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नई दिल्ली - भारतीय महिलाएं आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप में शनिवार को अपने सबसे मुश्किल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैदान पर उतरेंगी। इस टूर्नामेंट में दोनों ही टीमें अभी तक अजेय रही हैं। ऐसे में यह देखना बेहद रोचक होगा कि किस टीम का अभियान रुकता है और कौन शान से जीत की लय कायम रखता है। हालांकि ग्रुप-बी से दोनों ही टीमें तीन-तीन मैच जीतकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर चुकी है।
लय कायम रखना चुनौती : भारतीय महिलाओं को अगर जीत का चौका जड़ना है तो उसे लय कायम रखनी होगी। भारत का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रिकॉर्ड खराब है। ऐसे में तीन बार की पूर्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को मात देने के लिए भारत को सभी विभागों में बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा। भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को हराती हैं तो सेमीफाइनल के लिए उनका मनोबल भी बढ़ेगा।
मिताली पर नजरें : ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुश्किल मुकाबले में भारतीय टीम की नजरें अपनी सबसे अनुभवी बल्लेबाज मिताली राज पर होगी। मिताली ने पिछले दो मैचों में पाकिस्तान और आयरलैंड के खिलाफ लगातार अर्धशतक जड़े हैं।
मध्यक्रम पर दबाव : भारतीय टीम के मध्यक्रम पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव होगा। कप्तान हरमनप्रीत कौर, जेमिमा रोड्रिगेज और वेदा कृष्णामूर्ति आयरलैंड के खिलाफ सस्ते में पवेलियन लौट गई थीं। ये बल्लेबाज बड़ी पारी खेलना चाहेंगे।.
टीमें :
भारत : हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, मिताली राज, जेमिमा रौद्रिगेज, वेदा कृष्णामूर्ति, दीप्ति शर्मा, तान्या भाटिया, पूनम यादव, राधा यादव, अनुजा पाटिल, एकता बिष्ट, डायलान हेमलता, मानसी जोशी, पूजा वस्त्रकार, अरूंधति रेड्डी।
ऑस्ट्रेलिया : मेग लानिंग (कप्तान), रशेल हैंस, निकोल बोल्टन, एशले गार्डनर, एलिसा हीली, डेलिसा किमिंस, सोफी मोलिने, बेथ मूनी, एलिसे पेरी, मेगान शट, एलिसे विलानी, टायला वी, जार्जिया वारेहम, निकोला कारे ।


नई दिल्ली - वेस्टइंडीज़ के पूर्व हरफनमौला खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो ने कहा कि 2014 में वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के साथ अनुबंध विवाद के कारण जब उनके खिलाड़ियों ने भारत में वनडे सीरीज़ नहीं खेलने की धमकी दे डाली थी तो बीसीसीआइ ने उन्हें भुगतान की पेशकश की थी।
उन्होंने कहा कि उस समय बीसीसीआइ अध्यक्ष रहे एन श्रीनिवासन ने उनकी टीम को पहला वनडे खेलने के लिए मनाया था। इसके बाद धर्मशाला में चौथे वनडे के बीच में वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने बीसीसीआइ को बताया कि खिलाड़ियों के साथ अनुबंध विवाद के कारण उन्होंने दौरे का बाकी हिस्सा रद्द करने का फैसला किया है।
ब्रावो ने कहा कि बीसीसीआइ ने उनकी समस्याओं को समझा। उन्होंने कहा, 'वे हमारी बात समझे और उनका रूख सहयोगात्मक था। उन्होंने हमें नुकसान की भरपाई की भी पेशकश की। हम नहीं चाहते थे कि बीसीसीआइ हमें भुगतान करे। हम चाहते थे कि हमारा बोर्ड इस विवाद का हल निकाले।’
उन्होंने कहा, ‘बीसीसीआइ का रूख काफी सहयोगात्मक था और यही वजह है कि बिना किसी गंभीर समस्या के हम खेल सके।’
अक्तूबर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके ब्रावो ने कहा, ‘मुझे अच्छी तरह से याद है कि हम पहला मैच भी नहीं खेलने वाले थे। सुबह तीन बजे मुझे बीसीसीआइ के तत्कालीन अध्यक्ष एन श्रीनिवासन का संदेश आया कि ‘प्लीज मैदान पर उतरियेगा।’
उन्होंने कहा, ‘मैने उनकी बात सुनी और छह बजे टीम से कहा कि हमें खेलना होगा। कोई भी खेलना नहीं चाहता था। सभी को लगा कि मैं डर गया हूं लेकिन हमने सामूहिक रूप से खेलने का फैसला लिया।’
ब्रावो ने कहा, ‘हमने चारों मैच खेले। चौथे मैच में पूरी टीम टॉस के लिए साथ उतरी थी। हम संदेश देना चाहते थे कि हमारे बोर्ड में जो कुछ हो रहा है, हम उससे खुश नहीं है।’

 


नई दिल्ली - टाटा सन्स ने कन्फर्म किया है कि उसकी दिलचस्पी निजी क्षेत्र की संकटग्रस्त विमानन कंपनी जेट एयरवेज का अधिग्रहण करने में है। हालांकि उसने कहा कि अभी तक इसके लिए कोई पुख्ता पेशकश नहीं की गई है और अभी इस संबंध में उसकी बातचीत प्रारंभिक अवस्था में ही है।
टाटा समूह जो कि पहले से ही 2 एयरलाइन कंपनियों का परिचालन कर रहा है, फुल सर्विस विस्तारा जो कि सिंगापुर एयरलाइन्स (एसआईए) के साथ एक ज्वाइंट वेंचर है और एयर एशिया इंडिया जिसमें मलयेशिया की एयर एशिया कंपनी भागीदार है। हाल ही में इस तरह की चर्चा थी कि टाटा समूह नरेश गोयल की अगुआई वाले जेट एयरवेज का सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर पूर्ण अधिग्रहण करने की योजना बना रहा है।
समूह ने शुक्रवार को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक के बाद स्पष्ट किया, "बीते कुछ दिनों इस तरह की अफवाहें तेज हो रही थीं कि टाटा की जेट एयरवेज में दिलचस्पी है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि जेट एयरवेज के अधिग्रहण से संबंध में सिर्फ शुरुआती बातचीत हुई है। लेकिन अभी किसी तरह का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।" टाटा संस की ओर से यह बयान उसके मुख्यालय में पांच घंटे चली मैराथन बैठक के बाद सामने आया है।
गौरतलब है कि जेट एयरवेज के उप-मुख्य कार्यकारी और मुख्य वित्त अधिकारी अमित अग्रवाल ने इसी सप्ताह इस बात की पुष्टि की थी कि उनकी कंपनी निवेश के इच्छुक कई पक्षों से बातचीत कर रही है।


गाजियाबाद - गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) में अपना नाम दर्ज कराना (म्यूटेशन), रजिस्ट्री और संपत्ति को फ्री होल्ड कराने के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। इनके लिए आवेदक को एक दिसंबर से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदक को कार्य होने के कागजात भी ऑनलाइन दिए जाएंगे। वहीं, फाइल के हर मूवमेंट की जानकारी एसएमएस से दी जाएगी। इसका प्राधिकरण में हर रोज 800 से ज्यादा आने वाले आवेदकों को फायदा होगा।
प्रदेश के प्राधिकरणों में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए शासन सख्त है। शासन ने सभी प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि वह नामांतरण (म्यूटेशन), पंजीकरण (रजिस्ट्री) और संपत्ति को फ्री होल्ड कराने की प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू करें। इस निर्देश के बाद जीडीए ने अपनी तैयारी करनी शुरू कर दी है। प्राधिकरण एक दिसंबर से म्यूटेशन, रजिस्ट्री और संपत्ति को फ्री होल्ड कराने की प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू कर रहा है। इसके ऑनलाइन होने से प्राधिकरण में इन कार्यों को कराने के लिए आने वाले आवेदकों को निजात मिलेगा और उन्हें बाबुओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
ऐसे कर सकेंगे आवेदन
एक दिसंबर से आवेदन जनहित डाट यूपीडीए डाट इन पर जाकर म्यूटेशन, रजिस्ट्रेशन और संपत्ति को फ्री होल्ड कराने के लिए आवेदन कर सकता है। इस वेबसाइट में दस्तावेजों के बारे में जानकारी मिल जाएगी। जीडीए की उपाध्यक्ष कंचन वर्मा का कहना है कि एक दिसंबर से म्यूटेशन, रजिस्ट्री और संपत्ति को फ्री होल्ड की प्रक्रिया शुरू होगी।
ये है नामांतरण की प्रक्रिया
जिस व्यक्ति के नाम संपत्ति है। अगर वह अपनी संपत्ति बेचता है, तो खरीदने वाला संपत्ति में अपना नाम दर्ज कराता (म्यूटेशन) है। वहीं, कई बार संपत्ति स्वामी की मृत्यु हो जाती है तो संपत्ति उनके बच्चों के नाम दर्ज की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया को ही म्यूटेशन कहा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में दो महीने तक का समय लग जाता है।
ऐसे कराते हैं रजिस्ट्री
अगर कोई व्यक्ति भूखंड या फ्लैट खरीदता है तो उस संपत्ति की रजिस्ट्री कराता है। जब तक संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं होती है, तब तक संपत्ति की स्वामित्व उस व्यक्ति को नहीं मिल पाता है।
लीज होल्ड से बेहतर है फ्री होल्ड
जीडीए में लीज होल्ड और फ्री होल्ड प्रक्रियाएं चलती है। इसका मुख्य कारण यह है कि नियम के अनुसार 90 साल के पट्टे पर संपत्ति को लीज होल्ड किया जाता है। इसके बाद जीडीए इस पर अपना दावा कर सकता है। लेकिन फ्री होल्ड संपत्ति पर दावा नहीं कर सकता।


वाशिंगटन - पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या का आदेश प्रिंस सलमान ने ही दिया था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए भी अब तक के जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचती नजर आ रही हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने पहचान उजागर न होने की शर्त पर ये जानकारी उजागर की है। हालांकि, सऊदी सरकार शुरुआत से इस दावे को नकार रही हैं।
बता दें कि पत्रकार जमाल खशोगी की बीते महीने सऊदी दूतावास में हत्या हो गई थी। खशोगी दूतावास में प्रवेश अपने विवाह से पहले कुछ क़ाग़ज़ात लेने आए थे। सबसे पहले तुर्की ने तुर्की दावा किया था कि खशोगी की वाणिज्य दूतावास में ही हत्या हो गई है।
एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया कि यह निष्कर्ष तुर्की सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई रिकॉर्डिग और अन्य साक्ष्यों पर आधारित है। अधिकारी का कहना है कि जांचकर्ताओं का यह भी मानना है कि खशोगी की हत्या जैसा ऑपरेशन बिना क्राउन प्रिंस की मंजूरी और संज्ञान के खत्म हो ही नहीं सकता। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सऊदी अरब के दूतावास की प्रवक्ता ने कहा कि ये आरोप और दावे झूठे हैं। हम लगातार इस संदर्भ में अलग-अलग थ्योरी सुन रहे हैं। सीआईए ने हालांकि अभी इस बारे में किसी तरह का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है।
वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, सीआइए का आकलन है कि प्रिंस के भाई खालिद बिन सलमान ने जमाल खशोगी को फोन कर इंस्‍ताबुल के वाणिज्यिक दूतावास जाकर दस्तावेज लेने के लिए प्रोत्साहित किया था। सूत्रों ने बताया कि खालिद ने अपने भाई (क्राउन प्रिंस) के आदेश पर यह फोन पत्रकार को किया था। हालांकि, खालिद ने ट्वीट कर इससे इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी खशोगी को फोन नहीं किया।
सीआइए ने तुर्की द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑडियो रिकॉर्डिग की भी जांच की। यह रिकॉर्डिग दूतावास के भीतर की है। इसके साथ ही खशोगी की हत्या के बाद दूतावास के भीतर से किए गए एक फोन कॉल की भी रिकॉर्डिग की जांच की गई।
प्रिंस सलमान की निंदा के लिए मिलती थीं धमकियां
सऊदी अरब के मौजूदा क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की निंदा करने वाले जमाल खशोगी को अक्‍सर धमकियां मिलती थी। इन धमकियों के कारण पिछले साल उन्‍होंने सऊदी अरब छोड़ दिया था। सऊदी अरब के अधिकारी उन्हें क्राउन प्रिंस की नीतियों की निंदा करने के चलते धमका रहे थे।
आइये जानते हैं जमाल खशोगी के गायब होने और इसके बाद क्‍या हुआ
दो अक्टूबर
बीते दो अक्टूबर को अमेरिका में रहने वाले वाशिंगटन पोस्ट के सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी दिन में करीब एक बजे तुर्की के शहर इस्तांबुल स्थित सऊदी के वाणिज्यक दूतावास के अंदर गए। उनके करीबियों के मुताबिक वे तुर्की में रहने वाली अपनी मंगेतर हैटिस केंगिज से शादी करना चाहते थे और इसी से जुड़े कुछ कागजात लेने वे सऊदी दूतावास गए थे। हैतिस के मुताबिक जमाल ने इसके लिए पहले से आवेदन किया था और एक अधिकारी द्वारा बुलाए जाने के बाद वे दूतावास गए थे।
हैटिस के मुताबिक वे जमाल खशोगी का कई घंटे तक दूतावास के बाहर इंतजार करती रहीं लेकिन वे बाहर नहीं आए। जमाल के दोनों मोबाइल भी हैटिस के पास ही थे इस वजह से वे उनसे संपर्क भी नहीं कर पा रहीं थीं। कई घंटे इंतजार करने के बाद हैतिस ने तुर्की पुलिस को फोन किया। पुलिस के मुताबिक उसने दूतावास के बाहर लगे कैमरे की फुटेज शाम को साढ़े पांच बजे देखी, जिससे साफ़ हो गया कि खशोगी दूतावास से बाहर नहीं निकले हैं।
तीन अक्टूबर
मामला बढ़ने के बाद अगले दिन सुबह सऊदी अरब सरकार ने जमाल खशोगी के लापता होने के बारे में एक बयान जारी किया। इस बयान में यह भी कहा गया कि खशोगी कागजात लेने के बाद सऊदी के दूतावास से निकल गए थे और इसके बाद ही वे लापता हुए हैं।
सऊदी अरब सरकार के इस बयान का जमाल की मंगेतर हैटिस केंगिज और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन ने खंडन किया। एर्दोआन के प्रवक्ता का कहना था कि जमाल खशोगी अभी भी सऊदी दूतावास के अंदर ही हैं। हम दूतावास के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि यह मामला जल्द ही सुलझ जाएगा।
चार अक्टूबर
चार अक्टूबर को तुर्की सरकार ने राजधानी अंकारा में सऊदी राजदूत को इस मामले पर बात करने के लिए तलब किया। इसी दिन वाशिंगटन पोस्ट की ओर से भी जमाल खशोगी के गायब होने पर चिंता व्यक्त की गई। वाशिंगटन पोस्ट के संपादकीय विभाग के प्रमुख फ्रेड हिएट ने एक बयान जारी कर कहा कि जमाल के गायब होने के बाद हमने इस मामले में अमेरिका, तुर्की और सऊदी तीनों देशों के अधिकारियों से बात की है लेकिन पत्रकार का कुछ पता नहीं लगा है।
पांच अक्टूबर
यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व के अखबारों में यह खबर प्रमुखता से छपने के बाद सऊदी सरकार पर भारी दबाव बना। इसके बाद उसने तुर्की के अधिकारियों को अपने दूतावास में तलाशी लेने की अनुमति दे दी। एक अखबार को दिए साक्षात्कार में क्राउन प्रिंस बिन सलमान का कहना था कि हालांकि, दूतावास हमारा संप्रभु क्षेत्र है. फिर भी हम तुर्की के अधिकारियों को वहां घुसने और तलाशी लेने की इजाजत दे रहे हैं क्योंकि हमारे पास कुछ भी छिपाने को नहीं है।
छह अक्टूबर
तुर्की के पुलिस अधिकारियों ने छह अक्टूबर को सऊदी दूतावास में छानबीन की। इसके बाद इसी दिन शाम को पुलिस ने एक सनसनीखेज बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि हमारे पुलिस अधिकारियों का शुरुआती जांच के आधार पर यह मानना है कि पत्रकार खशोगी की दो अक्टूबर को ही सऊदी दूतावास में हत्‍या कर दी गई। एक सरकारी अधिकारी ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि हम पूरे विश्वास के साथ कह रहे हैं कि खशोगी की हत्या पूर्वनियोजित थी। दूतावास में मारने के बाद जमाल के शव को कहीं और ठिकाने लगा दिया गया। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इस बात को मनगढ़ंत बताया।
14 अक्टूबर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में पहली प्रतिक्रिया दी। अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीबीएस न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि हमने सऊदी के प्रमुख सलमान से इस पर बात की है और उन्होंने आरोपों से इन्‍कार किया है। उनका कहना था कि अब इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी और अगर इसमें सऊदी के अधिकारियों का दोष पाया जाता है तो यह मुझे बेहद नाराज करने वाला होगा। ट्रंप के मुताबिक खशोगी की हत्या में सऊदी अरब का हाथ होने पर उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे।
15 अक्टूबर
अमेरिका की प्रतिक्रिया आने के बाद सऊदी के क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन से फोन पर बात की। इसके बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय की ओर से घोषणा की गई कि सऊदी के वाणिज्यक दूतावास का गहराई से निरीक्षण किया जाएगा और इस जांच में तुर्की और सऊदी अरब दोनों ही देशों के अधिकारी शामिल होंगे।
16 अक्टूबर
इस बारे में तुर्की के राष्ट्रपति ने देश की संसद में एक बयान दिया। इसमें उनका कहना था कि इस मामले में कई चीजों पर गौर किया जा रहा है। सऊदी वाणिज्यक दूतावास की दीवारों और फर्श पर कोई जहरीला पदार्थ भी था, जिसके ऊपर पेंट किया गया है। हमारे जांचकर्ता इस जहरीले पदार्थ का पता लगा रहे हैं। हमें आशा है कि हम जल्द किसी नतीजे पर पहुंच जाएंगे।
तुर्की के सूत्रों ने कहा कि अधिकारियों को ऑडियो रिकार्डिग मिली है जिससे यह संकेत मिलता है कि खशोगी की दूतावास में ही हत्या कर दी गई। एर्दोआन के इस बयान के बाद तुर्की के अधिकारियों ने सऊदी के वाणिज्यिक दूतावास के प्रमुख मोहम्मद अल-ओताबी के घर की तलाशी लेने का निर्णय किया। इसके कुछ घंटे बाद ही खबर आई कि ओताबी तुर्की छोड़कर चले गए हैं।
17 अक्‍टूबर
फॉक्स बिजनेस नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि वह जमाल खशोगी मामले में पोंपियो की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकार के लापता होने के मामले को लेकर पोंपियो को सऊदी और तुर्की के दौरे पर भेजा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने तुर्की से कहा है कि अगर उनके पास कोई ऑडियो या वीडियो साक्ष्य है तो उसे मुहैया कराया जाए।
19 अक्‍टूबर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि सऊदी के लापता जमाल खशोगी की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी है कि इसमें अगर सऊदी अरब का हाथ पाया जाता है तो इसके बेहद गंभीर परिणाम होंगे। ट्रंप का यह बयान सऊदी और तुर्की के दौरे से लौटे विदेश मंत्री माइक पोंपियो द्वारा जांच की जानकारी मुहैया कराए जाने के बाद आया है।
20 अक्‍टूबर
सऊदी अरब ने स्वीकार कर लिया कि जमाल खशोगी की इस्तांबुल स्थित वाणिज्य दूतावास में हुए संघर्ष के दौरान मौत हो चुकी है। 'वाशिंगटन पोस्ट' के स्तंभकार खशोगी दो अक्टूबर को सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में गए थे, लेकिन उन्हें बाहर आते किसी ने नहीं देखा। सऊदी अरब उनकी गुमशुदगी में अपना हाथ होने से लगातार इन्कार कर रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के बयान पर भरोसा जताते हुए इसे पहला अच्छा और बड़ा कदम करार दिया है। सऊदी अरब के लोक अभियोजक ने बताया कि वाणिज्य दूतावास में खशोगी जिन लोगों से मिलने गए थे, उनसे उनकी लड़ाई हो गई थी जिसमें वह मारे गए। इस सिलसिले में 18 सऊदी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है।
22 अक्‍टूबर
जमाल खशोगी के शव के टुकड़े इस्तांबुल स्थित सऊदी राजदूत के घर के बगीचे से बरामद हुए हैं। राजदूत का ये आवास सउदी काउंसलेट से कुछ ही दूर स्थित है। अमेरिकी अखबार की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कि सऊदी अरब के हत्यारे एजेंटों ने भ्रम की स्थिति पैदा करने के लिए खशोगी के एक बॉडी डबल का भी इंतज़ाम किया था और उसे खशोगी के कपड़े पहना दिए गए थे।
26 अक्‍टूबर
सऊदी पत्रकार खशोगी की मंगेतर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का व्हाइट हाउस आने का न्योता अस्वीकर कर दिया है। उन्होंने ट्रंप पर जमाल हत्याकांड की जांच में ईमानदार नहीं होने का आरोप लगाया है। हैटिस केंगिज ने तुर्की टीवी को बताया कि उन्होंने सोचा था कि निमंत्रण का उद्देश्य अमेरिका में जनता की राय को प्रभावित करना था।
31 अक्‍टूबर
तुर्की के मुख्य अभियोजक ने पहली बार जमाल खशोगी की हत्‍या का ब्योरा सार्वजनिक किया है। मुख्य अभियोजक ने कहा कि पत्रकार ने जैसे ही इस्तांबुल में स्थित वाणिज्य दूतावास में कदम रखा वैसे ही गला दबाकर उनकी हत्या कर दी गई और उसके बाद उनके शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। यह सब-कुछ पूर्व नियोजित तरीके से किया गया।
एक नवंबर
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मारे गए पत्रकार जमाल खशोगी को खतरनाक इस्लामी बताया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुश्नेर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन के साथ फोन पर बातचीत में क्राउन प्रिंस ने यह कहा था। रियाद द्वारा सार्वजनिक रूप से खशोगी की हत्या की बात स्वीकार करने से पहले ही क्राउन प्रिंस ने फोन किया था।
चार नवंबर
तुर्की के एक अधिकारी ने दावा किया कि सऊदी ने इस्तांबुल में वाणिज्य दूतावास में जमाल खशोगी की हत्या के बाद सबूतों को छिपाने के के लिए दो विशेषज्ञों को भी भेजा था। यह काम तुर्की पुलिस को परिसर की तलाशी लेने की अनुमति देने से पहले उठाया गया था। अभी तक उनका शव तुर्की को नहीं मिला है। दावा है कि उनके शव को तेजाब में गला दिया गया। समाचारपत्र सबा में छपी रिपोर्ट के अनुसार सऊदी से हत्या की जांच के लिए पिछले महीने भेजी गई टीम में रसायन विशेषज्ञ अहमद अब्दुलअजीज अल-जानोबी और विष विज्ञान विशेषज्ञ खालेद याहया अल-जहरानी भी शामिल थे।
10 नवंबर
जमाल खशोगी के शव को हत्यारों ने तेजाब में गलाने के बाद नाले में बहा दिया था। तुर्की सरकार समर्थक दैनिक सबाह ने सूत्र का हवाला दिए बगैर लिखा है कि इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास के नाले से लिए गए नमूने में तेजाब के अंश मिले हैं। इससे जांचकर्ताओं का मानना है कि पत्रकार के शव को तरल पदार्थ बनाने के बाद नाले से निपटाया गया।
14 नवंबर
सऊदी अरब के अभियोजक ने कहा था कि खशोगी की हत्या में दोषी पांच अधिकारियों को मौत की सजा हो सकती है, लेकिन इस हत्या में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की भागीदारी के सबूत नहीं हैं।
15 नवंबर
तुर्की के हुर्रियत अखबार के स्तंभकार अब्दुल कादिर सेल्वी ने दावा किया है कि जमाल खशोगी की हत्या के मामले में तुर्की के पास दो ऑडियो हैं। सात मिनट के पहले ऑडियो से साबित होता है कि खशोगी की गला घोंटकर हत्या की गई थी। जबकि, 15 मिनट के दूसरे ऑडियो से स्पष्ट होता है कि खशोगी की हत्या सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी।
17 नवंबर
जमाल खशोगी की हत्या का आदेश सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ही दिया था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए भी अब तक के जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचती नजर आ रही हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने पहचान उजागर न होने की शर्त पर ये जानकारी उजागर की है। हालांकि, सउदी सरकार शुरुआत से इस दावे को नकार रही हैं।

 


अर्जेंटीना - अर्जेंटीना की एक साल पहले लापता पनडुब्बी एआरए सैन जुआन को खोज लिया गया है। यह अटलांटिक सागर में 800 मीटर की गहराई में मिली। जुआन पनडुब्बी पिछले साल 15 नवंबर को लापता हो गई थी। इसमें चालक दल के 44 सदस्य सवार थे।
नौसेना ने शनिवार को कहा, निजी कंपनी ऑसियन इंफिनिटी ने अर्जेंटीना के वलदेस प्रायद्वीप के समीप गहरे समुद्र में जुआन को खोजा निकाला। खोज अभियान की जिम्मेदारी अर्जेंटीना सरकार ने अमेरिकी कंपनी को दी थी। खोज से दो दिन पहले गुरुवार को लापता नौसैनिकों के परिवार जनों ने उनकी याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था।
राष्ट्रपति मॉरिसिओ माकरी ने दुख जताते हुए पनडुब्बी चालकों के परिवारों से कहा,'आप लोग खुद को अकेला ना समझें। हम इस हादसे की तह तक पहुंचेंगे।' उल्लेखनीय है पनडुब्बी से अंतिम संपर्क अर्जेंटीना के पतागोनिया तट से 430 किलोमीटर दूर हुआ था। इसके बाद पनडुब्बी लापता हो गई थी। लापता पनडुब्बी की खोज में 18 देशों की मदद ली गई थी लेकिन उम्मीद खो चुके अर्जेंटीना ने फिर भी खोज अभियान जारी रखा।

 


वॉशिगंटन - फ्रांस से राफेल और रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील के बाद अब भारत अमेरिका से रक्षा सौदा करने की तैयारी में है। भारत अमेरिका से 24 'रोमियो' MH-60 हेलीकॉप्टर खरीदना चाहता है। रूस और भारत के बीच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम डील को लेकर अमेरिका की नाराजगी के बाद भारत के इस कदम का काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस डील के जरिए भारत दोनों देशों के आपसी संबंधों में संतुलन साधने की तैयारी में है। इसके साथ ही, हिंद महासागर में चीन के आक्रामक रुख को देखते हुए यह डील भारतीय नौसेना को भी मजबूती देगी।
S-400 पर रार के बाद MH-60 पर भारत की नजर
दरअसल, अमेरिका रूस और भारत के बीच हुए एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम पर हुई डील के सख्त खिलाफ था। इसको लेकर अमेरिका ने कई मौकों पर भारत को चेताया भी था। अमेरिका ने धमकी दी थी कि अगर भारत ने रूस से यह डील की, तो परिणामस्वरूप वह अमेरिकी दंडात्मक प्रतिबंधों के लिए तैयार रहे। इसके बावजूद भारत रूस के साथ इस करार से पीछे नहीं हटा। हालांकि बाद में अमेरिका की तल्खी में भी नरमी आई और अमेरिका रूस के साथ हुए इस करार पर भारत को विशेष छूट देने को राजी हो गया। इतना सबकुछ होने के बाद अब भारत ने ट्रंप प्रशासन के सामने 24 'रोमियो' MH-60 हेलिकॉप्टर खरीदने की इच्छा जताई है।
13,500 करोड़ रुपये का 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट'
जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ने इन लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को खरीदने के लिए अमेरिकी प्रशासन को 13,500 करोड़ रुपये का 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' भी भेजा है। खास बात है कि यह हेलीकॉप्टर टोरपीडो जैसे हथियार और ऐंटी-सबमरीन मिसाइल के रखरखान के जरूरी अन्य उपकरणों से लैस है। ऐसा माना जा रहा है कि यह सौदा भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाएगा। ऐसे में भारत यह डील जल्द से जल्द करने का इच्छुक है।
समुद्र में चीन को रोकेगा भारत!
कहा जा रहा है कि भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े को और ताकत देने के लिहाज से भारत सरकार इस डील को 2020-24 तक पूरा करने में मूड में है। यह फैसला ऐसे वक्त में लिया जा रहा है जब चीनी परमाणु और डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन भारतीय समुद्री सीमा में बार-बार घुसने की हिमाकत करते देखे गए हैं। भारत के लिए यह डील इसलिए भी अहम है, क्योंकि श्रीलंका, मालदीव जैसे पड़ोसी देशों के सहारे चीन हिंद महासागर में लगातार दखल देने की कोशिश कर रहा है। भारत सरकार की तेजी को देखकर माना जा रहा है कि यह डील इस साल अंत तक हो सकती है।
डील से जुड़े जरूरी प्वाइंट्स
-एमएच-60 हेलीकॉप्टर की यह डील सरकार से सरकार के बीच होगी।
-MH-60 हेलिकॉप्टर की निर्माता कंपनी शिकोर्स्की-लोकहीड मार्टिन है।
-यह अमेरिका की विदेश मिलिटरी सेल्स प्रोग्राम का हिस्सा है।
-2007 से भारत ने अमेरिका से होने वाले सैन्य रक्षा सौदे को 17 बिलियन डॉलर तक बढ़ा दिया है।
-बीते 3-4 सालों में अमेरिका अब भारत को रूस से ज्यादा सैन्य उपकरणों की आपूर्ति करा रहा है।


न्यूयॉर्क - अमेरिका के न्यूयॉर्क में सीजन की पहली बर्फबारी लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। भारी बर्फबारी के कारण यातायात बाधित हो रखा है। जिस कारण सड़कें ब्लॉक हो गईं हैं और कई उड़ानों को भी रद करना पड़ा है। गुरुवार दोपहर शुरू हुई बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जहां, ब्रोंक्स में पांच इंच तक बर्फ जम गई है।
बताया जा रहा है कि खराब मौसम के कारण न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेएफके) पर उड़ानों का परिचालन बाधित हो रखा है, जिसके चलते तीन घंटे देरी से उड़ानें भरी। वहीं, सड़कों पर जमी बर्फ को हटाने का काम चल रहा है। बर्फ को साफ करने के लिए नमक का छिड़काव किया जा रहा है।
इस बीच 1,100 से अधिक निर्धारित बसों को भी रद करना पड़ा है। बस सेवाओं को रद करने के बाद देश के सबसे व्यस्त बस स्टेशन मैनहट्टन के पोर्ट अथॉरिटी बस टर्मिनल के बाहर हजारों यात्री फंसे हुए हैं। वहीं, दुनिया के व्यस्ततम पुलों में से एक जॉर्ज वाशिंगटन ब्रिज पर बर्फीले तूफान के कारण 20 गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त हो गई, ड्राइवर अपनी गाड़ियों को वहीं छोड़कर चले गए। ऐसे में ब्रिज पर भी आवाजाही रुक गई है।
न्यूजर्सी में भी भारी बर्फबारी के कारण बसों का सड़कों से गुजरना मुश्किल हो गया। इस कारण बच्चों को स्कूल में ही रात बितानी पड़ी। इस बीच सड़कों, राजमार्गों और रेलवे ट्रैक्स पर जमी बर्फ को हटाने का काम चल रहा है।


इस्‍लामाबाद - पाकिस्‍तान के कराची और इस्लामाबाद में लापता बलूच लोगों के परिवारों और उनके लिए इंसाफ की मांग करते हुए क्‍वेटा में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि बलूच और पश्तून एक्टिविस्ट जिन्हें कथित तौर पर पाकिस्‍तानी सेना और आइएसआइ द्वारा किडनैप किया गया है, उन्हें रिहा किया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्‍हें सेना ने हिरासत में लिया था। ये लोग लापता हो गए। ऐसे में शक की सुई सीधे-सीधे सेना पर जाती है। सेना के डर से कई बलूच नेताओं को देश भी छोड़ना पड़ा है। हालांकि पाकिस्‍तान हमेशा से कहता रहा है कि बलूचिस्‍तान में लोगों के साथ कुछ भी गलत नहीं हो रहा है।
बता दें कि बलूचिस्‍तान में लोगों पर अत्‍याचार की खबरें नई नहीं हैं। बलूचिस्‍तान की आजादी के लिए लोग संयुक्‍त राष्‍ट्र मुख्यालय के सामने तक प्रदर्शन कर चुके हैं। बलूच लोगों की मांग है कि उन्‍हें अंतरराष्‍ट्रीय नियमों के अनुसार पाकिस्‍तान से आजादी दिलाई जाए।

 


माले - मालदीव में शनिवार को नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह माले के बदलते हालात का सबसे सटीक उदाहरण बनने जा रहा है। चीन के कर्ज में डूबा यह देश मदद के लिए भारत के साथ-साथ अमेरिका की तरफ भी देख रहा है। यही वजह है कि नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के पदभार ग्रहण के दौरान मौजूद रहने वाले पीएम मोदी मालदीव के लिए सर्वोच्च रैंकिंग वाले अतिथि होंगे। चीन की बात करें तो वहां के सांस्कृतिक एवं पर्यटन मंत्री इसमें शिरकत करेंगे। उधर, मोदी ने अपनी मालदीव यात्रा को लेकर गर्मजोशी दिखाई है। इस संबंध में उन्होंने ट्वीट करके मालदीव के साथ बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और मानव संसाधन के क्षेत्रों में मिलकर काम करने की बात कही है।
2014 में सत्ता संभालने के बाद पहली बार मालदीव जा रहे मोदी की शपथ ग्रहण में मौजूदगी इसका संकेत है कि पिछले वर्षो में दोनों देशों के बीच गड़बड़ हुए संबंध अब सुधार की ओर हैं। पिछले सालों के दौरान चीन की तरफ मालदीव का झुकाव भारत की कुछ प्रमुख चिंता में से एक रहा है। श्रीलंका में चल रहे राजनीतिक गतिरोध को लेकर भी नई दिल्ली और बीजिंग में संबंध तनावपूर्ण बने रहते हैं।
अब मालदीव की नीति 'इंडिया फ‌र्स्ट'
चीन समर्थक नेता अब्दुल्ला यामीन को हराने के बाद सोलिह ने इंडिया फ‌र्स्ट पॉलिसी की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि 4 लाख से अधिक की आबादी वाले इस मुल्क को अपने तात्कालिक पड़ोसियों के साथ प्रगाढ़ संबंधों की जरूरत है।
उन्होंने कहा है कि 4 लाख से अधिक की आबादी वाले इस मुल्क को अपने तात्कालिक पड़ोसियों के साथ प्रगाढ़ संबंधों की जरूरत है। सोलिह की ट्रांजिशन टीम के एक सदस्य अदम अजीम ने बताया कि चीन के लाखों डॉलर के निवेश की समीक्षा करने के साथ ही चीन के कर्जे के पुनर्गठन पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने इस मामले की जांच करने के साथ लोगों की जिम्मेदारी तय करने की भी बात कही।
जीडीपी के चौथाई हिस्से से अधिक है चीन का कर्ज
सोलिह की टीम के एक अन्य सदस्य ने कहा कि पहले हमें लगता था कि चीन का कर्जा करीब 1.5 अरब डॉलर होगा, लेकिन यह कर्ज मालदीव की जीडीपी के चौथाई हिस्से से भी अधिक है। उनकी टीम भारत, अमेरिका और सऊदी अरब से वित्तीय मदद के लिए संपर्क कर चुकी है ताकि इस कर्ज से निपटा जा सके।
भारत ने हरसंभव मदद के लिए किया आश्वस्त
भारत ने सोलिह की टीम को आश्वस्त किया है कि वह किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार है। भारत ने कुछ साल पहले मालदीव को 75 मिलियन डॉलर (पांच अरब रुपये से अधिक) की क्रेडिट लिमिट दी थी। रिश्ते खराब होने तक इसका केवल एक तिहाई ही इस्तेमाल हो पाया था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और मालदीव मॉनिटरी अथॉरिटी केबीच मुद्रा बदलने को लेकर भी एक समझौता है, जो वित्तीय स्थिरता में मदद कर सकती है।

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