नई दिल्ली। देश के युवा बेरोजगारी और शिक्षा की कमी की वजह से सबसे ज्यादा परेशान हैं। हालांकि उनमें से ज्यादातर मानते हैं कि उनके राजनीतिक नेता उनकी जरूरतों पर ध्यान देते हैं। यह बात एक नए अध्ययन में कही गई है। अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि देश में लगभग 55 फीसद युवा यह मानता है कि वे राजनीति और सरकार के बारे में जानते हैं। वहीं, 69 फीसद का मानना है कि वे इस बात पर बहस कर सकते हैं कि देश का शासन कैसा चल रहा है।गोलकीपर ग्लोबल यूथ पोल के अनुसार, लगभग 86 फीसद युवा भारत के भविष्य के बारे में आशावादी हैं। इनमें से ज्यादातर अपने राजनीतिक नेताओं पर विश्वास करते हैं। इस सर्वेक्षण का आयोजन इस हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाले बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के दूसरे वार्षिक गोलकीपर कार्यक्रम से पहले इप्सोस पब्लिक अफेयर्स द्वारा किया गया था। देश के युवाओं को परेशान करने वाली सबसे बड़ी चिंता बेरोजगारी थी। सर्वे में शामिल 44 फीसद युवाओं ने यह बात मानी। वहीं, 33 फीसद ने शिक्षा की कमी पर चिंता जताई।भारत से एकत्रित आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, लगभग 86 फीसद युवा भारत के भविष्य के बारे में आशावादी हैं और 56 फीसद अपने राजनीतिक नेताओं के कार्यकलापों से संतुष्ट हैं।अध्ययन में 12 वर्ष और उससे अधिक आयु के 40,000 से अधिक लोगों से एकत्र आंकड़ों को शामिल किया गया है। यह सर्वे ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्वीडन, अमेरिका, सऊदी अरब, ब्राजील, चीन, भारत, इंडोनेशिया, केन्या, मेक्सिको, नाइजीरिया और रूस में भी किया गया है। अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि कम और मध्यम आय वाले देशों में पिछले एक दशक के दौरान गरीबी और बीमारी के खिलाफ लड़ाई में आश्चर्यजनक प्रगति महसूस की गई है।वर्ष 2000 से तुलना करें तो अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में पूरी दुनिया में एक अरब से भी ज्यादा की कमी आई है। हालांकि, उप सहारा अफ्रीका जैसे सबसे गरीब देशों में तेजी से बढ़ रही जनसंख्या भविष्य की प्रगति को खतरे में डाल रही है। इस साल की रिपोर्ट यह भी बताती है कि युवाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा में सरकार को निवेश करना होगा जिससे उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा यह भी ध्यान देना होगा कि युवाओं की सबसे बड़ी चिंताओं बेरोजगारी और शिक्षा की कमी को किस तरह से दूर किया जाए। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को संबद्ध देश की सरकार को अवगत कराया जाएगा ताकि वे इसका इस्तेमाल अपनी नीतियों को बनाने में कर सकें।

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें