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नई दिल्ली। क्या आप स्मार्ट मोबाइल फोन यूज करते हैं? अगर हां, तो क्या आपने मोबाइल में ढेर सारे एप्लीकेशन (ऐप) डाउनलोड कर रखे हैं? अगर अब भी आपका जवाब हां है तो हो सकता है आप गंभीर खतरे मे हों या बहुत जल्द फंसने वाले हों। साइबर क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल ऐप न केवल हमारी सुरक्षा बल्कि गोपनीयता में भी सेंध लगा रहे हैं।ऐसे में हमारे लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि किस तरह के मोबाइल ऐप को कौन सी परमिशन देनी चाहिए और कौन सी नहीं? य़हां हम आपको कुछ प्रमुख मोबाइल ऐप और उनके लिए जरूरी अनुमतियों के बारे में भी बताएंगे। साथ ही हम यहां आपको ये भी बताएंगे कि मोबाइल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपको किस तरह की सेटिंग्स या उपाय अपनाने चाहिए। क्योंकि, छोटी सी लापरवाही आपको बड़े खतरे में डाल सकती है।साइबर क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार इंटरनेट पर यूजर्स तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक वह सजग हैं। मोबाइल एप्स बड़ी आसानी से यूजर्स से उनका डाटा एकत्र करने की अनुमति ले लेती हैं। इस तरह के एप्स आपके मोबाइल की हर गतिविधि पर पूरी नजर रखते हैं और आपको बिना बताए किसी भी डाटा का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर लेते हैं। इन एप्स को आपकी पल-पल की गतिविधि की जानकारी होती है। आप कहां जा रहे हैं? आप किसे फोन या मैसेज कर रहे हैं? आप मोबाइल पर क्या देख या कर रहे हैं?
दो तरह की होती है परमिशन:-साइबर विशेषज्ञों के अनुसार एंड्रॉयड फ्रेमवर्क में सामान्य तौर पर दो तरह की अनुमति होती है। एक सामान्य अनुमति और दुसरी सेंसिटिव अनुमति। सामान्य अनुमति जैसे वाईफाई, ब्लूटूथ, वॉलपेपर और अलार्म आदि के लिए एप अलग से इजाजत नहीं मागते, ये उन्हें स्वतः मिल जाती है। सेंसटिविटी अनुमति जैसे कैमरा, लोकेशन, माइक्रोफोन, कॉल व एसएमएस लॉग और स्टोरेज आदि के लिए ऐप्स को यूजर की इजाजत की जरूरत होती है। सामान्यतः यूजर्स इसकी अनुमति दे भी देते हैं, क्योंकि बिना परमिशन के ऐप सही से काम नहीं करते या डाउनलोड ही नहीं होते हैं।
ऐसे करे ऐप को दी गई अनुमति का रिव्यू:-डाटा चोरी से बचने के लिए आपको ऐप डाउनलोड करते वक्त ही सावधान रहना चाहिए। चूंकि, हर ऐप को किसी खास काम के लिए डाउनलोड किया जाता है, लिहाजा उसे हर चीज की परमिशन देने की जरूरत नहीं है। जैसे कोई गेम ऐप है तो उसे फोटो गैलरी, कॉल, कैमरा या मैसेज पढ़ने की अनुमति देना आवश्यक नहीं है। आप मोबाइल में पहले से डाउनलोडेड एप को दी गई अनुमति का भी रिव्यू कर सकते हैं। इसके लिए आपको फोन की सेटिंग में जाकर Apps या Apps & Notifications देखें। यहां मोबाइल में मौजूद सभी ऐप की लिस्ट दिख जाएगी। इसके बाद किसी भी ऐप को क्लिक कर, Permissions का रिव्यू या बदलाव कर सकते हैं।
सुनिश्चित करें मोबाइल की सुरक्षा
1. मोबाइल ऐप्स को सुरक्षित करने के साथ ही मोबाइल को भी सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए सबसे पहला और जरूरी कदम है कि मोबाइल फोन को मजबूत पासवर्ड से लॉक रखें। जन्मदिन या मोबाइल नंबर को पासवर्ड न बनाएं। पासवर्ड में स्पेशल कैरेक्टर्स का जरूर इस्तेमाल करें।
2. मोबाइल को मजबूत पासवर्ड रखने के अलावा प्रत्येक महीने अपडेट भी करते रहें। हर बार नया पासवर्ड बनाएं और प्रत्येक बार स्पेशल कैरेक्टर्स का इस्तेमाल जरूर करें।
3. ईमेल आईडी या सोशल मीडिया अकाउंट में ड्यूल सिक्योरिटी का विकल्प चुनें। इससे आपको लॉग इन करते वक्त यूजर आईडी व पासवर्ड के साथ ही एक ओटीपी भी डालना होगा, जो संबंधित मोबाइल या इमेल पर प्राप्त होगा। इससे उस अकाउंट को हैक करना और मुश्किल हो जाएगा।
4. ईमेल या सोशल मीडिया पर आने वाले अनचाहे मेल व मैसेज को न खोलें। इन मेल या लिंक में वायरस हो सकता है, जिसकी मदद से हैकर आपका पूरा सिस्टम या संबंधित अकाउंट हैक कर सकता है। इस तरह के मेल य लिंक में अक्सर लालच देकर फंसाने का प्रयास किया जाता है।
5. किसी अनजान सिस्टम या ऐसे सिस्टम पर अपना अकाउंट लॉगइन करने से बचें जिसे कई लोग यूज करते हैं। साइबर कैफे में भी ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट खोलते वक्त प्राइवेट ब्राउजिंग का सहारा लें। क्रोम ब्राउजर में Incognito Private Browsing मोड का इस्तेमाल करें।
6. आजकल प्रमुख मार्केट, रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट सहित तमाम सार्वजनिक जगहों पर फ्री वाईफाई की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। इन वाईफाई का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इससे संबंधित सिस्टम के हैक होने का खतरा बढ़ जाता है।
7. मोबाइल का ब्लूटूथ तभी ऑन करें, जब उसकी जरूरत हो। हमेशा ब्लूटूथ ऑन होने से मोबाइल हैक हो सकता है या उसमें मौजूद गोपनीय डाटा चोरी हो सकता है।
8. किसी कंप्यूटर या फोन से सीधे ऐप ट्रांसफर न करें। इसे साइड लोडिंग कहते हैं। इससे भी आपके डिवाइस में वायरस के हमले का खतरा बढ़ जाता है। ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें।
9. अपना मोबाइल स्थाई तौर पर किसी को देने या बेचने से पहले उसे फैक्ट्री रीसेट कर दें। हार्डबूट करना और बेहतर विकल्प है। हार्डबूट करने के लिए सेटिंग मे जाकर बैकअप एंड रीसेट (Backup & Reset) विकल्प चुनें। यहां फैक्ट्री डाटा रीसेट (Factory Data Reset) पर क्लिक करें। इसके बाद आप वो फोन किसी को दे सकते हैं।
प्रमुख मोबाइल ऐप और उनको दी जाने वाली परमिशन
1. What’sApp: कैमरा, कॉन्टेक्ट, माइक्रोफोन और स्टोरेज की ही अनुमति प्रदान करें। लोकेशन तभी ऑन करें, जब उसकी जरूरत हो। एसएमएस और फोन की अनुमति न दें।
2. PayTM: क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए कैमरे की अनुमति देना अनिवार्य होता है। इसी तरह रुपये ट्रांसफर करने के लिए कॉटेक्ट की अनुमति प्रदान करनी पड़ेगी। इसके अलावा कैलेंडर, लोकेशन, एसएमएस, स्टोरेज और फोन की अनुमति न दें।
3. Facebook: केवल कैमरा और स्टोरेज की अनुमति दें। कैलेंडर, कॉटेक्ट्स, लोकेशन, माइक्रोफोन, एसएमएस और फोन की अनुमति न दें।
4. Twitter: केवल कैमरा और स्टोरेज की अनुमति दें। कैलेंडर, कॉटेक्ट्स, लोकेशन, माइक्रोफोन, एसएमएस और फोन की अनुमति न दें।
5. SnapChat: कैमरा, कॉटेक्ट्स, स्टोरेज और माइक की अनुमति दे सकते हैं। कैलेंडर, लोकेशन, एसएमएस और फोन की अनुमति प्रदान न करें।
6. Instagram: कैमरा, लोकेशन, माइक्रोफोन, स्टोरेज की अनुमति दे सकते हैं। कॉटेक्ट्स, एसएमएस और फोन की अनुमति देना खतरनाक साबित हो सकता है।
7. Tinder: कैमरा, कॉटेक्ट्स व लोकेशन की अनुमति दे सकते हैं। बॉडी सेंसर्स, कैलेंडर, माइक्रोफोन, एसएमएस, स्टोरेज व टेलिफोन की अनुमति न दें।
8. TrueCaller: केवल कॉटेक्ट्स और एसएमएस की अनुमति प्रदान करें। कैलेंडर, कैमरा, लोकेशन, माइक्रोफोन, स्टोरेज और फोन संबंधी अनुमति बिल्कुल न दें।
9. Jio App: कॉटेक्ट्स, एसएमएस और लोकेशन की अनुमदि ही दें। कैमरा, माइक्रोफोन, फोन और स्टोरेज की अनुमति का इसमें कोई प्रयोग नहीं है, लिहाजा उन्होंने ऑफ कर दें।
10. Flipkart: केवल स्टोरेज की अनुमति दें। कैमरा, माइक्रोफोन, एसएमएस, लोकेशन, फोन की अनुमति न दें। ई-कॉमर्स ऐप को कॉटेक्ट्स की अनुमति बिल्कुल नहीं देनी चाहिए।
11 Amazon: इसे भी केवल स्टोरेज की अनुमति दें। कॉटेक्ट्स समेत कैमरा, माइक्रोफोन, एसएमएस, लोकेशन और फोन की अनुमति न दें।
12. Gana/Saavn: केवल स्टोरेज की अनुमति प्रदान करें। कैमरा, कॉटेक्ट्स, लोकेशन, माइक्रोफोन, एसएमएस, फोन समेत अन्य सभी तरह की अनुमति ऑफ कर दें।
13. Gmail: केवल कॉटेक्ट्स, कैलेंडर और स्टोरेज की ही अनुमति प्रदान करें।
14. Google Map: केवल लोकेशन की अनुमति प्रदान करें। इसके अलावा कैमरा, कॉटेक्ट्स, माइक्रोफोन, एसएमएस, स्टोरेज और फोन की अनुमति देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
15. Ola/Uber: इसे भी केवल लोकेशन की अनुमति प्रदान करें। इसके अलावा कैमरा, कॉटेक्ट्स, माइक्रोफोन, एसएमएस, स्टोरेज और फोन की अनुमति न दें।
16. BHIM: कैमरा, कॉटेक्ट्स व एसएमएस की ही अनुमति दें। लोकेशन, माइक्रोफोन, स्टोरेज और फोन की अनुमति देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
17. Netflix: केवल स्टोरेज की अनुमति प्रदान करें। कैमरा, कॉटेक्ट्स, लोकेशन, माइक्रोफोन, एसएमएस, फोन समेत अन्य सभी तरह की अनुमति ऑफ कर दें। ऐसे अन्य ऐप के लिए भी इसी तरह की सेटिंग रखें।अन्य किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले ये सोच लें या सुनिश्चित कर लें कि उसे किस इस्तेमाल के लिए डाउनलोड कर रहे हैं। केवल उस इस्तेमाल से संबंधित अनुमति ही संबंधित ऐप को प्रदान करें। हर ऐप को सभी तरह की अनुमति देने की न तो आवश्यकता होती है और न ही जरूरत। ऐप आपसे हर तरह की अनुमति केवल इसलिए मांगते हैं, ताकि वह आपका डाटा चोरी कर उसे बेच सकें या उसका अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकें। इससे आपकी गोपनीय सूचनाएं लीक होने का खतरा बढ़ जाता है और आप गंभीर खतरे में भी पड़ सकते हैं।

नई दिल्ली। एक तरफ बिहार में बाढ़ और बारिश के चलते जनजीवन अस्तव्यस्त है, वहीं दिल्ली में बारिश का दौर रुकते ही उमस बढ़ गई है और गर्मी भी फिर से तेवर दिखाने लगी है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी है। बाढ़ और बारिश से सबसे ज्यादा स्थिति उत्तर बिहार की खराब है। वहां लगातार पांचवें दिन शुक्रवार को भी भारी बारिश हुई। नदियों में उफान से निचले इलाके में बाढ़ का पानी घुस गया है।बारिश के दौरान घर गिरने और पानी भरे गढ्डे में डूबने से 11 लोगों की मौत हो गई। तीन लोग जख्मी हो गए। सड़कों पर बाढ़ का पानी चढ़ने से और कई पुलिया ध्वस्त होने से आवागमन ठप हो गया। सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर और रक्सौल-बैरगनिया रेलखंड पर ट्रैक धंसने से ट्रेनों का परिचालन बाधित है। उधर नेपाल के पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश के चलते भारत के तराई इलाकों की तरफ आने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। बिहार और नेपाल में हो रही लगातार बारिश से बिहार से होकर बहने वाली नदियों में भी जलस्तर बढ़ गया है।
दिल्ली में गर्मी ने भी फिर दिखाए तेवर:-दिल्ली में बारिश का दौर रुकते ही उमस बढ़ गई है और गर्मी भी फिर से तेवर दिखाने लगी है। बारिश रुकने की वजह से अधिकतम तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर चल रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो से तीन दिन भी बिना बारिश के ही निकलने की संभावना है, जिससे गर्मी भी बढ़ेगी। हालांकि 16 से 19 जुलाई तक बारिश की संभावना है। इस बार भी बारिश के हल्के रहने की संभावना है।
पूर्वोत्तर में भारी बरसात से 10 लोगों की मौत, असम में बाढ़ से बिगड़े हालात:-पूर्वोत्तर के राज्यों में बारिश और बाढ़ से अब तक 10 लोगों की मौत हो गई है। सबसे ज्यादा छह मौतें असम में हुई हैं। असम में बाढ़ से 21 जिले और 8.5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं। राज्य के 33 में से 21 जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव कार्य में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) को लगाया गया है।बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालकर विभिन्न शिविरों में रखा गया जा रहा है। बाढ़ से काजीरंगा नेशनल पार्क में भी पानी भर गया है। ब्रह्मपुत्र नदी जोरहाट और तेजपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ का पानी सड़कों के ऊपर से बह रहा है, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। लंबडिंग-बदरपुर रेल मार्ग पर पानी भर जाने से रेल यातायात को रोक दिया गया है। बारिश के चलते हुए घटनाओं से मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में भी दो-दो लोगों की मौत हो गई है।
हिमाचल में भारी बारिश की संभावना:-हिमाचल प्रदेश में हो रही बरसात की वजह से छह सड़कें यातायात के लिए बंद पड़ी हैं। इनमें शिमला जोन में पांच सड़कें और कांगड़ा जोन के तहत एक सड़क ठप है। शिमला के सोलन सर्कल में एक, नाहन में तीन और कांगड़ा के डलहौजी में एक सड़क बंद पड़ी है। वहीं रिकांगपिओ में पोवारी से काजा जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-पांच काशंग नाले के पास ल्हासा गिरने से दो दिन से बंद है।शुक्रवार को शिमला, सोलन, मंडी और कांगड़ा में बारिश हुई। इससे इन जिलों में तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की गई। हालांकि अन्य क्षेत्रों में उमस बढ़ी हुई है। यहां 18 जुलाई तक बारिश का क्रम जारी रहने और तापमान में गिरावट आने की संभावना है। चंबा, कांगड़ा, सोलन, शिमला और सिरमौर में 14 को भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। 5 को ऊना, कांगड़ा, शिमला और सोलन में भारी वर्षा के लिए अलर्ट है।

नई दिल्ली। देश के कई इलाकों में इनदिनों बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गये हैं। उत्तर भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश से जहां राहत के साथ आफत भी बरपी है। बारिश होने से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। मैदानी इलाकों में जलजमाव से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। जबकि पहाड़ों में भूस्खलन के साथ ही सड़कें टूटने लगी हैं।
असम: भारी बारिश के कारण बारपेटा में कई इलाकों में पानी भर गया है। जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस गया है। जिस कारण लोगों को काफी दिक्क्तों का सामा करना पड़ रहा है।
मिजोरम : बारिश के कारण तुलबुंग शहर बाढ़ में पूरी तरह से डूब गया है। यहां हालात की स्थिति तस्वीरों को देखकर ही साफ समझी जा सकती है।
मध्य प्रदेश के एक गांव में लोग एक क्षतिग्रस्त लकड़ी के पुल से नदी को पार करने को मजबूर हैं। दमोह जिले के पिपरिया गांव में स्थानीय लोगों ने एक क्षतिग्रस्त लकड़ी के पुल पर एक नदी को पार किया। लोगों का कहना है, 'हम रोज अपने जीवन को जोखिम में डालते हैं। कई लोग पार करते समय गिर जाते हैं। वहीं इस घटना पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी पथरिया पंचायत का कहना है कि 'आरईएस एजेंसी ने शायद आधा निर्माण किया है। हम इसे पूरा करने के लिए लिखेंगे।'वहीं, झारखंड में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। झारखंड के गिरिडीह जिले में नदी में अचानक आई बाढ़ से एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया। गिरिडीह जिले के बरगंडा में उसरी नदी में जल स्तर अचानक बढ़ जाने के कारण एक ट्रैक्टर और उसका ड्राइवर फंस गया, चालक को बाद में पोकलेन मशीन की मदद से सुरक्षित बचा लिया गया। ट्रैक्टर को भी नदी से बाहर लाया गया। बता दें कि भारी बारिश के चलते देश की कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी गई है। देश के कई इलाकों में बाढ़ का भी खतरा मंडरा रहा है।
उफान पर ब्रह्मपुत्र नदी;-असम में भी इनदिनों बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं।गुवाहाटी से होकर बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का जल स्तर चेतावनी स्तर को पार कर जाता है। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अनुभाग अधिकारी वी गांधी ने कहा है, 'पानी चेतावनी स्तर को पार कर गया है, यह अभी भी खतरे के स्तर पर नहीं है। 1-2 दिनों में, यह यहाँ खतरे के स्तर को भी पार कर सकता है।'असम के 33 जिलों में से आधे जिले बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। इन जिलों के कई लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण कई जिलों में बाढ़ आ गया है। इस कारण कई लाख लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। बाढ़ के कारण कई हजारो हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है। नदी के कटाव के कारण कई गांवों पर अस्तित्व बचाने का खतरा मंडरा रहा है। 50 से अधिक सड़कें और दर्जन भर पुल पानी में डूबे हैं।
उत्तर भारत में बारिश से राहत और आफत:-उत्तर भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश से जहां राहत के साथ आफत भी बरपी है। बारिश होने से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। मैदानी इलाकों में जलजमाव से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। जबकि पहाड़ों में भूस्खलन के साथ ही सड़कें टूटने लगी हैं। यही नहीं बारिश के बाद उमस से लोगों को काफी परेशानी हो रही है।उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश का असर दिखने लगा है। लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश से गुरुवार को नदियों का जलस्तर और बढ़ गया। बहराइच, बलरामपुर और बाराबंकी जिले के तटवर्ती गांवों में बाढ़ के साथ कटान का खतरा भी मंडराने लगा है। हालांकि प्रशासन ने बचाव के लिए अलर्ट का दावा किया है।सबसे ज्यादा खराब स्थिति बहराइच की है। यहां नेपाल में हो रही बारिश का असर देखा जा रहा है।वहीं 13 जुलाई तक बिहार के अधिकांश हिस्सों में चक्रवात के साथ बारिश होने की संभावना है। उत्तर बिहार और गंगा के तटीय क्षेत्र में कुछ जगहों पर भारी वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। दक्षिण-पश्चिम मानसून बिहार में 14 जुलाई से कमजोर पड़ेगा।पिछले कई दिनों से उत्तर बंगाल के विस्तृत इलाके में लगातार हो रही बारिश की वजह से बीरभूम में बाढ़ के हालात बन गए हैं। जिले से होकर बहने वाली अजय नदी में पानी खतरे का निशान पार करते हुए आसपास के गांवों में घुस गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बताया गया है कि जिले के 50 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

नई दिल्ली। देश में बच्चों से दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया है। एक जनवरी से गत 30 जून तक देश में बच्चों से दुष्कर्म की कुल 24,212 घटनाएं हुईं, जिनमें एफआइआर दर्ज है। कोर्ट ने ऐसे मामलों से निपटने के लिए ढांचागत संसाधन जुटाने और अन्य उपाय करने के लिए दिशा-निर्देश तय करने का मन बनाया है। शुक्रवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने वरिष्ठ वकील वी. गिरि को न्यायमित्र नियुक्त किया। कोर्ट ने गिरि से जरूरी दिशा-निर्देश पारित करने के बारे में सुझाव मांगे हैं। मामले पर सोमवार को फिर सुनवाई होगी।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता व अनिरुद्ध बोस की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि विभिन्न अखबारों और ऑनलाइन प्रकाशन में बच्चों से दुष्कर्म की आयी घटनाओं और आंकड़ों ने उन्हें परेशान और चिंतित कर दिया है। इसके बाद कोर्ट ने सभी राज्यों और उच्च न्यायालयों से बच्चों से दुष्कर्म के मामलों के आंकड़े मंगाए। कोर्ट ने एकत्रित आंकड़ों की जानकारी दी जो कि चौकाने वाली है।पीठ ने वरिष्ठ वकील वी. गिरि को न्यायमित्र नियुक्त करते हुए कहा कि वह ऐसे मामलों से निपटने के लिए राज्यों को ढांचागत संसाधन जुटाने, कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग करने जैसे दिशा-निर्देश जारी करने पर अपने सुझाव दें। कोर्ट में मौजूद सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार भी इन मामलों के प्रति संवेदनशील है और वे कोर्ट को इस मामले की सुनवाई में पूरा सहयोग करेंगे।सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने सभी राज्यो से आए आंकड़ों को एकत्रित किया है जिससे पता चलता है कि देश भर में एक जनवरी से तीस जून के बीच बच्चों से दुष्कर्म की कुल 24,212 एफआइआर दर्ज हुईं। इसमें से 11,981 में अभी जांच चल रही है। जबकि 12,231 मामलों में पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है लेकिन इनमें से ट्रायल सिर्फ 6449 केस का ही चल रहा है। 4871 मामलों में अभी ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। ट्रायल कोर्ट ने अभी तक 911 मामलों में फैसला सुनाया है जो कि कुल संख्या का मात्र चार फीसद है।

जम्मू:-पाकिस्तानी सेना ने शुक्रवार सुबह संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए भारतीय सेना की अग्रिम चौकियों और रिहायशी इलाकों में जमकर गोलाबारी की। हालांकि गोलाबारी से कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। भारतीय सेना ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया, जिसके बाद पाक सेना की ओर से गोलाबारी बंद कर दी।सुबह करीब आठ बजे पाक सेना ने पहले सैन्य चौकियों को निशाना बनाकर गोलाबारी की। इसके बाद रिहायशी क्षेत्रों में मोर्टार दागना शुरू कर दिए। गोलाबारी से नौशहरा के बाबा खोड़ी क्षेत्र में कई मकानों के आसपास मोर्टार गिरे, जिससे मकानों को काफी नुकसान हुआ।वहीं, पुंछ जिला में तीन महीने की खामोशी के बाद पाक सेना ने मेंढर की कृष्णा घाटी, बलनोई, सागरा, दब्राज और मनकोट में भारतीय सेना की अग्रिम चौकियों और रिहायशी इलाकों में गोलाबारी की। पाकिस्तान की ओर से दागे गए मोर्टारों की गूंज कई किलोमीटर तक सुनाई दे रही थी। गोलाबारी से दब्राज गांव में मक्की के खेतों को भारी नुकसान हुआ है। उल्लेखनीय है कि पाक सेना पिछले एक सप्ताह से कभी नौशहरा तो कभी पुंछ में गोलाबारी कर रही है।
खराब मौसम की आड़ घुसपैठ का प्रयास;-सूत्रों की माने तो घुसपैठ के लिए यह सीजन सबसे सुरक्षित माना जाता है। इन दिनों मौसम खराब चल रहा है। सीमा पर घनी धुंध छाई रहती है और घास (सरकंडे) भी काफी बड़ी हो चुकी है। पाक सेना खराब मौसम की आड़ में गोलाबारी कर आतंकियों को भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करवाने की फिराक में है। इसे भारतीय सेना के जवान सफल नहीं होने दे रहे हैं।
उत्तरी कमान प्रमुख के दौरे के बाद शुरू की गोलाबारी:-उत्तरी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह गुरुवार को पुंछ दौरे पर आए थे। इस दौरान वह कृष्णा घाटी सेक्टर में भी गए थे। वहां जवानों से बातचीत कर पाक को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए कहा था। रणबीर सिंह के दौरे के एक दिन बाद ही पाक सेना ने गोलाबारी शुरू कर दी।

नई दिल्ली। भारत में स्वच्छता के स्तर को बढ़ाने और खुले में शौच से मुक्ति (ओडीएफ) के उद्देश्य से संचालित 'स्वच्छ भारत अभियान' लगभग समाप्ति की ओर है, इसलिए इसके आवंटन में कटौती की गई है। उम्मीद की जा रही है कि अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) और पेयजल आपूर्ति जैसी योजनाओं को ज्यादा बजट आवंटित किया जाएगा।स्वच्छ भारत अभियान के ज्यादातर लक्ष्य दो अक्टूबर 2018 तक हासिल किए जा चुके हैं, इसलिए मंत्रालय ने इस योजना का आवंटन घटा दिया है। मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, 'स्वच्छता के मुद्दे पर बॉलीवुड को सिनेमा बनाने के लिए प्रेरित करने वाला यह अभियान एक क्लस्टर प्रणाली के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के रूप में आगे बढ़ेगा।'इसकी शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। भारत सरकार के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दो अक्टूबर 2019 तक देश को ओडीएफ घोषित करना है। इसके लिए 1.96 लाख करोड़ रुपये की लागत से ग्रामीण क्षेत्र में नौ करोड़ शौचालयों का निर्माण का लक्ष्य तय है। अब तक 5.6 लाख गांव ओडीएफ घोषित हो चुके हैं।व्यय सचिव गिरीश चंद्र मुर्मू ने बताया, 'स्वच्छ भारत अभियान करीब-करीब समाप्त होने को है। इसमें अब केवल 10 फीसद कार्य ही बाकी हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के रूप में अब केवल आखिरी काम बाकी है। वह भी इस व्यय में निहित है, इसलिए इसके आवंटन में धीरे-धीरे कमी हो रही है।'
आवंटन में करीब 25 फीसद आई कमी:-स्वच्छ भारत अभियान के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 के आवंटन में करीब 25 फीसद तक की कमी आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अभियान को विस्तार देने के प्रस्ताव की घोषणा करते हुए कहा था कि अब इसका उद्देश्य शतप्रतिशत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन होना चाहिए। इस साल स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए आवंटित 12,644 करोड़ रुपये वर्ष 2018-19 के पुनरीक्षित प्राक्कलन से 4,334 करोड़ रुपये कम हैं।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट इसकी समीक्षा करने के लिए तैयार हो गया है कि क्या राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को किसी मामले पर स्वत:संज्ञान लेने का अधिकार है? पर्यावरण संबंधी मामलों से निपटने के लिए 2010 में एनजीटी की स्थापना की गई थी।जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि पर्यावरण क्षरण के मामलों से निपटने वाले न्यायाधिकरण को स्वत:संज्ञान लेने का अधिकार होना चाहिए। वह इस मुद्दे पर सुनवाई करना चाहेगा।अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने पीठ को बताया कि एनजीटी को किसी मामले पर स्वत:संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है।इस पर पीठ ने पूछा, 'क्या एनजीटी के स्वत:संज्ञान के अधिकार के मुद्दे का निर्धारण किया गया है?'नाडकर्णी ने बताया कि सिर्फ संवैधानिक अदालतों-सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को ही किसी मामले पर स्वत:संज्ञान लेने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एनजीटी उन्हीं मामलों पर कार्रवाई कर सकता है या फैसला सुना सकता है, जिसे उसके सामने लाया जाता है।पीठ ने इस मामले में अदालत की मदद करने के लिए वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर को न्याय मित्र नियुक्त करते हुए मामले की अगली सुनवाई की तारीख छह अगस्त निर्धारित कर दी।नाडकर्णी महाराष्ट्र में ठोस कचरा प्रबंधन से संबंधित मुद्दे पर एनजीटी द्वारा स्वत:संज्ञान लेने के मामले में पैरवी कर रहे थे। एनजीटी ने इस मामले में नगर निगम पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्होंने कहा कि बांबे हाई कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा है और एनजीटी को इस पर स्वत:संज्ञान नहीं लेना चाहिए।

औरंगाबाद। महाराष्‍ट्र (Maharashtra) के औरंगाबाद (Aurangabad) में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने ईमानदारी और मानवीय मूल्‍यों को एकबार फि‍र से जीवंत कर दिया। औरंगाबाद शहर के काशीनाथ मार्तंडराव गवली (Kashinath Gawli) उस वक्‍त हैरत में पड़ गए जब उनके सामने केन्‍या का एक सांसद खड़ा नजर आया। काशीनाथ को देखते ही उस सांसद की आंखें भर आईं। वहीं काशीनाथ का पूरा परिवार भी भावुक नजर आया।दरअसल, केन्या के सांसद और विदेश मामलों की समिति के उपाध्यक्ष रिचर्ड न्यागका टोंगी (Richard Nyagaka Tongi) 1985 से 1989 तक महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रहकर मौलाना आजाद कॉलेज (Maulana Azad College) में पढ़े। उन्‍होंने वानखेड़ेनगर नगर (Wankhedenagar) में कॉलेज के सामने ही एक कमरा किराये पर ले रखा था। वहीं किराने की एक दुकान थी, जहां से टोंगी सामान खरीदते थे। एक बार उनके पास दुकानदार की 200 रुपए की उधारी हो गई थी।बाद में टोंगी स्वदेश लौटे तो राजनीति में शामिल हो गए और न्यारीबरी चाचे निर्वाचन क्षेत्र (Nyaribari Chache constituency) से सांसद भी बने। हालांकि इस दौरान उन्‍हें 200 रुपए की उधारी न चुकाने की बात कचोटती रही। उन्‍होंने भारत आकर इस उधारी को चुकाने का फैसला लिया। टोंगी को भारत आने का मौका ही नहीं मिल रहा था। पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए केन्या का शिष्टमंडल भारत आया था। संयोगवश टोंगी भी इस शिष्‍टमंडल में शामिल थे। दिल्ली का कार्यक्रम पूरा करने के बाद वह 22 साल पुराने कर्ज को लौटाने के मकसद से पत्नी मिशेल (Michelle) के साथ औरंगाबाद पहुंचे।काफी देर तक‍ वह मकान किराना दुकानदार को ढूंढते रहे। काफी खोजबीन के बाद उनकी मुलाकात काशीनाथ से हो गई। जब गवली को टोंगी के आने की वजह का पता चला तो वह बेहद भावुक हो गए। टोंगी ने अपनी फेसबुक पोस्‍ट में लिखा कि मैंने 22 साल पहले 200 रुपए का कर्ज लिया था जिसे मैंने नहीं चुका पाया था। मैंने गवली को धन्‍यवाद दिया क्‍योंकि उन्‍होंने उस वक्‍त मेरी मदद की जब मैं संघर्ष कर रहा था। आज मुझे यह कर्ज चुकाकर सुकून मिला।

नई दिल्ली। वैज्ञानिक कई दशकों से कैंसर का सही और असरकारक इलाज विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं। अब उन्होंने इस दिशा में बड़ी सफलता मिलने का दावा किया है। उनका कहना है कि स्तन और फेफड़े के कैंसर की दवा का साथ में इस्तेमाल करने से कैंसर पर विजय पाई जा सकती है। स्तन कैंसर के इलाज के लिए पाल्बोसीक्लीब जबकि फेफड़े के कैंसर के लिए क्रिजोटिनिब नामक दवा का प्रयोग होता है। इनकी मदद से कैंसर कोशिकाओं द्वारा दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेने की समस्या दूर हो सकेगी। ये कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने और उनका विभाजन रोकने में भी सहायक हैं।दरअसल, पाल्बोसीक्लीब कैंसर को विकसित करने में सहायक सीडीके4 और सीडीके5 प्रोटीन को ब्लॉक कर देती है। लेकिन कैंसर कोशिकाएं सीडीके 2 प्रोटीन सक्रिय कर पाल्वोसीक्लीब के प्रति प्रतिरोधक क्षमता हासिल कर लेती हैं। वहीं क्रिजोटिनिब सीडीके 2 को निशाना बनाती है जिससे कैंसर कोशिकाओं की प्रतिरोधकता नष्ट होती है। लंदन स्थित कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुख्य प्रबंधक प्रोफेसर पॉल वर्कमैन ने कहा, ‘इस शोध के बाद कई तरह के कैंसर का इलाज संभव हो सकेगा।’जब फेफड़ों के किसी भाग में कोशिकाओं की अनियंत्रित व असामान्य वृद्धि होने लगती है, तो इस स्थिति को फेफड़े का कैंसर कहते हैं। फेफड़े के कैंसर का शुरुआती दौर में पता नहीं चलता और यह अंदर ही अंदर बढ़ता जाता है। वास्तव में, फेफड़े का कैंसर फेफड़े के बाहर भी बढ़ जाता है और इसके लक्षण भी अक्सर पता नहीं चलते हैं। फेफड़े का कैंसर एक गंभीर मर्ज है, लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस में हुई प्रगति के कारण अब इस कैंसर से छुटकारा संभव है...
कैंसर के प्रकार
1. स्माल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी): यह सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ने वाला फेफड़े का कैंसर है। यह कैंसर धूम्रपान के कारण होता है। एससीएलसी शरीर के विभिन्न हिस्सों में फैलता है और अक्सर जब यह ज्यादा फैल चुका होता है, तब ही इसका पता चलता है।
2.नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी): यह ऐसा कैंसर है, जिसे तीन प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है। इनके नाम ट्यूमर में मौजूद सेल्स के आधार पर होते हैं। जैसे एडिनोकार्सिनोमा, स्क्वेमस सेल कार्सिनोमा और लार्ज सेल कार्सिनोमा।
लक्षणों को जानें
-सांस फूलना
-वजन कम होना
-खांसी के साथ खून निकलना
-खांसी जो लगातार बनी रहती है
-बलगम के रंग और मात्रा में बदलाव आना
-सीने में बार-बार संक्रमण होना और सीने में लगातार दर्द का बने रहना
एक बड़ी चुनौती;-देश में फेफड़े के कैंसर की पहचान शुरुआती दौर में कर लेना एक बड़ी चुनौती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि देश में टी.बी.के मामले बहुत अधिक हैं। फेफड़े के कैंसर के अधिकांश लक्षण फेफड़े की टी.बी.से मिलते हैं। अधिकांश मामलों में जो मरीज फेफड़े के कैंसर के लक्षणों के बारे में बताता है, उसे बिना किसी परीक्षण के टी.बी. का मरीज बता दिया जाता है। इसलिए फेफड़े के कैंसर के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है और इसका पता करने के लिए उचित परीक्षण करना चाहिए।
बचाव:-फेफड़े के कैंसर से बचने के लिए किसी भी तरह के धूम्रपान से दूर रहना आवश्यक है। सुबह के वक्त टहलें और जहां तक संभव हो प्रदूषण वाले माहौल से बचें। दोपहिया वाहन सवार व्यक्ति वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्राणायाम करने से फेफड़े सशक्त होते हैं।
महिलाओं में बढ़ रहा स्‍तन कैंसर का खतरा:-बदलती जीवनशैली के कारण कम उम्र की लड़कियां भी इसका शिकार हो रहीं हैं। सबसे जरूरी है कि बीमारी की पहचान पहले चरण में हो। मेमोग्राफी की नई तकनीक स्तन कैंसर की पहचान में बेहद कारगर है। ये बातें बेंगलुरु से आर्ईं वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रूपा अंनत ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में कहीं।
ब्रेस्ट कैंसर के प्रकार:-इन्वेसिव डक्टल कार्सिनोमा- ब्रेस्ट कैंसर का ये रूप मिल्क डक्ट्स में विकसित होता है। इतना ही नहीं महिलाओं में होने वाला ब्रेस्ट कैंसर 75 फीसदी इन्वेसिव डक्टल कार्सिनोमा ही होता है। इस प्रकार का कैंसर डक्ट वॉल से होते हुए स्तन के चर्बी वाले हिस्से में फैल जाता है।
इन्फ्लेमेटरी कार्सिनोमा- ये ब्रेस्ट कैंसर बहुत ही कम देखने को मिलता है। यानी 1 फीसदी भी इस प्रकार का कैंसर नहीं होता। दरसअल इन्फ्लेमेटरी कार्सिनोमा का उपचार बहुत मुश्किल होता है। इतना ही नहीं ब्रेस्ट कैंसर का ये रूप शरीर में तेजी से फैलता है। जिससे महिलाओं की मौत का जोखिम भी बना रहता है।
पेजेट्स डिज़ीज़- इन्फ्लेमेटरी कार्सिनोमा की ही तरह पेजेट्स डिजीज भी लगभग 1 फीसदी ही महिलाओं में पाया जाता है। ये निप्पल के आसपास से शुरू होता है और इससे निप्पल के आसपास रक्त जमा हो जाता है जिससे निप्पल और उसके चारों और का हिस्सा काला पड़ने लगता है। ब्रेस्ट कैंसर का ये प्रकार भी इन्वेसिव डक्टल कार्सिनोमा की तरह निप्पल के मिल्क डक्ट्स से शुरू होता है। इस प्रकार का ब्रेस्ट कैंसर आमतौर पर उन महिलाओं को होता है जिन्हें ब्रेस्ट से संबंधित समस्याएं होने लगे। जैसे- निप्पल क्रस्टिंग, ईचिंग होना, स्तनों में दर्द या फिर कोई इंफेक्शन होना।
स्तन कैंसर के कारण
-स्तन कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 40 वर्ष की उम्र के बाद इसके होने की आशंका बढ़ जाती है
-उम्रदराज महिला की पहली डिलीवरी के कारण स्तन कैंसर की संभावना बढ़ जाती हैं
-गर्भ निरोधक गोली का सेवन और हार्मोंन की गड़बड़ी इसका अन्य कारण माना जाता हैं
-आपके परिवार में पहले से किसी को कैंसर रहा है, तो वंशानुगत कारणों से भी इस बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है
-अगर आप धूम्रपान या मादक पदार्थो का सेवन करती हैं तो भी आपमें कैंसर की आशंका बढ़ जाती है
स्तन कैंसर के लक्षण
-स्‍तन या निपल के साइज में असामान्य बदलाव
-कहीं कोई गांठ जिसमें अक्सर दर्द न रहता हो, स्‍तन कैंसर में शुरुआत में आम तौर पर गांठ में दर्द नहीं होता
-त्‍वचा में सूजन, लाली, खिंचाव या गड्ढे पड़ना
-एक स्‍तन पर खून की नलियां ज्यादा साफ दिखना
-निपल भीतर को खिंचना या उसमें से दूध के अलावा कोई भी लिक्विड निकलना
-स्‍तन में कहीं भी लगातार दर्द
स्‍तन कैंसर की जांच
-महिलाएं खुद हर महीने स्तन की जांच करें कि उसमें कोई गांठ तो नहीं है
-यदि किसी महिला को सन्दिग्ध गांठ या वृद्धि का पता चलता है तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें
-40 साल की उम्र में एक बार और फिर हर दो साल में मेमोग्राफी करवानी चाहिए ताकि शुरुआती स्टेज में ही स्‍तन कैंसर का पता लग सके
-ब्रेस्ट स्क्रीनिंग के लिए एमआरआई और अल्ट्रासोनोग्राफी भी की जाती है। इनसे पता लगता है कि कैंसर कहीं शरीर के दूसरे हिस्सों में तो नहीं फैल रहा
स्‍तन कैंसर से बचाव
-सप्‍ताह में तीन घंटे दौड़ लगाने या 13 घंटे पैदल चलने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की आशंका 23 फीसदी कम होती है
-गुटका, तंबाकू और धूम्रपान ही नहीं बल्कि शराब भी स्‍तन कैंसर के खतरे को बढ़ाती है। इसलिए नशीली चीजों के सेवन से बचें
-साबुत अनाज, फल-सब्जियां को अपने आहार में शामिल कर आप स्‍तन कैंसर के खतरे से बच सकते हैं
-शरीर पर बढ़ती चर्बी स्‍तन कैंसर का कारण बने इस्ट्रोजन हॉर्मोन का बढ़ाती है। इसलिए अपने शरीर में अतिरिक्‍त वजन को कम करें

अगर आपको जेल में कैद कर दिया जाए तो आपको शायद ही अच्छा लगे। लेकिन, क्या आप यकीन करेंगे की एक शख्स सिर्फ इस वजह से जेल गया। ताकि वह घरवालों के तानों से बच सके और उसे दिन में तीन बार खाना, रहने के लिए जगह और दोस्त मिल सके। जब पुलिस ने इस शख्स की बात सुनी तो वह भी हैरान रह गई। दरअसल, 52 साल के ज्ञानप्रकाश चोरी के आरोप में जेल गया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने एक बाइक चुराई। जब उसने बाइक चुराई तब उसने सीसीटीवी कैमरे के सामने जाकर अपना चेहरा भी दिखाया। बाइक चुराने के बाद भी वह वहां से भागा नहीं बल्कि, वहीं घूमता रहा ताकी पुलिस उसे गिरफ्तार कर ले। इस बारे में एसीपी पी असोकन ने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद घर वाले उसकी देखभाल नहीं कर रहे थे। उसे भरपेट खाना नहीं दिया जाता था। वह जेल से बाहर आकर बिल्कुल भी खुश नहीं था। ज्ञानप्रकाश ने पुलिस से कहा कि वह जेल से बाहर आकर खुश नहीं था। ज्ञानप्रकाश ने कहा कि कहा कि जेल में बंद रहने के दौरान उसने अपनी लाइफ को बहुत एंजॉय किया। वहां उसे नए दोस्त मिले। समय से नाश्ता दोपहर और रात का खाना मिलता था।उसने कहा कि घर में आकर उसे ताने सुनने पड़ते थे। जबकि जेल में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो उसको ताने सुनाए, उसे आलसी कहे या कोई अपशब्द कहे। उसे घर पर खाना नहीं मिलता था साथ ही जेल में बने अपने नए दोस्तों को बहुत याद करता था। वह उन्हें बहुत याद करता था। इसलिए उसने वापस जेल जाने के लिए बाइक चोरी की।

 

 

 

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