नई दिल्‍ली। कभी कांग्रेस का हिस्सा रहे भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजस्थान में चल रहे सियासी संकट में जोरदार एंट्री मारी है। उन्होंने कहा है कि पुराने साथी रहे सचिन पायलट को हाशिए पर किया जाता देख और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दरकिनार किए जाने से दुखी हूं। इससे साफ है कि कांग्रेस में योग्यता और क्षमताओं के लिए कोई जगह नहीं है। मालूम हो कि बीते दिनों इसी तरह के सियासी घटनाक्रम में सिंधिया ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया था।मौजूदा वक्‍त में राजस्‍थान के उप मुख्‍यमंत्री सचिन पायलट की नाराजगी ने अशोक गहलोत सरकार के लिए संकट पैदा कर दिया है। पायलट 23 से 24 विधायकों को साथ लेकर बागी तेवर अपनाए हुए हैं। बता दें कि सरकार बनने के बाद से ही दोनों नेताओं के बीच खींचतान चल रही थी जो संभवत: चरम पर जा पहुंची है। कांग्रेस ने इस सियासी संकट को थामने के लिए दिल्‍ली से कई नेताओं को राजस्‍थान रवाना किया है। मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि भाजपा उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें कर रही है।वहीं भाजपा का कहना है कि यह सियासी संकट कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान का नतीजा है और इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है। यह भी बता दें कि इसी साल मार्च में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक छह मंत्रियों समेत 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद मध्य प्रदेश में 15 महीने पुरानी कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। अचानक आए इस सियासी संकट के चलते 20 मार्च को कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार बना ली थी।पायलट ने शनिवार देर रात दिल्ली में अहमद पटेल से मुलाकात की थी और उनके जरिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को संदेश पहुंचा दिया था कि गहलोत उन्हें साइडलाइन करने में जुटे हैं जिसे वह स्वीकार नहीं करेंगे। सूत्रों की मानें तो पायलट इस बात से दुखी हैं कि उनके विभागों की फाइलों को मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा रोका जा रहा है और अधिकारियों के तबादलों में उनकी सलाह नहीं ली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पायलट को करीब 25 विधायकों का समर्थन हासिल है। यही नहीं उनके करीबी 20 विधायक दिल्ली एनसीआर के विभिन्न स्थानों पर डेरा डाले हुए हैं।

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