लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को डिमोट होने वाले पीएसी के हेड कांस्टबेल तथा सब इंस्पेक्टर (एसआइ) के मामले में बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी को पीएसी के हेड कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर को तुरंत प्रमोशन देने का निर्देश जारी किया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों डिमोट कर सिविल पुलिस में भेजे गए पीएसी के करीब 900 जवानों को तत्काल पदोन्नति दिए जाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने इस निर्णय को लेकर नाराजगी भी जताई है। मामला बिना शासन के संज्ञान में लाये ऐसा आदेश देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध जांच के भी निर्देश। मामले में एडीजी स्थापना पीयूष आनंद व अन्य अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।मुख्यमंत्री ने पीएसी के कतिपय जवानों को पदावनत करने के प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वह समस्त कार्मिकों की नियमानुसार पदोन्नति सुनिश्चित कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि शासन के संज्ञान में लाए बगैर ऐसी कार्यवाही से पुलिस बल के मनोबल पर प्रभाव पड़ता है। शासन के संज्ञान में प्रकरण को लाए बगैर ऐसा निर्णय जिन अधिकारियों ने लिया है, उन सभी का उत्तरदायित्व निर्धारित कर शासन को आख्या भी उपलब्ध कराएं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने पीएसी के कुछ डिमोशन किए गए जवानों को तुरंत प्रमोशन देने का फैसला किया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रमोशन देने में अड़ंगा लगाने वाले एडीजी के खिलाफ जांच का आदेश भी दे दिए है। डीआईजी काॢमक एवं स्थापना डॉ. राकेश शंकर की तरफ से सितंबर के दूसरे सप्ताह में जारी एक आदेश के तहत नागरिक पुलिस में हेड कांस्टेबल पद पर कार्यरत 890 पुलिस कॢमयों को डिमोशन करते हुए पीएसी में कांस्टेबल पद पर वापस भेजा गया था। वर्षों पहले पीएसी से नागरिक पुलिस में आए यह सभी पुलिस कर्मी प्रोन्नत होकर हेड कांस्टेबल बने थे। इसी तरह एडीजी स्थापना की तरफ से डीएसपी स्थापना सुधीर कुमार सिंह के एक आदेश के तहत विभिन्न जिलों में सब इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत 6 पुलिस कॢमयों को पदावनत कर पीएसी में कांस्टेबल के उनके मूल पद पर भेज दिया गया था। डीएसपी स्थापना सुधीर कुमार सिंह की तरफ से ही जारी एक अन्य आदेश के तहत विभिन्न जिलों में कांस्टेबल पद पर तैनात 22 पुलिसकॢमयों को पीएसी में कांस्टेबल पद पर ही वापस भेज देने के आदेश थे।

प्रोन्नति मांगने पर आई यह नौबत;-डीजीपी मुख्यालय की तरफ से जारी आदेश में बताया गया था कि कांस्टेबल जितेन्द्र कुमार सिंह एवं तीन अन्य ने अपनी प्रोन्नति के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने विभाग को याचिका कर्ताओं के प्रत्यावेदन पर छह हफ्ते में निर्णय लेने का आदेश दिया था। चारों याचिकाकर्ता पीएसी संवर्ग में भर्ती हुए थे और परिचालनिक कारणों से जनपदीय पुलिस में स्थानान्तरित हुए थे। उनका काडर परिर्वतन नहीं हुआ था। प्रत्यावेदन पर विचार कर संस्तुति देने के लिए विभाग ने एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई।कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कुल 932 कांस्टेबल पीएसी में भर्ती हुए थे। कमेटी ने इनमें से 910 को पदावनत कर कांस्टेबल के पद पर पीएसी काडर में वापस करने और 22 कांस्टेबल को उसी पद पर पीएसी काडर में वापस करने की सिफारिश की। इन 910 में से 6 वर्तमान में पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत हैं। शेष 904 कर्मचारियों में से 14 या तो रिटायर हो गए हैं या उनका निधन हो गया है, जबकि 890 पुलिस कर्मी हेड कांस्टेबल पद पर कार्यरत हैं। पुलिस मुख्यालय का कहना है पुलिस में कांस्टेबल पद पर भर्ती के दो मूल कैडर हैं, नागरिक पुलिस व पीएसी। यह सभी अपने मूल काडर में ही प्रोन्नति पाते हैं। पीएसी से पुलिस में स्थानान्तरण के लिए जारी आदेश में काडर परिर्वतन का कोई उल्लेख नहीं किया गया था और नही नियमावली या शासनादेश में इसका कोई प्रावधान ही है। 

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