नई दिल्ली: जमीयत उलेमा -ए हिन्द संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक के फैसले को चुनौती दी है। हाल ही में नरेंद्र मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं की आजादी के लिए तीन तलाक को खत्म करने का फैसला सुनाया था। इस फैसले के बाद मुस्लिम महिलाओं के चेहरे पर खुशी की लहर आ गई थी। भारतीय कानून के हिसाब से अब मुस्लिम सुमदाय में कोई भी पति अपनी पत्नी को महज तीन बार तलाक बोलने पर नहीं छोड़ सकता है।
जमीयत उलेमा- ए हिन्द संगठन की मांग:-ट्रिपल तलाक के फैसले का विरोध करने वाले जमीयत उलेमा -ए हिन्द संगठन ने मांग की है वह महिलाओं की शादी से संबंधित एक्ट 2019 को सही दिशा पर ले जाने की मांग की है।
क्या है जमीयत उलेमा- ए हिन्द संगठन;-जमीयत उलेमा-ए-हिंद संगठन को जमीयत उलमा-ए हिंद भी कहा जाता है। यह संठन भारतीय इस्लामी विद्ववानों का एक संगठन है। इसकी स्थपना कई मुस्लिम समुदाय के लोगो ने मिलकर की है।
ट्रिपल तलाक का कट्टरपंथी मुस्लिम समुदाय ने किया था विरोध;-ट्रिपल तलाक के पास होने से पहले भी इस को खत्म करने के लिए काफी कट्टरपंथी समुदाय के लोगों ने विरोध किया, लेकिन लंबे विरोध के बाद भी इस कानून को पास करके भाजपा ने मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाया।

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