नई दिल्ली। वायु सेना के शीर्ष अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि रूस के साथ एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली के सौदे में संप्रभुता की गारंटी नहीं है। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका और रूस जैसे देशों के साथ अंतर सरकारी समझौतों की प्रक्रिया पहले ही सुव्यवस्थित हो चुकी है।यह बयान ऐसे समय आया है जब इस आशय की एक मीडिया रिपोर्ट से राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है कि भारत सरकार ने फ्रांस के साथ राफेल सौदे में भ्रष्टाचार रोधी जुर्माने और संप्रभुता की गारंटी से जुड़े कुछ प्रावधानों से उसे छूट प्रदान कर दी है। पत्रकारों से बातचीत में डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टॉफ एयर मार्शल वीआर चौधरी ने कहा, 'रूस के साथ एस-400 सौदे में संप्रभुता की गारंटी नहीं है।'वहीं, वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल अनिल खोसला ने कहा, 'रूस और अमेरिका से हम पहले ही काफी खरीददारी कर चुके हैं। रूस और अमेरिका के साथ अंतर सरकारी समझौतों की प्रक्रिया पहले ही सुव्यवस्थित हो चुकी है या मुझे कहना चाहिए कि विकसित हो चुकी है। अन्य देशों के साथ ये भले ही विकसित न हुए हों क्योंकि उनके साथ अंतर सरकारी (समझौते).. शायद पहली बार हुए हैं या फिर अभी शुरू हुए हैं।'मालूम हो कि भारत ने रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के लिए पिछले साल अक्टूबर में 40 हजार करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि इस समझौते के खिलाफ अमेरिका ने प्रतिबंध लगाने की चेतावनी भी दी थी।

 

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