नई‍ दिल्‍ली। अगर नई दिल्‍ली और पेइचिंग के बीच रिश्‍तों को नया आयाम मिला, तो भारत दुनिया में मैन्युफैक्चरिंग का हब बन सकता है। अगर ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट मेक इन इंडिया में चार चांद लग जाएंगे। इससे भारत में नौकरियों की बाढ़ आ जाएगी और देश की विकास दर में बेतहासा वृद्धि होगी। चीन के राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग भारत की दो दिवसीय यात्रा पूरी कर नेपाल रवाना हो चुके हैं। ऐसे में कुछ सवाल मन में स्‍वाभाविक रूप से उठते हैं। एशिया के दो दिग्‍गजों के बीच क्‍या तय हुआ यह तो समय बताएगा, लेकिन संभावनाओं के द्वार अभी बंद नहीं हुए हैं।चीन के राष्‍ट्रपति शी चिनफ‍िंग की इस यात्रा का मकसद भी भारत में अपने व्‍यापार को बढ़ाना है। उनका पूरा जोर व्‍यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। चीन भारत से यह गारंटी चाहेगा कि चीन की कंपनियों के लिए उचित, अनुकूल और सुविधाजनक व्‍यावसायिक माहौल मुहैया अगर सारे अवरोध पार कर लिए गए तो चीनी निवेश भारत में बढ़ेगा। दोनों देशों के बीआयात-निर्यात और सुगम होगा।
वुहान में लिखी गई थी दोनों नेताओं की मुलाकात की पटकथा:-हालांकि, इस मुलाकात की पटकथा वुहान में ही लिख दी गई थी। वुहान में दोनों नेताओं के मुलाकात के बाद रिश्‍तों में प्रगाढ़ता लाने के लिए यह पहला कदम था। वुहान के बाद नई दिल्‍ली में हो रही बैठक को सकारात्‍मक नजरिए से देखा जा रहा है। इसमें कोई शक नहीं कि दोनों देशों के नेताओं से मुलाकात नई दिल्‍ली और पेइचिंग संबंधों में जमी बर्फ को जरूरी पिघलाएगी। चीन के साथ भारत की व्‍यापारिक दोस्‍ती मेक इन इंडिया के लिहाज से भी उपयोगी होगा।
कुल निवेश आठ अरब डालर का:-मौजूदा समय में चीन का भारत में कुल निवेश आठ अरब डालर के करीब है। चीन की कई कंपनियों ने औद्योगिक पार्कों, ई-कामर्स, और अन्‍य क्षेत्रों में निवेश कर रखा है। देश में 1,000 से अधिक चीनी कंपनियों ने निवेश किया है। इसके चलते यहां 2,00,000 स्थानीय नौकरियों के अवसर सृजित हुए हैं। जाहिर है कि अगर कंपनियों की संख्‍या में इजाफा हुआ तो देश में रोजगार का सृजन होगा। विकास के नए आयाम खुलेंगे।
चीन की मीडिया में भी उत्‍साह:-चीन के अखबारों में भी ऐसे ही संकेत मिले हैं। चीन की मीडिया में ऐसी खबरें हैं कि शी चिनफ‍िंग भारत के प्रधानमंत्री को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीन की कामयाबी के गुर बताएंगे। ऐसा माना जा रहा है कि इस मुलाकात में चीन के राष्‍ट्रपति मोदी को भारत में निवेश के लिए तैयार करेंगे। निश्‍चित रूप से भारत भी चाहेगा कि वह आपसी मतभेद को दरकिनार कर दोनों देशों के बीच व्‍यापार के मार्ग को प्रशस्‍त कर सके। इसलिए अगर यह समझौता हुआ तो इससे आपसी मतभेदों और पुराने विवादों को सुलझाने में भी सफलता मिलेगी।

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