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लखीसराय - नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा का दर्शन करने सहेली के साथ निकली एक नाबालिग छात्रा को शराब पिलाकर उससे सामूहिक दुष्‍कर्म की कोशिश की गई। इस बीच होश आ जाने पर वह निर्वस्‍त्र अवस्‍था में ही तीन मंजिले भवन की छत से नीचे कूद गई। गिरते वक्‍त वह बिजली के हाई वोल्‍टेज तार से बुरी तरह झुलस गई। घटना से पूरे शहर में सनसनी व आक्रोश है। इसने पूजा के दौरान सुरक्षा व्‍यवस्‍था की भी पोल खोल दी है।
घटना के विरोध में शुक्रवार की सुबह से ही जनाक्रोश भड़क गया है। सड़क जाम और बाजार बंद कराने की कोशिश पर पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया। इससे भगदड़ मच गई। लाठीचार्ज व भगदड़ में दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने करीब एक दर्जन आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया है।
सहेली ले गई थी अपने घर, वहीं हुई वारदात
मिली जानकारी के अनुसार दुर्गा पूजा की नवमी की रात नौवीं कक्षा की एक छात्रा सहेली के साथ मेला घूमने निकली। सहेली उसे शहर के चितरंजन मोड़ स्थित अपने किराए के मकान में लेकर गई, जहां कुछ लड़के थे। वहां उसे शराब पिलाई गई। फिर, कहा जा रहा है कि उसके साथ लड़कों ने उसे छत पर ले जाकर दुष्‍कर्म की कोशिश की।
निर्वस्‍त्र लगा दी छलांग, छत पर मिले कपड़े
छात्रा के कपड़े मकान की छत पर पड़े मिले हैं, इसलिए आशंक व्यक्त की जा रही है कि उसके साथ दुष्कर्म किया गया है। माना जा रहा है कि इसी दौरान उसे होश आ गया होगा। इसके बाद जब उसे परिस्थिति का आभास हुआ होगा, उसने खुद को बचाने के लिए निर्वस्‍त्र अवस्‍था में ही छत से छलांग लगा दी होगी। दूसरी ओर पुलिस मेडिकल रिपार्ट के पहले दुष्‍कर्म की पुष्टि करने से इनकार कर रही है।
नीचे बिजली के तार की चपेट में आकर झुलसी
छात्रा ने जिस जगह से छलांग लगाई, वहां नीचे से 11 हजार वोल्‍ट का हाई वोल्‍टेज बिजली का तार गुजरता है। छात्रा नीचे गिरते वक्‍त करंट प्रवाहित तार की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गई। राहत की बात यह रही कि तार से वह कुछ पलों के लिए ही लिपटी, इसके बाद नीचे गिर गई।
मची सनसनी, पुलिस ने भेजा अस्‍पताल
देर रात छत से सड़क पर निर्वस्‍त्र गिरी व बिजली से झ़ुलसी तड़पती लड़की को देखकर लोगाें में सनसनी फैल गई। लोगों ने तत्‍काल पुलिस काे बुलाकर उसे अस्‍पताल भिजवाया। शहर में यह बात रात में ही फैल गई। स्थिति को तनावपूर्ण देख पुलिस व प्रशासन रात में ही सतर्क हो गए। जिलाधिकारी (डीएम) शोभेंन्द्र कुमार चौधरी और आरक्षी अधीक्षक (एसपी) कार्तिकेय शर्मा भी देर रात सदर अस्पताल पहुंचे।
सहेली सहित तीन को हिरासत में लकर पूछताछ
एसपी ने बताया कि फिलहाल छात्रा की सहेली तथा मकान मालिक व एक अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच के दौरान मकान की छत से शराब की बोतल, ग्लास और लड़की के कपड़ा बरामद किए गए हैं।
घटना के विरोध में सड़क जाम व बाजार बंद, पुलिस ने भांजी लाठियां
घटना के विरोध में शहर में जनाक्रोश उमड़ पड़ा। आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रभात कुमार के नेतृव्य में संतर मोहल्ला के लोगों ने शहीद द्वार के पास मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। उन्‍होंने बाजार भी बंद कराने का प्रयास किया।
सड़क जाम कर रहे युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं व स्थानीय लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद भगदड़ मच गई। एसपी कार्तिकेय के. शर्मा व एसडीपीओ मनीष कुमार के नेतृत्व में काफी संख्या में पहुंची पुलिस ने जाम व हंगामा करने वालों को खदेड़-खदेड़ कर पीटा। लाठीचार्ज व भगदड़ में दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रभात कुमार सहित दर्जन भर लोगों को हिरासत में ले लिया है।

 


नई दिल्ली - देश की राजधानी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में दिल दहलाने वाले बुराड़ी फांसीकांड में एक ही परिवार के 11 लोगों के आत्महत्या वाला मकान नंबर- 137 फिर चर्चा में है। दरअसल, एक जुलाई को 11 लोगों की मौत के बाद बुराड़ी इलाके के संत नगर की गली संख्या-2 के मकान नंबर- 137 को दिल्ली पुलिस ने सील कर दिया था, ऐसा जांच के लिए किया गया था। जांच के बाद अब इस मकान की तीन महीने के बाद सील दोबारा खुली तो यह इलाका और हत्याकांड दोनों चर्चा में आ गए।
मकान में लगी 11 पाइप तोड़ी गईं
दिल्ली पुलिस द्वारा मकान की सील खोने के बाद यहां पर लगाई गईं 11 पाइपों को ललित के बड़े भाई दिनेश ने बुधवार को ही तुड़वा दिया। दिनेश के करीबियों का कहना है कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि 11 मौतों को लोग इन 11 पाइपों से भी जोड़कर देख रहे थे, खासकर मीडिया। बता दें कि 11 में से 7 पाइपें मुड़ीं थीं, जबकि 7 सीधी थीं। लोग तो यहां तक कयास लगा रहे थे कि मकान में लगीं मुड़ी पाइपें मृत महिलाओं और सीधी पाइप पुरुषों से जुड़ी हैं।
बताया जा रहा है कि बृहस्पतिवार को घर और दुकान का ताला खोला गया। इस दौरान वहां का माहौल गमगीन ही था। सुबह नौकर राम विलास ने ललित के प्लाईबोर्ड की दुकान ताला खोला और अपने काम धंधे में लग गया।
ललित के बड़े भाई दिनेश की मानें तो घर में रहने से इलाके के लोगों के मन में अंधविश्वास दूर होगा। उन्हें इस घर में रात गुजारने में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई। अब नौकर ही दुकान संभालेगा और इस दुकान से कई लोगों की रोजी-रोटी चलेगी।
गौरतलब है कि बुराड़ी में जुलाई महीने में भाटिया परिवार के 11 सदस्यों की सामूहिक मौत आत्महत्या के कारण नहीं, बल्कि दुर्घटना से हुई थी। सीएफएसएल द्वारा सौंपी गई साइकलॉजिकल रिपोर्ट में इसका पर्दाफाश हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान के दौरान भाटिया परिवार के सभी सदस्य दुर्घटनावश मारे गए थे। तफ्तीश में यह भी सामने आ चुका है कि धार्मिक अनुष्ठान करने वालों ने आत्महत्या करने के इरादे से फांसी नहीं लगाई थी। उन्हें विश्वास था कि मरने बाद आत्मा बाहर जाएगी। बाद में सभी फिर से जिंदा हो जाएंगे।
इस संबंध में अपराध शाखा ने सीबीआइ की सेंट्रल फोरेंसिक साइंटिफिक लेबोरेटरी (सीएफएसएल) को साइकलॉजिकल ऑटोप्सी करने को कहा था। अधिकारी ने बताया है कि साइकलॉजिकल ऑटोप्सी में किसी व्यक्ति का मेडिकल रिकॉर्ड सहित जानकारों से पूछताछ कर मरने वाले की मन: स्थिति का विश्लेषण किया जाता है।
आत्महत्या नहीं, दुर्घटना के चलते हुई थी मौत
अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह घटना आत्महत्या की नहीं थी। अनुष्ठान के आयोजन के दौरान एक अचानक घटना थी। भाटिया परिवार के किसी भी सदस्य को जान देने का इरादा नहीं था। सीएफएसएल टीम के सदस्यों ने इस दौरान बुराड़ी स्थित घर से मिले रजिस्टरों में लिखी बातों के अलावा परिवार के सदस्यों और मित्रों से भी बात की थी।
सीएफएसएल ने परिवार के बड़े बेटे दिनेश उनकी बहन सुजाता सहित करीब 50 लोगों से पूछताछ कर रिपोर्ट बनाई है। हादसे में मारे गए ललित भी दिवंगत पिता की तरफ से निर्देश मिलने का दावा करता था। उसके कहने के अनुसार ही परिवार के सदस्य सारी कार्रवाई को अंजाम देते थे।
यहां पर बता दें कि दिल्ली में अब तक की सबसे बड़ी सनसनीखेज घटना में बुराड़ी स्थित एक घर में एक जुलाई की सुबह एक ही परिवार के 11 लोग संदिग्ध हालात में मृत पाए गए थे। मृतकों में सात महिलाएं व चार पुरुष थे, जिनमें दो नाबालिग थे। एक महिला का शव रोशनदान से तो नौ लोगों के शव छत से लगी लोहे की ग्रिल से चुन्नी व साड़ियों से लटके मिले। एक बुजुर्ग महिला का शव जमीन पर पड़ा मिला था। नौ लोगों के हाथ-पैर व मुंह बंधे हुए थे और आंखों पर रुई रखकर पट्टी बांधी गई थी।
बुराड़ी-संत नगर मेन रोड से सटे संत नगर की गली नंबर दो में बुजुर्ग महिला नारायण का मकान है। इसमें वह दो बेटों भुवनेश व ललित, उनकी पत्नियों, पोते-पोतियों व विधवा बेटी संग रहती थीं। ये लोग मूलरूप से राजस्थान के निवासी थे और 22 साल पहले यहां आकर बसे थे। बुजुर्ग महिला के तीसरे बेटे दिनेश सिविल कांटेक्टर हैं और राजस्थान के चित्ताैड़गढ़ में रहते हैं। बुजुर्ग महिला के दोनों बेटों की भूतल पर एक परचून व दूसरी प्लाईवुड की दुकान है। ऊपर पहली व दूसरी मंजिल पर परिवार रहता था।
रोज सुबह ललित घर के सामने रहने वाले दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त तारा प्रसाद शर्मा के साथ मार्निंग वॉक पर जाते थे। उससे पहले शर्मा ललित की दुकान से दूध लेते थे। रविवार सुबह दुकान नहीं खुली तो शर्मा दरवाजा खटखटाने गए, पर दरवाजा खुला था तो वह ऊपर चले गए। ऊपर का दरवाजा भी खुला था। आगे जाने पर उनकी रूह कांप गई। बरामदे वाले हिस्से में दस लोगों के शव लटके थे, जबकि एक महिला का शव कमरे में पड़ा था।
इन 11 लोगों ने अनजाने-अनचाहे की थी आत्महत्या
बुराड़ी आत्महत्या मामले में 11 लोगों ने आत्महत्या की थी। मृतकों की पहचान नारायण देवी (77), उनकी बेटी प्रतिभा (57) और दो बेटे भावनेश (50) और ललित भाटिया (45) के रूप में हुई है। भावनेश की पत्नी सविता (48) और उनके तीन बच्चे मीनू (23), निधि (25) और ध्रुव (15), ललित भाटिया की पत्नी टीना (42) और उनका 15 वर्ष का बेटा शिवम , प्रतिभा की बेटी प्रियंका (33) भी मृत मिले थे। इनमें प्रियंका की पिछले महीने ही सगाई हुई थी और इस साल के अंत यानी दिसंबर में उसकी शादी होनी थी।

 


नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को शिरडी में साईंबाबा के दर्शन किए। इसके बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 2,44,444 परिवारों को उनके घर प्रदान किए। इसके बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी को, पूरे महाराष्ट्र को, पूरे भारत वर्ष को, देश के जन-जन को दशहरे की, विजय दशमी की बहुत-बहुत बधाई। उन्होंने कहा कि हम सभी का ये प्रयास रहता है कि हर पर्व को अपनों के साथ मनाएं। मेरी भी ये कोशिश रहती है कि हर त्योहार देशवासियों के साथ मनाऊं और इसी भावना के साथ आज आप सभी के बीच उपस्थित हुआ हूं।
पीएम मोदी के भाषण की महत्वपूर्ण बातें
- अपना घर जीवन को आसान बना देता है और गरीबी से लड़ने का नया उत्साह पैदा करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 2022 तक देश के हर बेघर-गरीब परिवार को अपना घर देने का लक्ष्य रखा है। मुझे खुशी है कि करीब-करीब आधा रास्ता हम तय कर चुके है
- जिस प्रकार आप सभी दशहरे के पावन अवसर पर भारी संख्या में यहां मुझे आशीर्वाद देने आए हैं, वो अभिभूत करने वाला है। आपका यही अपनत्व, यही प्यार मुझमें निरंतर नई ऊर्जा का संचार करता है, मुझे शक्ति देता है।
- दशहरे के साथ-साथ हम आज शिरडी की इस पावन भूमि पर, एक और पवित्र अवसर के साक्षी बन रहे हैं। साई बाबा की समाधि के शताब्दी समारोह का भी आज समापन हुआ है। थोड़ी देर पहले ही मैंने साई दरबार के दर्शन किए हैं।
- मैं जब भी श्री साई बाबा के दर्शन करता हूं, तो करोड़ों श्रद्धालुओं की तरह मुझे भी जनसेवा के लिए खुद को समर्पित करने का नया उत्साह मिलता है।
- शिरडी के कण-कण में साई के मंत्र, उनकी सीख है। जनसेवा, त्याग और तपस्या की जब बात आती है तो शिरडी का उदाहरण दिया जाता है। शिरडी तात्या पाटील की नगरी है। दादा कोते पाटील ,माधवराव देशपांडे, म्हाळसापती जैसे महापुरुष इसी धरती ने दिए हैं।
- काशीराम शिंपी, आप्पा जागले और साईबाबा की अंतिम समय तक सेवा करते रहे, कोंडाजी, गबाजी और तुकाराम को कौन भुला सकता है? इस पावन धरा के इन महान सपूतों को मैं नमन करता हूं।
- शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त करना हो, आध्यात्म के जरिए सोच में परिवर्तन करना हो, समाज में समरसता और सहभाग का संचार करना हो, इसके लिए आपके प्रयास सराहनीय हैं। आज भी यहां आस्था, आध्यात्म और विकास से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन हुआ है।
- साई का मंत्र है-सबका मालिक एक है। साईँ के ये चार शब्द समाज को एक करने का सूत्रवाक्य बन गये। साई समाज के थे और समाज साई का था। साई ने समाज की सेवा के कुछ रास्ते बताए थे। मुझे प्रसन्नता है साई बाबा के दिखाए रास्ते पर श्री साई बाबा संस्थान ट्रस्ट, निरंतर समाज की सेवा कर रहा है:
- आज यहां 10 मेगावाट की एक सोलर यूनिट की भी शुरुआत की गई है। इससे संस्थान के संसाधन बढेंगे और क्लीन एनर्जी में भागीदारी भी। ये एक ऐसा मॉडल है जिससे देश भर में कई संस्थान लागू कर सकते हैं। यानी सेवा के साथ ही राष्ट्र सेवा भी की जा सकती है
- मुझे खुशी है कि दशहरे के इस पावन अवसर पर मुझे महाराष्ट्र के ढाई लाख बहनों-भाइयों को अपना घर सौंपने का अवसर मिला है। मेरे वो भाई बहन जिनके लिए अपना घर, हमेशा सपना ही रहा है।
- अपने इस विशाल परिवार के सदस्यों को एक साथ गृह प्रवेश कराने से बड़ी, अपने गरीब भाई-बहनों की सेवा से बड़ी, दशहरे की पूजा भला मेरे लिए क्या हो सकती थी।
- आप सभी जनों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने इन नए घरों की, आपके जीवन में आए इस शुभ अवसर की, आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
- ये नए घर आपके सपनों के प्रतीक तो है हीं, आपकी आकांक्षाओं को नए आयाम देने वाले भी हैं। अब आपका जीवन, आपके बच्चों का जीवन, सार्थक बदलाव के पथ पर चल पड़ा है। ये गरीबी पर जीत की तरफ बहुत बड़ा कदम है।
- अपना घर जीवन को आसान बना देता है और गरीबी से लड़ने का नया उत्साह पैदा करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 2022 तक देश के हर बेघर-गरीब परिवार को अपना घर देने का लक्ष्य रखा है। मुझे खुशी है कि करीब-करीब आधा रास्ता हम तय कर चुके है।
- गरीब हो या मध्यम वर्ग का परिवार, बीते चार वर्षों से उसे झुग्गी से, किराए के मकान से निकालकर, अपना घर देने की तरफ सरकार ने गंभीर प्रयास किए हैं।
- कोशिशें पहले भी हुई हैं, लेकिन दुर्भाग्य से उनका लक्ष्य गरीबों को घर देकर सशक्त करने के बजाय, एक विशेष परिवार के नाम का प्रचार करना अधिक रहा है। घर अच्छा हो, उसमें शौचालय हो, बिजली हो, पानी हो, गैस का कनेक्शन हो, इस पर पहले कम ही ध्यान दिया गया।
- जब किसी योजना के मूल में राजनीतिक स्वार्थ के बजाय गरीब का कल्याण हो, उसके जीवन को आसान बनाने की प्रेरणा हो, तब काम की गति कैसे बढ़ती है, ये आज देश के सामने है।
- पिछली सरकार ने अपने आखिरी चार वर्षों में सिर्फ 25 लाख घर बनाए थे, जबकी बीते चार वर्षों में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने एक करोड़ 25 लाख घर बनाए हैं। सोचिए, एक करोड़ ज्यादा मकान।
- सब कुछ तो वही है, वही साधन, वही संसाधन, वही लोग, लेकिन साफ नीयत से, गरीब की सेवा के भाव से जब काम होता है, तो ऐसे ही नतीजे मिलते हैं।
- पहले की सरकार औसतन 18 महीने में एक मकान बनाती थी और आज 12 महीने से भी कम समय में घर बन रहे हैं। समय तो कम हुआ ही है, घर का आकार भी हमने बढ़ाया है। इसके साथ-साथ घर बनाने के लिए सरकारी मदद को 70 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख 20 हजार कर दिया गया है।
- सबसे अहम बात ये कि पैसे सीधे बैंक खाते में जमा हो रहे हैं और लाभार्थियों का चयन वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से हो रहा है। इतना ही नहीं ये घर टिकाऊ हों और इनमें शौचालय समेत सारी मूलभूत सुविधाएं हों इसका भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
- मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से तो आपको जल्द से जल्द राहत मिलेगी ही, इसके अतिरिक्त भी महाराष्ट्र सरकार जो कदम उठाएगी उसमें केंद्र पूरा सहयोग करेगा।
- पानी के इसी संकट से देश के किसानों को निकालने के लिए, सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बरसों से अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने का काम कर रही है। इसके तहत महाराष्ट्र में भी अनेक बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
-खेती के साथ-साथ सरकार टूरिज्म को भी बढ़ावा दे रही है। महाराष्ट्र में तो शिरडी जैसे आस्था से जुड़े बड़े स्थान भी हैं तो अजंता-अलोरा जैसे स्थल भी हैं जहां दुनिया भर के श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं।
- आस्था, आध्यात्म और इतिहास को युवाओं के रोज़गार से जोड़ने का एक बहुत बड़ा अभियान हमने शुरू किया है। देश के टूरिस्ट सर्किट को आपस में जोड़ा जा रहा है, वहां पर सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है।
- अपने इन महान संत पुरुषों का सबक हमें हमेशा याद रखना है और स्वार्थ के लिए समाज में भेद पैदा करने वाली हर शक्ति, हर बुराई को पराजित करना है।

 


श्रीनगर - सेना ने वीरवार को उत्तरी कश्मीर के उड़ी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर घुसपैठ के प्रयास को नाकाम बनाते हुए चार आतंकियों को मार गिराया। मारे गए चारों आतंकियों के पाकिस्तानी होने की संभावना जताई जा रही है। सेना ने मुठभेड़ स्थल और उसके साथ सटे इलाकों में एहतियातन सघन तलाशी अभियान चला रखा है।
जानकारी के अनुसार, उड़ी सेक्टर के अंतर्गत बोनियार सब-सेक्टर में टुरना अग्रिम चौकी के साथ सटे जंगल में सेना की पांच ग्रेनेडियर्स के जवानों ने घुसपैठियों के एक दल को भारतीय इलाके में देखा। जवानों ने आसपास की सभी चौकियों को सूचित करते हुए घुसपैठियों को ललकारा। इस पर घुसपैठियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
बताया जाता है कि घुसपैठिए दो अलग-अलग गुटों में बंट गए और फायरिंग कर वापस भागने लगे। जवानों ने उनका पीछा करते हुए जवाबी कार्रवाई कर उन्हें मुठभेड़ में उलझा लिया। यह मुठभेड़ सुबह साढ़े आठ बजे शुरू हुई और पहले दो घंटों के दौरान दोनों तरफ से भीषण गोलियां चलती रहीं। इसके बाद अगले दो घंटों तक आतंकियों की तरफ से गोलीबारी की तीव्रता कम रही और वह बीच-बीच में गोली चलाने लगे। दोपहर एक बजे तक आतंकियों की तरफ से गोलीबारी पूरी तरह बंद हो गई।
इसके बाद जवानों ने सावधानीपूर्वक आगे बढ़ते हुए तलाशी ली तो उन्हें तीन आतंकियों के गोलियों से छलनी शव और उनके हथियार मिले। मुठभेड़ स्थल पर जवानों को खून के धब्बे भी मिले जो एलओसी की तरफ जा रहे थे। जवानों ने इन धब्बों को सुराग बनाते हुए तलाशी अभियान जारी रखा और शाम को एक और आतंकी का शव बरामद किया।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि उड़ी सेक्टर में घुसपैठ का प्रयास नाकाम बनाते हुए चार आतंकी मार गिराए गए हैं। यह चारों आतंकी विदेशी हो सकते हैं। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद भी मिला है। उन्होंने बताया कि मारे गए आतंकियों के कुछ और साथी वहां हो सकते हैं, इसलिए बोनियार के अग्रिम इलाकों में सघन तलाशी अभियान को जारी रखा हुआ।


नई दिल्ली - विदेश से भारत पहुंचे एक वायरस ने कुछ राज्यों में कहर मचाना शुरू कर दिया है। देश की राजधानी दिल्ली अब तक इस खतरनाक वायरस से सुरक्षित है। हालांकि एम्स के डॉक्टरों का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर का इलाका ज्यादा दिनों तक इस वायरस से सुरक्षित नहीं रहेगा। इसके साथ ही डॉक्टरों ने सलाह दी है कि मच्छरों से डरें, खतरनाक वायरस से नहीं।
राजस्थान के जयपुर में जीका वायरस के संक्रमण के मद्देनजर एहतियात के तौर पर एम्स दिल्ली में भी संभावित मरीजों में जीका की जांच की जा रही है। दिल्ली में अभी तक किसी मरीज में इस बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है। डॉक्टर कहते हैं कि पर्यटकों के साथ यह बीमारी विदेश से देश में आई है। जीका के संक्रमण से अधिक दिन तक दिल्ली को बचाए रखना आसान नहीं होगा। फिर भी लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। मच्छर से डरने की जरूरत है, जीका से नहीं।
एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष विश्वास ने कहा कि जीका, डेंगू व चिकनगुनिया इन तीनों बीमारियों के संवाहक एडीज मच्छर ही होते हैं। इनमें डेंगू अधिक खतरनाक व जानलेवा बीमारी है। जीका नई बीमारी है। इसलिए लोग घबरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह डेंगू की तरह जानलेवा नहीं है। इसके अलावा जीका वायरस के संक्रमण से पीड़ित मरीजों को डेंगू की तरह बहुत तेज बुखार नहीं होता।
डॉ. विश्वास ने कहा कि यह देखा गया है कि जीका से पीड़ित ज्यादातर मरीजों को हल्का बुखार (99 से 102 डिग्री फारेनहाइट) होता है। 10-15 फीसद लोगों को तेज बुखार (104 या 105 डिग्री तक) होता है, जबकि डेंगू से पीड़ित मरीजों को तेज बुखार होता है। डेंगू में जोड़ों में तेज दर्द, आंखों में दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते निकल आते हैं। यह सब लक्षण जीका के संक्रमण में भी होते हैं पर उसका असर हल्का होता है।
डेंगू की तरह जीका के मरीजों को शॉक सिंड्रोम या रक्तस्राव की आशंका नहीं रहती। इसलिए लोगों को जीका से डरने की जरूरत नहीं है। राजस्थान व दिल्ली के बीच कई लोगों का आवागमन होता है। दिल्ली में एडीज मच्छरों की उत्पत्ति भी अधिक है। इसलिए यहां जीका का संक्रमण फैलने की आशंका पूरी है। ऐसे में मच्छरों से बचने की जरूरत है।
पिछले साल भी 200 मरीजों की हुई थी जांच
एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. ललित धर ने बताया कि वायरल बुखार से पीड़ित संभावित मरीजों में जीका की जांच की जा रही है। खासतौर पर जिन मरीजों में डेंगू व चिकनगुनिया की पुष्टि नहीं होती है, उनमें जीका की जांच भी की जा रही है। पिछले साल भी करीब 200 मरीजों में जीका की जांच की गई थी। इस बार भी काफी मरीजों की जांच की गई है।
गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी बरतने की जरूरत
दिल्ली में अब तक किसी मरीज में जीका की पुष्टि नहीं हुई है। जीका का दुष्प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चों पर अधिक पड़ता है। गर्भवती महिला के इस वायरस से संक्रमित होने पर बच्चे का मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बच्चे को माइक्रोसेफली नामक जन्मजात बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में बच्चे का मस्तिष्क थोड़ा छोटा रह जाता है। इसके अलावा गुइलेन र्बे सिंड्रोम होने का खतरा रहता है, जिसमें ज्यादा कमजोरी और पैरों में झुनझुनी होती है।


तिरुवनंतपुरम - केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाएें शुक्रवार को भी प्रवेश नहीं कर सकी। भारी विरोध के चलते एक्टिविस्ट रेहाना फातिमा और टीवी पत्रकार कविता जक्कल को मंदिर में एंट्री नहीं मिली। दरअसल, इन दोनों महिलाओं को 250 पुलिसकर्मियों के सुरक्षा घेरे में मंदिर में प्रवेश कराने की कोशिश की गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों के सामने पुलिस की एक ना चली और महिलाओं को मंदिर के एंट्री प्वाइंट से वापस लौटना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने दोनों महिलाओं से वापस जाने की मांग की। सन्निधानम में जमे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी भी हालत में 10-50 वर्ष की महिलाओं को मंदिर में नहीं घुसने देंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हम सबरीमाला की सुरक्षा कर रहे हैं।
महिलाओं की एंट्री पर विवाद जारी
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर तीसरे दिन भी विवाद जारी है। मंदिर के कपाट बुधवार शाम को ही खोल दिए गए थे, लेकिन अभी भी यहां महिलाओं का प्रवेश नहीं हो पा रहा है। शुक्रवार को भी मंदिर के बाहर जमकर हंगामा और नारेबाजी हो रही है।
बेबस नजर आई पुलिस
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद महिलाओं को सबरीमाला में एंट्री नहीं मिल रही है। प्रदर्शनकारियों के आगे पुलिस भी लाचार नजर आई। केरल पुलिस के आईजी एस श्रीजीत ने कहा 'हमने महिला श्रद्धालुओं को स्थिति से अवगत करा दिया था, अब वे वापस लौट रही हैं।'
गौरतलब है कि बुधवार को सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलने के बाद से अब तक 10 साल से लेकर 50 साल तक की आयु की किसी भी महिला को ब्रह्मचारी कहे जाने वाले भगवान अयप्पा के इस प्राचीन मंदिर में प्रवेश नहीं मिल पाया है। जबकि एक अमेरिकी मीडिया हाउस की दिल्ली की एक महिला पत्रकार ने अपने विदेशी पुरुष सहयोगी के साथ मंदिर में प्रवेश की कोशिश की लेकिन उन्हें पर्वतीय क्षेत्र मरक्कोट्टम से बैरंग वापस पंबा में लौटना पड़ा।
अयप्पा के क्रोधित भक्तों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। उन्हें पुलिस की निगरानी में सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। महिला पत्रकार के पीछे पहाड़ी पर चढ़ रहे मलयालम समाचार चैनलों के संवाददाताओं ने बताया कि श्रद्धालु 'महिलाओं, वापस जाओ' के नारे लगा रहे थे।
समझा जाता है कि महिला पत्रकार की उम्र 45 साल के करीब रही होगी। यदि पत्रकार पहाड़ी चढ़कर मंदिर पहुंच जाती तो 28 सितंबर को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयप्पा स्वामी मंदिर में भगवान के दर्शन करने वाली वह रजोधर्म आयु वर्ग की पहली महिला होती।
'कोर्ट सिर्फ हिंदुओं के पीछे क्यों'
सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी कंदारू राजीवारू ने 10-50 वर्ष की महिलाओं से सन्निधानम (मंदिर प्रांगण) में नहीं आने और समस्या नहीं पैदा करने की अपील की है। राजीवारू ने मंदिर परिसर में कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट सिर्फ हिंदुओं के रीति-रिवाजों और परंपराओं के पीछे क्यों पड़ा रहता है।
हजारों-लाखों जरूरी केस लटके पड़े हैं, उनकी कोई सुध नहीं। उधर, पलक्कड़ जिले के वीएन वासुदेवन नंबूदरी को सबरीमाला मंदिर का अगले एक साल के लिए नया मुख्य पुजारी चुना गया है।
बसें व ऑटो सड़कों से नदारद
विभिन्न हिंदू संगठनों की ओर से केरल में आहूत बंद गुरुवार की सुबह शुरू हुआ। बंद के कारण बसें और ऑटोरिक्शा सड़कों से नदारद रहे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पत्तनमतिट्टा जिले में स्थित सबरीमाला पहाड़ी पर जाने के तीनों मुख्य रास्तों पंबा, निलाक्कल और एरुमेली सहित विभिन्न जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
राज्य के कुछ हिस्सों से केरल राज्य परिवहन निगम की बसों पर पथराव हुआ। हालांकि कुछ क्षेत्रों में निजी वाहन चल रहे हैं। पुलिस ने प्रदर्शनों और हिंसा पर लगाम लगाने के लिए पंबा और शनिधानम सहित चार जगहों पर निषेधाज्ञा लागू की है। पुलिस ने प्रदर्शन करने वाले छह भाजपा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है।

 


मंगलुर/बेंगलुर - केरल के सबरीमाला मंदिर का विवाद थम नहीं रहा है और अब कर्नाटक के दो मंदिरों का विवाद सामने आ गया है। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गोकर्ण के महाबलेश्वर मंदिर में जींस, पाजामे, पेंट व बरमूडा पर पाबंदी लगा दी गई है। मंदिर में ड्रेस कोड लागू कर पुरुषों के लिए धोती व महिलाओं के लिए सलवार सूट व साड़ी अनिवार्य की गई है।
उधर कोल्लुर के श्री मुकाम्बिका मंदिर के लक्ष्मी मंतपा में एक महिला के प्रवेश से बवाल मच गया। इस मंदिर में सिर्फ पुजारियों को जाने की इजाजत है। गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर के कार्यकारी अधिकारी एच. हलप्पा ने बताया कि गोकर्ण में पहले से पाबंदियां थीं, लेकिन हम ड्रेस कोड एक माह पहले ही लागू कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में शर्ट, पेंट, हैट, कैप, कोट की भी इजाजत नहीं है। पुरुषों के लिए सिर्फ धोती पहनने की इजाजत है। वे शर्ट, टीशर्ट व बनियान भी नहीं पहन सकेंगे। महिलाओं को सिर्फ सलवार सूट व साड़ी की इजाजत है।
मयूर शर्मा ने बनवाया था गोकर्ण मंदिर
गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर का निर्माण कदंब राजवंश के मयूर शर्मा ने चौथी सदी में यानी आज से 1600 से साल पहले कराया था। करवार में अरब सागर के तट पर स्थित यह मंदिर पर्यटकों के आकषर्षण का केंद्र है।
लक्ष्मी मंतप में पूर्व महिला अफसर के जाने से विवाद
उधर कोल्लुर मंदिर के लक्ष्मी मंतप में मंदिर की पूर्व कार्यकारी अधिकारी टीआर उमा के जाने से बवाल मच गया है। उडुपी जिला उपायुक्त प्रियंका मैरी फ्रांसिस ने एसडीओ से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है। इस मंदिर में सिर्फ पुजारियों को जाने की इजाजत है। उमा मौजूदा कार्यकारी अधिकारी की जानकारी के बगैर मंदिर में चली गई थीं। उमा के मंदिर के गर्भग्रह के बाहर स्थित मंतप में जाने का वीडियो सोशल मीडिया में जारी होने के बाद विवाद पैदा हुआ।


मेरठ - पाकिस्तान से आई एक कॉल ने मेरठ कैंट में तैनात करीब 26 साल के फौजी को आईएसआई नेटवर्क के चंगुल में फंसा दिया। मिली जानकारी के अनुसार जवान के पास पहले पाकिस्तान के एक नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने जवान को वाट्सएप पर ले लिया और मैसेज के दौर से शुरू हुए। बातचीत जासूसी तक जा पहुंची। मेरठ कैंट में तैनात फौजी कंचन सिंह की उम्र करीब 26-27 साल है। दिखने में हैंडसम इस जवान की फेसबुक आईडी भी है। उसकी फ्रेंडलिस्ट में शामिल करीब हजार मित्रों में 50 से ज्यादा महिलाएं हैं।
फेसबुक पर वह अपडेट नहीं है और आखिरी बार उसने चार फरवरी 2017 को अपनी एक तस्वीर पोस्ट की।
जानकारों के अनुसार पाकिस्तानी खुफिया एजेंट फौज के जवानों और युवाओं को फोन कॉल के जरिए चंगुल में लेते हैं। आमतौर पर इसके लिए मधुर आवाज वाली खूबसूरत महिलाओं को इस्तेमाल किया जाता है। यह महिलाएं रेंडम कॉल करती हैं और फिर वाट्सएप पर एड कर चैट शुरू करती हैं। चैटिंग का यह सिलसिला ही ब्रेन वॉश तक ले जाता है। सूत्रों के अनुसार पहली बार सेना के इस जवान के पास भी पाकिस्तान से एक कॉल आई।
दूसरी तरफ आवाज महिला की ही थी। इसके बाद चैटिंग शुरू हुई और तस्वीरों का आदान-प्रदान भी। आईएसआई एजेंट ने जवान को इस कदर चंगुल में ले लिया कि वह दिल के आगे बेबस हो ब्रेन वॉश की स्थिति तक चला गया। दूसरी तरफ से आईएसआई एजेंट ने उसे जो कहा वह करता चला गया। कैंट क्षेत्र की तस्वीरों का आदान-प्रदान और सैन्य यूनिटों की मोबिलिटी से संबंधित सूचनाएं भी शेयर होने लगीं। जांच एजेंसी के पास यह भी इनपुट है कि इसमें पैसे का भी लेनदेन हुआ। संभवत: फौजी के कुछ खातों में ऑनलाइन पैसा भेजा गया। इसके लिए उसके बैंक खातों की भी जांच हो रही है।
यह भी देखा जा रहा है कि कंचन सिंह ने कहीं फर्जी नामों से फेसबुक आईडी तो नहीं बना रखी हैं जिनसे वह आईएसआई एजेंटों को सूचनाएं भेजता हो। मेरठ समेत वेस्ट यूपी में आईएसआई का बड़ा नेटवर्क है। यह भी माना जा रहा है कि उस तक पैसा कैश में भी पहुंचाया गया। इन सबसे संबंधित पुख्ता सबूत जुटाने के लिए ही जांच एजेंसी जुटी है। पुख्ता सबूतों के आधार पर ही यह मामला आगे कोर्ट मार्शल या सिविल पुलिस तक जाएगा।
कुंवारा है जासूसी के आरोप में घिरा फौजी
उत्तराखंड के बागेश्वर के बिलौनी गांव का रहने वाला यह फौजी कुंवारा है। बिलौनी एक ऐसा गांव है जो बागेश्वर से सटा है और यहां खेती-मजदूरी करने वाले गरीब लोग रहते हैं। कंचन सिंह भी आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार से फौज में आया। माना जा रहा है कि उसकी इसी कमजोरी का आईएसआई एजेंटों ने फायदा उठाया और उसे अपने शिकंजे में ले लिया।


नई दिल्ली - विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक बार फिर दोहराया कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान को बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल बनाने की जरूरत है।
गुरुवार को रविश कुमार ने कहा कि इस्लामाबाद को बातचीत के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिए विश्वसनीय कदम उठाने और अनुकूल परिस्थितियां बनाने की जिम्मेदारी पूरी तरह पाकिस्तान पर निर्भर है। पाकिस्तान को आतंकवाद की आधारभूत संरचना के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है।"
श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की तीन दिवसीय यात्रा को लेकर कुमार ने कहा कि वे गृह मंत्री और विदेश मंत्री से मिलेंगे। कुमार ने यह भी बताया कि श्रीलंका के प्रधानमंत्री शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए भी तैयार हैं।
रूस के साथ भारत के एस -400 सौदे के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है और अमेरिका के साथ इसपर अपनी स्थिति साझा कर चुका है। एस -400 सौदा राष्ट्रीय हित के लिए तय किया गया है।
ईरान पर प्रतिबंध से भारत-अमेरिका संबंधों के बारे में पूछा गया, तो कुमार ने स्पष्ट किया कि हमारी उम्मीदें अमेरिकी पक्ष के लिए जानी जाती हैं। हम सभी हितधारकों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आगे बताया कि ईरान के साथ भारत के संबंधों का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।
राफले सौदे के विवाद के बाद भारत-फ्रांस संबंधों से संबंधित प्रश्नों के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत फ्रांस के साथ बहुत अच्छे संबंध है। राफले सौदे के मुद्दे ने पेरिस के साथ नई दिल्ली के संबंधों को प्रभावित नहीं किया है।


श्रीनगर - पुलवामा में गुरुवार को आतंकियों ने इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आइईडी) विस्फोट किया, जिसमें सेना का कैस्पर वाहन (बख्तरबंद वाहन) क्षतिग्रस्त हो गया। वाहन में सवार सात जवान घायल हो गए। सेना ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया है। रात करीब सवा नौ बजे सेना की 55 आरआर के जवानों का दल रात्रिकालीन गश्त पर अपने कैस्पर वाहन में पुलवामा के लस्सीपोरा इलाके से गुजर रहा था। जवान अक्सर रात में इसी इलाके से गश्त पर गुजरते हैं। आतंकियों को इसका पता था।
उन्होंने पुलवामा-लस्सीपोरा सड़क पर स्थित त्रिच्छल पुल के पास आइईडी लगा रखी थी। जैसे ही सेना का वाहन वहां से गुजरा तो आतंकियों ने कथित तौर पर रिमोट के जरिये धमाका कर दिया। इसमें कैस्पर वाहन को आंशिक क्षति पहुंची है।
बताया जाता है कि धमाके के फौरन बाद जब वाहन में मौजूद सैन्यकर्मियों ने बाहर निकलने का प्रयास किया तो वहीं पास छिपे आतंकियों ने अपने स्वचालित हथियारों से उन पर फाय¨रग भी की। जवानों ने घायल होने के बावजूद जवाबी फायर किया। लोगों के मुताबिक, करीब 15 मिनट तक गोलियां चलती रहीं। इस बीच, सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टुकडि़यां भी मौके पर पहुंच गई। उन्होंने आतंकियों को पकड़ने के लिए पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली।
सोपोर और बांडीपोर में चलाया तलाशी अभियान
सुरक्षाबलों ने सोपोर के वारपोरा और बांडीपोर के पनार हाजन में आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर तलाशी अभियान (कोसो) चलाया। संबधित अधिकारियों ने बताया कि वारपोरा में कासो दोपहर बाद समाप्त हुआ, जबकि बांडीपोर में यह देर शाम गए तक चला। इस दौरान किसी आतंकी या उनके किसी ओवरग्राउंड वर्कर के पकड़े जाने की कोई सूचना नहीं है।

 

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