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काबुल - अफगानिस्तान में लंबे समय बाद हो रहे संसदीय चुनाव दहशतगर्दों के निशाने पर हैं। इस दौरान काबुल के कई मतदान केंद्रों से बम विस्फोट की खबरें आ रही हैं। मतदान केंद्र पर मौजूद एएफपी संवाददाता ने बताया कि एक स्कूल में हो रहे मतदान के दौरान विस्फोट के बाद मतदाता भागने लगे। एक आदमी ने एएफपी को बताया कि वह मतदान के लिए गया था, लेकिन विस्फोट के बाद उसे अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।
आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता नासरत रहीमी ने मतदान केंद्रों के पास दो विस्फोटों की पुष्टि की है। उन्होंने एएफपी को बताया कि इन हमलों में किसी के हताहत की खबर नहीं है। बता दें कि इस युद्ध-ग्रस्त देश में मतदान केंद्रों की रक्षा के लिए लगभग 70,000 सुरक्षा बल तैनात हैं। पिछले दिनों चुनाव में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं पर अब तक दर्जनों हमले हो चुके हैं।


वाशिंगटन - अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले साल की शुरू में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन से दूसरी बार मुलाकात हो सकती है। यह बैठक कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को हासिल करने को लेकर होगी।
अमेरिका के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों को शुक्रवार को बताया कि अगले साल के शुरुआत में किसी भी समय बैठक होने की संभावना है। अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि बैठक के कार्यक्रम को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। इस महीने की शुरुआत में विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने उत्तर कोरिया की चौथी बार यात्रा की। वह ट्रंप तथा किम के बीच दूसरी शिखर वार्ता के लिए जापान और दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत कर रहे हैं।
बता दें कि ट्रंप और किम ने इस साल जून में सिंगापुर में ऐतिहासिक शिखर वार्ता की थी, जिसमें परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर उत्तर कोरिया ने सहमति जतायी गयी थी।


यह बात तार्किक है कि यदि भारत की सामरिक ताकत बढ़ेगी तो चीन और पाक तो बेचैन होंगे, पर अमेरिका भी बेचैन हो जाय ऐसा कम ही रहा है। अरबों डॉलर के रक्षा सौदे को लेकर भारत और रूस इन दिनों फलक पर हैं जबकि अमेरिका के साथ चीन और पाकिस्तान की बौखलाहट साफ देखी जा सकती है। भारत अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम उठाते हुए एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम रूस से खरीद रहा है जिसे लेकर भारत को करीब पांच अरब डॉलर खर्च करने पड़ेंगे। रूस से खरीदे जाने वाले इस डिफेंस सिस्टम को लेकर अमेरिका क्यों चिढ़ा है और भारत पर प्रतिबंध की तलवार क्यों लटक रही है इसे भी समझा जाना जरूरी है। 

अमेरिका के शत्रु देशों में शुमार है रूस
शत्रु देशों को प्रतिबंधों के जरिये दंडित करने के लिए एक कानून काउंटरिंग अमेरिकन एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट बनाया है जिसे संक्षिप्त में काटसा कहा जाता है इन देशों के साथ अर्थात अमेरिका के घोषित शत्रु देशों के साथ यदि कोई सौदा करता है तो उस पर यह कानून लागू होता है। रूस चूंकि अमेरिका के शत्रु देशों में शुमार है लिहाजा भारत को इसकी चिंता कुछ हद तक सता रही थी पर भारत ने यह तय कर लिया है कि भले ही अमेरिका आंखे दिखाए पर यह समझौता उसकी अपनी रक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि भारत रूस से एस-400 खरीद के मामले में काटसा कानून से रियायत चाहता था जिसे अमेरिका खारिज कर चुका है। जाहिर है भारत को अपनी रक्षा सोचनी है ऐसे में अमेरिका को लेकर आखिर फिक्र क्यों?
एस-400 सिस्टम अधिक जरूरी
चीन और पाकिस्तान के संभावित खतरे को देखते हुए एस-400 सिस्टम कहीं अधिक जरूरी है। सामरिक दृष्टि से भी भारत को ताकतवर होना समय की मांग है ऐसे में दुनिया का कोई देश धौंस नहीं दिखा सकता। इसमें कोई दुविधा नहीं कि फ्रांस से खरीदे जा रहे 36 राफेल फाइटर विमान और रूस से एस-400 को लेकर हुए ताजा समझौते से देश की सैन्य क्षमता मजबूत होगी। बीते कई सालों से अमेरिका कई देशों को रूस और ईरान के साथ समझौता करने पर प्रतिबंधों और तमाम तरह की धमकियां देता रहा। इन सबके बीच पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने एस-400 डील पर मोहर लगाकर अमेरिका समेत दुनिया को यह संकेत दे दिया कि वह अमेरिका पर निर्भर जरूर है परंतु रणनीतिक तौर पर वह पूरी तरह स्वतंत्र है।
भारत को दबाव में लेने की कोशिश
हालांकि इसके बाद अमेरिका भी कुछ नरम पड़ा है। उसने कहा कि प्रतिबंध वास्तव में रूस को दंडित करने के लिए हैं। तो क्या यह मान लिया जाय कि अमेरिका ने जिस तर्ज पर काटसा कानून के सहारे इस रक्षा सौदे को लेकर भारत को दबाव में लेने की कोशिश कर रहा था उससे अब वह पीछे हट गया है। हालांकि रूस से रक्षा सौदे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि भारत को जल्द मेरे फैसले की जानकारी होगी। भारत के सामने एक तो रूस से हुए रक्षा समझौतों तो लेकर अमेरिका से मिलने वाली चुनौती, दूसरे नवंबर से ईरान से तेल न लेने की चुनौती कहीं अधिक अहम है। देखा जाय तो चीन से अमेरिका की निरंतर मतभेद चलते रहते है।
ट्रेड वॉर और आर्थिक प्रतिबंध
इन दिनों तो दोनों के बीच ट्रेड वॉर भी चल रहा है जबकि पाकिस्तान पर वह कई आर्थिक प्रतिबंध पहले लगा चुका है और वहां के भीतर पनपे आतंकवाद को लेकर उसे बर्बाद करने तक की धमकी दे चुका है। ऐसे में यदि भारत पर भी वह नजर टेढ़ी करता है तो उसी का नुकसान होगा। अमेरिका को भी मालूम है कि चीन को संतुलित करने के लिए भारत से द्विपक्षीय संबंध मधुर रखने होंगे और पाकिस्तान को कहीं से बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। चीन ऐसा पहला देश है जिसने गवर्मेट टू गवर्मेट डील के तहत 2014 में रूस से एस-400 डिफेंस सिस्टम को खरीदा था और रूस इसकी आपूर्ति भी कर चुका है पर संख्या स्पष्ट नहीं है।
कतर को मिसाइल सिस्टम बेच सकता है भारत
हालांकि भारत के अलावा रूस कतर को भी यह मिसाइल सिस्टम बेचने की बात कर रहा है। पड़ोसियों की ताकत को कमजोर करने के लिए भारत को यह कदम उठाना ही था। चीन से भारत की चार हजार किमी की सीमा लगती है। वायु रक्षा प्रणाली मजबूत करने के लिए एस-400 कहीं अधिक जरूरी है। इस सुरक्षा प्रणाली की मदद से तिब्बत में होने वाली चीनी सेना की गतिविधियों पर नजर रखने में आसानी होगी और हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को भी कम करने में यह मददगार होगा। चीन पिछले साल जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य अड्डा बनाया। वहीं भारत ने इंडोनेशिया, ईरान, ओमान और सेशेल्स में नौसैनिक सुविधाओं तक पहुंच बना ली है। एस-400 भारत के लिए बहुत अहम होने वाला है।
सीरिया बॉर्डर पर एस-400 तैनात
इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि सीरिया युद्ध के दौरान तुर्की के लड़ाकू विमानों ने वहां तैनात रूस के फाइटर जैट एसयू-24 को भी मार गिराया था। स्थिति को देखते हुए रूस ने सीरिया बॉर्डर पर एस-400 तैनात किया इसके बाद ही नाटो समर्थित तुर्की के लड़ाकू विमान सीरिया के हवाई सीमा से मीलों दूर चले गये। एस-400 की मारक क्षमता के दायरे में पूरा पाकिस्तान आएगा। फिलहाल एस-400 को लेकर अमेरिका कितना परेशान है और आगे क्या सोचता है इसका फैसला उसी को लेना है। मगर पड़ोसी चीन और पाकिस्तान पर नजर गड़ाई जाय तो यहां का सूरत-ए-हाल कुछ और दिखेगा। दुनिया का सबसे खतरनाक हथियार एस-400 खरीदने का सौदा करके भारत ने दोनों पड़ोसियों की फिलहाल नींद तो उड़ा दी है।
पाकिस्तान बहुत परेशान
इस डील से पाकिस्तान बहुत परेशान है और सूचना यह है कि वह चीन से 48 ड्रोन खरीद रहा है। यह उसकी बौखलाहट ही कही जाएगी कि आर्थिक रूप से अपाहिज हो चुका पाकिस्तान एस-400 के मुकाबले ड्रोन से भड़ास निकाल रहा है वह भी जिससे आर्थिक गुलामी झेल रहा है। गौरतलब है कि चीन से पाकिस्तान अरबों के कर्ज में डूबा है और उसकी माली हालत बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। सेना और आतंक पर पैसा लुटाने वाला पाक अब चीन के गुलामी के कगार पर है। कळ्ल धन का 40 फीसद यहां सेना और आतंकवादियों पर लुटाया जाता है जबकि यहां कि आम जनता बेरोजगारी, बीमारी और बदहाली से दो-चार हो रही है। सेना की बैसाखी वाली नई इमरान खान सरकार आर्थिक दुविधा को समझते हुए कुछ सोच तो रही है, पर भारत से तुलना करने में ये भी बाज नहीं आ रहे हैं। भारत और रूस के बीच हुए एस-400 को लेकर अमेरिका के लिए भी संदेश छुपा है और पड़ोसी चीन और पाकिस्तान के लिए भी। ऐसे में परिपक्वता दिखाने का जिम्मा इन्हीं पर है।

 


इस्लामाबाद - पाकिस्तान ने भारत के रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के फैसले पर अफसोस जताते हुए कहा है कि इस खरीद से क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ेगा और हथियारों की होड़ बढ़ेगी।
पाकिस्तानी विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा है कि यह सौदा भारत का बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार करने की दिशा में अहम कदम है। भारत ने हाल ही में रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद का सौदा किया है। यह सिस्टम आकाश मार्ग से आने वाले दुश्मन की किसी भी मिसाइल या विमान को 400 किलोमीटर की दूरी पर ही नष्ट करने में सक्षम है। इससे दुनिया का सबसे सक्षम एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है।
विदेश विभाग ने दावा किया कि 1998 में दोनों देशों के परमाणु परीक्षणों के बाद पाकिस्तान ने किसी भी तरह के खतरे को दूर करने के लिए रणनीतिक समझौता करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन भारत ने उसे स्वीकार नहीं किया। अब बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम विकसित करके भारत दोनों देशों के शक्ति संतुलन को बिगाड़ने का कार्य कर रहा है। भारत का यह रुख पाकिस्तान को क्षमता के विस्तार के लिए मजबूर करेगा।


बीजिंग - चीन की इंटरनेट नियामक कंपनी के पूर्व प्रमुख लु वेई को 46 लाख डॉलर की रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार दिया है। ऐसे में चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के तहत कई अधिकारियों पर कार्रवाई की घोषणा की है।
लु जो कि चीन की शक्तिशाली इंटरनेट नियामक साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चीन (सीएसी) के प्रमुख रहे हैं। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नेटवर्क प्रबंधन और प्रचार जैसे मामलों पर अन्य लोगों को लाभ पहुंचाया है।
लु वेई पर पूर्वी शेजियांग प्रांत की इंटरमीडिएट पीपल्स कोर्ट ऑफ निंगबो में रिश्वत के रूप में 46 लाख अमेरिकी डॉलर लेने का केस चल रहा था। अदालत ने लु के अपराधों को सुना जो कि उन्होंने अपनी कई दशक की नौकरी के दौरान किए। इस दौरान लु राज्य समाचार एजेंसी शिन्हुआ, बीजिंग नगर पालिका समिति और सरकार, सीएसी और पार्टी के केंद्रीय प्रचार विभाग में तैनात थे।


वॉशिंगटन - लेफ्टिनेंट जनरल लॉरा जे रिचर्डसन को अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी कमान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अमेरिकी सैन्य इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी महिला अधिकारी को इतनी बड़ी भूमिका के लिए चुना गया। लॉरा यूएस आर्मी फोर्सेज कमान (फोर्सकॉम) का नेतृत्व करेंगी। यह अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी कमांड है जिसमें 7,76,000 सैनिक और 96,000 असैन्‍य कर्मी हैं, जिन्हें लॉरा हेड करेंगी। इस जिम्‍मेदारी के साथ ही लॉरा ने एक रिकॉर्ड बनाया है।
लॉरा के नाम कई उपलब्धियां
लॉरा 1986 से अमेरिकी सेना के साथ हैं और साल 2012 में वह पहली महिला डिप्‍टी कमांडिंग जनरल बनी थीं। उन्‍हें उस समय अमेरिकी सेना की कैवेलरी डिविजन की जिम्‍मा सौंपा गया था। जिसे 'अमेरिकाज फर्स्‍ट टीम' के नाम से भी जानते हैं। साल 2017 में लॉरा जनरल रॉबर्ट बी अब्राम्‍स की कमान में दूसरे स्थान पर थीं, जब उन्‍हें उत्तरी कैरोलिना की फोर्ट ब्रैग स्थित फॉरस्‍कॉम में डिप्‍टी जनरल का पद दिया गया था। अब जनरल रॉबर्ट बी. अब्राम्स के पद से हटने के बाद लॉरा रिचर्डसन इसी कमांड की जिम्‍मेदारी संभालेंगी। अपने करियर में रिचर्डसन ने एक आर्मी पायलट के अलावा उप-राष्‍ट्रपति के मिलिट्री सहायक की भूमिका भी निभाई है।
अब्राम्स ने कहा
वहीं, अपना पद छोड़ने पर अब्राम्स ने कहा है कि वह कोरिया में अमेरिकी सेना के मुखिया बनने वाले हैं, ऐसे में वह अपना पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पिछले तीन सालों से कमांडिंग जनरल के पद पर काम करना मेरे लिए सम्मान की बात है।' अब्राम्स ने इस मौके पर फारस्कॉम के सैनिकों के कार्यों की सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया। बता दें कि अब्राम्स अमेरिकी सेना के कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।


नई दिल्ली - पंजाब के अमृतसर में आज दशहरा देख रहे लगभग 50 से ज्यादा लोगों की रेलगाड़ी की चपेट में आने से मौत होने की आशंका है। प्राप्त जानकारी अनुसार अमृतसर में धोवी घाट के नजदीक जोड़ा फाटक के पास लोग रेलवे लाईन पर खड़े हो कर रावण दहन देख रहे थे। इसी दौरान अमृतसर से दिल्ली के लिए रवाना हुई हावड़ा और जालंधर से अमृतसर को आ रही डीएमयू रेलगाड़ियां आ गई। बताया जा रहा है कि रावण दहन दौरान चल रहे पटाखों की आवाज के कारण लोगों को रेलगाड़ी आने का पता नहीं चला जिसके कारण लगभग 50 लोगों से ज्यादा लोग कट गए।कई लोग घायल हो गए। इस हादसे ने 4 साल पहले बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में हुई हादसे की याद दिला दी।
क्या हुआ था उस दिन
तीन अक्टूबर 2014 को पटना के गांधी मैदान में रावण दहन के बाद हुई भगदड़ में कम से कम 33 लोगों की मौत हो गई थी। मारे गए में से 27 महिलाएं और पांच पुरुष थे।
घटना गांधी मैदान के दक्षिणी गेट (रामगुलाम चौक के सामने) के सामने हुई थी। गांधी मैदान के दक्षिणी गेट के नीचे बने लोहे के पाइप के चलते 33 लोगों की जान गयी! पहले एक अधेड़ उम्र की महिला का पैर इसी पाइप में फंस गया और वह जमीन पर गिर गयी। वहीं पर एक केबल का तार भी गिरा था। महिला को अचानक गिरता देख किसी ने करंट फैलने की अफवाह उड़ा दी। नतीजतन हजारों लोगों के बीच अफरातफरी मच गयी।
पहले तो लोगों को कुछ समझ नहीं आया लेकिन थोड़े ही देर बाद भगदड़ मौत बनकर दौड़ने लगी। महिला के ऊपर सैकड़ो लोग गिर गए। कुछ लोग मौत के मुंह से सही-सलामत निकलकर बाहर चले आए तो कुछ को काल ने अपना ग्रास बना लिया। इसके अलावा हादसे के पीछे एक और कारण सामने आ रहा है। मौका ए वारदात पर लाइट का इंतजाम भी नहीं कराया गया था। अंधेरा होने के कारण लोग ठीक से कुछ देख नहीं पाए।


नई दिल्ली - पंजाब के अमृतसर में रावण दहन देखने आए लोग काल का ग्रास बन गए। पठानकोट-अमृसर रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से ऐसा हुआ। बताया जा रहा है कि यहां चौड़ा बाजार में रेलवे ट्रैक के नजदीक रावण का पुतला दहन किया जा रहा था। बड़ी संख्या में लोग ट्रैक पर खड़े थे। इसी दौरान दोनों ट्रैक पर दनदनाती हुई ट्रेन आई और बहुत लोग इसकी चपेट में आ गए। अब तक करीब 50 लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रेन हादसे पर पंजाब के मुख्यमंत्री ने दुख जताया है। सीएम कैप्टन अमरिंद सिंह ने ट्वीट किया कि वे खुद राहत और बचाव कार्य को सुपरवाइज करने के लिए खुद अमृतसर पहुंच रहे हैं। उन्होंने हादसे में मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के इलाज का खर्च उठाने का ऐलान किया है।
इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी हादसे को लेकर ट्वीट किया है। हादसे पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दुख जताते हुए कहा कि अमृतसर के निकट एक ट्रेन हादसे का दुखद समाचार मिला है। मैं अपने कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं कि घटना स्थल पर जाकर राहत कार्य में प्रशासन की मदद करें। साथ ही अपने स्तर पर पीड़ितों की राहत के लिए जो भी संभव हो सके वह करें।
पीएम मोदी ने कहा- दुख की घड़ी में साथ हूं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर शोक जताते हुए ट्वीट में लिखा, 'अमृतसर रेल हादसे की वजह से बेहद दुखी हूं। यह घटना दिल दहलाने वाली है। जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया मेरी संवेदना उनके साथ है। मैं प्रार्थना करूंगा कि घायल लोग जल्दी स्वस्थ हों। अधिकारियों से बात की है और लोगों को त्वरित राहत देने के लिए कहा है।'
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शोक जताते हुए ट्वीट कर कहा, 'मैंने पंजाब के गृह सचिव और डीजीपी से बात कर हादसे की पूरी जानकारी ली है। दोनों जल्द ही घटनास्थल पर पहुंचने वाले हैं। केंद्र राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में राज्य सरकार की हरसंभव मदद करने के लिए तैयार है।'
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा, 'अमृतसर में हुए ट्रेन हादसे की ख़बर से बहुत आहत हूं| मेरी संवेदनाएं इस हादसे में मारे गए और पीड़ितों के परिवारों के साथ है। राज्य सरकार एवं कांग्रेस पार्टी के साथियों से मेरा आग्रह है कि राहत और बचाव कार्य में अपना पूर्ण योगदान दें और पीड़ितों को हर संभव मदद पहुंचाएं|'


नई दिल्ली - दिल्ली के होटल हयात में पिस्टल लहराने के मामले में पुलिस ने आरोपित आशीष पांडेय को शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में किया। यहां कोर्ट में जहां आशीष ने जमानत देने की मांग की है वहीं, पुलिस ने आशीष की रिमांड बढ़ाने की मांग की। जिस पर कोर्ट ने जमानत की मांग खारिज करते हुए आशीष पांडेय को सोमवार तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इससे पहहले एक दिन की रिमांड मिलने पर आरके पुरम थाना पुलिस ने पूर्व बसपा सांसद राकेश पांडेय के बेटे आशीष से पूछताछ की है। पुलिस के मुताबिक वह सहयोग कर रहा है और उसके बयान दर्ज किए गए हैं। पूरे घटनाक्रम को उसने विस्तार से बताया है।
वहीं, दिल्ली पुलिस ने लखनऊ में घटना के समय प्रयोग की गई पिस्टल और बीएमडब्ल्यू कार जब्त कर ली है। गुरुवार देर रात पुलिस कार व पिस्टल को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो गई थी। घटना के समय जो तीन युवतियां आशीष के साथ थीं, उनकी पहचान हो चुकी है, जल्द ही उनसे पूछताछ की जाएगी।
डीसीपी देवेंद्र आर्य ने बताया कि आशीष से लंबी पूछताछ की गई। उसने पुलिस के सभी सवालों का जवाब दिया। घटना के बाद ही वह लखनऊ चला गया था। मामला सार्वजनिक होने के बाद उसने पुलिस के पास आने या सहयोग करने के बजाय यहां-वहां छिपना शुरू कर दिया था।
वीकेंड पर आती हैं युवतियां, दिन में बिजनेस और देर रात तक पार्टी
आशीष से हुई पूछताछ में भी अभी तक यह बात पूरी तरह से साफ नहीं हो सकी है कि हयात होटल में हंगामे के दौरान उसके साथ मौजूद तीन विदेशी युवतियां दिल्ली क्यों आई थीं। उनके बारे में अभी यह पता चला है वे पार्टी करने के लिए सिर्फ वीकेंड पर दिल्ली आती हैं और रविवार सुबह अपने देश रवाना हो जाती हैं। वीकेंड पर बिजनेस के सिलसिले में आने की भी बात भी कही जा रही है। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर पार्टी करने के लिए दिल्ली आने-जाने में इतना खर्च क्यों? ऐसा कौन सा बिजनेस है, जो सिर्फ वीकेंड पर होता है? दिन में बिजनेस और फिर देर रात तक पार्टी कैसे संभव है? युवतियों से पूछताछ के बाद भी इस मामले की और परतें खुलेंगी। पुलिस मामले में कई तरह के कयास लगा रही है। डीसीपी का कहना है कि केस के मामले में अभी तो नहीं, लेकिन कुछ समय बाद युवतियों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। इससे पता लग सकेगा कि वास्तव में इस घटनाक्रम में युवतियों की क्या भूमिका थी। युवतियां दुबई, रूस और उजबेकिस्तान की रहने वाली हैं।


इटावा - समाजवादी पार्टी से किनारा करने के बाद समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का गठन करने वाले शिवपाल सिंह यादव ने निर्वाचन आयोग में अपनी नई पार्टी का पंजीकरण कराया है। इनकी पार्टी का पंजीकरण प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के नाम से हो गया है। अब शिवपाल सिंह यादव ने प्रदेश में अपनी जिला इकाइयों का गठन भी शुरू कर दिया है।
इटावा में शिवपाल सिंह यादव ने आज सेक्युलर मोर्चा कार्यालय का उद्घाटन किया। इस दौरान सपा अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समाजवादी सेक्युलर मोर्चा को भाजपा की बी पार्टी बताने पर शिवपाल ने कहा कि वह खिसियाहट में बौखलाए हुए हैं। उनका तो जनाधार खिसक रहा है, सभी वर्ग के लोग हमारे साथ है। शिवपाल सिंह यादव इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने कहा नेता जी मुलायम सिंह यादव को पहले कोई नहीं पूछ रहा था। अब तो उन्हें सम्मान मिलने लगा है।
शिवपाल ने इस दौरान अमर सिंह और आजम खान पर टिप्पणी करने से मना किया। उन्होंने कहा कि वह लोग स्वतंत्र है, हमारी सीधी लड़ाई तो भाजपा से है। भाजपा से बड़ी-बड़ी मदद मिलने पर शिवपाल ने कहा कि कहा कि अभी तक भाजपा ने कोई मदद नहीं की है।
प्रदेश में तो सिर्फ सेक्युलर मोर्चा ही भाजपा से लड़ रहा है इसलिए हम पर इस तरह का आरोप लग रहा है। भविष्य में महागठबंधन में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास ऑफर आता है तो इस पर हम जरूर विचार करेंगे।
दशहरा के दिन आज पार्टी के ऑफिस का उद्घाटन करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बुराई पर अच्छाई की जीत के दिन आज कार्यालय के शुभारंभ किया है। हम सभी साथियों को बुराई से लडऩा है। शिवपाल यादव ने कहा कि उनकी पार्टी का रजिस्ट्रेशन हो गया है पार्टी का नया नाम प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) होगा। अगले लोकसभा चुनाव में बगैर हमारे केंद्र में कोई सरकार नहीं बन पाएगी। 2022 में प्रदेश में हमारी सरकार बनेगी हर आदमी को न्याय दिलाया जाएगा।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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