-सुरेन्द्र कुमार (लेखक,शिक्षक,विचारक) हिमाचल प्रदेश
सत्यनिष्ठा के प्रतीक मनोहर पर्रिकर एक ऐसी शख्सियत थे,जिन्होंने अपने जीवन में आमजन की सुविधाओं के लिए अनेकों प्रशासनिक आयाम स्थापित किए। उनके कड़े निर्णयों की सुखद अनुभूतिआज गोवा के साथ साथ पूरा देश महसूस कर रहा है। उन्होंने अपनी स्वच्छ छवि की जो छाप भारतीय राजनीति की पृष्ठभूमि परछोड़ी, उसके लिए सदा देशवासी पार्रिकर का स्मरणकरते रहेंगे। मुंबई आईआईटी से ग्रैजुएशन करने के बाद मनोहर ने कुछ हट कर करने की ठानी। जिसके लिए अपने संघर्ष के शुरुआती दिनों में उन्होंने एक जलगति विज्ञान कारखाना स्थापित किया पर उन्हे वह कार्य कुछ खास रास नही आया।फिर वर्ष 1987 में उन्होंने जनसेवा के लिए राजनीति चुना तथा1994 में वे पहली बार गोवा विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। उनकी सच्ची व सादगी से प्रेरित राजनीतिक विचारधारा ने उन्हें वर्ष 24 अक्तूबर सन 2000 को राज्य का मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। अपने मुख्यमंत्री कार्यालय के दौरान उनके अढिंग और जनकल्याणकारी उसूलों ने उन्हें राजनीतिक रूप से परिपक्वता दिलाई। परिणामस्वरूप राज्यवासियों ने उन्हें पुनः 2002-05,2012-14 तथा फिर 14 मार्च 2017 से 17 मार्च 2019 तक कुल चार बार राज्य की बागढोरसम्भाली। मेहनती मनोहर ने गोवा के लोगों के साथ साथ समस्त देशवासियों के दिलों में भी एक अमीट छाप छोड़ी। आज उनके पारिवारिक नियमों से लेकर राजनीतिक उसूलों तक के चर्चे हर हिन्दुस्तानी की जुवान पर हैं। मेहनत और कठोर परिश्रम के पर्यायी मनोहर ने सामाजिक सरोकार व जनमानस से जुड़े रहने के लिए कई बार वीवीआईपीतामझाम को दरकिनार करके आमजन के सुख दुःख में शरीक होने का प्रयास किया। उनका एयरपोर्ट में आमजन के साथ पक्ति में खढा होकर टिकेट प्राप्त करना,पणजी की सडकों पर अपने स्कूटर को दौडाना,अपने कपड़े स्वयं धोना,चप्पल पहन कर कार्यालय आना,निजी कार्य के लिए सरकारी वाहन का इस्तेमाल न करना,पसीने से लथपथ होकर ट्रैफिक पुलिस की मदद करना, आम टी सटाल पर चाय की चुस्कियाँ लेना और साधारण ढाबे में भोजन करने जाना इत्यादि खुबियाँ पर्रिकर को अन्य राजनेताओं से अलग करती हैं। अपने 25 वर्षों के राजनीतिक कार्यकाल में वे कभी भी गोवा के लोगों से दूर नही हुए। वे भारत का रक्षा मंत्री बनने पर भी अधिकतर पणजी ही दौड़ते रहते थे। बावजूद इसके वर्ष 2014 से 2017 तक के अपने रक्षामंत्री कार्यालय में उन्होंने देशहित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। जिसमें उरी सर्जिकल स्ट्राइक का सबसे प्रमुख स्थान है। भारतीय सेना की इस सफल कार्रवाई के चलते हमारासैन्य पराक्रमआतंकिस्तान को कडा जवाब देने में कामयाब हुआ। पर्रिकर ने देश के सैनिकों की वन रैंक वन पैशन की लंबित मांग को प्रमुखता से सुलझाया।देश के पहलेआईआईटियन मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी कार्यशैली में उनकी कुशग्र बुद्धिमत्ता स्पष्ट दिखाई दी। मनोहर की अग्रणी समझ ने दिखा दिया कि राज्य के मुखिया होने पर भी कैसे एक राजनीतिज्ञ जमीन स्तर से जुडकर महान बन सकता है। यह उनकी कर्तव्यपरायणता का ही प्रतिफल था जो वह वर्ष 2000 में पहली बार राज्य में भाजपा की सरकार बनाने में कामयाब हुए। उन्होंने गोवा में भाजपा की जडो को इस प्रकार मजबूत किया कि वह चार बार मुख्यमंत्री बने। उनकी कर्तव्यनिष्ठा के बूते भाजपा राज्य में बीजेपी का किला स्थापित करने में सफल हुई। पणजी केइस निष्ठावानजनसेवक ने राज्य के लोगों के कई सपने साकार किए। आमजन कल्चर के पुरोद्धा रहे मनोहर के व्यवहार सेऐसा प्रतीत होता था मानो वे मुख्यमंत्री नहीं एक पार्टी कार्यकर्ता हो। इसी तरह पर्रिकर वह पहले मुख्यमंत्री थे जिसने वर्ष 2013 में सर्वप्रथम सार्वजनिक रूप से नरेन्द्र मोदी को अगला पीएम बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने मोदी की काबिलियत को सबसे पहले पहचाना। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि देश के राजनेता कहलाए जाने वाले हमारे जनप्रतिनिधियों को मनोहर पर्रिकर के जीवन से सीख लेकर अपनी सियासी समझ को सुदृढ़ करने का प्रयास करना होगा। ताकि वे भी उनकी तरह जनकल्याणकारी निर्णय ले सकें।

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें