नई दिल्ली - फुटबॉल के खेल में 'आत्मघाती गोल' ऐसा ही है, जैसे किसी व्यक्ति ने खुद का ही गला घोंट दिया हो। लेकिन, इस तरह का गोल कोई खिलाड़ी जान बूझकर नहीं करता, बल्कि उससे ऐसी गलती अनजाने में ही होती है। फुटबॉल में दिलचस्पी लेने वाले पाठकों के लिए हम एक ऐसे ही खिलाड़ी की कहानी बता रहे हैं, जिसने गलती से 'आत्मघाती गोल' किया, फिर अपने देश से इस गलती के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी। वह अंदर ही अंदर अपनी इस गलती के लिए कुढ़ता रहा, खुद को माफ नहीं कर पा रहा था। यह गलती उसने जानबूझकर नहीं की थी और इस बात से सब सहमत थे, फिर उसे अपनी जान गंवाकर इस गलती की कीमत चुकानी पड़ी थी।
पढ़ें फुटबॉल के खेल की सबसे दर्दनाक कहानी
जी हां, हम बात कर रहे हैं कोलंबिया के फुटबॉल खिलाड़ी और कप्तान आंद्रे एस्कोबार की। कोलंबिया की फुटबॉल टीम ने साल 1994 में अमेरिका में हुए फीफा विश्व कप में आंद्रे एस्कोबार की कप्तानी में हिस्सा लिया था। इस विश्व कप में कोलंबियाई टीम को संभावित विजेता के रूप में देखा जा रहा था। कोलंबियाई टीम में मिडफ़ील्ड में चमकीले-सुनहरे बालों वाले कार्लोस वालेडरमैन, फारवर्ड फॉस्टिनो एस्पीला और युवा डिफेंडर और कप्तान आन्द्रे एस्कोबार शामिल थे। इस विश्व कप से पहले ब्राजील के महान फुटबालर पेले ने भविष्यवाणी की थी कि कोलंबिया कम से कम विश्व कप के सेमीफाइनल तक जरूर पहुंचेगी और कई लोग उनकी बात से इत्तेफाक भी रखते थे।
महान पेले को भी कोलंबियाई टीम लग रही थी विश्व कप की दावेदार
क्वालीफाइंग राउंड के आखिरी मैच में अर्जेंटीना के खिलाफ 5-0 की जीत के बाद कोलंबियाई फुटबॉल प्रशंसक भी अपने देश को विश्व कप खिताब का प्रबल दावेदार मान रहे थे। क्वालीफाइंग राउंड में कोलंबिया की टीम ने अपने सभी 6 मुकाबलों जीते थे और शीर्ष पर रही थी। फीफा विश्व कप 1994 में कोलंबिया को ग्रुप-ए में मेजबान संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विट्जरलैंड और रोमानिया के साथ रखा गया था। जब पूरी दुनिया कोलंबिया की तरफ संभावना भरी निगाहों से देख रही थी, उस वक्त टीम के अंदर सब कुछ ठीक नहीं था। ड्रग्स माफियाओं की धमकियों की वजह से खिलाड़ी और कोच डरे हुए थे। इन ड्रग माफियाओं का पैसा सट्टेबाजी में लगा हुआ था, जो टीम पर अपने मन-मुताबिक परिणाम के लिए दबाव डाल रहा थे।
आतंक के साये में खेल रही थी कोलंबियाई टीम
आतंक के इस साये के बीच कोलंबियाई टीम फीफा विश्व कप 1994 में अपना पहला मुकाबला कैलिफोर्निया के रोज बाउल स्टेडियम में रोमानिया के खिलाफ खेलने उतरी। रोमानिया के काउंटर अटैक गेम ने कोलंबियाई टीम को चौंका दिया। कोलंबिया वह मैच 3-1 के अंतर से हार गई थी। पहले मैच में हार के बाद अब कोलंबिया को अपना दूसरा मैच मेजबान अमेरिका के खिलाफ खेलना था। 22 जून 1994 को रोज बाउल मैदान पर ही दोनों टीम आमने-सामने थीं। अगले राउंड में जाने के लिए कोलंबिया की टीम पर बेहद दबाव था। लगभग 94 हजार दर्शकों से भरे स्टेडियम में मैच अपने निर्धारित समय पर शुरु हुआ। कोलंबिया ने मैच के शुरुआत से ही अमेरिका के गोल पोस्ट पर हर एंगल से अटैक करना शुरु कर दिया, लेकिन कोई भी कोलंबियन खिलाड़ी अमेरिकी गोलकीपर को छका नहीं पाया।
कोलंबियाई कप्तान आंद्रे स्कोबार का आत्मघाती गोल
इसके बाद कुछ ऐसा हुआ जिसने कोलंबियाई टीम के साथ ही उसके कप्तान आंद्रे एस्कोबार का नाम भी इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज करा दिया। मैच के 35वें मिनट में अमेरिका के मिडफिल्डर जोन हार्क्स गेंद को बांयी ओर से लेकर कोलंबियन गोल पोस्ट की तरफ बढ़ने लगे। इस बीच उन्होंने दायें छोर पर मौजूद अपने हमवतन खिलाड़ी एर्ने स्टीवर्ट को पास दिया। लेकिन, जब तक गेंद स्टीवर्ट के पास पहुंचती उससे पहले ही कोलंबिया के कप्तान आंद्रे एस्कोबार के पैर से लगकर उनके ही गोल पोस्ट में जा घुसी। कोलंबियन गोल कीपर आस्कर कोरडोबा खड़े होकर बस मंजर देखने के सिवाय और कुछ न कर सके। पूरा स्टेडियम एक क्षण के लिए शांत हो गया था। इसके बाद कोलंबिया की टीम दवाब में आ गई और मैच के 52वें मिनट में अमेरिका ने एक और गोल कर बढ़त को 2-0 कर दिया।
कोलंबियाई टीम का सफर हुआ था समाप्त
मैच के आखिरी मिनट में कोलंबिया के वेलेंसिया ने गोल दाग कर हार का अंतर कम किया। इस हार के बाद कोलंबियन टीम समेत उसके फैन्स पूरी तरह टूट गए थे। जिस फुटबॉल के खेल और कप्तान ने उन्हें मुस्कुराने का अवसर दिया था, उसी ने उन्हें रोने पर मजबूर कर दिया था। अपने शुरुआती के दोनों मैचों में हार का मुंह देखने वाली कोलिबंयाई टीम के पास सिर्फ एक ही उम्मीद बची थी। वह उम्मीद थी कि कोलंबिया स्विट्जरलैंड के खिलाफ अपना अगला मैच बड़े गोल अंतर से जीत जाए और रोमानिया अपना मुकाबला अमेरिका के खिलाफ हार जाए। 1994 के वर्ल्ड कप फारमेट के हिसाब से चार बेस्ट तीसरे स्थान वाली टीमों को दूसरे राउंड में जाने का मौका मिलता था। अपने अगले मैच में कोलंबिया की टीम गवारिया और लोजेनो के गोल की बदौलत जीत तो गई लेकिन अमेरिका की टीम रोमानिया से 1-0 से हार गई। इसके साथ ही 1994 के फीफा विश्व कप में कोलंबिया का सफर समाप्त हो चुका था।
अंदर ही अंदर घुट रहे थे कप्तान आंद्रे एस्कोबार
टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद टीम के कप्तान आंद्रे एस्कोबार टूट गए थे। अंदर ही अंदर घुटने लगे थे और कोलंबियाई टीम की दुर्दशा के लिए खुद को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। विश्व कप से बाहर होने के बाद एस्कोबार ने लास वेगास में मौजूद अपने रिश्तेदारों के यहां जाने की बजाए अपने देश कोलंबिया वापस लौटने का फैसला किया। वह जानते थे कि उनका अपने देश वापस जाने का फैसला सही नहीं था, लेकिन सभी खतरों को दरकिनार करते हुए वह अपने देश वापस लौटे। उन्होंने 1 जुलाई, 1994 को मेडिलिन में अपने दोस्तों के साथ बाहर जाने की प्लानिंग की। उनके दोस्तों और परिवारवालों ने जान को खतरा बताते हुए उन्हें जाने से मना किया। लेकिन आंद्रे नहीं मानें और बाहर गए।
सीने में गोल गोल चिल्लाकर दाग दीं 6 गोलियां
एस्कोबार ने अपने दोस्तों के साथ एल पॉब्लेडो इलाके के एल नीडो बार में ड्रिंक किया। बार में काफी देर तक रहने के बाद एस्कोबार के सभी दोस्त वापस घर चले गए और वह अकेले बैठे रहे। अगले दिन सुबह के करीब 3 बजे वह पार्किंग में अपनी कार में अकेले बैठे थे, तभी 3 लोग वहां आए और एस्कोबार को कोलंबियाई टीम के विश्व कप से बाहर होने का जिम्मेदार ठहराने लगे। एस्कोबार की उनसे बहस होने लगी। इस बीच दो लोगों ने आंद्रे एस्कोबार पर 6 राउंड फायर कर दिए। हर एक फायर पर तीनों हमलावार गोल-गोल चिल्ला रहे थे। इस घटना के 45 मिनट बाद एस्कोबार की अस्पताल में मौत हो गई। आंद्रे एस्कोबार की मौत की खबर फैलते ही पूरा देश शोक में डूब गया। एस्कोबार की हत्या के बाद कुछ खिलाड़ियों ने कोलंबिया की नेशनल फुटबॉल टीम को छोड़ दिया और कुछ ने रिटायरमेंट ले लिया।
मरने से पहले आंद्रे एस्कोबार ने जो कहा था पढ़ें
"जीवन का यह अंत नहीं है, हमें आगे बढ़ना होगा। जीवन यहां खत्म नहीं होता। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह कितना मुश्किल है, हमें गिरकर फिर खड़ा होना होगा। हमारे पास केवल दो विकल्प हैं, या तो हम गुस्सा को अपने उपर हावी होने दें और हिंसा जारी रखें, या फिर हम इस दुख से उबरें और दूसरों की मदद करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करें। यह हमें खुद तय करना है, आइए हम सम्मान करें। मैं हर किसी का गर्मजोशी से स्वागत करता हूं। यह एक बहुत ही अद्भुत और दुर्लभ अनुभव रहा है। हम एक दूसरे को फिर से देखेंगे क्योंकि जीवन यहां खत्म नहीं होता।" कोलंबियन टीम के कप्तान आंद्रे एस्कोबार के ये शब्द थे, जिसे 1994 में विश्व कप के पहले ही राउंड से टीम के बाहर होने के बाद बोगोटा के एक न्यूजपेपर 'एल टिंपे' ने छापा था। यह विश्व कप से कोलंबियाई टीम के बाहर होने का उनके भीतर छिपा दर्द था।

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