पनडुब्बियों पर तैनाती से पहले भारत इस मिसाइल के अभी और परीक्षण करेगा।भारतीय नौसेना के पास फिलहाल अरिहंत ही एक ऐसा परमाणु क्षमता वाला पोत है, जो परिचालन में है। के-4 उन दो अंडरवाटर मिसाइलों में से एक है, जिन्हें भारत नौसेना के लिए तैयार कर रहा है। दूसरी मिसाइल का नाम बीओ-5 है और उसकी रेंज 700 किलोमीटर है। परमाणु हमला करने में सक्षम इस मिसाइल की जद में पाकिस्तान, चीन एवं दक्षिण एशिया के कई देश आ गए हैं।
जानिए, क्या होती है बैलेस्टिक मिसाइल:-तकनीकी दृष्टिकोण से बैलेस्टिक मिसाइल उस प्रक्षेपास्त्र को कहते हैं जिसका प्रक्षेपण पथ सब ऑर्बिटल बैलेस्टिक पथ होता है। इसका उपयोग किसी हथियार (नाभिकीय अस्त्र) को किसी पूर्व निर्धारित लक्ष्य पर दागने के लिए किया जाता है। यह मिसाइल प्रक्षेपण के प्रारंभिक स्तर पर ही गाइड की जाती है। इसके बाद का पथ आर्बिटल मैकेनिक के सिद्धांतों पर एवं बैलेस्टिक सिद्धांतों से निर्धारित होता है। अभी तक इसे रासायनिक रॉकेट इंजन से छोड़ा जाता था।

कोलकता। नागरिकता संशोधन कानून के लागू होने के बाद से भारत में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिये को डर सताने लगा है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने शुक्रवार को कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के बाद से भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशी नागरिक अपने देश वापस जाने लगे हैं। पिछले एक महीने में अवैध नागरिकों के देश छोड़ने की घटनाओं में वृद्धि देखने के मिली है।अर्धसैनिक बल के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि अवैध रूप से भारत में बसने वालों को नागरिकता कानून का डर सताने लगा है। जबसे सीएए लागु हुआ है तबसे अवैध नागरिकों के अपने देश लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है।
वापस लौटने के मामलों में तेजी;-बीएसएफ इंस्पेक्टर जनरल (दक्षिण बंगाल फ्रंटियर) वाईबी खुरानिया ने कहा, 'पिछले एक महीने में देश के सीमावर्ती इलाकों से अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के देश छोड़ने में काफी वृद्धि हुई है। अकेले जनवरी में हमने 268 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पकड़ा था, जिनमें से ज्यादातर पड़ोसी देश बांग्लादेश में वापस जाने की कोशिश कर रहे थे।
जिस रास्ते आए थे, उसी रास्ते वापस;-अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय सीमा के बड़े इलाके में फेंसिंग और बिजली नहीं है इसका फायदा उठाकर घुसपैठिए भारत में प्रवेश करने में सफल हो जाते हैं, लेकिन अब यही घुसपैठिए उसी रास्ते से वापस भाग रहे हैं।
भारत ने 445 बांग्लादेशियों को भेजा वापस:-वहीं, इससे पहले बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश कि तरफ से कहा गया था कि पिछले दो महीनों में 445 बांग्लादेशी नागरिक वापस भेजे गए हैं। बीजीबी के महानिदेशक मेजर जनरल मुहम्मद शफीनुल इस्लाम के अनुसार 2019 में अवैध रूप से सीमा पार करने पर 1000 लोगों को बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया था जिनमें से 445 नवंबर-दिसंबर में आए थे।

बैंगलोर। कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक शिकायतकर्ता द्वारा स्वयंभू धर्मगुरु नित्यानंद की जमानत खारिज करने को लेकर याचिका दाखिल की गई है। इसमें सुनवाई में पेश नहीं होने से लेकर फर्जी पासपोर्ट पर देश से भागना और फर्जीवाड़े आदि के आरोप लगाए गए हैं। वहीं, इस मामले में कोर्ट ने अगले सप्ताह के लिए सुनवाई की बात कही है। कोर्ट ने नित्यानंद को नोटिस भेजने का भी आदेश दिया है।
नित्यानंद आश्रम मामला;-अहमदाबाद के हाथीजण में स्थित नित्यानंद आश्रम में बच्चों को बंधक बनाने के मामले में गुजरात पुलिस ने नित्यानंद और उसकी दो सेविकाओं प्राणप्रिया और प्रियतत्वा के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट फाइल की है। पुलिस ने कोर्ट में पेश की 83 पन्नों की चार्जशीट में 50 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुरोध के बाद इंटरपोल ने नित्यानंद के खिलाफ ब्लू नोटिस जारी किया है। गुजरात पुलिस ने नित्यानंद के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने के लिए प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।महिलाओं के साथ संबंध व अश्लील सीडी को लेकर पहले भी विवादों में रहा नित्यानंद बेंगलुरू की दो बहानों को अहमदाबाद आश्रम में लाने के बाद चर्चा में आया। लड़कियों के पिता ने अहमदाबाद पहुंचकर नित्यानंद के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद पुलिस ने आश्रम में जांच की और यहां कई बच्चों को बंधक बनाने के आरोप में 20 नवंबर, 2019 को नित्यानंद की सेविकाओं प्राणप्रिय और प्रियातत्व को गिरफ्तार किया था।

नई दिल्‍ली। ऑक्सफोर्ड एडवांस लर्नर्स डिक्शनरी (Oxford Advanced Learner's Dictionary) के नवीनतम संस्करण में हर साल की तरह इस बार भी भारतीय अंग्रेजी शब्‍दों को जगह मिली है। इस बार इसमें आधार, चॉल, डब्‍बा, हड़ताल और शादी जैसे 26 नए भारतीय अंग्रेजी शब्दों को शामिल किया गया है। डिक्‍शनरी के इस 10वें संस्‍करण में 384 भारतीय अंग्रेजी शब्द हैं। शुक्रवार को लॉन्‍च किए गए इस संस्‍करण में चैटबोट, फेक न्‍यूज और माइक्रोप्लास्टिक जैसे 1,000 नए शब्द भी शामिल किए गए हैं।ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (Oxford University Press, OUP) ने कहा कि डिक्शनरी में भाषा परिवर्तन और उसके विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि नए संस्करण में इस्‍तेमाल की गई भाषा और दिए गए उदाहरण समय के साथ प्रासंगिक और अपडेट हों। नया संस्करण ऑक्सफोर्ड लर्नर्स डिक्शनर्स वेबसाइट (Oxford Learner's Dictionaries website) और एप के जरिए इंटरैक्टिव ऑनलाइन सपोर्ट के साथ उपलब्‍ध होगा।ऑक्सफोर्ड लर्नर्स डिक्शनर्स वेबसाइट (Oxford Learner's Dictionaries website) में ऑडियो वीडियो ट्यूटोरियल्स, वीडियो वॉकथ्रू, सेल्फ स्टडी एक्टिविटीज और उन्‍नत iWriter और ieakeaker टूल्स जैसे एडवांस फीचर्स भी शामिल हैं। ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (OUP) की प्रबंध निदेशक (शिक्षा प्रभाग) फातिमा दादा ने बताया कि संस्करण में 26 नए भारतीय अंग्रेजी शब्दों को जगह मिली है जिनमें 22 शब्द मुद्रित शब्दकोश में जबकि अन्य चार डिजिटल संस्करण में शामिल किए गए हैं।शब्दकोश में कुछ शब्द हिंदी के हैं, जिसका इस्तेमाल भारत में अंग्रेजी और हिंदी बोलने वाले लोग आमतौर पर करते हैं। कुछ अन्य नए भारतीय शब्द जैसे आंटी (अंग्रेजी शब्दकोश में पहले से शामिल, भारतीयता 'चाची' के संदर्भ में), बस स्टैंड, डीम्ड यूनिवर्सिटी, एफआईआर, नॉन-वेज, रिड्रेसल, टेम्पो, ट्यूब लाइट, वेज और वीडियोग्राफ भी शामिल हैं। शब्दकोश के ऑनलाइन संस्करण में चार नए भारतीय अंग्रेजी शब्द करंट (बिजली), लुटेरा, लूटपाट और उपजिला (उन क्षेत्रों में से एक है जो एक जिले को प्रशासन के लिहाज से विभाजित करता है) शामिल हैं।फातिमा ने बताया कि प्रचलन और सामान्य इस्तेमाल शब्दों के चयन का मुख्य आधार बनाया गया है। हम दुनिया भर में अंग्रेजी बोलने में इस्तेमाल किए गए शब्दों का आकलन करते हैं। इसके बाद शब्दों को गहन परीक्षण प्रक्रिया से गुजारा जाता है। उन्‍होंने यह भी बताया कि डिक्‍शनरी के एप पर 86,000 शब्द, 95,000 वाक्यांश, 1,12,000 अर्थ और 2,37,000 उदाहरण डाले गए हैं। इस शब्दकोश का 77 साल का इतिहास है और मूल रूप से इसे सन 1942 में जापान में प्रकाशित किया गया था।

नई दिल्‍ली। ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर मेसियस बोलसोनारो अपनी चार दिवसीय यात्रा पर आज नई दिल्‍ली पहुंच गए हैं। वह गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लेंगे। ब्राजील का राष्ट्रपति बनने के बाद बोलसोनारो की यह पहली भारत यात्रा होगी। उनके साथ उनकी कैबिनेट के आठ मंत्री एंव एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच 15 समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। बता दें कि यह भारत में राष्ट्रपति बोलसोनारो का पहला राजकीय दौरा है। इससे पहले 1996 और 2004 में हमारे गणतंत्र दिवस परेड में ब्राजील के राष्ट्रपति मुख्य अतिथि रह चुके हैं । बता दें कि 11वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने बोलसोनारो को गणतंत्र दिवस समारोह का निमंत्रण दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था। उनकी यात्रा का दूसरा दिन कई व्यस्तताओं से भरा हुआ है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी शामिल है। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में भारत और ब्राजील के बीच समझौतों का आदान-प्रदान होगा।गौरतलब है कि इससे पहले ब्राजील के किसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा अक्टूबर, 2016 में राष्ट्रपति मिशेल टेमर द्वारा गोवा में आठवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में नवंबर 2019 में ग्यारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्रासीलिया गए थे। 25 जनवरी को राष्ट्रपति बोलसोनारो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलेंगे जो उनके सम्मान में एक भोज की मेजबानी करेंगे और प्रधानमंत्री के साथ वार्ता करेंगे। उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री, राष्ट्रपति बोलसोनारो से मुलाकात करेंगे।27 जनवरी को राष्ट्रपति बोलसोनारो भारत-ब्राजील व्यापार मंच में भारतीय और ब्राजील के कारोबारियों को संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और ब्राजील एक घनिष्ठ और बहुआयामी संबंध साझा करते हैं। हमारे द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के सामान्य वैश्विक दृष्टिकोण, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने हेतु प्रतिबद्धता पर आधारित हैं।भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2018-19 में 8.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इसमें ब्राजील के लिए भारतीय निर्यात के रूप में 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर और भारत द्वारा आयात के रूप में 4.4 मिलियन डालर शामिल थे। ब्राजील में प्रमुख भारतीय निर्यात में कृषि-रसायन, सिंथेटिक यार्न, ऑटो के पुर्जे, फार्मास्युटिकल्स और पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं। ब्राजील से भारत में आयात में कच्चा तेल, सोना, वनस्पति तेल, चीनी और थोक खनिज व अयस्कों शामिल हैं।भारत में ब्राजील का निवेश मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, आईटी, खनन, ऊर्जा और जैव ईंधन क्षेत्रों में हैं। भारत ने ब्राजील के आईटी, फार्मास्युटिकल, ऊर्जा, कृषि-व्यवसाय, खनन और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में निवेश किया है।(यह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है। इसे नवभारतटाइम्स.कॉम की टीम ने एडिट नहीं किया है।

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